NSE IPO: 5.67 गुना सब्सक्राइब, हर 4 में से 3 रिटेल इनवेस्टर को शेयर अलॉटमेंट मिल सकता है

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ₹22,569 करोड़ का IPO सोमवार, 21 सितंबर को बंद हो गया। आखिरी दिन इश्यू को 5.67 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। निवेशकों ने 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.28 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई।

QIB यानी बड़े संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। उनका हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ। NII कैटेगरी 6.54 गुना और रिटेल हिस्सा 1.35 गुना सब्सक्राइब हुआ।

रिटेल निवेशकों को कितना मिल सकता है?

रिटेल हिस्सा 1.35 गुना भरा है। इस आधार पर शुरुआती अनुमान करीब 75% का है। अगर आसान भाषा में कहें तो हर चार में से करीब तीन रिटेल आवेदकों को शेयर मिल सकते हैं।

इसे पक्का अलॉटमेंट रेशियो नहीं मानना चाहिए। क्योंकि असल अलॉटमेंट वैध आवेदनों और IPO के नियमों के हिसाब से होगा।

NSE IPO के GMP में भारी गिरावट

NSE IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर था। एक लॉट में 8 शेयर रखे गए थे। अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹14,280 लगाने पड़े।

ग्रे मार्केट में NSE शेयर का GMP IPO के दौरान काफी नीचे आया है। लेटेस्ट GMP करीब 3% संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। शुरुआत में ये 18% के करीब था। GMP अनऑफिशियल होता है। इसे लिस्टिंग प्राइस या मुनाफे की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹6,746 करोड़

IPO से पहले NSE ने 189 एंकर निवेशकों से ₹6,746.18 करोड़ जुटाए थे। इन्हें ₹1,785 प्रति शेयर के भाव पर शेयर दिए गए। एंकर निवेशकों को 16 सितंबर को 3.78 करोड़ शेयर अलॉट किए गए।

LIC सबसे बड़ा व्यक्तिगत एंकर निवेशक रहा। उसे करीब ₹400.3 करोड़ के शेयर मिले। Norway का Government Pension Fund Global, Monetary Authority of Singapore और Abu Dhabi Investment Authority भी एंकर निवेशकों में शामिल रहे।

NSE को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

NSE का पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा।

इश्यू से जुड़े खर्च निकालने के बाद रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी। अपर प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यू करीब ₹4.42 लाख करोड़ है। IPO में कर्मचारियों के लिए ₹70 करोड़ तक का हिस्सा भी रखा गया था। पात्र कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर ₹170 प्रति शेयर की छूट मिली है।

22 सितंबर को अलॉटमेंट, 24 को लिस्टिंग

NSE IPO का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की उम्मीद है। शेयरों की BSE पर लिस्टिंग 24 सितंबर को प्रस्तावित है।

अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद निवेशक रजिस्ट्रार और स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर अपना स्टेटस चेक कर सकेंगे।

शेयर बाजार में NSE की कितनी हिस्सेदारी?

NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जून 2026 को खत्म तीन महीने में कैश मार्केट के टर्नओवर में NSE की हिस्सेदारी 93.05% रही।

इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी 99.72% और इक्विटी ऑप्शंस में 68.48% थी। वहीं, एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स और करेंसी ऑप्शंस में कुल प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर NSE की हिस्सेदारी 100% रही।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO: एंकर बुक से ₹6746 करोड़ जुटाए, LIC ने अकेले ₹465 करोड़ के शेयर खरीदे

NSE IPO: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE ने 16 सितंबर को एंकर निवेशकों से ₹6,746.2 करोड़ जुटाए। इसमें देश और विदेश के कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया। LIC, Government Pension Fund Global, Monetary Authority of Singapore, Fidelity, ADIA, Nippon Life और HDFC Life जैसे नाम इसमें शामिल हैं। LIC सबसे बड़ा खरीदार रहा।

NSE का ₹22,561.57 करोड़ का IPO 17 सितंबर को खुलेगा। निवेशक इसमें 21 सितंबर तक पैसा लगा सकेंगे। यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसमें मौजूदा शेयरधारक 12.64 करोड़ शेयर बेचेंगे। IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है।

LIC ने खरीदे ₹465 करोड़ के शेयर

LIC के पास NSE में पहले से 10.72% हिस्सेदारी है। अब उसने एंकर बुक में ₹465.3 करोड़ के शेयर खरीदे हैं। इसके साथ LIC NSE के एंकर निवेशकों में सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

SBI Pension Funds, SBI Life, HDFC Life, HDFC Pension Fund, Axis Max Life, UTI Pension Fund और Kotak Mahindra Life जैसे इंश्योरेंस संस्थानों ने भी निवेश किया है। LIC समेत इन सभी इंश्योरेंस निवेशकों ने कुल ₹1,081.8 करोड़ लगाए हैं। यह कुल एंकर बुक का करीब 16% है।

विदेश से भी आया बड़ा निवेश

NSE की एंकर बुक में कई बड़े विदेशी निवेशकों ने पैसा लगाया है। Government Pension Fund Global ने ₹250 करोड़ और Monetary Authority of Singapore ने ₹200 करोड़ का निवेश किया। Abu Dhabi Investment Authority – Monsoon ने भी ₹200 करोड़ के शेयर खरीदे।

इसके अलावा Fidelity, Goldman Sachs, Eastspring Investments India, Integrated Core Strategies (Asia), Carmignac Portfolio और Ashoka WhiteOak जैसे निवेशकों ने भी NSE में दिलचस्पी दिखाई। Societe Generale, BNP Paribas, Morgan Stanley और BofA Securities भी एंकर बुक में शामिल हैं।

म्यूचुअल फंड्स ने भी खरीदे शेयर

NSE ने 29 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को 1.39 करोड़ शेयर आवंटित किए हैं। यह कुल एंकर बुक का 36.98% हिस्सा है। इन फंड्स ने 98 अलग-अलग स्कीम के जरिए आवेदन किया था।

इनमें SBI MF, ICICI Prudential AMC, HDFC AMC, Nippon Life India, Kotak Mahindra AMC, Axis MF, Aditya Birla Sun Life AMC, UTI AMC, Mirae Asset और Tata MF शामिल हैं। Invesco, Quant MF, WhiteOak Capital और HSBC MF ने भी हिस्सा लिया है।

NSE को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

यह IPO पूरी तरह OFS है। इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा। इश्यू से जुड़े खर्च को छोड़कर पूरी रकम मौजूदा शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी।

कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ₹70 करोड़ के शेयर भी रिजर्व किए हैं। कर्मचारियों को ये शेयर अंतिम इश्यू प्राइस से ₹170 प्रति शेयर की छूट पर मिलेंगे।

NSE का शेयर बाजार में दबदबा

NSE कुल टर्नओवर के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जून 2026 को खत्म हुई तीन महीने की अवधि में कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 93.05% थी। इक्विटी फ्यूचर्स में हिस्सेदारी 99.72% रही।

इक्विटी ऑप्शंस में NSE की हिस्सेदारी 68.48% थी। एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स और करेंसी ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी 100% रही। ये आंकड़े कुल प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर हैं।

22 सितंबर को अलॉटमेंट

NSE IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की उम्मीद है। वहीं शेयरों की BSE पर ट्रेडिंग 24 सितंबर से शुरू हो सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO: एनएसई के शेयरों पर लगातार घट रहा जीएमपी, आईपीओ में बोली लगाने से पहले ये बातें जरूर जान लें

NSE IPO: एनएसई के आईपीओ के खुलने में अब सिर्फ एक दिन बाकी रह गया है। इस बीच शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम लगातार घट रहा है। यह आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। इसमें 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। शेयर की लिस्टिंग 24 सितंबर को होगी। इनवेस्टर्स को लंबे समय से इस आईपीओ का इंतजार रहा है।

शेयरों पर जीएमपी में लगातार गिरावट 

अनऑफिशियल मार्केट एक्टिविटी ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, एनएसई के शेयर के GMP यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट देखने को मिली है। अब शेयर पर जीएमपी घटकर करीब 10-11 फीसदी पर आ गया है। इनवेस्टरगेंस के मुताबिक, शेयर का जीएमपी 179 रुपये था, जो 10.03 लिस्टिंग गेंस का संकेत देता है। आईपीओ वॉच के मुताबिक, जीएमपी से शेयर पर 11.65 फीसदी लिस्टिंग गेंस का संकेत मिलता है। एक दिन पहले शेयर का जीएमपी 12 फीसदी से ज्यादा था।

डेरिवेटिव्स पर निर्भरता बड़ा रिस्क

जीएमपी में कमी के बीच एनालिस्ट्स का कहना है कि एनएसई की काफी निर्भरता डेरिवेटिव्स पर है, जो इसके लिए बड़ा रिस्क है। एनएसई के रेवेन्यू में ऑप्शंस ट्रांजेक्श फीस की बड़ी हिस्सेदारी है। पॉल मैनेजमेंट में रिसर्च हेड प्रसेनजीत पॉल ने कहा कि एनएसई का बिजनेस स्ट्रॉन्ग है। एक्सचेंज प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंज से काफी आगे है।

शेयर महंगा नहीं तो सस्ता भी नहीं

उन्होंने कहा, “प्राइस बैंड के 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर वैल्यूएशन FY26 की अर्निंग्स का करीब 43 गुना है। यह वाजिब है, लेकिन इसे कम नहीं कहा जा सकता। आगे एक्सचेंज की ग्रोथ कैपिटल मार्केट में पार्टिसिपेशन बढ़ने, कैश-मार्केट एक्टिविटी, नए प्रोडक्ट्स, डेटा, सूचकांकों और गिफ्ट सिटी पर निर्भर करेगा। सिर्फ मार्केट शेयर बढ़ने से काम नहीं चलेगा।”

अर्निंग्स ग्रोथ, कैश मार्केट वॉल्यूम पर रखनी होगी नजर

उन्होंने कहा, “डेरिवेटिव्स पर निर्भरता एक्सचेंज के लिए बड़ा रिस्क है। रेवेन्यू में ऑप्शन ट्रांजेक्शंस फीस का बड़ा योगदान है। लिस्टिंग के बाद इनवेस्टर्स को अर्निंग्स ग्रोथ, कैश मार्केट वॉल्यूम, ऑप्शंस एक्टिविटी और प्रॉफिटबिलिटी पर नजर रखनी होगी।” इनवेस्टर्स पर एनएसई के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान के बयान का भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि 2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर एमडीआर का असर कुछ समय के लिए पड़ेगा।

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बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर 

NSE का मानना है कि यूपीआई से 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज का ट्रॉजेक्शन वॉल्यूम पर थोड़ समय तक असर पड़ेगा। लेकिन, बाद सब सामान्य हो जाएगा। एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है। इसका मतलब है कि इस इश्यू में कई पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेच रहे हैं। हालांकि, यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर है। बाजार पर करीब बीते डेढ़ महीनों से दबाव दिख रहा है।

NSE IPO : 17 सितंबर में खुल रहे इश्यू में पैसा लगाएं या नहीं? जानिए ब्रोकरेज की राय, जोखिम और लेटेस्ट GMP

NSE IPO: कई साल के इंतजार के बाद देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE का अब IPO आने वाला है। NSE का IPO 17 सितंबर 2026 को खुलेगा। यह 21 सितंबर को बंद होगा। इसका प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है। शेयर की फेस वैल्यू ₹1 है।

यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी IPO से मिलने वाला पैसा NSE को नहीं मिलेगा। खर्च और टैक्स घटाने के बाद पूरी रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी। IPO का अलॉटमेंट 22 सितंबर को हो सकता है। वहीं, लिस्टिंग 24 सितंबर को होने की संभावना है। एंकर निवेशकों के लिए बोली 16 सितंबर को होगी।

NSE IPO का लेटेस्ट GMP

ग्रे मार्केट में NSE IPO के GMP में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। यह शुरुआत में ₹310 के आसपास था। लेकिन, अब घटकर ₹192 पर आ गया है। ये अपर प्राइस बैंड के हिसाब से 11.71% के लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। हालांकि GMP को लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं मानना चाहिए। ये बस आईपीओ की डिमांड का अंदाजा होता है।

NSE IPO की अहम डिटेल

पैमानाडिटेल
IPO कब खुलेगा17 सितंबर 2026
IPO कब बंद होगा21 सितंबर 2026
प्राइस बैंड₹1,700-₹1,785
लॉट साइज8 शेयर
न्यूनतम निवेश₹14,280
इश्यू का प्रकार100% OFS
संभावित लिस्टिंग24 सितंबर 2026
कुल इश्यू साइजकरीब ₹22,569 करोड़ तक
कर्मचारी छूट₹170 प्रति शेयर

NSE IPO पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज हाउस SAMCO Securities ने NSE IPO पर Subscribe की सलाह दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह IPO अच्छा मौका हो सकता है। ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड पर NSE का वैल्यूएशन FY2026 की कमाई का 42.89 गुना है।

SAMCO के मुताबिक NSE की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत मार्केट पोजिशन है। NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसके पास बड़ा निवेशक बेस है। टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत है। इसके अलावा कंपनी के पास अपना क्लियरिंग सिस्टम है। बैलेंस शीट भी मजबूत है। कंपनी पर फंड-बेस्ड कर्ज भी नहीं है।

NSE IPO में क्या जोखिम हैं?

NSE के लिए सबसे बड़ा जोखिम डेरिवेटिव्स पर ज्यादा निर्भरता है। FY2026 में सिर्फ ऑप्शंस से 60.22% रेवेन्यू आया था। ऐसे में नियमों में बदलाव का असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है। एक और चिंता इक्विटी ऑप्शंस में NSE की घटती हिस्सेदारी है। FY2024 में यह 96.86% थी। Q1 FY2027 में यह घटकर 68.48% रह गई।

कंपनी का रेवेन्यू कुछ बड़े ट्रेडिंग मेंबर्स पर भी निर्भर है। Q1 FY2027 में टॉप 10 ट्रेडिंग मेंबर्स से 47% रेवेन्यू आया। अगर इनमें से बड़े सदस्य दूसरी जगह चले जाते हैं या उनकी ट्रेडिंग गतिविधि घटती है, तो NSE के कारोबार पर असर पड़ सकता है।

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NSE IPO: लिस्टिंग के बाद एनएसई के शेयरों की डिमांड और सप्लाई की तस्वीर कैसी रहेगी?

एनएसई के आईपीओ से पर्दा उठ चुका है। इस महीने के आखिर में एक्सचेंज के शेयर लिस्ट हो जाएंगे। मार्केट में एनएसई के शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे। चूंकि एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जिससे इसके शेयरों पर करीबी नजर है। सवाल है कि लिस्टिंग के बाद एनएसई के शेयरों की डिमांड और सप्लाई की तस्वीर कैसी होगी?

4 लाख करोड़ के एम-कैप के हिसाब से शेयर की सप्लाई कम

सीएनबीसी-टीवी18 के साथ शेयर किए गए एक वीडियो एनालिसिस में Fident Asset Management के फाउंडर और सीआईओ की तरफ से कई अहम बाते बताई गई हैं। कहा गया है कि अगर 50 फीसदी एलिजिबल शेयरहोल्डर्स भी लिस्टिंग के दिन एग्जिट करते हैं तो सप्लाई का डेटा टोटल कैपिटल बेस का करीब 2.75 फीसदी रहेगा। यह करीब 14,000 करोड़ रुपये का होगा, जो 4.41 लाख के मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से काफी कम संख्या है।

शेयरों से एग्जिट करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है

इस वीडियो में यह कहा गया है कि कैटेगरी I और II अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स (AIF), वेंचर कैपिटल फंड्स और FVCIs लिस्टिंग के दिन शेयर बेच सकते हैं। हालांकि, ऐसा तभी होगा जब उनके पास शेयर छह महीनों से हों। बाकी सभी मौजूदा शेयरहोल्डर्स लिस्टिंग के छह महीने बाद ही शेयर बेच सकेंगे।

FTSE सूचकांकों का जल्द हिस्सा बनेगा शेयर

इसका मतलब है कि लिस्टिंग के दिन एनएसई के प्री-ऑफर कैपिटल का सिर्फ 5.48 फीसदी शेयर लिस्टिंग के दिन बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसका मतलब है कि कम से कम पहले छह महीनों के लिए बाजार में शेयर का फ्री-फ्लोट कम बना रहेगा। Fident का मानना है कि आईपीओ में NSE के मार्केट कैपिटलाइजेशन और लिस्टिंग के बाद की स्थिति को देखते हुए इस बात की काफी संभावना है कि यह FTSE सूचकांकों का जल्द हिस्सा बनेगा। MSCI में इसका शामिल होना इसके फ्री-फ्लोट पर निर्भर करेगा।

शेयर बीएसई के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होंगे

एनएसई के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट होंगे, लेकिन एक्सचेंज के कई दूसरे सूचकांकों में ये धीरे-धीरे शामिल होंगे। Fident का मानना है कि शेयर जून 2028 तक ही सेंसेक्स का हिस्सा बन सकेंगे। Fident का कहना है कि एक बार एनएसई के शेयर के BSE 500 इंडेक्स में शामिल हो जाने पर इसकी ज्यादा डिमांड एक्टिव फंड्स की तरफ से आएगी न कि पैसिव फंड्स की तरफ से। इसकी वजह यह है कि ज्यादा एक्टिव फंड्स का बेंचमार्क BSE 500 इंडेक्स है।

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17 सितंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा आईपीओ

Fident की रिपोर्ट में कहा गया है कि म्यूचुअल फंड्स का करीब 2 लाख करोड़ रुपये के AUM का बेंचमार्क BSE 500 है। 2.2 फीसदी वेटेज के साथ बीएसई 500 में शेयर की एंट्री का मतलब है कि एनएसई के करीब 11,000 करोड़ रुपये के शेयरों की डिमांड होगी। NSE का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 17 सितंबर को ओपन होगा। कंपनी ने 1,700-1,785 का प्राइस बैंड तय किया है। इसका मतलब है कि एक्सचेंज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4.41 लाख करोड़ रुपये का होगा।

NSE के सीईओ ने कहा- अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेड की इजाजत के लिए अप्लिकेशन नहीं दिया

एनएसई के आईपीओ के खुलने से पहले एक्सचेंज के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने 11 सितंबर को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि एनएसई ने खुद के प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर की ट्रेडिंग की इजाजत मांगने के लिए सेबी के पास अप्लाई नहीं किया है। एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। इसमें 21 सितंबर तक निवेश किया जा सकता है।

1700-1785 रुपये का प्राइस बैंड

ब्लूमबर्ग ने पिछले महीने सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि एनएसई के शेयर औपचारिक रूप से बीएसई पर लिस्ट होंगे, लेकिन ‘परमिटेड टू ट्रेड’ कैटेगरी में शेयर की ट्रेडिंग एनएसई के अपने प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। एनएसई ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,700-1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है।

24 सितंबर को लिस्ट होंगे शेयर 

एंकर इनवेस्टर्स के लिए यह आईपीओ 16 सितंबर को खुल जाएगा। शेयर 24 सितंबर को बीएसई पर लिस्ट होने की संभावना है। चौहान ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “एनएसई भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज है। यह दुनिया के सबसे एक्सचेंजों में से एक है। एनएसई का मकसद सेविंग्स कैपिटल में चैनलाइज करना है।” उन्होंने कहा कि एनएसई ने उस मकसद को पूरा किया है, जिसके लिए फाउंडर्स ने इसे शुरू किया था।

सबसे बड़े एक्सचेंजों में शामिल 

उन्होंने कहा, “एनएसई सबसे बड़े वर्टिकली इंटिग्रेटेड एक्सचेंजों में से एक है, क्योंकि हमारी खुद की टेक्नोलॉजी है। कुछ एक्सचेंज कमोडिटीज या इक्विटीज पर फोकस करते हैं। हम कई एसेट क्लास कवर करते हैं, जिनमें कमोडिटीज, करेंसीज, इलेक्ट्रिसिटी और यहां तक कि चैरिटी भी शामिल है।”

कैश मार्केट में 95% हिस्सेदारी

एनएसई का प्रॉफिट FY26 में 10,300 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुकाबले 15 फीसदी कम है। एक्सचेंज का रेवेन्यू अप्रैल 2019 से अप्रैल 2026 के बीच दोगुना हो गया। इसमें इंडिया ऑप्शंस ट्रेडिंग में बढ़ती दिलचस्पी का हाथ है। कैश मार्केट में एनएसई की हिस्सेदारी करीब 95 फीसदी है, जबकि इक्विटी डेरिवेटिव्स में इसकी हिस्सेदारी 75 फीसदी है। एनएसई ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट्स के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है।

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इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल

एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि एक्सेंज इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा। एक्सचेंज के कुछ पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेचेंगे। इसलिए आईपीओ से कोई पैसा एनएसई को नहीं मिलेगा। पहले इस आईपीओ का आकार 30,000 करोड़ रहने होने का अनुमान था। लेकिन, अब एनएसई ने इसका साइज घटा दिया है।

NSE IPO में बोली लगाने की सोच रहे हैं? पहले जान लीजिए शेयर पर कितना चल रहा GMP

एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। प्राइस बैंड सहित इश्यू की दूसरी जानकारियां सामने आ गई हैं। अगर आप देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के आईपीओ में बोली लगाने की सोच रहे हैं तो पहले यह जान ले कि इस शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) कितना चल रहा है।

शेयर के जीएमपी में आई है गिरावट 

NSE के शेयर के जीएमपी में 11 सितंबर को गिरावट आई। ग्रे मार्केट की गतिविधियों को ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, एनएसई के शेयर पर 10-11 फीसदी जीएमपी चल रहा है। इनवेस्टरगेन ने प्रति शेयर 180 रुपये का जीएमपी बताया है। इसका मतलब है कि इस शेयर की लिस्टिंग पर 10.08 फीसदी कमाई हो सकती है।

10-11 फीसदी लिस्टिंग गेंस के संकेत

आईपीओवॉच ने एनएसई के शेयर पर जो जीएमपी बताया है, उसके हिसाब से इस शेयर से 10.53 लिस्टिंग गेंस हो सकता है। इस हफ्ते की शुरुआत में शेयर का जीएमबी 285 रुपये था। तब एनएसई ने प्राइस बैंड का ऐलान नहीं किया था। 285 रुपये जीएमपी का मतलब था कि इस शेयर की लिस्टिंग से 15.97 का गेंस हो सकता था।

21 सितंबर तक लगा सकते हैं बोली

एनएसई के आईपीओ में 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। यह इश्यू एंकर इनवेस्टर्स के लिए 16 सितंबर को खुल जाएगा। एनएसई ने 1,700-1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज का यह आईपीओ 22,561.5 करोड़ रुपये का है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर एक्सचेंज 4.42 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन चाहता है।

देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज 

एनएसई का मुकाबला बीएसई यानी बॉम्बे स्टॉक एक्सेंचज से है। एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है, जबकि BSE न सिर्फ भारत बल्कि एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। Redseer की रिपोर्ट के मुताबिक, कैश मार्केट में एनएसई का मार्केट शेयर 93.05 फीसदी था, इक्विटी फ्यूचर्स में मार्केट शेयर 99.72 फीसदी और इक्विटी ऑप्शंस में 68.48 फीसदी था। यह डेटा जून 2026 में खत्म तीन महीनों के टोटल प्रीमियम टर्नओवर पर आधारित है।

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आईपीओ मार्केट में बढ़ी है हलचल

पिछले कुछ हफ्तों में आईपीओ मार्केट में गतिविधियां काफी बढ़ी हैं। इस हफ्ते कुल 16 आईपीओ बाजार में हैं। हाल में कई आईपीओ को इनवेस्टर्स का स्ट्रॉन्ग रिस्पॉन्स मिला है। कुछ कंपनियों के शेयर काफी ज्यादा प्रीमियम पर लिस्ट हुए हैं। कुछ शेयरों में तो लिस्टिंग के बाद लगातार तेजी दिखी है। मिल्की मिस्ट का शेयर इसका उदाहरण है।

NSE IPO के बारे में बड़ा अपडेट, 11 सितंबर को होगा शेयर के प्राइस बैंड का ऐलान

एनएसई के आईपीओ में बोली लगाने की सोच रहे हैं तो तैयार रहें। एक्सचेंज 11 सितंबर यानी शुक्रवार को शेयर के प्राइस बैंड का ऐलान करेगा। सीएनबीसी-टीवी18 ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। एनएसई ने 9 सितंबर को सेबी के पास अपेडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस फाइल किया। यह इस बात का संकेत है कि एक्सचेंज आईपीओ का प्रोसेस जल्द पूरा करना चाहता है।

इस आईपीओ में कुछ पुराने इनवेस्टर्स बेच रहे शेयर

NSE के आईपीओ के अब 23,000 करोड़ रुपये के रहने का अनुमान है। पहले एक्सचेंज का प्लान 30,0000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश करने का था। कुछ पुराने शेयरहोल्डर्स ने अब आईपीओ के जरिए पहले से कम शेयर बेचने का फैसला किया है। इस वजह से आईपीओ का साइज कम रहेगा। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है।

एक्सचेंज की वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रह सकती है

इनवेस्टर्स को इस आईपीओ के बारे में कुछ बातें समझ लेने की जरूरत है। शेयर का प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये रह सकता है। एक्सचेंज अब 5.5 फीसदी शेयर बेच रहा है, जिसके लिए एनएसई की वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रुपये हो सकती है। पहले एक्सचेंज की वैल्यूएशन 5.26 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान था।

ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में बीएसई से काफी आगे हैं एनएसई

एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका मुकाबला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से है। लेकिन, NSE बीएसई से काफी आगे है। कैश और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) दोनों में ही इसकी हिस्सेदारी बीएसई से काफी ज्यादा है। हालांकि, बीएसई न सिर्फ भारत बल्कि एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। एनएसई के शेयर सिर्फ बीएसई पर लिस्ट होंगे। बीएसई के शेयर भी सिर्फ एनएसई पर लिस्ट होंगे। किसी एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर शेयर लिस्ट कराने की इजाजत नहीं है।

बीएसई के शेयर ने लिस्टिंग के बाद दिया है छप्परफाड़ रिटर्न

बीएसई के शेयरों ने लिस्टिंग के बाद से जिस तरह का रिटर्न दिया है, उससे इनवेस्टर्स की दिलचस्पी एनएसई के आईपीओ में बढ़ी है। इनवेस्टर्स लंबे समय से एनएसई के आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, लिस्टिंग के बाद एनएसई के शेयरों का प्रदर्शन कैसा रहेगा, इस बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन, यह तय है कि बीएसई और एनएसई देश के दो सबसे बड़े एक्सचेंज हैं। देश में स्टॉक मार्केट्स में पार्टिसिपेशन बढ़ने का फायदा दोनों ही एक्सचेंजों को होगा।

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बीएसई का शेयर 2017 में एनएसई पर लिस्ट हुआ था

बीएसई का आईपीओ 2017 की शुरुआत में आया था। कंपनी ने 806 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर इनवेस्टर्स को शेयर एलॉट किए थे। शेयर की लिस्टिंग करीब 33 फीसदी प्रीमियम के साथ 1,085 रुपये पर हुई थी। तब बीएसई की वैल्यूएशन करीब 4,400 करोड़ रुपये लगाई गई थी। लिस्टिंग के बाद से इस शेयर ने निवेशकों को मालामाल किया है। स्टॉक की कीमत 3,273 रुपये चल रही है। इसका मतलब है कि इस शेयर ने निवेशकों का पैसा सिर्फ 9 साल में करीब 32 गुना किया है।

NSE IPO: बैंक ऑफ बड़ौदा की OFS में 35% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी, जानिए आईपीओ का पूरा अपडेट

NSE IPO: पब्लिक सेक्टर का बैंक ऑफ बड़ौदा NSE में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचने जा रहा है। बैंक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए NSE के IPO में 76,90,375 तक शेयर बेच सकता है। यह बैंक की NSE में कुल हिस्सेदारी का 35% है। बिक्री के लिए जरूरी रेगुलेटरी मंजूरी लेनी होगी।

NSE के शेयर एस्क्रो अकाउंट में पहुंचे

Bank of Baroda ने बताया कि OFS की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत NSE के शेयर 8 सितंबर 2026 को एस्क्रो अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। NSE के मुताबिक, यह बिक्री सितंबर 2026 के अंत तक पूरी हो सकती है।

बिक्री के बाद मिलेगी रकम

Bank of Baroda को शेयर बेचने की रकम OFS पूरा होने के बाद मिलेगी। बैंक अपने NSE शेयरों को प्रस्तावित IPO में बेच रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक को NSE से ₹76.90 करोड़ का डिविडेंड भी मिला था।

₹30,000 करोड़ का हो सकता है NSE IPO

NSE का करीब ₹30,000 करोड़ का IPO 18 सितंबर को खुल सकता है। इसके 25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है, तो यह 2024 के Hyundai Motor India के ₹27,870 करोड़ के IPO को पीछे छोड़ देगा। इस तरह यह भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।

15 सितंबर को आ सकता है प्राइस बैंड

NSE IPO का प्राइस बैंड 15 सितंबर को घोषित होने की उम्मीद है। इसके बाद 17 सितंबर को एंकर बुक खुलेगी। पब्लिक इश्यू 18 सितंबर को खुल सकता है। यह 21 और 22 सितंबर को भी खुला रह सकता है।

नए शेयर जारी नहीं होंगे

NSE का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें ₹1 फेस वैल्यू वाले 14.89 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे। ये NSE की पेड-अप इक्विटी कैपिटल के करीब 6% के बराबर हैं। इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यानी IPO से NSE को सीधे कोई पैसा नहीं मिलेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE दुनिया के 30 से ज्यादा इनवेस्टर्स को इस महीने अपने आईपीओ के बारे में बताएगा

एनएसई इस महीने दुनिया के 30 से ज्यादा बड़े इनवेस्टर्स को अपने आईपीओ के बारे में जानकारी देगी। एक्सचेंज ने पिछले महीने सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए थे। इस साल दो बड़े मेगा आईपीओ बाजार में आने वाले हैं। एनएसई के अलावा जियो प्लेटफॉर्म्स का भी आईपीओ आने वाला है। ये दोनों ही बड़े आईपीओ होंगे।

एनएसई के आईपीओ के बारे में जानकारी देने वाले सूत्रों ने बताया कि अगले हफ्ते इनवेस्टर मीटिंग्स शुरू हो जाने की उम्मीद है। एक्सचेंज के शेयरों की लिस्टिंग अक्तूबर में हो जाने की उम्मीद है। इस बारे में पूछने पर एनएसई के प्रवक्ता ने कहा कि एक्सचेंज ने रेगुलेटर के पास पेपर फाइल कर दिए हैं। इस वक्त इस बारे में इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती।

रायटर्स ने पिछले महीने अपने सूत्रों और प्राइवेट मार्केट ट्रेड्स के हवाले से बताया था कि एनएसई का आईपीओ 3.3 अरब डॉलर का हो सकता है। एनएसई के मौजूदा शेयरहोल्डर्स आईपीओ में करीब 6 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। भारत के दूसरे बड़े एक्सचेंज BSE का आईपीओ 2017 में आया था। लिस्टिंग के बाद से बीएसई के शेयर की कीमत 30 गुना से ज्यादा हो गई है।

बीएसई का मुकाबला एनएसई से है। बीते कुछ सालों में बीएसई के प्रदर्शन में सुधार दिखा है। FY26 में इसकी रेवेन्यू ग्रोथ 88 फीसदी रही। एनएसई के रेवेन्यू में इस दौरान 3 फीसदी की गिरावट आई। इसमें डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के सेबी के सख्त नियमों का ब़ड़ा हाथ है। हालांकि, एनएसई का रेवेन्यू बीएसई का करीब छह गुना है।

NSE इनवेस्टर्स को अपने संभावित प्रदर्शन के बारे में बताएगा। वह इनवेस्टर्स को बताएगा कि अगले पांच सालों में कैश इक्विटीज और इक्विटीज फ्यूचर्स की सालाना टर्नओवर ग्रोथ 12 फीसदी रह सकती है। इक्विटी ऑप्शंस की ग्रोथ अगले पांच सालों में सालाना 10 फीसदी रह सकती है। अभी इक्विटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग में एनएसई की हिस्सेदारी 100 फीसदी है। कैश मार्केट में हिस्सेदारी 93 फीसदी है और इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी है।

एनएसई ने कहा है कि भारत में शेयर बाजार तक लोगों की पहुंच अभी विकसित देशों के मुकाबले बहुत कम है। इसलिए शेयर ट्रेडिंग का वॉल्यूम बढ़ने की काफी ज्यादा संभावना है। एनएसई को करेंसी डेरिवेटिव्स मार्केट में भी अपनी ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद है। एनएसई का सीनियर मैनेजमेंट अगले हफ्ते से संस्थागत निवेशकों से मुलाकात का सिलसिला शुरू करेगा। मैनेजमेंट सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग इस महीने के अंत तक रोडशो कर सकता है।