ED ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों की तलाशी ली! 5 चौंकाने वाली बातें मिली, ₹3000 करोड़ के लेन-देन पर भी सवाल

Rajesh Exports ED Raid: गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी Rajesh Exports Ltd (REL) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत बेंगलुरु और मुंबई में कंपनी और उससे जुड़े लोगों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की है।

यह कार्रवाई 23 जून से शुरू हुई थी। जांच के दौरान ED को कई ऐसी बातें मिली हैं, जिन पर अब विस्तार से जांच की जा रही है।

1. विदेशी लेन-देन के दस्तावेज नहीं मिले

ED का कहना है कि कंपनी अपने कई विदेशी लेन-देन से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पाई। इनमें आयात-निर्यात, विदेशों में किए गए निवेश और विदेशी कंपनियों से मिलने या उन्हें दिए जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड शामिल है।

एजेंसी के मुताबिक, दस्तावेज नहीं होने की वजह से यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि ये लेन-देन वास्तव में हुए भी थे या नहीं। ED ने यह भी कहा कि कंपनी अफ्रीका की खदानों में किए गए कथित ₹1,035 करोड़ के निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी नहीं दिखा पाई।

2. ₹3,000 करोड़ के लेन-देन पर सवाल

जांच में यह भी सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स UAE और कुछ दूसरे देशों की कंपनियों के साथ अपने देनदार और लेनदार खातों को आपस में एडजस्ट कर रही थी। ED के मुताबिक, ऐसे करीब ₹3,000 करोड़ के लेन-देन मिले हैं।

एजेंसी का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि पैसा आखिर कहां से आया और कहां गया।

3. फैक्ट्री स्टॉक में 40% का अंतर

छापेमारी के दौरान ED ने फैक्ट्री में मौजूद माल का भी मिलान किया। जांच में पाया गया कि कंपनी के रिकॉर्ड में जितना स्टॉक दिखाया गया था, वास्तविक स्टॉक उससे करीब 40% कम या ज्यादा था।

यानी कागजों और जमीन पर मौजूद माल के बीच बड़ा अंतर मिला है। अब एजेंसी इसकी वजह तलाश रही है।

4. अधिकारियों की सैलरी बेहद कम

ED ने कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स की सैलरी पर भी सवाल उठाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के CFO को साल 2020 के बाद से कोई वेतन नहीं मिला।

वहीं कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को सिर्फ करीब ₹17,000 महीने की सैलरी दी जा रही थी। ED के मुताबिक, यह आंकड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि कॉर्पोरेट जगत में ऊंचे पदों पर इतनी कम सैलरी देने का चलन नहीं है। खासकर, अगर कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू करीब ₹7.7 लाख करोड़ बताया गया होय़

5. शेयरों में हेरफेर का भी शक

ED ने कुछ संदिग्ध ब्लॉक डील्स और शेयरों में संभावित हेरफेर की ओर भी इशारा किया है।

एजेंसी के मुताबिक, इन सौदों में शामिल कुछ लोगों के नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) की लीक रिपोर्ट्स में भी सामने आए हैं। जांच एजेंसी को शक है कि NRI बेनामी खातों का इस्तेमाल कर शेयरों में हेरफेर की गई और ₹600 करोड़ से ज्यादा रकम भारत से बाहर भेजी गई।

SEBI की रिपोर्ट के बाद बढ़ीं मुश्किलें

Rajesh Exports की मुश्किलें तब बढ़ गईं, जब हाल ही में SEBI ने कंपनी पर बड़ा आरोप लगाया। रेगुलेटर का दावा है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने अपने रेवेन्यू को कथित तौर पर ₹15.15 लाख करोड़ तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया।

SEBI के मुताबिक, कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़ी आय को जिस तरह पेश किया, वह उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। खासकर स्विट्जरलैंड की Valcambi SA का रेवेन्यू। रेगुलेटर को शक है कि इससे निवेशकों के सामने कंपनी के कारोबार का आकार असलियत से कहीं बड़ा दिखाया गया।

कंपनी ने आरोपों को किया है खारिज

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अगर कोई आंकड़ों में हेरफेर करना चाहे, तो वह मुनाफा बढ़ाकर दिखाएगा। सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने से कोई खास फायदा नहीं होता।

इस बीच जांच की खबरों का असर शेयर पर भी दिखा। बुधवार को Rajesh Exports का शेयर करीब 5% गिरकर ₹102.85 पर बंद हुआ। इससे पहले स्टॉक कुछ ही कारोबारी सत्र में करीब 30% तक बढ़ गया था। फिलहाल ED और SEBI दोनों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

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Rajesh Exports Share Price: 5% उछाल के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में लगा अपर सर्किट, 5 सत्रों में 28% चढ़ा है स्टॉक

Rajesh Exports Share Price: राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 19 जून को बड़ी तेजी आई। 5 फीसदी चढ़ने के बाद शेयर में अपर सर्किट लग गया। बीते पांच ट्रेडिंग सेशंस में यह शेयर करीब 28 फीसदी चढ़ चुका है। कंपनी और इसके फाउंडर राजेश मेहता के खिलाफ सेबी के अंतरिम आदेश के बाद शेयर में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, अब शेयर तब के क्लोजिंग लेवल से करीब 11 फीसदी नीचे रह गया है।

सेबी ने 3 जून को दिया था अंतरिम आदेश

सेबी ने 3 जून को राजेश एक्सपोर्ट्स उसके फाउंडर चेयरमैन के खिलाफ अंतरिम आदेश दिया था। उसके बाद लगातार 7 सत्रों में शेयर गिरा था। इससे पिछले महीने इसका भाव गिरकर 52 हफ्ते के निचले स्तर 77.05 रुपये पर आ गया था। रेगुलेटर ने मामले की जांच पूरी होने तक राजेश एक्सपोर्ट्स और मेहता पर सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन करने पर रोक लगा दी है। कंपनी पर FY21 और FY25 के बीच करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने का आरोप है।

राजेश एक्सपोर्ट्स ने आरोपों को गलत बताया

सेबी का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स की विदेश में स्थित सब्सिडियरीज के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा बढ़ाकर दिखाया गया। रेगुलेटर के मुताबिक, FY21 और FY25 के बीच राजेश एक्सपोर्ट्स के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में उसकी सब्सिडियरीज कंपनियों की हिस्सेदारी 97-99 फीसदी थी। हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के आरोपों को गलत बताया है। पिछले हफ्ते कंपनी ने इस बारे में सफाई पेश की थी। उसने कहा था कि सेबी के आदेश में सिर्फ प्रारंभिक ऑब्जर्वेशन शामिल है। उसने यह भी कहा था कि उसका रेवेन्यू और फाइनेंशियल डिसक्लोजर्स सही हैं।

राजेश एक्सपोर्ट्स आरोपों का जवाब तैयार कर रही

राजेश एक्सपोर्ट्स ने यह भी कहा था कि वह सपोर्टिंग डॉक्युमेंट्स के साथ सेबी के आरोपों का जवाब तैयार कर रही है। उसने मनीकंट्रोल को बताया कि अलग-अलग एक्सचेंज के डिसक्लोजर्स में डेटा में जो फर्क है, उसकी वजह रिपोर्टिंग के अलग-अलग तरीके हैं। इनसे डेटा में किसी तरह की अनियमितता का संकेत नहीं मिलता है।

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इस साल 45 फीसदी गिरा है कंपनी का शेयर 

राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर इस साल अब तक 45 फीसदी से ज्यादा गिरा है। इधर, 19 जून को शेयर बाजारों में 5 दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया। 11:20 बजे निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 212 अंक गिरकर 23956 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1 फीसदी की कमजोरी यानी 783 अंक गिरकर 76,624 पर चल रहा था। इससे पहले अमेरिका-ईरान में डील की खबर से शेयर बाजारों में लगातार तेजी देखने को मिली थी।