
UN Correct Map resolution: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दुनिया के पारंपरिक नक्शे को बदलने और उसमें सुधार करने से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हो गया है। इस मुहिम का नेतृत्व अफ्रीकी देश टोगो ने अफ्रीकन यूनियन (AU) के 54 सदस्य देशों के समर्थन से किया था।
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों —विशेषकर अफ्रीका— के वास्तविक आकार और क्षेत्रफल को सही अनुपात में दर्शाना है।
क्या है पूरा मामला?
यूएन में मतदान और देशों का रुख : संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया।
- समर्थन करने वाले प्रमुख देश : भारत, फ्रांस, ब्रिटेन (इंग्लैंड) समेत 164 राष्ट्र।
- विरोध करने वाला देश : एकमात्र अमेरिका (USA) ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। अमेरिका की प्रतिनिधि एरियाना फेरिनसेविच ने इसे UNGA के समय और उद्देश्य का मजाक बताया।
- वोटिंग से दूरी बनाने वाले देश : एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन (कुल 6 देश)।


अफ्रीकी देशों ने क्यों चलाई 'Correct the Map' मुहिम?
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी के अनुसार, “एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है। नक्शा सोच को आकार देता है।”
अफ्रीकी देशों का मानना है कि गलत नक्शे के कारण विकासशील देशों की जरूरतों और क्षमताओं को कम करके आंका जाता है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि उनका देश अब सरकारी कामकाज और शिक्षा में मरकेटर मैप का इस्तेमाल बंद करेगा।
क्या अब कानूनी रूप से दुनिया का नक्शा बदल जाएगा?
नहीं। यूएन का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Non-Binding) नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि मरकेटर मैप पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और न ही किसी नए नक्शे को अनिवार्य किया गया है। यूएन केवल शैक्षणिक और संस्थागत उपयोग में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन जैसे सटीक नक्शों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है।
भारत की प्रतिक्रिया और आधिकारिक रुख
भारत ने यूएन में इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है:
- सीमाओं से कोई लेना-देना नहीं : यह प्रस्ताव केवल महाद्वीपों के क्षेत्रफल के सही अनुपात को दिखाने के लिए है। इसका देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या जगहों के नाम से कोई संबंध नहीं है।
- संप्रभुता पर स्पष्ट रुख : भारत का क्षेत्र— जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं— उसे केवल भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
- कोई समझौता नहीं : भारतीय सीमाओं को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना भारत को कतई मंजूर नहीं होगा। भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा।


