विश्व हृदय दिवस 2026: दिल के संकेतों को अनदेखा न करें- डॉ. वत्सल कयाल

विश्व हृदय दिवस 2026: दिल के संकेतों को अनदेखा न करें- डॉ. वत्सल कयाल

Heart Attack

इंदौर। विश्व हृदय दिवस 2026 के अवसर पर यूनिक हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वत्सल कयाल ने लोगों से दिल की बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचानने और उन पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है।

 

डॉ. कयाल ने कहा, “दिल का दौरा कभी समय देखकर नहीं आता। मैंने अपने अनुभव में कई लोगों को इलाज में देरी करते देखा है। किसी को लगा कि तकलीफ अपने आप ठीक हो जाएगी, किसी ने उसे एसिडिटी समझा, तो किसी को लगा कि इस उम्र में दिल की बीमारी नहीं हो सकती। मेरा संदेश स्पष्ट है- दिल की तकलीफ को समय रहते पहचानें और उस पर तुरंत ध्यान दें।”

 

इस वर्ष विश्व हृदय दिवस का मुख्य संदेश “Don’t Miss a Beat” है। यह संदेश दिल की बीमारी के उन लक्षणों की ओर ध्यान दिलाता है जिन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। दिल के दौरे के दौरान सीने में दर्द, दबाव या भारीपन महसूस हो सकता है। इसके साथ ही सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना, जी मिचलाना अथवा बांह, पीठ और जबड़े में दर्द या खिंचाव भी हो सकता है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। यदि ऐसी कोई तकलीफ नई हो, लगातार बनी रहे या चिंता बढ़ा रही हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें; घर पर बैठकर इसके खुद-ब-खुद ठीक होने का इंतज़ार न करें।

 

डॉ. कयाल ने आगे बताया कि दिल की देखभाल किसी आपात स्थिति के आने से बहुत पहले ही शुरू हो जाती है। उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), मधुमेह (शुगर) और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ाते रहते हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, अपनी जांच रिपोर्ट को समझें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करें—भले ही आप पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हों।

 

हमारी दिनचर्या और आदतें भी दिल की सेहत पर गहरा असर डालती हैं। तंबाकू के किसी भी रूप से दूर रहें और दैनिक शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालें। अपने भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें तथा नमक और पैकेटबंद (प्रोसेस्ड) भोजन का सेवन कम करें। सभी बदलाव एक साथ करना आवश्यक नहीं है; रोज़ टहलना, खान-पान में एक अच्छा सुधार करना और समय पर स्वास्थ्य जांच कराना जैसी छोटी-छोटी शुरुआत भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।

 

विश्व हृदय दिवस के इस अवसर पर डॉ. कयाल ने परिजनों की सेहत का भी ध्यान रखने की सलाह दी। अपने प्रियजनों को ब्लड प्रेशर जांचने के लिए प्रेरित करें, तंबाकू छोड़ने में उनकी मदद करें और दिल के दौरे के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सीय कदम उठाएं।

 

अंत में डॉ. कयाल ने कहा, “दिल की सेहत रोज़मर्रा के छोटे-छोटे निर्णयों से बनती है, और किसी ख़तरे का संकेत मिलने पर समय पर लिया गया सही फैसला किसी की जान बचा सकता है।”

Varmora IPO Listing: जीरो GMP के बाद 4% का लिस्टिंग गेन, ढहते मार्केट में चमका ₹148 का टाइल शेयर

Varmora Granito IPO Listing: प्रीमियम टाइल कंपनी वरमोरा ग्रेनिटो के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और हर कैटेगरी के लिए आरक्षित हिस्सा पूरा भर नहीं पाया था। आईपीओ के तहत ₹148 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹152.00 और NSE पर ₹155.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 4% से अधिक तक का लिस्टिंग गेन (Varmora Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹159.35 (Varmora Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 7.67% मुनाफे में हैं। मार्केट में माहौल की बात करें तो शुरुआती कारोबार में आज हाहाकार मच गया और सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) आधे-आधे फीसदी से अधिक टूट गए।

Varmora Granito IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

वरमोरा ग्रेनिटो का ₹708 करोड़ का आईपीओ 22-24 सितंबर तक खुला था। इसे निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 1.60 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.10 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 0.94 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.02 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹320 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले ₹388 करोड़ के 2,62,17,634 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹245.00 करोड़ कंपनी और इसकी सब्सिडियरीज का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Varmora Granito के बारे में

वरमोरा ग्रेनिटो सेरामिक और विट्रीफाइड टाइल बनाती है। इसके प्रोडक्ट्स में ग्लेज्ड विट्रीफाइड टाइल्स (GVT), पॉलिश्ड विट्रीफाइड टाइल्स (PVT) और सेरामिक टाइल्स हैं। इसका फोकस प्रीमियम, टेक-ड्रिवेन टाइल्स पर बढ़ा है और वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में जीवीटी और टेक्निकल टाइल्स की हिस्सेदारी लगभग 84% थी।

कंपनी सिर्फ बाहर से टाइल्स खरीदकर नहीं बेच रही है बल्कि इसका बड़ा हिस्सा खुद यह बनाती है। इसके पास आठ मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं, जिसकी वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में 81.72% हिस्सेदारी है। कंपनी ने इनोवेटिव और प्रीमियम टाइल्स को लेकर इटली की SACMI के साथ तकनीकी साझेदारी की है और IST (इंटीग्रेटेड स्टोन टेक्नोलॉजी) को अपनाया है। इसके डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में 305 एक्स्लूसिव ब्रांड आउटलेट्स और 2758 मल्टी-ब्रांड आउटलेट्स हैं। यह भारत के साथ-साथ विदेशी में भी बिक्री करती है और बिल्डर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और डेवलपर्स को बी2बी सेल्स करती है। साथ ही यह सरकारी संस्थाओं को भी अपने माल बेचती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 में ₹44.94 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹30.77 करोड़ से इसका शुद्ध मुनाफा वित्त वर्ष 2026 में ₹55.09 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम लगातार बढ़ी और सालाना 3% की रफ्तार यानी सीएजीआर से बढ़कर ₹1,562.53 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹357.95 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹765.70 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Hero Motors Share Price: 10% के लोअर सर्किट पर शेयर, लेकिन लिस्टिंग प्राइस से अब भी यह 56% ऊपर

Hero Motors Share Price: फीके लिस्टिंग के बाद से लगातार तीन दिनों तक ऊपर चढ़ने के बाद हीरो मोटर्स के शेयर आज 28 सितंबर को धड़ाम हो गए। टूटकर यह लोअर सर्किट पर आ गया यानी कि मार्केट में इसके शेयरों का कोई खरीदार नहीं बचा। हालांकि फिर इसने रिकवरी की लेकिन अब भी यह काफी कमजोर है। लगातार तीन दिनों में आईपीओ प्राइस से करीब 69% मजबूत होने के बाद आज कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में मुनाफावसूली के चलते यह 10% के लोअर सर्किट ₹127.67 पर आ गया, जोकि आईपीओ प्राइस से 52% ऊपर है। निचले स्तर पर खरीदारी के साथ फिलहाल बीएसई पर यह 6.15% की गिरावट के साथ ₹133.12 पर है। मार्केट में माहौल की बात करें तो घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) आज 1-1% से अधिक नीचे आए।

अब तक कैसी रही हीरो मोटर्स के शेयरों की चाल

हीरो मोटर्स के ₹1000 करोड़ के आईपीओ के तहत आईपीओ निवेशकों को ₹84 के भाव पर शेयर जारी हुए थे, जिसकी पिछले हफ्ते 23 सितंबर, 2026 को 2% डिस्काउंट पर एंट्री हुई थी। हालांकि फिर इसने रिकवरी की और लगातार तीन कारोबारी दिनों में यह करीब 69% मजबूत हुआ। इसके बाद आज जब मार्केट खुला तो शेयरों की चाल ही पलट गई और टूटकर यह लोअर सर्किट पर आ गया। हालांकि यह लोअर सर्किट भी आईपीओ प्राइस से 52% और लिस्टिंग प्राइस से 56% प्रीमियम पर रहा।

Hero Motors IPO को कैसा मिला था रिस्पांस

ऑटो कंपोनेंट्स और एडवांस्ड मोबिलिटी मैन्युफैक्चरर हीरो मोटर्स ₹1000 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 16-18 सितंबर तक खुला था जो ओवरऑल 7.01 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इस आईपीओ के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं और बाकी ₹400 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं, जिसे प्रमोटर्स- ओपी मुंजाल होल्डिंग्स और हीरो साइकिल्स ने बेचे थे। कंपनी के सेहत की बात करें तो पिछले तीन वित्त वर्षों यानी FY2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 55% और टोटल इनकम 6% की रफ्तार से बढ़ा है।

NSE का शेयर टूटकर आया आईपीओ प्राइस के नीचे, खरीदारी का मौका या फटाफट बेच डालें होल्डिंग?

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Sanjay Gupta: एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का क्या? संजय गुप्ता ने रणबीर कपूर, रणवीर सिंह से लेकर विक्की कौशल के स्मोकिंग वाले पोस्टर्स पर उठाए सवाल

Sanjay Gupta: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने बॉलीवुड में हीरो की ऑन-स्क्रीन इमेज और खासकर पोस्टर्स में स्मोकिंग के लगातार इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। रविवार को डायरेक्टर ने संदीप रेड्डी वांगा की ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर, आदित्य धर की ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह और संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ में विक्की कौशल के पोस्टर्स शेयर किए, जिनमें तीनों एक्टर्स अपने-अपने लुक्स में स्मोकिंग करते हुए दिख रहे हैं।

X पर उन्होंने क्या कहा

संजय ने रविवार को X पर तीनों एक्टर्स का एक कोलाज शेयर किया। उनकी पोस्ट में उन एंटी-स्मोकिंग मैसेज पर सवाल उठाया गया, जो दर्शकों को थिएटर में फिल्मों से पहले और फिल्म के दौरान दिखाए जाते हैं, जबकि पोस्टर्स पर स्मोकिंग की इजाजत होती है। उन्होंने पूछा, “जब फिल्मों के पोस्टर्स ऐसे होते हैं तो फिल्मों से पहले और बीच में दिखाए जाने वाले उन बुरे एंटी-स्मोकिंग रील्स का क्या मतलब है, जिन्हें हमें झेलना पड़ता है?”

इस पोस्ट के बाद कमेंट्स में चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने गुप्ता की 2002 की फिल्म ‘कांटे’ का जिक्र किया और फिल्म के एक गाने की ओर इशारा किया, जिसमें स्मोकिंग का जिक्र है। यूजर ने लिखा, “हैरानी की बात है कि यह बात ‘कांटे’ फिल्म के डायरेक्टर कह रहे हैं, जिसकी एक फिल्म में गाना है – ‘सिगरेट के धुएं का छल्ला बनाकर, कॉलर को थोड़ा सा ऊपर चढ़ाकर’… कितनी अजीब बात है।”

उन्होंने सीधे उस कमेंट का जवाब देते हुए कहा कि उस समय स्मोकिंग से जुड़े नियम और लोगों तक पहुंचाए जाने वाले मैसेज अलग थे। उन्होंने लिखा, “तब स्मोकिंग न करने वाले विज्ञापन नहीं होते थे, जीनियस।”

इंटरनेट पर चर्चा हो गई शुरू

कई अन्य यूजर्स भी चर्चा में शामिल हुए और फिल्मों में स्मोकिंग के इस्तेमाल को लेकर फिल्ममेकर की चिंता से सहमत दिखे। एक व्यक्ति ने इस स्थिति की तुलना स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखते समय दर्शकों को दिखाई जाने वाली वॉर्निंग से की और लिखा, “यह एक मजाक है, यह नेटफ्लिक्स और एप्पल पर शो देखने और शराब पीने के बारे में वॉर्निंग मिलने जैसा है।”

एक अन्य यूजर ने भारतीय सिनेमा में सिगरेट और मर्दानगी के बीच बार-बार दिखाए जाने वाले संबंध पर सवाल उठाया। कमेंट में लिखा था, “क्योंकि इन लोगों को लगता है कि सिगरेट ही वो चीज है जो किसी आदमी को मर्दाना दिखाती है। यह क्रिएटिविटी की कमी है। भारत की सभी फिल्म इंडस्ट्रीज ‘मर्दानगी की चापलूसी’ का शिकार हैं। कंटेंट, कहानी और क्रिएटिविटी भाड़ में जाए।” एक और यूजर ने उनकी बात का समर्थन करते हुए लिखा, “पूरी तरह सहमत हूं, बिल्कुल सही बात है।”

CBFC के नए नियम

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब फिल्मों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर नियम कड़े किए जा रहे हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने स्क्रीन पर क्या दिखाया जा सकता है और कुछ विषयों को कैसे दिखाया जाना चाहिए, इसके लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर को सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत इन नए नियमों की घोषणा की। इन नियमों के तहत, नशीले पदार्थों को दिखाने वाली फिल्मों में ड्रग्स के ख़िलाफ चेतावनी दिखाना जरूरी कर दिया गया है। साथ ही, हिंसा, संवेदनशील विषयों और ऐसे कंटेंट पर पाबंदियों को भी दोहराया गया है, जो दूसरे देशों के साथ भारत के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं। ये बदलाव केंद्र सरकार द्वारा 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड के साथ CBFC के पुनर्गठन के साथ ही किए गए हैं।

सबसे बड़े बदलावों में से एक है उन फिल्मों के लिए जरूरी चेतावनी का नियम, जिनमें नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी को दिखाया जाता है। ऐसे दृश्यों में अब स्क्रीन पर यह संदेश दिखाना होग-: “अवैध नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”

रिटायरमेंट के बाद अगर आ जाए ₹40 लाख का मेडिकल खर्च तो क्या करेंगे? शख्स ने शेयर किया अनुभव

एक बुजुर्ग पड़ोसी की हार्ट सर्जरी पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होने की बात ने एक शख्स को अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया। अब तक उसे लगता था कि उसने भविष्य के लिए पर्याप्त तैयारी कर ली है, लेकिन इस घटना ने उसे अचानक आने वाले मेडिकल खर्च की चिंता से रूबरू करा दिया। उम्र बढ़ने के साथ इलाज और दवाइयों का खर्च कितना बढ़ सकता है, इसका अंदाजा इस मामले से लगा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर रिटायरमेंट के बाद अचानक लाखों रुपये के इलाज की जरूरत पड़ जाए, तो क्या हमारी बचत उसका बोझ उठा पाएगी?

80 की उम्र में आई बड़ी मेडिकल जरूरत

शख्स ने Reddit पर बताया कि उसके पड़ोसी की उम्र 80 साल से ज्यादा है और उन्हें हार्ट सर्जरी की जरूरत पड़ी। डॉक्टरों ने इलाज के दो विकल्प बताए थे। पहला पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का था, जिसमें जोखिम ज्यादा था। दूसरा कम इनवेसिव और अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प था, लेकिन इसकी कीमत काफी ज्यादा थी। उम्र को देखते हुए उनके लिए दूसरा विकल्प चुना गया। पड़ोसी का बेटा विदेश में रहता है और आर्थिक रूप से मदद करने की स्थिति में था, इसलिए महंगा इलाज संभव हो पाया।

40 लाख का खर्च देखकर हिल गई अपनी प्लानिंग

इस घटना ने उस व्यक्ति को सबसे ज्यादा इसलिए परेशान किया क्योंकि 40 लाख रुपये उसके अनुमानित सालाना खर्च से करीब दोगुना था। उसने सोचा कि अगर रिटायरमेंट के बाद अचानक इतना बड़ा मेडिकल बिल आ जाए, तो क्या उसकी बचत उसका सामना कर पाएगी? उसके मुताबिक, उसने अब तक अपनी रिटायरमेंट की तैयारी को काफी हद तक व्यवस्थित समझा था, लेकिन इस घटना ने उसे एक नया नजरिया दिया।

क्या सिर्फ सेविंग्स काफी हैं?

इस चर्चा में एक बड़ा सवाल यह उठा कि बुढ़ापे में मेडिकल खर्च के लिए कितनी रकम अलग रखनी चाहिए। कई लोगों ने सुझाव दिया कि रिटायरमेंट फंड के अलावा हेल्थ इंश्योरेंस और अलग मेडिकल इमरजेंसी फंड रखना भी जरूरी हो सकता है। कुछ यूजर्स ने बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस कवर की जरूरत पर जोर दिया, जबकि कुछ ने मेडिकल खर्च के लिए अलग से बड़ी रकम बचाने की बात कही।

लोगों ने दी अलग-अलग सलाह

Reddit पर चर्चा के दौरान एक यूजर ने सुझाव दिया कि उम्र बढ़ने के साथ पर्याप्त हेल्थ कवर होना चाहिए। दूसरे ने कहा कि मेडिकल जरूरतों के लिए अलग फंड बनाना समझदारी हो सकती है, ताकि अचानक आने वाला बड़ा खर्च रोजमर्रा की रिटायरमेंट जरूरतों को प्रभावित न करे। वहीं, कुछ लोगों ने इलाज के खर्च को कम करने के लिए अच्छी सेहत बनाए रखने और नियमित शारीरिक गतिविधि पर भी जोर दिया।

My neighbour who is in his 80s just had a heart surgery that cost around 40Lakhs. How do you even plan for something like this?

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u/GradeDry1283 in

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रिटायरमेंट प्लानिंग का एक और पहलू सामने आया

इस पूरी चर्चा ने ये सवाल जरूर खड़ा किया कि रिटायरमेंट की तैयारी केवल घर चलाने, यात्रा या रोजमर्रा के खर्च तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ सकती हैं और उनका खर्च काफी बड़ा हो सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Video: 5,700 पौधों से भर दिया पूरा घर, इस पाकिस्तानी शख्स ने आखिर क्यों उठाया ये कदम?

रिपोर्ट- अस्पताल के मलबे से मिले थे मुजतबा खामेनेई:जहां भर्ती थे अमेरिका ने वहीं हमला किया; खुद को पता नहीं था सुप्रीम लीडर बन गए

ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को अमेरिकी हमले के बाद अस्पताल के मलबे से निकाया गया था। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट ने ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य मोहसेन हैदरी के हवाले से यह रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के शुरुआती हमले में मुजतबा घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें तेहरान के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद अमेरिका ने इस अस्पताल पर भी हमला कर दिया। हैदरी के मुताबिक खामेनेई को अस्पताल के मलबे से निकालकर अज्ञात जगह ले जाया गया। तब से खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। हालांकि 8 अगस्त को एक वीडियो सामने आया था जिसमें वे लोगों से बात करते हुए दिखाई दिए थे। इतना ही नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम लीडर चुने जाने की जानकारी भी उन्हें खुद नहीं थी। ईरानी टीवी पर घोषणा होने के बाद उन्हें अपने सुप्रीम लीडर बनने की खबर मिली। चुनाव के दौरान असेंबली पर भी हमले का दावा ईरान में सुप्रीम लीडर चुनने की जिम्मेदारी एक्सपर्ट्स असेंबली की होती है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, हमलों के दौरान इस संस्था के कोम स्थित सचिवालय को भी निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बमबारी में 8 लोगों की मौत हुई और नए सुप्रीम लीडर के चयन से जुड़े दस्तावेज नष्ट हो गए। इसके बाद असेंबली के सदस्यों ने कागज पर वोट लिखे और एक गुप्त कमरे में जाकर चुनाव की प्रक्रिया पूरी की। हैदरी ने कहा कि मुजतबा खामेनेई का नाम सबसे पहले उन्होंने ही प्रस्तावित किया था। उनके मुताबिक, असेंबली को जानकारी मिली थी कि मुजतबा सुरक्षित हैं और नेतृत्व संभाल सकते हैं। इसलिए उन्हें नया सुप्रीम लीडर चुना गया। मुजतबा के पक्ष में 50 सदस्यों ने वोट किया था न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार, 59 में से 50 सदस्यों ने मुजतबा के पक्ष में वोट दिया। अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को 8 वोट मिले, जबकि एक सदस्य ने मतदान नहीं किया। हैदरी ने मुजतबा खामेनेई को ‘परदे के पीछे रहने वाला व्यक्ति’ बताया। सुप्रीम लीडर बनने से पहले उन्होंने कोई बड़ा सरकारी या राजनीतिक पद नहीं संभाला था। इसके बावजूद उनके पिता के कार्यालय, IRGC और सुरक्षा तंत्र में मजबूत संपर्क माने जाते थे। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के आखिरी दौर में IRGC में सेवा की थी। 2009 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनका नाम सत्ता के भीतर प्रभाव रखने वाले नेताओं में सामने आया था। अमेरिका ने 2019 में उन पर प्रतिबंध लगाया था। मुजतबा की हालत को लेकर अलग-अलग दावे मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर कई तरह के दावे सामने आते रहे हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, कुछ अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि हमलों में उनका चेहरा बुरी तरह घायल हो गया था। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि मुजतबा की मौत हुई है। ट्रम्प के मुताबिक, उनके शरीर के बाएं हिस्से, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई थीं। वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इसी हफ्ते फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि मुजतबा पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि पिछले महीने उनकी मुजतबा के साथ करीब 7 घंटे लंबी मुलाकात हुई थी। ईरान में सुप्रीम लीडर लेते हैं बड़े फैसले ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे ताकतवर पद है। वे देश की बड़ी नीतियां तय करते हैं और सेना, सुरक्षा और न्यायपालिका जैसे अहम मामलों में सबसे बड़ा फैसला लेते हैं। राष्ट्रपति सरकार से जुड़े काम देखते हैं ईरान का राष्ट्रपति देश की सरकार चलाते हैं। वे मंत्रियों के साथ मिलकर रोजमर्रा के सरकारी काम, अर्थव्यवस्था, बजट और प्रशासन जैसे मामलों को देखते हैं। लेकिन राष्ट्रपति देश के सबसे बड़े फैसले अकेले नहीं ले सकते। उन्हें सुप्रीम लीडर की तय की गई बड़ी नीतियों के मुताबिक काम करना होता है। ——————————— यह खबर भी पढ़ें… ईरान बोला-फिर हमला हुआ तो युद्ध हिंद महासागर तक फैलेगा: इससे भारत-चीन पर असर ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

Vinod Kambli कभी जिसके बल्ले से होती थी चौके-छक्कों की बरसात अब वृद्धाश्रम में रहने को है मजबूर, देखें एक्स पर कांबली का भावुक वीडियो

भारतीय क्रिकेट प्रेमी शायद ही Vinod Kambli का नाम कभी भूल सकते हैं। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के दोस्त विनोद कांबली का एक वीडियो आजकल चर्चा है। लोग इस वीडियो को देखकर हैरान हैं और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। उनके इस वीडियो से पता चल रहा है कि वो एक वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर है। माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट एक्स पर पोस्ट इस वीडियो में भावुक नजर आ रहे कांबली वृद्धाश्रम में सुविधाओं की खूब तारीफ कर रहे हैं।

हाल ही में पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी की सेहत को लेकर काफी चिंताजनक खबरें आई थीं। उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्हें डंडे के सहारे चलते हुए देखा गया था। उनका ये वीडियो चर्चा का विषय बना था। उनको लेकर लगातार ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं कि उनकी सेहत ठीक नहीं है। उनकी आर्थिक स्थिति भी दयनीय होने की खबरें मीडिया में आती रही हैं। एका बाद वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से नौकरी मांगते हुए भी दिखाई दिए थे। अब उनके नए वीडियो ने एक बार फिर उनके स्वास्थय की चर्चा बढ़ा दी है।

क्या वृद्धाश्रम में रह रहे हैं कांबली?

पूर्व भारतीय क्रिकेटर, जो दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के दोस्त हैं, उनका ताजा वीडियो सामने आया है। दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, इसमें वे वृद्धाश्रम में नजर आ रहे हैं। उन्होंने वहां पर मिलने वाली सुविधाओं और लोगों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा, “मैं इस समय निदान में हूं। मैं यही कहना चाहूंगा कि यहां पर सभी सुविधाएं बहुत अच्छी हैं। यहां की साफ-सफाई और बाकी चीजें शानदार है। मुझे यहां पर रहते हुए ये कभी भी महसूस नहीं होता है कि मैं अपने घर पर नहीं हूं। यहां के लोगों से मुझे बहुत ही मान सम्मान मिल रहा है।”

17 टेस्ट और 104 वनडे मैचों में रहे शामिल

कांबली को एक होनहार खिलाड़ी के रूप में जाना जाता था। हालांकि, वे अधिक समय तक इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेल सके। उन्होंने भारत के लिए 17 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 54 की बेहतरीन औसत के साथ 1084 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से चार शतक भी निकले। उन्हें वनडे में अधिक मौके मिले लेकिन वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके। कांबली ने 104 वनडे मैचों में 32 की औसत के साथ 2477 रन बनाए, जिसमें मात्र दो शतक शामिल रहे।

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White House Dinner: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में आयोजित व्हाइट हाउस स्टेट बैंकवेट की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। टेक और वॉल स्ट्रीट के दिग्गजों से सजी इस दावत से जुड़ी दो ऐसी बातें और तस्वीरें सामने आई हैं, जो इंटरनेट पर तेजी से ट्रेंड कर रही हैं।

डिनर टेबल पर जिनपिंग की ‘थर्मस’ बनी चर्चा का विषय

व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में सजी भव्य रेड-थीम वाली मुख्य टेबल पर मेहमानों का ध्यान एक अनोखी चीज ने खींचा। टेबल पर महंगी वाइन ग्लासेज और शाही क्रॉकरी के बीच दो थर्मस बोतलें रखी दिखाई दीं। एक काले रंग की और दूसरी सफेद रंग की।तस्वीरों के मुताबिक, काली थर्मस बोतल शी जिनपिंग के पास और सफेद थर्मस बोतल उनकी पत्नी पेंग लियुआन के पास रखी थी।

चीन में पारंपरिक रूप से सेहत के लिए गुनगुना या गर्म पानी पीना दैनिक जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है। सोशल मीडिया पर यूजर चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि ‘शायद जिनपिंग इसमें गोजी बेरीज (Goji Berries) या अपनी खास ग्रीन टी लेकर आए थे।’

वैसे कूटनीतिक हलकों में विदेशी दौरों पर राष्ट्राध्यक्षों द्वारा अपना पानी या चाय इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन व्हाइट हाउस के आधिकारिक स्टेट डिनर की टेबल पर थर्मस का इस तरह नजर आना लोगों को काफी दिलचस्प लगा।

‘चलो कंस्ट्रक्शन साइट देखने चलते हैं…’ ट्रंप के बयान पर लगे ठहाके

डिनर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने खास अंदाज में माहौल को हल्का-फुल्का बनाते नजर आए। ट्रंप ने शी जिनपिंग को अमेरिका के राष्ट्रीय प्रतीक ‘बाल्ड ईगल’ (Bald Eagle) की एक खास मूर्ति भेंट की।

अपने टोस्ट स्पीच के दौरान ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस का मौजूदा बैंक्वेट हॉल काफी छोटा पड़ता है, इसलिए वह $400 मिलियन की लागत से 1,000 लोगों की क्षमता वाला नया विशाल बॉलरूम बनवा रहे हैं।

ट्रंप ने मुस्कुराते हुए शी जिनपिंग और वहां मौजूद मेहमानों को आमंत्रित किया कि ‘डिनर के बाद चलिए, चलकर नए बॉलरूम की कंस्ट्रक्शन साइट देखते हैं, आप लोग इसके फर्श पर कदम रखने वाले पहले इंसान होंगे।’

जैसे ही दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के डिनर के बाद ‘कंस्ट्रक्शन साइट का मुआयना’ करने की बात सामने आई, टेबल पर बैठे एलन मस्क, टिम कुक, जेन्सन हुआंग और सैम ऑल्टमैन समेत तमाम बड़े उद्योगपति ठहाका लगाकर हंस पड़े।

White House Dinner

टेक जगत के दिग्गजों की रही मौजूदगी 

यह डिनर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सिलिकॉन वैली के लगभग सभी बड़े चेहरे मौजूद थे। टेस्ला के एलन मस्क, एपल के टिम कुक, एनवीडिया के जेन्सन हुआंग, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, गूगल के सुंदर पिचाई और मेटा के मार्क जुकरबर्ग जैसे दिग्गजों ने इसमें शिरकत की।

कोई कानून से ऊपर नहीं… सेलिब्रिटी और स्टार्स के लिए FDA चीफ तुकाराम मुंढे ने फिर कह दी सीरियस बात

22 सितंबर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मशहूर फिल्म आर्टिस्ट की जिम्मेदारी पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि पॉपुलर आर्टिस्ट का युवाओं की सोच पर गहरा असर होता है। उनके मुताबिक, एक सच्चे स्टार को समाज में अच्छी सोच और पॉजिटिविटी फैलाने की कोशिश करनी चाहिए।

तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष

राष्ट्रपति की अपील के बाद तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि आर्टिस्ट का लोगों पर असर होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कानून का उल्लंघन करें। उन्होंने आर्टिस्ट से कहा कि उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए और ऐसे उत्पादों या आदतों का प्रचार नहीं करना चाहिए, जो लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

महाराष्ट्र में जारी हो चुके हैं नोटिस

मुंडे ने बताया कि महाराष्ट्र में FDA पहले ही कुछ ऐसे आर्टिस्ट को नोटिस जारी कर चुका है। उन्होंने बताया कि जब किसी पॉपुलर चेहरे का इस्तेमाल खाने-पीने या दूसरे उत्पादों के प्रचार के लिए किया जाता है, तो उसके स्वास्थ्य से जुड़े असर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किए थे। आर्टिस्ट ने विमल इलायची का विज्ञापन किया था। FDA का कहना था कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन का है। जिसके कारण आर्टिस्ट के विज्ञापन को लेकर कार्रवाई की गई थी।

मुंडे ने कहा कि किसी आर्टिस्ट की पॉपुलैरिटी उसे कानून से ऊपर नहीं बनाती। उनके मुताबिक, कलाकारों को भी दूसरे लोगों की तरह कानून का पालन करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उनके प्रचार का लोगों की पसंद और आदतों पर असर पड़ सकता है। खासकर खाने-पीने की चीजों के प्रचार में लोगों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

Kheria Autocomp IPO Listing: 3% का लिस्टिंग गेन, कंपनी बनाती है टाटा वेंडर पार्क में ऑटो पार्ट्स

Kheria Autocomp IPO Listing: तेल से चलने वाली और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए प्लास्टिक पार्ट्स बनाने वाली खेरिया ऑटोकॉम्प शेयरों की आज NSE SME पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल करीब ढाई गुना बोली मिली थी। इसके आईपीओ के तहत ₹101 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज NSE SME पर इसकी ₹104.90 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 3.86% का लिस्टिंग गेन (Kheria Autocomp Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में हल्की फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹104.50 (Kheria Autocomp Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 3.47% मुनाफे में हैं।

Kheria Autocomp IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

खेरिया ऑटोकॉम्प का ₹46 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 17-21 सितंबर तक खुला था। यह आईपीओ ओवरऑल 2.48 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.05 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.97 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.08 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 45,98,400 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹39.96 करोड़ नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, ₹1.43 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹5.06 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Kheria Autocomp के बारे में

खेरिया ऑटोकॉम्प गाड़ियों के पार्ट्स बनाती है। यह प्लास्टिक इंजेक्शन मोल्डिंग तकनीक के जरिए प्लास्टिक को ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाती है। हालांकि यह सीधे पैसेंजर गाड़ियां बनाने वाली कंपनियों को माल नहीं बेचती है यानी कि यह टियर-2 सप्लायर है। इसके प्रोडक्ट्स की बात करें तो यह केबिन ट्रिम, कार के बाहर इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के पार्ट्स, बोनट के नीचे इंजन कंपार्टमेंट में लगने वाले कंपोनेंट्स, एसी और वेंटिलेशन सिस्टम के लिए प्लास्टिक डक्ट्स बनाती है तो अलग-अलग कंपोनेंट्स जोड़कर एक एसेंबली बनाती है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी गुजरात में टाटा वेंडर पार्क में है। इस फैसिलिटी में 30 इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन हैं, जिसकी क्षमता 120-1700 टन है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 86% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹11.42 करोड़ और टोटल इनकम करीब 39% के सीएजीआर से ₹120.30 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹35.03 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹28.27 करोड़ पड़े थे।

NSE IPO Listing: ₹1800 पर लिस्ट एनएसई का ₹1785 का शेयर, 1% से कम लिस्टिंग गेन

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।