इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शानदार रह सकता है। स्ट्रॉन्ग ग्रोथ, लगातार अच्छा कैपिटल एक्सपेंडिचर और क्रेडिट एक्सपैंशन इसकी वजह होगी। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने से इंटरेस्ट रेट में इजाफा हो सकता है। एललामा की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

चुनौतियों की बीच इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8 फीसदी

इस रिपोर्ट में इनफ्लेशन बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऑयल की दोगुनी कीमतों को बर्दाश्त किया है। महंगे ऑयल के बावजूद 7.8 फीसदी ग्रोथ बनाए रखी है। भारतीय इकोनॉमी ज्यादातर दूसरी बड़ी इकोनॉमीज के मुकाबले मजबूत है। 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 59.3 है।

निफ्टी की वैल्यूएशन 10 साल के एवरेज के मुकाबले कम

इनफ्लेशन को चिंता की वजह बताते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन बढ़ने के 9-15 महीनों के दौरान मार्केट में तेजी दिखी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी अपने 10 साल के एवरेज 18.6 के पी/ई के मुकाबले 17.7 पी/ई पर आ गया है। इस हिसाब से महंगे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार सस्ता है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजारों में अब तक 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 45.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस रिपोर्ट में एनर्जी, मेटल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।

बाजार के लिए ये हैं कुछ बड़े रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल, आरबीआई के उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट में वृद्धि और जल्द डिसइनफ्लेशन जैसे रिस्क बने हुए हैं। ऐसे में रियल एस्टेट और साइक्लिकल्स में ओवरवेट बने रहना ठीक होगा। जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भारत को लेकर बदला है। उन्होंने भारत में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है।

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17 जुलाई को प्रमुख सूचकाकों में जोरदार तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने और क्रूड में उछाल के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। 17 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दिखी। निफ्टी 1.09 फीसदी यानी 261.55 फीसदी चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.25 फीसदी यानी 964 अंक के उछाल के साथ 78,151 पर क्लोज हुआ।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

FY27 की दूसरी छमाही में विदेशी निवेशकों की होगी वापसी, एक्सपर्ट ने बताया कहां दांव लगाने से होगी कमाई

लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव दिखा है। जुलाई में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है। इससे अमेरिका-ईरान में फिर से लड़ाई शुरू होने के बावजूद बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। शेयर बाजार के ट्रेंड को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने AlfAccurate Advisors के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर राजेश कोठारी से बातचीत की।

कोठारी ने कहा कि इंटरेस्ट रेट उम्मीद के मुताबिक रहने पर विदेशी निवेशकों की इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में धीरे-धीरे भारतीय बाजार में वापसी होगी। उनका मानना है कि बाजार में हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार की वैल्यूएशंस वाजिब हो गई है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैल्यूएशंस पर रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। हालांकि, हाउसिंग ईकोसिस्टम के बारे में उनकी सोच पॉजिटिव है। उनका मानना है कि इस सेक्टर में बिल्डिंग मैटेरियल्स और रियल एस्टेट की एंसिलियरीज कंपनियों के शेयरों में रिस्क-रिवॉर्ड अट्रैक्टिव दिख रहा है।

आईटी सेक्टर के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि इस सेक्टर में सेलेक्टिव रहने की जरूरत है। डिमांड में सुस्ती का दौर बीत चुका है। वैश्विक अनिश्चितता घटने पर डिस्क्रेशनरी खर्च में धीरे-धीरे इम्प्रूवमेंट दिखेगा। हालांकि, रिकवरी के एकसमान रहने की उम्मीद नहीं है। आईटी सर्विसेज ऑफर करने वाली ट्रेडिशनल कंपनियों के मुकाबले डिजिटल कपैबिलिटीज, एआई सर्विसेज ऑफर करने वाली कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा।

क्या एआई थीम में अब दिलचस्पी घट रही है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एआई थीम अभी शुरुआती अवस्था में है। कुछ खास ग्लोबल एआई कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशंस काफी बढ़ गई है। उनमें बीच-बीच में करेक्शंस दिख सकता है। लेकिन, एआई थीम से जुड़ी इनवेस्टमेंट साइकिल मजबूत बनी हुई है।

कोठारी ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ी कंपनियों को इंडिया की तेज ग्रोथ का फायदा मिलेगा। भारत में लोगों की खर्च करने योग्य इनकम बढ़ रही है। सरकार की पॉलिसी भी सपोर्टिव है। ऐसे में ऑटो एंसिलियरीज, कैपिटल गुड्स, कंजम्प्शन, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में अच्छी संभावना दिख रही है। खासकर इन सेक्टर की वे कंपनियां अच्छी दिख रही हैं, जिनकी अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ है।

Market Outlook : सपाट बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 17 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 16 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट बंद हुए हैं। IT और कंज्यूमर सेंट्रिक शेयरों में बढ़त का असर बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में कमजोरी से खत्म हो गया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 1.44 अंक बढ़कर 77,186.87 पर और निफ्टी 5.75 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 24,072.75 पर बंद हुआ। लगभग 1947 शेयरों में बढ़त हुई, 2119 शेयरों में गिरावट आई और 194 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

अलग-अलग शेयरों में मिला-जुला असर दिखा। इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहा, जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद विप्रो (+1.7%), बजाज फाइनेंस (+1.6%), HCL टेक्नोलॉजीज (+1.6%) और मारुति सुजुकी (+1.4%) रहे। गिरावट वाले शेयरों में, एटरनल 2.8% गिरा, जबकि SBI लाइफ इंश्योरेंस में 2.3% की गिरावट आई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 0.9% गिरा, HDFC बैंक 0.8% टूटा और श्रीराम फाइनेंस में 0.8% की गिरावट आई।

सेक्टर इंडेक्स में, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.5% की बढ़त हुई। इसके बाद निफ्टी मीडिया (+1%), निफ्टी IT (+0.7%) और निफ्टी ऑटो (+0.4%) रहे। निफ्टी FMCG (+0.25%) भी बढ़त के साथ बंद हुआ।

गिरावट वाले सेक्टरों में, निफ्टी रियल्टी का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिसमें 1% की गिरावट आई। निफ्टी PSU बैंक 0.5% गिरा, इसके बाद निफ्टी मेटल (-0.3%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.3%) और निफ्टी बैंक (-0.3%) रहे।

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर रहा। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 में 0.4% की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 लगभग बिना किसी बदलाव के बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एशियाई बाजार के कमजोर रुझानों के बीच निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने से भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती रही। महंगाई की चिंताओं ने फाइनेंशियल और रियल्टी सेक्टर पर दबाव डाला, वहीं कुछ पेट्रोकेमिकल्स पर इंपोर्ट ड्यूटी फिर से लागू होने और मज़बूत कमाई के दम पर केमिकल सेक्टर एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा। उधर उम्मीद से कम अमेरिकी महंगाई दर ने ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं को कम किया और बाजार को कुछ सहारा दिया। आगे बाजार की नजर कंपनियों के नतीजों और मैनेजमेंट की टिप्पणियों के साथ-साथ मॉनसून की प्रगति पर रहेगी। इसके अलावा ग्लोबल स्थिति और महंगाई से जुड़ी घटनाएं बाजार की चाल पर असर डालती रहेंगी।

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी एक सीमित दायरे में ट्रेड कर रहा है, जो न्यूट्रल रुख के साथ कंसोलिडेशन का संकेत है। टेक्निकल तौर पर इंडेक्स को 23,950–24,000 के जोन में मज़बूत सपोर्ट मिलने की उम्मीद है, जबकि 24,250–24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। इसके बाद 24,500 के आसपास एक बड़ी रुकावट हो सकती है।

ऑप्शन चेन डेटा भी 24,000 स्ट्राइक पर सबसे ज्यादा ‘पुट राइटिंग’ का संकेत दे रहा है, जो इसे एक अहम सपोर्ट लेवल के तौर पर मजबूत करता है। मौजूदा टेक्निकल सेटअप को देखते हुए, सपोर्ट के पास गिरावट पर खरीदारी और रेजिस्टेंस के पास उछाल पर बिकवाली की रणनीति सही रहेगी।

उन्होंने आगे कहा कि बैंक निफ्टी इंडेक्स ने डेली चार्ट पर एक छोटी कैंडलस्टिक बनाई है, जो अनिश्चितता का संकेत है क्योंकि इंडेक्स कंसोलिडेशन रेंज में ट्रेड कर रहा है। RSI न्यूट्रल जोन के पास स्थिर है, जो मज़बूत डायरेक्शनल मोमेंटम की कमी का संकेत है। टेक्निकल तौर पर 56,800–57,000 का जोन तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है। जबकि 58,200 का लेवल अहम रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

जब तक कोई निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन नहीं होता, तब तक रुख न्यूट्रल रहने की उम्मीद है। इस स्थिति में सपोर्ट के पास ‘बाय-ऑन-डिप्स’ और रेजिस्टेंस के पास ‘सेल-ऑन-राइज़’ की रणनीति फायदेमंद रहेगी।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए 23960-23930 के पास स्थित 50-डे का EMA जोन तत्काल सपोर्ट का काम करेगा । अगर यह 23930 के लेवल से नीचे जाता है और वहां बना रहता है तो और ज्यादा प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है और इंडेक्स 23780 के लेवल तक गिर सकता है, जो अगला अहम सपोर्ट जोन बन सकता है।

ऊपर की तरफ, 24160-24200 की रेंज एक अहम रेजिस्टेंस एरिया बनी हुई है। अगर इंडेक्स इस दीवार को पार कर जाता है, तो मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है और और ऊपर जाने का रास्ता खुल सकता है। तब तक, इंडेक्स में एक तय रेंज के अंदर ही ट्रेडिंग होने की संभावना है।

 

 

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शेयरों में निवेश करने जा रहे हैं? पहले जान लीजिए एचएसबीसी ने Sensex के लिए क्या टारेगट दिया है

शेयर बाजार में सेंटिमेंट बेहतर हुआ है। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई फिर से शुरू होने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई है। निफ्टी 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बना हुआ है। इस बीच, विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने 16 जुलाई को भारतीय कंपनियों के शेयरों की रेटिंग बढ़ा दी। उसने रेटिंग ‘अंडरवेट’ से ‘न्यूट्रल’ कर दी ।

विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी

HSBC ने कहा है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर रिस्क घटा है। रुपये को गिरने से रोकने के उपायों से विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी हुई है। एचएसबीसी ने 2026 के अंत में BSE Sensex का टारगेट बढ़ाकर 84,000 प्वाइंट्स कर दिया है। पहले उसने 80,500 का टारगेट प्राइस दिया था। इसका मतलब है कि सेंसेक्स मौजूदा लेवल से 8.6 फीसदी चढ़ सकता है।

2026 में सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न निगेटिव

इस साल भारतीय शेयर बाजार का रिटर्न निगेटिव है। निफ्टी और सेंसेक्स 2026 में अब तक 7 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। एचएसबीसी की रिपोर्ट की मानें तो अगले छह महीनों में बाजार में हालात बदलने वाले हैं। एचएसबीसी ने पहले इस साल दिसंबर तक सेंसेक्स के लिए 80,500 अंक का टारेगट दिया था। इस बीच, India VIX 12.91 पर आ गया है। 16 जुलाई को इसमें 2.71 फीसदी गिरावट दिखी। इंडिया वीआईएक्स का 15 से नीचे होना बाजार के लिए पॉजिटिव है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स रिकॉर्ड ऊंचाई से 33% गिरा

क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी भारत के लिए अच्छी खबर है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी हिस्सा इंपोर्ट से पूरा करता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थीं। अप्रैल में Brent curde Futures 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस लेवल से क्रूड 33 फीसदी गिर चुका है।

क्रूड ऑयल में नरमी से मार्जिन पर दबाव घटा

एचएसबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “ऑयल में नरमी आई है। इससे मार्जिन पर दबाव थोड़ा कम हुआ है। अर्निंग्स डाउनग्रेड का रिस्क भी घटा है।” इस महीने की शुरुआत में गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के आउटलुक को बेहतर बताया था। उसने कमोडिटी की कीमतों में नरमी और रुपये में स्थिरता को इसकी वजह बताई थी।

जुलाई में विदेशी निवेशकों ने की 1.6 अरब डॉलर की खरीदारी

विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर बदलता दिख रहा है। जुलाई में उन्होंने अब तक 1.6 अरब डॉलर के शेयर खरीदे हैं। चार महीनों तक भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बन गए हैं। 2026 में उन्होंने भारतीय बाजार में 27.7 अरब डॉलर की बिकवाली की है। यह पिछले साल उनकी 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली से ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी है।

फॉरेन इनवेस्टर्स ने की इस वजह से बिकवाली 

भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों की कमी है। इस वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पैसे निकाल अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में लगाए हैं। इससे इन बाजारों में अच्छी तेजी आई है। दक्षिण कोरिया का बाजार तो इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया है। वहां एआई कंपनियों के शेयरों की कीमतें कई गुनी हो गई हैं।

Market Trend : निफ्टी के 24000 के ऊपर टिके रहने तक हर गिरावट में करें खरीदारी, आईटी और ऑटो सेक्टर के ये दो शेयर कर सकते हैं कमाल

Market Trend : मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच,14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले और निफ्टी 24,100 के नीचे कारोबार कर रहा है। 9.50 बजे के आसपास सेंसेक्स 462.88 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरकर 77,153.52 पर और निफ्टी 118.00 अंक या 0.49 प्रतिशत गिरकर 24,093.00 पर कारोबार कर रहा है। लगभग 908 शेयरों में बढ़त देखने को मिल रही है। वहीं, 1363 शेयरों में गिरावट आई है और 165 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में हिंडाल्को,ONGC,TCS,इंफोसिस और विप्रो शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में HCL टेक,श्रीराम फाइनेंस,इंटरग्लोब एविएशन,बजाज फाइनेंस और L&T शामिल हैं।

निफ्टी व्यू

बाजार की चाल पर बात करते हुए manasjaiswal.com के Technical Analyst मानस जायसवाल ने कहा कि कल गिरावट के साथ हुई ओपनिंग के बाद निफ्टी बैंक निफ्टी दोनों ने ही 20 डे मूविंग एवरेज पे सपोर्ट लिया और वहां पर बाइंग इंटरेस्ट देखने को मिला है। ऐसे में बाजार की ओवरऑल ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव लग रहा है। निफ्टी जब तक 24,000 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा तब तक हर गिरावट में खरीदारी करेंगे और 24,500 के आपको टारगेट सेट करके चलना चाहिए।

बैंक निफ्टी व्यू

बैंक निफ्टी की जहां तक बात है,ये जब तक 57,400 के ऊपर ट्रेड करता रहेगा,यहां पर भी पॉजिटिव ट्रेंड बना रहेगा। उम्मीद कि यहां पर आउट परफॉर्मेंस देखने को मिलेगा और बहुत ही जल्द ही यह इंडेक्स 58,900 को ब्रेक करके 59,000 की तरफ जाने की कोशिश करेगा। दोनों ही इंडाइससेस के ट्रेंड पॉजिटिव है और डिप पर खरीदारी करने की राय रहेगी।

मानस जायसवाल के पसंदीदा शेयर

मानस जायसवाल की पहली रिकमेंडेशन बजाज ऑटो है, जहां पर इंट्राडे चार्ट पर इनवर्स पैटर्न का ब्रेकआउट देखने को मिला है। बजाज ऑटो में 10,240 रुपए के स्टॉप लॉस से खरीदारी करने की राय रहेगी। इसमें 10,700 तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

इनकी दूसरा रेमेंडेशन टाटा एलेक्सी है। अब ऐसा लग रहा है कि इस स्टॉक ने 3600 रुपए के आसपास एक बॉटम बना लिया है। इसमें हायर टॉप फायर बॉटम्स का कंफर्मेशन है। स्टॉक 10 डे मूविंग एवरेज के ऊपर निकला है। टाटा एलेक्सी में 3765 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी करेंगे। इसमें 3975 रुपए तक के टारगेट्स पॉसिबल है।

 

Market view : बाजार में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति करेगी काम, आज इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

 

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Nifty Outlook: 13 जुलाई को कैसी रहेगी निफ्टी की चाल, किन लेवल्स पर रहेगी नजर? जानिए एक्सपर्ट्स से

Nifty Outlook: पिछला कारोबारी हफ्ता उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन आखिर में निफ्टी 50 ने शानदार वापसी की। बुधवार की तेज गिरावट के बाद शुक्रवार को खरीदार फिर लौटे और बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ।

शुक्रवार को निफ्टी 244 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ। इंडेक्स 162 अंकों की बढ़त के साथ खुला और पूरे सत्र में बढ़त बनाए रखी। दिन के ऊपरी स्तर के करीब बंद होने से बाजार में फिर से खरीदारी लौटने के संकेत मिले।

किन शेयरों में हलचल दिखी

निफ्टी 50 में Jio Financial Services, HDFC Life Insurance और Adani Enterprises सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं Dr. Reddy’s Laboratories, Eternal और Bharti Airtel सबसे ज्यादा गिरने वालों में शामिल रहे।

रियल्टी, PSU बैंक और आईटी सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं FMCG इकलौता प्रमुख सेक्टर रहा, जो मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

मिडकैप और स्मॉलकैप में रही तेजी

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बड़े शेयरों से बेहतर रहा। Nifty Midcap 100 1.4% चढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। वहीं Nifty Smallcap 100 1.55% की बढ़त के साथ नए 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर बंद हुआ। इससे साफ है कि निवेशकों की दिलचस्पी सिर्फ लार्जकैप तक सीमित नहीं है।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की है। ईरान ने फिर से होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का दावा किया है। इससे वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है, तो उसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।

निफ्टी पर एक्सपर्ट्स की राय

नागराज शेट्टी (HDFC Securities) : शेट्टी का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद निफ्टी का शॉर्ट टर्म ट्रेंड अब भी सकारात्मक है। उनके मुताबिक आने वाले दिनों में निफ्टी 24,500 से 24,600 के स्तर तक जा सकता है। वहीं 24,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है।

रूपक डे (LKP Securities) : रूपक डे के अनुसार बाजार में तेजी का रुख अभी कायम है। उनके मुताबिक 24,500 पर पहला बड़ा रेजिस्टेंस है, जबकि 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट रहेगा।

हितेश राठी (Angel One) : हितेश राठी के मुताबिक 24,000 से 23,930 का दायरा पहला सपोर्ट जोन है। इसके नीचे 23,850 से 23,800 का स्तर मजबूत सहारा देगा। वहीं ऊपर की ओर 24,280 से 24,320 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद 24,480 से 24,540 का स्तर अहम रहेगा।

नंदीश शाह (HDFC Securities) : शाह का कहना है कि पूरे हफ्ते निफ्टी अपने 50-डे सिंपल मूविंग एवरेज यानी 23,829 के ऊपर बना रहा। यह निचले स्तरों पर लगातार खरीदारी का संकेत है। उनके मुताबिक 23,805 का स्तर अहम सपोर्ट और 24,530 का स्तर बड़ा रेजिस्टेंस रहेगा।

Bank Nifty Outlook

बैंक निफ्टी ने भी हफ्ते का अंत मजबूती के साथ किया। इंडेक्स गैप-अप खुला और दिन के दूसरे हिस्से में खरीदारी बढ़ने से 1.39% की तेजी के साथ 58,046 पर बंद हुआ।

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक बैंक निफ्टी के लिए 58,500 से 58,600 का दायरा पहला बड़ा रेजिस्टेंस है। अगर इंडेक्स इसके ऊपर टिकता है तो 59,000 और फिर 59,500 तक जाने की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 57,600 से 57,500 का दायरा अहम सपोर्ट रहेगा।

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FPI ने 4 महीनों बाद की वापसी, जुलाई में अब तक खरीदे ₹15157 करोड़ के भारतीय शेयर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार 4 महीने तक बिकवाली करने के बाद जुलाई में बायर नजर आ रहे हैं। इस महीने में अब तक उन्होंने भारतीय शेयरों में 15,157 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश किया है। बेहतर होते घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतकों, रुपये की स्थिरता और वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती धारणा से यह रुझान देखने को मिला है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले FPI ने जून में भारतीय शेयरों से 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाले थे।

इस बिकवाली के दौर से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। साल 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयरों से कुल 2.60 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। पिछले साल की समान अवधि में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है मानना

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि जुलाई में FPI की वापसी वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति, भू-राजनीतिक तनाव कम होने से ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता घटने और भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति पर बढ़े भरोसे का नतीजा है।

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का कहना है कि घरेलू व्यापक आर्थिक स्थिति में सुधार और रुपये की स्थिरता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।सेमीकंडक्टर कारोबार में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में FPI की बिकवाली के कारण निवेश का एक हिस्सा भारत की ओर आया है। इसके साथ ही श्रीवास्तव ने आगाह किया कि भले ही जुलाई में FPI के निवेश की यह मजबूत वापसी उत्साहजनक है, लेकिन आगे उनका रुख वैश्विक परिस्थितियों और भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि की मजबूती पर निर्भर करेगा।

अप्रैल के हाई पर पहुंचने के लिए Nifty को तोड़नी होगी 24500-24550 की दीवार, नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं मोटी कमाई

बॉन्ड मार्केट में कितना निवेश

भारत के डेट या बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। जुलाई में अब तक FPI ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत डेट सिक्योरिटीज में 6,625 करोड़ रुपये और जनरल रूट से 3,228 करोड़ रुपये का निवेश किया।

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विदेशी निवेशकों के खरीदारी शुरू करने से बाजार में लौटी रौनक, जुलाई में 1968 करोड़ रुपये की खरीदारी की

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भारतीय शेयर बाजारों को लेकर बदला है। उन्होंने 10 जुलाई को भी भारतीय बाजार में अच्छी खरीदारी की। उन्होंने 2,603.72 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवशकों (डीआईआई) ने भी 2,019.68 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा पर आधारित है। एफआईआई और डीआईआई की खरीदारी से 10 जुलाई को भारतीय बाजार में अच्छी रौनक दिखी।

10 जुलाई को ज्यादातर सूचकांकों में रही तेजी

बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स सहित सभी दूसरे सूचकांक 10 जुलाई को हरे निशान में बंद हुए। Nifty 1.02 फीसदी यानी 244.10 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.08 फीसदी यानी 827 अंक के उछाल के साथ 77,569 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 1.39 फीसदी की तेजी आई। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स को छोड़ बाकी सभी सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। 9 जुलाई को भी बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए थे। 8 जुलाई को बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटना था।

10 जुलाई को FIIs ने की 2019 करोड़ रुपये की खरीदारी

FII ने 10 जुलाई को 15,318.07 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 12.714.35 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह भारतीय बाजार में उनकी शुद्ध खरीदारी 2,603.73 करोड़ रुपये की रही। DII ने 17,171.75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 15,152.07 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस तरह उनकी शुद्ध खरीदारी 2,019 करोड़ रुपये की रही। डीआआई ने लगातार खरीदारी कर घरेलू शेयर बाजार को सहारा दिया है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही तो चढ़ेगा बाजार

विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख में बदलाव दिख रहा है। जुलाई में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) ने भारतीय बाजारों में शुद्ध रूप से खरीदारी की है। उन्होंने इस महीने 1,968.81 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। इस दौरान DII ने 9,245.91 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का लौटना भारतीय शेयर बाजारों के लिए शुभ संकेत है। अगर आगे वे खरीदारी जारी रखते हैं तो बाजार में तेज रिकवरी आ सकती है।

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निवेशकों की नजरें जून तिमाही के नतीजों पर

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इनवेस्टर्स का फोकस अब जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर है। आगे इन नतीजों से बाजार की दिशा तय होगी। डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता है। अगर क्रूड की कीमतें भी स्टेबल रहती हैं तो बाजार का सेंटिमेंट पॉजिटिव रह सकता है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच डील को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह बाजार के लिए बड़ा रिस्क है।

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भारत के बारे में विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर बदले, कहा-जल्द बाजार में लौटने वाली है रौनक

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों के सुर भारतीय शेयर बाजारों पर बदल गए हैं। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में टेंशन फिर से बढ़ने से बाजार में तेज गिरावट के बावजूद निवेशकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजों पर हायर इनपुट कॉस्ट्स और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर पड़ सकता है। लेकिन, कॉर्पोरेट अर्निंग्स में रिकवरी की संभावनाओं पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।

मीडियम टर्म में बाजार की संभावनाओं पर असर नहीं

मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि भारतीय बाजार में आई गिरावट की वजह साइक्लिकल है, न कि स्ट्रक्चरल। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि मीडियम टर्म में भारतीय शेयर बाजार की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उसने इसकी कई वजहें बताई हैं। जैसे ग्रोथ मोमेंटम में इम्प्रूवमेंट है। इकोनॉमी की सेहत अच्छी है। भारतीय बाजार को लेकर ब्रोकरेज फर्मों की राय बदलने की बड़ी वजह यह है कि डिमांड को लेकर उनकी चिंता कम हुई है।

जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

जेफरीज को जून तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ बीती 13 तिमाहियों में सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है। इसमें बढ़ती इकोनॉमिक एक्टिविटी और हायर नॉमिनल जीडीपी का हाथ है। ऑयल एंड गैस और मेटल्स को छोड़ कंपनियों की अर्निंग्स साल दर साल आधार पर करीब 12 फीसदी बढ़ने की उम्मीद। फिलिप कैपिटल ने भी ऑयल एंड गैस को छोड़ निफ्टी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ 15 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है।

निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह

ब्रोकरेज फर्मों ने निवेशकों को जून तिमाही से आगे देखने की सलाह दी है। कई स्ट्रेटेजिस्ट्स का कहना है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मार्केट का फोकस अर्निंग्स मोमेंटम पर बढ़ेगा। यूपीएस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में फिर से टेंशन बढ़ने का असर भारत में मध्यम अवधि के निवेश पर नहीं पड़ेगा।

इन सेक्टर का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद

ज्यादातर ब्रोकरेज फर्मों को फाइनेंशियल्स स्टॉक्स का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है। इसकी वजह अच्छी क्रेडिट ग्रोथ और मजबूत बैलेंसशीट है। इंडस्ट्रियल और कैपिटल एक्सपेंडिचर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन भी अच्छा रहेगा। मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि इनवेस्टमेंट से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने से शेयरों बाजार के प्रदर्शन में इम्प्रूवमेंट आएगा। जेपी मॉर्गन ने कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स को अपनी पसंद बताया।

इन सेक्टर की अर्निंग्स ग्रोथ ज्यादा रह सकती है

फिलिप कैपिटल ने जून तिमाही में एनबीएफसी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, डिफेंस और ऑर्गेनाइज्ड रिटेल की अर्निंग्स ग्रोथ सबसे ज्यादा रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, ऑयल एंड गैस, सीमेंट, हेल्थकेयर और मेटल्स का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे पेश करने शुरू कर दिए हैं। टीसीएस ने 9 जुलाई को अपने नतीजे पेश किए।