बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर पेट्रोल बम से हमला, शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए थे शामिल

Attack on Shakib Al Hasan house: बांग्लादेश के मगुरा जिले में बुधवार (5 जुलाई) रात बांग्लादेश के पूर्व कप्तान और अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के घर पर पेट्रोल बम से हमला हुआ। हसन के मगुरा स्थित घर पर कुछ लोगों ने कथित तौर पर अचानक से हमला कर दिया। इस दौरान उनके घर में आग लगाने की कोशिश की गई। यह हमला तब हुआ जब उन्होंने दिल्ली में सत्ता से हटाई जा चुकीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। पुलिस ने बताया कि अज्ञात उपद्रवियों ने घर में तोड़फोड़ की और आग लगाने की कोशिश की। स्थानीय खबरों के मुताबिक हमले के दौरान पेट्रोल बम भी फेंके गए।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला बुधवार रात करीब 8:45 बजे (स्थानीय समय) शाकिब के घर पर हुई। स्थानीय लोगों ने बताया कि हमले के दौरान उन्हें पटाखे जैसी तेज आवाजें सुनाई दीं। स्थानीय मीडिया ने खबर दी कि घर पर पेट्रोल बम भी फेंके गए। हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर पेट्रोल बम के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं की है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में 39 वर्षीय क्रिकेटर के घर के बाहर पटाखे जैसी आवाजें सुनाई दे रही थीं। शाकिब मगुरा-1 निर्वाचन क्षेत्र से अवामी लीग के पूर्व सांसद हैं।

पुलिस के अनुसार, कई अज्ञात लोगों ने घर पर ईंट और पत्थर फेंके। इससे खिड़कियां टूट गईं। फिर उन्होंने घर में आग लगाने की कोशिश की। फिलहाल किसी के घायल होने की खबर नहीं है।मगुरा सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अब्दुल्ला अल मामून ने ‘द डेली स्टार’ को बताया, “कई उपद्रवियों ने घर पर ईंट के टुकड़े फेंके और खिड़कियां तोड़ दीं। उन्होंने घर में आग लगाने की भी कोशिश की।” घटना के बाद घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हमलावरों की पहचान और हमले के मकसद का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुआ हमला

यह हमला तब हुआ जब शाकिब दिल्ली से शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए थे। यह कार्यक्रम ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ द्वारा आयोजित किया गया था। बातचीत के दौरान हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के अशांति के दौरान अपनी सरकार के कामकाज का बचाव किया। पूर्व पीएम ने दावा किया कि छात्रों के नेतृत्व में हुआ विद्रोह कोई अचानक हुआ विरोध नहीं था। बल्कि सत्ता परिवर्तन का एक सोचा-समझा ऑपरेशन था।

राजनीतिक तनाव अभी भी बरकरार

यह घटना बांग्लादेश में हसीना के सत्ता से हटने के बाद जारी राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। मीडिया से बातचीत से पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिज़न पार्टी (NCP) के नेताओं ने इस कार्यक्रम की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। कथित तौर पर मीडिया संगठनों को हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाने के खिलाफ चेतावनी दी।

अवामी लीग के नेताओं और समर्थकों का आरोप है कि शाकिब के घर पर हुआ हमला इस कार्यक्रम में उनकी भागीदारी से जुड़ा था। हालांकि, बांग्लादेशी अधिकारियों ने हमले और मीडिया के साथ बातचीत के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं किया है, और पुलिस ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान नहीं की है।

शाकिब के राजनीतिक संबंध

बांग्लादेश के सबसे महान ऑलराउंडर क्रिकेटरों में से एक माने जाने वाले शाकिब अवामी लीग के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव के कारण हमेशा चर्चा और विवाद का विषय रहे हैं। उन्हें 2024 के आम चुनाव में मगुरा-1 निर्वाचन क्षेत्र से अवामी लीग के टिकट पर सांसद चुना गया था। विपक्षी दलों ने इस चुनाव की आलोचना करते हुए कहा था कि इसमें वास्तविक प्रतिस्पर्धा का अभाव था।

अगस्त 2024 में हुई राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, बांग्लादेश में अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी। बुधवार को अपने संबोधन में, हसीना ने अपनी पार्टी पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की और कई कानूनी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद बांग्लादेश लौटने के अपने इरादे को दोहराया। इस कार्यक्रम में शाकिब की भागीदारी ने राजनीतिक तनाव के इस दौर में पूर्व सत्ताधारी पार्टी के साथ उनके निरंतर जुड़ाव को उजागर किया।

अभी तक घर नहीं लौटे हैं शाकिब

हसीना सरकार के गिरने के बाद से शाकिब बांग्लादेश नहीं लौटे हैं। राजनीतिक बदलाव के बाद उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें हत्या का एक मामला भी शामिल है जिसमें उन्हें कई आरोपियों में से एक के तौर पर नामजद किया गया है। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान ने बार-बार कहा है कि अगर उन्हें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और उत्पीड़न से बचाव का भरोसा मिले, तो वे लौटने और कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं।

यह अनुभवी ऑलराउंडर संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने परिवार के साथ रहते हुए फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेलना जारी रखे हुए है। उन्होंने कैरेबियन प्रीमियर लीग और लंका प्रीमियर लीग जैसे टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया है। जबकि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने पहले संकेत दिया है कि राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी के लिए दरवाजे खुले हैं। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को ऐलान किया वह देश को सही राह पर लाने के वास्ते दिसंबर में स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

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उन्होंने कहा कि इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा के जोखिम का सामना करने को भी तैयार हैं। हसीना ने यह बात भारत आने के बाद पहली बार डिजिटल तरीके से आयोजित प्रेसवार्ता में कही। वह 5 अगस्त, 2024 को ढाका छोड़कर भारत आई थीं। तब से वह भारत में ही हैं। इस डिजिटल प्रेसवार्ता में पत्रकारों को केवल उनकी आवाज सुनाई दे रही थी। वह नजर नहीं आ रही थीं।

India-Myanmar territory: क्या म्यांमार से भारत करेगा अनसुलझे जमीन की अदला-बदली? सीमा विवाद को सुलझाने पर MEA का बड़ा बयान

India-Myanmar territory: भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक अनसुलझे हिस्से को लेकर बातचीत जारी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच सीमा के जिन क्षेत्रों का अभी तक सीमांकन नहीं हुआ है, उन्हें लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, भारत सरकार ने अनसुलझे जमीन की अदला-बदली की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन सूत्रों ने बताया कि भारत और म्यांमार मणिपुर में अपनी साझा सीमा के एक ऐसे हिस्से को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं जिसकी सीमा अभी तय नहीं हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान इससे जुड़े सवाल पर कहा, “सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है। उन क्षेत्रों पर बातचीत जारी है।” हालांकि, क्षेत्र के संभावित आदान-प्रदान की खबरों ने मणिपुर में नागरिक समाज समूहों के विरोध को जन्म दे दिया है, जिन्हें राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर चिंताएं हैं। चर्चा के तहत आने वाला यह हिस्सा लगभग 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में आता है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी (Kabaw Valley) से सटा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट में क्या दावा?

अमेरिका की मैगजीन ‘द डिप्लोमैट (The Diplomat)’ की 17 जुलाई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा के बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए करीब 1.4 वर्ग मील जमीन के संभावित आदान-प्रदान के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मई 2026 के एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा गया कि इस सीमांकन प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। यह इलाका करीब 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में स्थित है, जो म्यांमार की काबाव घाटी (Sagaing Region) से सटा हुआ है।

भारत-म्यांमार सीमा कितनी लंबी है?

भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। ये अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। यह सीमा पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों से होकर निकलती है, जहां कई जनजातीय समुदायों के दोनों देशों में पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार, इस सीमा में से करीब 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन सीमा स्तंभों (Boundary Pillars) के जरिए किया जा चुका है। जबकि लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अब भी अनसुलझा है। इनमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी के कुछ हिस्से शामिल हैं।

सीमा पर बाड़ लगाने की योजना

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित सीमांकन का उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग (बाड़) का काम पूरा करना है। ताकि अवैध घुसपैठ, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

साल 2024 में केंद्र सरकार ने पूरे 1,643 किलोमीटर लंबे भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र पर बाड़ लगाने और फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को समाप्त करने की घोषणा की थी। 2018 में लागू इस व्यवस्था के तहत सीमा से लगे जनजातीय समुदायों को बिना वीजा 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति थी।

1967 के समझौते के बाद भी बाकी हैं कुछ विवादित हिस्से

भारत और म्यांमार के बीच वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सीमा 1967 के द्विपक्षीय समझौते के तहत तय की गई थी। इसके बावजूद कुछ हिस्सों का सीमांकन आज भी पूरा नहीं हो सका है। सरकार ने साल 2018 में संसद को बताया था कि शेष क्षेत्रों का समाधान द्विपक्षीय सीमा तंत्र के माध्यम से किया जाएगा और इसके तहत नौ नए सीमा स्तंभ स्थापित किए जाने हैं।

मणिपुर में मोलचाम सेक्टर (पिलर 64-68), मोरेह सेक्टर (75-79) और चोरो खुन्नौ सेक्टर (88-95) को संवेदनशील माना जाता है। भारत का कहना है कि म्यांमार के साथ कोई व्यापक सीमा विवाद नहीं है। केवल कुछ सीमा स्तंभों का अंतिम निर्धारण होना बाकी है।

मणिपुर में शुरू हुआ विरोध

जमीन अदला-बदली की खबरों के सामने आने के बाद मणिपुर के कई नागरिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही साबित होती है और राज्य की जमीन का कोई हिस्सा म्यांमार को सौंपने की कोशिश की जाती है तो संगठन इसका कड़ा विरोध करेगा।

संगठन ने कहा कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं हो सकती। COCOMI का आरोप है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद राज्य पहले ही अपने ऐतिहासिक क्षेत्र का कुछ हिस्सा खो चुका है। अब किसी भी नई कटौती को स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार से बिना राज्य की जनता की सहमति के कोई फैसला नहीं लेने की मांग की है।

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मामले में बड़ी बातें

  • विदेश मंत्रालय ने केवल सीमा के अनसुलझे हिस्सों पर बातचीत की पुष्टि की है।
  • जमीन की अदला-बदली को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
  • मीडिया रिपोर्ट में 1.4 वर्ग मील भूमि के संभावित आदान-प्रदान का दावा किया गया है।
  • प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है।
  • केंद्र सरकार सीमा पर फेंसिंग कर अवैध घुसपैठ और उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाना चाहती है।
  • मणिपुर के नागरिक संगठनों ने किसी भी संभावित क्षेत्रीय हस्तांतरण का विरोध किया है।