HPV वाले कैंसर से बचाने में कितना कारगर है टीका?

HPV वाले कैंसर से बचाने में कितना कारगर है टीका?

HPV Vaccine Effectiveness: ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) गंभीर किस्म के कैंसर का कारण बनते हैं, जिससे हर साल कई हज़ार लोगों की मौत होती है। इंग्लैंड में हुए अध्ययन से पता चलता है कि HPV की रोकथाम वाले टीके से मौत के अधिकतर मामलों को रोका जा सकता है। इंग्लैंड की “द लैंसेट” जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वहाँ HPV का टीका लगाया जाना शुरू होने के बाद से युवा महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से मौत का ख़तरा कम हो गया है।

 

सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) महिलाओं के गर्भाशय-ग्रीवा, यानी सर्विक्स (Cervix) में होने वाला एक प्रकार का कैंसर है। सर्विक्स गर्भाशय (Uterus) का निचला और संकरा हिस्सा होता है, जो गर्भाशय को योनि (Vagina) से जोड़ता है। HPV वास्तव में असुरक्षित यौन संबंध से फैलता है। 

जितना जल्दी टीका, उतनी ही ज़्यादा सुरक्षा

खास बात यह है कि इंग्लैंड में 2020 और 2024 के बीच 20 से 24 साल की महिलाओं में मौत का एक भी मामला सामने नहीं आया। 25 से 29 साल की महिलाओं में भी मौत की दर काफी कम रही। वहाँ 2008 से लड़कियों के लिए HPV का टीका उपलब्ध है; अध्ययन करने वालों का कहना है कि टीका लगगना शुरू होने के बाद से 200 महिलाओं की जान बचाई जा सकी है।

 

HPV का टीका जितनी जल्दी लगवाया जाए, सुरक्षा उतनी ही बेहतर होती है। नए अध्ययन से यह भी पता चलता है कि सही सुरक्षा तभी मिलती है जब टीका जल्दी, यानी कम आयु में लगवाया जाए। उदाहरण के लिए, जर्मनी की स्थायी टीकाकरण समिति, यौन-संपर्क शुरू होने से पहले, 9 से 14 साल की उम्र में ही HPV टीका लगवाने की सलाह देती है। बर्लिन में रॉबर्ट कोख़ इंस्टीट्यूट का कहना है कि बाद में टीका लगवाने से सुरक्षा की क्षमता कम हो जाती है।

HPV का संक्रमण पुरुषों को भी हो सकता है

HPV का वायरस महिलाओं और पुरुषों, दोनों को प्रभावित करता है। लंबे समय तक HPV के संक्रमण को मुख्य रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या ही माना जाता था। रतिक्रिया (इंटरकोर्स) के बाद महिलाएं ही सबसे ज़्यादा प्रभावित भी होती हैं; हालांकि, अब यह पता चला है कि पुरुषों को भी यह बीमारी हो सकती है। वह सेक्स के सभी प्रकारों के द्वारा फैल सकती है। जर्मनी के रॉबर्ट कोख़ इंस्टीट्यूट (RKI) के अनुसार, ह्यूमन पैपिलोमावायरस के कारण जर्मनी में हर साल गंभीर कैंसर के 8,000 मामले सामने आते हैं, जिनसे औसतन 1,600 महिलाओं और 400 पुरुषों की मौतें होती हैं।

 

HPV का “इनक्यूबेशन पीरियड” (संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में लगने वाला समय) लंबा होता है। ज़्यादातर लोगों को अपने जीवनकाल में कभी न कभी HPV का संक्रमण हो ही जाता है। शुरू में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते और ज़्यादातर मामलों में संक्रमण एक-दो साल में अपने आप ठीक भी हो जाता है। हालाँकि, दस में से एक संक्रमण बीमारी का रूप ले लेता है—तुरंत नहीं, बल्कि प्राय: 10 से 20 साल बाद।

वायरस शरीर में कई वर्षों तक छिपा रह सकता है

जर्मनी में हाइडेलबेर्ग के कैंसर रिसर्च सेंटर का कहना है कि HPV वायरस शरीर में सालों तक छिपा रह सकता है, जब तक कि स्वस्थ कोशिकाएँ कैंसर वाली कोशिकाओं में न बदल जाएँ और ट्यूमर (अर्बुद) न बन जाए। रॉबर्ट कोख़ इंस्टीट्यूट (RKI) के अनुसार, जर्मनी में 15 साल की लड़कियों में से सिर्फ़ 55 प्रतिशत, और उसी उम्र के लड़कों में से 36 प्रतिशत का ही पूरी तरह टीकाकरण हुआ है। यानी, दूसरे शब्दों में यह अनुपात बहुत कम है।

 

बड़ी संख्या में सामूहिक बचाव पाने के लिए टीकाकरण की ज़रूरी दर लगभग 80 प्रतिशत होनी चाहिए। HPV के संक्रमण से बचाव हेतु टीकाकरण की औसत दर को बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक घरों-परिवारों तक पहुँचने की ज़रूरत है। इसीलिए, उत्तरी यूरोप के स्कैंडिनेवियाई देशों और इंग्लैंड में सरकारें लोगों को टीका लगवाने के निमंत्रण और याद दिलाने के रिमाइंडर भेजती हैं। स्कूलों में सीधे वैक्सीन लगाना भी एक असरदार तरीका हो सकता है, क्योंकि कम उम्र में HPV टीकाकरण से भविष्य की परेशानियों को सफलतापूर्वक रोका जा सकता है।

भारत में HPV का बढ़ता प्रसार

भारत भी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के बढ़ते हुए प्रसार का सामना कर रहा है। भारत में महिलाओं को होने वाला यह दूसरा सबसे आम कैंसर है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, भारत की सामान्य महिला जनसंख्या में लगभग 5 से 7 प्रतिशत महिलाएं किसी भी समय वयरस के विशेष रूप से सबसे खतरनाक “हाई-रिस्क स्ट्रेन HPV-16 और 18” से संक्रमित होती हैं। कुछ क्षेत्रीय समुदायों के बीच अध्ययनों में यह दर 7.5 से 36.4 प्रतिशत तक भी देखी गई है।

 

सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित भारतीय महिलाओं के 83 से 97 प्रतिशत मामलों के संक्रमण के लिए HPV को ही सक्रिय पाया गया है, जिसके लिए मुख्य रूप से वायरस के HPV-16 और 18 स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जाता है। भारतीय पुरुषों में भी यह वायरस व्यापक है, जो मुख, गुप्तांग (पेनाइल) और गुदा (एनल) कैंसर का कारण बनता है। भारत में कैंसर के सभी मामलों में से लगभग 7.5% मामले HPV से जुड़े अंगों के होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य वैश्विक संस्थाओं के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 1,23,000 से 1,27,000 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का निदान किया जाता है।

एक-चौथाई मौतें अकेले भारत में

इस बीमारी के कारण भारत में हर साल लगभग 77,000 से 80,000 महिलाओं की मृत्यु होती है। दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में से लगभग 25 प्रतिशत (एक-चौथाई) मौतें अकेले भारत में होती हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में सर्वाइकल कैंसर के कुल मामलों में भारत का हिस्सा 65 प्रतिशत से अधिक है। भारत में HPV की नियमित जांच की दर बेहद कम (लगभग 2 से 13 प्रतिशत) है, जिसके कारण संक्रमण कब लगा, इसका सही समय पर पता नहीं चल पाता। कम आयु में विवाह, पहली बार गर्भधारण के समय की कम आयु और अधिक बच्चों को जन्म देना भी इसके जोखिम को बढ़ाता है। ग्रामीण और कम आय वाले क्षेत्रों में HPV वायरस और उससे होने वाले कैंसर को लेकर जागरूकता की भी भारी कमी है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जिसके अधीन 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को टीका लगाया जा रहा है।