दुनिया के 6 देश जहां नहीं है राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री, फिर भी चलती है सरकार

भले ही दुनिया के ज्यादातर देशों में राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री सरकार चलाते हों, लेकिन कुछ देशों में आज भी राजशाही की परंपरा जीवित है। कुछ ऐसे देश हैं, जहां राजा, सुल्तान, अमीर या धार्मिक प्रमुख ही देश की सत्ता संभालते हैं। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी इन देशों में पूरी तरह कायम है। आइए जानते हैं ऐसे की कुछ देशों के बारे में जहां आज भी राजशाही है।

सऊदी अरब

सऊदी अरब में राजशाही व्यवस्था लागू है, जहां देश का सर्वोच्च पद राजा के पास होता है। राजा ही देश के प्रमुख और सरकार के सबसे बड़े फैसले लेने वाले होते हैं। इसलिए यहां राष्ट्रपति का कोई पद नहीं है। वर्तमान में सऊदी अरब की कमान किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद के हाथों में है, जो देश के शासन और नीतियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

ओमान

ओमान में शासन की जिम्मेदारी सुल्तान के हाथों में होती है, जिनके पास देश चलाने के व्यापक अधिकार हैं। सुल्तान ही प्रशासन, विदेश नीति और महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों की देखरेख करते हैं, इसलिए यहां राष्ट्रपति का कोई पद नहीं है। वर्तमान में ओमान का नेतृत्व सुल्तान हैथम बिन तारिक कर रहे हैं।

ब्रुनेई

ब्रुनेई में भी राजशाही व्यवस्था लागू है, जहां देश की कमान सुल्तान के हाथों में होती है। मौजूदा सुल्तान हसनल बोल्किया देश के सर्वोच्च नेता हैं और सरकार के अहम फैसले लेते हैं। खास बात यह है कि वह सिर्फ देश के प्रमुख ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। इसी वजह से ब्रुनेई में राष्ट्रपति का कोई पद नहीं है।

कतर

कतर में वंशानुगत राजशाही व्यवस्था है, जहां देश का नेतृत्व अमीर करते हैं। अमीर के पास सरकार चलाने और महत्वपूर्ण राजनीतिक व प्रशासनिक फैसले लेने का अधिकार होता है। इसलिए कतर में राष्ट्रपति का कोई पद नहीं है। वर्तमान में शेख तमीम बिन हमद अल थानी देश के अमीर हैं और वही देश की बागडोर संभाल रहे हैं।

इस्वातिनी

अफ्रीकी देश इस्वातिनी, जिसे पहले स्वाजीलैंड के नाम से जाना जाता था, आज भी पूर्ण राजशाही व्यवस्था वाला देश है। यहां देश की सत्ता राजा मस्वाती तृतीय (मखोसेटिव दलामिनी) के हाथों में है। सरकार और प्रशासन से जुड़े प्रमुख फैसले राजा ही लेते हैं, इसलिए यहां किसी निर्वाचित राष्ट्रपति का पद नहीं है।

वेटेकन सिटी

वेटिकन सिटी दुनिया का सबसे छोटा स्वतंत्र देश है और यहां का शासन पोप के हाथों में होता है। पोप रोमन कैथोलिक चर्च के धार्मिक प्रमुख होने के साथ-साथ वेटिकन सिटी के सर्वोच्च शासक भी होते हैं। देश के प्रशासन, कानून और न्याय से जुड़े प्रमुख अधिकार भी उनके पास ही होते हैं, इसलिए यहां राष्ट्रपति का कोई पद नहीं है।

Asad Khan stepping up to international rally raid

Asad Khan Bajas World Cup

After winning the Indian National Rally Championship six times, Asad Khan is all set to make his international rally-raid debut later this year. His first outings will be in the Qatar Off-Road Championship, before competing in the FIM Bajas World Cup rounds in Qatar and Dubai.

  1. Khan currently has six national titles to his name
  2. To compete in Qatar and Dubai rounds of Bajas World Cup

India’s Asad Khan to race in FIM Bajas World Cup

Will make international debut in Qatar Off-Road Championship

Asad Khan

Khan started his motorsport journey on the plantation trails of Chikmagalur in Karnataka, inspired by his father’s rally racing experience. Since then, he’s gone on to become one of the most prominent names in Indian off-road racing, winning the Indian National Rally Championship six times and even the inaugural edition of the Hero Dirt Biking Challenge. He’s secured over 200 podium finishes across multiple rally, supercross and dirt-track events.

He’s now all-set to compete in the FIM Bajas World Cup rounds in Qatar (October 28-31) and Dubai (November 5-8), with backing from Indian riding gear brand Solace. Unlike the much longer cross-country rallies these Bajas events usually span two-to-three days. It still pushes both riders and machines to the limit, with events involving long days in the saddle, often over gruelling terrain. This year’s championship features seven rounds, with Qatar and Dubai hosting the last two.

In the build-up to his Bajas World Cup debut, Khan has confirmed that he’ll also be participating in the Qatar Off-Road Championship this October.

Iran-US War: गुड न्यूज! अमेरिका और ईरान हमले रोकने पर हुए सहमति, कतर में होगी होर्मुज पर वार्ता

Iran-US War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक गुड न्यूज आई है। अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर के बावजूद दोनों देशों की तरफ से किए गए हमले के बाद यह सहमति बनी है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का हवाला देते हुए ‘एक्सियोस’ (Axios) ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार 30 जून को कतर में बैठक करेंगे।

यह घटनाक्रम कई दिनों से चल रहे सैन्य टकराव के बढ़ने के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक सफलता हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष दोहा में बातचीत आगे बढ़ने के दौरान सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, “हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है।”

कतर में होर्मुज पर होगी चर्चा

कतर की राजधानी दोहा में होने वाली बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनाव को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। यह दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स में से एक है, जहां हालिया हमलों ने शिपिंग को बाधित किया है।

इसके अलावा, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी है कि 17 जून को हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत दोनों पक्षों के बीच तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया, “MoU के सभी क्षेत्रों पर तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटेंगे और जहाज स्वतंत्र रूप से आ-जा सकेंगे।” यह उस समझौते का जिक्र है जिसके तहत होर्मुज को समुद्री ट्रैफिक के लिए फिर से खोला जाएगा।

ईरान के हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध

गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर ईरानी प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट) के हमले के बाद लड़ाई फिर से शुरू हो गई थी। इसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। रविवार तड़के ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें और ड्रोन दागे। इससे कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक संघर्ष खत्म करने के समझौते का सम्मान करने में विफल रहता है, तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

ट्रंप ने दी चेतावनी

होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमले के कुछ घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले भी किए थे। यह एक प्रमुख वैश्विक ऊर्जा शिपिंग रूट्स है जिसे तेहरान ने संघर्ष के दौरान काफी हद तक बंद कर दिया था। ‘Axios’ की रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है।

ट्रंप ने लिखा, “एक समय ऐसा आ सकता है जब हम अब समझदारी से काम न ले पाएं, और हमें उस काम को सैन्य रूप से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था।” उन्होंने आगे कहा, “अगर ऐसा होता है, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही नहीं रहेगा!

राजनयिक कोशिशों को झटका लगा

17 जून के अंतरिम शांति समझौते का मकसद लड़ाई रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत बड़े मुद्दों पर बातचीत का रास्ता बनाना था। स्विट्जरलैंड में मध्यस्थता वाली बातचीत का एक दौर पहले ही हो चुका था, जिसकी अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने की थी।

वाशिंगटन ने तेहरान पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए थे। लेकिन इन राजनयिक कोशिशों के बावजूद सैन्य टकराव फिर से शुरू हो गया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी नौसेना और वायु सेना ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उसने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों ने संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया है।

IRGC ने चेतावनी दी कि अमेरिकी हमलों के कारण सभी राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी तरह से रुक जाएंगी। जबकि उसके नौसैनिक कमांड ने कहा कि इस इलाके में अमेरिकी ठिकानों को आने वाले दिनों में नरक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।

एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को पुष्टि की है कि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। लेकिन कहा कि किसी अमेरिकी के हताहत होने या बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

इलाके में तनाव बरकरार

इजरायल ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों पर एक और हमला किया। इससे पहले शनिवार को भी लेबनान के साथ हुए हालिया संघर्ष-विराम समझौते के बावजूद एक अलग हमला किया गया था। ईरान का कहना है कि अगर व्यापक क्षेत्रीय समझौते को बनाए रखना है, तो लेबनान में लड़ाई खत्म होनी चाहिए।

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वहीं, दूसरी ओर बहरीन ने कहा कि ईरान के हमले से मुहर्रक प्रांत में एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा है। लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की है।