किसान बनने का सपना हुआ पूरा, 61 वर्षीय पूर्व फौजी ड्रैगन फ्रूट की खेती से कमा रहे 4 लाख रुपये

रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग सुकून भरी जिंदगी की तलाश करते हैं, लेकिन ओडिशा के प्रताप चंद्र राउल ने अपनी दूसरी पारी को एक नई पहचान देने का फैसला किया। दशकों तक देश की सेवा करने के बाद उन्होंने खेती को अपना नया लक्ष्य बनाया और कुछ अलग करने की ठानी। बालासोर के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका यह सफर आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

सीमित जमीन, नई सोच और सीखने की इच्छा के दम पर प्रताप ने ऐसी फसल चुनी, जो उनके इलाके में अभी ज्यादा प्रचलित नहीं थी। उनकी मेहनत ने न सिर्फ एक छोटे खेत को कमाई का जरिया बनाया, बल्कि यह भी दिखाया कि सही योजना और लगन से खेती में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

हाथों में थामी खेती की कमान

प्रताप ने 1984 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय सेना जॉइन की थी। करीब 26 साल सेवा देने के बाद सितंबर 2010 में वह रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने ओडिशा पुलिस में हवलदार के रूप में एक दशक तक काम किया। साल 2020 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर गांव लौटने का फैसला किया। लेकिन उनका उद्देश्य सिर्फ आराम करना नहीं था। वह कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे कम जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सके। प्रताप ने कहा, “मैं ऐसा किसान बनना चाहता था जो अपने इलाके में कुछ नया करे। मेरा लक्ष्य था साबित करना कि छोटी जमीन भी सही योजना के साथ बड़ा फायदा दे सकती है।”

खेती का अनुभव नहीं था, फिर भी सीखने से नहीं पीछे हटे

प्रताप के परिवार का खेती से कोई पुराना संबंध नहीं था। शुरुआत में उनके लिए खेती पूरी तरह नया क्षेत्र था। उन्होंने कई महीनों तक अलग-अलग फसलों के बारे में जानकारी जुटाई। उन्होंने इंटरनेट, यूट्यूब वीडियो, सोशल मीडिया समूहों और अनुभवी किसानों से बातचीत के जरिए खेती की बारीकियां सीखीं। कई विकल्पों पर विचार करने के बाद उन्हें ड्रैगन फ्रूट सबसे बेहतर विकल्प लगा।

इस फल ने उन्हें इसलिए आकर्षित किया क्योंकि:

  • इसमें पानी की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है
  • गर्म मौसम में इसकी पैदावार अच्छी होती है
  • एक बार पौधा लगाने के बाद करीब 25 साल तक उत्पादन मिल सकता है

गुजरात से लाए खास किस्म के पौधे, शुरू किया नया प्रयोग

मार्च 2022 में प्रताप ने करीब 1.3 लाख रुपये लगाकर अपना ड्रैगन फ्रूट फार्म तैयार किया। उन्होंने 1,000 पौधे, 70 कंक्रीट पोल, 900 फीट जीआई पाइप और अन्य जरूरी सामान खरीदा। उन्होंने गुजरात से ड्रैगन फ्रूट की सात बेहतरीन किस्में मंगाईं, जिनमें शामिल थीं:

  • वियतनाम रेड
  • थाई जंबो
  • मोरक्कन रेड
  • हाइब्रिड जायंट रेड
  • इजरायली येलो
  • ताइवान पिंक
  • व्हाइट ड्रैगन फ्रूट

कम जमीन में ज्यादा उत्पादन के लिए उन्होंने पारंपरिक पोल सिस्टम की जगह हाई-डेंसिटी रैलिंग सिस्टम अपनाया। इससे एक ही क्षेत्र में ज्यादा पौधे लगाए जा सके और बेलें तेजी से बढ़ने लगीं।

पहली फसल ने दिया झटका

किसी भी नए किसान की तरह प्रताप को शुरुआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मार्च 2023 में पहली बार फसल तैयार हुई, लेकिन उत्पादन केवल करीब 50 किलो रहा। फल भी उम्मीद से छोटे निकले। वह इतने निराश हुए कि उन्होंने उन्हें बाजार तक नहीं पहुंचाया। लेकिन प्रताप ने इस असफलता को हार नहीं माना। उन्होंने अपनी गलतियों को समझा और खेती के तरीके में बदलाव शुरू किया।

रसायनों को छोड़ा

प्रताप ने रासायनिक उर्वरकों की जगह पूरी तरह जैविक खेती अपनाने का फैसला किया। उन्होंने गाय के गोबर, गोमूत्र, फल-सब्जियों के कचरे, प्याज के अवशेष, मिट्टी और केंचुओं से प्राकृतिक खाद तैयार करनी शुरू की। इस बदलाव का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। पौधों की सेहत सुधरी, फलों का आकार बढ़ा और उत्पादन हर साल बेहतर होता गया।

छोटी जमीन से बढ़ी कमाई

साल 2024 में उनके खेत से करीब 200 किलो ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हुआ। जैविक फल होने के कारण ग्राहकों ने इसे अच्छी कीमत पर खरीदा और उन्हें लगभग 50 हजार रुपये की कमाई हुई। इसके बाद 2025 में उत्पादन तेजी से बढ़ा। अप्रैल से नवंबर के बीच करीब 900 किलो फल तैयार हुए।

उन्होंने लगभग:

  • 650 किलो फल सीधे ग्राहकों को करीब 220 रुपये प्रति किलो बेचे
  • बाकी फल थोक विक्रेताओं को करीब 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचे

सिर्फ फलों की बिक्री से उनकी आमदनी करीब 1.4 लाख रुपये तक पहुंच गई।

फल के साथ पौधों से भी कमाई का नया रास्ता

प्रताप ने कमाई का दायरा सिर्फ फलों तक सीमित नहीं रखा। वह हर साल करीब 2,000 ड्रैगन फ्रूट पौधों की नर्सरी तैयार करते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 हजार रुपये अतिरिक्त मिलते हैं। उन्होंने अपनी छत पर भी 22 पौधे लगाए हैं, जिनसे हर साल करीब 20 किलो फल मिलते हैं। ऑफ-सीजन में वह पौधों की कटाई-छंटाई और अगले उत्पादन की तैयारी में जुट जाते हैं।

अब स्ट्रॉबेरी से बढ़ाएंगे कमाई के मौके

ड्रैगन फ्रूट में सफलता हासिल करने के बाद प्रताप अब नई फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने एक छोटे क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रयोग किया, जो सफल रहा। अब उनका लक्ष्य है कि ड्रैगन फ्रूट के ऑफ-सीजन में दूसरी फसलों के जरिए अतिरिक्त आमदनी बनाई जाए।

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Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

Friendship is a precious relationship in life, picture shows friends celebrating Friendship Day

Friendship Day 2026 : मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसके जीवन में परिवार के बाद यदि किसी रिश्ते का सबसे अधिक महत्व है, तो वह दोस्ती का रिश्ता है। दोस्ती ऐसा बंधन है जो न तो खून का रिश्ता होता है और न ही किसी स्वार्थ पर आधारित होता है। यह विश्वास, अपनापन, सहयोग और सच्ची भावनाओं से जुड़ा होता है। इसी अनमोल रिश्ते का उत्सव मनाने के लिए हर साल अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है।

 

'जिंदगी में एक सच्चा दोस्त होना, 

लाखों की भीड़ में अकेले न होने का अहसास है।'


प्रस्तावना. फ्रेंडशिप डे या मित्रता दिवस केवल एक तारीख या कैलेंडर का दिन नहीं है, बल्कि यह उन खूबसूरत रिश्तों को मनाने का जरिया है जिन्हें हम खून के रिश्तों से परे, अपनी मर्जी और दिल से चुनते हैं। हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को भारत सहित दुनिया के कई देशों में फ्रेंडशिप डे बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार यह दिवस 02 अगस्त को पड़ रहा है, जब फ्रेंडशिप डे मनाया जाएगा। यह दिन हमें अपने दोस्तों के प्रति प्यार, सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर देता है।

 

फ्रेंडशिप डे की शुरुआत और इतिहास

फ्रेंडशिप डे/ मित्रता दिवस की शुरुआत सबसे पहले 1930 में हॉलमार्क कार्ड्स के संस्थापक जॉइस हॉल द्वारा की गई थी। शुरुआत में लोग इस दिन अपने दोस्तों को कार्ड भेजा करते थे। बाद में, 1958 में इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे का प्रस्ताव रखा गया।

 

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 30 जुलाई को आधिकारिक तौर पर 'अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस' घोषित किया, लेकिन भारत, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देशों में अगस्त के पहले रविवार को ही फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा लोकप्रिय है।

 

फ्रेंडशिप डे कैसे मनाया जाता है?

 

आज के दौर में फ्रेंडशिप डे मनाने के तरीके भले ही बदल गए हों, लेकिन इसके पीछे की भावना आज भी वही है:

 

फ्रेंडशिप बैंड और कार्ड्स: बचपन की यादों में सबसे खास होता है दोस्तों की कलाई पर रंग-बिरंगे 'फ्रेंडशिप बैंड' बांधना। जिसके हाथ में जितने ज्यादा बैंड होते थे, वह उतना ही 'पॉपुलर' माना जाता था!

 

गेट-टुगेदर और पार्टी: इस दिन पुराने दोस्त एक साथ मिलते हैं, पुरानी खट्टी-मीठी यादें ताजा करते हैं और साथ में घूमते-फिरते या खाना खाते हैं।

 

डिजिटल शुभकामनाएं: सोशल मीडिया के इस दौर में लोग स्टेटस, फोटो कोलाज और प्यारे संदेशों/मैसेजेस के जरिए दूर बैठे दोस्तों को भी इस दिन की बधाई देते हैं।

 

फ्रेंडशिप डे के अवसर पर लोग अपने दोस्तों को फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और उपहार देकर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। स्कूल, कॉलेज और कार्यालयों में भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई लोग अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं, साथ घूमने जाते हैं या सोशल मीडिया के माध्यम से शुभकामनाएं भेजते हैं।

 

जीवन में दोस्ती का असली महत्व

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसमें न कोई छोटा होता है, न बड़ा; न कोई अमीर, न गरीब। यह एक निष्पक्ष और पारदर्शी रिश्ता है।

 

सुख-दुख का साथी: सच्चा दोस्त वही है जो आपकी खुशी में खुलकर हंसे और आपके बुरे वक्त में ढाल बनकर आपके साथ खड़ा रहे।

 

बिना डर के अभिव्यक्ति: माता-पिता या परिजनों से हम कई बातें कहने में झिझकते हैं, लेकिन दोस्त के सामने हम बिना किसी नकाब के पूरी तरह से 'असली हम' हो सकते हैं।

 

मानसिक तनाव से मुक्ति: जब जिंदगी की उलझनें हावी होने लगती हैं, तो दोस्त के साथ बिताए कुछ पल या एक कप चाय पूरी थकान और मानसिक तनाव को मिटा देती है।

 

पौराणिक संदर्भ: सच्ची दोस्ती की मिसालें

भारतीय संस्कृति में दोस्ती के कई महान उदाहरण मिलते हैं:

 

* कृष्ण और सुदामा की जोड़ी यह सिखाती है कि सच्ची मित्रता में धन और पद का कोई स्थान नहीं होता।

 

* भगवान राम और सुग्रीव की दोस्ती हमें विपत्ति के समय एक-दूसरे का साथ देने का संदेश देती है।

 

* दुर्योधन के गलत होने के बावजूद, कर्ण ने अपनी मित्रता का धर्म अंत तक निभाया।

 

निष्कर्ष

दोस्ती एक ऐसा पौधा है जिसे विश्वास, सम्मान और प्यार के पानी से सींचना पड़ता है। फ्रेंडशिप डे हमें यह याद दिलाने का एक बहाना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में हम उन लोगों को शुक्रिया कहें जो बिना किसी स्वार्थ के हमारी जिंदगी को खूबसूरत बनाते हैं। इस फ्रेंडशिप डे पर अपने व्यस्त शेड्यूल से थोड़ा समय निकालें, अपने पुराने दोस्तों को फोन करें और उन्हें बताएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं!

 

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CJP Parliament March: दिल्ली मेट्रो के ये 5 स्टेशन बंद, घर से निकलने से पहले देख लें ट्रैफिक एडवाइजरी

CJP Parliament March: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सोमवार (20 जुलाई) को सुरक्षा कारणों से राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से निकाले जा रहे विरोध मार्च के मद्देनजर उठाया गया है। डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक पोस्ट में कहा कि अगले आदेश तक ये पांचों मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। CJP ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग को लेकर संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद तक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है।

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस विरोध मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। संसद के मानसून सत्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को देखते हुए सोमवार को दिल्ली पुलिस अत्यधिक सतर्क है। जंतर-मंतर, संसद और अन्य प्रमुख स्थानों के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

अनशन पर अड़े वांगचुक, रखीं ये शर्तें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को कहा कि उनकी भूख हड़ताल प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च के बाद भी जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपना अनशन तभी समाप्त करेंगे, जब सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल में हुई विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करेगी या राजनीतिक दलों के नेता उन्हें यह भरोसा देंगे कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक संदेश में वांगचुक ने लिखा, “आपमें से कई लोगों ने पूछा है कि मैं अपना अनशन कब समाप्त करूंगा। जैसा कि मैंने पहले अपने समर्थकों से कहा था, यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की विफलताओं, पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी 20 जुलाई तक स्वीकार करती है, तो मैं अपना अनशन समाप्त कर दूंगा।”

उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो उनका अनशन जारी रहेगा। वांगचुक ने कहा कि वह अपना अनशन तब भी समाप्त कर देंगे, यदि कॉकरोच जनता पार्टी का नेतृत्व और वह स्वयं संसद के गेट तक पहुंचते हैं और वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद तथा नेता उन्हें यह आश्वासन देते हैं कि वे इस मुद्दे को अब संसद में उठाएंगे।

उन्होंने कहा, “यदि मेरी सेहत या अन्य कारणों से मैं संसद तक नहीं पहुंच पाता, तो विभिन्न दलों के सम्मानित सांसद और नेता इस अस्पताल में आकर मुझे यही आश्वासन दें।” वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।

उन्होंने लिखा, “मैं सफदरजंग अस्पताल में अवैध हिरासत में हूं, जहां मेरी आवाजाही, अभिव्यक्ति और हर तरह के संचार की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई है।” शनिवार को वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा था कि यदि राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल आकर उन्हें यह भरोसा दें कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

आंग्मो ने ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल समर्थकों से वांगचुक की ओर से शांति बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की अपील भी की थी कि आंदोलन का किसी तरह दुरुपयोग न हो। वांगचुक ने कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके के आंदोलन का समर्थन करते हुए 28 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।

लगातार 21 दिन तक अनशन करने के बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। उनके समर्थकों का आरोप है कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

2 लाख रुपये महीने की सैलरी भी बन सकती है सबसे बड़ा जाल! MBA प्रोफेशनल ने बताई चौंकाने वाली वजह

कॉर्पोरेट दुनिया में बेहतर सैलरी और बड़ा पद हासिल करना अक्सर सफलता की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। हर नई नौकरी, प्रमोशन और वेतन वृद्धि लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन क्या लगातार अधिक कमाई की चाह वास्तव में बेहतर जीवन की गारंटी देती है, या फिर ये इंसान को ऐसी दौड़ में शामिल कर देती है, जहां संतुष्टि हमेशा एक कदम दूर रहती है? यही सवाल इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक अनुभवी प्रोफेशनल की राय ने इस बहस को नई दिशा दे दी है।

उनका मानना है कि करियर में एक स्तर के बाद केवल ज्यादा सैलरी पर ध्यान देने के बजाय जीवन की गुणवत्ता, मानसिक शांति, परिवार और भविष्य की सुरक्षा पर भी उतना ही फोकस होना चाहिए। उनकी यह सोच लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा कर रही है और एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इंसान के लिए ‘पर्याप्त कमाई’ की सीमा क्या होनी चाहिए।

‘₹2 लाख महीने के बाद शुरू हो जाता है असली ट्रैप

करीब 13 साल का कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले MBA ग्रेजुएट मोहित तलरेजा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर कहा कि भारत में यदि किसी की मासिक आय लगभग ₹2 लाख तक पहुंच जाती है, तो वह आरामदायक जीवन जी सकता है। उनके मुताबिक इसके बाद सिर्फ ज्यादा सैलरी के पीछे भागना इंसान को ऐसी रेस में धकेल देता है, जहां प्रतिस्पर्धा कभी खत्म नहीं होती।

कॉर्पोरेट सीढ़ी जितनी ऊंची, उतना बढ़ता है दबाव

तलरेजा का मानना है कि ऊंचे पदों पर पहुंचने के साथ काम का तनाव और जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे स्तर पर अक्सर उन्हीं लोगों से मुकाबला होता है जो करियर के लिए अपनी सेहत, परिवार और निजी जिंदगी तक दांव पर लगाने को तैयार रहते हैं। उनका कहना है कि हर किसी के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धा सही विकल्प नहीं हो सकती।

पहले तय करें कितना काफी है

उन्होंने सलाह दी कि हर प्रमोशन को अगला लक्ष्य बनाने के बजाय लोगों को पहले यह तय करना चाहिए कि उनकी जरूरतों के हिसाब से कितनी आय पर्याप्त है। जब वो स्तर हासिल हो जाए, तो जीवन की गुणवत्ता सुधारने, परिवार के साथ समय बिताने और स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

सिर्फ नौकरी नहीं, भविष्य के लिए दूसरा सहारा भी बनाएं

तलरेजा का कहना है कि प्रोफेशनल्स को ऐसी स्किल्स विकसित करनी चाहिए जो आने वाले 10-15 सालों में नौकरी पर निर्भर हुए बिना भी कमाई का जरिया बन सकें। उन्होंने कंटेंट क्रिएशन का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं, जिनसे भविष्य में स्वतंत्र आय अर्जित की जा सकती है।

लंबी दौड़ में क्या है असली जीत?

उनके अनुसार लक्ष्य सिर्फ बड़ा पैकेज या ऊंचा पद हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी जिंदगी बनानी चाहिए जिसमें आर्थिक सुरक्षा के साथ मानसिक शांति और व्यक्तिगत संतुलन भी बना रहे।

सोशल मीडिया पर बंट गई राय

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताते हुए कहा कि एक समय के बाद पैसा नहीं, जीवन का संतुलन ज्यादा मायने रखता है। वहीं कई लोगों का कहना था कि आज के दौर में ₹2 लाख महीना भी हर किसी के लिए पर्याप्त नहीं है। एक यूजर ने लिखा कि इतनी आय में बड़े शहरों में घर खरीदना आसान नहीं, जबकि दूसरे ने सलाह दी कि इस स्तर की कमाई के बाद खुद का बिजनेस शुरू करने पर विचार करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर साझा किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।

Video: ट्रेन में महिला का फूटा गुस्सा! छेड़छाड़ करने वाले के साथ किया कुछ ऐसा, वीडियो हुआ वायरल

सोनम वांगचुक को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सफदरजंग अस्पताल में ही रहेंगे भर्ती…सरकार–पुलिस से मांगा जवाब

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने माना कि बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला सही था। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि, सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों का पूरा सहयोग करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का सरकार का फैसला कोई मनमाना कदम नहीं था, बल्कि उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह जरूरी था।

सुनवाई के दौरान अस्पताल की मेडिकल टीम के एक डॉक्टर ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक ने अब लिक्विड आइटम, पोटैशियम क्लोराइड और शुगर-फ्री ओआरएस (ORS) लेना शुरू कर दिया है। हालांकि, डॉक्टरों की सलाह के बावजूद उन्होंने कई बार नसों के जरिए दिए जाने वाले फ्लूइड (IV) लेने से इनकार किया है।

वांगचुक ने IV फ्लूइड लेने से किया इनकार

सुनवाई के दौरान सफदरजंग अस्पताल के एक डॉक्टर ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज लगातार जारी है। डॉक्टर के मुताबिक, मेडिकल टीम लगातार उन्हें नसों के जरिए दिए जाने वाले फ्लूइड (IV) लेने के लिए समझा रही है, लेकिन उन्होंने अब तक इसके लिए सहमति नहीं दी है। डॉक्टर ने अदालत को बताया कि वांगचुक के शरीर में विटामिन की कमी है। साथ ही पोटैशियम और ब्लड शुगर जैसे कुछ जरूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य से कम या सीमा के करीब हैं, इसलिए उनका इलाज सावधानी से किया जा रहा है। डॉक्टर की बात सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक से अपील की कि वह अपना इलाज कर रही मेडिकल टीम का पूरा सहयोग करें। वहीं, वांगचुक और उनकी पत्नी की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सोनम वांगचुक न तो किसी हिरासत में हैं और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है। ऐसे में उन्हें यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वे किस अस्पताल में अपना इलाज कराना चाहते हैं।

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

सोनम वांगचुक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि वांगचुक किसी हिरासत में नहीं हैं और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी नहीं चल रहा है। ऐसे में उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का पूरा अधिकार है। सिब्बल ने कहा कि वांगचुक इलाज से इनकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराने का पिछला आदेश एकतरफा था, क्योंकि उस समय उनकी ओर से अदालत में कोई पक्ष नहीं सुना गया था।

वहीं इन दलीलों पर जवाब देते हुए जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि अदालत को पूरे मामले को व्यापक नजरिए से देखना होगा। उन्होंने कहा कि भले ही सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, लेकिन उनकी पत्नी, भाई और जीजा को उनसे मिलने की अनुमति दी गई है। अदालत ने संकेत दिया कि फिलहाल सबसे अहम बात उनकी सेहत और इलाज सुनिश्चित करना है।

पत्नी ने निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की

दिल्ली हाई कोर्ट में यह सुनवाई सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की ओर से दायर याचिका पर हो रही है। याचिका में मांग की गई है कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में इलाज के लिए शिफ्ट करने की अनुमति दी जाए। डॉ. गीतांजलि आंग्मो का आरोप है कि इलाज के नाम पर सोनम वांगचुक को गैर-कानूनी तरीके से अस्पताल में रोका गया है। उन्होंने सरकारी अस्पताल में मिल रहे इलाज और मेडिकल देखभाल पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि बेहतर इलाज के लिए वांगचुक को परिवार की पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

Salman Khan: क्या उनकी तबीयत ठीक नहीं है ? सलमान खान का हाल देख फैंस हुए परेशान

Salman Khan: मुंबई में सुपरस्टार सलमान खान के हालिया पब्लिक अपीयरेंस ने फैंस को चिंता में डाल दिया है। एक्टर का काफी दुबला-पतला शरीर ऑनलाइन चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। जब उनके बाहर निकलने के वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, तो कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने एक्टर की सेहत को लेकर चिंता जताई। बहुत से लोग यह सोच रहे हैं कि उनका वज़न इतना कम क्यों हो गया है और उम्मीद कर रहे हैं कि वे ठीक हों।

शुक्रवार को सलमान ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के ऑफिस का दौरा किया, जहां उन्होंने अथॉरिटी के अत्याधुनिक डेटा कलेक्शन और वेरिफिकेशन सपोर्ट सेंटर (IT सर्वर रूम) का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान, एक्टर ने लाभार्थियों को घरों की चाबियां भी सौंपीं।

सोशल मीडिया पर सलमान के दौरे के कई वीडियो सामने आए, लेकिन उनका लुक तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया। एक्टर के शरीर की बनावट देखकर फैंस और शुभचिंतकों ने चिंता ज़ाहिर की। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर चिंता जताते हुए पूछा कि क्या उनकी सेहत ठीक है।

एक ने लिखा, “वह बीमार लग रहे हैं… भगवान आपका भला करे”, वहीं दूसरे ने कहा, “वह बीमार लग रहे हैं, मुझे लगता है कि उन्हें कोई हेल्थ प्रॉब्लम है”। एक ने पूछा, “मेरे किंग को क्या हुआ है?” “सलमान खान को क्या हो गया?? पहले तो मुझे लगा कि यह वो नहीं हैं, लेकिन मैंने वहां शेरा को भी देखा। उनकी उम्र धर्मेंद्र जैसी लग रही है,”।

एक परेशान फैन ने लिखा, “यकीन नहीं होता कि ये सलमान खान हैं,” और एक ने पूछा, “क्या सलमान खान और उनकी सेहत सब ठीक है..?” एक ने हैरानी जताते हुए कहा, “इसे देखकर सच में दुख होता है। आप साफ देख सकते हैं कि उनकी आंखों में कितनी थकान और अस्वस्थता दिख रही है। फिल्मों में तो भाई अकेले 50 लोगों से भिड़ जाते हैं, लेकिन अभी सलमान को देखिए, उनका वो जलवा पूरी तरह गायब हो गया है और साफ दिख रहा है कि उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है। सलमान खान को क्या हुआ है? क्या उन्हें कोई बीमारी है?”

एक ने लिखा, “क्या ये सच में सलमान खान हैं? क्या वो ठीक हैं? ऐसा तो नहीं लग रहा।” दूसरे ने लिखा, “दोस्तों, सलमान खान को क्या हुआ है?” एक ने लिखा, “बस उनके चेहरे को देखिए, वो किसी दादाजी जैसे लग रहे हैं। वो ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं।” वहीं एक और ने पूछा, “सलमान खान को क्या हुआ है? भाई सच में 80 साल के बुज़ुर्ग जैसे लग रहे हैं।”

हालांकि, कुछ फ़ैन्स उनके बचाव में भी आए और लिखा, “किसी भारतीय फ़िल्म सुपरस्टार के लिए सबके सामने अपनी उम्र को ज़ाहिर करना बहुत हिम्मत का काम है। रजनीकांत ने ऐसा किया था। बॉलीवुड में कैमरे के सामने अपनी उम्र को शालीनता से स्वीकार करने की हिम्मत दिखाने के लिए सलमान खान बहुत सम्मान के हकदार हैं।”

एक ने लिखा, “बॉलीवुड सेलेब्स अपनी कमियों को छिपाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं, और यहाँ सलमान खान एक पब्लिक इवेंट में 60 साल के व्यक्ति जैसे दिख रहे हैं। वो ऐसे इसलिए आए क्योंकि या तो उन्होंने अपनी उम्र को शालीनता से स्वीकार कर लिया है या फिर उनके अंदर कुछ गड़बड़ है। मुझे यकीन है कि उनकी PR टीम ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी होगी।”

सलमान जल्द ही ‘मातृभूमि’ में नज़र आएंगे, जिसमें बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। मार्च तक इस फ़िल्म का नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था और कहा जा रहा था कि यह गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुई असल झड़प पर आधारित है। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट ने एक अलग मोड़ ले लिया है – इसका नाम बदल दिया गया है, चीन और गलवान घाटी के ज़िक्र को हटा दिया गया है, और कहा जा रहा है कि टीम बड़े पैमाने पर दोबारा शूटिंग कर रही है।

सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान द्वारा प्रोड्यूस और अपूर्व लाखिया द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मातृभूमि’ में सलमान एक इंडियन आर्मी कर्नल के रोल में हैं। इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं। अभी तक इसकी रिलीज़ डेट का ऐलान नहीं किया गया है।

हाल ही में, कई अफ़वाहों और बिना पुष्टि वाली खबरों में दावा किया गया था कि ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को CBFC के साथ दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, और अब यह फिल्म अनिश्चित काल के लिए टल सकती है या इसे रद्द भी किया जा सकता है। हाल ही में, सलमान खान फिल्म्स ने ऐसी सभी खबरों को खारिज करते हुए इन अटकलों को “गलत” और “पूरी तरह से बेबुनियाद” बताया। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक बयान में, प्रोडक्शन बैनर ने साफ़ किया कि फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास नहीं भेजा गया है, इसलिए सर्टिफिकेशन में किसी भी तरह की आपत्ति या देरी की खबरें गलत हैं। अभी तक इसकी रिलीज़ डेट का ऐलान नहीं किया गया है।

उन्होंने नयनतारा के साथ अपनी आने वाली फ़िल्म के लिए ईद 2027 की तारीख़ भी तय कर ली है। इस फ़िल्म का नाम अभी तय नहीं हुआ है और फ़िलहाल इसे SVC63 कहा जा रहा है; इसे वामशी पैदिपल्ली डायरेक्ट करेंगे। एक्टर को हाल ही में ‘राजा शिवाजी’ में जीवा महाला के कैमियो रोल में देखा गया था, और सोशल मीडिया यूज़र्स को उनका ज़बरदस्त योद्धा वाला अवतार बहुत पसंद आया। ‘राजा शिवाजी’ में रितेश देशमुख और जेनेलिया देशमुख भी थे।