Gen Z रिटायरमेंट प्लानिंग में दूसरों से काफी आगे, एक्सिस मैक्स लाइफ सर्वे के दिलचस्प नतीजे

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड ने 16 सितंबर को कांतार के साथ मिलकर किए गए अपने सालाना ‘भरोसा टॉक्स इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी’ के छठे एडिशन (आइरिस 6.0) के नतीजे जारी किए। यह स्टडी शहरी भारत में रिटायरमेंट के बारे में सोच में आए एक बड़े बदलाव को दिखाती है।

लोग रिटायरमेंट के बारे में जल्द सोचने लगे हैं

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अब पहले से कहीं ज्यादा भारतीय जल्दी रिटायर होना चाहते हैं और रिटायरमेंट के बारे में जल्दी सोचना भी शुरू कर रहे हैं। हालांकि स्टडी में यह भी सामने आया कि इच्छा से लेकर तैयारी तक का फाइनेंशियल सफर अभी भी काफी लंबा है।

जल्द रिटायर करने की बढ़ रही है चाहत

‘भरोसा टॉक्स आइरिस’ के छठे एडिशन से यह बात सामने आई है कि अगर आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाएं, तो 10 में से 7 शहरी भारतीय 58-60 साल की उम्र से पहले ही रिटायर होना चाहेंगे। रिटायर होने की चाहत रखने वालों में से आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले ही ‘फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस एंड रिटायर एर्ली’ (एफआईआरई) का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल लोगों ने अपने रिटायरमेंट के लिए तय किए गए अपने फंड का औसतन सिर्फ 28 प्रतिशत ही अब तक जमा किया है।

रिटायरमेंट के लिए पैसे जुटाना एक चुनौती

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ सुमित मदान ने कहा, “भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि कई भारतीयों के लिए रिटायरमेंट अभी भी एक फाइनेंशियल चुनौती है। स्टडी में सामने आया है कि जेन एक्स+ के 82 प्रतिशत लोगों को लगता है कि लगातार इनकम के लिए उन्हें काम करते रहना पड़ेगा। इस डर से एक अहम सच्चाई सामने आई है: ‘रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ एक खास उम्र तक पहुंचना नहीं होता है, बल्कि आगे क्या करना है, यह चुनने की फाइनेंशियल आजादी भी होनी चाहिए।’

मन की शांति सुरक्षित रिटायरमेंट का असल मतलब

अब युवा अपनी रिटायरमेंट की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर रहे हैं। यह रिएक्टिव प्लानिंग से प्रोएक्टिव तैयारी की ओर बदलाव का संकेत है। असली चुनौती लोगों के इरादे को फाइनेंस, हेल्थ और इमोशनल वेलबीइंग के मामले में लगातार एक्शन में बदलने की है, क्योंकि असल में आजादी, पसंद और मन की शांति ही सुरक्षित रिटायरमेंट का असली मतलब है।

अलग-अलग पीढ़ियों में बदल रही रिटायरमेंट प्लानिंग

कांतार की साउथ एशिया की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ क्लाइंट ऑफिसर सौम्या मोहंती ने कहा, “भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 से पता चलता है कि अलग-अलग पीढ़ियों और इलाकों में रिटायरमेंट प्लानिंग का तरीका बदल रहा है। युवा भारतीय अब रिटायरमेंट प्लानिंग जल्दी शुरू कर रहे हैं। रिटायरमेंट की तैयारी में सेहत का ध्यान रखना भी अहम हो गया है।

टियर-2 शहरों में भी बेहतर हुई रिटायरमेंट प्लानिंग

उन्होंने कहा कि 59 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से या कभी-कभी हेल्थ चेक-अप करवाते हैं। इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से 44 प्रतिशत लोग रोजाना ऐसा करते हैं। टियर-2 शहरों में भी रिटायरमेंट की तैयारी बेहतर हुई है, जो शहरी भारत में रिटायरमेंट को लेकर लोगों के बीच व्यापक बातचीत का संकेत है।”

 62 फीसदी जेन जी ने शुरू की रिटायरमेंट प्लानिंग

जेन जी के 62 प्रतिशत लोगों ने रिटायरमेंट के लिए निवेश करना शुरू कर दिया है, जबकि मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और जेन एक्स+ में 75 प्रतिशत है। 61 प्रतिशत लोग जानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में अपनी मौजूदा जीवनशैली बनाए रखने के लिए उन्हें कितनी रकम की जरूरत होगी, लेकिन उन्हें इस बात का पूरा भरोसा नहीं है कि यह रकम काफी होगी। सिर्फ 11 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी रिटायरमेंट की बचत जिंदगी भर चलेगी। 39 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी बचत पांच साल भी नहीं चल पाएगी।

रिटायरमेंट फंड को लेकर भी बदल रही सोच

रिटायरमेंट के लिए कितनी रकम (कॉर्पस) काफी है, इसे लेकर भी लोगों की सोच बदल रही है। आरामदायक रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ रुपये या उससे कुछ कम की रकम को ही काफी मानने वालों की संख्या 7 प्रतिशत कम हुई है। 2025 में ऐसा मानने वाले 77 प्रतिशत थे, जो 2026 में 70 प्रतिशत हो गए। यह सोच उन लोगों में खास तौर पर कम है जिनकी सालाना घरेलू आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है। इस आय स्तर पर ऐसा मानने वाले 51 प्रतिशत हैं, जबकि मेट्रो शहरों में रहने वालों में ऐसा मानने वाले 63 प्रतिशत हैं।

52 फीसदी लोगों ने लिया हेल्थ इंश्योरेंस

75 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में सेहतमंद और फिट रहेंगे। वर्तमान समय में 52 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस लिया है और जो लोग नियमित तौर पर शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से 44 प्रतिशत लोग रोजाना ऐसा करते हैं। इसके अलावा, 21 प्रतिशत लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं।

खुल गया ₹1000 करोड़ का Hero Motors IPO, पैसे लगाने से पहले चेक करें डिटेल्स और ब्रोकरेजेज का रुझान

Hero Motors IPO: ऑटो कंपोनेंट्स और एडवांस्ड मोबिलिटी मैन्युफैक्चरर हीरो मोटर्स का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुल चुका है। ₹1000 करोड़ का आईपीओ खुलने से पहले ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनाी समेत 15 एंकर निवेशकों से यह ₹300 करोड़ जुटा चुकी हैं, जिन्हें प्रति शेयर ₹84 के भाव पर 3.57 करोड़ शेयर जारी हुए हैं। अब ग्रे मार्केट में बात करें तो आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से यह ₹10 यानी 11.90% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स के आधार पर ही किसी आईपीओ में निवेश से जुड़ा फैसला लेना चाहिए।

Hero Motors IPO: डिटेल्स

हीरो मोटर्स का ₹1000 करोड़ का आईपीओ आज 16 सितंबर को खुला है और 18 सितंबर तक खुला रहेगा। इस इश्यू में ₹79-₹84 के प्राइस बैंड और 178 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। इस इश्यू के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे तो ₹10 की फेस वैल्यू वाले ₹400 करोड़ के शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री होगी। ऑफर फॉर सेल के बाद कंपनी में प्रमोटर्स की होल्डिंग 85.57% से घटकर 61.63% रह जाएगी। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का एलॉटमेंट 21 सितंबर को फाइनल होगा जिसके बाद बीएसई और एनएसई पर 23 सितंबर को इसकी लिस्टिंग होगी। इसका रजिस्ट्रार केफिन टेक है।

अब आईपीओ के पैसों के इस्तेमाल की बात करें तो ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स ओपी मुंजाल होल्डिंग और हीरो साइकिल्स को मिलेगा। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹190.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹200 करोड़ इक्विपमेंट्स की खरीदारी और बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

हीरो मोटर्स के बारे में

हीरो मोटर्स एक ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह भारत के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और एशियन की गाड़ी कंपनियों के लिए पावरट्रेन सॉल्यूशंस तैयार कर मुहैया कराती है। यह दोपहिया से लेकर ई-बाइक, पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियां, ऑफ-रोड वेईकल्स और ईवीटोल्स के लिए सर्विसेज देती है। इसकी ग्राहक बीएमडब्ल्यू एजी, डुकाटी मोटर होल्डिंग, और हमिंगबर्डईवी जैसी दिग्गज कंपनियां हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 55% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹41.17 करोड़ और टोटल इनकम 6% के सीएजीआर से ₹1,216.74 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹400.79 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹116.32 करोड़ पड़े थे।

Hero Motors IPO: क्या है ब्रोकरेजेज की राय

SBI Securities

ब्रोकरेज फर्म एसबीआई सिक्योरिटीज ने हीरो मोटर्स के आईपीओ को न्यूट्रल रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि वह लिस्टिंग के बाद कुछ तिमाहियों तक कंपनी के कामकाज पर नजर रखना चाहेगी।

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से कंपनी का वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2026 के लिए 83.8x P/E पर है जो इसकी कम रेवेन्यू ग्रोथ और कुछ ही बड़े ग्राहकों पर निर्भरता को देखते हुए दूसरी कंपनियों के मुकाबले महंगा है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कंपनी की तकनीकी क्षमताओं के साथ-साथ ई-मोबिलिटी और फोर्ज्ड कंपोनेंट्स में विस्तार उम्मीद जगाती हैं लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन में भविष्य की ग्रोथ को पहले ही शामिल कर लिया गया है।

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू का 61.4% हिस्सा सिर्फ पांच ग्राहकों से आया। ऐसे में इन ग्राहकों की मांग और सोर्सिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव का इसके बिजनेस पर असर दिख सकता है।

Anand Rathi

ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी का मानना है कि आईपीओ फुल्ली प्राइस्ड है लेकिन इसे लॉन्ग टर्म के लिए सब्सक्राइब रेटिंग दी है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हीरो मोटर्स ने इलेक्ट्रिक और नॉन-इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एप्लीकेशन के लिए तैयार किए गए पावरट्रेन सॉल्यूशन पर फोकस करके ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई है। डिजाइन, इंजीनियरिंग, प्रोटोटाइपिंग, वैलिडेशन और मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटीज के दम पर यह ऑटोमोटिव ओईएम को सिस्टम-लेवल और कंपोनेंट-लेवल सॉल्यूशन मुहैया कराती है।

हीरो मोटर्स के पोर्टफोलियो में सीवीटी, ईवी ट्रांसमिशन, इलेक्ट्रिक मोटर, ड्राइव यूनिट और गियर सेट शामिल हैं।

हीरो मोटर्स की ई-बाइक पावरट्रेन मार्केट में भी मजबूत स्थिति है। यह भारत से ई-बाइक बनाने वाली कंपनियों को CVT हब बनाने और निर्यात करने वाली इकलौती कंपनी है। ह्यूलैंड (Hewland) में निवेश से हीरो मोटर्स की ट्रांसमिशन डिजाइन और प्रोटोटाइपिंग क्षमताएं मजबूत हुई हैं तो यामाहा मोटर कंपनी लिमिटेड के साथ इसके जॉइंट वेंचर से कंपनी की इलेक्ट्रिक मोटर क्षमताओं को बढ़ावा मिला है।

हीरो मोटर्स की फैसिलिटीज भारत के साथ-साथ यूके और थाईलैंड में भी हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kanohar Electricals IPO Listing: 8% प्रीमियम पर लिस्ट ₹632 का शेयर, रॉकेट की स्पीड से बढ़ रहा कनोहर का बिजनेस

Kanohar Electricals IPO Listing: ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कनोहर इलेक्ट्रिकल्स के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 90 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹632 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹672.05 और NSE पर ₹685.50 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 8% तक का लिस्टिंग गेन (Kanohar Electricals Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹706.25 (Kanohar Electricals Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 11.75% मुनाफे में हैं।

Kanohar Electricals IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

कनोहर इलेक्ट्रिकल्स का ₹1,056 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 8-10 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 90.59 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 215.37 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 87.74 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 20.51 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹300 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले 1,19,57,915 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹64.18 करोड़ कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरतों, ₹155.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की बढ़ी जरूरतों, ₹55.50 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹65.25 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Kanohar Electricals के बारे में

कनोहर इलेक्ट्रिकल्स देश में ट्रांसफॉर्मर्स बनाती है। यह पावर ट्रांसमिशन, रेलवेज, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर डिस्ट्रीब्यूशन जैसी इंडस्ट्रीज को इनकी सप्लाई करती है। इसका कारोबार मुख्य रूप से दो बिजनेस सेगमेंट्स में है- ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग और EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्यूरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन)। यह 100 MVA 132 kV स्कॉट ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली उन चार कंपनियों में शुमार है, जिसे रेलवे के R&D से मान्यता मिली हुई है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 170% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹129.73 करोड़ और टोटल इनकम करीब 54% के सीएजीआर से ₹662.86 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹39.04 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹357.95 करोड़ पड़े थे।

 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Manika Plastech IPO: 26% लिस्टिंग गेन का इशारा! 4x से ज्यादा हुआ सब्सक्राइब, बोली लगाए या नहीं? जानें

Manika Plastech IPO: प्लास्टिक पैकेजिंग प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी मानिका प्लास्टेक के ₹125.50 करोड़ के आईपीओ में दांव लगाने का आज दूसरा दिन है। शेयर बाजार में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों की तरफ से काफी अच्छा रिस्पांस देखने को मिल रहा है।

सोमवार, 15 सितंबर सुबह 11 बजे तक यह आईपीओ कुल मिलाकर 3.8 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। वहीं, अनौपचारिक ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर मजबूत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जो पहले ही दिन निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन मिलने का इशारा कर रहे हैं।

सब्सक्रिप्शन को लेकर रिटेल और NII निवेशकों में ज्यादा उत्साह

11 सितंबर को खुले इस आईपीओ को पहले ही दिन निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया और यह 1.42 गुना सब्सक्राइब होकर पूरी तरह भर गया था। दूसरे दिन सुबह 11 बजे तक के आंकड़े इस प्रकार हैं:

रिटेल निवेशक (RIIs): 5.45 गुना सब्सक्रिप्शन

गैर-संस्थागत निवेशक (NIIs): 4.37 गुना सब्सक्रिप्शन

संस्थागत निवेशक (QIBs): 35% (0.35 गुना) सब्सक्रिप्शन

वैसे अमूमन बड़े संस्थागत निवेशक (QIBs) आईपीओ के आखिरी दिन ही अपनी बोलियां लगाते हैं, इसलिए आने वाले समय में इसके आंकड़े और ऊपर जा सकते हैं।

कंपनी क्या करती है और पैसों का क्या करेगी?

मुंबई बेस्ड यह कंपनी प्रिसिजन-इंजीनियर रिजिड पॉलिमर्स बनाती है। यह बैटरियों के प्लास्टिक केसिंग, बाल्टियां और पतली दीवारों वाले कंटेनर बनाती है, जिसका इस्तेमाल ऑटोमोटिव, पेंट्स, एग्रोकेमिकल्स, कंस्ट्रक्शन और फूड-डेयरी इंडस्ट्रीज में होता है।कंपनी के देशभर में 7 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 29,200 MTPA है।

आईपीओ के फ्रेश इश्यू से मिलने वाले पैसों में से ₹54.9 करोड़ का इस्तेमाल नए प्लांट व मशीनरी खरीदने में किया जाएगा, जबकि ₹15 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में होगा।

कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत?

जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही (Q1 FY27) में कंपनी ने ₹162.4 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जिस पर उसे ₹13 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ। आपको बता दें कि आम लोगों के लिए आईपीओ खुलने से ठीक पहले, 10 सितंबर को कंपनी ने ट्रस्ट म्यूचुअल फंड समेत 4 एंकर निवेशकों से ₹37.6 करोड़ जुटा लिए थे।

लिस्टिंग पर कितना हो सकता है मुनाफा?

ग्रे मार्केट गतिविधियों पर नजर रखने वाली वेबसाइटों के मुताबिक, मानिका प्लास्टेक के शेयर 16% से लेकर 26% तक के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। ‘IPO Watch’ के अनुसार, इसका जीएमपी लगभग 25.58% के प्रीमियम को दर्शा रहा है। वहीं ‘Investorgain’ के मुताबिक, इसका जीएमपी ₹7 चल रहा है, जो करीब 16.28% के लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। अगर यही रुझान बना रहता है, तो 21 सितंबर को बाजारों में इसके शेयरों की एंट्री के साथ निवेशकों को पहले ही दिन 26% तक का तगड़ा मुनाफा हो सकता है।

क्या है एक्सपर्ट की राय?

स्मॉल और मिड-कैप पैकेजिंग सेगमेंट में मानिका प्लास्टेक का ट्रैक रिकॉर्ड और वित्तीय नतीजे मजबूत नजर आ रहे हैं। अगर आप लिस्टिंग गेन के साथ-साथ पैकेजिंग सेक्टर की ग्रोथ में लंबी अवधि के लिए दांव लगाना चाहते हैं, तो यह आईपीओ एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। वैसे, ग्रे मार्केट प्रीमियम में समय-समय पर उतार-चढ़ाव आता रहता है, इसलिए अंतिम फैसला अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Apana Logistics IPO Listing: खुदरा निवेशकों को बड़ा झटका, ताबड़तोड़ लगाया पैसा, अब ₹60 का शेयर फ्लैट लिस्ट

Apana Logistics IPO Listing: कंटेनर्स को हैंडल करने वाली अपाना लॉजिस्टिक्स के शेयर की आज BSE SME पर फ्लैट एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का फीका रिस्पांस मिला था और NII (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) का हिस्सा तो पूरा भर भी नहीं पाया था। आईपीओ के तहत ₹60 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹60.00 पर ही एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर इसी लेवल पर बना हुआ है। फिलहाल यह ₹60.00 (Apana Logistics Share Price)  पर है यानी कि आईपीओ निवेशक न फायदे में हैं और न घाटे में।

Apana Logistics IPO को मिला था फीका रिस्पांस

अपाना लॉजिस्टिक्स का ₹34 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 7-9 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और खुदरा निवेशकों के दम पर ओवरऑल यह 1.26 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 0.28 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.23 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 54 लाख नए शेयर जारी हुए हैं।

Apana Logistics के बारे में

अपाना लॉजिस्टिक्स कंटेनर्स की हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टेशन का काम करती है। यह कई तरह की लॉजिस्टिक्स सर्विसेज देती है जैसे कि सीएफएस (कंटेनर फ्रेट स्टेशन), आईसीडी (इनलैंड कंटेनर डिपोट) और पोर्ट्स पर कंटेनर हैंडलिंग; रोड ट्रांसपोर्टेशन, थर्ड पार्टी वेयरहाउसेज पर कार्गो हैंडलिंग। इसके अलावा यह ट्रक-ट्रेलर्स और रीच स्टैकर्स के O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) का काम भी संभालती है। मार्च 2026 तक इसके बेड़े में 33 ट्रक-ट्रेलर्स, 5 रीच स्टेकर्स और 2 क्रेन्स थे।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 40% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹5.86 करोड़ और टोटल इनकम करीब 24% के सीएजीआर से ₹31.07 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹6.30 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹8.45 करोड़ पड़े थे।

Pranav Constructions IPO Listing: 126 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 33% का लिस्टिंग गेन, लगातार मजबूत हो रही सेहत

Moneyview IPO में अब ₹750 करोड़ के ही नए शेयर होंगे जारी, बिना नया ड्राफ्ट फाइल किए मिली मंजूरी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘भ्रम फैलाया है कि बहन जी बीमार हैं’; भतीजे आकाश आनंद पर फिर भड़कीं मायावती, लगाया गंभीर आरोप

Mayawati attack on Akash Anand: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी से निकाले गए अपने भतीजे आकाश आनंद के बारे में एक चौंकाने वाला दावा किया है। मायावती ने कहा कि पार्टी से निकाले गए लोगों ने उनकी सेहत को लेकर फर्जी अफवाहें फैलाईं और दावा किया कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं। मायावती ने हाल ही में पार्टी से निष्कासित किए गए अपने भतीजे आकाश आनंद पर रविवार (13 सितंबर) को आरोप लगाया कि वह अब भी अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के बहकावे में आकर काम कर रहे हैं। मायावती ने कहा कि ऐसा लगता है कि आकाश अब भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहे हैं।

आकाश आनंद ने रात में किया फोन

रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बातचीत में BSP प्रमुख मायावती ने कहा, “बसपा से निकले गए लोगों ने पिछले एक-दो दिनों में पार्टी के कार्यकर्ताओं में यह भ्रम फैलाया है कि बहन जी (मायावती) काफी बीमार हैं। इसीलिए वह मीडिया में न आकर बड़े-बड़े मामलों के बारे में भी सीधे ट्वीट के जरिए ही लोगों को जानकारी दे रही हैं।” उन्होंने कहा कि आकाश ने BSP प्रभारी आलोक कुमार को शनिवार रात लगभग 10 बजे फोन कर पूछा कि क्या बहन जी बीमार हैं?

‘फोन के बारे में मायावती को न बताएं’

मायावती ने कहा कि इस पर आलोक कुमार ने आकाश को बताया कि BSP प्रमुख बिल्कुल ठीक हैं। वह अपने काम में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि आकाश ने कुमार से कहा कि वह उनके फोन करने के बारे में मायावती को न बताएं। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “यह भी काफी गंभीरता से सोचने की बात है। इस मामले में आकाश की मंशा सही भी हो सकती है और गलत भी। लेकिन ऐसा लगता है कि आकाश अब भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहा है, बल्कि (अपने ससुर) अशोक सिद्धार्थ के दिमाग से ही काम कर रहा है।”

अफवाहों को लेकर किया आगाह

मायावती ने BSP कार्यकर्ताओं को भी अफवाहों के प्रति सचेत किया। बसपा प्रमुख ने गत तीन सितंबर को आकाश को पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया था। इसके बाद 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था। हालांकि, मायावती ने यह भी दावा किया कि उन्होंने हाल ही में जो भी कड़े फैसले लिए हैं, उनसे पार्टी और बहुजन आंदोलन को नुकसान के बजाय काफी फायदा ही हो रहा है।

इससे डॉ. भीमराव आंबेडकर और BSP के संस्थापक कांशीराम का अधूरा रहा कारवां ‘काफी तेजी’ से गति भी पकड़ रहा है। मायावती ने इस दौरान मानदेय बढ़ाने और संविदा के बजाय पक्की नौकरी देने समेत विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ में जारी 58 हजार पंचायत सहायकों के आंदोलन का भी जिक्र करते हुए कहा कि सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे तो बेहतर होगा।

आगामी चुनाव को लेकर खुद एक्टिव हुईं मायावती

BSP प्रमुख ने तीन सितंबर को लखनऊ में हुई बहुजन समाज पार्टी की अखिल भारतीय बैठक में लिए गए निर्णयों का जिक्र करते हुए बताया कि पार्टी से जुड़े कार्यों को युद्ध स्तर पर गति देने के लिए अखिल भारतीय स्तर पर BSP को तीन सेक्टर में बांटा गया है। इसके तहत सेक्टर एक में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को शामिल किया गया है। वह खुद सीधे तौर पर इसके कार्यों की निगरानी कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि देश के बाकी राज्यों में जहां पार्टी का संगठन है, उन्हें दो सेक्टर में बांटकर पार्टी के वरिष्ठ तथा जिम्मेदार लोगों को अलग से केंद्रीय सेक्टर प्रभारी भी बना दिया गया है। इनके कार्यों की रिपोर्ट वह पहले की ही तरह बीच-बीच में लखनऊ में भी लेती रहेंगी।

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मायावती ने बताया कि पार्टी में मुख्य सेक्टर प्रभारी का पद अब समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब सेक्टरों के केंद्रीय प्रभारियों के कार्यों की सीधी रिपोर्ट बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार पार्टी प्रमुख को सौंपेंगे। आनंद कुमार मायावती के भाई और आकाश आनंद के पिता हैं।

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 37: नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म की कमाई में आया उछाल, जल्द ही 250 करोड़ रुपये का आंकड़ा करेगी पार

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 37: विशाल चतुर्वेदी की फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर मजबूती से टिकी हुई है। सैक्निलक (Sacnilk) के अनुसार इस डिवोशनल ड्रामा फिल्म की इंडिया नेट कमाई में छठे शनिवार को जबरदस्त उछाल आया और इसने 37वें दिन 18.50 करोड़ रुपये कमाए।

फिल्म की यह नई कमाई छठे शुक्रवार को हुई 10.50 करोड़ रुपये की कमाई के मुकाबले 76.2% ज्यादा है। ‘हनुमान अंश’ के शनिवार को 7449 शो हुए, जबकि एक दिन पहले 5743 शो हुए थे। इसकी ओवरऑल ऑक्यूपेंसी भी शुक्रवार के 38% से बढ़कर शनिवार को 52% हो गई।

इस नई कमाई के साथ फिल्म का इंडिया नेट कलेक्शन 192.13 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसका इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अभी 227 करोड़ रुपये है। फिल्म ने ओवरसीज मार्केट में भी 9.50 करोड़ रुपये कमाए हैं, जिससे इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 236.50 करोड़ रुपये हो गया है।

12 सितंबर को ‘हनुमान अंश’ के हिंदी 2D वर्शन की ओवरऑल ऑक्यूपेंसी 56.31% रही। मॉर्निंग शो में 29.77% ऑक्यूपेंसी रही, जबकि दोपहर के शो में यह 60.31% तक पहुंच गई। शाम की ऑक्यूपेंसी 66.46% रही और रात के शो में सबसे ज्यादा 68.69% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई।

‘हनुमान अंश’ की शुरुआत आसान नहीं रही थी। फिल्म के रिलीज होने के बाद, ‘बंटवारा 1947’ और ‘आवारापन 2’ जैसी फिल्मों के आने से इसके स्क्रीन की संख्या घटकर सिर्फ 25 रह गई थी। हालांकि ‘बंटवारा 1947’ के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, ‘हनुमान अंश’ के लिए स्क्रीन की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी।

दर्शकों का रिस्पॉन्स भी बेहतर हुआ और लोग फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों में बड़ी संख्या में पहुंचने लगे। लगातार चले प्रमोशन कैंपेन का असर डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी की सेहत पर पड़ा है। वे अब मुंबई लौट रहे हैं। अपने प्लान के बारे में बात करते हुए विशाल ने कहा कि मुंबई में गणेश उत्सव शुरू हो रहा है और त्योहार के दौरान वे बप्पा का शुक्रिया अदा करने के लिए अलग-अलग पंडालों में जाएंगे।

विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित, ‘हनुमान अंश’ उत्तराखंड के सम्मानित संत बाबा नीम करौली (जिनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था) के जीवन की कहानी है। 1.75 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा की कहानी है, जो अपनी मां की मौत के बाद भगवान की खोज में आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़ता है।

जीवन, मृत्यु और इंसानी दुख-दर्द के सवालों के जवाब ढूंढते हुए उत्तर भारत की यात्रा के दौरान वह अंतत सम्मानित संत नीम करौली बाबा बन जाते हैं, जिनकी प्रेम, सेवा और करुणा की शिक्षाओं ने अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित किया। इस फिल्म में शोभिनव सत्य मुख्य भूमिका में हैं, साथ ही विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल भी अहम भूमिकाओं में हैं।

अमेरिकी AI स्कूलों के लर्निंग मॉडल की हो रही आलोचना:स्कूल बने टॉर्चर चैम्बर, पेरेंट्स के कड़वे बोल तय कर रहे भविष्य

भविष्य की शिक्षा के नाम पर अमेरिकी स्कूलों का चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पेरेंट्स के आलोचनात्मक वीडियो दिखाई जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। ‘सहनशीलता’ सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है, जानिए… सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल… कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनिटर की ‘बीप-बीप’ सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। चौदह साल का रेयान मंच पर रखी एक कुर्सी पर अकेला बैठा था। उसकी उंगलियों और सीने से सेंसर जुड़े थे, जबकि सामने बैठे छात्र बड़ी स्क्रीन पर उसकी धड़कनों का ग्राफ देख रहे थे। रेयान का सामान्य हार्ट रेट 80 बीपीएम था। नियमों के मुताबिक अपनी जगह बनाए रखने के लिए रेयान को दिल की धड़कन 10% से अधिक नहीं बढ़ने देनी थी। 88 बीपीएम पार होते ही वह तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाता। तभी प्रोजेक्टर की स्क्रीन जगमगाई। सामने रेयान के पेरेंट्स का पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो चलने लगा। वे उसके काम, उसकी कमियों और उसकी हर नाकामी की तीखी आलोचना कर रहे थे। एक-एक शब्द रेयान के आत्मसम्मान पर हथौड़े की तरह चोट कर रहा था। पूरी क्लास की नजरें कभी उस वीडियो पर जातीं, तो कभी स्क्रीन पर दौड़ती लाल लकीर पर। ‘82… 85… 87…’ रेयान की मुट्ठियां भींच गईं। उसने अपनी आंखें बंद कीं, सांसों को जबरदस्ती धीमा करने लगा। दिल सीने से बाहर आने को बेताब था, पर बाहर दिखने वाली हर कमजोरी का मतलब था विफलता। जब वीडियो थमा, स्क्रीन पर औसत दर्ज था- 87 बीपीएम। वह सिर्फ एक धड़कन के फासले से बच गया था। पूरा हफ्ता उसके हाथ कांपते रहे। सिलिकॉन वैली के चर्चित एआई स्कूल में परीक्षा सिर्फ दिल की धड़कन नियंत्रित करने तक सीमित नहीं थी। छात्रों पर बॉट्स की मदद से कुछ ही दिनों में कठिन कोर्स पूरा करने का दबाव था। उन्हें बिना शिकायत गंदे शौचालय साफ कराए जाते और सोशल मीडिया पर खुद को ‘बेचने’ की ट्रेनिंग दी जाती। अल्फा स्कूल के अलावा जाने-माने स्कूल सिंथेसिस, अल्फा एनीवेयर और क्वेस्ट् टू लर्न यही तरीका अपना रहे हैं…सहनशीलता और ‘अदम्य साहस’ के नाम पर चल रहा यह प्रयोग शिक्षा से ज्यादा तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण जैसा लगता था, जहां संवेदनाओं को दबाना ही सफलता की कसौटी माना जाता है। सेंसर हटाते ही रेयान ने राहत की सांस तो ली, पर उसकी आंखें शून्य में ताक रही थीं। मशीन ने उसके दिल की रफ्तार तो नाप ली थी, लेकिन उस डर और घुटन का कोई डेटा स्क्रीन पर नहीं आया, जो उसके भीतर हमेशा के लिए दर्ज हो चुका था।

Raymond Realty पर Motilal Oswal बुलिश, दी शेयर खरीदने की सलाह, यह टारगेट किया फिक्स

Raymond Realty Share Price: रेमंड ग्रुप की रेमंड रियल्टी के शेयर अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे हैं। हालांकि रिकॉर्ड निचले स्तर से यह महज चार ही महीने में दोगुना से अधिक ऊपर चढ़ गया और घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक अभी भी इसके शेयरों से कमाई का शानदार मौका है। मौजूदा लेवल से यह करीब 20% ऊपर चढ़ सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले यानी शुक्रवार 11 सितंबर को बीएसई पर यह 2.24% की बढ़त के साथ ₹584.25 पर बंद हुआ था।

Raymond Realty पर क्यों Motilal Oswal बुलिश?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में रियल्टी सेगमेंट में एंट्री के बाद से अब रेमंड ग्रुप की रियल्टी बिजनेस यूनिट रेमंड रियल्टी देश की पांच सबसे बड़े प्रीमियम लिस्टेड रेजिडेंशियल डेवलपर्स में शुमार हो गई है, जिसकी MMR (मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन) में दमदार मौजूदगी है। ठाणे में करीब 100 एकड़ जमीन और 8 ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट्स के दम पर इसके पास फिलहाल ₹52 हजार करोड़ का अनुमानित GDV (ग्रास डेवलपमेंट वैल्यू) है। ऐसे में ब्रोकरेज फर्म ने इसकी खरीदारी की रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है और टारगेट प्राइस ₹700 पर फिक्स किया है। अब रिस्क की बात करें तो मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक अगर ठाणे वाली जमीन का सही भाव न लगी या सही समय पर फायदा नहीं मिला तो कंपनी की सेहत पर झटका दिख सकता है।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल?

रेमंड से अलग होकर इसकी रियल्टी बिजनेस रेमंड रियल्टी के शेयर पिछले साल 1 जुलाई 2025 को लिस्ट हुए थे। इसके शेयरों का सफर बीएसई पर ₹1005 के भाव पर शुरू हुआ था और फिर यह 5% के अपर सर्किट ₹1055.20 पर पहुंच गया। हालांकि शेयरों की तेजी कायम नहीं रह सकी और इस साल 16 मार्च 2026 को यह ₹350.00 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इस निचले स्तर पर शेयर संभला और फिर चार ही महीने में 109.86% चढ़कर 13 जुलाई 2026 को एक साल के हाई ₹734.50 पर पहुंच गया यानी कि महज चार महीने में इसने निवेशकों का पैसा डबल से अधिक कर दिया।

Pranav Constructions IPO को 126 गुना बोली, अब ग्रे मार्केट से 15 सितंबर को तगड़ी लिस्टिंग के संकेत

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Pranav Constructions IPO को 126 गुना बोली, अब ग्रे मार्केट से 15 सितंबर को तगड़ी लिस्टिंग के संकेत

Pranav Constructions IPO: ग्रेटर मुंबई में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम करने वाली प्रणव कंस्ट्रक्शंस के आईपीओ को निवेशकों को धांसू रिस्पांस मिला था। तीन दिनों में इसका ₹351 करोड़ का आईपाीओ 126 गुना से अधिक भरा था। अब 10 सितंबर को शेयरों के अलॉटमेंट के बाद 15 सितंबर को लिस्टिंग का इंतजार है। लिस्टिंग को लेकर ग्रे मार्केट से मजबूत संकेत मिल रहे हैं और GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) फिलहाल ₹48 यानी 38.71% है यानी कि बीएसई और एनएसई पर इसके शेयरों की करीब 39% प्रीमियम पर एंट्री हो सकती है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक जीएमपी की बजाय लिस्टिंग के दिन मार्केट सेंटिमेंट के साथ-साथ कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स ही शेयरों की चाल तय करते हैं।

Pranav Constructions IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

प्रणव कंस्ट्रक्शंस का ₹351 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 7-9 सितंबर तक खुला था। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹118-₹124 था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 126.34 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 268.54 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 217.73 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 45.31 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹316 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 28,56,869 शेयर यानी ₹35 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला हैं। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹145.72 करोड़ रीडेवलपमेंट से जुड़े सभी खर्चों, ₹91.50 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹42.57 करोड़ भविष्य के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के अधिग्रहण की फंडिंग और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों, और ₹40.31 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Pranav Constructions के बारे में

प्रणव कंस्ट्रक्शंस एक रियल एस्टेट कंपनी है जो ग्रेटर मुंबई में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। इसका फोकस वेस्टर्न सबअर्ब्स पर है। यह रीडेवलपमेंट कंपनी है यानी कि इसका मुख्य बिजनेस जमीन खरीदकर उस पर बिल्डिंग बनाना नहीं बल्कि मौजूदा पुरानी सोसायटी/प्रॉपर्टी को फिर से डेवलप करना है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से इसके 28 प्रोडेक्ट्स पूरे हो चुके हैं, 20 पर काम चल रहा है तो 17 पर काम अभी शुरू होना है। यह कम कीमत वाले घरों से लेकर प्रीमियम सेगमेंट के भी प्रोजेक्ट्स पर काम करती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 34% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹71.32 करोड़ और टोटल इनकम 30% से अधिक के सीएजीआर से ₹763.93 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹258.44 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹159.52 करोड़ पड़े थे।

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