HDFC Bank के नए CEO के सामने बड़ी चुनौती होगी, क्या नई लीडरशिप निवेशकों का भरोसा लौटा पाएगी?

HDFC Bank के MD और CEO शशिधर जगदीशन के पद छोड़ने के फैसले के बाद अब नए CEO की तलाश शुरू हो गई है। यह सिर्फ नेतृत्व में बदलाव नहीं है। बैंक के सामने निवेशकों का भरोसा लौटाने और गवर्नेंस से जुड़े सवालों को पीछे छोड़ने की भी बड़ी चुनौती है।

बैंक ने शनिवार को बताया कि शशिधर जगदीशन दोबारा नियुक्ति नहीं लेंगे। उनके पद छोड़ने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि पिछले कई महीनों से उनके कार्यकाल को बढ़ाने की अटकलें चल रही थीं। उनका आखिरी वर्किंग डे 26 अक्टूबर होगा। अब बैंक का बोर्ड नए CEO की नियुक्ति के लिए RBI से मंजूरी मांगेगा। नया CEO बैंक के भीतर से भी हो सकता है और बाहर से भी।

2020 में संभाली थी बैंक की कमान

शशिधर जगदीशन HDFC Bank में करीब तीन दशक से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2020 में आदित्य पुरी के बाद बैंक की कमान संभाली थी। आदित्य पुरी ने 20 साल से ज्यादा समय तक बैंक का नेतृत्व किया था।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जगदीशन के कार्यकाल में बैंक की बैलेंस शीट तेजी से बढ़ी। उनके नेतृत्व में 2023 में HDFC Bank का देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी HDFC Ltd के साथ मर्जर भी हुआ। हालांकि, उनके कार्यकाल के आखिरी दौर में बैंक के नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर कई सवाल खड़े हुए।

IIFL Capital ने क्या कहा?

IIFL Capital के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिकिन शाह का कहना है कि जगदीशन का दोबारा नियुक्ति नहीं लेना शेयर के लिए बनी बड़ी अनिश्चितता को खत्म कर सकता है। उनका मानना है कि अगर RBI छोटा कार्यकाल मंजूर करता, तो शेयर पर दबाव और लंबे समय तक बना रह सकता था।

शाह के मुताबिक, अगर बैंक किसी भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार को CEO बनाता है, तो इससे नेतृत्व में नया बदलाव देखने को मिल सकता है। नए CEO को बैंक का नेतृत्व करने के लिए लंबा समय भी मिल सकता है।

शेयर ने इंडेक्स से कमजोर प्रदर्शन किया

HDFC Bank भारत का सबसे मूल्यवान बैंक है। इसका मार्केट कैप करीब 116 अरब डॉलर है। इसके बावजूद इस साल बैंक का शेयर दबाव में रहा है।

इस साल शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले Nifty Bank में सिर्फ 3.5% की गिरावट रही है। HDFC Bank का यह प्रदर्शन अपने बैंकिंग इंडेक्स और बड़े प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले काफी कमजोर रहा है। 2003 के बाद यह बैंक के शेयर का सबसे खराब रिलेटिव प्रदर्शन है।

गवर्नेंस को लेकर क्यों उठे सवाल?

पिछले कुछ समय में बैंक को कई विवादों का सामना करना पड़ा है। पिछले साल दुबई के स्थानीय रेगुलेटर ने प्रोसेस में खामियां मिलने के बाद HDFC Bank की दुबई ब्रांच को नए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया था।

मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मतभेदों का हवाला दिया था। बाद में उन्होंने कहा कि दुबई रेगुलेटर से जुड़े मुद्दों को बैंक ने जिस तरह संभाला, उससे उन्हें चिंता हुई थी। हालांकि, HDFC Bank ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। RBI ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा है कि बैंक में गवर्नेंस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।

बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग पर कार्रवाई

बैंक पर सवाल तब और बढ़े, जब एक मीडिया रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि बैंक ने एक सरकारी कंपनी को ज्यादा ब्याज दिया। इसे कथित तौर पर मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया।

जुलाई में बैंक के बोर्ड ने इस मामले में जगदीशन समेत तीन बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की। बोर्ड ने कहा कि डिपॉजिट रेट तय करने से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने अपनी व्यावसायिक सीमा से आगे जाकर फैसले लिए थे।

बैंक के सामने अमेरिका में शेयरधारकों की संभावित कानूनी कार्रवाई का भी जोखिम है। निवेशकों ने मिस-सेलिंग के आरोप भी लगाए हैं। बैंक ने कहा है कि वह इन आरोपों का मजबूती से बचाव करेगा।

नए CEO का जल्दी चयन जरूरी

नए CEO की नियुक्ति में ज्यादा देरी बैंक के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर सकती है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद यह दबाव पहले ही बढ़ चुका है।

अब निवेशक यह देखेंगे कि नया CEO कौन बनता है। बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि नेतृत्व परिवर्तन कितनी आसानी से होता है। नए CEO को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि बैंक की गवर्नेंस व्यवस्था मजबूत है और बैंक की ग्रोथ पर पूरा फोकस रहेगा।

HDFC Ltd के मर्जर की चुनौतियां

2023 में HDFC Ltd के साथ हुए मर्जर के बाद बैंक को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मर्जर के बाद बैंक के पास लंबी अवधि वाले होम लोन का बड़ा पोर्टफोलियो आ गया। इससे बैंक की लिक्विडिटी और मार्जिन पर दबाव पड़ा है।

नए CEO के सामने इन चुनौतियों को संभालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। बैंक को मर्जर का पूरा फायदा निकालने के साथ अपनी ग्रोथ और मुनाफे में सुधार करना होगा।

बाजार के लिए क्यों अहम है HDFC Bank?

HDFC Bank की Nifty 50 में करीब 10% हिस्सेदारी है। इसलिए इस शेयर की बड़ी चाल का असर पूरे इंडेक्स पर पड़ सकता है। बैंक के शेयर में गिरावट ने हाल के समय में Nifty पर भी दबाव बनाया है।

Nifty 50 में इस साल करीब 7.5% की गिरावट आई है। इसके मुकाबले MSCI Asia Pacific Index करीब 22% चढ़ा है। ऐसे में HDFC Bank के शेयर का कमजोर प्रदर्शन भारतीय बाजार के लिए भी एक अहम मुद्दा बन गया है।

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक की कमान कौन संभालता है। निवेशक नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया, नए CEO के आने के बाद बैंक की ग्रोथ और गवर्नेंस मानकों को भी करीब से देखेंगे। अब नया नेतृत्व ही तय करेगा कि HDFC Bank आगे कितनी जल्दी निवेशकों का भरोसा वापस जीत पाता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank के नए CEO कौन होंगे? कैजाद भरूचा का नाम सबसे आगे, बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश

HDFC Bank New CEO: प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा लेंडर HDFC Bank अक्टूबर में नए एमडी और CEO का ऐलान कर सकता है। मौजूदा एमडी और CEO शशिधर जगदीशन अक्टूबर में अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। बैंक अपने डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा का नाम आगे कर सकता है। हालांकि, अभी इस पर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

बाहरी उम्मीदवार भी तलाश रहा बैंक

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैंक एक बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश कर रहा है। RBI के नियम के तहत CEO पद के लिए एक से ज्यादा नाम भेजने होते हैं। बैंक जिन नामों का प्रस्ताव देगा, उन पर RBI फैसला करेगा। HDFC Bank और कैजाद भरूचा ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्यों अहम है कैजाद भरूचा का नाम

कैजाद भरूचा बैंक के पुराने अधिकारियों में शामिल हैं। वह रिटेल और होलसेल, दोनों बिजनेस संभाल रहे हैं। इसलिए उन्हें जगदीशन का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। वह 2029 तक रिटायर नहीं होंगे, जो उनके पक्ष में एक अहम बात है।

RBI के नियमों में कैसे फिट बैठते हैं

RBI के नियमों के तहत फुल-टाइम डायरेक्टर का अधिकतम कार्यकाल 15 साल हो सकता है। 2029 तक भरूचा के 15 साल पूरे होंगे। ऐसे में वह CEO पद के लिए पात्र हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर कार्यकाल की सीमा में छूट के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

जगदीशन ने दोबारा कार्यकाल क्यों नहीं लिया

शनिवार को HDFC Bank ने बताया कि शशिधर जगदीशन ने दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। वह अक्टूबर 2020 से बैंक के MD और CEO हैं। उनका दूसरा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। बैंक ने उनके फैसले के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई।

छह महीने से नेतृत्व को लेकर उठापटक

पिछले करीब छह महीने HDFC Bank के लिए आसान नहीं रहे हैं। मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि बैंक की कुछ प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से मेल नहीं खातीं। इसके बाद बैंक के टॉप मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठने लगे।

जांच में नहीं मिले आरोपों के सबूत

चेयरमैन के आरोपों की बाद में बाहरी कानूनी समीक्षा कराई गई। इस जांच में गवर्नेंस से जुड़े आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, पिछले महीने बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग के एक अलग मामले में जगदीशन समेत चार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। इससे बैंक के नेतृत्व पर दबाव बढ़ा।

शेयर पर भी दिखा असर

इस साल HDFC Bank के शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद गिरावट और तेज हो गई। जून के अंत तक बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 40% थी। 2023 में HDFC Ltd के साथ हुए बड़े मर्जर का फायदा भी निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखा है।

नए CEO के सामने क्या चुनौती

HDFC Bank को अब जल्द नया CEO चुनना है। बोर्ड ने भी उत्तराधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने की बात कही है। नए CEO के सामने शेयर की गिरावट रोकने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की चुनौती होगी। साथ ही HDFC Ltd के साथ मर्जर का पूरा फायदा निकालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank News: बैंक के एमडी शशिधर जगदीशन नहीं चाहेंगे पुनर्नियुक्ति, अक्तूबर में होंगे रिटायर

एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शशिधर जगदीशन पुनर्नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उन्होंने यह फैसला ले लिया है। वह 26 अक्तूबर, 2026 को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। बैंक ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है। एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है।

HDFC Bank ने कहा है कि शशिधर जगदीशन ने अपने फैसले के बारे में 29 अगस्त को बैंक के बोर्ड को बताया। बैंक ने कहा है कि अनुरोध करने के बावजूद उन्होंने अपनी पुनर्नियुक्ति स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। इस वजह से वह एचडीएफसी बैंक की सेवा से 26 अक्तूबर, 2026 को रिटायर करना चाहेंगे।

एचडीएफसी बैंक ने बैंक की ग्रोथ और स्टैबिलिटी के लिए जगदीशन की प्रतिबद्धता, लीडरशिप के लिए उनकी तारीफ की है। बैंक ने कहा है कि एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी के विलय में भी उनकी अहम भूमिका रही। बैंक के बोर्ड ने बेहतर भविष्य के लिए जगदीशन को शुभकामना दी है।

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जगदीशन के फैसले के बाद बैंक ने कहा कि बैंक ने जल्द उनके उत्तराधिकारी की तलाश की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। तय समयसीमा के तहत यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। बैंक का शेयर 29 अगस्त को 1.20 फीसदी चढ़कर 719.50 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 24 फीसदी गिरा है।

सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान में नया मोड़, LICHF, केनरा बैंक, यूनियन बैंक NCLT के एप्रूवल को चैलेंज करेंगे

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान का विरोध किया है। वे चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल से मिले एप्रूवल को अपीलीय ट्राइब्यूनल में चैलेंज करेंगे।

तीनों मिलकर NCLAT में रिपेमेंट प्लान को करेंगे चैलेंज

LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India ने कहा है कि चंद्रा की इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स में उनकी (तीनों की मिलाकर) 8.45 फीसदी वोटिंग शेयर है। उन्होंने कहा कि वे इस रिपेमेंट प्लान का विरोध करते हैं। इस बारे में LIF HF ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है, “इस प्लान को आखिर में इसलिए मंजूरी मिली क्योंकि दूसरे फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की तरफ से पेश प्लान के पक्ष में कुल 80.81 फीसदी वोट मिले।”

तीनों ने NCLT  में भी रिपेमेंट का विरोध किया था

एलआईसी एचएफ ने कहा कि वह तुरंत नेशनल कंपनी लॉ एपेलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में अपील फाइल करेगी। इसमें उसके साथ दूसरी सरकारी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस भी होंगे। Canara Bank ने कहा है कि उसने रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था। वह NCLT के ऑर्डर को NCLAT में चैलेंज करेगा।

इन तीनों का कुल वोटिंग शेयर सिर्फ 8.45 फीसदी 

केनरा बैंक ने कहा है, “उसने (1.60 वोटिंग शेयर) दूसरी सरकारी कंपनियों एलआईसी एचएफ (6.09 फीसदी वोटिंग शेयर) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (0.76 फीसदी वोटिंग शेयर) के साथ इस प्लान का विरोध किया था और चंद्रा की तरफ से पेश 6.25 करोड़ रुपये के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ वोटिंग की थी। “

मामले की फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की गई थी

बैंक ने यह भी कहा है कि उसने फॉरेंसिक ऑडिट की भी मांग की थी, लेकिन उसके पास माइनॉरिटी वोटिंग शेयर होने से उसके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। अब वह NCLT के ऑर्डर को NCLAT में चुनौती देगा। Union Bank of India ने भी कहा है कि उसने भी रिजॉल्यूशन प्लान को खारिज किया है। उसने NCLT के समक्ष भी इस रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था।

NCLT ने चंद्रा के रिपेमेंट प्लान को दी है मंजूरी 

उसने कहा है कि कुछ प्राइवेट क्रेडिटर्स (लोन देने वाले) का वोटिंग शेयर ज्यादा होने से NCLT में रिपेमेंट प्लान को मंजूरी मिल गई। बैंक ने कहा है कि वह जल्द NCLAT में इस प्लान को चैलेंज करेगा। इससे पहले NCLT ने सुभाष चंद्रा की तरफ से पेश रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दे दी थी। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की तरफ से फाइल इनसॉल्वेंसी मामले में चंद्रा ने यह रिपेमेंट प्लान पेश किया था।

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रिपेमेंट प्लान के तहत 22,000 करोड़ पेमेंट के दावे का सेटलमेंट होगा 

NCLT ने इस मामले में जो आदेश दिया है, उसके तहत क्रेडिटर्स (कर्ज देने वालों) की तरफ से पेश 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के दावों के सेटलमेंट के लिए सुभाष चंद्र 6.5 करोड़ रुपये चुकाएंगे। दिग्गज प्राइवेट बैंक HDFC Bank भी इस मामले में अपील करने के बारे में सोच रहा है। एचडीएफसी बैंक ने 27 अगस्त को कहा था कि उसने भी इस रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था।

HDFC Bank एक साल के निचले स्तर पर, रिकवरी में ₹1172 तक जाएगा शेयर, मैक्वेरी ने सीईओ को लेकर जताई दो संभावनाएं

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज काफी सुस्ती है। टूटकर यह एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था, जिससे यह रिकवर होकर हल्का ग्रीन हुआ। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी के रुझानों के हिसाब से इसकी सुस्ती खरीदारी के मौके के तौर पर देख सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म ने इसे फिर आउटपरफॉर्म रेटिंग ऐसे समय में दी है, जब बैंक के अगले सीईओ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और मैक्वेरी ने इसे लेकर दो संभावनाएं जाहिर की हैं। शेयरों की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 0.32% की बढ़त के साथ ₹714.30 पर है। इंट्रा-डे में यह 0.47% उछलकर ₹715.25 तक पहुंच गया था। इंट्रा-डे में यह 0.79% टूटकर ₹706.35 तक आ गया था। मैक्वेरी ने इसके शेयरों का टारगेट प्राइस ₹1,150 फिक्स किया है।

HDFC Bank के सीईओ को लेकर क्या है Macquarie का कैलकुलेशन

बैंक का अगला सीईओ कौन, इसे लेकर अनिश्चितता शेयरों पर दबाव बनाए हुए है। बैंक के वर्तमान सीईओ शशि जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूहर 2026 को समाप्त हो रहा है यानी बैंक के पास अगले सीईओ के नाम पर फैसला करने के लिए लगभग दो महीने ही बचे हैं। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार इसके चलते ही शेयरों पर दबाव बना हुआ है।

अब मैक्वेरी के मुताबिक सबसे पहले बैंक की NRC (नॉमिनेशन एंड रेम्यूनेरेशन कमेटी) कुछ कैंडिडेट्स के नाम पर विचार करेगी और एक नाम चुनेगी जिसे बोर्ड को भेजा जाएगा। राजीव कुमार की अध्यक्षता में बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद आरबीआई के पास इसे आखिरी मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मैक्वेरी के मुताबिक बोर्ड से भेजे गए नाम पर आरबीआई ने हाल-फिलहाल में 30-45 दिनों का समय लिया है। ऐसे में मैक्वेरी ने दो संभावनाएं जताई हैं।

पहला विकल्प- 6 महीने का एक्सटेंशन: अगर शशि जगदीशन को सिर्फ छह महीने का विस्तार मिलता है, तो यह संकेत हो सकता है कि बैंक का बोर्ड किसी दूसरे व्यक्ति को अगला सीईओ बनाने पर विचार कर रहा है और नए कैंडिडेट की तलाश और आरबीआई की मंजूरी के लिए उसे अतिरिक्त समय चाहिए। मैक्वेरी के मुताबिक ऐसी स्थिति में अगले सीईओ को लेकर अनिश्चितता और लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसके अलावा नए सीईओ को बैंक की जिम्मेदारी संभालने और अपनी रणनीति लागू करने में समय लग सकता है यानी बैंक के शेयरों पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।

दूसरा विकल्प- पूरे तीन साल का विस्तार: मैक्वेरी के मुताबिक दूसरी संभावना ये है कि शशि जगदीशन को पूरे तीन साल का नया कार्यकाल दे दिया जाए। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि ऐसा होने पर अगले सीईओ को लेकर तत्काल बनी अनिश्चितता खत्म हो जाएगी, जिससे मौजूदा लेवल्स के आसपास शेयरों को सपोर्ट मिल सकता है। मैक्वेरी के मुताबिक इसके बाद शेयरों की चाल मुख्य रूप से बैंक के फंडामेंटल्स में सुधार पर निर्भर करेगा।

कुछ दिनों पहले एक साल के निचले स्तर पर था शेयर

एचडीएफसी बैंक के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 23 अक्टूबर 2025 को यह एक साल के रिकॉर्ड हाई लेवल ₹1,020.35 पर था। इस हाई लेवल से 10 महीने में यह 30.77% टूटकर आज 28 अगस्त 2025 को एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर ₹706.35 पर आ गया।

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HDFC Bank में CEO पद को लेकर हलचल बढ़ी, RBI गवर्नर से मिले चेयरमैन राजीव कुमार

HDFC Bank CEO Appointment: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। अब इसमें दो महीने से थोड़ा ज्यादा समय बचा है। इसी बीच बैंक के चेयरमैन राजीव कुमार ने पिछले हफ्ते RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात की है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सबसे अहम बात जगदीशन के अगले कार्यकाल को लेकर हुई। RBI यह समझना चाहता है कि बैंक बोर्ड जगदीशन को दोबारा एमडी और सीईओ बनाने के पक्ष में है या नहीं।

बोर्ड में जगदीशन के नाम पर कितनी सहमति?

RBI यह भी जानना चाहता था कि राजीव कुमार के चेयरमैन बनने के बाद बोर्ड में किसी दूसरे नाम पर भी चर्चा हुई है या नहीं। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि अभी तक HDFC Bank बोर्ड ने एमडी और सीईओ की नियुक्ति को लेकर RBI को कोई सिफारिश नहीं भेजी है।

RBI अब जल्द फैसला चाहता है

राजीव कुमार 30 जून 2026 को HDFC Bank के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके बाद से RBI अधिकारियों के साथ उनकी यह चौथी औपचारिक बातचीत बताई जा रही है।

शुरुआत में RBI ने बोर्ड को कुछ समय दिया। इसकी वजह यह थी कि राजीव कुमार ने 15 जुलाई को औपचारिक रूप से चेयरमैन का पद संभाला था। अब उन्हें पद संभाले करीब एक महीना हो चुका है। ऐसे में RBI चाहता है कि बैंक के नेतृत्व को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो।

आमतौर पर छह महीने पहले शुरू हो जाती है प्रक्रिया

बैंकों में आम तौर पर एमडी और सीईओ का कार्यकाल खत्म होने से करीब छह महीने पहले दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। बोर्ड अपनी सिफारिश RBI को भेजता है।

अगर नया सीईओ चुनना हो, तो पसंदीदा उम्मीदवारों के नाम आम तौर पर कार्यकाल खत्म होने से कम से कम चार महीने पहले RBI को भेजे जाते हैं।

HDFC Bank का मामला इसलिए अलग दिख रहा है। जगदीशन का कार्यकाल खत्म होने में अब करीब दो महीने बचे हैं। लेकिन बोर्ड ने अभी तक RBI को कोई नाम नहीं भेजा है।

जगदीशन के सामने क्या संभावनाएं?

पहले की रिपोर्टों के मुताबिक, इस पद को लेकर चार संभावनाएं हैं। जगदीशन को फिर से तीन साल का कार्यकाल मिल सकता है। उन्हें इससे छोटा कार्यकाल भी दिया जा सकता है। बैंक बोर्ड किसी दूसरे आंतरिक उम्मीदवार का नाम भी भेज सकता है।

इसके अलावा किसी बाहरी उम्मीदवार के नाम पर भी विचार हो सकता है। यानी फिलहाल यह तय नहीं है कि अक्टूबर के बाद HDFC Bank की कमान किसके हाथ में होगी।

AT-1 बॉन्ड मामले पर भी बात

RBI गवर्नर और राजीव कुमार की बातचीत सिर्फ सीईओ की नियुक्ति तक सीमित नहीं रही। सूत्रों के मुताबिक, AT-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग से जुड़े मामले पर भी चर्चा हुई।

कुछ नाराज बॉन्डधारक इस मामले को लेकर बहरीन में कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। RBI इस मामले को लेकर भी बैंक की स्थिति समझना चाहता है।

कुछ महीनों में बदला बैंक का नेतृत्व

HDFC Bank में पिछले कुछ महीनों में नेतृत्व स्तर पर काफी बदलाव हुए हैं। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में अचानक बोर्ड छोड़ दिया था।

इसके बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव बोर्ड सदस्य केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया। करीब तीन महीने की तलाश के बाद राजीव कुमार को नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चुना गया। उन्हें पहले अतिरिक्त निदेशक बनाया गया था। RBI की मंजूरी के बाद 15 जुलाई को उन्होंने चेयरमैन का पद संभाला।

HDFC Bank का शेयर बुधवार को 0.02% की मामूली गिरावट के साथ 727.35 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 1 साल में यह 25.28% टूट चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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Stock Market Rally: अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में नरमी, एशियाई बाजारों में रौनक और निचले स्तर पर खरीदारी के चलते घरेलू स्टॉक मार्केट में भी आज काफी चहल-पहल दिख रही हैं। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 585 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24200 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी अच्छी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सों की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 554.30 प्वाइंट्स यानी 0.72% की बढ़त के साथ 77,463.98 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 127.30 प्वाइंट्स यानी 0.53% के उछाल के साथ 24,205.60 पर है। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 585.11 प्वाइंट्स चढ़कर 77,494.79 और निफ्टी 147.15 प्वाइंट्स बढ़ककर 24,225.45 तक पहुंच गया था।

Stock Market Rally: ये है वजह

अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में नरमी

अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स का बायबैक बढ़ाने का चौंकाने वाला फैसला किया तो लॉन्ग टर्म वाली ट्रेजरी बॉन्ड्स की यील्ड्स अचानक नीचे आ गई। इससे स्टॉक मार्केट में बहार छा गई। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने सरकारी डेट बायबैक को कम से कम दोगुना करने का ऐलान किया है। इस ऐलान से 30-साल का ट्रेजरी बॉन्ड की फटाक से गिरकर 5.26% से 5.18% और 10-साल का ट्रेजरी यील्ड 4.68% से 4.63% पर आ गया। इसके नीचे आने से भारत जैसे एमर्जिंग मार्केट में निवेश और आकर्षक हो गया।

आईटी सेक्टर का मजबूत सपोर्ट

सेक्टरवाइज मार्केट को सभी सेक्टर का मजबूत सपोर्ट मिल रहा है और सबसे अधिक आईटी सेक्टर का। सिर्फ निफ्टी आईटी में ही फिलहाल 1% से अधिक बढ़त है मेटल, फार्मा, पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक के निफ्टी इंडेक्सेज में आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है।

एशियाई बाजारों में रौनक

भारतीय स्टॉक मार्केट को अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक से सपोर्ट मिला है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6% से अधिक, इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट, जापान का निक्केई 225 और हॉन्ग कॉन्ग का हैंग सैंग 1% से अधिक उछल पड़ा। थाईलैंड के सेट कंपोजिट में आधे फीसदी की बढ़त है। हालांकि सिंगापुर के स्ट्रेट टाइम्स और ताइवान के ताइवान वेटेड में करीब आधे-आधे फीसदी की गिरावट है।

निचले स्तर पर खरीदारी

एक कारोबारी दिन पहले स्टॉक मार्केट की भयंकर मारकाट में आईटीसी, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, डाबर इंडिया, आईआरएफसी, यूपीएल, आईआरबी इंफ्रा, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट जैसे दिग्गजों समेत 100 से अधिक स्टॉक्स एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए थे। इसका फायदा निवेशकों ने उठाया जिससे भाव मजबूत हुए।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

46 पैसे का बिल चुकाना भूला शख्स, बैंक ने ठोक दिया ₹1200 का जुर्माना! भड़के यूजर ने X पर सुनाई खरी-खोटी

Credit Card Bill Viral News: क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट करते समय अगर आप एक रुपये से भी कम की चूक करते हैं, तो यह आपको कितना भारी पड़ सकता है? इसका एक ताजा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक शख्स ने अपने क्रेडिट कार्ड बिल में से महज 46 पैसे कम चुकाए, जिसके बदले बैंक ने उस पर ₹1200 से अधिक का जुर्माना और अन्य फीस लगा दी।

पीड़ित ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए एचडीएफसी बैंक के कस्टमर केयर अधिकारियों को ‘अज्ञानी और घमंडी’ तक कह दिया। यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई और लोग बैंक के इस रवैये पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित ग्राहक को बैंक की तरफ से ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल मिला था। भुगतान करते समय गलती से ग्राहक ने दशमलव के बाद के पैसे छोड़ दिए और सिर्फ ₹10,649 का ही पेमेंट किया। यानी कुल बिल में से महज 46 पैसे बकाया रह गए। इस 46 पैसे के मामूली शॉर्टफॉल की वजह से बैंक ने ग्राहक पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज और पेनल्टी ठोक दी।

इस पर ग्राहक ने X पर HDFC Bank को टैग करते हुए लिखा, ‘प्रिय HDFC बैंक, आपने मुझे ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल भेजा था। गलती से मैंने ₹10,649.00 का भुगतान किया, 46 पैसे छूट गए और आपने 46 पैसे की इस चूक के लिए मुझ पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज लगा दिया? क्या आप इसे जल्द से जल्द रिवर्स करेंगे?

यूजर बैंक के कस्टमर सपोर्ट पर भी भड़ास निकाली और लिखा कि वहां के प्रतिनिधि जितने अज्ञानी हैं, उतने ही घमंडी भी हैं।

सोशल मीडिया पर भड़के लोग, मिली तरह-तरह की सलाह

यह पोस्ट सामने आते ही यूजर्स बैंक के इस एक्शन की आलोचना करने लगे और अपने पुराने अनुभव शेयर करने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘क्रेडिट कार्ड कैंसल करो, उसके 4 टुकड़े करके कचरे के डिब्बे में फेंक दो। उन्हें कोर्ट में साबित करने दो कि 0.46 रुपये का ब्याज ₹1200 कैसे बन गया।’

एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, ₹10,649.46 जैसे आंकड़े को राउंड ऑफ करके ₹10,649 किया जाना चाहिए, क्योंकि 50 पैसे से कम की किसी भी भिन्न को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

कुछ यूजर्स ने HDFC बैंक के साथ अपने बुरे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भी बैंक के खराब व्यवहार के कारण अपने अकाउंट्स और एफडी बंद करवा दिए थे।

हालांकि, एक वर्ग ऐसा भी था जिसने ग्राहक को ही जिम्मेदार ठहराया। एक यूजर ने लिखा, ‘यह आपकी गलती है, भाई। इसे बैंक पर मत डालो। यह उन लोगों के लिए एक बहुत अच्छा सबक है जो हर चीज को हल्के में लेते हैं।’

क्रेडिट कार्ड पेनल्टी और भारी-भरकम चार्ज से कैसे बचें?

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का खास ध्यान रखें:

Auto-Debit ऑन रखें: अपने बैंक अकाउंट से क्रेडिट कार्ड बिल का ‘Total Amount Due’ ऑटो-डेबिट मोड पर सेट करें, ताकि दशमलव के पैसे भी अपने आप सही समय पर कट जाएं।

राउंड ऑफ न करें: जब भी खुद से मैनुअल पेमेंट करें, बिल में लिखी दशमलव वाली सटीक रकम ही ट्रांसफर करें, खुद से कोई आंकड़ा न घटाएं।

गलती होने पर तुरंत नोडल अधिकारी से संपर्क करें: अगर गलती से ऐसा लेट चार्ज लग भी जाए, तो कस्टमर केयर के अलावा बैंक के Grievance Redressal Officer / Nodal Officer को ईमेल करें और चार्जेस रिवर्स करने की रिक्वेस्ट करें।

RBI Ombudsman में शिकायत करें: अगर बैंक आपकी जायज बात नहीं सुनता है और पैसे वापस नहीं करता है, तो आप आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डिजिटल दौर में ऑटोमेटेड बैंकिंग सिस्टम बिल का पूरा भुगतान न होने पर अपने आप लेट फीस और पेनल्टी जनरेट कर देते हैं, फिर चाहे बकाया राशि 1 रुपये से भी कम क्यों न हो। ऐसे में समझदारी इसी में है कि बिल की पाई-पाई का भुगतान करें ताकि बैंकों के इन कड़े पेनल्टी रूल्स से बचा जा सके।

Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया (X) पर वायरल यूजर पोस्ट पर आधारित है। यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। मनीकंट्रोल इसकी पुष्टि नहीं करता है।

HDFC Bank का शेयर कई साल के निचले स्तर पर, लेकिन लोन पर ट्रेडर्स का रिकॉर्ड निवेश

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं। जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद इसके शेयरों की हालिया तेजी पूरी गायब हो चुकी है। हालांकि दूसरी तरफ इस शेयर में लेवरेज लेकर किए जा रहे निवेश लगातार बढ़ रहे हैं। 13 अगस्त 2026 एनएसई के मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी (MTF) के आंकड़ों के अनुसार एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन ₹3,000 करोड़ के पार पहुंच गई थी। एमटीएफ बुक में इतनी बड़ी एक्सपोजर वाला यह एकमात्र शेयर बन गया है।

13 अगस्त को इस पर लेवरेज्ड बेट ₹3,212 करोड़ पर पहुंच गया जबकि 31 जुलाई 2026 को यह ₹2,360 करोड़ पर था यानी कि कुछ ही दिनों में इस पर दांव 36% बढ़ गया। जून के आखिरी में यह आंकड़ा ₹1,790 करोड़ था यानी जून के आखिरी से अगस्त के मध्य तक एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन लगभग 80% बढ़ गई।

क्या है Margin Trading Facility (MTF)?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी एक ऐसा तरीका है जिसमें ट्रेडर्स कुल कीमत का एक छोटा हिस्सा देकर शेयरों की डिलीवरी ले सकते हैं। बाकी पैसे ब्रोकर लोन के तौर पर देता है और शेयरों को गिरवी रखकर रोजाना के आधार पर ब्याज वसूलता है। जब स्टॉक की कीमत बढ़ती है, तो कम निवेश लागत के कारण मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन स्टॉक की कीमत गिरने पर नुकसान भी कई गुना बढ़ जाता है और ब्याज का खर्च और भी दबाव डालता है। हालांकि अगर स्टॉक की कीमत तेजी से गिरती है और ट्रेडर अतिरिक्त फंड नहीं डाल पाता है, तो ब्रोकर को स्टॉक बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

कैसी है एचडीएफसी बैंक के शेयरों की स्थिति

एचडीएफसी बैंक के शेयरों के लिए यह साल 2026 शेयरों की तेजी को लेकर अब तक के सबसे खराब वर्षों में से एक रहा है। इस साल इसमें अब तक 25% की गिरावट आ चुकी है। पिछले कम से कम 10 वर्षों से लगातार इस स्टॉक ने सालाना पॉजिटिव रिटर्न दिया है। अभी इसके शेयरों पर जून तिमाही के कमजोर नतीजों ने दबाव बनाया है। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, जिससे पिछले साल से चली आ रही लोन और डिपॉजिट में मजबूत बढ़ोतरी का असर खत्म हो गया। हालांकि एसेट क्वालिटी अपनी कैटेगरी में सबसे अच्छी बनी रही।

एचडीएफसी बैंक का परफॉरमेंस इतना खराब रहा है कि मार्केट कैप के मामले में आईसीआईसीआई बैंक ने तेजी से उसकी बराबरी कर ली है। जहां एक तरफ एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं, तो आईसीआईसीआई बैंक के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं। मार्केट कैप के मामले में दोनों के बीच का अंतर अब दस साल में सबसे कम है। एचडीएफसी बैंक फिलहाल बीएसई पर 0.28% की गिरावट के साथ ₹725.30 पर है तो आईसीआईसीआई बैंक 0.05% की बढ़त के साथ ₹1418.65 पर। एचडीएफसी बैंक का एक साल का हाई ₹1020.35 और आईसीआईसीआई बैंक का 1,479.90 है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टॉप 10 कंपनियों में से 5 का M-Cap ₹100000 करोड़ घटा, TCS को सबसे अधिक नुकसान

स्थानीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह गिरावट रही। इस बीच सेंसेक्स की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में से 5 के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में कुल मिलाकर करीब 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। सबसे ज्यादा नुकसान आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने झेला। बीते सप्ताह सेंसेक्स 489.92 अंक या 0.62 प्रतिशत और निफ्टी 204.65 अंक या 0.83 प्रतिशत के नुकसान में रहा।

टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC Bank, ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मार्केट कैप में गिरावट आई। दूसरी ओर भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप बढ़ गया। इन कंपनियों की वैल्यूएशन में कुल 55,149.45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

बीते सप्ताह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का मार्केट कैप 34,263.28 करोड़ रुपये घटकर 8,53,506.85 करोड़ रुपये रह गया। इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप 31,869.13 करोड़ रुपये घटकर 17,70,056.06 करोड़ रुपये, भारतीय स्टेट बैंक का 25,891.88 करोड़ रुपये घटकर 9,85,829.96 करोड़ रुपये, HDFC Bank का 7,165.37 करोड़ रुपये घटकर 11,20,802.10 करोड़ रुपये और ICICI Bank का मार्केट कैप 2,792.65 करोड़ रुपये घटकर 10,17,577.98 करोड़ रुपये पर आ गया।

बाकी 5 कंपनियों को कितना फायदा

इस रुख के उलट भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का मार्केट कैप 26,438.49 करोड़ रुपये बढ़कर 5,23,330.31 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह भारती एयरटेल का मार्केट कैप 20,592.13 करोड़ रुपये बढ़कर 12,43,016.11 करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस का 3,548.79 करोड़ रुपये बढ़कर 6,77,197.34 करोड़ रुपये, लार्सन एंड टुब्रो का 2,490.66 करोड़ रुपये बढ़कर 5,58,973.11 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 2,079.38 करोड़ रुपये बढ़कर 4,90,888.35 करोड़ रुपये हो गया।

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टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप पर

मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज मोस्ट वैल्यूएबल कंपनी बनी रही। इसके बाद क्रमश: भारती एयरटेल, HDFC Bank, ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, भारतीय जीवन बीमा निगम और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

नए सप्ताह में मेनबोर्ड सेगमेंट में 17 अगस्त को NSE और BSE पर धूत ट्रांसमिशन, मोलबायो डायग्नोस्टिक्स की लिस्टिंग होगी। 18 अगस्त को NSE और BSE पर मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयर लिस्ट होने वाले हैं। इसके बाद 19 अगस्त को NSE और BSE पर बिहारी लाल इंजीनियरिंग और शिपरॉकेट के शेयर अपनी शुरुआत करेंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।