न नौकरी छोड़ने की जरूरत, न ऑफिस का झंझट! इस साइड बिजनेस से 5 लाख महीने कमाने का दावा

आज के दौर में नौकरी के साथ एक्सट्रा कमाई का रास्ता तलाशने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोई ऑनलाइन काम शुरू करता है तो कोई कंटेंट क्रिएशन या छोटे कारोबार में हाथ आजमाता है। इसी बीच एक्स पर एक यूजर की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें एक ऐसे साइड बिजनेस का जिक्र किया गया है, जिसे शुरू करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत नहीं बताई गई है। पोस्ट के मुताबिक, कुछ लोग इसी काम को पार्ट-टाइम करते हुए हर महीने करीब 5 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

खास बात यह है कि इसके लिए न अपना ऑफिस खोलने की जरूरत बताई गई है और न ही कर्मचारियों या सामान के स्टॉक का झंझट है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इस कमाई के मॉडल को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। हालांकि, असल कमाई कितनी होगी, यह कई बातों पर निर्भर कर सकता है।

न दुकान, न स्टाफ… फिर कमाई कैसे?

एक्स यूजर अंकित पांडे ने बताया कि उनके कुछ दोस्त रियल एस्टेट में फ्रीलांसिंग के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग’ नाम दिया और दावा किया कि इसे बेहद कम शुरुआती खर्च के साथ शुरू किया जा सकता है।

उनके मुताबिक, सबसे पहले अपने शहर के कई बिल्डरों से संपर्क करना होगा और उनके चैनल पार्टनर प्रोग्राम से जुड़ना होगा। इसके बाद उनके प्रोजेक्ट, कीमत, भुगतान योजना और कब्जे की तारीख जैसी जानकारी समझनी होगी।

असली काम है खरीदार ढूंढना

बिल्डरों से जुड़ने के बाद अगला कदम संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है। पांडे के अनुसार, खरीदार सोशल मीडिया, दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और अपने निजी नेटवर्क के जरिए खोजे जा सकते हैं। यानी इस काम में दुकान खोलने या कोई सामान खरीदकर रखने की जरूरत नहीं है। मुख्य भूमिका खरीदार और बिल्डर के बीच संपर्क बनाने, भरोसा कायम करने और सौदा पूरा कराने की होती है।

50 लाख के फ्लैट पर कितना बन सकता है कमीशन?

पांडे ने अपनी पोस्ट में एक उदाहरण के जरिए कमाई का गणित समझाया। उनके मुताबिक, अगर 50 लाख रुपये के फ्लैट पर 3 प्रतिशत कमीशन मिले, तो एक सौदे से 1.5 लाख रुपये बन सकते हैं। इसी हिसाब से तीन फ्लैट बिकने पर करीब 4.5 लाख रुपये और चार सौदों पर 6 लाख रुपये तक कमीशन बन सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट में कमीशन की दर हर जगह एक जैसी नहीं होती। यह बिल्डर, प्रोजेक्ट और समझौते के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

सुनने में आसान, लेकिन सौदा पक्का करना मुश्किल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस मॉडल को आकर्षक जरूर माना, लेकिन कई यूजर्स ने इसकी असली चुनौती भी बताई। उनका कहना था कि खरीदार ढूंढना और आखिर में डील बंद करना उतना आसान नहीं है, जितना पोस्ट में दिखाई देता है।

एक यूजर ने कहा कि इस काम में ग्राहकों की तलाश के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। वहीं, दूसरे ने बताया कि कमीशन आकर्षक लग सकता है, लेकिन ग्राहक को मनाकर सौदा पूरा करना काफी मुश्किल होता है।

30 साल से यही काम कर रहे अंकल

एक यूजर ने अपने परिवार का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसके अंकल करीब तीन दशक से रियल एस्टेट का काम कर रहे हैं। कभी उनके महीने में 5-7 घर तक बिक जाते हैं, तो कभी लगातार 4-6 महीने तक एक भी सौदा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इसलिए संभल जाती है क्योंकि उनकी पत्नी सरकारी नौकरी में हैं। उनके मुताबिक, रियल एस्टेट का यह काम ऐसे व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य हो।

‘साइड इनकम’ का मौका या पूरी तरह बिक्री पर निर्भर काम?

इस पूरी चर्चा ने रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग की एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। इसमें शुरुआती निवेश कम हो सकता है, लेकिन कमाई पूरी तरह ग्राहकों, बिक्री और सौदे पूरे होने पर निर्भर करती है। यानी कागज पर यह मॉडल जितना आसान दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही नेटवर्क, भरोसे और बिक्री की क्षमता का खेल है। सोशल मीडिया पर 5 लाख रुपये महीने की कमाई का दावा भले आकर्षक हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इतनी आय की गारंटी नहीं मानी जा सकती।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

VIDEO: पति को अचानक शुरू हुई उल्टियां, रात में दवा लेने निकली डॉक्टर… फिर बताई भारत की वो सुविधा जो विदेश में आसानी से नहीं मिलती

VIDEO: पति को अचानक शुरू हुई उल्टियां, रात में दवा लेने निकली डॉक्टर… फिर बताई भारत की वो सुविधा जो विदेश में आसानी से नहीं मिलती

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक डॉक्टर का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने बताया कि भारत में रात के समय अचानक तबीयत खराब होने पर दवाएं आसानी से मिल जाती है। वहीं UK और दूसरे पश्चिमी देशों में रात के समय काफी मुश्किल से मिलती है। एक डॉक्टर को कुछ देर के लिए रुकना पड़ा। इस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ ऐसी सुविधाएं हैं, जिन पर हम अक्सर ध्यान नहीं देते। उन्होंने भारत और पश्चिमी देशों की हेल्थकेयर व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि विदेशों में भी कई ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना लोगों को करना पड़ता है। भारत में देर रात तक मेडिकल स्टोर खुले रहना और जरूरत के समय आसानी से दवाइयां मिल जाना इनमें शामिल है। इस अनुभव से उन्हें समझ आया कि ये छोटी लगने वाली सुविधाएं असल में कितनी जरूरी हैं।

रात 10 बजे तबीयत हुई थी

डॉ. दीपांजलि शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया। उन्होंने बताया कि, एक शाम उनके डॉक्टर पति की अचानक तबीयत बिगड़ गई। शुरुआत में उन्हें सिरदर्द की शिकायत हुई, लेकिन कुछ देर बाद उल्टी भी होने लगी। उनकी हालत को देखते हुए रात करीब 10 बजे दीपांजलि को जरूरी दवाइयों का इंतजाम करने के लिए घर से बाहर जाना पड़ा। उन्होंने कहा, “मैं उनके लिए कुछ दवाइयां और IV इंजेक्शन लेने जा रही हूं। ऐसे समय में मुझे एहसास होता है कि भारत में रहना कितनी बड़ी सुविधा है।”

तुंरत नहीं मिलती जरूरी दवाएं

शर्मा ने बताया कि, इस घटना ने उन्हें UK और दूसरे पश्चिमी देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर होने के बावजूद विदेशों में तुरंत मेडिकल मदद या जरूरी दवाइयां मिलना आसान नहीं होता, खासकर रात या सामान्य समय के बाद। उन्होंने कहा, “अगर मैं इस समय UK या किसी दूसरे पश्चिमी देश में होती, तो शायद मुझे पहले लाइन में इंतजार करना पड़ता। संभव है कि बहुत ज्यादा भीड़ वाले इमरजेंसी डिपार्टमेंट में मेरे पति को तुरंत इलाज न मिल पाता।” उन्होंने यह भी बताया कि वहां जरूरी दवाइयां इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं कि उन्हें तुरंत जाकर खरीदा और इस्तेमाल किया जा सके।

 

हर देश बेहतर नहीं होता

शर्मा ने बताया कि, भारत में उन्हें रात के समय भी जरूरी दवाइयां और मेडिकल सामान आसानी से मिल गया। वह बाहर जाकर सामान लाई और फिर अपने पति की देखभाल कर सकीं। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि भारत की हेल्थकेयर व्यवस्था पूरी तरह बेहतर नहीं है और इसमें कई कमियां हैं। उनका कहना था कि हर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में कुछ न कुछ परेशानियां होती हैं, लेकिन जरूरत के समय दवाइयां आसानी से मिल जाना भारत की एक बड़ी सुविधा है। उन्होंने लिखा, “हमारे देश में कई चीजों में सुधार की जरूरत है, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि दुनिया का कोई भी देश हमें हर मामले में 100/100 वाला सबसे बेहतर अनुभव नहीं देता।”

विदेशों में भी होती है दिक्कतें

उन्होंने माना कि उन्हें भारत में जो सुविधाएं मिलीं, उनमें उनकी व्यक्तिगत स्थिति का भी असर था और देश में हर व्यक्ति को आसानी से स्वास्थ्य सेवाएं मिलना अभी भी आसान नहीं है। उनका कहना था कि जो लोग विदेश जाने को हर मामले में बेहतर मानते हैं, उन्हें वहां की चुनौतियों को भी समझना चाहिए। विदेशों में भी कई ऐसी परेशानियां हैं, जहां कुछ सुविधाएं भारत की तुलना में आसानी से नहीं मिलतीं। उनके मुताबिक, विदेश में रहने के फायदे हैं, लेकिन वहां भी लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

लोगों ने किया कमेंट

शर्मा के वीडियो पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने कहा कि भारत में देर रात तक दवाइयों की दुकानें खुली रहना, डॉक्टर से जल्दी संपर्क हो जाना और जरूरत की दवाइयां आसानी से मिल जाना बड़ी सुविधाएं हैं। वहीं कुछ यूजर्स ने भारत और विदेशों की स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना करते हुए नियमों और डॉक्टर की पर्ची वाली दवाइयों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। कई लोगों ने यह बात भी मानी कि दुनिया में कोई भी जगह पूरी तरह बेहतर या परफेक्ट नहीं है और हर देश में लोगों को कुछ सुविधाओं के साथ कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है।