लेदर थ्रेड से मिलेट्स बिस्किट तक… 20 देशों में पहुंचे कानपुर की महिला कारोबारियों के उत्पाद, खड़ा किया करोड़ों का बिजनेस!

Kanpur Women Entrepreneurs Success Story: जब भी हमारे जुबान पर इंडस्ट्री का नाम आता है तो इसको हम पुरुष प्रधान क्षेत्र समझते हैं वही कानपुर को लंबे समय से देश के बड़े औद्योगिक शहरों में गिना जाता है। यहां कारखानों और कारोबार की बात होती थी तो ज्यादातर पुरुष कारोबारी ही सामने आते थे। अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। शहर की महिलाएं भी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

जिन महिलाओं को पहले हम घर संभालते हुए देखे थे अब वह बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां और इंडस्ट्रीज या संभाल रही है ,बीते पांच साल में कानपुर में महिला कारोबारियों और उद्यमियों की संख्या में करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि महिलाएं अब सिर्फ छोटे कारोबार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद औद्योगिक इकाइयां चला रही हैं और दूसरे लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।

लेदर, कपड़ा, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। कई महिला उद्यमियों के उत्पाद देश के अलग-अलग शहरों में पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ का माल विदेशों तक भी सप्लाई हो रहा है। यानी कानपुर की आधी आबादी अब कारोबार में सिर्फ हिस्सेदारी नहीं बढ़ा रही, बल्कि खुद कारोबार की कमान संभाल रही है।

केस 1: नौकरी छोड़ी, ट्रेडिंग से शुरू किया सफर, अब 20 देशों तक पहुंचा कारोबार

फजलगंज इंडस्ट्रियल एरिया में लेदर उद्योग से जुड़ी प्रेरणा वर्मा की कहानी इसकी बड़ी मिसाल है। प्रेरणा पहले एक प्राइवेट नौकरी करती थीं। नौकरी में मन नहीं लगा तो खुद का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने लेदर उत्पादों की ट्रेडिंग की। कारोबार बढ़ा तो अपनी फैक्ट्री लगाने का सपना देखा और उसे भी पूरा कर लिया।

केस 1: नौकरी छोड़ी, ट्रेडिंग से शुरू किया सफर, अब 20 देशों तक पहुंचा कारोबार

आज उनकी फैक्ट्री में लेदर थ्रेड, बैग और कस्टमाइज लेदर आइटम तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग देश के साथ विदेशों में भी है। उनके उत्पाद करीब 20 देशों तक पहुंच रहे हैं। फैक्ट्री में 100 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या महिलाओं की है।

केस 1: नौकरी छोड़ी, ट्रेडिंग से शुरू किया सफर, अब 20 देशों तक पहुंचा कारोबार

केस 2: मोटे अनाज से बनाए बिस्किट और नमकीन, विदेश तक पहुंचा कारोबार

बर्रा-2 निवासी संगीता सिंह ने वर्ष 2023 में अपना कारोबार शुरू किया। उन्होंने मोटे अनाज से अलग तरह के बिस्किट और नमकीन तैयार किए। शुरुआत में कारोबार छोटा था, लेकिन लोगों को उत्पाद पसंद आए तो धीरे-धीरे इसकी मांग बढ़ने लगी। पहले उत्पाद देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंचे और इसके बाद विदेशों में भी इनकी मांग बनने लगी।

केस 2: मोटे अनाज से बनाए बिस्किट और नमकीन, विदेश तक पहुंचा कारोबार

आज संगीता का कारोबार करोड़ों रुपये सालाना तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी बताती है कि सही उत्पाद और मेहनत के दम पर महिलाएं भी बड़े कारोबार खड़े कर सकती हैं।

उद्योग से रोजगार तक, महिलाओं की बढ़ रही भागीदारी

कानपुर में महिला उद्यमिता का बढ़ता दायरा सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है। इन उद्योगों के जरिए महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। कई महिला कारोबारी अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी काम से जोड़ रही हैं। इससे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का रास्ता खुल रहा है।

कभी जिन महिलाओं को उद्योग की दुनिया से दूर माना जाता था, वही अब मशीनों के बीच खड़े होकर प्रोडक्शन की कमान संभाल रही हैं। लेदर से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाएं कारोबार को नई दिशा दे रही हैं। इनके उत्पाद अब कानपुर और देश के बाजार से निकलकर विदेशों तक पहुंच रहे हैं।

महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए IIA में बनी महिला विंग

कानपुर में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन यानी IIA में महिला विंग भी बनाई गई है। इसका मकसद शहर की महिला उद्यमियों को एक मंच देना, उन्हें उद्योग से जुड़ी जानकारी और नए अवसरों से जोड़ना और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करना है। महिला उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग बढ़ाने के साथ उन्हें बाजार, तकनीक और कारोबार से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

कानपुर की औद्योगिक तस्वीर में अब आधी आबादी की यह बढ़ती हिस्सेदारी साफ दिखाई दे रही है। महिलाएं खुद उद्योग चला रही हैं, लोगों को रोजगार दे रही हैं और अपने उत्पादों को देश ही नहीं, विदेशों के बाजार तक पहुंचा रही हैं। ऐसे में शहर की इंडस्ट्रियल पहचान में महिलाओं की यह बढ़ती भूमिका आने वाले समय में और बड़ी दिखाई दे सकती है।

पिछले पांच सालों में महिला उद्यमियों से जुड़े ये है प्रमुख आंकड़े

कुल उद्यम पंजीकरण हुए: 41008

कुल मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट लगीं: 12711

कुल इंप्लॉयमेंट जेनरेट हुआ: 75622

कुल सर्विस यूनिट लगीं: 12234

कुल रोजगार मिला: 77071

कुल ट्रेडिंग संबंधी यूनिट लगीं: 16063

कुल रोजगार मिला: 74292

कुल निवेश कानपुर को मिला: 91961.66 लाख रुपये

रिपोर्ट- अखंड प्रताप सिंह

DDU-GKY Success: सीवान के चंदन को सीधे मिली दुबई की नौकरी! इस ग्रामीण कौशल योजना ने बदली 12.35 लाख युवाओं की किस्मत

DDU-GKY Success: गांवों में आज भी कई परिवारों की कमाई खेती और फसल पर निर्भर करती है। लेकिन अगर फसल अच्छी न हो या खेती से कमाई कम हो जाए, तो परिवार के सामने आमदनी का दूसरा जरिया तलाशने की चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे में किसी युवा के पास कोई काम की स्किल होना उसके लिए कमाई के नए रास्ते खोल सकता है। इसी सोच के साथ सरकार की दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ग्रामीण युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ने का काम करती है।

बता दें कि इस योजना की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत की गई थी। यह योजना ग्रामीण इलाकों के गरीब और कमजोर परिवारों के युवाओं पर ध्यान देती है। इस योजना के तहत युवाओं को ऐसी स्किल की ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे उन्हें नौकरी पाने और लंबे समय तक रोजगार से जुड़े रहने में मदद मिल सके। इसमें 15 से 35 साल की उम्र के युवाओं को ट्रेनिंग दी जाती है और उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाता है।

वहीं, बदलते समय और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए DDU-GKY में भी बदलाव किए गए हैं। अब योजना के नए DDU-GKY 2.0 फ्रेमवर्क में ऐसी ट्रेनिंग पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, जिसकी जरूरत कंपनियों और इंडस्ट्री को है। इसका मकसद युवाओं को सिर्फ ट्रेनिंग देना नहीं, बल्कि उन्हें टिकाऊ रोजगार से जोड़ना है।

इसके तहत नौकरी मिलने के बाद भी युवाओं को मदद देने, नई स्किल सीखने और पहले से सीखी स्किल को बेहतर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। ट्रेनिंग, असेसमेंट, सर्टिफिकेट, निगरानी और रोजगार की जानकारी रखने की पूरी प्रक्रिया को भी डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है।

मकसद साफ है: ट्रेनिंग से नौकरी मिलनी चाहिए, और नौकरी लंबे समय तक चलनी चाहिए। जून 2026 तक, DDU-GKY के तहत 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग दी गई है, जबकि 12.35 लाख लोगों को नौकरी मिली है।

इन आंकड़ों के पीछे उन लोगों की कहानियां भी हैं, जिनकी जिंदगी तब बदल गई जब सीखने-सिखाने की प्रक्रिया ने उनके लिए नौकरी और रोजी-रोटी के रास्ते खोल दिए।

सपने को जिंदा रखना

नागालैंड की विमेथानो सखरी ने सालों तक अपनी मां को दस लोगों के परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात मेहनत करते देखा। हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, विमेथानो आगे की पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन पैसों की तंगी के कारण उनका यह सपना पूरा करना मुश्किल हो रहा था।

जब उन्हें DDU-GKY के बारे में पता चला, तो सब कुछ बदल गया। अपने सपनों को छोड़ने से इनकार करते हुए, उन्होंने DDU-GKY के टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी ट्रेनिंग प्रोग्राम में दाखिला लिया। कुछ महीनों बाद, विमेथानो ने ‘द डेन बेंगलुरु’ में फूड एंड बेवरेज सर्विस में अपनी पहली नौकरी शुरू की। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं थी। यह उनके और उनके परिवार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत थी।

अपनी यात्रा को याद करते हुए विमेथानो कहती हैं, “मैं ग्रामीण विकास मंत्रालय और नागालैंड सरकार के NSRLM का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने DDU-GKY को लागू किया, जिससे पूरे भारत में कई बेरोजगार युवाओं को मदद मिली है। यह मौका मेरे लिए एक वरदान था, और मुझे उम्मीद है कि और भी कई युवा इससे फायदा उठा सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसे मैंने उठाया।”

विमेथानो के लिए, DDU-GKY ने बीच में छूटी हुई पढ़ाई को करियर के लिए एक लॉन्चपैड में बदल दिया।

लेकिन हर युवा की कहानी एक जैसी नहीं होती। चंदन शाह के लिए यह मौका उन्हें अपने घर से बहुत दूर ले गया।

छोटे-मोटे कामों से विदेश में करियर तक का सफर

एक समय ऐसा था जब चंदन शाह के परिवार के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था। बिहार के सिवान जिले के तेतहली गांव में रहने के कारण, उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने की बहुत कम उम्मीद थी। हाई स्कूल के बाद उन्होंने खेतों में अपने पिता की मदद करने के लिए स्कूल छोड़ दिया। आस-पास ज्यादा मौके न होने की वजह से, चंदन ने गुजारा करने के लिए छोटे-मोटे काम शुरू किए। फिर भी, उस काम से इतनी कमाई नहीं हो पाती थी कि एक अच्छा जीवन जी सकें।

उनकी मां, जो ‘गेंदा जीविका स्वयं सहायता समूह’ (Genda JEEViKA Self Help Group) की सदस्य थीं, की वजह से उनके लिए एक नया मौका सामने आया। उन्होंने चंदन को DDU-GKY के बारे में जानने और उसे आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया। चंदन ने काउंसलिंग करवाई और असिस्टेंट इलेक्ट्रीशियन के तौर पर ट्रेनिंग लेने का फैसला किया। इस ट्रेनिंग ने उन्हें करियर की ओर पहला कदम बढ़ाने के लिए जरूरी हुनर ​​सिखाए। कोर्स पूरा करने के बाद, उन्हें बद्दी में एक डिस्टिलरी में हेल्पर की पहली नौकरी मिली, जहां वे हर महीने ₹10,500 कमाते थे। इस शुरुआती अनुभव ने उन्हें आगे पेशेवर तरक्की के लिए एक मजबूत आधार दिया। इन्हीं हुनर ​​और अनुभव के दम पर, चंदन ने बाद में विदेश में काम करने का मौका तलाशा और दुबई चले गए, जहां वे ‘अल शफा जनरल कॉन्ट्रैक्टिंग’ (Al Shafa General Contracting) में इलेक्ट्रीशियन के तौर पर शामिल हुए।

तब तक, उनकी महीने की कमाई बढ़कर ₹35,000 हो गई थी। इसका असर सिर्फ उनके करियर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उनके परिवार को भी बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिली। चंदन अपने परिवार का खर्च उठाने और अपने भाई-बहनों की प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम हो गए। उनके इस सफर ने उन्हें गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना दिया।

चंदन की कहानी दिखाती है कि कैसे नौकरी का पहला मौका लगातार तरक्की करने वाले करियर की नींव बन सकता है। DDU-GKY ने उन्हें वह पहला कदम उठाने के लिए जरूरी हुनर ​​सिखाया, जबकि उनके पक्के इरादे और अनुभव ने उन्हें आगे के मौकों को पाने में मदद की। इन सबके मेल से उन्हें अपने और अपने परिवार के लिए एक ज्यादा सुरक्षित भविष्य बनाने में मदद मिली।

हालांकि, DDU-GKY से जुड़ी हर कहानी घर से दूर जाने की नहीं है। कुछ युवाओं के लिए यह योजना उन्हें बेहतर अवसरों की तलाश में बाहर ले जाती है, तो कुछ के लिए यही मौका उन्हें अपने घर और गांव वापस लौटने का रास्ता देता है। ऐसी ही कहानी है रूपाली हांसदा की।

नौकरी को एक बिनेस में बदलना

आर्थिक तंगी के कारण असम के चराइदेव की रहने वाली रूपाली हासदा को 9वीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा। उनका परिवार खेती पर निर्भर था और उनके पिता ही घर में कमाने वाले अकेले व्यक्ति थे। उनकी मां, जो एक स्वयं-सहायता समूह (Self-Help Group) की सक्रिय सदस्य थीं, ने उनके सपनों को हमेशा बढ़ावा दिया। रूपाली को एक ‘जीविका सखी’ के जरिए DDU-GKY के बारे में पता चला और दिसंबर 2022 में उन्होंने ‘सिलाई मशीन ऑपरेटर’ ट्रेड में दाखिला लिया।

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, उन्हें तमिलनाडु के तिरुपुर में KPR अपैरल मिल्स में नौकरी मिल गई। 5 महीने तक उन्होंने एक अनजान शहर में काम किया और नए माहौल में खुद को ढाला। फिर भी, उनका मन घर पर ही लगा रहता था। नौकरी से हुई बचत के साथ वह हाथीबंधा लौट आईं और सिलाई और कटाई केंद्र (Sewing and Cutting Centre) में 50,000 रुपये का निवेश किया। जो काम शुरू में सिर्फ उनकी अपनी आजीविका का जरिया था, उसने जल्द ही किसी और के लिए भी रोजगार का मौका बना दिया। उन्होंने केंद्र में एक युवा लड़की को काम पर रखा और अपने समुदाय में एक बिजनेस खड़ा करना शुरू किया। सालाना लगभग 1.10 लाख रुपये की कमाई के साथ, रूपाली का सफर स्किलिंग (कौशल विकास) का एक अलग पहलू दिखाता है। नौकरी ने उन्हें एक शुरुआत दी, लेकिन उन्होंने उस अनुभव को अपने खुद के काम में बदलने का फैसला किया।

रूपाली ने घर के पास ही अपनी आजीविका बनाने का फैसला किया। वहीं, हीरालाल ने एक अलग रास्ता चुना—ऐसा रास्ता जो उन्हें अपने सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करते हुए करियर बनाने में मदद करे।

अपना खुद का करियर

झारखंड के हीरालाल पंडित ने बचपन से ही देखा था कि कैसे हर फसल यह तय करती थी कि उनके परिवार का गुजारा कितने समय तक चलेगा। चार लोगों का उनका परिवार उनके पिता की मौसमी खेती पर निर्भर था, जिससे महीने में लगभग 5,000 रुपये की कमाई होती थी।

10वीं कक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने हर संभव तरीके से अपने पिता की मदद करना शुरू किया। दिव्यांग होने के कारण उनके लिए नौकरी पाना आसान नहीं था, लेकिन हीरालाल ने अपनी परिस्थितियों को अपने भविष्य पर हावी नहीं होने दिया।

वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में योगदान देते हुए अपना खुद का करियर बनाना चाहते थे। विकल्पों की तलाश करते समय, हीरालाल को DDU-GKY के बारे में पता चला। इस प्रोग्राम की मुफ्त ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सहायता ने उन्हें हुनर ​​सीखने और नौकरी पाने का मौका दिया। उन्होंने झारखंड के दुमका में एक ट्रेनिंग सेंटर में ‘हेल्थकेयर मल्टीपर्पज’ ट्रेड में दाखिला लिया।

यह ट्रेनिंग हीरालाल के सफर का एक अहम मोड़ साबित हुई। उन्हें एक ऐसे माहौल में नई स्किल्स सीखने को मिलीं जहां उनके साथ सम्मान और बराबरी का व्यवहार किया गया। कोर्स पूरा करने के बाद, उन्हें नासिक के SMBT हॉस्पिटल में ‘जनरल ड्यूटी असिस्टेंट’ के तौर पर नौकरी मिल गई। इस मौके ने उन्हें अपने परिवार की भलाई में योगदान देने के साथ-साथ खुद भी पैसे कमाने में मदद की। सबसे बड़ी बात यह है कि इस अनुभव ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें अपनी काबिलियत के बारे में नई सोच दी।

आज, हीरालाल दूसरे युवाओं को भी अपनी मुश्किल हालात से आगे देखने और मिले हुए मौकों का पूरा फायदा उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके लिए, यह सफर पहला कदम उठाने की हिम्मत से शुरू हुआ था। DDU-GKY ने उन्हें उस पहले कदम को एक करियर और ज्यादा सुरक्षित भविष्य की राह में बदलने में मदद की।

जब कोई हुनर ​​आजीविका का जरिया बन जाए

कोई हुनर ​​ग्रामीण परिवार की हर मुश्किल को दूर नहीं कर सकता, लेकिन यह बेहतर संभावनाओं के दरवाजे जरूर खोल सकता है। विमेथानो के लिए, इसने रोजगार का रास्ता तब बनाया जब आर्थिक तंगी की वजह से उसकी पढ़ाई रुक गई थी। चंदन के लिए, इसने एक ऐसे करियर की शुरुआत की जो उसे दुबई तक ले गया। रूपाली ने अपने हुनर ​​और अनुभव का इस्तेमाल करके अपना खुद का कारोबार शुरू किया, जबकि हीरालाल को रोजगार का जरिया और अपने परिवार की मदद करने का मौका मिला।

उनकी राहें अलग-अलग थीं, लेकिन उनमें एक बात समान थी: हुनर ​​सीखने, उसे आजमाने और आजीविका कमाने का मौका। DDU-GKY इसी पहले कदम को मुमकिन बनाना चाहता है, ताकि ग्रामीण युवा ट्रेनिंग से रोजगार की ओर और रोजगार से ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ आजीविका की ओर बढ़ सकें।

यह भी पढ़ें: कल का मौसम: 25 सितंबर को यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, ओडिशा संग इन 7 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट, 60kmph स्पीड से आएगी आंधी

दिल्ली में महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को मिलेंगे 1300 पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो! जानिए इसकी एलिजिबिलिटी और सारे नियम

दिल्ली सरकार ने महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए DURGA ई-ऑटो स्कीम को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पिंक इलेक्ट्रिक ऑटो दिए जाएंगे, ताकि लोगों को कमाई का एक साधन मिल सके। इसके साथ ही दिल्ली में साफ-सुथरे व सुरक्षित यातायात को भी बढ़ावा मिले। इस योजना के लिए उम्र, आय और दस्तावेजों से जुड़ी कुछ जरूरी शर्तें भी तय की गई हैं।

इस योजना में 1,170 ई-ऑटो महिलाओं और 130 ई-ऑटो ट्रांसजेंडर लोगों के लिए रखे गए हैं। योजना के तहत मिलने वाले ई-ऑटो पर तीन साल का लॉक-इन पीरियड रहेगा। जिसमें लाभार्थी वाहन को बेच या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। इन ऑटो पर खास DURGA ब्रांडिंग और पहचान के निशान भी होंगे, जिससे यात्री इन्हें आसानी से पहचान सकेंगे।

आवेदन के लिए जरूरी शर्तें क्या हैं?

1. उम्र और निवासः आवेदक की उम्र 20 से 40 साल के बीच होनी चाहिए और वो दिल्ली का वोटर होना चाहिए।

2. लाइसेंस: वैध LMV ड्राइविंग लाइसेंस और PSV (Public Service Vehicle) बैज होना जरूरी है।

3. आय सीमाः महिला आवेदक के परिवार की सालाना आय 5 लाख रुपये (FY 2025-26) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

4. ये लोग नहीं कर सकते अप्लाईः अगर आपके या आपके परिवार के नाम पर पहले से कोई थ्री-व्हीलर या कमर्शियल ट्रांसपोर्ट वाहन है, तो आप पात्र नहीं हैं। 3 से ज्यादा बच्चों वाली महिलाएं भी इस स्कीम में अप्लाई नहीं कर सकतीं।

5. कौन ले सकता है योजना का लाभ: इस योजना का लाभ पात्र महिलाएं और ट्रांसजेंडर लोग ले सकते हैं।

6. ट्रांसजेंडर के लिए: ऊपर की सभी शर्तों के साथ DM ऑफिस से जारी ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा।

आवेदन की प्रक्रिया क्या है और कैसे मिलेगा फायदा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस स्कीम से सिर्फ ऑटो चलाने में ही नहीं, बल्कि बैटरी स्वैपिंग, सर्विसिंग और चार्जिंग स्टेशन पर भी रोजगार के हजारों मौके बन सकते हैं। ई-ऑटो से पैसेंजर को मेट्रो स्टेशन और दूसरे स्थानों से उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलने के साथ दिल्ली में ई-व्हीकल के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है। एलिजिबल लोग सरकार की ओर से पोर्टल शुरू होने के बाद ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

Market Insight : बाजार में हालात पलटे, इंश्योरेंस सेक्टर में होगा बड़ा एक्सीडेंट, ऑटो और रियल्टी शेयरों में भी गिरावट का डर

Market Insight : बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में हालात पलट गए हैं। कल अच्छी क्लोजिंग के बावजूद हमने लॉन्ग लेकर जाने से मना किया था। नजरिया यही था कि ट्रेड लेकर जाना जुआ खेलने जैसा होगा। परसों के आउटसाइड डे के बाद कल इनसाइड डे बना था। अगर गिफ्ट निफ्टी सही है तो आज हम 23,250-23,300 पर खुलेंगे। 23,100-23,150 का जोन बाजार के लिए लक्ष्मण रेखा है। आज इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा एक्सीडेंट होगा। IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा आया है।

बाजार: आज के संकेत

बॉन्ड यील्ड से कोहराम मच गया है। 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.135% पर आ गई है। जुलाई 2007 के बाद 10 साल की यील्ड सबसे ज्यादा ऊंचाई पर है।इसमें 7 अप्रैल 2025 के बाद एक-दिन की सबसे बड़ी तेजी आई है। 2 साल की यील्ड 4.947% पर पहुंच गई है। मई 2024 के बाद सबसे ऊंची 2 साल की यील्ड दिखी है। 30 साल की यील्ड 5.398% पर पहुंच गई है। 30 साल की यील्ड जून 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है।

यील्ड में तेजी के कारण

US के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI के आंकड़े मजबूत रहे हैं। सर्विसेज PMI 5 साल के हाई पर पहुंच गई है। S&P Global सितंबर सर्विसेज PMI 58.7 पर है। अगस्त में सर्विसेज PMI 56.5 पर थी। मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.7 पर, 4 साल के हाई पर है। यह कोरोना के बाद 2015 से सबसे तेज उछाल है।

अभी और बढ़ेगी ब्याज दर?

फेड गवर्नर माइकल बार की हॉकिस चेतावनी आई है। उन्होंने कहा है कि महंगाई को समय पर नीचे लाने के लिए पॉलिसी में बदलाव जरूरी है। टिकाऊ ग्रोथ और ज्यादा रोजगार के लिए प्राइस स्टेबिलिटी अहम है। CME फेडवॉच टूल के मुताबिक Oct में 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 70% है। पहले 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 55% ही थी।

बॉन्ड की कमजोर नीलामी

5 साल के ट्रेजरी नोट की नीलामी में डिमांड कमजोर रही है। ऑप्शन 5.033% यील्ड पर पूरा हुआ। 6 ऑप्शन का औसत यील्ड 4.186% रहा।

कच्चे तेल में फिर तेजी

ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान के UNGA में भाषण के बाद कच्चे तेल में तेजी आई। ब्रेंट $102 के ऊपर है। WTI भी $91/बैरल के पार चला गया है। UK मैरीटाइम एजेंसी का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक कार्गो जहाज में आग लगी है।

पॉलिटिको की रिपोर्ट है कि US डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगा सकता है। प्रशासन रोक के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। 90 दिनों के लिए एक्सपोर्ट पर रोक की योजना है। अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी हैं क्रिस राइट ने कहा है कि पूरा बैन नहीं होगा,कुछ पाबंदियों पर विचार किया जा रहा है। एक्सपर्ट्स की चेतावनी है कि डीजल एक्सपोर्ट पर रोक का फैसला गलत होगा। इससे US में रिटेल गैसोलीन महंगा हो सकता है।

ट्रंप पर बरसे मसूद पेजेशकियान

UNGA में ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की इजाजत नहीं। सबसे पहले प्रतिबंध और नेवल ब्लॉकेड हटना जरूरी है। अब तक हॉर्मुज से सभी ने फायदा उठाया है। लेकिन ईरान प्रतिबंध झेले,ये मंजूर नहीं है। किसी भी हाल में बल की भाषा स्वीकार नहीं है।

पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की एटॉमिक हथियार बनाने में दिलचस्पी नहीं है। लेकिन विकास के लिए न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी जरूरी है। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी विकसित करना ईरान का अधिकार है। किसी भी सूरत में अपना अधिकारी नहीं छोड़ेंगे। प्रोग्राम से जुड़े सवाल युद्ध के मैदान पर हल नहीं होंगे। पेजेशकियान ने आगे कहा कि स्ट्रेट से अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड तुरंत हटे। ईरानी एसेट्स को अनफ्रीज करना जरूरी है। सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना भी जरूरी है।

आज का एक्सीडेंट: PB Fintech

IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा है। PB Fintech आज 10% नीचे खुल सकता है और हो सकता है उसके बाद और भी गिरे। बाजार की उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब कंसल्टेशन पेपर आया है।

इस कंसल्टेशन पेपर का सबसे ज्यादा असर PB Fintech, Turtlemint, Max Fin, HDFC Life, LTF, IndusInd Bank और IDFC First Bank पर पड़ेगा। वहीं, LIC और SBI Life पर इसका सबसे कम असर होगा।

आज कहां लगाएं दांव?

PB फिनटेक आज का एक्सीडेंट होगा। बाकी इंश्योरेंस शेयरों में भी आज गिरावट संभव है। ONGC और OIL में आज वापस रिकवरी आ सकती है। इंटरग्लोब और एशियन पेंट्स पर क्रूड में रैली का असर दिख सकता है। मुथूट,मणप्पुरम में आज सोने में गिरावट और NBFCs में दबाव का असर दिख सकता है। चांदी में गिरावट से हिंदुस्तान जिंक में दबाव संभव है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती से मेटल शेयरों में गिरावट आ सकती है। बैंक और NBFCs में आज दबाव संभव है। लार्जकैप IT शेयरों में भी आज गिरावट का खतरा है। ऑटो और रियल्टी शेयरों में आज बड़ी गिरावट की आशंका है।

NSE की लिस्टिंग

NSE की लिस्टिंग शायद बहुत ज्यादा प्रीमियम पर ना हो। प्री-IPO निवेशकों का लॉक इन है लेकिन करीब 15,000 करोड़ के फ्लोट पर नहीं हैं। कुछ चुनिंदा AIFs पर लॉक इन लागू नहीं है। NSE में आज AIF की सप्लाई आएगी। 1 महीने के बाद एंकर निवेशकों की सप्लाई आएगी और 6 महीने बाद प्री-IPO निवेशकों की सप्लाई आएगी। NSE में डिमांड भी मजबूत रह सकती है। MSCI शायद फास्ट ट्रैक पर NSE को शामिल करे।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 23,300-23,350 पर और सबसे अहम सपोर्ट 23,100-23,150 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,400-23,450 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23,500-23,550 पर है। 200 पॉइंट नीचे खुलने के बाद थोड़ा रुकें। आज देखना होगा 23,100-23,150 बचता है या नहीं।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी पर पहला सपोर्ट 56,000-56,200 पर और क्रिटिकल सपोर्ट 55,500-55,800 पर है। फिलहाल रजिस्टेंस की बात करना बेमानी है।

 

Trading Plan: बाजार के दायरे में रहने की उम्मीद, SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह से जानें आज के लिए ट्रेडिंग रणनीति

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Noida Residential Scheme: नोएडा के इन सेक्टरों में प्लॉट खरीदने का मौका! 19 इंडस्ट्रियल प्लॉट पर लगी रिकॉर्ड बोली! यूपी में नौकरी की होगी बरसात

Noida Residential Scheme: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में औद्योगिक जमीन की मांग का एक और बड़ा संकेत सामने आया है। नोएडा प्राधिकरण की वित्तीय वर्ष 2026-27 की औद्योगिक भूखंड योजना के तहत 19 प्लॉट के लिए हुई ई-नीलामी में बोली ने आरक्षित कीमत को काफी पीछे छोड़ दिया। इन प्लॉट का कुल आरक्षित मूल्य करीब ₹86 करोड़ था। लेकिन ई-ऑक्शन में इनकी बोली बढ़कर करीब ₹238 करोड़ तक पहुंच गई। यानी आरक्षित मूल्य से करीब ₹152 करोड़ ज्यादा की बोली लगी।

224 आवेदन, 195 आवेदक बोली के लिए योग्य

नोएडा प्राधिकरण की इस योजना के तहत 19 औद्योगिक प्लॉट के लिए कुल 224 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की जांच के बाद 195 आवेदकों को योग्य पाया गया। इसके बाद योग्य बोलीदाताओं ने बैंक के ई-ऑक्शन पोर्टल के जरिए नीलामी में हिस्सा लिया। बुधवार को हुई ई-नीलामी में बोलीदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। आखिरी बोली कुल मिलाकर करीब ₹238 करोड़ तक पहुंच गई। प्राधिकरण के लिए यह नतीजा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 19 भूखंडों का कुल आरक्षित मूल्य सिर्फ ₹86 करोड़ के आसपास रखा गया था।

किन सेक्टरों में हैं ये औद्योगिक प्लॉट?

  • नोएडा प्राधिकरण की योजना में शामिल ये औद्योगिक भूखंड सेक्टर-3, सेक्टर-6, सेक्टर-7, सेक्टर-9, सेक्टर-10, सेक्टर-80, सेक्टर-162 और सेक्टर-164 में स्थित हैं। इन प्लॉट का आकार भी एक जैसा नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इनका क्षेत्रफल करीब 58.56 वर्ग मीटर से लेकर 7,990 वर्ग मीटर तक है।
  • यानी योजना में छोटे आकार के प्लॉट से लेकर अपेक्षाकृत बड़े औद्योगिक भूखंड तक शामिल किए गए थे। अलग-अलग सेक्टरों में स्थित होने के कारण इनकी लोकेशन और संभावित औद्योगिक उपयोग भी अलग-अलग हो सकता है।

मई में लॉन्च हुई थी स्कीम

  • नोएडा प्राधिकरण ने इस औद्योगिक भूखंड योजना को मई 2026 में लॉन्च किया था। योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ई-बोली की प्रक्रिया में कुछ समय लगा। सितंबर में ई-नीलामी पूरी होने के बाद अब सफल बोलीदाताओं के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • सितंबर की शुरुआत में नोएडा प्राधिकरण ने IT/ITeS प्लॉट के लिए भी नई कीमत व्यवस्था तय की थी। प्राधिकरण ने ऐसे प्लॉट के लिए ₹86,000 प्रति वर्ग मीटर की एक समान आवंटन दर तय की थी। यह फैसला नोएडा में उपलब्ध औद्योगिक जमीन की सीमितता और निवेश की मांग के बीच लिया गया था।

अब सफल बोलीदाताओं की DPR की होगी जांच

  • E-ऑक्शन पूरा होने के बाद अब सिर्फ बोली लगना ही अंतिम चरण नहीं है। नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ पुष्प राज सिंह के मुताबिक, सफल बोलीदाताओं की DPR (Detailed Project Report) की जांच की जाएगी।
  • इस प्रक्रिया के जरिए प्रस्तावित परियोजनाओं, संभावित निवेश और उनसे पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों का आकलन किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि इन प्लॉट पर कौन-कौन सी औद्योगिक यूनिट्स स्थापित होंगी। उनसे कितना निवेश या रोजगार पैदा होगा। इसकी तस्वीर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

नोएडा में औद्योगिक जमीन की मांग क्यों अहम है?

  • नोएडा प्राधिकरण के मुताबिक, नोएडा करीब 20,316 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला एक योजनाबद्ध औद्योगिक शहर है। शहर में पहले से कई औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित हैं और दिल्ली से सड़क संपर्क के साथ-साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत है।
  • ऐसे में उपलब्ध औद्योगिक जमीन के लिए प्रतिस्पर्धी बोली लगना इस बात का संकेत है कि कंपनियां और निवेशक नोएडा में औद्योगिक गतिविधियों के लिए जमीन हासिल करने में रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, इन 19 प्लॉट पर वास्तविक निवेश और रोजगार का आंकड़ा संबंधित परियोजनाओं की DPR और उनके क्रियान्वयन के बाद ही सामने आएगा।

निवेश और रोजगार पर अब निगाहें

ई-ऑक्शन में आरक्षित मूल्य की तुलना में काफी ऊंची बोली लगने के बाद अब अगला फोकस इन प्लॉट पर प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के विकास पर रहेगा। सफल आवेदकों की परियोजनाओं की जांच और DPR के आकलन के बाद यह स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में कितना निवेश आएगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि इससे कितने रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

नोएडा के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि औद्योगिक जमीन सीमित होने के बीच नए प्लॉट के आवंटन से शहर में नई मैन्यूफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध होती है। हालांकि, ₹238 करोड़ की बोली को सीधे ₹238 करोड़ के नए औद्योगिक निवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से भूखंडों के लिए लगी बोली की राशि है। वास्तविक प्रोजेक्ट निवेश इससे अलग और आगे तय होगा।

ये भी पढ़ें- LPG Price 24 September 2026: कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹600 तक हुआ सस्ता? जानें- घरेलू एलपीजी के ताजा रेट

सिर्फ जाति समीकरण कितना काम आएगा!

उत्तर प्रदेश का इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायने में बहुत खास होने वाला है। आजादी के बाद से आज तक कोई भी मुख्यमंत्री लगातार इतने दिन तक पद पर नहीं रहा। जब लगातार कांग्रेस की सरकार बनती थी तब भी मुख्यमंत्री बदलते रहते थे। दूसरी खास बात यह है कि 1990 में कांग्रेस का वर्चस्व खत्म होने के बाद पिछले 36 साल में पहली बार किसी एक पार्टी का 10 साल तक राज रहा है। अगले साल फरवरी में एक पार्टी और एक व्यक्ति के 10 साल के राज के बाद चुनाव होगा। सो, भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है। वैसे तो भाजपा ने सत्ता में रहते हुए सत्ता विरोधी माहौल यानी एंटी इन्कम्बैंसी की गुत्थी काफी हद तक सुलझा ली है। उसकी सरकारों के बार बार सत्ता में लौटने की संभावना दूसरी पार्टियों से ज्यादा होती है। यह भी कह सकते हैं कि भाजपा ने प्रो इन्कम्बैंसी को साध लिया है।

उत्तर प्रदेश का चुनाव इस मायने में भी बहुत खास होने वाला है कि पहली बार मुलायम सिंह का परिवार इतने समय तक सत्ता से बाहर रहा है। 2017 से पहले उनकी पार्टी थोड़े थोड़े अंतराल पर किसी न किसी फॉर्मूले से सरकार में आ जाती थी। कभी बसपा से तालमेल करके तो कभी लोकतांत्रिक कांग्रेस, रालोद या बसपा के बागियों के सहारे तो कभी अकेले। असल में उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता का दौर चला था। 1990 से लेकर 2007 तक 17 वर्षों में कई बार सपा की सरकार बनी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने। 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो पांच साल के बाद सपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आई और अखिलेश यादव सीएम बने। लेकिन 2017 के बाद से सपा लगातार विपक्ष में है। एक और खास बात यह है कि लंबे अरसे के बाद उत्तर प्रदेश में बिल्कुल आमने सामने का विधानसभा चुनाव होने वाला है। पिछली बार यानी 2022 का विधानसभा चुनाव भी भाजपा और सपा के बीच ही था लेकिन तब तक मायावती की बहुजन समाज पार्टी एक ताकत थी। उसके 10 सांसद थे और लगभग 20 फीसदी वोट था। लेकिन अब वह शून्य सांसद, शून्य विधायक और लगभग नौ फीसदी वोट वाली पार्टी है, जिसमें बहुत अंतर्कलह है। पिछले चुनाव में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ रही थी। इस बार बसपा पहले ही मुकाबले से बाहर है और यह लगभग तय लग रहा है कि कांग्रेस और सपा मिल कर लड़ेंगे। सो, भाजपा का पांच पार्टियों का गठबंधन सपा के गठबंधन से लड़ेगा।

कम से कम अभी दोनों पार्टियों की जो चुनावी तैयारी दिख रही है वह अपना अपना सामाजिक समीकरण साधने की है। दोनों गठबंधन अपने हिसाब से जातियों का गणित ठीक करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वैसे तो हर भाषण में बाबर, औरंगजेब, सालार मसूद गाजी आदि का नाम लेते हैं, पोस्टर में आजम खां, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें लगाई जाती हैं और 80-20 की राजनीति की बात की जाती है। माफिया को पूरी तरह से खत्म कर देने के नैरेटिव से कानून व्यवस्था सुधरने की धारणा तो बनाई जाती है, साथ ही अतीक और मुख्तार के जरिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की मैसेजिंग भी बोती है।

इसके साथ ही भाजपा जातियों का प्रबंधन भी कर रही है। वह इस भरोसे में है कि उसके पास सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी है, जो राजभर वोट लाएगी। निषाद पार्टी है, जिसके सहारे मल्लाह वोट मिलेंगे। अपना दल है, जिससे कुर्मी वोट सुनिश्चित है और रालोद है, जिसके सहारे जाट पूरी तरह से एकजुट रहेंगे। सामान्य वर्ग की जातियों यानी ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य, भूमिहार और कायस्थ का वोट भाजपा पहले से पक्का मान रही है। उसको लग रहा है कि इनमें से अगर किसी जाति में कोई नाराजगी है तो वह रूठने जैसा है और चुनाव तक उसके मान जाने की संभावना सौ फीसदी है। इस तरह हिंदुत्व के अंदर जातियों का परफेक्ट समीकरण भाजपा बना हुआ मान रही है।

दूसरी ओर अखिलेश यादव की उम्मीदें लोकसभा चुनाव के बाद कई गुना बढ़ गई हैं। उनको लग रहा है कि पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का उनका फॉर्मूला कामयाब होगा। असल में उनके पास माई समीकरण यानी मुस्लिम और यादव का लगभग 30 फीसदी वोट है। बहुजन समाज पार्टी के कमजोर होकर मुख्य मुकाबले से बाहर होने और कांग्रेस के सपा के साथ आऩे से मुस्लिम वोट में बिखराव की संभावना समाप्त हो गई है। लेकिन यह 30 फीसदी वोट सपा को कहीं नहीं पहुंचाएगा। तभी अखिलेश गैर यादव पिछड़ा और गैर जाटव दलित को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे है। इसमें कोई बुराई नहीं है। भारत में चुनाव जीतने के लिए जातियों का समीकरण बहुत अहम होता है। लेकिन सिर्फ इस आधार पर कोई भी पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती है।

समाजवादी पार्टी की इस रणनीति में समस्या इसलिए है क्योंकि उसे 10 साल से सत्ता में बैठी भाजपा को हराना है। सरकार चला रही किसी भी पार्टी को सिर्फ जातीय समीकरण से नहीं हराया जा सकता है। आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास को देखें तो स्पष्ट दिखाई देता है कि कोई भी सरकार तभी हारी है, जब उसके खिलाफ कोई बहुत मजबूत और प्रत्यक्ष सत्ता विरोधी लहर हो। अगर सरकार के खिलाफ थोड़ी बहुत नाराजगी है या थोड़ी बहुत शिकायतें हैं तो उनके दम पर उस सरकार को नहीं हराया जा सकता है। ऐसी स्थिति में विपक्षी पार्टी अपने जातीय समीकरण के दम पर ज्यादा से ज्यादा मजबूत विपक्ष का दर्जा बचाए रख पाएंगी। जैसा बिहार में राजद के साथ हो रहा है। ऐसा इसलिए होता है कि जो सत्ता में बैठा है या लगातार चुनाव जीत रहा है उसका एक मजबूत सामाजिक समीकरण बना होता है और वह ऐसा लाभार्थी वर्ग तैयार करता है, जो हर हाल में उसे वोट करता है। यह विपक्ष का एक डिसएडवांटेज है।

सो, अखिलेश यादव को कांग्रेस से तालमेल करने और जातीय समीकरण साधने के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार के खिलाफ मजबूत सत्ता विरोधी लहर तैयार करने का प्रयास करना चाहिए था। हालांकि अगर सरकार के खिलाफ स्वाभाविक गुस्सा नहीं है तो सिर्फ प्रयास करने से सत्ता विरोधी लहर नहीं पैदा होगी। सत्ता विरोधी लहर दो तरह से बनती है। पहली, सरकार के कामकाज से नाराज होकर स्वाभाविक रूप से या फिर विपक्षी पार्टी के निरंतर प्रयास से। सरकार से नाराज होने की पर्याप्त वजह होने के बावजूद विपक्ष के निरंतर प्रयास की कमी से उत्तर प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर नहीं बन सकी है। कम से कम अभी सतह के ऊपर ऐसी कोई लहर नहीं दिख रही है। जबकि ऐसा होना चाहिए था। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ युवाओं में नाराजगी है। समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव ने इसके खिलाफ जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा भी लिया। लेकिन सपा इस नाराजगी को एक दिशा देने के लिए जरूरी निरंतरता के साथ काम नहीं कर सकी। ऐसे ही राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला है। संसद के मानसून सत्र में सपा ने इसे लेकर खूब राजनीति की लेकिन सत्र समाप्त होने के बाद सपा की ओर से इस मुद्दे पर कोई कार्यक्रम नहीं हुआ है।

महंगाई वैसे तो पिछले 10 साल से लगातार बढ़ रही है लेकिन रूस व यूक्रेन युद्ध और इस साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका के हमले की वजह से जिस तरह आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है उससे महंगाई में बेहिसाब बढ़ोतरी हुई है। इसे हर आम और खास व्यक्ति महसूस कर रहा है। परंतु मुख्य विपक्षी पार्टी महंगाई को मुद्दा नहीं बना पाई है। रोजगार और लोगों की आर्थिक समस्याओं पर भी विपक्ष का फोकस कम ही रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले ‘संविधान खतरे में है’ और ‘आरक्षण समाप्त हो जाएगा’ का नैरेटिव जन जन तक पहुंच गया था। उसका भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ। लेकिन वह नैरेटिव विधानसभा चुनाव में नहीं चल सकता है क्योंकि मतदाता इतना तो समझता है कि राज्य की सरकार संविधान नहीं बदल सकती है और न आरक्षण खत्म कर सकती है। तभी विपक्ष के पास कोई ग्रैंड नैरेटिव नहीं है और न सरकार के खिलाफ बहुत बड़ी सत्ता विरोधी लहर है। तभी सिर्फ जातीय समीकरण साधने से चुनाव जीतना मुश्किल होगा। हालांकि अभी पांच महीने का समय है और राजनीति में पांच महीने को अनंतकाल माना जाता है।

नशे के अंधे कुएं से निकल खड़ा किया खुद का बिजनेस! बिहार के 28 वर्षीय ग्रेजुएट राजवीर कहानी लाखों के लिए उम्मीद

नशे की लत से इंसान की सेहत, रिश्तों और रोजमर्रा के जीवन को पूरी तरह तहस-नहस कर देती है। नशे का मारा इंसान काबिल होते हुए एक समय पर सबकुछ हार जाता है। लेकिन समय पर इलाज और परिवार का साथ हो तो वही इंसान अपने जीवन का नया अध्याय भी लिख सकता है। नशे की लत से उबरने से इंसान को स्थिरता पाने और एक सेहतमंद भविष्य की ओर कदम बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

बिहार के दरभंगा जिले के 28 साल के ग्रेजुएट राजवीर (नाम बदला हुआ) को रोशनी आईआरसीए में इलाज और पुनर्वास सहयोग मिला। इससे वह नशे की लत उबर सके और अब अपने परिवार के साथ रहते हैं। उन्होंने परिवार के सहयोग से एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया है। नशे की लत ने उनके व्यवहार, भावनात्मक सेहत और पारिवारिक जिंदगी पर असर डाला था।

उनके व्यवहार और भावनात्मक हालत में बदलाव से परेशान होकर, राजवीर के पिता उन्हें 8 मार्च 2026 को आईआरसीए केंद्र ले आए। राजवीर शुरू में चिड़चिड़े थे और उन्हें इलाज के माहौल में एडजस्ट करने में मुश्किल हो रही थी। जब तक उन्हें प्रोफेशनल देखभाल मिलनी शुरू हुई, उनका परिवार साथ देता रहा।

रोशनी आईआरसीए में, राजवीर को मेडिकल डिटॉक्सिफिकेशन, नियमित दवा, निजी काउंसलिंग, ग्रुप थेरेपी, री-एजुकेशनल सेशन और योग आदि गतिविधियां करने को मिलीं। केंद्र ने परिवार परामर्श, होम विजिट और फॉलो-अप सहयोग भी दिया। जैसे-जैसे इलाज आगे बढ़ा, उसने काउंसलिंग सेशन के दौरान अपनी परेशानियां और खुलकर साझा करना शुरू कर दिया।

परिवार ने उसके व्यवहार में अच्छे बदलाव देखे। राजवीर रोजाना के कामों में अधिक व्यस्त हो गया और उनकी मदद से उसने एक छोटा सा कारोबार शुरू किया। सेंटर के जागरूकता कार्यक्रम और लगातार दखल ने भी उसके परिवार को ठीक होने में मदद की। आज, राजवीर अपने परिवार के साथ रह रहा है और एक स्वस्थ, नशा-मुक्त जीवन जीने की कोशिश कर रहा है। उसका अनुभव दिखाता है कि इलाज, काउंसलिंग और परिवार का साथ ठीक होने में मदद कर सकता है। साथ ही, इससे वे अपनी नियमित जिंदगी और रोजगार फिर से शुरू कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी का बड़ा विस्तार, दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन का आखिरी 17.5 KM सेक्शन भी तैयार, जानिए क्या होगा फायदा

दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुदूर और ग्रामीण इलाकों को देश के व्यापक रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के अंतर्गत आने वाली दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना के अंतिम और महत्वपूर्ण 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी-रावघाट सेक्शन का काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। सिंगल-लाइन विद्युतीकृत ब्रॉड-गेज वाले इस नए रेल खंड पर रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा निरीक्षण और स्पीड ट्रायल भी पूरा कर लिया गया है।

आपको बता दें कि ताड़ोकी-रावघाट सेक्शन के चालू होने से पहले रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा व्यापक निरीक्षण और स्पीड ट्रायल आयोजित किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान रेलवे ट्रैक, पुल-पुलियों, विद्युतीकरण, सिग्नलिंग प्रणाली और दूसरी सेफ्टी और टेक्नोलॉजिकल व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई।

95 KM लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट परियोजना का अहम हिस्सा

ताड़ोकी-रावघाट सेक्शन (17.5 किलोमीटर) कुल 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट नई लाइन परियोजना का अंतिम हिस्सा है, जो दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुदूर क्षेत्र में स्थित है। वर्तमान में दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक यात्रियों के लिए ट्रेन सेवाएं पहले से ही संचालित की जा रही हैं। ताड़ोकी-रावघाट सेक्शन में ट्रेन संचालन शुरू होने से आसपास के पूरे क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लोकल लोगों को परिवहन का एक बेहतर, सुगम और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।

भिलाई स्टील प्लांट और स्टील उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

इस नई रेल लाइन के बन जाने का सबसे बड़ा औद्योगिक लाभ देश के इस्पात उद्योग को मिलेगा। यह नई रेलवे लाइन सीधे तौर पर भिलाई स्टील प्लांट तक आयरन ओर के परिवहन को बेहद आसान और स्पीडी बनाएगी। इससे भिलाई स्टील प्लांट को कच्चे माल की आपूर्ति निर्बाध रूप से हो सकेगी। इसके अलावा यह लाइन स्थानीय कृषि उत्पादों और वाणिज्यिक सामानों की ढुलाई में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।

रायपुर और भिलाई से सुधरेगा संपर्क, शिक्षा और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

इस रेल लाइन का विस्तार सुदूर और ग्रामीण इलाकों को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और राज्य के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र भिलाई से सीधे जोड़ेगा। इससे क्षेत्रीय नागरिकों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा। राज्य के शैक्षणिक हब भिलाई तथा राजधानी रायपुर से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के कारण ग्रामीण और दूरदराज के युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसर मिलेंगे। वहीं मरीजों को बड़े अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। सुगम आवाजाही से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

पर्यटन, निवेश और सामाजिक-आर्थिक विकास को मिलेगी गति

दक्षिण छत्तीसगढ़ में रेल परिवहन के इस अभूतपूर्व विस्तार से इस क्षेत्र में पर्यटन, औद्योगिक निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भारी प्रोत्साहन मिलेगा। स्थानीय बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह परियोजना पूरे इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

दिल्ली से मानसून की विदाई! सामान्य तारीख से 2 दिन पहले हुआ रवाना, जानिए इस बार कैसी रही बारिश

UP-EDGE Project: योगी सरकार का पूर्वांचल पर मेगा प्लान! 28 जिलों की बदलने वाली है किस्मत, ₹2,500 करोड़ से होगा ये बदलाव

UP-EDGE Project: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्लान तैयार किया है। विश्व बैंक (World Bank) के सहयोग से ₹2,500 करोड़ की UP-EDGE प्रोजेक्ट प्रस्तावित की गई है। पांच साल तक चलने वाली इस परियोजना का मकसद पूर्वांचल के जिलों में स्थानीय क्षमता के आधार पर रोजगार, आय और निवेश के नए अवसर तैयार करना है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार (22 सितंबर) को कहा कि वह पूर्वांचल क्षेत्र के 28 जिलों को समर्पित एक परियोजना शुरू करेगी।

इसका उद्देश्य स्थानीय संसाधनों को निवेश, रोजगार, उद्यमिता और निर्यात के अवसरों में बदलना है। विश्व बैंक के सहयोग से शुरू की जाने वाली उत्तर प्रदेश सक्षम जिला-आधारित आर्थिक विकास (UP-EDGE) परियोजना पूर्वांचल क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन को भी मजबूत करेगी।

28 जिलों को मिलेगा फायदा

UP-EDGE यानी UP Enabling District-Led Economic Growth Project के तहत फिलहाल पूर्वांचल के 28 जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा बुंदेलखंड के सात जिलों को भी परियोजना में शामिल किए जाने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट को विश्व बैंक के सहयोग से लागू किया जाना प्रस्तावित है।

बैठक में परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट यानी PPR को भारत सरकार को भेजने समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विश्व बैंक के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में परियोजना के विभिन्न प्रस्तावित घटकों पर चर्चा की गई। इनमें प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) को भारत सरकार को भेजना भी शामिल है।

बुंदेलखंड के सात जिले शामिल

विश्व बैंक के प्रैक्टिस मैनेजर हून सोह, लीड इकोनॉमिस्ट ऑरेलियन क्रॉस, सीनियर इकोनॉमिस्ट विंसेंट बेलिंगा और सीनियर स्पेशलिस्ट नेहा गुप्ता के साथ हुई बैठक में बताया गया कि यूपी-एज प्रोजेक्ट पूर्वांचल के 28 जिलों के लिए तैयार की गई है। बयान के मुताबिक, बुंदेलखंड के सात जिलों को भी इस परियोजना में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। करीब 2,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना की अवधि पांच साल होगी।

पूर्वांचल में उत्तर प्रदेश की करीब 40% आबादी

बैठक में बताया गया कि पूर्वांचल में यूपी की करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 27.6 प्रतिशत है। क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से करीब 45 फीसदी कम है। लगभग 80 प्रतिशत कार्यबल कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। ऐसे में यह परियोजना जिलों की जरूरतों और स्थानीय संभावनाओं के आधार पर आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करेगी।

कृषि के साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वांचल में विकास की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने जिलेवार बड़े निवेश प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया। सरकार के मुताबिक, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। सीएम योगी ने कृषि के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की भूमिका बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन, पैकेजिंग और वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर भी जोर दिया।

इस प्रोजेक्ट के तहत करीब एक लाख नए उद्यम विकसित करने और महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ई-कॉमर्स, डेटा सेंटर और डिजिटल जिलों जैसे क्षेत्रों में भी नए अवसर विकसित किए जाएंगे। वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में कौशल विकास और ट्रेनिंग को बढ़ावा देने के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिसिटी और स्वास्थ्य पर्यटन की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।

ODOP को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने ‘एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)’ समेत अन्य स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। बेहतर बाजार व्यवस्था और वैश्विक पहुंच के जरिए इन उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। UP-EDGE प्रोजेक्ट के जरिए सरकार का फोकस सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित रखने के बजाय जिले की स्थानीय आर्थिक क्षमता के हिसाब से विकास मॉडल तैयार करने पर है। प्रोजेक्ट के अगले चरण में प्रस्तावित PPR को केंद्र सरकार के समक्ष भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “पूर्वांचल में विकास की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और आर्थिक अवसरों को ध्यान में रखते हुए जिलेवार बड़े निवेश परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे तथा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।”

ये भी पढ़ें- SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर ECI का जवाब! ‘असहमति सामान्य प्रक्रिया…’; 10 महीने के सवालों पर चुनाव आयोग ने क्या-क्या कहा?

उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के विकास में कृषि के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र की भूमिका भी बढ़ानी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर डिजाइन, पैकेजिंग और वैश्विक बाजारों से जोड़कर निर्यात के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। आदित्यनाथ ने एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और अन्य स्थानीय उत्पादों को नए बाजार तंत्र से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

Bharat Taxi in UP: यूपी के सभी 75 जिलों में ‘भारत टैक्सी’ सुविधा शुरू! इसे चलाने वाले ड्राइवरों को 5 लाख रुपये तक का कवर, सारी डिटेल जानिए

Bharat Taxi in UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (23 सितंबर) को यूपी में ‘भारत टैक्सी’ सेवा और ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ का शुभारंभ कर दिया। एक तरफ ‘भारत टैक्सी’ के जरिए ड्राइवरों को कमीशन से राहत और सामाजिक सुरक्षा देने की बात कही गई है। वहीं, दूसरी तरफ छोटे और सीमांत किसानों के लिए दीर्घकालिक कर्ज की ब्याज दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। देश के पहले सहकारिता आधारित प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी; का परिचालन सहकार टैक्सी सहकारिता लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। ‘Bharat Taxi’ पहले से ही लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में चल रही है।

ड्राइवरों को नहीं देना होगा कमीशन

सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, “‘भारत टैक्सी’ देश का पहला सहकारी मॉडल पर आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड संचालित करता है।” CM ने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ फिलहाल लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस सेवा से जुड़ने वाले ड्राइवरों से कमीशन नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें ₹5 लाख तक की सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिलेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अब तक टैक्सी ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारत टैक्सी के जरिए ड्राइवरों को सुरक्षा के साथ सम्मान और गरिमा देने का प्रयास किया जा रहा है।

‘ये पूरे भारत की टैक्सी है’

सीएम योगी ने कहा, “जब व्यक्ति अपनी गाड़ी पर भारत टैक्सी लिखाएगा और जो भी उस कार का चालक होगा, भारत टैक्सी के ब्रांड को संचालित करने का कार्य करेगा, तो उसको इस बात पर गौरव की अनुभूति होगी कि ये टैक्सी केवल एक यात्री को ढोने की नहीं, ये पूरे भारत की टैक्सी है। भारत को संचालित करने की भारत की गति को प्रगति में बदलने की टैक्सी है। उसके मन में इस बात की निश्चिंतता भी होगी कि मुझे यह सुविधा 5,00,000 रुपए की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दे रही है…जब किसी को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलती है तो उसमें एक निश्चिंतता होती है और फिर वह व्यक्ति पूरी तन्मयता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य को कर पाता है…आज यह टैक्सी लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज में संचालित हो रही है।”

एयरपोर्ट, मेट्रो और पुलिस से भी समझौता

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत टैक्सी ने लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ मेट्रो और लखनऊ पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं। उन्होंने इस पहल के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि ‘भारत टैक्सी’ से आने वाले समय में लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित बस सर्विस को भी इसी तरह के सहकारी मॉडल से विकसित करने की संभावना जताई।

किसानों के लिए 11% से घटकर 6% हुआ ब्याज

सीएम योगी ने ‘मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना’ की भी शुरुआत की। इसके तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक से मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण पर ब्याज दर 11 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। इस योजना का उद्देश्य आने वाले वर्षों में करीब 5 लाख छोटे और सीमांत किसानों को कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराना है। आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने किसानों के लिए ब्याज दर कम करने का फैसला किया और अब इसका परिणाम सामने है। उन्होंने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा।

पांच ड्राइवरों और पांच किसानों को मिला लाभ

कार्यक्रम के दौरान पांच भारत टैक्सी ड्राइवरों को शेयर सर्टिफिकेट दिए गए। वहीं, किसान योजना के पांच लाभार्थियों को लोन स्वीकृति पत्र सौंपे गए। मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग का ‘उर्वरक सेतु’ मोबाइल ऐप और उत्तर प्रदेश सहकारी डेटाबेस सेंटर का मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया।

ये भी पढ़ें- Azamgarh Triple Murder: पत्नी और 2 पुजारियों को गोलियों से भूना, फिर 3 मासूम बच्चों को बनाया बंधक… आजमगढ़ में अरविंद का 7 घंटे का खौफनाक ड्रामा!

सरकार के सहकारी मॉडल पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत सहकारी क्षेत्र देश की मजबूती से जुड़ा है। सरकार और केंद्र की ओर से सहकारी सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, भारत टैक्सी का उद्देश्य किसी निजी ऐप आधारित टैक्सी एग्रीगेटर को खत्म करना नहीं, बल्कि ड्राइवर-केंद्रित और लोगों के लिए किफायती परिवहन का एक वैकल्पिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। सहकारी मॉडल में ड्राइवर सदस्य और हितधारक के रूप में जुड़े होंगे, ताकि उनके आर्थिक और सामाजिक हितों को बढ़ावा दिया जा सके।