नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

nepal flood

नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच गुजरात के लापता लोगों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। राज्य सरकार ने नेपाल में लापता हुए नागरिकों की नई सूची जारी की है। इस सूची में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित राज्य के विभिन्न जिलों के लोग शामिल हैं। वहीं, 2 और एनआरआई (NRI) के भी संपर्क से बाहर होने की खबर है। ALSO READ: नेपाल बाढ़ हादसा : फंसे हुए गुजरातियों की मदद के लिए गुजरात सरकार सक्रिय, प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने दी बड़ी जानकारी

 

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक गुजरात के कुल 25 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। इस स्थिति के कारण उनके परिजनों में भारी चिंता का माहौल है। रिश्तेदार लगातार राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय के प्रशासन से अपने स्वजनों की ताज़ा जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। 

 

विदेशी नागरिकता वाले गुजराती भी लापता

लापता लोगों में केवल स्थानीय गुजराती ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे एनआरआई (NRI) गुजराती भी शामिल हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, लापता 25 लोगों में से कुछ नागरिक न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से नेपाल की यात्रा पर आए थे और बाढ़ के बाद उनका संपर्क टूट गया है। 

 

राज्य सरकार और प्रशासन की लगातार निगरानी

राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है और विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटाकर सूची अपडेट कर रही है। मौजूदा 25 लोगों की सूची के बाद जैसे-जैसे संपर्क स्थापित होगा, इन आंकड़ों में बदलाव होने की संभावना है। लापता लोगों के संबंध में कोई भी नई जानकारी मिलते ही तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा। 

 

हेल्पलाइन नंबर 

 079-23251900 

 9978405304 

 1070 

 

जिलेवार लापता गुजरातियों का विवरण

 

सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार, अहमदाबाद के 5, आनंद के 4, सूरत के 4, खेड़ा के 4, गांधीनगर के 4, अमरेली के 2, राजकोट के 1 और वलसाड के 1 नागरिक शामिल हैं। इनमें से कई लोगों के पास अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता भी है। 

 

नेपाल में बाढ़ का कहर और भारी तबाही

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारी तबाही हुई है। प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। रास्ते बंद होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। 

 

150 से अधिक गुजरातियों के प्रभावित होने की खबर

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने बताया कि वायरल हो रहे भयानक वीडियो में लोग, मकान और वाहन तिनके की तरह बहते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस आपदा में जान-माल के वास्तविक नुकसान का सही आंकड़ा सामने आने में अभी लंबा समय लग सकता है। नेपाल के रसुवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आई इस आपदा में अब तक 392 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 290 भारतीयों सहित 1,400 से अधिक लोग लापता हैं। देशभर से और विशेष रूप से गुजरात से बड़ी संख्या में पर्यटक वहां गए थे, जिनमें से प्राथमिक जानकारी के अनुसार 150 से अधिक गुजरातियों के भी इस हादसे में प्रभावित होने की रिपोर्ट मिल रही है। 

 

भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 315 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। भारत सरकार नेपाली प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और भारतीयों की तलाश तथा उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के काम में जुटी हुई है।

Nepal Flood: 600 से ज्यादा मौतें और हजारों लापता…तबाही के बीच नेपाल में अब भी मंडरा रहा सैलाब का खतरा

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। इस आपदा में अबतक मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 पहुंच गई है। वहीं 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।  इसमें 320 भारतीय भी शामिल है। हालात को देखते हुए बचाव और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कुछ जगहों पर बनी अस्थिर बैरियर झीलों की वजह से दुबारा बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्य में परेशानी हो रही है।

नेपाल में बाढ़ का खतरा

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भयानक आपदा की शुरुआत ग्लेशियर के अचानक टूटने और ढहने से हुई। इसके बाद हिमालय से निकलने वाली नदियों में बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और मलबा बहने लगा, जिसने निचले इलाकों में तबाही मचा दी। इस तेज बहाव ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया।

रोकना पड़ा बचाव काम

शुक्रवार को पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए राहत और बचाव का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया। मलबे से बनी एक झील का पानी लहेंडे खोला और त्रिशूली नदी की ओर बढ़ रहा था। वहीं, तिब्बत की तरफ बांध टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने बचाव दलों को तुरंत सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी। खतरा कम होने और हालात सुधरने के बाद नेपाल में बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया। चीन ने भी ग्यिरोंग इलाके में कुछ समय के लिए राहत कार्य रोका था। बाद में चीन के सरकारी चैनल CCTV ने हालात सामान्य होने की जानकारी दी, जिसके बाद बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया।

नेपाल में अभी भी बाढ़ का खतरा

नेपाल में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अधिकारियों की नजर पहाड़ी इलाके में बनी दो बैरियर झीलों पर बनी हुई है, क्योंकि इनमें जमा पानी किसी भी समय नीचे की ओर बह सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक झील का आकार लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है और पानी बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। इससे दबाव बढ़ने और दोबारा बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। वहीं, चीनी एक्सपर्ट ने भी आगाह किया है कि क्षेत्र में मौजूद 100 से अधिक ग्लेशियल झीलें आने वाले समय में खतरा पैदा कर सकती हैं।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जो भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा त्रिशूली-I हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारियों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, चीन की ओर से 149 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ करीब 400 चीनी नागरिक चीन में सुरक्षित जगहों पर हैं और उन्हें वहां से निकालने में भारतीय दूतावास मदद कर रहा है।

अब तक कितने भारतीय लापता

बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था खराब होने से करीब 320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, इस आपदा में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा कई ट्रेकर्स और तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने अपनी लापता लोगों की सूची में 933 हाइड्रोपावर कर्मचारियों को शामिल किया है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नेपाल में तबाही के बीच बचा रहा घर:कई फीट तक पानी और मलबे से घिरा; बालकनी में खड़े 3 लोगों की जान बची, VIDEO

नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि वीडियो नेपाल में कहां का है, यह पता नहीं लगा। घर की बालकनी में 3 लोग खड़े नजर आ रहे हैं। चारों तरफ तबाही के मंजर के बीच भी वे शांत दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कीचड़ भरा बाढ़ का पानी डरावनी रफ्तार से इलाके में बहता दिख रहा है। पानी अपने साथ इमारतों के ढांचे और मलबा बहा ले जा रहा है। हालांकि, चारों तरफ तेज पानी से घिरे रहने के बावजूद यह घर काफी हद तक सुरक्षित नजर आया। बाढ़ और मलबे के बीच घर, 4 तस्वीरें… नेपाल में अब तक 579 मौतें नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में 579 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 2500 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। शुक्रवार को पता चला कि इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लक्ष गोपिसेट्टी भी नेपाल गए थे। उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन की ओर करीब 400 भारतीय फंसे हैं, लेकिन सभी सुरक्षित हैं। भारत उनके सुरक्षित स्वदेश लौटने के लिए चीनी अधिकारियों के संपर्क में है। इसके अलावा 153 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। ————————————— ये खबर भी पढ़ें… नेपाल विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने को राजी:बाढ़ में 579 मौतें; 320 भारतीयों समेत करीब 2500 लापता नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने पहले विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने की बात कही थी, लेकिन अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के एक्सपर्ट्स की सीमित मदद ली जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल में तबाही के बीच बचा रहा घर:कई फीट तक पानी और मलबे से घिरा; बालकनी में खड़े 3 लोगों की जान बची; VIDEO

नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक हरे रंग का घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि वीडियो नेपाल में कहां का है, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। घर की बालकनी में 3 लोग खड़े नजर आ रहे हैं। वे शांत दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कीचड़ भरा बाढ़ का पानी डरावनी रफ्तार से इलाके में बहता दिख रहा है। पानी अपने साथ इमारतों के ढांचे और मलबा बहा ले जा रहा है। हालांकि, चारों तरफ तेज पानी से घिरे रहने के बावजूद हरे रंग का यह घर काफी हद तक सुरक्षित नजर आया। बाढ़ और मलबे के बीच घर, तस्वीरें… नेपाल में अब तक 579 मौतें नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में 579 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 2500 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। शुक्रवार को पता चला कि इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लक्ष गोपिसेट्टी भी नेपाल गए थे। उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन की ओर करीब 400 भारतीय फंसे हैं, लेकिन सभी सुरक्षित हैं। भारत उनके सुरक्षित स्वदेश लौटने के लिए चीनी अधिकारियों के संपर्क में है। इसके अलावा 153 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। ————————————— ये खबर भी पढ़ें… नेपाल विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने को राजी:बाढ़ में 579 मौतें; 320 भारतीयों समेत करीब 2500 लापता नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने पहले विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने की बात कही थी, लेकिन अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के एक्सपर्ट्स की सीमित मदद ली जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल बाढ़- लापता लोगों का आंकड़ा 2400 पहुंचा:320 भारतीय, इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO का सुराग नहीं; अब तक 586 मौतें, 4451 का रेस्क्यू हुआ

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। शुक्रवार रात तक आंकड़ा 2400 के करीब पहुंच गया। जबकि अब तक 586 लोगों के शव मिले हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान में 15,431 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अब तक 4,451 लोगों को बचाया जा चुका है। सेना और निजी प्राइवेट कंपनियों के 16 हेलिकॉप्टरों से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। करीब 400 भारतीय चीन में फंसे हैं और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है। इसके अलावा 149 भारतीय चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लैक्स गोपिसेट्टी भी लापता बताए जा रहे हैं। कंपनी ने शुक्रवार रात बताया कि गोपिसेट्टी निजी काम से नेपाल गए थे। लेकिन बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इधर, नेपाल दूसरे देशों के रेस्क्यू टीमों से मदद लेने के लिए तैयार हो गया है। नेपाल ने प्रभावित इलाकों में यातायात बहाल करने के लिए भारत और चीन से 70 मीटर लंबे 10 बेली ब्रिज की मदद भी मांगी है। PM बालेन ने बताया कि अब तक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 190 करोड़ नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी एक महीने की सैलरी भी राहत कोष में देने का फैसला किया है। खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

नेपाल बाढ़- लापता लोगों का आंकड़ा 2500 पहुंचा:400 भारतीय तिब्बत में फंसे; सुरंग में फंसे लोगों को निकालने में मदद करेगा भारत

नेपाल-तिब्बत में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 पहुंच गई है। अब तक 584 शव बरामद हो चुके हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में अभी भी 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अलावा करीब 400 भारतीय तिब्बत में फंसे हुए हैं। MEA ने बताया कि चीन की तरफ फंसे 153 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीनियर अफसरों के साथ हाईलेवल मीटिंग की और नेपाल में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। जयशंकर ने कहा कि एक जलविद्युत परियोजना वाली जगह पर लोगों के सुरंग में फंसे होने की आशंका है। इसलिए भारत मदद के लिए एक टीम भेज रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद का मंजर … नेपाल में तबाही के बाद की 3 तस्वीरें… खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच वहां मांग उठ रही हैं- RSS पर बैन लगे। यह मांग अमेरिकी सरकार का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स ने की है। मार्च में इसी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी। इस मांग का आधार क्या है, RSS पर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्या ट्रम्प RSS पर बैन लगाएंगे; इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: अमेरिका में RSS पर पाबंदी को लेकर कौन सवाल उठा रहा है? जवाब: मोहन भागवत 25 अगस्त से 19 दिन के विदेश दौरे पर हैं। पहला पड़ाव अमेरिका है, फिर कनाडा और ब्रिटेन। RSS पर प्रतिबंधों को लेकर तीन प्रमुख लोगों ने बयान दिए हैं- 19 अगस्त को USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS नेता भले ही भारतीय सरकार से जुड़े हों, लेकिन उन्हें अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग्स और डिप्लोमेसी में तरजीह नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के दोषी पाए गए RSS सदस्यों पर बैन लगाना चाहिए।’ USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद ने भी कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। ये एक ऐसा भारतीय संगठन है, जिससे जुड़े समूहों ने ईसाई और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आ रहे हैं।’ कमीशन की पूर्व चेयरपर्सन नादिन मेंजा ने भी अमेरिकी मैगजीन ‘प्रोविडेंस’ में लिखा, ‘भागवत जिस एकता और सद्भाव की बात करते हैं, वह संघ की जमीनी हरकतों से बिल्कुल अलग है। संघ के रवैये के लिए उसे बैन किया जाना चाहिए।’ सवाल-2: तो फिर इन बयानों का आधार क्या है और इसके पीछे की दलील क्या है? जवाब: RSS पर पाबंदी की बात मार्च 2026 से शुरू हुई। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत से जुड़े 2 पन्ने हैं। इनमें 23 घटनाओं का जिक्र है- इन 10 प्रमुख घटनाओं के अलावा 13 और घटनाओं का जिक्र है, जिसमें 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों, रेवरेंड फ्रैंकलिन ग्राहम का वीजा रद्द करने और गौ संरक्षण के नाम पर हत्या करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में USCIRF ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी सरकारों, हिंदू राष्ट्रवादी नेता और संगठन का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सिर्फ एक जगह जिक्र है। वो भी Targeted Sanctions, यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के सेक्शन में। USCIRF का कहना है कि RSS की संपत्तियां जब्त कर लेनी चाहिए और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक या वीजा रद्द कर देना चाहिए। सवाल-3: RSS पर बैन की मांग करने वाला ये USCIRF आखिर है क्या?
जवाब: USCIRF की शुरुआत 3 दशक पहले हुई… आयोग बनने की कहानी आयोग का स्ट्रक्चर USCIRF में संसद के जरिए नियुक्त 9 कमिश्नर होते हैं, जो दोनों पार्टियों से होते हैं। एक कमिश्नर को चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल पाकिस्तानी मूल के डॉ. आसिफ महमूद इसके चेयरमैन हैं। आयोग का काम आयोग की ताकत आयोग अपनी सालाना रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सौंपता जरूर है, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, सिर्फ सिफारिशें देता है। सवाल-4: क्या वाकई अमेरिका में RSS पर बैन लग सकता है?
जवाबः नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं लगता। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… सवाल-5: पाबंदी की इस मांग पर भारत सरकार और RSS का क्या रुख है?
जवाबः भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रसित और जीरो भरोसे वाली संस्था बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को कहा, ‘USCIRF सालों से भारत के खिलाफ भ्रामक, गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत काम करती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।’ वहीं RSS ने फिलहाल इस पर कोई बात नहीं कही है। हालांकि 24 अगस्त को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा, ‘USCIRF के मन में सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत के प्रति गहरी नफरत है। हाल में RSS के प्रति जो नफरत दिखाई है, वह हिंदूफोबिया से प्रेरित उसके जाने-पहचाने एजेंडे का एक हिस्सा है।’ मार्च में भारत के पूर्व जजों और अधिकारियों ने एक बयान जारी कर USCIRF रिपोर्ट को दिमागी तौर पर दिवालिया और स्वार्थी बताया था। 275 अफसरों ने इस बयान पर दस्तखत किए थे, जिसमें 25 रिटायर्ड जज, 10 राजदूतों समेत 119 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और 131 आर्म्ड फोर्सेस के अधिकारी थे। सवाल-6: USCIRF पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन?
जवाबः USCIRF के मौजूदा चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हैं। वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खारियान गांव में जन्मे। उन्होंने कराची के सिंध मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली, फिर 1990 के दशक के आखिर में अमेरिका चले गए। अमेरिका के कैलिफोर्निया में महमूद प्रैक्टिस करने लगे। बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से राजनीति भी की है। 2008 से 2016 तक डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में डेलिगेट रहे। 2022 में कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2024 में डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने उन्हें USCIRF में नियुक्त हुए। जुलाई 2026 में चेयरमैन चुने गए। 2019 में जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया, तब महमूद ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए अमेरिकी संसदीय सुनवाई कराने के लिए लॉबिंग की थी। महमूद ने कहा था, ‘कश्मीरी अकेले नहीं हैं। हम तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक कि उन सभी के मानवाधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते।’ महमूद पर सवाल उठते रहे हैं- ——————————–
ये भी पढ़ें- ‘मोहन भागवत का कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं’: आयोजक बोले- 16 धर्मों के लोग आएंगे, विरोध करने वाले भी आएं HSS के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर सौमित्र गोखले ने 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हाऊडी मोदी कार्यक्रम करवाया था, जिसमें 50 हजार लोग जमा हुए थे। इस बार चीफ गेस्ट RSS प्रमुख मोहन भागवत हैं। कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड डायलॉग के डायरेक्टर सुदेश अग्रवाल और प्रवक्ता प्रिया सामंत से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत…

भागवत न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर पहुंचे:बोले- विश्व में कई तरह के संघर्ष, कृष्ण चेतना से ही शांति आ सकती है

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर का दौरा किया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ शांति ला सकती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भले ही अलग-अलग तरह की विविधताएं, मतभेद और संघर्ष हों, लेकिन अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो दुनिया में बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है। भागवत 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। इसे मैचलैस गिफ्ट्स भी कहा जाता है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस्कॉन के 120 देशों में 1,300 मंदिर हैं। 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर में भागवत का कार्यक्रम RSS प्रमुख 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। वे RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर तीन देशों, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे पर हैं। इस दौरान वे भारतीय समुदाय और अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का हिस्सा है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम आयोजक है। कार्यक्रम में भागवत का संबोधन भी होगा। कार्यक्रम से पहले विवाद, न्यूयॉर्क मेयर विरोध कर चुके न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम को लेकर विरोध भी हुआ है। मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि वह RSS के इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने जारी की सुरक्षा सलाह कार्यक्रम से पहले हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने लोगों से सतर्क रहने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी विवाद से बचने की अपील की है। फाउंडेशन ने कार्यक्रम में आने वालों से दूसरों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने को कहा है। कार्यक्रम में शामिल होने वाले आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि विरोध करने वालों को अपनी राय रखने और आलोचना करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम दुनिया को भाईचारे और शांति का संदेश देगा। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इसे अंतरधार्मिक कार्यक्रम बताया। उनके मुताबिक, इसमें अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों को मानने वाले लोग शामिल होंगे। अमेरिकी आयोग ने RSS पर बैन की मांग की थी भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की है। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई लेवल राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनसे आधिकारिक मुलाकात नहीं करने की अपील भी की। भारत ने USCIRF की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है, इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। मार्च की रिपोर्ट में RSS और RAW पर कार्रवाई की सिफारिश USCIRF ने मार्च में अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट में RSS और RAW समेत कुछ संगठनों और लोगों पर बैन लगाने की सिफारिश की गई थी। भारत ने रिपोर्ट को ‘विकृत और चुनिंदा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। सरकार ने कहा था कि रिपोर्ट में ऐसे स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है जिनकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं और इसमें भारत की स्थिति की एकतरफा तस्वीर पेश की गई है। 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।

Nepal Flood Update: ‘चीन में फंसे हैं 400 से अधिक भारतीय, 320 अब भी लापता’; नेपाल त्रासदी पर विदेश मंत्रालय ने क्या बताया?

Nepal Flood Update: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि करीब 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को राहत एवं बचाव प्रयासों में हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।

तमिलनाडु के इन निवासियों का राष्ट्रीय राजधानी के हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि नेपाल-चीन सीमा के चीनी हिस्से में फंसे 400 से ज्यादा भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सैकड़ों अन्य लोगों से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं। नेपाल के अधिकारियों द्वारा शेयर की गई ताजा जानकारी के अनुसार, बुधवार को अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है।

320 भारतीयों की तलाश जारी

जायसवाल ने कहा, “जहां तक उन भारतीयों की संख्या का सवाल है, जिनसे हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, इस समय यह संख्या 320 है।” उन्होंने कहा, “भारतीय मूल के करीब 100 लोग ऐसे भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। ये भारतीय मूल के लोग हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास अन्य देशों की नागरिकता है।” जायसवाल ने कहा कि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा, “वे अपने परिवारों के संपर्क में हैं। हमारे दूतावास ने भी उनमें से कई लोगों से संपर्क किया है। उनके परिवार के कई सदस्यों ने भी बीजिंग स्थित हमारे दूतावास द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबरों के जरिए हमसे संपर्क किया है।” जायसवाल ने कहा, “हमारा दूतावास चीन में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। इस बात पर काम कर रहा है कि वहां फंसे इन लोगों को किस तरह निकाला जा सकता है।”

जयशंकर ने की हाईलेवल मीटिंग

इस बीच, जयशंकर ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और नेपाल की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान लापता भारतीयों की स्थिति का पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया। काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “नेपाल में जारी राहत और बचाव प्रयासों पर चर्चा की। काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनके सुरक्षित होने के संबंध में ताजा जानकारी दी।”

मौत का आंकड़ा 547 पहुंचा

नेपाल में कई और शव बरामद किए जाने के साथ ही भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 547 हो गई। इस बीच, तलाश और बचाव अभियान सतर्कता के साथ जारी है, क्योंकि भोटेकोशी नदी इलाके में जलस्तर बढ़ने से दोबारा इस आपदा का खतरा मंडरा रहा है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिस स्थान पर भीषण बाढ़ आई थी वहां जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

एनडीआरआरएमए ने अपने ताजा नोटिस में कहा, “बुधवार को जिस स्थान पर अचानक बाढ़ आई थी, उसी जगह पर अब कीचड़-युक्त पानी का स्तर बढ़ जाने से उस क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।” मध्य नेपाल के रसुवा और अन्य इलाकों में बुधवार को आई जबरदस्त बाढ़ के बाद यह चेतावनी जारी की गई है। बुधवार को आई बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। बस्तियों, सड़कों, पुलों और पनबिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।

लोगों को सतर्क रहने की अपील

NDRRMA ने तलाश और बचाव कार्यों में शामिल लोगों के साथ-साथ अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी और त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।

नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इस हिमालयी देश के आठ जिलों से 547 शव बरामद किए गए हैं। जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 44 और नुवाकोट से 38 शव बरामद किए गए।

इसी तरह, धादिंग से 40, तनाहू से 29, नवलपरासी पश्चिम से 28 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पांच लोगों की मौत हो गई है। नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से कम से कम 977 लोग लापता हैं। इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं।

अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायल व्यक्तियों और फंसे हुए लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हो रहा है, जहां परिजन बड़ी बेसब्री से अपनों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल पुलिस ने तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया है।

ये भी पढ़ें- UP News: रक्षाबंधन पर सीएम योगी का बेटियों को तोहफा! बताया कब मिलेगी 50,000 छात्राओं को फ्री स्कूटी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने शुक्रवार को बताया कि इस त्रासदी के बाद बाढ़-प्रभावित अलग-अलग इलाकों से कम से कम 121 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया है, जिनमें 85 भारतीय शामिल हैं। पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बचाए गए पर्यटकों में दक्षिण कोरिया के 9 और चीन के 16 नागरिक शामिल हैं। पुलिस बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।

पाकिस्तान में 200 साल पुराना गुरुद्वारा गिराया:शॉपिंग मॉल बनाया जा रहा; BJP बोली- सिखों की विरासत खत्म की जा रही

पाकिस्तान के बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में करीब 200 साल पुराने ऐतिहासिक ‘श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा’ को गिरा दिया गया। अब इस जगह पर एक मॉल का निर्माण किया जा रहा है। बलूचिस्तान गुरुद्वारा सिंह सभा के सदस्य सरदार जसबीर सिंह के अनुसार, पूरा सिख समाज इसका विरोध कर रहा है, लेकिन अभी तक सरकार कोई एक्शन नहीं ले रही। उन्होंने बताया कि बलूचिस्तान में कभी 12 गुरुद्वारे थे, जिनमें से अब सिर्फ 2 बचे हैं। गुरुद्वारे को गिराए जाने पर भारत में भी कड़ा विरोध हो रहा है। भाजपा के नेशनल स्पोक्सपर्सन आरपी सिंह ने कहा कि ये पाकिस्तान में सिखों की विरासत खत्म करने की कोशिश है। अकाल तख्त साहिब को पाकिस्तान सरकार के सामने मामला उठाना चाहिए और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। 200 साल पुराने गुरुद्वारे में खुला था स्कूल क्वेटा के आर्चर रोड स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा परिसर में बाद में सेंट गैब्रिएल स्कूल संचालित हो रहा था। सिख समुदाय के नेता सरदार जसबीर सिंह के मुताबिक, अब उसी गुरुद्वारे को ढहाकर यहां शॉपिंग प्लाजा का निर्माण कराया जा रहा है। मामला बलूचिस्तान हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल निर्माण रोकने से इनकार कर दिया है। निजी बिल्डर को जमीन बेची गई सिख समुदाय के मुताबिक, यह जमीन श्री गुरु सिंह सभा से जुड़ी संपत्ति थी। आरोप है कि इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने इसे एक निजी बिल्डर को बेच दिया। अब सवाल उठ रहा है कि ETPB को इस धार्मिक संपत्ति को बेचने का अधिकार किस आधार पर मिला और जमीन की बिक्री की प्रक्रिया क्या थी? इस पर पाकिस्तान सरकार या ETPB की ओर से आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है। 4 पॉइंट्स में पढ़ें क्या बोले आरपी सिंह… फारूकाबाद में भी 125 साल पुराना गुरुद्वारा तोड़ा गया था पाकिस्तान के फारूकाबाद में भी 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को तोड़ा गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि ये खबर बेहद दुखद है। उन्होंने कहा था कि भारत इस घटना की कड़ी निंदा करता है। यह सिखों के एक पवित्र धार्मिक स्थल को जानबूझकर निशाना बनाकर की गई तोड़फोड़ है। सबसे चिंता की बात यह है कि स्थानीय प्रशासन और इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) की ओर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाने की ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे साफ है कि वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले अब भी जारी हैं। —————— पाकिस्तान में 125 साल पुराना गुरुद्वारा तोड़ा:गुबंद गिराने पर सिखों में गुस्सा, तोड़फोड़ रुकवाई; ताला लगाकर जगह सील की
पाकिस्तान के पंजाब में गुरुद्वारों को गिराने का सिलसिला थम नहीं रहा। बीते शुक्रवार (26 जून) को फारूखाबाद (मंडी चूरकाना) में भूमाफिया ने प्रशासन के साथ मिलकर 125 साल पुराने ऐतिहासिक सिंह सभा गुरुद्वारे का एक हिस्सा गिरा दिया। पूरी खबर पढ़ें…