ब्रह्मोस डील, सबांग पोर्ट और IIM कैंपस… PM Modi की इंडोनेशिया यात्रा की 20 बड़ी उपलब्धियां ये रहीं

PM Modi Indonesia visit 20 outcomes list: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की राजकीय यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक साबित हुई है। जकार्ता में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों देशों ने आपसी द्विपक्षीय सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, दवाएं और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

वार्ता के बाद पीएम मोदी ने अपने बयान में कहा कि साल 2018 में हमने जो व्यापक रणनीतिक साझेदारी बनाई थी वह आज एक नई उड़ान भर रही है। हम विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक स्वर्ण अध्याय शुरू हो रहा है।

रक्षा, डिजिटल पेमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े मील के पत्थर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल द्वारा साझा किए गए आधिकारिक विवरण और पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस यात्रा के दौरान कई बड़े और रणनीतिक ऐलान किए गए हैं।

सबांग पोर्ट का संयुक्त विकास: दोनों देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबांग पोर्ट का संयुक्त रूप से विकास करने पर सहमत हुए हैं। ये स्ट्रेट ऑफ मक्का के ठीक सामने स्थित है और भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से महज 100 मील की दूरी पर है।

UPI और डिजिटल पेमेंट इंटीग्रेशन: भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI अब इंडोनेशिया के भुगतान सिस्टम के साथ इंटिग्रेट होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्रा दोनों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

ब्लू इकोनॉमी और समुद्री व्यापार: दोनों पक्षों ने ब्लू इकोनॉमी, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।

वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा: दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की, जहां पीएम मोदी ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए टू-स्टेट सॉल्यूशन और दीर्घकालिक शांति का समर्थन किया।

पीएम मोदी की यात्रा के 20 टॉप आउटकम

यहां दोनों देशों के बीच हुए उन 20 महत्वपूर्ण समझौतों और निर्णयों की पूरी सूची दी गई है, जो इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियां बनकर सामने आई हैं:

1- स्टील सप्लाई चेन और मिनरल्स सहयोग

समझौता: स्टील सप्लाई चेन के मिनरल्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है।

मायने: यह खनिज और खनन क्षेत्र में आपसी निवेश को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एडवांस्ड एक्सट्रैक्शन और प्रोसेसिंग तकनीकों तक पहुंच में सुधार होगा, संयुक्त अध्ययनों व परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन मजबूत होगी।

2- समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार

समझौता: मैरीटाइम सेफ्टी एंड सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर MoU और इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट का विस्तार किया गया है।

मायने: इससे दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, सर्च एंड रेस्क्यू और क्षमता निर्माण में तालमेल बढ़ेगा जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलेगा।

3- रेयर अर्थ मैग्नेट्स का विकास

समझौता: भारत के NFTDC, मिडवेस्ट लिमिटेड और इंडोनेशिया के PT PERMINAS के बीच रेयर अर्थ मैग्नेट्स के विकास को लेकर MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं।

मायने: यह कदम रेयर अर्थ्स (दुर्लभ तत्वों) और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाएगा। इससे इस क्षेत्र की वैश्विक सप्लाय चेन में विविधता आएगी और अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी।

4- ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम पर सहयोग

समझौता: इंडोनेशियाई सेना को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति और इस पर सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच आधिकारिक सहमति बनी है।

मायने: यह रक्षा समझौता भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिलेगा और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के साथ-साथ नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

5- एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग

समझौता: हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत इंडोनेशिया भारत की अस्त्र मिसाइलों का आयात करेगा।

मायने: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस भारतीय मिसाइल की अचूक सफलता को देखते हुए इंडोनेशियाई सेना ने इसे खरीदने का फैसला लिया है। यह समझौता भारत के रक्षा निर्यात और मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के संकल्प को गति देगा, जिससे भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

6- स्टेनलेस-स्टील स्लैब विनिर्माण के लिए संयुक्त उद्यम

समझौता: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया और इंडोनेशिया की पीटी क्रकाटाऊ स्टील के बीच इंडोनेशिया में स्टेनलेस-स्टील स्लैब विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए एक रणनीतिक संयुक्त उद्यम का गठन किया गया है।

मायने: यह साझा उत्पादन और आधुनिक तकनीक तक पहुंच को आगे बढ़ाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह ‘विकसित भारत’ के औद्योगिक लक्ष्यों में योगदान देगा।

7- अंतरिक्ष सहयोग समझौते का विस्तार

समझौता: शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष के अन्वेषण और उपयोग में सहयोग पर चल रहे फ्रेमवर्क समझौते का विस्तार किया गया है।

मायने: यह कदम दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी साझाकरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे भारत और इंडोनेशिया की तीन दशक पुरानी अंतरिक्ष साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।

8- प्रंबानन मंदिर परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार

समझौता: ऐतिहासिक प्रंबानन मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए भारत की तरफ से सहायता प्रदान की जाएगी।

मायने: विकास भी, विरासत भी के दृष्टिकोण के तहत, यह दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को आगे बढ़ाता है और हेरिटेज कंजर्वेशन में भारत की वैश्विक विशेषज्ञता को प्रदर्शित करता है।

9- कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग

समझौता: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मायने: यह टिकाऊ कृषि, फसलों और कृषि मशीनरी के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाएगा, जिससे किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने वाले संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

10- चिकित्सा उत्पाद विनियमन में सहयोग

समझौता: भारत के CDSCO और इंडोनेशिया के BPOM के बीच चिकित्सा उत्पाद विनियमन के क्षेत्र में सहयोग के लिए MoU हुआ है।

मायने: यह वैश्विक नियामक मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर ज्ञान के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा, जिससे भारतीय चिकित्सा उत्पादों पर भरोसा बढ़ेगा और इंडोनेशियाई बाजार में भारतीय दवाओं व उत्पादों की पहुंच आसान होगी।

11- आपदा प्रबंधन में आपसी सहयोग

समझौता: भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और इंडोनेशिया की नेशनल एजेंसी फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के बीच MoU हुआ है।

मायने: इससे रक्षा एक्सचेंजों, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग में आपसी समन्वय बेहतर होगा। यह समझौता आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान, शुरुआती चेतावनी और जोखिम मूल्यांकन के लिए तकनीक-आधारित ऐप्लिकेशंस के उपयोग को बढ़ावा देगा।

12- दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और सेवाओं में साझेदारी

समझौता: दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन हुआ है।

मायने: यह कदम वायरलेस और क्वांटम सिस्टम सहित उन्नत टेलीकॉम तकनीकों तक पहुंच में सुधार करेगा और दोनों देशों के बीच संयुक्त नवाचार और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को भी मजबूती प्रदान करेगा।

13- अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग

समझौता: रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कोऑपरेशन पर दोनों देशों के बीच MoU हुआ है।

मायने: यह प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को सक्षम बनाकर भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करेगा, जिससे ‘स्टार्टअप इंडिया मिशन’ सहित दोनों देशों के स्टार्टअप और नवाचार इकोसिस्टम को गति मिलेगी।

14- स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग

समझौता: हेल्थ कार्यबल सहयोग पर कार्यान्वयन व्यवस्था लागू की गई है।

मायने: यह स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए फेलोशिप कार्यक्रमों की सुविधा देगा और योग्य भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों को इंडोनेशिया में काम करने के अवसर व विशिष्ट चिकित्सा क्षेत्रों में व्यावहारिक नैदानिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

15- समुद्री सुरक्षा के लिए इन्फोसेंटर में तैनाती

समझौता: भारत के IFC-IOR में एक इंडोनेशियाई संपर्क अधिकारी की तैनाती की जाएगी।

मायने: यह रणनीतिक कदम वास्तविक समय में समुद्री सूचनाओं के साझाकरण को बढ़ाएगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी।

16- इंडोनेशिया को उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीजों की आपूर्ति

समझौता: भारत द्वारा इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले ‘DWR 162’ गेहूं के बीजों की आपूर्ति की जाएगी।

मायने: यह कदम इंडोनेशिया और पूरे ग्लोबल साउथ की खाद्य सुरक्षा का मजबूती से समर्थन करता है और कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के व्यापक जुड़ाव को दर्शाता है।

17- टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष

समझौता: ‘टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ के आयोजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।

मायने: यह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के की हजार देवान्तारा के साझा शैक्षिक दृष्टिकोण का उत्सव मनाता है। रवींद्रनाथ टैगोर की 1927 की इंडोनेशिया यात्रा के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले संयुक्त सांस्कृतिक, शैक्षिक और जन-दर-जन संपर्क कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी।

18- इंडोनेशिया में IIM बैंगलोर का नया कैंपस

समझौता: इंडोनेशिया के सिंघासारी SEZ में भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर के एक ब्रांच कैंपस की स्थापना की जाएगी।

मायने: यह वैश्विक स्तर पर भारत की शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है और दुनिया भर में एक ‘नॉलेज हब’ के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा।

19- डिजिटल कॉमर्स और पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग

समझौता: भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) के बीच सहयोग पर सहमति बनी है।

मायने: यह डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा, जिससे भारत के ONDC आर्किटेक्चर पर आधारित यह मॉडल आम लोगों के लिए डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ, कुशल और समावेशी बनाएगा।

20- निर्वाचन आयोगों के बीच ऐतिहासिक समझौता

समझौता: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और इंडोनेशिया के सामान्य चुनाव आयोग (KPU) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मायने: यह दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के चुनाव निकायों के बीच ज्ञान, अनुभवों और सर्वोत्तम चुनावी प्रथाओं को साझा करने की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे मानव संसाधन विकास और कुशल प्रशासनिक प्रथाओं के लिए तकनीक के उपयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।

इंडोनेशिया में रक्षा, शिक्षा और आर्थिक सहयोग के इन तमाम ऐतिहासिक मील के पत्थरों को स्थापित करने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यापार और सुरक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए अपने तीन देशों के इस दौरे के अगले चरणों के तहत ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।

PM मोदी को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान Bintang Adipurna, कब शुरू हुआ था ये सम्मान, क्यों दिया जाता है सब जानिए

Indonesia’s highest civilian honour- Bintang Adipurna: इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मंगलवार को घोषणा की कि इंडोनेशिया ने पीएम नरेंद्र मोदी को रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान बिंतंग आदिपूर्ण (Bintang Adipurna) से सम्मानित किया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और जुड़ाव के लिए दिया गया है। इस ऐतिहासिक सम्मान के साथ ही भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कई बड़े और दूरगामी समझौतों पर भी मुहर लगी है।

क्या है Bintang Adipurna सम्मान? जानें इसका इतिहास और क्यों दिया जाता है

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक Bintang Republik Indonesia (स्टार ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया) यहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। इसे रिपब्लिक और वहां के लोगों के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नागरिकों और सैन्य कर्मियों दोनों को दिया जाता है। इस सर्वोच्च सम्मान को आधिकारिक तौर पर साल 1959 में स्थापित किया गया था।

क्यों दिया जाता है: यह इंडोनेशिया गणराज्य द्वारा प्रदान किए जाने वाले नागरिक और सैन्य सम्मान का सर्वोच्च शिखर है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने इंडोनेशियाई राष्ट्र की अखंडता, निरंतरता, व्यवहार्यता और समृद्धि को सुरक्षित रखने के लिए असाधारण सेवा, समर्पण और महानता का प्रदर्शन किया हो।

पीएम मोदी ने जताया आभार

जकार्ता पहुंचने पर मिले बेहद गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने जकार्ता के राष्ट्रपति भवन इस्ताना मरदेका में अपनी अगवानी की कुछ झलकियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा कीं। पीएम मोदी ने X पर लिखा कि इस्ताना मरदेका में गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद!

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस दौरे को लेकर कहा कि यह यात्रा भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि यह यात्रा प्राथमिक क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोलेगी, साथ ही दोनों देशों को बांधने वाले गहरे विश्वास, साझा मूल्यों और स्थायी मित्रता को और मजबूत करेगी।

इस दौरे से निकलेंगे बड़े नतीजे, इन 5 बड़े समझौतों पर लगी मुहर

एएनआई को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी की इस इंडोनेशिया यात्रा के बेहद बड़े और ऐतिहासिक परिणाम सामने आने वाले हैं:

1- भारत के इलेक्शन मॉडल को मिला सपोर्ट

भारत के चुनाव प्रबंधन मॉडल को यहां एक बड़ा सपोर्ट हासिल हुआ है। इसी क्रम में भारत अब इंडोनेशिया की खास जरूरतों के मुताबिक वहां के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) डेवलप करने में मदद करेगा।

2- भारतीय अस्त्र (Astra) मिसाइल खरीदेगा इंडोनेशिया

ऑपरेशन सिंदूर में भारत की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल क्षमता की अचूक सफलता साबित होने के बाद इंडोनेशिया ने अब भारत की अस्त्र मिसाइलों को आयात करने का बड़ा फैसला किया है। इसके साथ ही इंडोनेशिया अपने ब्रह्मोस मिसाइल के इन्वेंट्री बेस को भी बढ़ा रहा है। इस क्रम में भारत इंडोनेशिया को और अधिक मिसाइल बैटरियों के साथ सहयोग करेगा।

3- क्रिटिकल मिनरल सप्लाय चेन और स्टील में निवेश

क्रिटिकल मिनरल की सप्लाय चेन को मजबूत करने के लिए भारत अब इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के निर्माण में बड़ा निवेश करेगा।

4- साबांग पोर्ट (Sabang Port) का संयुक्त विकास

रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण डील के तहत भारत और इंडोनेशिया मिलकर संयुक्त रूप से साबांग पोर्ट का विकास करेंगे। यह बंदरगाह स्ट्रेट ऑफ मलक्का के ठीक सामने है। ये भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से सिर्फ 100 मील की दूरी पर है।

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‘स्टेडियम की छत बंद रखना, वरना…’, ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले PM मोदी को मिली धमकी, जांच जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह ऑस्ट्रेलिया जाएंगे। इस दौरे पर पीएम मोदी, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज से मेलबर्न में वार्षिक शिखर सम्मेलन में मुलाकात करेंगे। वहीं इस दौरे से पहले पीएम मोदी को फेसबुक पर जान से मारने की कथित धमकी मिलने का मामला सामने आया है। इस मामले के बाद ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। बता दें कि, प्रधानमंत्री मोदी 8 से 10 जुलाई के बीच मेलबर्न दौरे पर रहेंगे।

ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले PM मोदी को मिली धमकी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह धमकी “मेलबर्न मीट्स मोदी” कार्यक्रम के प्रचार से जुड़ी एक फेसबुक पोस्ट के कमेंट में दी गई थी। यह कार्यक्रम 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित होना है। रिपोर्ट के अनुसार, “अबू मुस्तफा” नाम के एक फेसबुक अकाउंट से टिप्पणी करते हुए लिखा गया कि कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम की छत बंद रहनी चाहिए, नहीं तो प्रधानमंत्री मोदी के लिए खतरा हो सकता है।

मामले की जांच जारी 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसियों ने फेसबुक पोस्ट से जुड़े आईपी एड्रेस का पता लगा लिया है। अब अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि धमकी किसने दी और क्या इस मामले में आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस (AFP) ने जांच जारी होने का हवाला देते हुए अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है और न ही ज्यादा जानकारी साझा की है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस कथित धमकी को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके अलावा वह ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल से भी मुलाकात करेंगे। इस यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भी शामिल होंगे, जहां वह दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं को संबोधित करेंगे। साथ ही, वह ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों के मजबूत रिश्तों की एक अहम कड़ी है।

India-Japan trade: AI से लेकर नेक्स्ट-जेन मोबिलिटी तक… भारत-जापान संबंधों का नया अध्याय, जानिए बड़ी बातें

India-Japan trade: भारत और जापान के रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची अपने पहले भारत दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें अपनी ‘छोटी बहन’ बताया। दोनों नेताओं के बीच नई दिल्ली में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। राष्ट्रपति भवन में जापान की प्रधानमंत्री तकाइची का भव्य स्वागत किया गया। उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इसके बाद नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी और तकाइची के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।

भारत और जापान ने गुरुवार को कई अहम पहलों की घोषणा की। इसमें एक इकोनॉमिक पार्टनरशिप फ्रेमवर्क और मिलिट्री इक्विपमेंट को मिलकर डेवलप करने के लिए एक डिफेंस एग्रीमेंट शामिल है। इन पहलों की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापान की अपनी समकक्ष सनाए तकाइची के बीच समिट बातचीत के बाद की गई। मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए, जिसमें इकोनॉमिक सिक्योरिटी पर एक घोषणा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग पर एक जॉइंट स्टेटमेंट और एनर्जी सप्लाई चेन में सहयोग को मजबूत करने का एक एग्रीमेंट शामिल है।

कल्चरल वैल्यू से लेकर मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक 

प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया को जारी एक बयान में कहा, “भारत और जापान की इकोनॉमी एक-दूसरे की पूरक हैं। कल्चरल वैल्यू से लेकर मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक, हम अपनी सोच और कामों में भी समानताएं शेयर करते हैं।” उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते की नींव अटूट आपसी भरोसे पर टिकी है।” PM मोदी ने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने इकोनॉमिक सिक्योरिटी के लिए एक जॉइंट रोडमैप बनाया है।

सप्लाई चेन को और मजबूत और लचीला बनाएंगे

पीएम मोदी ने कहा, “इसके जरिए हम सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटीरियल जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर में सप्लाई चेन को और मजबूत और लचीला बनाएंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान ने एनर्जी सिक्योरिटी के क्षेत्र में भी कई अहम फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा, “इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के ज़रिए, हम इंडिया में 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र प्लांट लगाएंगे। इससे इंडियन गांवों में खुशहाली आएगी और गांव की रोजी-रोटी और मजबूत होगी।”

भारत-जापान में कई अहम करार

PM मोदी और तकाइची की मौजूदगी में इकोनॉमिक सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी, जरूरी टेक्नोलॉजी और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के एरिया में कोऑपरेशन से जुड़े जरूरी मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) एक्सचेंज किए गए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इंडिया और जापान डिप्लोमैटिक रिलेशन शुरू होने की 75वीं एनिवर्सरी के मौके पर ऑर्गनाइज़ किए जाने वाले इवेंट्स की एक लिस्ट पर भी सहमत हुए।

पीएम मोदी ने इंडिया-जापान रिलेशन की मजबूती और इंपॉर्टेंस पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “कुछ ही दिन पहले, G7 समिट में मैंने कहा था कि आज के ग्लोबल उथल-पुथल के माहौल में आपसी भरोसा हमारा सबसे बड़ा स्ट्रेटेजिक रिसोर्स है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे गर्व है कि इंडिया-जापान पार्टनरशिप इस टेस्ट में पूरी तरह खरी उतरी है।”

PM मोदी ने कहा कि जापान की सटीक टेक्नोलॉजी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमताओं का मेल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नई तेजी और ताकत देगा। उन्होंने कहा, “डिफेंस सेक्टर में हमने भारत और जापान के बीच पहले जॉइंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर एक एग्रीमेंट साइन किया है।” जापानी प्रधानमंत्री तीन दिन के भारत दौरे पर हैं।

जापानी पीएम ने क्या कहा?

इस दौरान तकाइची ने कहा कि दोनों पक्ष इन्वेस्टमेंट और इनोवेशन कोऑपरेशन के जरिए इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक मजबूत इकोनॉमी बनाने के लिए कमिटेड हूं और 17 स्ट्रेटेजिक सेक्टर में इन्वेस्टमेंट के जरिए जापान की सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजिकल क्षमताओं को बढ़ाने का लक्ष्य रखती हूं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने ‘डेवलप्ड इंडिया’ लॉन्च किया, जो 2047 तक भारत को एक डेवलप्ड देश बनाने का एक नेशनल लक्ष्य है और वह भारत के डेवलपमेंट प्रोसेस को जोर-शोर से आगे बढ़ा रहे हैं।” जापानी प्रधानमंत्री ने कहा, “इस तरह हम भविष्य में इन्वेस्टमेंट के ज़रिए अपने देशों को मज़बूत और खुशहाल बनाने के लक्ष्य को शेयर करते हैं।”

हाल के सालों में भारत और जापान के रिश्ते मजबूत हुए हैं। 2014 में दोनों देशों को स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। दोनों देश 2027 में डिप्लोमैटिक रिलेशन शुरू होने की 75वीं सालगिरह मनाएंगे। सिक्योरिटी, ट्रेड और इन्वेस्टमेंट, इकोनॉमिक सिक्योरिटी, साइंस और टेक्नोलॉजी, कल्चर और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई एरिया में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इस बाइलेटरल फ्रेमवर्क में अब 70 से ज्यादा डायलॉग मैकेनिज्म शामिल हैं।

स्ट्रेटेजिक एजेंडा को आगे बढ़ाने का मुख्य फोरम

प्रधानमंत्री मोदी पिछले साल अगस्त में टोक्यो में हुए 15वें सालाना समिट के लिए जापान गए थे। सालाना समिट दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप के स्ट्रेटेजिक एजेंडा को आगे बढ़ाने का मुख्य फोरम है। PM मोदी ने जापानी PM के साथ विस्तृत बातचीत की।

इस बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते बढ़ाने, सेमीकंडक्टर्स के लिए एक मजबूत और लचीली सप्लाई चेन बनाने और जरूरी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर फोकस किया गया। बातचीत के बाद, दोनों पक्षों के आर्थिक सुरक्षा सहयोग पर एक जॉइंट डिक्लेरेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग पर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी किया है।

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‘मेक इन इंडिया’ को रफ्तार! जापानी PM और पीएम मोदी करेंगे 35,000 करोड़ के मारुति सुजुकी के चौथे प्लांट का उद्घाटन, खरखौदा बनेगा ऑटो मैन्युफैक्चरिंग हब

Maruti Suzukicar plant in Haryana: ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया के नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का संयुक्त रूप से उद्घाटन करेंगे। यह भारत में मारुति सुजुकी का चौथा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है, जिसे देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खरखौदा प्लांट में मारुति सुजुकी कंपनी और उससे जुड़े सप्लायर नेटवर्क सहित कुल निवेश करीब 35,000 करोड़ रुपये का है। यह देश में ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में से एक है।

यह उद्घाटन भारत और जापान के बीच गहरी होती आर्थिक साझेदारी को भी दिखाता है, क्योंकि मारुति सुजुकी भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जापानी निवेश के सबसे सफल उदाहरणों में से एक है। खरखौदा यूनिट से कंपनी को अपने लंबे समय के प्रोडक्शन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह भारत को ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर मजबूत करेगा।

10 लाख वाहनों की होगी बढ़ोतरी

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी तरह चालू होने पर यह प्लांट मारुति सुजुकी की सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 10 लाख गाड़ियों तक बढ़ा देगा, जिससे यह कंपनी के सबसे बड़े प्रोडक्शन सेंटर्स में से एक बन जाएगा। यह प्लांट आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक उत्पादन सुविधाओं से लैस होगा। खरखौदा यूनिट से कंपनी को अपने लंबे समय के प्रोडक्शन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह भारत को ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर मजबूत करेगा।

यह उद्घाटन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहा है। भारत ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स के लिए ग्लोबल प्रोडक्शन बेस बनने का लक्ष्य रख रहा है। उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके जापानी समकक्ष की मौजूदगी भारत-जापान के बीच इंडस्ट्रियल सहयोग, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी के क्षेत्र में रणनीतिक महत्व को भी उजागर करती है।

21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद

इस परियोजना से 21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। जबकि ऑटो कंपोनेंट, लॉजिस्टिक्स, परिवहन और अन्य सहायक उद्योगों में हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इससे हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत और जापान के बीच आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। मारुति सुजुकी को भारत में जापानी निवेश की सबसे सफल कहानियों में गिना जाता है। यह नया प्लांट दोनों देशों के सहयोग को और नई ऊंचाई देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि खरखौदा प्लांट के शुरू होने से भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी इससे बड़ा बल मिलेगा। जानकारों का कहना है कि यह नया प्लांट न केवल हरियाणा में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि वैश्विक ऑटोमोबाइल मार्केट में भारत की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा।

जापान की प्रधानमंत्री का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत

जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची का गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अवसर पर मौजूद रहे। यह तकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।

राष्ट्रपति भवन परिसर के प्रांगण में आयोजित समारोह के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सलामी मंच पर खड़ी हुईं और प्रधानमंत्री मोदी उनके पास खड़े थे। तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्ते और उनके पीछे बैंड का दस्ता, भारत आईं मेहमान प्रधानमंत्री के सम्मान में शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े।

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तकाइची प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए एक से तीन जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं। औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री तकाइची ने PM मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों से मुलाकात की।

PM मोदी ने एयरपोर्ट पर 45 मिनट तक रोका काफिला, वजह बनी NEET परीक्षा….जानें पूरा मामला

देश की सबसे बड़ी मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET-UG परीक्षा जारी है। देश भर के करीब 22 लाख छात्र आज NEET की परीक्षा दे रहे हैं। वहीं NEET री-एग्जाम के बीच छात्रों को परेशानी न हो इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा फैसला लिया। दरअसल दोपहर 1:15 बजे पीएम दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे। यहां से उन्हें अपने आवास जाना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। पीएम एयरपोर्ट पर ही रुके रहे। ताकि छात्रों को एग्जाम सेंटर पहुंचने में कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

NEET परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होनी थी। ऐसे में प्रधानमंत्री ने अपने काफिले की आवाजाही से छात्रों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए थोड़ी देर इंतजार किया। इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा देने जा रहे छात्र समय पर अपने केंद्रों तक पहुंच सकें और शहर में ट्रैफिक व्यवस्था भी सामान्य बनी रहे। बता दें कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में योग कार्यक्रम और भारतीय नौसेना के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद नई दिल्ली लौटे थे।

22 लाख छात्र दे रहे हैं एग्जाम

बता दें कि, इससे पहले 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा पेपर लीक के बाद रद्द कर दी गई थी जिसके बाद एग्जाम के लिए नई तारीखों का ऐलान किया गया था। अब इस परीक्षा को सही से करवाने के लिए सरकार और NTA कड़ी मशक्कत कर रही है। इसके पहले 20 जून को मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। इसके साथ ही 51 हजार से ज्यादा जैमर्स का यूज किया जा रहा है जिससे नकल को रोका जा सके। देश भर के करीब 22 लाख छात्र आज NEET की परीक्षा दे रहे हैं। इसके लिए भारत के 551 और विदेशों में 14 शहरों में सेंटर बनाए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया और परीक्षा केंद्रों पर मल्टीलेवल सिक्योरिटी अरेंजमेंट लागू की गई।

Yoga day 2026: 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है योग दिवस? पीछे छिपा है खास कारण

योग भारत की एक प्राचीन परंपरा है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम मानी जाती है। यह सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है, जो व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और आंतरिक मजबूती प्रदान करती है। योग के इसी महत्व को समझते हुए हर साल 21 जून को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को योग के लाभों के प्रति जागरूक करना और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

आज के समय में बढ़ते तनाव और व्यस्त जीवन में योग और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। यह न केवल शरीर को फिट रखता है बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। इसी वजह से योग दिवस को वैश्विक स्तर पर बड़े उत्साह और भागीदारी के साथ मनाया जाता है।

योग दिवस की शुरुआत

योग दिवस की शुरुआत का श्रेय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। उन्होंने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान योग को वैश्विक मंच पर मान्यता देने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का अनमोल उपहार है, जो मानवता को शरीर और मन के बीच संतुलन सिखाता है। इस प्रस्ताव को दुनियाभर के देशों ने समर्थन दिया।

संयुक्त राष्ट्र का ऐतिहासिक फैसला

11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 69/131 को स्वीकार किया और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड 175 देशों का समर्थन मिला, जो योग की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। इसके बाद से हर साल पूरी दुनिया में योग दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

21 जून ही क्यों चुना गया?

21 जून को योग दिवस के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह दिन “समर सॉल्स्टिस” का होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन माना जाता है। यह दिन प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक होता है। भारतीय परंपराओं में भी इस समय को आध्यात्मिक साधना और आत्म-चिंतन के लिए बेहद उपयुक्त माना गया है।

योग दिवस का उद्देश्य

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को योग के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के प्रति जागरूक करना है। यह दिन तनावमुक्त जीवन, बेहतर स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। आज योग दुनिया भर में लोगों को जोड़ने और स्वस्थ जीवन की दिशा में प्रेरित करने का एक वैश्विक माध्यम बन चुका है।

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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई पर अमेरिकी जांच, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल तेज

Mojtaba Khamenei iran new supreme leader

अमेरिका के न्याय विभाग (US Department of Justice) ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच शुरू की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जांच उन आरोपों पर केंद्रित है जिनमें दावा किया गया है कि खामेनेई ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ा निवेश पोर्टफोलियो तैयार किया। इसमें वॉल स्ट्रीट के प्रमुख बैंकों में भी निवेश शामिल था।

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसियां खामेनेई से जुड़ी कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की समीक्षा कर रही हैं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि क्या किसी अमेरिकी वित्तीय संस्थान ने इन लेन-देन को सुविधाजनक बनाने में कोई भूमिका निभाई थी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन बैंकों की गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है, उनमें JPMorgan Chase और Citigroup जैसे बड़े अमेरिकी बैंक शामिल हैं। 

 

हालांकि, जांच शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि खामेनेई के खिलाफ आपराधिक आरोप तय कर दिए गए हैं। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह इस पूरी जांच के मुख्य केंद्र में बने हुए हैं।

 

मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता उस समय बने थे, जब उनके पिता और तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा देश की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार रखते हैं।

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इस बीच, अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। हालांकि, इसी महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि मोजतबा खामेनेई जीवित हैं और ईरान के नेतृत्व संबंधी मामलों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। Edited by : Sudhir Sharma

PM मोदी-ट्रंप बैठक का असर, अंतिम चरण में पहुंचा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता

modi and trump

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Interim Bilateral Trade Agreement) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के एक दिन बाद आया है।

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विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और अब दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के करीब हैं। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे, जहां इस समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

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मिस्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक में व्यापार समझौता प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। दोनों नेताओं ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया के सबसे सख्त और कुशल वार्ताकारों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर लगातार सकारात्मक बातचीत हो रही है।

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ट्रंप ने भारत द्वारा अमेरिका में किए जा रहे निवेश की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने फरवरी में लगभग एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद व्यापार को लेकर अंतरिम सहमति बनाई थी। इसके बाद से दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

 

विक्रम मिस्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होते हैं, लेकिन दोनों देशों के नेतृत्व ने हमेशा संवाद के माध्यम से चुनौतियों का समाधान निकाला है।

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15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के 15 जुलाई से लागू होने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। ब्रिटेन की भारत में उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने पुष्टि की है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 15 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा। करीब तीन वर्षों की बातचीत के बाद जुलाई 2025 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। Edited by : Sudhir Sharma

PM Modi in Paris : पेरिस में बोले PM मोदी – 12 साल में दोगुनी हुई भारत की GDP, एयरपोर्ट और यूनिवर्सिटी की संख्या में भी बड़ा इजाफा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि उनके 12 वर्षों के कार्यकाल के दौरान भारत ने कई प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए भारत में अपनी 12 साल की सरकार की उपलब्धियां गिनवाईं। उन्होंने बताया कि इस अवधि में देश की जीडीपी (GDP), एयरपोर्ट और विश्वविद्यालयों की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की रफ्तार भी दो गुना बढ़ी है।

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पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार 12 वर्षों तक देश की सेवा करने को अपने जीवन का “सबसे बड़ा सौभाग्य” बताया। उन्होंने कहा कि एक चाय बेचने वाले से देश के सर्वोच्च निर्वाचित पद तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्ष 140 करोड़ भारतीयों की अपार क्षमता और सामर्थ्य का प्रमाण हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में बुनियादी ढांचे, शिक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में हुए बदलावों को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।

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पीएम मोदी के अनुसार, बीते 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना हुआ है। इसी दौरान देश में एयरपोर्ट और विश्वविद्यालयों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि हाईवे निर्माण की गति भी पहले की तुलना में दोगुनी हो गई है, जो देश के तेजी से विकसित होते बुनियादी ढांचे को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है।

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पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी चप्पे-चप्पे में दिखती है, लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज सिर चढ़कर बोलता है। खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। 

 

एक समय था जब देशों के बीच रिश्ते सिर्फ व्यापार से तय होते थे, आज व्यापार के साथ-साथ ट्रस्ट भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। हर देश रिलायबल सप्लाई चेन चाहता है। हर देश स्टेबल पार्टनरशिप चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके और ऐसे समय में भारत, विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है। Edited by : Sudhir Sharma