FPI ने अक्टूबर में अब तक बेचे ₹52100 करोड़ के भारतीय शेयर, किन वजहों से बने हुए हैं सेलर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 52,100 करोड़ रुपये निकाले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका में बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे।

इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अक्टूबर की ताजा सेलिंग के साथ विदेशी निवेशक साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 3.12 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चॉइस वेल्थ के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ का कहना है कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर हाई यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंकाओं को बढ़ा रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स अधिक आकर्षक हो गए हैं।

यह भी कहा कि महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण विदेशी पूंजी भारत के बजाय उन बाजारों की ओर जा रही है।

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16 अक्टूबर को की थी खरीद

16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने कुछ बाइंग की थी। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के कुछ नीचे आने और रुपये में मजबूती के कारण ऐसा हुआ था। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्व पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और शुक्रवार को बाइंग इस बात का संकेत है कि बाजार में निवेशकों की धारणा स्थिर हो सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में रिकवरी की राह में अब भी जोखिम बनी हुई हैं।

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Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है। गुरुवार की जोरदार तेजी के बाद, GIFT निफ्टी एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है। हाल ही में टेक्नोलॉजी शेयरों में हुई बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में सुधार, वॉल स्ट्रीट में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दे सकती है। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार में सुधार के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 84 अंक या 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 23,072 पर कारोबार कर रहा था। यह गुरुवार को निफ्टी के 23,000 के स्तर के करीब बंद होने के बाद एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत है। पिछले सत्र में भारतीय बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई थी। सेंसेक्स 1,533.72 अंक (2.11 प्रतिशत) उछलकर 74,315.61 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 374.65 अंक (1.66 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में तेजी रही

सप्ताह की शुरुआत में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी, जिसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी की। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसमें गिरने वाले शेयरों की तुलना में बढ़ने वाले शेयरों की संख्या लगभग तीन गुना अधिक रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक 2.5 प्रतिशत चढ़ा। इसने गुरुवार की उस गिरावट से उबरने में मदद की, जिसने सूचकांक को अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।

जापान का टॉपिक्स (Topix) 1.7 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.9 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 0.4 ​​प्रतिशत ऊपर रहे। इसके विपरीत, इंडोनेशिया के बाजार में 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। इसका कारण यह चिंता है कि इंडोनेशिया को वैश्विक स्टॉक सूचकांकों से बाहर किया जा सकता है। अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा; S&P 500 फ्यूचर्स लगभग स्थिर स्तर पर कारोबार कर रहे थे।

निवेशकों के AI शेयरों से हटने के बीच वॉल स्ट्रीट में तेजी

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। शुरुआती नुकसान से उबरते हुए, निवेशकों ने अपना ध्यान हेल्थकेयर और कंज्यूमर शेयरों की ओर मोड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन और कर्ज के स्तर को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.08 प्रतिशत बढ़कर 52,177.69 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की तेजी आई और यह 7,744.06 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.08 प्रतिशत बढ़कर 26,713.03 पर पहुंच गया।

हेल्थकेयर शेयरों (जैसे एली लिली और यूनाइटेडहेल्थ) में खरीदारी देखने को मिली, जबकि कई टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बना रहा, क्योंकि निवेशक बढ़ती उधारी लागत (borrowing costs) के बीच अपने निवेश पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे थे।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, लेकिन अभी भी $105 के ऊपर

शुक्रवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। निवेशक एक तरफ मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई के जोखिमों पर विचार कर रहे थे, तो दूसरी तरफ इस बात पर भी नजर रखे हुए थे कि क्या अमेरिका वैश्विक ‘शैडो फ्लीट’ (अघोषित टैंकर बेड़े) पर लगी पाबंदियों को कम करने के लिए कोई कदम उठा सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.39 प्रतिशत गिरकर $105.51 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ $97.43 प्रति बैरल पर आ गया।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों के लिए निकट भविष्य का नजरिया ‘सावधानी के साथ सकारात्मक’ (cautiously positive) बना हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में लगातार तेजी की गुंजाइश को सीमित कर सकती हैं। उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) प्रवाह को ऐसे महत्वपूर्ण कारक बताया, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

पोनमुडी के अनुसार, निवेशक विदेशी निवेश प्रवाह पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि यह पता चल सके कि जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) में कोई टिकाऊ सुधार हो रहा है या नहीं। वहीं, बाजार में आई यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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Share Market Rally: मार्केट में ताबड़तोड़ तेजी: सेंसेक्स 800 अंक उछला, निफ्टी 22,830 के पार; इन 3 वजहों से लौटी रौनक

Share Market Rally: आज, 15 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में शानदार रैली देखने को मिल रही है। सुबह के कारोबारी सत्र में प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 1 फीसदी तक की बढ़त दर्ज कर के कारोबर कर रहे है। आईटी इंडेक्स में 2% से ज्यादा की ताबड़तोड़ तेजी ने बाजार को ऊपर उठाने में सबसे मुख्य भूमिका निभाई है।

मार्केट का ताजा हाल

सुबह के कारोबारी सत्र 10 बजे के आंकड़ों के अनुसार, शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली, जिसमें प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 774.05 अंक (+1.06%) की शानदार छलांग के साथ 73,555.94 पर और निफ्टी 50, 215.40 अंक (+0.95%) की मजबूती के साथ 22,838.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि आईटी शेयरों में 2.29% की तूफानी तेजी के चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स 30,862.65 पर पहुंच गया और बैंक निफ्टी (+0.49%) व बैंकैक्स (+0.40%) भी हरे निशान में रहे, हालांकि निफ्टी मिडकैप 100, 59,405.05 (-0.00%) पर लगभग सपाट नजर आया।

बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें:

1. IT शेयरों में तूफानी खरीदारी: HCLTech के शानदार नतीजों के बाद से ही आईटी शेयरों में खरीददारी का दौर जारी है। आईटी इंडेक्स अकेले 690 अंक से ज्यादा उछल चुका है, जिससे पूरे मार्केट का मूड पॉजिटिव हुआ है।

2. निचले स्तरों से वैल्यू बाइंग: बाजार पिछले छह महीने के निचले स्तरों के करीब कारोबार कर रहा था, जिससे कई मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर काफी आकर्षक वैल्युएशन पर उपलब्ध हो गए। निवेशकों ने इस मौके का फायदा उठाकर निचले स्तरों पर जोरदार खरीदारी की है।

3. टेक्निकल कारण: बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि जब तक निफ्टी 22,600 के स्तर से ऊपर बना हुआ है, तब तक घबराने की जरूरत नहीं है। 22,600 का स्तर मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है और इसके टूटने पर ही मंदी का खतरा बनेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LTCG और STT पर FM सीतारमण का बड़ा इशारा! अगर कटौती हुई तो आपको कितना हो सकता है फायदा?

शेयर बाजार के निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आ सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को लेकर चर्चा करने और विभिन्न पक्षकारों के सुझाव सुनने की बात कही है। वित्त मंत्री के इस रुख के बाद बाजार के जानकारों और निवेशकों के बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों या आगामी बजट में इन दोनों टैक्स दरों में कटौती या कुछ ढील देखने को मिल सकती है।

वर्तमान में कितना है यह टैक्स?

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स(LTCG): 23 जुलाई 2024 के बजट संशोधनों के बाद, भारतीय शेयर बाजार में 1 साल से अधिक समय तक शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड रखने पर मिलने वाले लाभ पर 12.5% की दर से LTCG टैक्स लगता है। इसमें सालाना ₹1.25 लाख तक की छूट मिलती है यानी ₹1.25 लाख से ऊपर के प्रॉफिट पर ही 12.5% टैक्स देना होता है।

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स(STT): STT शेयर बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री पर लगने वाला एक प्रत्यक्ष कर है। शेयर डिलीवरी सेगमेंट में खरीद और बिक्री दोनों पर 0.1% एसटीटी लगता है, जबकि फ्यूचर्स में बिक्री पर 0.02% और ऑप्शंस प्रीमियम की बिक्री पर 0.1% लागू है।

वित्त मंत्री ने क्या कहा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय निवेशक और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) दोनों ही LTCG टैक्स को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करते रहे हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, कई मंत्रियों और हितधारकों ने यह मुद्दा भी उठाया है कि LTCG और STT दोनों टैक्स एक साथ चल रहे हैं, और भारत को इनमें से किसी एक को ही प्रमुखता से लागू करना चाहिए या दोनों में सामंजस्य बिठाना चाहिए। इसलिए इस विषय पर चर्चा होना स्वस्थ परंपरा है और मैं सभी पक्षों की राय ध्यान से सुनूंगी।’

कटौती की संभावना कितनी है?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2027 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। चूंकि 2026 में अब तक FIIs की ओर से भारतीय बाजार से 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिकवाली देखी गई है, ऐसे में विदेशी और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार LTCG की एग्जेम्पशन लिमिट ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करना या STT की दरों में आंशिक कटौती पर गंभीरता से विचार कर सकती है।

अगर टैक्स घटता है, तो किसको और कितना फायदा होगा?

अगर सरकार LTCG टैक्स रेट घटाती है या STT का दोहरा बोझ कम करती है, तो इसके ये बड़े फायदे होंगे:

रिटेल निवेशकों की जेब में अधिक मुनाफा: लॉन्ग टर्म टैक्स घटने या छूट की सीमा बढ़ने से आम निवेशक जो लंबे समय के लिए SIP या शेयरों में निवेश करते हैं, उन्हें अपनी कमाई पर कम टैक्स देना होगा।

विदेशी निवेशकों (FPIs) की वापसी: ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा के बीच विदेशी फंड्स भारत में दोबारा भारी निवेश शुरू कर सकते हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार को नई मजबूती मिलेगी।

ट्रेडर्स के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट में कमी: अगर STT में कटौती की जाती है, तो रोजाना ट्रेडिंग करने वाले रिटेल व इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स की लागत घटेगी और बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी।

दोहरे टैक्स के दबाव से मुक्ति: वर्तमान में निवेशक को शेयर बेचने पर STT भी देना पड़ता है और साल के अंत में मुनाफे पर LTCG भी। यदि दोनों में से किसी एक को तार्किक बनाया जाता है, तो टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी और आसान होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Live Update: GIFT निफ्टी से कमजोर शुरुआत के संकेत, वॉल स्ट्रीट में गिरावट, एशियाई बाजारों में तेजी

Stock Market Live Update: 14 अक्टूबर को GIFT निफ्टी ने सुस्त शुरुआत का संकेत दिया है, जिससे भारतीय शेयर बाजार के गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। इस बीच, मंगलवार को एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जबकि महंगाई के अहम आंकड़ों से पहले अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। GIFT निफ्टी 22,765 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 85 अंक नीचे है; इससे भारतीय शेयर बाजार के इंडेक्स के लिए नकारात्मक शुरुआत का संकेत मिलता है।

Q2 नतीजों के सीज़न के पहले मुख्य हफ़्ते में कंपनियों की कमाई पर सबकी नज़र है; नतीजे घोषित करने के बाद जिन स्टॉक्स पर फोकस है, उनमें Hero Motors, ICICI Pru, Trans and Rectifiers, Tata Elxsi और अन्य शामिल हैं।

अन्य कंपनियां जो अपने नतीजे घोषित करने वाली हैं, उनमें Bajaj Consumer, BHEL, Tata Tech और Leela Hotels वगैरह शामिल हैं।

Nifty 4-5 महीने में 26000-26500 पर होगा, एक्सपर्ट ने किया बड़ा दावा

आप क्या शेयरों से निवेश निकालने या सिप बंद करने के बारे में सोच रहे हैं? यह गलती आपको जोरदार मुनाफा कमाने से रोक सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने निफ्टी के लिए 26,000-26,500 का टारगेट दिया है। उसका कहना है कि अगले 4-5 महीनों में निफ्टी नया ऑल-टाइम हाई बना सकता है। 13 अक्टूबर को निफ्टी 1.60 फीसदी चढ़कर 22,721 पर बंद हुआ।

भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलेगा

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के सीईओ गौरव भंडारी को उम्मीद है कि वैश्विक आर्थिक स्थितियां जल्द बदलेंगी। इसके बाद बाजार में रिकवरी शुरू होगी। उन्होंने अमेरिका में बॉन्ड यील्ड घटने, डॉलर में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी की उम्मीद जताई। इससे भारतीय बाजार में तेजी आएगी। ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के लिए जो टारगेट दिया है, उसका मतलब है कि सूचकांक करीब 17 फीसदी चढ़ सकता है।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड जल्द घटने की उम्मीद 

भंडारी का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा लेवल पर लंबे समय तक नहीं रह सकती। अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.35 फीसदी तक पहुंच गई है। इस साल यील्ड 110 बेसिस प्वाइंट्स उछली है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी यील्ड में गिरावट आने पर विदेशी निवेश भारतीय बाजार में आएगा। डॉलर के भी कमजोर होने की उम्मीद है। इन दोनों वजहों से विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव आएगा।

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजीशन

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर्स में काफी शॉर्ट पोजीशन बनाई है। वैश्विक स्थितियां बदलते ही उन्हें शॉर्ट कवरिंग करनी पड़ सकती है। उन्होंने निवेशकों को बाजार से दूरी बनाने की जगह अच्छी क्वालिटी के शेयरों में निवेश की सलाह दी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी खरीदारी से बाजार को काफी सहारा दिया है। अगर आगे भारतीय बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है तो बाजार में बड़ी तेजी दिख सकती है।

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बीते एक साल में निफ्टी करीब 10 फीसदी गिरा है

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। इससे शेयरों में निवेश करने वाले लोग निराश हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों में निवेश करने वाले लोग भी मायूस हैं, क्योंकि उनका पैसा इस दौरान बढ़ने की जगह घटा है। बाजार में रिकवरी आने पर उन निवेशकों को बड़ा फायदा होगा, जिन्होंने गिरावट के बीच भी सिप से अपना निवेश जारी रखा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:  शुक्रवार की रिकवरी और सोमवार को शुरुआती उछाल के बाद तेज़ी से हुई बिकवाली को देखते हुए, निफ्टी में तेज़ी लाने वाले (बुल्स) आज वीकली ऑप्शन एक्सपायरी सेशन में सावधानी बरत रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 22,423 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से लगभग 41 अंक ऊपर था। इससे भारतीय शेयर बाजार के इंडेक्स के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत मिलता है।

CAS की वजह से, बुल्स निचले स्तर पर 22,300 के लेवल को बचाने में कामयाब रहे और आज के सेशन में यह सबसे अहम लेवल बना रहेगा।जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगर यह लेवल टूटता है, तो निफ्टी 22,100 या उससे भी नीचे जा सकता है। रात भर में हालात बेहतर होने के बजाय और खराब ही हुए हैं। बॉन्ड मार्केट बंद थे, लेकिन क्रूड ऑयल की कीमत रात भर में $107 प्रति बैरल के पार चली गई और अमेरिकी डॉलर भी मज़बूत होकर 102.5 के लेवल से ऊपर निकल गया है।

भारत के बॉन्ड यील्ड (7.4%) का असर PSU बैंकों पर भी पड़ेगा। ऊपर की तरफ, अगर निफ्टी 22,500 की ओर बढ़ता है, तो बिकवाली का दबाव दिख सकता है क्योंकि सोमवार का हाई लेवल 22,651 अभी काफी दूर है।

सवाल यह है कि दोनों इंडेक्स में से निफ्टी बैंक कब तक ज़्यादा मज़बूत बना रहेगा। बैंकिंग इंडेक्स ने भी सोमवार को अहम सपोर्ट लेवल को बनाए रखा और यह 54,500 – 55,500 की रेंज में बना हुआ है।

आज मार्केट HCLTech, ICICI Prudential AMC और RBL बैंक के नतीजों पर प्रतिक्रिया देगा, जबकि Tata Elxsi, ICICI Prudential Life, Transformers & Rectifiers जैसी कंपनियाँ भी आज अपने नतीजे जारी करेंगी। साथ ही, Polycab पर भी नज़र रखें।

Stocks to Buy: 73% तक रिटर्न दे सकते हैं ये 5 शेयर, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: लगातार आठ हफ्तों तक बिकवाली के दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी हफ्ते तेजी लौटी। Nifty 50 में 0.44% और Sensex में 0.78% की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, ग्लोबल अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों और RBI के ब्याज दर बढ़ाने से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।

इस बीच, ब्रोकरेज फर्मों ने कई शेयरों पर खरीदने की सलाह दी है। इनमें मेटल, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग और एंटरटेनमेंट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं। ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस और दिए गए मौजूदा भाव के आधार पर इन पांच शेयरों में करीब 46% से 73% तक तेजी की संभावना है।

इन 5 शेयरों में कितनी तेजी की संभावना?

कंपनीमौजूदा शेयर भावटारगेट प्राइससंभावित तेजी
Shyam Metalics₹1,062.80₹1,55045.84%
Mahindra & Mahindra₹2,792₹4,26052.58%
PVR Inox₹1,331₹2,13560.41%
TCI Express₹467₹77064.88%
HDFC Bank₹708.20₹1,22572.97%

Shyam Metalics

मेटल कंपनी Shyam Metalics पर UBS ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 24% बढ़ाकर 1,550 रुपये कर दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 1,062.80 रुपये है। इस हिसाब से इसमें करीब 45.84% तेजी की संभावना है।

UBS को कंपनी की विस्तार योजनाओं और ज्यादा वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स पर बढ़ते फोकस से ग्रोथ की उम्मीद है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी अपनी परियोजनाओं को इंडस्ट्री के औसत से कम लागत और कम समय में पूरा कर सकती है। इससे क्षमता बढ़ाने और निवेश पर बेहतर रिटर्न हासिल करने में मदद मिल सकती है।

Mahindra & Mahindra

ऑटोमोबाइल कंपनी Mahindra & Mahindra के शेयर पर Citi ने खरीदने की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने 4,260 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 2,792 रुपये है। इस आधार पर इसमें करीब 52.58% तेजी की संभावना है।

Citi को कंपनी के पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल और थ्री-व्हीलर कारोबार में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कंपनी की कुल गाड़ियों की बिक्री सालाना आधार पर 15.7% बढ़ सकती है। पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में 26%, कमर्शियल व्हीकल में 17.8% और थ्री-व्हीलर में 38.7% बढ़ोतरी का अनुमान है।

हालांकि, ट्रैक्टर की बिक्री में 5.6% गिरावट की आशंका है। बढ़ती कमोडिटी लागत और प्रोडक्ट मिक्स से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। Citi को रेवेन्यू में 26.7% बढ़ोतरी की उम्मीद है, जबकि EBITDA में 1.8% गिरावट का अनुमान है।

PVR Inox

एंटरटेनमेंट कंपनी PVR Inox पर CLSA ने ‘Outperform’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने 2,135 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 1,331 रुपये है। इस हिसाब से इसमें करीब 60.41% तेजी की संभावना है।

CLSA को हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओं और हॉलीवुड फिल्मों की बेहतर रिलीज से सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर लगातार कंटेंट देखने से दर्शकों में थकान बढ़ रही है। ऐसे में लोग फिर से सिनेमाघरों में फिल्म देखने का रुख कर सकते हैं।

PVR Inox के पास करीब 1,800 स्क्रीन हैं। कंपनी ने छोटे शहरों में स्मार्ट स्क्रीन के विस्तार के लिए 300 जगहों की पहचान की है। CLSA को उम्मीद है कि इस विस्तार से कंपनी को ग्रोथ मिलेगी। बेहतर कैश जनरेशन और हाल में किए गए शेयर बायबैक को भी ब्रोकरेज ने अपने आकलन में शामिल किया है।

TCI Express

लॉजिस्टिक्स कंपनी TCI Express पर Jefferies ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 770 रुपये रखा है। शेयर का मौजूदा भाव 467 रुपये है। इसके आधार पर इसमें करीब 64.88% तेजी की संभावना है।

Jefferies को कंपनी के शिपमेंट वॉल्यूम में सुधार की उम्मीद है। इससे ट्रकों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और कमाई बढ़ सकती है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि सितंबर 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 10% और EBITDA 8% बढ़ सकता है।

हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव से कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ने का जोखिम है। Jefferies के मुताबिक, शिपमेंट वॉल्यूम में रिकवरी जारी रहने पर कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कमाई को फायदा मिल सकता है।

HDFC Bank

प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank पर Emkay ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 1,225 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। शेयर का मौजूदा भाव 708.20 रुपये है। इस आधार पर इसमें करीब 72.97% तेजी की संभावना है।

Emkay का मानना है कि लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन के कारण बैंक का वैल्यूएशन आकर्षक स्तर पर आ गया है। शेयर में रिकवरी के लिए बैंक को अपने मुख्य कारोबार में सुधार दिखाना होगा। डिपॉजिट जुटाने और लोन ग्रोथ में प्रगति से निवेशकों का भरोसा लौट सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होने या उनका रुख बदलने से भी शेयर को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, वैल्यूएशन में दोबारा बढ़ोतरी बैंक के कारोबारी प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

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GDP ग्रोथ रेट 7% से ज्यादा, फिर लगातार क्यों गिर रहा भारत का शेयर बाजार?

भारतीय शेयर बाजारों में लगातार गिरावट ने इनवेस्टर्स को तगड़ी चोट पहुंचाई है। एक तरफ जहां शेयरों में सीधे पैसे लगाने वाले लोग मायूस हैं तो दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में हर महीने सिप से इनवेस्ट करने वाले लोग चिंतित है। पिछले करीब दो साल में उनका पैसा बढ़ने की जगह घटा है। अब इनवेस्टर्स का धैर्य टूटने लगा है। इस हफ्ते के मध्य में निफ्टी गिरकर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। ऐसे में उनके मन में एक सवाल चल रहा है। इनवेस्टर्स यह जानना चाहते हैं कि जब दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी है तो हमारा बाजार क्यों गिर रहा है?

भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर 

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट इसलिए भी परेशान कर रही है, क्योंकि देश की जीडीपी की ग्रोथ अच्छी है। यह 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं दिख रही है। देश का मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है। सरकार का फिस्कल डेफिसिट अनुमान के मुताबिक है। इकोनॉमी में डिमांड अच्छी है। इसकी तस्दीक हर महीने जीएसटी कलेक्शन के डेटा से हो जाती है। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शंस के डेटा भी सामान्य हैं। बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ बेहदत है। तीन साल से ज्यादा समय के बाद आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। इसका मतलब है कि अब तक इंटरेस्ट रेट ज्यादा नहीं था। किसी इकोनॉमी की स्थिति ऐसी होने पर शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखती है। लेकिन, भारत का शेयर बाजार चढ़ने की जगह गिर रहा है।

दुनिया के कई बड़े शेयर बाजारों में शानदार तेजी 

दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों में भी बीते एक साल में अच्छी आई है। अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस (Dow Jones) इंडस्ट्रियल एवरेज ने बीते एक साल में 13.58 फीसदी रिटर्न दिया है। दक्षिण कोरिया के कोस्पी ने इस साल 83 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है। यहां तक कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक FTSE ने भी बीते एक साल में करीब 12 फीसदी रिटर्न दिया है। लेकिन, बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों Nifty और Sensex में  बड़ी गिरावट आई है। निफ्टी जहां करीब 11 फीसदी फिसला है, वही सेंसेक्स 12 फीसदी से ज्यादा लुढ़का है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को पहुंचाई चोट

भारतीय बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है। बीते कई सालों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। पिछले दो सालों में यह बिकवाली काफी बढ़ी है। 2026 में FIIs की शुद्ध बिक्री 4.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही है। बर्नस्टीन की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार में नया निवेश करने की कोई वजह नहीं दिखती। यह रिपोर्ट सितंबर के तीसरे हफ्ते में आई थी। अगर बीते दो सालों की बात की जाए तो FIIs ने भारतीय बाजार से करीब 40 अरब डॉलर निकाले हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) खासकर म्यूचुअल फंडों ने इस दौरान लगातार निवेश किया है, जिससे बाजार को बड़ा सहारा मिला है।

महंगे वैल्यूएशंस की वजह से विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली

FIIs की भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली की दो बड़ी वजहें हैं। पहला, भारतीय शेयरों की वैल्यूएशंस पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई थी। निफ्टी और सेंसेक्स की वैल्यूएशंस अपनी लंबी अवधि की औसत वैल्यूएशंस से काफी आगे निकल गई थी। इसका मतलब है कि भारतीय शेयर बाजार काफी महंगा हो गया था। इस वैल्यूएशन को जस्टिफाई करने करने के लिए कंपनियों की अर्निंग्स में तेज उछाल की जरूरत थी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, जून तिमाही से कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट दिखा है। लेकिन, इससे निफ्टी की वैल्यूएशन घटकर करीब 19 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले साल 23 फीसदी तक पहुंच गई थी। दुनिया के कई दूसरे देशों के बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब भी ज्यादा है।

भारतीय बाजार में एआई और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स का अभाव

दूसरा, भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियां मौजूद नहीं हैं। पिछले दो सालों में उन बाजारों में ज्यादा तेजी आई है, जहां सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियां मौजूदा हैं। इनमें पहले नंबर पर अमेरिका है। एशिया में दक्षिण कोरिया और ताइवान है। विदेशी निवेशकों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स से जुड़ी कंपनियों में जमकर निवेश किए हैं। इसके लिए उन्होंने भारत जैसे बाजारों से अपने पैसे निकाले हैं। इस निवेश से एआई और सेंमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि Nvidia का मार्केट कैपिटलाइजेशन 6 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह भारत की जीडीपी से ज्यादा है। Nvidia का शेयर एक साल में 25 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। यही हाल दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों का है। विदेशी निवेशक उसी बाजार में निवेश करते हैं, जहां उन्हें ज्यादा प्रॉफिट की उम्मीद दिखती है।

अमेरिका और ईरान की लड़ाई ने बढ़ाया दबाव

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू हुई। इसका असर क्रूड ऑयल के उत्पादन पर पड़ा। क्रूड की सप्लाई घटने से इसकी कीमतें आसमान में पहुंच गईं। पिछले कई दिनो से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है। यह भारत जैसे देश के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि भारत क्रूड की अपनी 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है।

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क्रूड में उछाल का इकोनॉमी पर पड़ रहा असर 

क्रूड में उछाल से सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब आ गया है। महंगे क्रूड की वजह से इस साल ऑयल मार्केटिंग कंपनियां चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इसका असर आम आदमी की खर्च करने की क्षमता पर पड़ रहा है। क्रूड का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ी है। इससे शेयर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।