नेपाल की तबाही वाली बाढ़ का नया Video आया सामने, देखिए त्रिशूली बाजार में पीछे पीछे पानी और आगे कैसे जान बचाकर भागते दिखे लोग

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बीच एक खौफनाक वीडियो सामने आया है। यह नया वीडियो नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार का है। यहां बुधवार को आई भयानक बाढ़ के बीच अचानक चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मटमैले पानी, कीचड़ और मलबे की एक विशाल दीवार तेजी से बाजार की ओर बढ़ रही है और लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर भाग रहे हैं।

आम दिन का माहौल अचानक बदला चीख-पुकार में, स्कूल बस भी फंसी

वायरल फुटेज में दिखाया गया है कि त्रिशूली बाजार में हर रोज की तरह सामान्य चहल-पहल थी। ये चहल पहल कुछ ही पलों में भारी अफरा-तफरी में बदल गई। जैसे ही बाढ़ का पानी तेजी से बाजार की सड़कों में दाखिल हुआ, पैदल चल रहे लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। कार और मोटरसाइकिल सवार भी सैलाब के रास्ते से दूर हटने की होड़ में लग गए।

यहां नीचे देखिए तबाही वाला वो वीडियो

इस भयानक अफरा-तफरी और मलबे के बीच एक स्कूल बस भी फंसी हुई नजर आई। पानी के तेज बहाव ने देखते ही देखते पूरे बाजार को अपनी आगोश में ले लिया। कुछ ही मिनटों के भीतर पूरा बाजार इलाका पानी, गाद, पत्थरों और मलबे से पट गया। इससे सड़कें, इमारतें और पुल क्षतिग्रस्त होकर बह गए।

ग्लेशियर ढहने से शुरू हुई तबाही, नुवाकोट में सबसे ज्यादा तबाही

यह जलप्रलय बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए एक बड़े भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटना की वजह से आया था। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से स्थानी हिमालयी नदियों के स्टीम में भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टानें और कीचड़ बहकर नीचे आ गया। इस तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले इलाकों में नुवाकोट शामिल है। यहां कई गांव पूरी तरह तबाह या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सड़कें और पुल बह जाने के कारण कई समुदाय पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं, जिससे राहत और बचाव टीमों को मौके पर पहुंचने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राहत दल भारी मशीनों की मदद से कीचड़ और मलबे के नीचे दबे लोगों तथा जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

469 की मौत, 290 भारतीय समेत 1500 लापता, पीएम बालेन शाह ने लिया जायजा

ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस भीषण आपदा में अब तक कम से कम 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 290 भारतीय नागरिकों समेत लगभग 1500 लोग अभी भी लापता हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने बाढ़ प्रभावित नुवाकोट का दौरा किया और जमीनी हालात का जायजा लिया।

प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य की सभी एजेंसियां अपनी पूरी क्षमता के साथ बचाव कार्य में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता लापता लोगों को खोजना, घायलों का तुरंत इलाज कराना और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना है। इस बीच अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है कि हिमालयी क्षेत्र के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण आगे भी बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

Nepal Flood update: नेपाल में बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हुई, 290 भारतीय नागरिक अभी भी लापता, चीन ने फिर जारी किया अलर्ट

Nepal-Tibet flash flood updates: मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार (28 अगस्त) को बढ़कर 469 हो गई। आपदा के बाद तीसरे दिन भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रहने के बीच और शव बरामद किए गए। नेपाल पुलिस ने एक बयान में कहा कि आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, चितवन से 178, नवलपरासी पूर्व से 110, गोरखा से 44, नुवाकोट से 37 और धादिंग जिले से 33 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह तनाहू से 28, नवलपरासी पश्चिम से 27 और रसुवा से 12 शव बरामद किए गए हैं।

अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायलों और फंसे हुए लोगों को निकाला जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में इलाज हो रहा है। बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों का मलबा तेजी से नीचे आ गया जिससे बुधवार को पानी, कीचड़ और मलबे का सैलाब मध्य नेपाल से होकर नीचे की ओर बह निकला। इस आपदा ने कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई तथा कई मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। इसके कारण जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।

नेपाल पुलिस के एक बयान में कहा गया कि प्रभावित इलाकों से अब तक 50 विदेशियों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए बचाया गया है। जबकि अन्य 796 लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित निकाला गया है।

290 भारतीय नागरिक अभी भी लापता

अधिकारियों के सामने एक और चुनौती आ गई है, क्योंकि मलबे की रुकावट के पीछे बढ़ता जलस्तर अचानक पानी के तेज बहाव का खतरा पैदा कर रहा है। इस स्थिति ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेपाल पुलिस ने बताया कि 28 पुलिसकर्मी अभी भी संपर्क से बाहर हैं। जबकि प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों के लिए 8,386 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, अब तक 1,545 लोग घायल हुए हैं या उन्हें बचाया गया है। मिली लाशों में से 110 नवाल्परासी ईस्ट में मिलीं, जो किसी एक जिले में मिली सबसे ज्यादा संख्या है। चितवन में 108 मौतें दर्ज की गई। जबकि गोरखा में 44, नुवाकोट में 37, धाडिंग में 33, तनहुन में 28 और नवाल्परासी वेस्ट में 27 लाशें मिलीं। रासुवा में 12 लाशें मिलीं।

पुलिस अपडेट में कुछ प्रभावित जिलों में घायल और बचाए गए लोगों की जानकारी भी दी गई। घायल और बचाए गए लोगों की कैटेगरी में रासुवा में 644, नुवाकोट में 898 और धाडिंग में तीन लोग शामिल थे। इस बीच, नेपाल पुलिस के अपडेट के अनुसार, काठमांडू घाटी के अलग-अलग अस्पतालों में 84 घायल लोगों का इलाज चल रहा था या उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।

चीन ने जारी किया अलर्ट

चीन ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद ‘लेवल-चार’ का अलर्ट जारी किया है। चेतावनी दी है कि दो नदियों के संगम के पास बनी एक नई बैरियर झील (Barrier Lake) के टूटने का खतरा काफी बढ़ गया है जिससे निचले इलाकों में भीषण बाढ़ आ सकती है। बैरियर लेक वह झील होती है जो किसी प्राकृतिक रुकावट के कारण नदी या जलधारा का रास्ता बंद हो जाने से बनती है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने गुरुवार रात तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की और छोचेन खोला तथा पुरेपु त्संगपो नदियों के संगम के पास बनी इस बैरियर झील से पैदा हुए खतरे को लेकर आगाह किया। ये दोनों नदियां तिब्बत से निकलती हैं। यह नेपाल में भोटे कोशी नदी की धारा का हिस्सा हैं।

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, गुरुवार सुबह तक झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। पूर्वानुमान के मुताबिक, लगातार हो रही बारिश के कारण अगले तीन दिन में झील में पानी का प्रवाह करीब 30 लाख घन मीटर तक पहुंच सकता है जिससे इसके टूटने का खतरा और बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में बाढ़ का पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है और चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग पोर्ट तथा आसपास के निचले इलाकों में भारी तबाही मचा सकता है।

इसके मद्देनजर जल संसाधन मंत्रालय ने स्थानीय अधिकारियों को बैरियर झील और बारिश की स्थिति पर कड़ी नजर रखने, मौसम और जल प्रवाह के पूर्वानुमान तथा जोखिम के आकलन को बेहतर बनाने एवं निचले इलाकों में संभावित रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की सटीक पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, चीन ने नेपाल सीमा के पास तिब्बत के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए उपग्रहों और ड्रोनों को तैनात किया है।

‘झील टूटने से एक और बड़ी आपदा आ सकती है’

चीनी अधिकारियों को आशंका है कि झील टूटने से एक और बड़ी आपदा आ सकती है। ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, चीन की सरकारी इंजीनियरिंग और बचाव कंपनी ‘चीन अन्नोंग’ की आठ सदस्यीय अग्रिम टीम संचार और खोज उपकरणों के साथ बृहस्पतिवार को गिरोंग काउंटी पहुंची। टीम नदी के ऊपरी हिस्से में बने अवरोध से संबंधित आंकड़े जुटाएगी।

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मौके पर मौजूद बचावकर्मियों के मुताबिक, पोर्ट से करीब तीन किलोमीटर दूर नदी के ऊपरी हिस्से में जमा मलबे को सुरक्षित रूप से हटाने से पहले अवरोधक झील के खतरे को टालना जरूरी है। फायर कर्मियों ने झील की पूरी परिधि के आसपास कई बिंदु चिह्नित करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया है। इन बिंदुओं के निर्देशांक के आधार पर झील के जल क्षेत्र का आकलन किया जा सकेगा। ड्रोन से मिले दृश्यों में पता चला कि बुधवार रात की तुलना में झील का जलस्तर बढ़ गया।

72 घंटे में बैरियर लेक टूटने का खतरा! नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच चीन से आया ये खतरनाक अलर्ट

Nepal Flash Flood: नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बीच अब एक नया और बड़ा खतरा मंडराने लगा है। हिमालयी सीमा पार ऊपरी हिस्से में बनी एक बैरियर लेक (प्राकृतिक रुकावट से बनी झील) के टूटने की आशंका ने दोनों देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह झील अगले 72 घंटों के भीतर फूट सकती है। इससे क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों में गंभीर बाधा आ सकती है और बाढ़ का संकट और अधिक गहरा सकता है।

558 लोग तिब्बत की तरफ लापता, ग्यिरोंग में तबाही के बाद गांव खाली कराए गए

नेपाल सीमा से सटे तिब्बती क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन और मिट्टी-चट्टानों के ढहने से भयंकर तबाही हुई है। चीनी सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल सीमा के तिब्बती हिस्से में कम से कम 558 लोग लापता हैं। यह तबाही ग्यिरोंग के पास ल्हेन्दे नदी में अचानक आए पानी के भयानक सैलाब के बाद हुई है। इसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दो ग्रामीणों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने खतरे वाले इलाकों में बसे गांवों को खाली करा दिया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने जानकारी दी है कि नेपाल की तरफ भी लगभग 100 चीनी नागरिक लापता हैं। तिब्बत से शुरू हुआ यह उफान भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के जरिए आगे बढ़ा। इसने नेपाल में बड़ी तबाही मचाई है। नेपाल में इस आपदा की वजह से कम से कम 359 लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। कई मकान, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं पानी के बहाव में बह गई हैं।

72 घंटे में बैरियर लेक टूटने की चेतावनी, झील में भरा 20 लाख घन मीटर पानी

चीनी अधिकारियों के मुताबिक आपदा स्थल के उत्तर-पूर्व में छोचेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी बैरियर लेक अब सबसे बड़ा खतरा बन गई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने इस झील की निगरानी बढ़ा दी है। सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार तक इस झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और यह पहले से ही ओवरफ्लो हो रही है।

अधिकारियों ने आगाह किया है कि अगले तीन दिनों में इस झील में और 30 लाख घन मीटर पानी बहकर आने की संभावना है। इससे 72 घंटों के भीतर इसके टूटने की पूरी आशंका है।

राहत कार्य के लिए बीजिंग और चेंगदू से टीमें रवाना, ग्यिरोंग कस्बे में बिजली बहाल

आपदा की भयावहता को देखते हुए चीन सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू किए हैं। स्थानीय पुलिस और सशस्त्र बलों की मदद के लिए बीजिंग और चेंगदू से फायर एंड रेस्क्यू टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया है। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ग्यिरोंग कस्बे के मध्य शहरी इलाकों में बिजली और संचार सुविधाएं बहाल कर दी गई हैं। हालांकि पोर्टसे संपर्क अभी भी पूरी तरह कटा हुआ है, जिसे बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

2025 में भी घटी थी ऐसी ही घटना

हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की अचानक आई भीषण बाढ़ कोई पहली घटना नहीं है। ठीक एक साल पहले अगस्त 2025 में भी तिब्बत में एक ग्लेशियर झील ओवरफ्लो हो गई थी। उस घटना में नौ लोगों की मौत हो गई थी और नेपाल, चीन को जोड़ने वाले एक प्रमुख पुल सहित कई जरूरी इंफ्रा को भारी नुकसान पहुंचा था।

नेपाल बाढ़ के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए इन 21 भारतीयों का हुआ रेस्क्यू, फुल लिस्ट यहां देखिए

Nepal Flash Flood: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और सैलाब के बीच भारतीय नागरिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है कि ये सभी नागरिक सुरक्षित हैं और इन्हें नेपाल के बाढ़ प्रभावित टिमुरे क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया है।

जिन लोगों का रेस्क्यू किया गया उनकी पूरी लिस्ट भी रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट की है। इसे यहां नीचे देखा जा सकता है।

नेपाल में लापता भारतीयों में त्रिशूली प्रोजेक्ट के 73 कर्मचारी शामिल

राहत की इस खबर के बीच स्थिति की गंभीरता कम नहीं हुई है। आपको बता दें कि नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इन लापता भारतीयों में पर्यटक समूहों के अलावा जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं। इनमें से 73 भारतीय नागरिक त्रिशूली वन पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास इन लापता कर्मचारियों के बारे में सटीक जानकारी जुटाने के लिए प्रोजेक्ट हेड के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।

तिब्बत में भी फंसे 200 भारतीय

नेपाल के साथ-साथ तिब्बत सीमा क्षेत्र में भी भारतीय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रयास जारी हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक तिब्बत क्षेत्र में मौजूद लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने भी भारत सरकार से सहायता मांगी है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस कठिन परिस्थिति में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और पड़ोसी देश की जरूरतों के अनुसार हर संभव सहायता और मानवीय राहत सामग्री प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 270 पहुंचा, युद्ध स्तर पर जारी है सर्च ऑपरेशन

नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने तीन जिलों में भयंकर तबाही मचाई है। अधिकारियों और राहत टीमों द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियानों के बीच मौतों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है। नेपाली सेना, पुलिस और राहत एजेंसियां हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

भागवत तीन देशों के दौरे पर न्यूयॉर्क पहुंचे:RSS के शताब्दी वर्ष में अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे; शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम

RSS प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार, 25 अगस्त को अमेरिका के न्यूयॉर्क पहुंचे। यह अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के तीन देशों के वैश्विक संपर्क दौरे का पहला पड़ाव है। यह दौरा विदेशी स्थानीय संगठनों के निमंत्रण पर RSS के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के तहत हो रहा है। न्यूयॉर्क पहुंचने पर भागवत का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। भागवत भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रहा है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होगा कार्यक्रम भागवत शनिवार को न्यूयॉर्क सिटी के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह सबसे बड़े और सबसे विविध सामुदायिक कार्यक्रमों में से एक होगा। कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर इंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम कर रहा है। भागवत के संबोधन में देश-विदेश की काफी दिलचस्पी रहने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम हिंदू त्योहार रक्षाबंधन के पारंपरिक आयोजन के साथ होगा। इसका आधुनिक संदेश एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव पर केंद्रित रहेगा। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में दिन की थीम से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। प्रमुख धार्मिक वक्ता भी इसमें शामिल होंगे। 25 अगस्त से तीन देशों का दौरा RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इससे पहले X पर एक पोस्ट में बताया था कि भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। यह दौरा विदेशी स्थानीय संघों और संगठनों के निमंत्रण पर हो रहा है। पोस्ट में लिखा था, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा करेंगे। उन्हें विदेशी स्थानीय संघों और संगठनों ने आमंत्रित किया है। यह दौरा RSS के चल रहे शताब्दी वर्ष के अवसर पर हो रहा है।” USCIRF की टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय का जवाब शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने RSS को लेकर अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की हालिया टिप्पणियों पर जवाब दिया। मंत्रालय ने अमेरिकी संस्था को पक्षपाती बताया और कहा कि उसकी विश्वसनीयता नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि USCIRF भारत के बारे में बार-बार गलत और उकसाने वाले बयान देता रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को नजरअंदाज करना चाहिए। जायसवाल ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि यह एक पक्षपाती संस्था है। कई वर्षों से यह भारत के बारे में गलत और उकसाने वाले बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि उनका अपना एजेंडा है और उनमें विश्वसनीयता नहीं है।” विदेश मंत्रालय का यह बयान USCIRF के अधिकारियों की उस अपील के बाद आया, जिसमें RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को उच्चस्तरीय राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनसे बैठक नहीं करने को भी कहा था। मार्च की रिपोर्ट में RSS और RAW का नाम USCIRF की हालिया टिप्पणियां मार्च में जारी उसकी सालाना रिपोर्ट के बाद आईं। रिपोर्ट में आयोग ने भारत पर धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन को लेकर आलोचना की थी। आयोग ने RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत व्यक्तियों और संस्थाओं पर लक्षित प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था। भारत ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज किया था। भारत ने रिपोर्ट को “तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और चुनिंदा तरीके से पेश करने वाला” बताया था। भारत ने कहा था कि यह रिपोर्ट “संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक कथाओं” पर आधारित है।

बांग्लादेश के PM तारिक रहमान ने रद्द किया दिल्ली दौरा, सामने आया चौंकाने वाला कारण

बांग्लादेश के PM तारिक रहमान ने रद्द किया दिल्ली दौरा, सामने आया चौंकाने वाला कारण

Tariq Rehman

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का 3 दिवसीय दिल्ली दौरा टल गया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले अगस्त के तीसरे हफ्ते की तारीखें भी तय मानी जा रही थीं। दोनों तरफ के अधिकारी कूटनीतिक मोर्चे पर पूरी तैयारी में थे और राष्ट्रपति भवन से एक प्रेस विज्ञप्ति ने इस बात पर मुहर भी लगा दी थी। रहमान के रद्द हुए दौरे से पहले उनके एक वरिष्ठ सहयोगी ने कथित तौर पर तथाकथित ‘इस्लामिक NATO’ के प्रति खुलेपन का संकेत दिया था। इसी दौरान ढाका ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी दोहराई, ताकि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके।

रिपोर्टों के मुताबिक तारिक रहमान आगामी BRICS Summit में शामिल होने को लेकर भी अनिच्छुक हैं, जबकि भारत ने उन्हें आमंत्रित किया है और चीन तथा रूस के नेता भी इसमें शामिल होने की पुष्टि कर चुके हैं।  ठीक आखिरी वक्त पर, ढाका और कूटनीतिक हलकों के सूत्रों के मुताबिक यह पूरा दौरा अचानक खटाई में पड़ गया। इस पूरे घटनाक्रम के अचानक रुक जाने के पीछे कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में असमंजस की स्थिति बन गई।

पर्दे के पीछे बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन दौरा फिलहाल अधर में लटक गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह ढाका के अंदर चल रही राजनीतिक उथल-पुथल है। सबसे बड़ा और तुरंत उभरने वाला कारण  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना हैं। बांग्लादेश सरकार चाहती है कि उन्हें वापस भारत से प्रत्यर्पित किया जाए।

रविवार को बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने एक बयान में साफ कर दिया कि तारिक रहमान के दौरे के लिए यह प्रत्यर्पण एक मुख्य शर्त है। खबरों के मुताबिक बांग्लादेशी विपक्षी दल और छात्र आंदोलन से जुड़े नेता भारत के साथ तब तक सामान्य कूटनीतिक संबंधों के पक्ष में नहीं हैं जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा हल नहीं हो जाता।

मोदी-ट्रंप की G7 मुलाकात में क्या हुआ था? अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा- भारत ने कहा था ‘सवाल मत पूछिए’, फिर ट्रंप ने बदल दिया प्लान

मोदी-ट्रंप की G7 मुलाकात में क्या हुआ था? अमेरिकी राजदूत का बड़ा दावा- भारत ने कहा था ‘सवाल मत पूछिए’, फिर ट्रंप ने बदल दिया प्लान

modi and trump

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि फ्रांस में G-7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के प्रेस मीट को लेकर भारत ने कोई सवाल नहीं पूछने के लिए कहा था। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि किसी भी VVIP के दौरे से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों की व्यवस्था को लेकर दोनों देशों के बीच बात की जाती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। ALSO READ: भारत का बांग्लादेश को बड़ा झटका! बिजली हस्तांतरण पर लगेगा नया SNA शुल्क

 

सर्जियो गोर ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 17 जून को फ्रांस में G7 समिट के दौरान मोदी और ट्रंप की मुलाकात से पहले वह अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे। इस दौरान ट्रंप ने उनसे पूछा कि भारतीय पक्ष किन मुद्दों को उठाना चाहता है और दिल्ली की ओर से क्या कोई खास मांग है?

 

सर्जियो गोर ने ट्रंप को दी थी जानकारी

गोर के अनुसार, इसी बातचीत में भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से एक अनुरोध का जिक्र हुआ। इसमें कहा गया था कि बैठक में मीडिया को मौजूद रहने दिया जाए, लेकिन इसे पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तब्दील न किया जाए और पत्रकारों के सवाल न लिए जाएं। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने इस पर सहमति जताते हुए कहा था कि इसमें कोई समस्या नहीं है।

 

ट्रंप भूल गए गोर की बात

इसके बाद मोदी और ट्रंप की बैठक कैमरों और पत्रकारों की मौजूदगी में शुरू हुई। गोर ने बताया कि कमरे में करीब 50 कैमरे मौजूद थे। दोनों नेताओं ने शुरुआत में अपनी-अपनी बात रखी। लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप गोर की बात भूल गए। वे कैमरों की तरफ मुड़े और पत्रकारों से पूछा कि क्या किसी के पास सवाल है। यहीं से बैठक का स्वरूप बदल गया। पत्रकारों के सवाल शुरू होने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत का दायरा बढ़ता गया और यह मुलाकात करीब 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल गई। गोर ने कहा कि ट्रंप के इस कदम के बाद कई अहम मुद्दों पर खुलकर सवाल-जवाब हुए। ALSO READ: नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

 

अमेरिकी राजदूत के इस दावे के बाद मोदी-ट्रंप मुलाकात को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से गोर के उस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है कि भारतीय पक्ष ने प्रेस मीट में सवाल नहीं लेने का अनुरोध किया था।

 

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद दोनों देशों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर बनी हुई है।

‘VVIP विजिट से पहले ऐसी चर्चा आम बात है’; PM मोदी-ट्रंप मुलाकात में ‘नो क्वेश्चन’ पर सर्जियो गोर को भारत का जवाब

Sergio Gor No Questions Remark: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया के सवालों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि किसी भी VVIP दौरे से पहले नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी और मीडिया से बातचीत को लेकर चर्चा करना एक सामान्य प्रक्रिया है। नई दिल्ली ने कहा कि यह किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं है।

गोर के बयान पर सरकार के सूत्र की तरफ से साफ किया गया है कि नेताओं की सार्वजनिक उपस्थिति से जुड़ी व्यवस्थाओं पर VVIP दौरे से पहले चर्चा होती है। इसी संदर्भ में भारतीय पक्ष ने ऐसी यात्राओं के लिए अपनी मानक प्रक्रिया अमेरिकी पक्ष के साथ साझा की थी। सूत्रों ने कहा, “किसी भी VVIP विज़िट से पहले नेताओं के पब्लिक में आने के इंतजाम के बारे में बातचीत आम बात है। इस बारे में भारतीय पक्ष ने ऐसे विजिट के लिए अपने स्टैंडर्ड प्रैक्टिस के बारे में बताया।”

सर्जियो गोर ने क्या कहा था?

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा था कि दोनों पक्षों के बीच बैठक के दौरान मीडिया की मौजूदगी और पत्रकारों के सवालों को लेकर पहले से एक समझ बनी थी। गोर के मुताबिक, उन्होंने ट्रंप के साथ बैठक से पहले निजी बातचीत की थी। ट्रंप ने उनसे पूछा था कि भारत किन मुद्दों को उठाना चाहता है और क्या नई दिल्ली की ओर से कोई विशेष अनुरोध है।

गोर ने दावा किया कि विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से मुख्य अनुरोध था कि मीडिया को बैठक में बुलाया जाए। लेकिन इसे पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में न बदला जाए। गोर के अनुसार, उन्होंने ट्रंप से कहा था कि भारतीय पक्ष पत्रकारों के सवाल नहीं चाहता। ट्रंप ने कथित तौर पर इस पर सहमति जताई और कहा कि कोई समस्या नहीं है।

उन्होंने कहा, “एवियन में G7 के दौरान PM मोदी से मिलने से पहले मैं प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ था। उन्होंने पूछा कि क्या भारत की कोई रिक्वेस्ट है। MEA क्या मुद्दे उठा सकता है। मैंने उनके साथ कुछ टॉपिक डिस्कस किए। भारत के MEA ने कहा था कि प्रेस को आने दें लेकिन कोई सवाल नहीं होगा। ट्रंप मान गए। लेकिन जब मीडिया आया तो क़रीब 50 कैमरे थे। दोनों ने अपनी बात रखी। फिर ट्रंप ने सबसे पहले मीडिया से पूछा कि क्या उनके कोई सवाल हैं। फिर उन्होंने 45 मिनट की कॉन्फ्रेंस की।”

ट्रंप ने पत्रकारों से पूछा- कोई सवाल?

गोर के मुताबिक, बैठक शुरू हुई तो वहां पत्रकारों के साथ करीब 50 कैमरे मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप ने शुरुआत में अपनी बात रखी। इसके बाद ट्रंप ने अचानक पत्रकारों की ओर देखकर पूछा- Any questions? यानी ‘कोई सवाल है?’

गोर ने आगे कहा कि ट्रंप के इस सवाल के बाद बैठक का पूरा प्रारूप बदल गया। पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका मिल गया और बातचीत आगे बढ़ते-बढ़ते करीब 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसी हो गई। उनके मुताबिक, इसके बाद कई अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर सवाल-जवाब हुए।

भारत ने क्यों कहा- यह सामान्य प्रोटोकॉल है?

गोर के बयान से ऐसा प्रतीत हुआ था कि भारत ने दोनों नेताओं की सार्वजनिक बातचीत के प्रारूप को सीमित रखने की इच्छा जताई थी। इसी पर भारत ने अब अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, किसी भी बड़े VVIP कार्यक्रम से पहले दोनों देशों के अधिकारी यह तय करने के लिए बातचीत करते हैं कि नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी किस तरह होगी। भारत का कहना है कि ऐसी व्यवस्थाओं पर पहले से बातचीत होना नियमित राजनयिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

प्रारूप तय करना और जवाब नियंत्रित करना अलग बात

इस मामले में सबसे अहम अंतर यही है। किसी बैठक से पहले यह कहना कि मीडिया से बातचीत किस प्रारूप में हो, एक प्रशासनिक और प्रोटोकॉल संबंधी विषय है। इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश के नेता को पत्रकारों के सवालों का क्या जवाब देना है, यह भी तय किया जा रहा है।

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यानी भारत की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का सार यह है कि ‘नो क्वेश्चन’ या सीमित मीडिया इंटरेक्शन की पसंद बताना और किसी नेता के जवाबों को नियंत्रित करना दो अलग-अलग बातें हैं। गोर के मुताबिक, ट्रंप ने अंततः पत्रकारों के सवाल लेने का फैसला किया और बैठक का दायरा काफी बढ़ गया।

Iran-US War Update: ‘एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा’; होर्मुज में तनाव के बीच ईरान की अमेरिका को सबसे बड़ी धमकी

Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जिसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कथित ‘आर्थिक युद्ध’ जारी रखा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) समेत फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक सकता है। ईरान की इस धमकी ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सवाल यह है कि अगर Hormuz से तेल की आवाजाही वास्तव में रुकती है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया के पेट्रोल, डीजल, LPG और दूसरे ईंधनों की कीमतों पर कितना पड़ेगा?

‘एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा’

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो होर्मुज के रास्ते या फारस की खाड़ी के किसी अन्य हिस्से से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा।

रेजाई ने केवल अमेरिका को ही चेतावनी नहीं दी, बल्कि उन देशों को भी निशाने पर लिया जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होते हैं या उसका समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान ऐसे किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।

अमेरिका करने जा रहा है बड़ा आर्थिक हमला

ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका उसके खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इसमें ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाने वाली नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया जा सकता है।

Financial Times में लिखे एक लेख में बेसेंट ने आने वाले कदमों को किसी विरोधी के खिलाफ अब तक की गई सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई बताया है। अमेरिका ने अभी इन संभावित प्रतिबंधों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन संकेत दिया है कि ईरान के साथ आर्थिक और वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले देशों पर भी दबाव डाला जा सकता है।

चीन को भी अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को लेकर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। Reuters के अनुसार, बेसेंट ने चीन से भी अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन की ऊर्जा जरूरतों में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने तेल आयात का करीब आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करता है।

चीन ने हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की नीति पर आपत्ति जताई है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या के समाधान में मदद नहीं करते और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत है। ईरान के नेताओं ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है।

ईरानी सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने अमेरिकी आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि यह सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की कथित हार की स्वीकारोक्ति है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए युद्ध और प्रतिबंध कोई नई चीज नहीं हैं। ईरान करीब दो दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

होर्मुज पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के लिए यह प्रमुख समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

Reuters के मुताबिक, ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आर्थिक दबाव में है। इसके अलावा हालिया हमलों के कारण उसके बुनियादी ढांचे को नुकसान, व्यापार में बाधा, उत्पादन में कमी और पुनर्निर्माण की लागत का दबाव भी बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अब भी पर्याप्त मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, जिससे वह खाड़ी के पड़ोसी देशों को निशाना बना सकता है। होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और LPG का आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज के जरिए तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। खासकर LPG के मामले में भारत के लिए आयात और अंतरराष्ट्रीय कीमतें महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि होर्मुज में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति या सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम आदमी की रसोई और वाहन के खर्च से भी जुड़ा हुआ मामला है।

India-China Border Issues: भारत-चीन के रिश्ते में नया मोड़! NSA अजीत डोभाल 24 अगस्त को जाएंगे बीजिंग, सीमा विवाद पर करेंगे चर्चा

India-China Border Issues: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे। इस दौरान सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।

डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।

जानकारों का कहना है कि यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।

शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत

शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।

सीमा विवाद पर विदेश मंत्री जयशकंर ने क्या कहा?

बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार 22 अगस्त को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।

जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।” उन्होंने कहा, “आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”

अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बयान

अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।

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इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।