Crude Oil Price: ट्रंप की मांगों से डील की उम्मीदें हुई कम, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, ब्रेंट $90 प्रति बैरल के करीब

Crude Oil Price: कल कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन उछाल आया। मंगलवार, 11 अगस्त को एशिया में शुरुआती कारोबार में भी ये बढ़त बनी रही। ऐसा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ कड़ी मांगें रखने के बाद हुआ, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की किसी भी संभावित डील की उम्मीदें धुंधली हो गई।

ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में रात भर में 5% की बढ़ोतरी हुई। WTI आज सुबह $82 प्रति बैरल के स्तर पर बना रहा। ब्रेंट $87 प्रति बैरल से ऊपर बंद होने के बाद $90 प्रति बैरल के निशान की ओर बढ़ा।

ट्रंप ने आगे लिखा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे भविष्य की सभी बातचीत में इन नई मांगों को मजबूती से रखें। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पिछली किसी भी बैठक में मुआवजे का मुद्दा कभी नहीं उठा। हालांकि, ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए $300 बिलियन का फंड उस 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) का हिस्सा है, जिस पर ट्रंप ने खुद जून में फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए थे।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि हालांकि ईरान और ओमान इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग (chokepoint) के भविष्य के प्रशासन पर द्विपक्षीय बातचीत में लगे हुए हैं, लेकिन जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक यह जलडमरूमध्य फिर से नहीं खुलेगा।

ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में ‘एनर्जी एस्पेक्ट्स’ की फाउंडर और मार्केट इंटेलिजेंस डायरेक्टर अमृता सेन ने बताया कि अभी होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल पांच जहाज गुजर रहे हैं। यह संख्या जून में MoU पर हस्ताक्षर के बाद ट्रैफिक के 14 के दैनिक औसत तक पहुंचने की तुलना में काफी कम है।

TD सिक्योरिटीज में कमोडिटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड बार्ट मेलेक ने कहा, “यह देखते हुए कि जलडमरूमध्य अभी भी बंद है, ग्लोबल इन्वेंट्री में भारी कमी आई है और फ्लो सामान्य स्तर के आसपास भी नहीं है, हम ‘शॉर्ट्स कवर’ (short covering) में आक्रामक तेजी देख सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि ब्रेंट मौजूदा स्तर से $10-15 ऊपर ट्रेड करेगा।”

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

चीन बोला- भारत का अरुणाचल का मैप जारी करना गलत:कहा- इससे चीन का दावा नहीं बदलेगा; भारत ने 3 दिन पहले नक्शा जारी किया था

चीन ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के भारतीय मानचित्र पर मानक नाम दर्ज करने के कदम को अवैध बताया। चीन ने इसे ‘शून्य और अमान्य’ करार दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत की हाल की घोषणा पर सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि चीन भारत की ओर से बनाए गए तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया था। यह कदम चीन की ओर से राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान बताना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। म सरकार ने ऐसा क्यों किया इन नामों को आधिकारिक मानचित्रों में शामिल करने का मकसद प्रशासन को बेहतर बनाना है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में एकरूपता आएगी, अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल होगा और आपदा के समय मदद पहुंचाने में आसानी होगी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन नामों के आधार पर लोगों के पासपोर्ट या दूसरे निजी दस्तावेजों में कोई बदलाव किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों की आधिकारिक पहचान तय करना और भारत के प्रशासनिक रिकॉर्ड में उन्हें शामिल करना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता।

नेपाली पीएम ने भारतीय राजदूत से मुलाकात की:पहली बार किसी विदेशी डिप्लोमेट से अकेले मिले; कुछ देर में चीनी राजदूत से मिलेंगे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सोमवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की। प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी विदेशी राजदूत के साथ शाह की यह पहली वन-टू-वन मुलाकात है। नवीन श्रीवास्तव ने शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के साथ अच्छे रिश्ते और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। दोनों के बीच भारत-नेपाल संबंधों, विकास सहयोग और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। बालेन शाह ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते पुराने और भरोसेमंद हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, बिजली, सड़क और दूसरे विकास कार्यों में मिलकर काम जारी रखने पर जोर दिया। बालेन शाह कुछ देर में चीनी राजदूत झांग माओमिंग से भी मिलेंगे। पहले विदेशी अधिकारियों से अकेले नहीं मिलते थे शाह प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में शाह ने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। वह विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे। इसी वजह से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11-12 मई की नेपाल यात्रा के दौरान भी शाह से उनकी अकेले में मुलाकात नहीं हो सकी थी। शाह ने अमेरिकी अधिकारियों समीर पॉल कपूर और सर्जियो गोर से मुलाकात के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने 9 अप्रैल और 26 मई को काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं। नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने विदेशी राजदूतों से अकेले मुलाकात न करने का रुख अपनाया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका समेत कई देशों के राजदूतों और वरिष्ठ अधिकारियों से वन-टू-वन बैठक से दूरी बनाए रखी। शाह का मानना था कि शक्तिशाली देश नेपाल की सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। सामूहिक बैठकों से वह सभी देशों के साथ बराबरी का संदेश देना चाहते थे। लेकिन सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद सलाहकारों ने उन्हें घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने नेताओं, कारोबारियों और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें शुरू कीं। अब विदेशी राजदूतों से सीधे मुलाकात भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक सीधे संवाद से दूरी बनाने पर नेपाल के कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ने की चिंता भी थी। बालेन शाह के PM बनने से पहले क्या होता था? नेपाल में नई सरकार बनने के बाद भारत, चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों के राजदूत अक्सर सीधे प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात करते थे। कई बार ये बैठकें प्रधानमंत्री के निजी आवास पर होती थीं। इन मुलाकातों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और इनका कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह चलन था कि बड़े देशों के राजदूत प्रधानमंत्री से सीधे मिलकर अपनी बात रख सकते थे। माना जाता है कि इन मुलाकातों में आधिकारिक बातचीत के साथ व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने पर भी जोर रहता था। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी अनौपचारिक मुलाकातों से हितों के टकराव का खतरा रहता था और नेपाल के राष्ट्रीय हितों पर भी सवाल उठ सकते थे। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस:हारे तो मनमानी पर रोक लगेगी, नवंबर में होनी है वोटिंग अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की संभावना 65% तक है। मिडटर्म के लिए वोटिंग नवंबर में होनी है।

PoK के तीसरे चरण की वोटिंग टली:लगातार विरोध-प्रदर्शन के बीच फैसला; शहबाज की पार्टी PML-N ने अब तक 24 सीटें जीतीं

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 10 अगस्त सोमवार को होने वाली वोटिंग टल गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हो रहे प्रदर्शन के चलते यह चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं। इससे पहले दो चरणों में शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने कुल 24 सीटें जीतीं। इसके बाद PML-N का PoK में सरकार बनाना तय था। दावा- पहले चरण के चुनाव के दौरान 19 लोगों की मौत PoK में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हिंसा भड़क गई। अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। चुनावी धांधली के आरोपों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच कई मतदान केंद्रों पर झड़पें भी हुईं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थकों का आरोप है कि रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 19 लोगों की जान गई। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मृतकों के नाम भी जारी किए हैं। भारत ने PoK में हो रहे चुनावों को मानने से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान इन चुनावों के जरिए PoK पर अपने अवैध कब्जे को छिपाने और वहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें…
12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद PoK विधानसभा में कुल 45 निर्वाचित सीटें हैं। इनमें 12 सीटें भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान आकर बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। यही 12 सीटें पूरे विवाद की जड़ हैं। सरकार कहती है कि ये सीटें ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। JAAC का कहना है कि जो लोग पाकिस्तान के दूसरे शहरों में रहते हैं, उन्हें PoK की सरकार बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि इन 12 सीटों की वजह से स्थानीय मतदाताओं की राय का असर कम हो जाता है और अक्सर केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। JAAC का कहना है कि इन 12 सीटों का फायदा PML-N और PPP जैसी पार्टियां उठाती हैं। भारत ने चुनाव को दिखावटी बताया भारत लंबे समय से PoK में होने वाले चुनावों को खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को उस इलाके में कोई राजनीतिक प्रक्रिया चलाने का अधिकार नहीं है, जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने PoK चुनाव को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को सही दिखाने की कोशिश बताते हुए इसे दिखावटी एक्सरसाइज कहा है। भारत ने यह भी आरोप लगाया है कि पाकिस्तान चुनावों के जरिए अपने कब्जे को छिपाने और इलाके में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।

नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव सोमवार को दिन के पहले हिस्से में प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचेंगे। इसके बाद चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मुलाकात होगी। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात शाह की भारत, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही होने वाली थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे इलाकों में हुई हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। 27 मार्च को प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने से दूरी बनाए रखी थी। उन्होंने अमेरिका के कुछ बड़े अधिकारियों से मिलने के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक की थी। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। उस समय शाह की इस नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका कहना था कि इससे सभी देशों को बराबर महत्व देने का संदेश जाता है। 100 दिन बाद बदला शाह का तरीका सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद शाह के सलाहकारों ने उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने मधेश के नेताओं और सांसदों के साथ बातचीत की। वे कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी मिल रहे हैं। अब विदेशी राजदूतों के साथ अलग-अलग मुलाकात भी इसी बदलाव का हिस्सा है।

‘एक और पाकिस्तान…’, आतंकवाद पर को शेख हसीना के बेटे ने दिखाया आईना, भारत ने कही ये बात

भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी। बता दें कि, जॉय ने दावा किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बढ़ते आतंकवाद के कारण बांग्लादेश, भारत के पूर्वी हिस्से के लिए “एक और पाकिस्तान” बन गया है। शुक्रवार 8 अगस्त को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर कहा कि भारत पूरी तरह सतर्क है और पड़ोसी देशों में हो रही हर गतिविधि पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, “हम अपने क्षेत्र और पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। सुरक्षा के लिहाज से हर स्थिति की निगरानी की जाती है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम भी उठाए जाते हैं।”

हसीना के बेटे ने क्या दावा किया?

साजीब वाजेद जॉय ने यह बयान बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम साउथ एशिया फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (एफसीसी) की ओर से आयोजित किया गया था। उन्होंने यह बात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन से पहले कही। भारत की सुरक्षा का जिक्र करते हुए जॉय ने दावा किया कि “भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि बांग्लादेश उसके पूर्वी मोर्चे पर एक और पाकिस्तान बनता जा रहा है।” उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) को बांग्लादेश में खुलकर काम करने की छूट मिली हुई है।

शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। हसीना के पद छोड़ने के बाद मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनकी देखरेख में देश में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हुई और इस साल फरवरी में चुनाव कराए गए।

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा, “जिस कार्यक्रम की बात की जा रही है, उसका आयोजन एक निजी मीडिया संस्था कर रही है। इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है और न ही सरकार उस मंच पर रखे जाने वाले विचारों का समर्थन करती है।”

Sheikh Hasina: ‘भारत हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा…’; शेख हसीना ने की PM मोदी की तारीफ

Sheikh Hasina Hails PM Modi: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार (5 अगस्त) को भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। 2024 में बांग्लादेश की सत्ता से हटाए जाने के बाद मीडिया से यह उनकी पहली बातचीत थी। दिल्ली से एक वर्चुअली इंटरनेशनल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए हसीना ने अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों के बावजूद बांग्लादेश लौटने के अपने इरादे को दोहराया। भारत को बांग्लादेश का बहुत अच्छा दोस्त बताते हुए हसीना ने कहा कि नई दिल्ली मुश्किल समय में हमेशा ढाका के साथ खड़ा रहा है और आगे भी ऐसा ही करेगा।

हसीना ने घोषणा की है कि वह देश को सही राह पर लाने के वास्ते दिसंबर में स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा के जोखिम का सामना करने को भी तैयार हैं। हसीना ने यह बात भारत आने के बाद पहली बार डिजिटल तरीके से आयोजित प्रेसवार्ता में कही। वह पांच अगस्त, 2024 को ढाका छोड़कर भारत आई थीं। इस ‘डिजिटल’ प्रेसवार्ता में पत्रकारों को केवल उनकी आवाज सुनाई दे रही थी। वह नजर नहीं आ रही थीं।

हसीना ने कहा, “मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।” अवामी लीग की नेता हसीना ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि वह हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा से बांग्लादेश का घनिष्ठ मित्र रहा है।”

‘मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं’

उन्होंने अपने संबोधन में अपने देश के राजनीतिक माहौल, उनके लोगों के सामने मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा, “मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि बांग्लादेश को विकास, धर्मनिरपेक्षता और समृद्धि के रास्ते पर वापस लाने के लिए है।”

‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब’ में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “चाहे मेरी किस्मत में कुछ भी लिखा हो, मैं अपने लोगों के बीच रहने के लिए बांग्लादेश लौटूंगी। जब मेरे प्यारे देशवासी तकलीफ़ में हों, तो मैं उनसे दूर नहीं रह सकती।”

उन्होंने कहा, “मुझे हिरासत में लिया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है, मुझ पर झूठे मामले थोपे जा सकते हैं। लेकिन डर लोगों के प्रति मेरे कर्तव्य को तय नहीं कर सकता। मेरी जिंदगी निजी सुरक्षा के हिसाब-किताब से कहीं ऊपर है।”

‘मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं’

पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी वापसी पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के साथ किसी भी तरह की पर्दे के पीछे की बातचीत की संभावना को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, “मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं है। मुझे बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है। मैं लौटना चाहती हूं क्योंकि वहां के लोग सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति के हकदार हैं।” पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही उन्हें अपने देश से दूर जाने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन वह वहां के लोगों से कभी अलग नहीं हुईं।

78 वर्षीय हसीना ढाका छोड़ने के बाद से भारत में रह रही हैं। पिछले साल नवंबर में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्रों के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान हसीना की सरकार की कार्रवाई को लेकर मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद से ढाका नयी दिल्ली से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। हसीना ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है।

शेख हसीना ने आरोप लगाया कि जुलाई और अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शन कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं थे, जिनके बाद उनकी सरकार सत्ता से हट गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठित समूहों ने इस आंदोलन को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने का काम किया।

हसीना के बेटे सजीब वाजिद जॉय ने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 से बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याओं को वैध बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश एक विफल राष्ट्र है और देश में कानून-व्यवस्था नहीं है। जॉय ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि भारत की पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश एक और पाकिस्तान बन गया है।

बांग्लादेश की कड़ी प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने हसीना की प्रेसवार्ता पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश इस बात से नाराज है कि ढाका द्वारा नई दिल्ली को इस कार्यक्रम के द्विपक्षीय संबंधों पर संभावित असर के बारे में चिंता जताए जाने के बावजूद, यह बातचीत करने की इजाजत दी गई। उसने कहा कि भारतीय धरती पर हसीना की बातचीत का कार्यक्रम बांग्लादेश की संप्रभुता का अपमान है।

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बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, “बांग्लादेश भारत के साथ ऐसे संबंध बनाए रखना चाहता है जो रचनात्मक हों, दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हों और भविष्य की ओर देखने वाले हों। ये संबंध संप्रभु समानता, आपसी सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने और राष्ट्रीय सम्मान पर आधारित हों।”

India-Myanmar territory: क्या म्यांमार से भारत करेगा अनसुलझे जमीन की अदला-बदली? सीमा विवाद को सुलझाने पर MEA का बड़ा बयान

India-Myanmar territory: भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक अनसुलझे हिस्से को लेकर बातचीत जारी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच सीमा के जिन क्षेत्रों का अभी तक सीमांकन नहीं हुआ है, उन्हें लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, भारत सरकार ने अनसुलझे जमीन की अदला-बदली की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन सूत्रों ने बताया कि भारत और म्यांमार मणिपुर में अपनी साझा सीमा के एक ऐसे हिस्से को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं जिसकी सीमा अभी तय नहीं हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान इससे जुड़े सवाल पर कहा, “सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है। उन क्षेत्रों पर बातचीत जारी है।” हालांकि, क्षेत्र के संभावित आदान-प्रदान की खबरों ने मणिपुर में नागरिक समाज समूहों के विरोध को जन्म दे दिया है, जिन्हें राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर चिंताएं हैं। चर्चा के तहत आने वाला यह हिस्सा लगभग 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में आता है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी (Kabaw Valley) से सटा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट में क्या दावा?

अमेरिका की मैगजीन ‘द डिप्लोमैट (The Diplomat)’ की 17 जुलाई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा के बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए करीब 1.4 वर्ग मील जमीन के संभावित आदान-प्रदान के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मई 2026 के एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा गया कि इस सीमांकन प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। यह इलाका करीब 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में स्थित है, जो म्यांमार की काबाव घाटी (Sagaing Region) से सटा हुआ है।

भारत-म्यांमार सीमा कितनी लंबी है?

भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। ये अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। यह सीमा पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों से होकर निकलती है, जहां कई जनजातीय समुदायों के दोनों देशों में पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार, इस सीमा में से करीब 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन सीमा स्तंभों (Boundary Pillars) के जरिए किया जा चुका है। जबकि लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अब भी अनसुलझा है। इनमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी के कुछ हिस्से शामिल हैं।

सीमा पर बाड़ लगाने की योजना

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित सीमांकन का उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग (बाड़) का काम पूरा करना है। ताकि अवैध घुसपैठ, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

साल 2024 में केंद्र सरकार ने पूरे 1,643 किलोमीटर लंबे भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र पर बाड़ लगाने और फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को समाप्त करने की घोषणा की थी। 2018 में लागू इस व्यवस्था के तहत सीमा से लगे जनजातीय समुदायों को बिना वीजा 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति थी।

1967 के समझौते के बाद भी बाकी हैं कुछ विवादित हिस्से

भारत और म्यांमार के बीच वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सीमा 1967 के द्विपक्षीय समझौते के तहत तय की गई थी। इसके बावजूद कुछ हिस्सों का सीमांकन आज भी पूरा नहीं हो सका है। सरकार ने साल 2018 में संसद को बताया था कि शेष क्षेत्रों का समाधान द्विपक्षीय सीमा तंत्र के माध्यम से किया जाएगा और इसके तहत नौ नए सीमा स्तंभ स्थापित किए जाने हैं।

मणिपुर में मोलचाम सेक्टर (पिलर 64-68), मोरेह सेक्टर (75-79) और चोरो खुन्नौ सेक्टर (88-95) को संवेदनशील माना जाता है। भारत का कहना है कि म्यांमार के साथ कोई व्यापक सीमा विवाद नहीं है। केवल कुछ सीमा स्तंभों का अंतिम निर्धारण होना बाकी है।

मणिपुर में शुरू हुआ विरोध

जमीन अदला-बदली की खबरों के सामने आने के बाद मणिपुर के कई नागरिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही साबित होती है और राज्य की जमीन का कोई हिस्सा म्यांमार को सौंपने की कोशिश की जाती है तो संगठन इसका कड़ा विरोध करेगा।

संगठन ने कहा कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं हो सकती। COCOMI का आरोप है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद राज्य पहले ही अपने ऐतिहासिक क्षेत्र का कुछ हिस्सा खो चुका है। अब किसी भी नई कटौती को स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार से बिना राज्य की जनता की सहमति के कोई फैसला नहीं लेने की मांग की है।

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मामले में बड़ी बातें

  • विदेश मंत्रालय ने केवल सीमा के अनसुलझे हिस्सों पर बातचीत की पुष्टि की है।
  • जमीन की अदला-बदली को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
  • मीडिया रिपोर्ट में 1.4 वर्ग मील भूमि के संभावित आदान-प्रदान का दावा किया गया है।
  • प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है।
  • केंद्र सरकार सीमा पर फेंसिंग कर अवैध घुसपैठ और उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाना चाहती है।
  • मणिपुर के नागरिक संगठनों ने किसी भी संभावित क्षेत्रीय हस्तांतरण का विरोध किया है।

शेख हसीना 2 साल बाद आज नजर आएंगी:दिल्ली में भाषण, भारत का रोक लगाने से इनकार, बांग्लादेश बोला- पड़ोसी से रिश्ते बिगाड़ना नहीं चाहते

बांग्लादेश ने कहा है कि वह भारत के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है। दरअअसल, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वे 5 अगस्त को एक कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करेंगी। हसीना के देश छोड़ने के बाद 2 साल में यह पहली बार शेख हसीना किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में वर्चुअल भाषण देतीं नजर आएंगी। बांग्लादेश ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन भारत ने मंगलवार को इससे इनकार कर दिया था। भारत ने कहा- इसके बाद बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि हमारे रिश्ते खराब हों या उन पर कोई असर पड़े। उम्मीद है कि भारत भी इसे समझेगा।” बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर चुकी हैं शेख हसीना शेख हसीना का कार्यक्रम में दिल्ली में सर मार्क टली ऑडिटोरियम में होगा। इसका आयोजन फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब कर रहा है। फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) नई दिल्ली स्थित पत्रकारों का संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक चलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हसीना इस कार्यक्रम में बांग्लादेश लौटने की तारीख का ऐलान कर सकती हैं। उन्होंने पिछले महीने कहा था कि वे दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। इस दौरान उनकी हत्या भी हो जाए तो उन्हें मंजूर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हसीना अपने भाषण में देश के लिए अपना विजन भी पेश कर सकती हैं। उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय भी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसके अलावा अवामी लीग के कई सीनियर नेता भी इसमें हिस्सा लेंगे। शेख हसीना ने 5 अगस्त का दिन ही क्यों चुना 5 अगस्त 2024 को ही छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। प्रदर्शनकारी उनके सरकारी आवास तक पहुंच गए थे। इसके बाद वह इस्तीफा देकर सेना के विमान से भारत आ गई थीं। यानी जिस दिन उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी, उसी दिन वह दो साल बाद फिर लोगों के सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि वह इसी दिन अपनी राजनीतिक वापसी का मैसेज देना चाहती हैं। हसीना के भाषण को लेकर बांग्लादेश में क्या चर्चा है? बांग्लादेश सरकार ने इस भाषण के प्रसारित होने पर हर तरह से पाबंदी लगा दी है। प्रिंट, टीवी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को चेतावनी दी गई कि शेख हसीना का भारत से होने वाला भाषण प्रसारित या प्रकाशित नहीं किया जाए क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) के आदेश के तहत इस बयान के प्रसारण पर रोक है। इस पाबंदी के बाद से ही सबसे ज्यादा चर्चा में ये है कि क्या हसीना वापस या सकती हैं या नहीं?

हालांकि, बांग्लादेशी मीडिया में इस बात पर चर्चा चल रही है कि हसीना की वापसी से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर क्या असर होने वाला है। बांग्लादेश के बड़े अखबार प्रोथोम आलो लिखता है, ‘भारत को बांग्लादेश से अपने द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर गंभीर नजर आना चाहिए। इस तरह की राजनीतिक गतिविधि से रिश्तों पर खराब असर हो सकता है।’

द डेली स्टार का संपादकीय भी इसी लाइन पर है कि भारत की धरती से इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां हाल ही में सुधरते रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस अखबार ने बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के विरोध को भी जायज ठहराया है। उधर, बंगाली अखबार जुगांतर ने हसीना के वापस आने को लेकर विपक्षी पार्टियों के रुख को ज्यादा प्रमुखता से छापा है।

सोशल मीडिया पर क्या चल रहा: बांग्लादेशी फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (X) पर इन हैश टैग के जरिए चर्चा हो रही है- #SheikhHasina #AwamiLeague #August5 #JulyUprising #IndiaBangladesh न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की मीडिया और सोशल मीडिया में हसीना के भाषण को लेकर तीन तरह के नैरेटिव बने हुए हैं:
1. सरकार: हसीना ‘फरार अपराधी’ हैं, उन्हें कोई राजनीतिक मंच नहीं मिलना चाहिए।
2. छात्र आंदोलन से जुड़ी पार्टियां: हसीना की वापसी नहीं होनी चाहिए। हसीना लौट कर अदालत का सामना करें।
3. अवामी लीग समर्थक: हसीना ही राजनीतिक स्थिरता का विकल्प हैं और उनके बिना चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे।

Crude Oil Price: होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, 5% से ज्यादा गिरकर $79 के पास

Crude Oil Price: होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में गिरावट बड़ी है। कच्चा तेल 5% से ज्यादा गिरकर 79 डॉलर के  पास आया। यह दबाव इस उम्मीद के बीच बना रहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई बहाल करने के लिए कोई समझौता हो सकता है। ब्रेंट क्रूड गिरकर $79 प्रति बैरल के आसपास आ गया और $79.14 पर ट्रेड कर रहा था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.9% गिरकर $75.06 पर आ गया। इससे पहले पिछले दो सेशन में बेंचमार्क में 10% से ज़्यादा की गिरावट आ चुकी थी।

कच्चे तेल की कीमतें क्यों बदल रही हैं?

मंगलवार को कतर ने घोषणा की कि एक अंतरिम प्रस्ताव तैयार किया गया है, जबकि अमेरिका और ईरान दोनों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए बातचीत में प्रगति का संकेत दिया है।

पिछले दो हफ़्तों में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने राजनयिक बातचीत के लिए और समय देने के लिए ईरान पर नए सैन्य हमलों को टाल दिया है। हालाँकि, भले ही जलडमरूमध्य से व्यावसायिक शिपिंग को बहाल करने के लिए कोई अस्थायी समझौता हो जाए, लेकिन इससे संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं हो सकता है या ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन की चिंताओं का समाधान नहीं हो सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच पिछला संघर्ष-विराम एक महीने से भी कम समय तक चला और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण टूट गया। नए सिरे से हुए संघर्ष के कारण पिछले महीने ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग $32 का उतार-चढ़ाव आया, क्योंकि तनाव रेड सी (Red Sea) तक फैल गया था। जुलाई के अंत में लड़ाई में कुछ समय के लिए रुकावट आई थी, जिसका उद्देश्य राजनयिक प्रयासों का समर्थन करना था, लेकिन वह भी अंततः विफल हो गया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतरी सरकार ने बताया कि ट्रंप ने मंगलवार को कतर के अमीर, शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से भी बात की, ताकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की जा सके। व्हाइट हाउस ने बातचीत की पुष्टि की लेकिन आगे कोई विवरण नहीं दिया।

संभावित राजनयिक प्रगति के एक और संकेत के रूप में, चर्चाओं से परिचित राजनयिकों के अनुसार, ईरान यूरोपीय देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें (माइंस) हटाने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। अलग से, सरकारी IRIB न्यूज़ ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओमान के साथ बातचीत रचनात्मक रही और रणनीतिक जलमार्ग के माध्यम से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी।

इस बीच, मामले से परिचित लोगों के अनुसार, सऊदी अरब ने संघर्ष को फैलने से रोकने के प्रयास में ओमान के मध्यस्थों के माध्यम से यमन के हूथी विद्रोहियों के साथ चर्चा की है। सूत्रों ने कहा कि बातचीत विफल होने की स्थिति में किंगडम सैन्य आकस्मिक योजनाएँ भी तैयार कर रहा है।

आपूर्ति के मोर्चे पर, पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में 2.7 मिलियन बैरल की वृद्धि हुई, जबकि कुशिंग, ओक्लाहोमा( जो WTI क्रूड के लिए डिलीवरी हब है) में भंडार 2.4 मिलियन बैरल बढ़ गया। यदि बुधवार को बाद में आधिकारिक सरकारी आंकड़ों से इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह मार्च के बाद से कुशिंग में सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि होगी और भंडार को वापस 20 मिलियन-बैरल के स्तर से ऊपर ले जाएगी, जिसे सुचारू संचालन के लिए न्यूनतम आवश्यक स्तर माना जाता है।

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