दुनिया का सबसे सस्ता शहर बनी दिल्ली! डेट से लेकर इंटरनेट तक सब सस्ता, लेकिन सैलरी ने चौंकाया

दिल्ली में दुनिया का सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी मिल भी मिलता है और 3 BHK फ्लैट का मासिक किराया और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में प्रॉपर्टी की कीमत भी कम है। डेट और सस्ते इंटरनेट के बीच दिल्ली का एक कड़वा सच भी सामने आया है।  ड्यूश बैंक के हालिया ग्लोबल कॉस्ट ऑफ लिविंग सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की जिंदगी के खर्च के मामले में दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शामिल है। चाहे घर का किराया हो या किसी साथी के साथ बाहर घूमने-फिरने का खर्च, दिल्ली में खर्च दूसरे बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है। हालांकि, यहां रहने वाले लोगों की औसत कमाई भी कई प्रमुख शहरों के मुकाबले सबसे कम बताई गई है।

रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

यह जानकारी ड्यूश बैंक की ‘मैपिंग द वर्ल्ड्स प्राइसेस 2026’ रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट में दुनिया के 69 शहरों का आकलन उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत, वेतन, मकानों की लागत और जीवन की गुणवत्ता जैसे कई पैमानों पर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सामान्य और किफायती डेट (बाहर घूमने और खाने का खर्च) के लिए दिल्ली दुनिया का सबसे सस्ता शहर है। इसके लिए औसतन 103 डॉलर (करीब 9,920 रुपये) खर्च होते हैं। वहीं, स्विट्जरलैंड का जिनेवा इस मामले में सबसे महंगा शहर है, जहां इसी तरह की आउटिंग पर 475 डॉलर (करीब 45,750 रुपये) खर्च करने पड़ते हैं।

इन चीजों के खर्च के आधार पर हुई तुलना, इंटरनेट भी सबसे सस्ता

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट में शहरों की किफायत का आकलन कई रोजमर्रा के खर्चों के आधार पर किया गया। इसमें वाइन की एक बोतल, एक जोड़ी जींस, गर्मियों की एक ड्रेस, दो कप कॉफी, मिड-रेंज रेस्तरां में दो लोगों का डिनर, दो मूवी टिकट, सार्वजनिक परिवहन के दो टिकट और 5 किलोमीटर की टैक्सी यात्रा का खर्च शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मासिक ब्रॉडबैंड इंटरनेट के मामले में भी दिल्ली सबसे सस्ता शहर रहा। यहां एक औसत इंटरनेट कनेक्शन की कीमत 7.3 डॉलर (करीब 703 रुपये) प्रति माह आंकी गई।

हालांकि, कम खर्च होने के बावजूद जीवन की गुणवत्ता (क्वालिटी ऑफ लाइफ) के मामले में दिल्ली शीर्ष 50 शहरों में जगह नहीं बना सकी। इस रैंकिंग में लोगों की खरीदने की क्षमता, सार्वजनिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, घरों की किफायती कीमत, प्रदूषण, मौसम और रोजाना आने-जाने में लगने वाले समय जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है।

दिल्ली में लोगों की कमाई भी काफी कम

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में घरों की कीमतें काफी कम हैं। शहर के बीचों-बीच एक वर्ग मीटर रिहायशी संपत्ति की औसत कीमत 2,465 डॉलर (करीब 2.37 लाख रुपये) है। इसी आधार पर 69 शहरों की सूची में दिल्ली 65वें स्थान पर रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली में संपत्तियों की कीमतों में 9.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, 2019 के बाद से घरों की कीमतों में 15.7 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई है।

कमाई के मामले में दिल्ली सबसे पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, कमाई के मामले में दिल्ली की स्थिति काफी कमजोर है। हाथ में मिलने वाली मासिक सैलरी (नेट सैलरी) के आधार पर दिल्ली 69 शहरों में 66वें स्थान पर रही। दिल्ली में औसत मासिक नेट सैलरी 538 डॉलर (करीब 51,800 रुपये) बताई गई है। यह न्यूयॉर्क में काम करने वाले लोगों की औसत कमाई का लगभग दसवां हिस्सा है। वहीं, स्विट्जरलैंड का ज़्यूरिख इस सूची में सबसे ऊपर रहा। वहां लोगों की औसत मासिक नेट सैलरी 8,363 डॉलर (करीब 8.05 लाख रुपये) दर्ज की गई।

पिछले 10 साल में डॉलर के हिसाब से घटी सैलरी

ड्यूश बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में औसत मासिक सैलरी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वर्ष 2012 में औसत सैलरी 633 डॉलर थी, जो 2016 में बढ़कर 653 डॉलर हो गई। इसके बाद 2019 में यह घटकर 556 डॉलर रह गई। 2025 में बढ़कर 607 डॉलर हुई, लेकिन 2026 में फिर गिरकर 538 डॉलर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में डॉलर के हिसाब से दिल्ली की औसत सैलरी में 17.7 फीसदी की कमी आई है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

यह अध्ययन ड्यूश बैंक रिसर्च इंस्टीट्यूट के जिम रीड और गैलिना पोज़्दन्याकोवा ने तैयार किया है। 13 जुलाई को प्रकाशित इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से नमबेओ (Numbeo) के जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें बाद में ड्यूश बैंक की रिसर्च टीम ने जांचकर और बेहतर बनाया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉफी पीने वालों के लिए दिल्ली दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में से एक है। यहां एक रेगुलर कैपुचीनो कॉफी की औसत कीमत 2.40 डॉलर (करीब 231 रुपये) है। वहीं, शहर के मुख्य इलाके में तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट का औसत मासिक किराया 685 डॉलर (करीब 65,970 रुपये) बताया गया है।

बीयर और सिगरेट का खर्च अब भी कम

ड्यूश बैंक की “ओएसिस इंडेक्स” (Oasis Index) रैंकिंग में दिल्ली 52वें स्थान पर रही। इस इंडेक्स में पांच बीयर और सिगरेट के दो पैकेट खरीदने में आने वाले कुल खर्च के आधार पर शहरों की तुलना की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इस पूरी खरीदारी पर औसतन 18.8 डॉलर (करीब 1,800 रुपये) खर्च होते हैं। यह न्यूयॉर्क में इसी तरह की खरीदारी पर होने वाले खर्च का लगभग 35 फीसदी है।

रैंकिंग की बात करें तो 2025 के मुकाबले दिल्ली सात स्थान ऊपर आई है। हालांकि, 2016 की रैंकिंग की तुलना में यह एक पायदान नीचे खिसक गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि डॉलर के हिसाब से पिछले 10 वर्षों में इस बास्केट की कीमत 36 फीसदी बढ़ी है। वहीं, 2019 के बाद से इसमें 13.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Retail Inflation: महंगाई का झटका! जून में बढ़कर 4.38% पहुंची, RBI के लक्ष्य से ऊपर निकली

Retail Inflation: जून महीने में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई। मई में यह 3.93% थी। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने से महंगाई में फिर तेजी आई है। यह पिछले 6 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और RBI के 4% के लक्ष्य से भी ऊपर निकल गई है।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई महंगाई

जून में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम रहे। फूड इंफ्लेशन मई के 4.78% से बढ़कर जून में 5.32% हो गई। चूंकि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए इनके दाम बढ़ने का असर सीधे कुल महंगाई पर पड़ा।

होटल और रेस्तरां में खाने-पीने की सेवाएं भी 6.94% महंगी हुईं। वहीं, निजी गाड़ी चलाने का खर्च 7.35% और माल ढुलाई सेवाओं की लागत 7.70% बढ़ गई। इससे साफ है कि ईंधन और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ा है।

गहनों की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

‘अन्य व्यक्तिगत सामान’ श्रेणी सबसे ज्यादा महंगी रही। इसमें सोने-चांदी और गहने शामिल हैं। इस श्रेणी में महंगाई दर 50.17% रही। हालांकि, मई में यह 56.35% थी, यानी बढ़ोतरी की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी कम हुई है।

कुछ चीजों के दाम घटे भी

हर चीज महंगी नहीं हुई। जून में कुछ टिकाऊ सामानों की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई। गाड़ियों की खरीद पर महंगाई दर -4.59% रही। वहीं मनोरंजन से जुड़े टिकाऊ सामान और घर-बगीचे में इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरण भी सस्ते हुए। सरकार का कहना है कि GST में पहले की गई कटौती का असर इन प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दिखा।

गांवों में ज्यादा बढ़ी महंगाई

महंगाई का असर ग्रामीण इलाकों में ज्यादा देखने को मिला। जून में ग्रामीण महंगाई 4.74% रही, जो मई में 4.25% थी। वहीं शहरी महंगाई 3.53% से बढ़कर 3.92% हो गई। इससे पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों का असर गांवों में ज्यादा पड़ा।

इस साल के पहले पांच महीनों में महंगाई लगातार कम हो रही थी, लेकिन जून में इसमें फिर तेजी आ गई। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतें ही महंगाई की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

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