Market cues : बाजार का टेक्निकल स्ट्रक्चर सभी पैमानों पर कमजोर, 22570 के नीचे जाने पर निफ्टी में बढ़ेगी गिरावट

Trade setup for today : बाजार जानकारों का कहना है कि बाजार का टेक्निकल स्ट्रक्चर सभी पैमानों पर कमजोर नजर आ रहा है। इसके अलावा US ट्रेजरी यील्ड्स भी दो दशक के हाई के आसपास दिख रही है। ऐसे में निफ्टी के आसानी से मंदड़ियों के पकड़ से बाहर निकलने की उम्मीद बहुत कम है। दिन के लो से तेज रिकवरी के बावजूद,29 सितंबर को मंथली F&O एक्सपायरी सेशन में इंडेक्स एक तिहाई परसेंट गिर गया। सितंबर में अब तक इसमें 5.67 परसेंट की गिरावट आई है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी का मंगलवार का 22,570 का निचला स्तर काफी अहम लेवल हो सकता है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स और नीचे जा सकता है और 22,380 पर मौजूद 200-वीक EMA और फिर अप्रैल के निचले स्तर 22,182 तक गिर सकता है। दूसरी ओर अगर निफ्टी 22,570 के ऊपर बना रहता है तो यह 22,800–23,000 के जोन की ओर बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स अभी भी ‘सेल-ऑन-रैली'(तेज़ी आने पर बेचने)की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (22,716) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 22,750, 22,793 और 22,863

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 22,610, 22,566 और 22,496

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

डेली चार्ट पर गिरावट के दौरान निफ्टी ने एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसकी निचली विक (wick) लंबी थी। यह’हैमर’जैसे कैंडलस्टिक पैटर्न जैसा दिखता है,जो निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है। हालांकि इसे आमतौर पर ट्रेंड-रिवर्सल का संभावित पैटर्न माना जाता है,लेकिन इसकी पुष्टि के लिए आने वाले सेशन में मजबूत खरीदारी की जरूरत होती है। निफ्टी सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है और ये एवरेज नीचे की ओर झुके हुए हैं। जबकि RSI नेगेटिव क्रॉसओवर के साथ गिरकर 26.71 पर आ गया है। MACD सिग्नल लाइन से नीचे बना हुआ है और रेड हिस्टोग्राम बार एक और सेशन में बढ़ता दिखा है। ये सभी इंडिकेटर अंडरलाइंग मोमेंटम में लगातार बनी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।

बैंक निफ्टी (54,260) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 54,387, 54,533 और 54,770

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 53,914, 53,767 और 53,531

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 54,509, 55,897

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 53,300, 51,830

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

बैंक निफ्टी ने एक पतली बॉडी वाली कैंडल बनाई,जिसकी निचली विक (wick) लंबी थी। यह निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है। डाउनट्रेंड के दौरान डेली चार्ट पर यह बनावट’डोजि'(doji) जैसे कैंडलस्टिक पैटर्न जैसी दिख रही थी। ऐसी बनावट ट्रेंड में संभावित बदलाव का संकेत दे सकती है,लेकिन इसके लिए अगले सेशन में पुष्टि की जरूरत होती है। दिन के निचले स्तर से जबरदस्त रिकवरी के बावजूद इंडेक्स 0.39 प्रतिशत गिरा। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है और इसके शॉर्ट और मीडियम टर्म मूविंग एवरेज नीचे की ओर जा रहे हैं। RSI गिरकर 29.04 पर आ गया है,जबकि MACD सिग्नल लाइन के नीचे अपने डाउनट्रेंड में बना हुआ है और रेड हिस्टोग्राम बार लगातार चौथे सेशन में बढ़ रहा है। ये सभी इंडिकेटर लगातार बने दबाव का संकेत दे रहे हैं।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने वाला इंडिया VIX पिछले दिन की तेज़ी के बाद इंट्राडे में 14.77 के ऊंचे स्तर तक पहुंचने के बाद 1.65 प्रतिशत गिरकर 13.41 पर आ गया। हालांकि,यह ऊंचे स्तर पर बना रहा,जिससे तेजड़ियों के बीच कुछ सावधानी का संकेत मिला। 12 के स्तर से नीचे आने पर ‘बुल्स’को ज़्यादा राहत मिल सकती है,जबकि 14 के स्तर से ऊपर जाने पर मार्केट में बेचैनी बढ़ सकती है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 29 सितंबर को बढ़कर 0.91 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 0.71 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: SAIL

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: LIC हाउसिंग फाइनेंस

 

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 30 सितंबर को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IRDAI New Rules: पॉलिसीधारकों की बल्ले-बल्ले, डिस्ट्रीब्यूटर्स को झटका! जानिए IRDAI के नए प्रस्ताव से आपको कैसे होगा फायदा

IRDAI Commission & Expense Cap Impact: देश में बीमा सेक्टर तेजी से बढ़ा है, लेकिन जिस रफ्तार से लोगों की जेब से प्रीमियम का पैसा निकला है, उस रफ्तार से असली बीमा कवरेज का विस्तार नहीं हुआ है। दूसरी ओर, बीमा बेचने का खर्च और बिचौलियों का कमीशन इतनी तेजी से बढ़ा है कि यह सवाल उठने लगा था कि क्या ग्राहकों को उनके प्रीमियम का सही मूल्य मिल रहा है या नहीं?

इसी समस्या से निपटने के लिए भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। नियामक ने बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च (EoM) को घटाने के लिए 5 साल का रोडमैप प्रस्तावित किया है, साथ ही एजेंटों और कॉर्पोरेट एजेंटों के भारी-भरकम कमीशन पर नकेल कसने की तैयारी की है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि IRDAI के इन कड़े प्रस्तावों से इंश्योरेंस सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा, क्यों पॉलिसीधारकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा और कंपनियों-बिचौलियों के लिए यह कितना बड़ा झटका है।

क्यों पड़ी सुधारों की जरूरत?

IRDAI के आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि पिछले एक दशक में भारत में इंश्योरेंस की पैठ में कोई खास सुधार नहीं हुआ है:

पॉलिसी की संख्या जस की तस: वित्त वर्ष 2016 में देश में करीब 266 लाख नई इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां बिकी थीं, जो वित्त वर्ष 2025 में मामूली बढ़कर केवल 270 लाख हो पाईं। कुल इन-फोर्स पॉलिसियां भी 3,270 लाख के आसपास ही स्थिर बनी हुई हैं।

जीडीपी के बराबर ही ग्रोथ: देश की जीडीपी ग्रोथ दर पिछले 10 सालों में औसतन 10% रही है। इसी अवधि में लाइफ इंश्योरेंस 10% और जनरल इंश्योरेंस बिजनेस 13% की दर से बढ़ा है। यानी बढ़ती आमदनी के बावजूद इंश्योरेंस सेक्टर अर्थव्यवस्था से आगे निकलने में नाकाम रहा है।

2047 तक ‘सबके लिए बीमा’ का लक्ष्य काफी दूर: जनरल इंश्योरेंस में पॉलिसियों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन ‘2047 तक सबके लिए बीमा’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के हिसाब से यह रफ्तार काफी धीमी है।

बिजनेस का खर्च और कमीशन में भारी उछाल

जहां एक तरफ ग्राहकों की संख्या नहीं बढ़ रही थी, वहीं दूसरी तरफ बीमा कंपनियों और उनके एजेंटों के खर्च आसमान छू रहे थे:

ऊंचा कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस: लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस (CoDB) 18% से 39% तक पहुंच गया है (LIC और SBI Life को छोड़कर, जिनका CoDB 10-12% है)। जनरल इंश्योरेंस में यह 20% से 48% के बीच है।

कमीशन में 125% से 173% का उछाल: वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच कॉर्पोरेट एजेंटों (जैसे- बैंक और ऑनलाइन एग्रीगेटर्स) के जरिए आने वाला नया प्रीमियम 28% बढ़ा, लेकिन उनका कुल कमीशन और पेआउट 125% बढ़ गया! जनरल इंश्योरेंस ब्रोकर्स का प्रीमियम 37% बढ़ा, जबकि उनका कमीशन 173% तक उछल गया।

30-60% एक्स्ट्रा रिवॉर्ड्स: बेस कमीशन के अलावा ब्रोकर्स और एजेंटों को 30% से 60% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव/रिवॉर्ड दिया जा रहा था, जिसका पूरा बोझ सीधे ग्राहकों के प्रीमियम पर पड़ रहा था।

IRDAI का नया फॉर्मूला: कितना घटेगा कंपनियों का खर्च?

IRDAI ने कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च की सीमा घटाने का 5 साल का रोडमैप तैयार किया है:

लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां: मौजूदा 30% की सीमा को घटाकर 2 साल के अंदर 15% और 5 साल के अंदर 12.5% पर लाना होगा।

जनरल इंश्योरेंस कंपनियां: मौजूदा सीमा को घटाकर 2 साल में 25% और 5 साल में 20% तक सीमित करना होगा।

प्रीमियम पेइंग टर्म के हिसाब से तय होगा कमीशन

ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि अब पॉलिसी की अवधि के हिसाब से पहले साल का कमीशन फिक्स करने का प्रस्ताव है:

5 साल से कम पीपीटी (PPT): एजेंसियों के लिए अधिकतम कमीशन 5% और एजेंटों के लिए 6.25%।

5 साल का पीपीटी: एजेंसियों के लिए 10% और एजेंटों के लिए 12.5%।

6 से 8 साल का पीपीटी: एजेंसियों के लिए 14% और एजेंटों के लिए 17.5%।

10 साल या उससे अधिक का पीपीटी: एजेंसियों के लिए अधिकतम 20% और एजेंटों के लिए 25% तय होगा।

कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर असर: क्यों मची भगदड़?

कमीशन और ऑपरेटिंग खर्चों पर नकेल कसने के प्रस्तावों से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।

शेयरों में भारी गिरावट: इस प्रस्ताव के सामने आते ही पीबी फिनटेक (पॉलिसीबाजार) और टर्टलमिंट जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के शेयरों व वैल्यूएशन में 35% से ज्यादा का भारी क्रैश दर्ज किया गया।

एजेंटों का उत्साह घट सकता है: आईआईएफएल (IIFL) की रिपोर्ट के अनुसार, कमीशन घटने से डिस्ट्रीब्यूटर्स का रुझान कम हो सकता है, जिससे नए बिजनेस वॉल्यूम और फ्रेश कैपिटल इनफ्लो पर अल्पकालिक असर देखने को मिल सकता है।

पॉलिसीधारकों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?

भले ही यह प्रस्ताव कंपनियों और एजेंटों के मार्जिन के लिए झटका हो, लेकिन आम ग्राहकों के लिए यह एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो सकता है:

कम प्रीमियम और बेहतर रिटर्न: जब डिस्ट्रीब्यूशन और मैनेजमेंट कॉस्ट घटेगा, तो सेविंग्स पॉलिसियों (जैसे- एंडोमेंट या यूलिप) में ग्राहकों के प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सीधे इन्वेस्टमेंट में जाएगा। इससे मैच्योरिटी पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

सस्ती हो सकती हैं पॉलिसियां: ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होने से कंपनियां इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के दाम यानी प्रीमियम रेट्स घटा सकती हैं।

क्लेम और सर्विस पर फोकस बढ़ेगा: अभी तक एजेंटों का ध्यान केवल नई पॉलिसी बेचने पर रहता था। IRDAI का जोर अब पॉलिसी पर्सिस्टेंसी, बेहतर सलाह और सुचारू क्लेम सेटलमेंट पर है।

शिकायतों में कमी: जनरल इंश्योरेंस में ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल पर दर्ज शिकायतें FY23 में 78,347 से बढ़कर FY25 में 1,37,361 हो गई थीं, जिनमें से 69% शिकायतें केवल क्लेम से जुड़ी थीं। खर्चों पर लगाम लगने से कंपनियां क्लेम सर्विसिंग पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगी।

Market Insight : बाजार में हालात पलटे, इंश्योरेंस सेक्टर में होगा बड़ा एक्सीडेंट, ऑटो और रियल्टी शेयरों में भी गिरावट का डर

Market Insight : बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में हालात पलट गए हैं। कल अच्छी क्लोजिंग के बावजूद हमने लॉन्ग लेकर जाने से मना किया था। नजरिया यही था कि ट्रेड लेकर जाना जुआ खेलने जैसा होगा। परसों के आउटसाइड डे के बाद कल इनसाइड डे बना था। अगर गिफ्ट निफ्टी सही है तो आज हम 23,250-23,300 पर खुलेंगे। 23,100-23,150 का जोन बाजार के लिए लक्ष्मण रेखा है। आज इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा एक्सीडेंट होगा। IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा आया है।

बाजार: आज के संकेत

बॉन्ड यील्ड से कोहराम मच गया है। 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.135% पर आ गई है। जुलाई 2007 के बाद 10 साल की यील्ड सबसे ज्यादा ऊंचाई पर है।इसमें 7 अप्रैल 2025 के बाद एक-दिन की सबसे बड़ी तेजी आई है। 2 साल की यील्ड 4.947% पर पहुंच गई है। मई 2024 के बाद सबसे ऊंची 2 साल की यील्ड दिखी है। 30 साल की यील्ड 5.398% पर पहुंच गई है। 30 साल की यील्ड जून 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है।

यील्ड में तेजी के कारण

US के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI के आंकड़े मजबूत रहे हैं। सर्विसेज PMI 5 साल के हाई पर पहुंच गई है। S&P Global सितंबर सर्विसेज PMI 58.7 पर है। अगस्त में सर्विसेज PMI 56.5 पर थी। मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.7 पर, 4 साल के हाई पर है। यह कोरोना के बाद 2015 से सबसे तेज उछाल है।

अभी और बढ़ेगी ब्याज दर?

फेड गवर्नर माइकल बार की हॉकिस चेतावनी आई है। उन्होंने कहा है कि महंगाई को समय पर नीचे लाने के लिए पॉलिसी में बदलाव जरूरी है। टिकाऊ ग्रोथ और ज्यादा रोजगार के लिए प्राइस स्टेबिलिटी अहम है। CME फेडवॉच टूल के मुताबिक Oct में 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 70% है। पहले 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 55% ही थी।

बॉन्ड की कमजोर नीलामी

5 साल के ट्रेजरी नोट की नीलामी में डिमांड कमजोर रही है। ऑप्शन 5.033% यील्ड पर पूरा हुआ। 6 ऑप्शन का औसत यील्ड 4.186% रहा।

कच्चे तेल में फिर तेजी

ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान के UNGA में भाषण के बाद कच्चे तेल में तेजी आई। ब्रेंट $102 के ऊपर है। WTI भी $91/बैरल के पार चला गया है। UK मैरीटाइम एजेंसी का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक कार्गो जहाज में आग लगी है।

पॉलिटिको की रिपोर्ट है कि US डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगा सकता है। प्रशासन रोक के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। 90 दिनों के लिए एक्सपोर्ट पर रोक की योजना है। अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी हैं क्रिस राइट ने कहा है कि पूरा बैन नहीं होगा,कुछ पाबंदियों पर विचार किया जा रहा है। एक्सपर्ट्स की चेतावनी है कि डीजल एक्सपोर्ट पर रोक का फैसला गलत होगा। इससे US में रिटेल गैसोलीन महंगा हो सकता है।

ट्रंप पर बरसे मसूद पेजेशकियान

UNGA में ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की इजाजत नहीं। सबसे पहले प्रतिबंध और नेवल ब्लॉकेड हटना जरूरी है। अब तक हॉर्मुज से सभी ने फायदा उठाया है। लेकिन ईरान प्रतिबंध झेले,ये मंजूर नहीं है। किसी भी हाल में बल की भाषा स्वीकार नहीं है।

पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की एटॉमिक हथियार बनाने में दिलचस्पी नहीं है। लेकिन विकास के लिए न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी जरूरी है। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी विकसित करना ईरान का अधिकार है। किसी भी सूरत में अपना अधिकारी नहीं छोड़ेंगे। प्रोग्राम से जुड़े सवाल युद्ध के मैदान पर हल नहीं होंगे। पेजेशकियान ने आगे कहा कि स्ट्रेट से अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड तुरंत हटे। ईरानी एसेट्स को अनफ्रीज करना जरूरी है। सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना भी जरूरी है।

आज का एक्सीडेंट: PB Fintech

IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा है। PB Fintech आज 10% नीचे खुल सकता है और हो सकता है उसके बाद और भी गिरे। बाजार की उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब कंसल्टेशन पेपर आया है।

इस कंसल्टेशन पेपर का सबसे ज्यादा असर PB Fintech, Turtlemint, Max Fin, HDFC Life, LTF, IndusInd Bank और IDFC First Bank पर पड़ेगा। वहीं, LIC और SBI Life पर इसका सबसे कम असर होगा।

आज कहां लगाएं दांव?

PB फिनटेक आज का एक्सीडेंट होगा। बाकी इंश्योरेंस शेयरों में भी आज गिरावट संभव है। ONGC और OIL में आज वापस रिकवरी आ सकती है। इंटरग्लोब और एशियन पेंट्स पर क्रूड में रैली का असर दिख सकता है। मुथूट,मणप्पुरम में आज सोने में गिरावट और NBFCs में दबाव का असर दिख सकता है। चांदी में गिरावट से हिंदुस्तान जिंक में दबाव संभव है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती से मेटल शेयरों में गिरावट आ सकती है। बैंक और NBFCs में आज दबाव संभव है। लार्जकैप IT शेयरों में भी आज गिरावट का खतरा है। ऑटो और रियल्टी शेयरों में आज बड़ी गिरावट की आशंका है।

NSE की लिस्टिंग

NSE की लिस्टिंग शायद बहुत ज्यादा प्रीमियम पर ना हो। प्री-IPO निवेशकों का लॉक इन है लेकिन करीब 15,000 करोड़ के फ्लोट पर नहीं हैं। कुछ चुनिंदा AIFs पर लॉक इन लागू नहीं है। NSE में आज AIF की सप्लाई आएगी। 1 महीने के बाद एंकर निवेशकों की सप्लाई आएगी और 6 महीने बाद प्री-IPO निवेशकों की सप्लाई आएगी। NSE में डिमांड भी मजबूत रह सकती है। MSCI शायद फास्ट ट्रैक पर NSE को शामिल करे।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 23,300-23,350 पर और सबसे अहम सपोर्ट 23,100-23,150 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,400-23,450 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23,500-23,550 पर है। 200 पॉइंट नीचे खुलने के बाद थोड़ा रुकें। आज देखना होगा 23,100-23,150 बचता है या नहीं।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी पर पहला सपोर्ट 56,000-56,200 पर और क्रिटिकल सपोर्ट 55,500-55,800 पर है। फिलहाल रजिस्टेंस की बात करना बेमानी है।

 

Trading Plan: बाजार के दायरे में रहने की उम्मीद, SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह से जानें आज के लिए ट्रेडिंग रणनीति

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market cues : नियर टर्म में कंसोलिडेशन जारी रहने की उम्मीद, 23500 की दीवार पार होने पर ही आएगी तेजी

Trade setup for today : एक दिन की गिरावट के बाद कल निफ्टी में 0.50 फीसदी की रिकवरी हुई। बाजार में मंदी का दबाव कुछ कम हुआ। हालांकि,कुल मिलाकर बाजार का ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर बना हुआ है और इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.1 फीसदी पर पहुंच गया, जो जुलाई 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं कच्चे तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। इसकी वजह से कल बाजार में सावधानी का माहौल देखने को मिला।

जब तक निफ्टी 23,500–23,600 के अहम रेजिस्टेंस जोन के नीचे ट्रेड करता रहेगा,तब तक नियर टर्म में नेगेटिव रुझान के साथ कंसोलिडेशन का दौर बने रहने की संभावना है। बाजार जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,300 पर तत्काल सपोर्ट दिख रहा है। इसके बाद 23,100–23,000 एक अहम सपोर्ट ज़ोन हो सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (23,447) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 23,466, 23,494 और 23,538

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 23,376, 23,349 और 23,304

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

डेली टाइमफ्रेम पर,निफ्टी ने पिछले दिन की रेड कैंडल के अंदर ही एक बुलिश कैंडल बनाई। यह सीमित दायरे में हो रही ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव ट्रेंड का संकेत है। हालांकि,इंडेक्स अभी भी अपने 20, 50, 100 और 200-डे EMA से नीचे बना हुआ है,जो इसके कमजोर स्ट्रक्चर का संकेत है। इस बीच, RSI बढ़कर 40.25 हो गया। यह सिग्नल लाइन से ऊपर तो है,लेकिन अभी भी 50 के स्तर से नीचे है। MACD थोड़ा ऊपर चढ़कर अपनी सिग्नल लाइन के करीब पहुंच गया,जबकि लाल हिस्टोग्राम बार लगातार छठे सेशन में नीचे आया। यह एक बड़े कंसोलिडेशन फेज के दौरान मंदी के मोमेंटम में कमी का संकेत है।

बैंक निफ्टी (56,549) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,619, 56,717 और 56,875

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,303, 56,205 और 56,047

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,285, 59,261

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 55,749, 55,050

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

बैंक निफ्टी में भी 0.6 फीसदी की बढ़त देखने को मिली। डेली चार्ट पर पिछले दिन की रेड कैंडल के साथ एक बुलिश कैंडल बनी। यह रेंज बाउंड ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव मूवमेंट का संकेत है। इंडेक्स अपने 10-डे EMA के ऊपर बंद हुआ,लेकिन 20, 50, 100 और 200 डे EMA से नीचे ही रहा। इससे पता चलता है कि बाजार पर अभी भी बेयर्स का कंट्रोल है। हालांकि मोमेंटम इंडिकेटर मंदी के दबाव में कमी आने का संकेत दे रहे हैं। लेकिन इस बदलाव की पुष्टि आज के सेशन में होनी चाहिए। पॉजिटिव क्रॉसओवर के बाद RSI बढ़कर 46.25 हो गया और MACD अपनी सिग्नल लाइन के करीब पहुंच गया,क्योंकि लगातार छठे सेशन में रेड हिस्टोग्राम बार छोटे होते गए।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में संभावित उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX, कल 5.93 प्रतिशत गिरकर 10.34 पर आ गया। यह 7 जनवरी, 2026 के बाद से इसका सबसे निचला क्लोजिंग लेवल है। वोलैटिलिटी मापने वाला यह इंडेक्स लगातार छठे सेशन में नीचे की ओर गया। यह बुल्स के बीच बढ़ते भरोसे और मार्केट में बेहतर स्थिरता का संकेत है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 23 सितंबर को बढ़कर 1.03 हो गया, जबकि पिछले सेशन में यह 0.94 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, LIC हाउसिंग फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

Market Technicals : मोमेंटम में सुधार आने के संकेत, निफ्टी-बैंक निफ्टी में इन अहम लेवल्स पर रहे नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Market cues : मोमेंटम इंडिकेटर्स दे रहे मंदी के कमजोर पड़ने के संकेत, 23600 के ऊपर टिकने पर निफ्टी में आ सकती है और तेजी

Trade setup for today : 21 सितंबर को निफ्टी ने 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ हफ्ते की शुरुआत की और लगातार चौथे सेशन में भी तेजी बनाए रखी। इसे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। मोमेंटम इंडिकेटर्स में भी सुधार दिखा और मंदी का रुझान कम हुआ। हालांकि इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा,जो इसके कमजोर स्ट्रक्चर का संकेत है। मार्केट एक्सपर्ट्स की राय है कि आगे निफ्टी को 23,500-23,600 के दायरे में रुकावट का सामना करना पड़ सकता है,जबकि 23,600 के ऊपर मजबूती दिखाने पर और बढ़त की गुंजाइश बन सकती है। बाजार जानकारों के मुताबिक,नीचे की तरफ 23,300 पर तत्काल सपोर्ट दिख रहा है और उसके बाद 23,000 का लेवल अहम सपोर्ट का काम कर सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (23,414) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 23,457, 23,493 और 23,551

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 23,341, 23,305 और 23,247

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

निफ्टी 50 ने डेली चार्ट पर एक बुलिश कैंडल बनाई,लेकिन यह 15 सितंबर की लंबी रेड कैंडल के दायरे में ही रही। यह सीमित दायरे में हो रही ट्रेडिंग के बीच पॉजिटिव संकेत है। इंडेक्स अपने शॉर्ट से लेकर लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा। हालांकि मोमेंटम इंडिकेटर्स ने बेयरिश मोमेंटम में कमी दिखाई। RSI बढ़कर 37.54 पर पहुंच गया और अपनी सिग्नल लाइन से ऊपर बना रहा। MACD ऊपर तो गया लेकिन रेफरेंस लाइन से नीचे ही रहा,जबकि हिस्टोग्राम की कमजोरी लगातार चौथे सेशन में कम हुई। कुल मिलाकर,ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का रुझान धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है।

बैंक निफ्टी (56,471) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,622, 56,716 और 56,868

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,317, 56,223 और 56,071

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,285, 59,261

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 55,749, 55,050

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

डेली चार्ट पर बैंक निफ्टी ने ऊपरी शैडो के साथ एक बुलिश कैंडल बनाई,लेकिन यह 15 सितंबर की लंबी रेड कैंडल के दायरे में ही रही। इससे पता चलता है कि रेंज-बाउंड ट्रेडिंग के बीच ऊंचे लेवल पर दबाव होने के बावजूद इसमें पॉजिटिव रुझान बना हुआ है। बैंक निफ्टी सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा,जबकि पॉजिटिव क्रॉसओवर के बाद RSI बढ़कर 44.62 पर पहुंच गया,हालांकि यह अभी भी 50 के लेवल से नीचे ही है। लाल हिस्टोग्राम बार लगातार चौथे सेशन में भी घटता रहा, जबकि MACD लाइन सिग्नल लाइन के नीचे बनी रही। कुल मिलाकर,ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का रुझान धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है,हालांकि बड़ा ट्रेंड अभी भी सावधानी वाला बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

21 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹576 करोड़ के शेयर बेचे,जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान ₹2,800 करोड़ के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

वोलैटिलिटी इंडेक्स,India VIX कल लगातार चौथे सेशन में गिरा और एक और अपने शॉर्ट-टू-मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो बुल्स के लिए राहत का संकेत है। सोमवार को वोलैटिलिटी इंडेक्स 1.43 प्रतिशत गिरकर 11.22 पर आ गया। 12 के जोन से नीचे बने रहने से बुल्स को राहत मिल सकती है और मार्केट को स्थिर रहने में मदद मिल सकती है।

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पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 21 सितंबर को बढ़कर 1.2 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 1.06 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: LIC हाउसिंग फाइनेंस

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, मणप्पुरम फाइनेंस, सेल

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NSE IPO: 5.67 गुना सब्सक्राइब, हर 4 में से 3 रिटेल इनवेस्टर को शेयर अलॉटमेंट मिल सकता है

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ₹22,569 करोड़ का IPO सोमवार, 21 सितंबर को बंद हो गया। आखिरी दिन इश्यू को 5.67 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। निवेशकों ने 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.28 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई।

QIB यानी बड़े संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। उनका हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ। NII कैटेगरी 6.54 गुना और रिटेल हिस्सा 1.35 गुना सब्सक्राइब हुआ।

रिटेल निवेशकों को कितना मिल सकता है?

रिटेल हिस्सा 1.35 गुना भरा है। इस आधार पर शुरुआती अनुमान करीब 75% का है। अगर आसान भाषा में कहें तो हर चार में से करीब तीन रिटेल आवेदकों को शेयर मिल सकते हैं।

इसे पक्का अलॉटमेंट रेशियो नहीं मानना चाहिए। क्योंकि असल अलॉटमेंट वैध आवेदनों और IPO के नियमों के हिसाब से होगा।

NSE IPO के GMP में भारी गिरावट

NSE IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर था। एक लॉट में 8 शेयर रखे गए थे। अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹14,280 लगाने पड़े।

ग्रे मार्केट में NSE शेयर का GMP IPO के दौरान काफी नीचे आया है। लेटेस्ट GMP करीब 3% संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। शुरुआत में ये 18% के करीब था। GMP अनऑफिशियल होता है। इसे लिस्टिंग प्राइस या मुनाफे की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹6,746 करोड़

IPO से पहले NSE ने 189 एंकर निवेशकों से ₹6,746.18 करोड़ जुटाए थे। इन्हें ₹1,785 प्रति शेयर के भाव पर शेयर दिए गए। एंकर निवेशकों को 16 सितंबर को 3.78 करोड़ शेयर अलॉट किए गए।

LIC सबसे बड़ा व्यक्तिगत एंकर निवेशक रहा। उसे करीब ₹400.3 करोड़ के शेयर मिले। Norway का Government Pension Fund Global, Monetary Authority of Singapore और Abu Dhabi Investment Authority भी एंकर निवेशकों में शामिल रहे।

NSE को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

NSE का पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा।

इश्यू से जुड़े खर्च निकालने के बाद रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी। अपर प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यू करीब ₹4.42 लाख करोड़ है। IPO में कर्मचारियों के लिए ₹70 करोड़ तक का हिस्सा भी रखा गया था। पात्र कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर ₹170 प्रति शेयर की छूट मिली है।

22 सितंबर को अलॉटमेंट, 24 को लिस्टिंग

NSE IPO का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की उम्मीद है। शेयरों की BSE पर लिस्टिंग 24 सितंबर को प्रस्तावित है।

अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद निवेशक रजिस्ट्रार और स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर अपना स्टेटस चेक कर सकेंगे।

शेयर बाजार में NSE की कितनी हिस्सेदारी?

NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जून 2026 को खत्म तीन महीने में कैश मार्केट के टर्नओवर में NSE की हिस्सेदारी 93.05% रही।

इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी 99.72% और इक्विटी ऑप्शंस में 68.48% थी। वहीं, एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स और करेंसी ऑप्शंस में कुल प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर NSE की हिस्सेदारी 100% रही।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO: एंकर बुक से ₹6746 करोड़ जुटाए, LIC ने अकेले ₹465 करोड़ के शेयर खरीदे

NSE IPO: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE ने 16 सितंबर को एंकर निवेशकों से ₹6,746.2 करोड़ जुटाए। इसमें देश और विदेश के कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया। LIC, Government Pension Fund Global, Monetary Authority of Singapore, Fidelity, ADIA, Nippon Life और HDFC Life जैसे नाम इसमें शामिल हैं। LIC सबसे बड़ा खरीदार रहा।

NSE का ₹22,561.57 करोड़ का IPO 17 सितंबर को खुलेगा। निवेशक इसमें 21 सितंबर तक पैसा लगा सकेंगे। यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसमें मौजूदा शेयरधारक 12.64 करोड़ शेयर बेचेंगे। IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है।

LIC ने खरीदे ₹465 करोड़ के शेयर

LIC के पास NSE में पहले से 10.72% हिस्सेदारी है। अब उसने एंकर बुक में ₹465.3 करोड़ के शेयर खरीदे हैं। इसके साथ LIC NSE के एंकर निवेशकों में सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

SBI Pension Funds, SBI Life, HDFC Life, HDFC Pension Fund, Axis Max Life, UTI Pension Fund और Kotak Mahindra Life जैसे इंश्योरेंस संस्थानों ने भी निवेश किया है। LIC समेत इन सभी इंश्योरेंस निवेशकों ने कुल ₹1,081.8 करोड़ लगाए हैं। यह कुल एंकर बुक का करीब 16% है।

विदेश से भी आया बड़ा निवेश

NSE की एंकर बुक में कई बड़े विदेशी निवेशकों ने पैसा लगाया है। Government Pension Fund Global ने ₹250 करोड़ और Monetary Authority of Singapore ने ₹200 करोड़ का निवेश किया। Abu Dhabi Investment Authority – Monsoon ने भी ₹200 करोड़ के शेयर खरीदे।

इसके अलावा Fidelity, Goldman Sachs, Eastspring Investments India, Integrated Core Strategies (Asia), Carmignac Portfolio और Ashoka WhiteOak जैसे निवेशकों ने भी NSE में दिलचस्पी दिखाई। Societe Generale, BNP Paribas, Morgan Stanley और BofA Securities भी एंकर बुक में शामिल हैं।

म्यूचुअल फंड्स ने भी खरीदे शेयर

NSE ने 29 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को 1.39 करोड़ शेयर आवंटित किए हैं। यह कुल एंकर बुक का 36.98% हिस्सा है। इन फंड्स ने 98 अलग-अलग स्कीम के जरिए आवेदन किया था।

इनमें SBI MF, ICICI Prudential AMC, HDFC AMC, Nippon Life India, Kotak Mahindra AMC, Axis MF, Aditya Birla Sun Life AMC, UTI AMC, Mirae Asset और Tata MF शामिल हैं। Invesco, Quant MF, WhiteOak Capital और HSBC MF ने भी हिस्सा लिया है।

NSE को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

यह IPO पूरी तरह OFS है। इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा। इश्यू से जुड़े खर्च को छोड़कर पूरी रकम मौजूदा शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी।

कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ₹70 करोड़ के शेयर भी रिजर्व किए हैं। कर्मचारियों को ये शेयर अंतिम इश्यू प्राइस से ₹170 प्रति शेयर की छूट पर मिलेंगे।

NSE का शेयर बाजार में दबदबा

NSE कुल टर्नओवर के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जून 2026 को खत्म हुई तीन महीने की अवधि में कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 93.05% थी। इक्विटी फ्यूचर्स में हिस्सेदारी 99.72% रही।

इक्विटी ऑप्शंस में NSE की हिस्सेदारी 68.48% थी। एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स और करेंसी ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी 100% रही। ये आंकड़े कुल प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर हैं।

22 सितंबर को अलॉटमेंट

NSE IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की उम्मीद है। वहीं शेयरों की BSE पर ट्रेडिंग 24 सितंबर से शुरू हो सकती है।

Stocks to Watch: 17 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, टाटा ग्रुप के स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

23000 से नीचे फिसला Nifty तो बढ़ सकता है सेलिंग प्रेशर, नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं तगड़ी कमाई

निफ्टी के लिए 23,000–23,100 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है और आने वाले हफ्ते में इस लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उनका कहना है कि कुल मिलाकर मार्केट का स्ट्रक्चर कमजोर बना हुआ है। निफ्टी 50 अपने हालिया हाई 24,774 से काफी नीचे आ गया है, लेकिन 23,000 के लेवल के नीचे जाने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने निफ्टी 50 को लेकर और क्या संभावना जताई, नए शुरू हो रहे सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडियाज क्या हैं, आइए जानते हैं…

क्या आपको उम्मीद है कि Nifty 50 अगले हफ्ते 23,000 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना रहेगा, या इस बात की ज्यादा संभावना है कि इंडेक्स इस सपोर्ट के नीचे चला जाएगा?

23,000-23,100 का जोन Nifty के लिए एक अहम सपोर्ट एरिया है और आने वाले हफ्ते में इस लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि इंडेक्स अपने हालिया हाई 24,774 से तेजी से नीचे आया है, लेकिन 23,000 के नीचे जाने (ब्रेकडाउन) की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इस जोन की अहमियत को देखते हुए, इन लेवल के आसपास कुछ कंसोलिडेशन या खरीदारी का रुझान दिख सकता है। हालांकि, कुल मिलाकर मार्केट का स्ट्रक्चर कमजोर बना हुआ है। Nifty लगातार 5 हफ्तों से गिरावट के साथ बंद हुआ है और अगस्त के पीक से 6 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुका है।

इंडेक्स अपने मुख्य शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेजेस से नीचे ट्रेड कर रहा है, मोमेंटम इंडिकेटर लगातार कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। डेली RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) ‘ओवरसोल्ड’ जोन में आ गया है और वीकली RSI भी नीचे की ओर जा रहा है, जो पॉजिटिव मोमेंटम की कमी को दिखाता है। इसके अलावा, भूराजनीतिक तनाव का बढ़ना, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे बाहरी कारण निवेशकों की धारणा पर असर डाल रहे हैं। इससे बीच-बीच में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ रहा है।

टेक्निकल नजरिए से 23,000-23,100 का दायरा 22,182 से 24,774 तक की पिछली रैली के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट और पहले के एक अहम ‘स्विंग लो’ का मजबूत संगम है। जब तक यह सपोर्ट बना रहेगा, इंडेक्स स्थिर होने और कंसोलिडेट करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, 23,000 के नीचे निर्णायक गिरावट से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और 22,800 व 22,500 के निचले स्तरों की ओर जाने का रास्ता खुल सकता है।

ऊपर की ओर, 23,600-23,650 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है। इस बाधा के ऊपर लगातार बने रहना पहला संकेत होगा कि चल रहा करेक्शन का दौर अपनी गति खो रहा है और एक मीनिंगफुल रिकवरी हो सकती है। तब तक, ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए और रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान देना चाहिए।

अगले हफ्ते के लिए आपके टॉप 2 स्टॉक आइडिया कौन से हैं?

LIC Housing Finance: शेयर 24 अगस्त के अपने ₹485 के निचले स्तर से लगभग 16 प्रतिशत रिकवरी देख चुका है। अगस्त के आखिर से, काउंटर में वॉल्यूम लगातार बढ़ा है। स्टॉक अब जरूरी शॉर्ट और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेजेस से ऊपर ट्रेड कर रहा है। RSI डेली टाइमफ्रेम पर 60 मार्क से थोड़ा ऊपर गया है, जो नए बुलिश मोमेंटम का संकेत देता है।

वीकली चार्ट पर MACD जीेरो लाइन के ऊपर चला गया है, जो ऊपर की तरफ मोमेंटम बनने का संकेत देता है। स्टॉक अब वीकली चार्ट पर अपने नीचे की ओर झुके हुए ट्रेंडलाइन रेजिस्टेंस से थोड़ा नीचे ट्रेड कर रहा है, मौजूदा प्राइस एक्शन और इंडिकेटर निकट अवधि में ब्रेकआउट की संभावना का संकेत दे रहे हैं। इसलिए, ₹540 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹560-565 के जोन में शेयर जमा करने की सलाह दी जाती है। ऊपर की तरफ, इसके शॉर्ट टर्म में ₹605 के लेवल को टेस्ट करने की संभावना है।

Five-Star Business Finance: यह पिछले 11 ट्रेडिंग सेशन से ₹540–513 जोन में कंसोलिडेट हो रहा था। स्टॉक ने वॉल्यूम में अच्छी बढ़ोतरी के सपोर्ट के साथ रेंज से ब्रेकआउट दिया है। ADX इंडिकेटर में DI+, DI- को पार कर गया है, जो दिखाता है कि बुल्स, सेलर्स पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। RSI, जो फ्लैट था, ब्रेकआउट के बाद ऊपर चला गया है, जो नए बुलिश मोमेंटम का इशारा है।

इसके अलावा, MACD लाइन थोड़ी सी जीरो लाइन को पार कर गई है और हिस्टोग्राम बार ऊपर उठने लगे हैं, जिससे बुलिश बायस और मजबूत हो रहा है। लगातार मोमेंटम आगे और तेजी का रास्ता बना सकता है। इसलिए, ₹530 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹545-555 के जोन में शेयर जमा करने की सलाह है। ऊपर की तरफ, यह शॉर्ट टर्म में ₹590 के लेवल को टेस्ट कर सकता है।

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क्या आपको उम्मीद है कि अगले हफ्ते भी HDFC Bank में खरीदारी का रुझान बना रहेगा?

HDFC Bank ने वीकली चार्ट पर अपने अहम सपोर्ट जोन (₹725–720) को तोड़ दिया है और नीचे आ गया है, जो लगातार कमजोरी का संकेत है। यह स्टॉक अपने मुख्य मूविंग एवरेजेस से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है, जो ब्रॉडर ट्रेंड में कमजोरी को दिखाता है। स्टॉक के लिए इमीडिएट रेजिस्टेंस ₹755–760 के जोन में है। जब तक HDFC Bank इस जोन के नीचे ट्रेड करेगा, तब तक अगले हफ्ते लगातार खरीदारी का रुझान दिखने की संभावना कम है।

क्या आपको भरोसा है कि Paytm अगले हफ्ते अपने रिकॉर्ड हाई को पार कर सकता है?

One 97 Communications (Paytm) डेली चार्ट पर ‘हायर-हाई’ स्ट्रक्चर बना रहा है और अपने मुख्य मूविंग एवरेजेस से ऊपर आराम से ट्रेड कर रहा है। यह लगातार तेजी के रुझान (bullish momentum) का संकेत है। ADX इंडिकेटर पर DI+ लाइन DI- लाइन के ऊपर है और दोनों के बीच का अंतर बढ़ गया है। यह बेयर्स पर बुल्स के मजबूत कंट्रोल को दिखाता है। ₹1,650–1,660 का 20-दिन का EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) जोन इमीडिएट सपोर्ट का काम कर सकता है। जब तक स्टॉक इस जोन के ऊपर है, तेजी का स्ट्रक्चर बना रहेगा, जिससे और ऊपर जाने और अगले हफ्ते रिकॉर्ड हाई से आगे निकलने की संभावना बढ़ जाती है।

क्या आपको उम्मीद है कि अगले हफ्ते भी Blue Star में खरीदारी का रुझान बना रहेगा?

डेली चार्ट पर ब्लू स्टार में पिछले सपोर्ट जोन ₹1,430–1,450 से जबरदस्त खरीदारी का रुझान देखा गया है। RSI, जो पहले स्थिर था, अब ऊपर की ओर बढ़ गया है, जो बुलिश मोमेंटम में तेजी का संकेत देता है। स्टॉक ने अपने 20-दिन और 50-दिन के EMA को भी फिर से हासिल कर लिया है, जो शॉर्ट-टर्म सेंटीमेंट में सुधार का संकेत है। जब तक स्टॉक ₹1,430–1,450 के सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहेगा, तब तक हालिया पॉजिटिव मोमेंटम बना रहेगा और अगले हफ्ते भी खरीदारी का रुझान जारी रह सकता है।

Stock Split: 6 महीनों में 245% का उछाल, अब 10 टुकड़ों में टूटेगा शेयर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NSE IPO का एंकरबुक, सबसे अधिक बोली लगा सकती है LIC, ये दिग्गज भी कतार में

NSE IPO: एनएसई के आईपीओ का इंतजार खत्म होने वाला है और जल्द ही यह खुलने वाला है। अब सामने आ रहा है कि इसके एंकरबुक में सबसे अधिक पैसा देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) लगा सकती है। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। हालांकि इसे लेकर अभी बातचीत चल रही है और इस पर कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है। एक सूत्र के मुताबिक एआईसी के बाद सबसे अधिक शेयर नॉर्वे के नॉर्गेस बैंक (Norges Bank) को मिल सकते हैं। हालांकि एंकर निवेशकों का अलॉटमेंट अभी तय नहीं हुआ है और इसमें बदलाव हो सकता है।

एक दूसरे सूत्र का कहना है कि ADAI (अबू धाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी), दिग्गज यूरोपीय निवेशक कार्मिग्नैक (Carmignac), अबूधाबी की लुनाटे (Lunate), जीआईसी और फिडेलिटी भी बातचीत कर रही है और एंकरबुक के तहत बड़ी बोली लगा सकती है। एक तीसरे शख्स ने बताया कि एसबीआई पेंशन, एसबीआई लाइफ और एचडीएफसी लाइफ भी इसमें पैसे डाल सकते हैं और चूंकि यह एक बड़ा आईपीओ है तो दुनिया के प्रमुख हेज फंड्स के भी इसमें हिस्सा लेने और बड़े निवेश की उम्मीद है।

16 सितंबर को खुलेगा NSE का एंकर बुक

इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स के लिए एनएसई का एंकर बुक 16 सितंबर को खुलेगा। इसके बाद पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए यह 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर तक खुला रहेगा। इसका ₹22,561.5 करोड़ का आईपीओ ₹1700-₹1785 के प्राइस बैंड में खुलेगा। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है और इसके तहत एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कनाडा पेंशन प्लान इंवेस्टमेंट बोर्ड और एरांडा इंवेस्टमेंट्स (मॉरीशस) समेत 10 मौजूदा शेयरहोल्डर्स 12.64 करोड़ शेयर बेचेंगे।

मार्केट में कैसी है स्थिति

टर्नओवर के हिसाब से एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। Redseer Report के मुताबिक जून तिमाही के आखिरी में एनएसई की कैश मार्केट में 93.05%, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.72%, इक्विटी ऑप्शंस में 68.48%, एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स में 100% और एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी ऑप्शंस में 100% हिस्सेदारी थी। वर्ल्ड फेडेरेशन ऑफ एक्सचेंजेज के मुताबिक वित्त विर्ष 2026 में दुनिया के अहम लिस्टेड स्टॉक एक्सचेंजों की तुलना में एनएसई सबसे बड़ा मल्टी-एसेट क्लास एक्सचेंज था। कैश इक्विटीज में ट्रेड्स की संख्या के आधार पर एनएसई की वैश्विक मार्केट में 11.38% और इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट्स के आधार पर 51.18% हिस्सेदारी थी।

कैसी है सेहत

वित्तीय मोर्चे पर एनएसई की सेहत पिछले वित्त वर्ष कमजोर हुई। वित्त वर्ष 2026 में एनएसई का मुनाफा 15.5% गिरकर ₹10,302.1 करोड़ और रेवेन्यू 3.1% घटकर ₹16,601.3 करोड़ पर आ गया। इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बात करें तो जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एनएसई का मुनाफा 6.7% बढ़कर ₹3,120.1 करोड़ और रेवेन्यू 13.1% चढ़कर ₹4,560.4 करोड़ पर पहुंच गया।

NSE के शेयर लिस्ट होते ही बन सकते हैं रॉकेट, एक्सपर्ट ने बताई कहां तक जा सकती है कीमत

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : मार्केट पर मंदड़ियों का कंट्रोल कायम, 23070 के लेवल तक गिर सकता है निफ्टी

Trade setup for today : 10 सितंबर को निफ्टी ने लगातार तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया और 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि,इस मामूली रिकवरी के लंबे समय तक टिके रहने की उम्मीद नहीं है। इसके पीछे कई कारण हैं। खराब होते टेक्निकल इंडिकेटर,वेस्ट एशिया में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से महंगाई की बढ़ती चिंताएं,और US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे फैक्टर बाजार का मूड खराब कर सकते है। ये सभी संकेत इक्विटी मार्केट में मंदी का दौर जारी रहने की ओर इशारा कर रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी पिछले दिन के निचले स्तर से नीचे जा सकता है और 23,300 के स्तर तक गिर सकता है। अगर इंडेक्स 23,300 के स्तर से नीचे जाता है,तो जून के निचले स्तर 23,070 तक और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऊपर की तरफ,23,500-23,600 की रेंज इंडेक्स के लिए सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस जोन का काम कर सकती है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (23,478) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 23,495, 23,522 और 23,566

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 23,407, 23,380 और 23,336

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

निफ्टी ने कल एक बुलिश कैंडल बनाई जिसमें नीचे की तरफ एक साफ विक दिखी। यह निचले स्तरों पर खरीदारी आने का संकेत है, लेकिन यह पिछले दिन के हाई से ऊपर नहीं जा पाया। सभी अहम मूविंग एवरेज नीचे की ओर ही बने रहे। RSI 28.94 पर था जबकि पिछले सेशन में यह 26.44 था। लेकिन यह अभी भी ओवरसोल्ड जोन और अपनी सिग्नल लाइन से नीचे बना हुआ है। MACD में और गिरावट आई और लगातार चौथे सेशन में रेड हिस्टोग्राम बार का साइज बढ़ा। ये सभी इंडिकेटर लगातार बनी कमजोरी की ओर इशारा करते हैं और बताते हैं कि मार्केट पर मंदड़ियों का कंट्रोल बना हुआ है।

बैंक निफ्टी (56,472) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,557, 56,638 और 56,769

पिवट पॉइंट के आधार पर सपोर्ट: 56,295, 56,214 और 56,083

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,655, 57,049

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,024, 55,675

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

बैंक निफ्टी में भी रिकवरी दिखी,लेकिन यह पिछले दिन के हाई से ऊपर बंद नहीं हो पाया और लोअर हाई-लोअर लो का पैटर्न बनाता रहा। बैंकिंग इंडेक्स में 0.31% की बढ़त हुई और डेली चार्ट पर ऊपरी शैडो के साथ एक बुलिश कैंडल बनी,जो खरीदारी आने का संकेत है, हालांकि ऊपरी लेवल पर बिकवाली का दबाव बना रहा। 10, 20, 50 और 100-डे EMA नीचे की ओर झुके रहे,जबकि RSI में थोड़ी बढ़त हुई लेकिन यह अपनी सिग्नल लाइन के नीचे 38.83 पर बना रहा। MACD ज़ीरो लाइन के नीचे और गिर गया और लाल हिस्टोग्राम बार लगातार आठवें सेशन में भी बढ़ता रहा। ये सभी इंडिकेटर लगातार बनी कमजोरी की ओर इशारा करते हैं और बताते हैं कि कल आई रिकवरी के बावजूद मार्केट पर मंदड़ियों का कंट्रोल बना हुआ है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

हाल ही में उछाल के बाद मार्केट के डर को मापने वाले इंडेक्स इंडिया VIX में गिरावट आई और यह 1.05 प्रतिशत गिरकर 11.795 पर आ गया। VIX का 12 के लेवल से नीचे बने रहना तेजड़ियों के लिए कुछ राहत की बात है। हालांकि,अगर VIX 12 के जोन से ऊपर जाता है तो बुल्स को सावधान रहने की जरूरत होगी।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 10 सितंबर को बढ़कर 0.77 हो गया,जबकि पिछले सेशन में यह 0.75 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

विदेशी निवेशकों की बेरुखी जल्दी दूर होने की उम्मीद नहीं, अगले 2-3 महीने बाजार के लिए काफी मुश्किल -अभय अग्रवाल

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कायन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, मणप्पुरम फाइनेंस, सेल

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: LIC हाउसिंग फाइनेंस

 

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