
यह कमाल की बात है कि राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ लड़ना है और उन्हीं से वैधता भी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी नेताओं से कहा कि मोदी और शाह भी मानते हैं कि वे जाएंगे तो राहुल आएंगे। हालांकि राहुल ने यह बात एक खास संदर्भ में कही। जो संदर्भ है उससे ऐसा लग रहा है कि राहुल को अब भी कांग्रेस के कई नेताओं के बारे में ऐसा लगता है कि वे उनको नेता नहीं मानते। उनको यह भी लगता है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो उन पर भरोसा नहीं करते। इसलिए उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक या वैधानिक नियुक्ति के पैनल की बैठक के बाद मोदी और शाह ने कहा कि राहुल आएंगे। यह बता कर राहुल ने कहा कि जब मोदी और शाह को भरोसा है तो कांग्रेस नेताओं को भी भरोसा रखना चाहिए।
हालांकि इसका यह मैसेज गया कि कांग्रेस नेता राहुल को अभी नेता नहीं मानते हैं और अपने को नेता मनवाने के लिए वे मोदी और शाह की बात का हवाला दे रहे थे। यह भी याद दिलाया गया कि अमित शाह ने कहा है कि भाजपा 50 साल तक कहीं नहीं जा रही है! तो सवाल है कि राहुल गांधी को कब तक इंतजार करना है? बहरहाल, यह सिर्फ मोदी और शाह से वैधता लेने का मामला नहीं है। राहुल लगातार यह मैसेज दे रहे हैं कि उनका समय आ गया है और वे जीत कर प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ साथ भाजपा से नाराज हो रहे और युवा मतदाताओं को वे मैसेज दे रहे हैं। इसलिए उन्होंने यह बात कही और अपने को मोदी व शाह के विकल्प के रूप में पेश किया। इसी वजह से उन्हेंने कुछ समय पहले यह भी दावा किया था कि अब उनको सरकार के अंदर से सूचनाएं मिल रही हैं।

