लोकमान्य तिलक जयंती 2026: जीवन परिचय, इतिहास, महत्व और अनसुने तथ्य

A portrait of Keshav Gangadhar Tilak on the birth anniversary of Lokmanya Tilak, a pioneer of the freedom movement

Lokmanya Tilak Biography: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जब भी राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और जनजागरण की बात होती है, तो लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्हें आधुनिक भारत के सबसे प्रभावशाली राष्ट्रवादियों में गिना जाता है। हर वर्ष 23 जुलाई को लोकमान्य तिलक की जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 170वीं जयंती मनाई जाएगी।

 

जब भारतीय जनमानस औपनिवेशिक दासता की गहरी नींद में सोया हुआ था, तब एक ऐसी आवाज़ गूंजी जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी- और वह थीं, 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।' यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत के पुनर्जागरण का शंखनाद था। यह दिन केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों, विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को समझने का भी अवसर है।

 

  • जीवन परिचय: एक शिक्षक से राष्ट्रनायक तक का सफर
  • इतिहास: गरम दल का नेतृत्व और होम रूल आंदोलन
  • सामाजिक एकीकरण का अनूठा प्रयोग
  • आज के संदर्भ में जयंती का महत्व
  • लोकमान्य तिलक से जुड़े अनसुने तथ्य

 

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती 2026 पर जानें उनका जीवन परिचय, इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, महत्व, प्रसिद्ध विचार और अनसुने तथ्य…

 

जीवन परिचय: एक शिक्षक से राष्ट्रनायक तक का सफर

जन्म: 23 जुलाई 1856 रत्नागिरी, महाराष्ट्र

मूल नाम: केशव गंगाधर तिलक  (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

माता-पिता: पार्वतीबाई एवं गंगाधर रामचंद्र तिलक

योग्यता: गणित और संस्कृत के प्रकांड विद्वान, एलएलबी में स्नातक

उपाधि: 'लोकमान्य' जनता द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया नेता।

पेशा: शिक्षक, पत्रकार, समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी

निधन: 1 अगस्त 1920, मुंबई

 

तिलक जी का मानना था कि किसी भी देश की स्वतंत्रता की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था पर टिकी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक वकील के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में की। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए पुणे में 'न्यू इंग्लिश स्कूल' और 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी/ फर्गुसन कॉलेज' की स्थापना की।

 

इतिहास: गरम दल का नेतृत्व और होम रूल आंदोलन

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती दौर में जब अंग्रेज सरकार के समक्ष केवल प्रार्थना-पत्र देने की नीति अपनाई जा रही थी, तब तिलक जी ने इसका मुखर विरोध किया। लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल यानी त्रिदेव (लाल-बाल-पाल) के साथ मिलकर उन्होंने कांग्रेस में 'राष्ट्रवादी/गरम दल' का गठन किया। उनका मानना था कि आजादी भीख में नहीं, बल्कि संघर्ष से मिलती है।

 

समाचार पत्रों का माध्यम: बाल गंगाधर तिलक ने ऐसे समय में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया, जब अंग्रेजी शासन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाना आसान नहीं था। उन्होंने शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक आंदोलनों को जनजागरण का माध्यम बनाया।

उन्होंने मराठी समाचार पत्र 'केसरी' और 'मराठा' अंग्रेजी समाचार पत्र के माध्यम से अंग्रेजों की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब किया। केसरी में लिखे उनके लेख ब्रिटिश सरकार के लिए किसी बम धमाके से कम नहीं होते थे। सन् 1916 में उन्होंने एनी बेसेंट के साथ मिलकर ऑल इंडिया होम रूल लीग यानी स्वशासन की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाया, जिसने भारत के कोने-कोने में राष्ट्रवाद की ज्वाला जला दी। 

 

सामाजिक एकीकरण का अनूठा प्रयोग

लोकमान्य तिलक एक दूरदर्शी नेता थे। वे जानते थे कि जब तक भारत की विविधता को एक सूत्र में नहीं पिरोया जाएगा, तब तक अंग्रेजों से लड़ना असंभव है। इसके लिए उन्होंने धर्म और संस्कृति को जन-जागरण का माध्यम बनाया, जिसके तहत उन्होंने सन् 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव प्रारंभ किया, अर्थात् जो पूजा घरों की चारदीवारी तक सीमित थी, उसे उन्होंने एक सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया ताकि लोग जाति-पात से ऊपर उठकर एक जगह एकत्र हों और देश की स्थिति पर चर्चा कर सकें।

उन्होंने 1895 में शिवाजी महोत्‍सव के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य को याद दिलाकर भारत के युवाओं में स्वाभिमान और साहस का संचार किया।

 

आज के संदर्भ में जयंती का महत्व

आज 21वीं सदी के आत्मनिर्भर भारत में लोकमान्य तिलक के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनकी जयंती हमें सिखाती है कि स्वावलंबन ही वास्तविक स्वतंत्रता है। तिलक जी ने जो 'स्वदेशी' का पाठ 100 साल पहले पढ़ाया था, वही आज 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का आधार है। उनकी निर्भीकता और मौलिक सोच तथा अन्याय के सामने न झुकने का उनका जज्बा आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाशपुंज है।

 

लोकमान्य तिलक से जुड़े अनसुने तथ्य

 

1. 'लोकमान्य' की उपाधि जनता ने दी

उनके लोकप्रिय नेतृत्व और जनसमर्थन के कारण लोगों ने उन्हें 'लोकमान्य', अर्थात् 'जिसे जनता ने स्वीकार किया हो', की उपाधि दी।

 

2. पत्रकारिता को बनाया आंदोलन का हथियार

उन्होंने अपने समाचार पत्रों के माध्यम से ब्रिटिश शासन की नीतियों का निर्भीक विरोध किया।

 

3. गणेशोत्सव को बनाया सार्वजनिक उत्सव

तिलक ने घरेलू गणेश पूजा को सार्वजनिक आयोजन का रूप देकर लोगों को एकजुट किया और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया।

 

4. कई बार गए जेल

ब्रिटिश सरकार ने उनके राष्ट्रवादी लेखों और भाषणों के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया। उन्हें म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) के मांडले कारागार में भी कैद रखा गया।

 

5. जेल में लिखी प्रसिद्ध पुस्तक

मांडले जेल में रहते हुए उन्होंने 'गीता रहस्य' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की, जिसमें उन्होंने कर्मयोग का महत्व बताया।

 

6. स्वदेशी आंदोलन के समर्थक

उन्होंने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का जोरदार समर्थन किया।

 

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Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

Indo MIM IPO Details & GMP: अगर आप आईपीओ मार्केट में दांव लगाने की योजना बना रहे हैं, तो बेंगलुरु बेस्ड प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर इंडो-एमआईएम का बड़ा आईपीओ कल यानी 23 जुलाई से खुल रहा है। ₹3,811.21 करोड़ का यह मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में दस्तक देने से पहले ही ग्रे मार्केट में धमाल मचा रहा है।

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, कंपनी के शेयर ग्रे मार्केट में करीब 40% के तगड़े प्रीमियम (GMP) पर ट्रेड कर रहे हैं, जो लिस्टिंग के दिन शानदार रिटर्न का संकेत दे रहा है। आइए जानते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, जरूरी तारीखें, वित्तीय सेहत और अन्य प्रमुख बातें।

Indo-MIM IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

  • एंकर इनवेस्टर्स के लिए बिडिंग: 22 जुलाई
  • इश्यू ओपनिंग और क्लोजिंग डेट: 23 से 27 जुलाई
  • प्राइस बैंड: ₹461 से ₹485 प्रति शेयर
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹14,550
  • शेयर अलॉटमेंट की तारीख: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

इश्यू साइज और फंड का इस्तेमाल

यह आईपीओ कुल ₹3,811.21 करोड़ का है जिसमें ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹3,312 करोड़ ऑफर फॉर सेल (OFS) है। ओएफएस के तहत ग्रीन मीडोज इन्वेस्टमेंट्स 6.05 करोड़ शेयर, अनुराधा कोडुरी 54.59 लाख शेयर और आईआईटी मद्रास 23.07 लाख शेयर बेच रहे हैं।

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹500 करोड़ में से ₹400 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। कंपनी का मई 2026 तक कंपनी पर कुल ₹1,212.3 करोड़ का बकाया कर्ज था। बाकी फंड का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए होगा।

कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और बिजनेस

1996 में स्थापित इंडो-एमआईएम (Indo-MIM) मेटल इंजेक्शन मोल्डिंग (MIM) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके प्रिसिजन इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाती है। कंपनी ऑटोमोटिव, डिफेंस, मेडिकल, कंज्यूमर और एयरोस्पेस सेक्टर्स के लिए काम करती है। फाइनेंशियल ग्रोथ की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल (YoY) 26% बढ़कर ₹533.5 करोड़ हो गया। इसी अवधि में परिचालन राजस्व भी 26% बढ़कर ₹4,193 करोड़ पर पहुंच गया।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है जीएमपी?

आईपीओ मार्केट पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म्स Investorgain और IPO Watch के मुताबिक, 22 जुलाई की सुबह इंडो-एमआईएम के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹194 से ₹195 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इसकी संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹485 (अपर प्राइस बैंड) + ₹195 (GMP) = ₹680 प्रति शेयर हो सकती है। निवेशकों को इस आईपीओ की लिस्टिंग पर ही करीब 40.21% का मुनाफा हो सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सावन के व्रत में नहीं होगी थकान, ना बढ़ेगी ब्लड शुगर, बनाएं ये झटपट स्वादिष्ट और एनर्जेटिक फलाहार!

सावन (Sawan) 2026 की शुरुआत 30 जुलाई (July) से हो रही है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और व्रत-उपवास के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान कई लोग पूरे महीने या सोमवार के व्रत रखते हैं और फलाहारी (falahari) भोजन का सेवन करते हैं। अगर आप भी इस सावन व्रत की थाली में स्वाद का तड़का लगाना चाहते हैं, तो ये 6 आसान और स्वादिष्ट फलाहारी व्यंजन जरूर ट्राई करें:

Sabudana Khichdi (साबूदाना खिचड़ी)

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साबूदाना खिचड़ी व्रत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले व्यंजनों में से एक है। साबूदाने को 5-6 घंटे भिगो दें। कड़ाही में घी डालकर जीरा, हरी मिर्च और करी पत्ता भूनें। इसमें उबले आलू और भुनी मूंगफली डालें। फिर भीगा साबूदाना, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर 4-5 मिनट पकाएं। आखिर में नींबू का रस और हरा धनिया डालकर सर्व करें। यह डिश स्वादिष्ट होने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करती है।

 

Kuttu Atta Puri (कुट्टू के आटे की पूरी)

कुट्टू के आटे की पूरी(Kuttu ke atte ki poori recipe in Hindi)

अगर व्रत में कुछ कुरकुरा और पेट भरने वाला खाना चाहते हैं, तो कुट्टू के आटे की पूरी बेहतरीन ऑप्शन है। कुट्टू के आटे में उबले आलू, सेंधा नमक और थोड़ा पानी मिलाकर नरम आटा गूंध लें। छोटी-छोटी पूरियां बेलकर गर्म घी या तेल में सुनहरा होने तक तलें। इसे फलाहारी आलू की सब्जी या दही के साथ परोसें।

Singhare Ke Atte Ka Cheela (सिंघाड़े के आटे का चीला)

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सिंघाड़े के आटे में उबले आलू, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाकर तैयार किया गया चीला स्वाद और सेहत दोनों का अच्छा मेल है। सिंघाड़े के आटे में उबले आलू, बारीक कटी हरी मिर्च, हरा धनिया, सेंधा नमक और थोड़ा पानी मिलाकर बैटर तैयार करें। तवे पर थोड़ा घी लगाकर दोनों तरफ सुनहरा होने तक सेंक लें। इसे दही या फलाहारी चटनी के साथ खाएं।

Makhane Ki Kheer (मखाने की खीर)

50+ Makhana Kheer Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

सावन व्रत में मीठा खाने का मन हो, तो मखाने की खीर शानदार ऑप्शन है। घी में मखानों को हल्का भून लें। एक पैन में दूध उबालें और उसमें मखाने डाल दें। 10-15 मिनट तक पकाएं। फिर चीनी, इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम-पिस्ता डालकर 5 मिनट और पकाएं। गर्म या ठंडी दोनों तरह से इसका स्वाद बेहतरीन लगता है। यह खीर स्वादिष्ट होने के साथ पोषण से भी भरपूर होती है।

 

 

Sweet Potato Chaat (शकरकंद चाट)

Sweet Potato Chaat

शकरकंद को उबालकर या भूनकर छोटे टुकड़ों में काट लें। इसमें सेंधा नमक, काली मिर्च, भुना जीरा पाउडर, नींबू का रस और हरा धनिया मिलाएं। चाहें तो ऊपर से अनार के दाने डालकर सर्व करें। झटपट स्वादिष्ट फलाहारी चाट तैयार की जा सकती है। यह हल्की, हेल्दी और एनर्जी देने वाली डिश है।

 

Rajgira Tikki (राजगीरा टिक्की)

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राजगीरे के आटे और उबले आलू से बनी टिक्की व्रत के लिए बेहतरीन स्नैक है। राजगीरे के आटे में उबले आलू, हरी मिर्च, हरा धनिया और सेंधा नमक मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसकी छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर तवे पर घी डालकर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। इसे फलाहारी हरी चटनी या दही के साथ परोसें। इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है।

मुंबई में ऐमजॉन की 35 लाख की नौकरी छोड़ सान्या देशमुख ने पुणे में चुना ये काम, आज अपने फैसले पर बेहद खुश

अच्छी सैलरी और बड़ी कंपनी में नौकरी हर किसी का सपना होती है। वहीं 31 वर्षीय सान्या देशमुख ने इससे बिल्कुल अलग रास्ता चुना। सान्या देशमुख ने कई साल तक बड़ी टेक कंपनियों में काम करते हुए अपना सफल करियर बनाया। 31 वर्षीय सान्या डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में बाइटडांस, इनमोबी और अमेजन जैसी नामी कंपनियों से जुड़ी रहीं। अमेजन में काम करते हुए उनकी सालाना सैलरी करीब 30 से 35 लाख रुपये थी। वहीं उनके पति की भी लगभग इतनी ही कमाई थी, जिससे दोनों की कुल सालाना आय 60 से 65 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई थी।

लेकिन सान्या देशमुख के पास अच्छी नौकरी के बाद भी उन्हें धीरे-धीरे महसूस होने लगा कि मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी उनके लिए सही नहीं है। इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला किया। अब वह नासिक में रहकर अपने बिजनेस पार्टनर के साथ डिजिटल मार्केटिंग का काम करती हैं।

कई जगहों पर किया काम

पुणे से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद सान्या देशमुख ने पारंपरिक इंजीनियरिंग की नौकरी करने के बजाय डिजिटल मार्केटिंग को अपना करियर बनाया। शुरुआत में उन्होंने फूड से जुड़ा एक सोशल मीडिया प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसकी लोकप्रियता ने उन्हें एक बड़ी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में नौकरी दिलाने में मदद की। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने करियर में तरक्की की और कई बड़ी कंपनियों में काम किया। सान्या पहले बाइटडांस से जुड़ीं, फिर भारत में बाइटडांस का कारोबार बंद होने के बाद उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद वह इनमोबी पहुंचीं और बाद में अमेजन के विज्ञापन कारोबार से जुड़े विभाग में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

करियर में आगे बढ़ते हुए सान्या ने शुरुआती पद से शुरुआत की और धीरे-धीरे टीम लीडर की जिम्मेदारी तक पहुंचीं। अमेजन में सान्या देशमुख को अपना काम पसंद था, लेकिन कॉर्पोरेट लाइफ की भागदौड़ धीरे-धीरे उनके लिए थकाऊ होती गई। उनके माता-पिता औरंगाबाद में और पति नासिक में रहते थे।

काफी त्योहार मिस किए

सान्या देशमुख ने मनीकंट्रोल से कहा, “अब मुझे सोमवार आने से पहले रविवार वाली घबराहट या तनाव महसूस नहीं होता।” सान्या देशमुख ने बताया, “शुरुआत में हमें हफ्ते में दो दिन ऑफिस आना होता था। बाद में यह तीन दिन और फिर पूरे पांच दिन हो गया। मैं हर रविवार शाम मुंबई के लिए निकलती थी, ऑफिस से काम करती थी और फिर वापस घर लौट आती थी।” उन्होंने बताया कि शादी के बाद लगातार शहरों के बीच सफर करना और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए धीरे-धीरे काफी मुश्किल और थकाने वाला हो गया था।

सान्या देशमुख ने कहा, “परिवार के कार्यक्रमों, त्योहारों और दूसरे खास मौकों पर शामिल होने के लिए हमें अक्सर छुट्टी लेनी पड़ती थी। ऐसे में कई बार हमें अपनों के साथ समय बिताने और भविष्य की यात्रा के लिए अपनी छुट्टियां बचाकर रखने के बीच चुनाव करना पड़ता था। हम परिवार के कई कार्यक्रम और त्योहार मिस कर रहे थे।”

किराए के लगते थे 65 हजार

सान्या देशमुख ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर भी पति-पत्नी के बीच गंभीर बातचीत होने लगी थी। ऑफिस आने-जाने का समय बचाने के लिए दोनों ने मुंबई में ऑफिस के पास एक बेडरूम का फ्लैट किराए पर लिया था, जिसका किराया करीब 65 हजार रुपये प्रति माह था। वे ये खर्च उठा सकते थे, लेकिन उन्हें लगने लगा कि लंबे समय तक ये व्यवस्था सही नहीं है। उन्होंने कहा, “हम अपनी कमाई, किराए, रोजमर्रा के खर्च और आखिर में कितनी बचत हो रही है, इन सभी बातों पर ध्यान देने लगे थे।”

मुंबई में बढ़ते खर्चों और बच्चों की परवरिश को लेकर सोचने के बाद सान्या और उनके पति ने नासिक में परिवार के साथ रहने का फैसला किया। यहां उन्हें किराया नहीं देना पड़ता, जिससे घर के खर्च में काफी कमी आई और उनकी बचत भी बढ़ गई।

पैसों को लेकर काफी कुछ सीखा

सान्या ने कहा कि, आय पहले से कम होने के बावजूद अब उनकी बचत पहले के मुकाबले ज्यादा हो रही है। सान्या देशमुख ने कहा, “जब हम मुंबई में रह रहे थे, तब मैं ठीक तरह से निवेश भी नहीं कर पा रही थी।” उन्होंने बताया कि उस समय उनकी ज्यादातर बचत PPF, कभी-कभी यात्रा और सोना खरीदने जैसे खर्चों में चली जाती थी। लेकिन अब उन्होंने SIP शुरू की, PPF में निवेश जारी रखा और पैसों के बेहतर प्रबंधन के लिए कई फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स भी किए। उन्होंने कहा, “मैंने निवेश और पैसों को मैनेज करने के बारे में काफी कुछ सीखा। इससे मेरा पूरा नजरिया बदल गया।”

नासिक आने के बाद सान्या की जिंदगी बदल गई। अब वह अपनी सेहत पर पूरा ध्यान देती हैं, नियमित जिम जाती हैं, खेलती हैं और पर्याप्त नींद व आराम भी करती हैं। सान्या देशमुख ने कहा, “अब काम का तनाव पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है।”

किसी बड़े प्लान के लिए नहीं छोड़ी नौकरी

उन्होंने कहा, “ऐसे भी दिन आए जब बढ़ते दबाव की वजह से मैं ऑफिस के वॉशरूम में जाकर खुद को बंद कर लेती थी और रोने लगती थी।” सान्या ने पहले से तय किसी बड़े प्लान के तहत नौकरी नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी तय समय-सीमा से करीब एक साल पहले ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने कुछ समय का ब्रेक लिया और फिर एक प्रोफेशनल साथी के साथ मिलकर डिजिटल मार्केटिंग का अपना कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें क्लाइंट मिलने लगे और अब उनका यह बिजनेस पिछले आठ महीनों से सफलतापूर्वक चल रहा है।

फैसले पर कोई अफसोस नहीं

सान्या ने कहा कि, नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें सबसे बड़ी खुशी अपना समय वापस मिलने की है। अब वह परिवार के साथ ज्यादा समय बिताती हैं। सान्या देशमुख ने कहा, “कमाई भले ही पहले से कम हो गई हो, लेकिन मुझे लगता है कि यह फैसला सही था। मौके हमेशा मिलते रहते हैं। लोगों को सबसे ज्यादा डर हर महीने मिलने वाली सैलरी छोड़ने का होता है। लेकिन जब आपके आर्थिक लक्ष्य साफ होते हैं, तो आप अपनी जिंदगी के लिए अलग फैसले लेने की हिम्मत जुटा लेते हैं।”

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

The image caption features a message about monsoon special snack recipes, accompanied by a photo of plates arranged with Palak Patta Chaat, Dal Vada, Samosas, and Potato Tacos

Rainy Day Snacks: रिमझिम फुहारें और ठंडी हवाएं… मानसून का मौसम आते ही दिल कुछ गरमा-गरम और चटपटा खाने के लिए मचलने लगता है। इस मौसम में बालकनी में बैठकर बारिश को निहारते हुए अगर हाथ में स्नैक्स की प्लेट हो, तो मजा दोगुना हो जाता है। अगर आप भी इस बार पारंपरिक पकौड़ों से हटकर कुछ नया और बेहद लाजवाब ट्राई करना चाहते हैं, तो यहाँ 5 मानसून स्पेशल स्नैक्स रेसिपीज दी गई हैं:ALSO READ: बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

 

1. चटपटा 'पालक पत्ता चाट' 

बारिश में चाट खाने का अपना ही मजा है। यह स्नैक दिखने में जितना फैंसी है, बनाने में उतना ही आसान।

 

कैसे बनाएं: पालक के बड़े और साफ पत्तों को बेसन, अजवाइन और नमक के गाढ़े घोल में डुबोकर एकदम क्रिस्पी होने तक तल लें। अब इन कुरकुरे पत्तों को एक प्लेट में सजाएं। ऊपर से फेंटा हुआ मीठा दही, हरी चटनी, इमली की खट्टी-मीठी चटनी, चाट मसाला और नायलॉन सेव डालकर तुरंत सर्व करें।

 

2. गरमा-गरम 'दाल वड़ा' 

दक्षिण भारत का यह मशहूर स्नैक मानसून में कमाल का लगता है। यह ऊपर से बेहद कुरकुरा और अंदर से सॉफ्ट होता है।

 

कैसे तैयार करें: चना दाल को 3-4 घंटे भिगोकर बिना पानी के दरदरा पीस लें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, ढेर सारा कढ़ी पत्ता, अदरक और हींग मिलाएं। इस मिश्रण की छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर गरम तेल में सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें। इसे नारियल की चटनी के साथ परोसें। चाय के साथ गरमा-गरम 'दाल वड़ा' का आनंद लें।

 

3. अचारी पनीर टिक्का समोसा

आलू समोसा तो हमेशा खाते हैं, इस बार बारिश में कुछ रॉयल ट्राई करें। समोसे के अंदर पनीर टिक्का की स्टफिंग हर बाइट में मजा ला देगी।

 

कैसे तैयार करें: पनीर के छोटे टुकड़ों को दही, तंदूरी मसाला, कसूरी मेथी और थोड़े से अचार के मसाले के साथ मैरीनेट करें और तवे पर हल्का सा टॉस कर लें। अब समोसे की पट्टी (शीट्स) में इस अचारी पनीर को भरकर समोसे का आकार दें और फ्राई करें। पुदीने की तीखी चटनी के साथ यह लाजवाब लगता है।

 

4. क्रिस्पी पोटैटो टाकोस

अगर बच्चों और बड़ों दोनों को खुश करना है, तो यह इंडो-मैक्सिकन फ्यूजन स्नैक बेस्ट है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए आलुओं में चाट मसाला, चिली फ्लेक्स, प्याज और हरा धनिया मिलाकर एक स्टफिंग तैयार करें। अब बची हुई रोटियों या मैदा की शीट पर इस स्टफिंग को फैलाएं, ऊपर से ढेर सारा चीज डालें और इसे आधे चांद के आकार में मोड़ लें। तवे पर मक्खन या तेल लगाकर इसे दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी होने तक सेकें।

 

5. मॉनसून स्पेशल 'चीज़ कॉर्न बॉल्स' 

बारिश और भुट्टे का रिश्ता बहुत पुराना है। इस बार भुट्टे को एक चीजी और क्रिस्पी ट्विस्ट दें।

 

कैसे तैयार करें: उबले हुए कॉर्न को थोड़ा दरदरा क्रश कर लें। इसमें उबला आलू, कद्दूकस किया हुआ मोजेरेला चीज, काली मिर्च और नमक मिलाएं। इसके छोटे-छोटे बॉल्स बनाएं, उन्हें कॉर्नफ्लोर के घोल में डुबोएं और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में लपेटकर कुरकुरा होने तक तल लें।

 

स्मार्ट कुकिंग टिप: बारिश के मौसम में स्नैक्स को और भी क्रिस्पी बनाने के लिए बेसन या मैदे के घोल में 1 से 2 चम्मच चावल का आटा या गरम तेल जरूर मिलाएं। इससे स्नैक्स लंबे समय तक कुरकुरे रहते हैं।

 

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Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

The image depicts the problems that occur when blood sugar levels drop

Signs of Low Blood Sugar: शरीर में शुगर यानी ग्लूकोज का स्तर कम होना एक ऐसी स्थिति है जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। हमारे दिमाग और शरीर को ठीक से काम करने के लिए ग्लूकोज की लगातार जरूरत होती है। जब इसका स्तर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो शरीर तुरंत खतरे के संकेत भेजने लगता है।

 

आमतौर पर यह समस्या मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में अधिक देखी जाती है, लेकिन कई बार लंबे समय तक भूखे रहने, अत्यधिक व्यायाम, कुछ दवाओं के सेवन या अन्य स्वास्थ्य कारणों से गैर-डायबिटिक लोगों में भी हो सकती है। शुरुआत में हल्की कमजोरी, पसीना आना या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शुगर कम होने पर शरीर में क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं, उनके शुरुआती संकेत क्या हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए।

 

शरीर में शुगर कम होने पर दिखने वाले लक्षणों को हम इस तरह समझ सकते हैं:ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

 

1. जब शुगर कम होना शुरू होती है, जानें शुरुआती लक्षण

जैसे ही ब्लड शुगर का लेवल गिरता है, शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) हार्मोन बढ़ने लगता है, जिससे ये शुरुआती परेशानियां होती हैं:

 

अचानक तेज भूख लगना: शरीर ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए तुरंत खाने के संकेत देता है।

 

चक्कर आना या कमजोरी: सिर हल्का महसूस होने लगता है और पैर डगमगाने लगते हैं।

 

चिड़चिड़ापन या मूड बदलना: अचानक बिना बात के गुस्सा आना, रोने का मन करना या घबराहट होना।

 

हाथ-पैरों में कंपन या घबराहट: बिना किसी कारण के शरीर में कंपकंपी महसूस होने लगती है।

 

अत्यधिक पसीना आना और ठंड लगना: बिना गर्मी के भी अचानक विशेषकर गर्दन के पीछे ठंडा पसीना आने लगता है।

 

दिल की धड़कन तेज होना: ऐसा महसूस होना कि दिल बहुत तेजी से धड़क रहा है (Palpitations)।

 

2. जब शुगर बहुत ज्यादा गिर जाएल जानें गंभीर लक्षण

यदि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए और दिमाग को पर्याप्त ग्लूकोज न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है:

 

आंखों के सामने धुंधलापन आना: साफ दिखाई न देना या एक की जगह दो चीजें दिखना।

 

भ्रम की स्थिति: बात समझने में दिक्कत होना या लड़खड़ाती आवाज में बोलना या सही से बोल न पाना।

 

नींद न खुलना या सुस्ती: बहुत ज्यादा सुस्ती छा जाना और सोने की इच्छा होना।

 

दौरे पड़ना या बेहोशी: यह सबसे खतरनाक स्थिति है, जहां व्यक्ति अचानक अचेत (Unconscious) हो सकता है।ALSO READ: पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

 

आपातकालीन स्थिति में क्या करें? 

यदि आपको या आपके आस-पास किसी को शुगर कम होने के लक्षण दिखें, तो तुरंत '15:15 का नियम' अपनाएं:

 

1. तुरंत करें ये उपाय

15 ग्राम तुरंत पचने वाला कार्बोहाइड्रेट लें: जैसे ही लक्षण दिखें, मरीज को 3-4 चम्मच चीनी/ग्लूकोज पाउडर, 1/2 कप फ्रूट जूस, या 4-5 टॉफी चूसने के लिए दें। ध्यान रखें: चॉकलेट या बिस्कुट न दें, क्योंकि इनमें मौजूद फैट शुगर को जल्दी बढ़ने नहीं देता।

 

2. 15 मिनट का इंतजार करें

कुछ भी मीठा खिलाने के बाद मरीज को शांत बैठने दें या आराम करने दें और 15 मिनट तक इंतजार करें ताकि शुगर शरीर में एब्जॉर्ब हो सके।

 

3. ब्लड शुगर दोबारा चेक करें

15 मिनट बाद ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल दोबारा मापें। यदि लेवल अभी भी 70 mg/dL से कम है, तो स्टेप 1 को दोबारा दोहराएं।

 

4. नॉर्मल खाना या स्नैक दें

जब शुगर लेवल 70 mg/dL से ऊपर आ जाए, तो मरीज को एक रोटी या बिस्कुट जैसी ठोस चीज खिलाएं ताकि शुगर लेवल दोबारा नीचे न गिरे। यह शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करेंगा।

 

महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि व्यक्ति बेहोश हो गया हो या कुछ भी निगलने की स्थिति में न हो, तो उसके मुंह में जबरदस्ती पानी, जूस या चीनी बिल्कुल न डालें। इससे वह उसकी सांस की नली में फंस सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाएं ताकि उसे ग्लूकोज का इंजेक्शन (IV Fluids) दिया जा सके।

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Alpine Texworld IPO Listing: लिस्ट होते ही लोअर सर्किट, फ्लैट एंट्री के बाद शेयर धड़ाम

Alpine Texworld IPO Listing: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के साथ-साथ मार्केट में अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का भी आईपाओ लॉन्च हुआ था। एक तरफ एसबीआई फंड्स के आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी तो दूसरी तरफ अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के आईपीओ को ओवरऑल 1.40 गुना बोली मिली थी। अब दोनों के शेयर आज लिस्ट हुए हैं। एसबीआई फंड्स के शेयर तो 6% से अधिक प्रीमियम पर लिस्ट हुए तो अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के शेयर एकदम फ्लैट।

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के शेयर आईपीओ के तहत ₹105 के भाव पर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹105.00 और NSE पर ₹105.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर फिसल गए। टूटकर BSE पर यह ₹99.75 (Alpine Texworld Share Price) के लोअर सर्किट पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 5% घाटे में हैं।

Alpine Texworld IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का ₹126 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का सुस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 1.40 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.09 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.09 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.54 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 1,20,24,000 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹32.08 करोड़ प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में नई वीविंग यूनिट लगाने, ₹52.20 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Alpine Texworld के बारे में

अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड कपड़ों की डाईंग और प्रोसेसिंग के बिजनेस में है। इसके पास दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। इसकी सालाना इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 6 हजार टन के कॉटन और ब्लेंडेड यार्न की है। इसके पास 112 हाई-स्पीड लूम हैं जो डेनिम, सूटिंग शर्टिंग, और RFD (रेडी-फॉर-डाईंग) फैब्रिक बनाते हैं। कंपनी को फिलहाल फोकस ग्रीन एनर्जी पर है और रिन्यूएबल एनर्जी सेगमेंट पर भी ध्यान दे रही है। अल्पाइन टेक्सवर्ल्ड के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष 2026 में इसका शुद्ध 151.68% बढ़कर ₹21.72 करोड़ और टोटल इनकम 47.34% उछलकर ₹350.18 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹177.60 करोड़ का कर्ज था तो रिजर्व और सरप्लस में ₹46.32 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Funds IPO Listing: 6% प्रीमियम पर शेयर लिस्ट, आईपीओ को तगड़ी बोली के बाद प्रीमियम लिस्टिंग

SBI Funds IPO Listing: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 41 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹574 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹610.00 और NSE पर ₹613.30 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 6% से अधिक लिस्टिंग गेन (SBI Funds Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹622.80 (SBI Funds Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 8.50% मुनाफे में हैं। एंप्लॉयीज अधिक फायदे में हैं क्योंकि उन्हें हर शेयर ₹54 के डिस्काउंट पर मिला है।

SBI Funds IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

एसबीआई फंड्स का ₹9813 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 14-16 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 41.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 140.11 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 22.51 गुना खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.76 गुना, एंप्लॉयीज का हिस्सा 4.65 गुना और शेयरहोल्डर्स का हिस्सा 9.52 गुना भरा था।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ के तहत कोई नया शेयर नहीं जारी हुआ हैं बल्कि ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 17,09,56,631 शेयरों की बिक्री हुई है। इसमें से 12,83,34,397 शेयर एसबीआई और 7,53,74,842 शेयर एमुंडी इंडिया होल्डिंग ने बेचे हैं। चूंकि यह इश्यू पीरी तरह से ऑफर फॉर सेल का था तो आईपीओ का पैसा कंपनी को नहीं मिला बल्कि शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स एसबीआई और एमुंडी इंडिया को मिला।

SBI Funds Management के बारे में

AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) के हिसाब से देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट एसबीआई म्यूचुअल फंड को मैनेज करती है। यह एसबीआई और एमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। यह इक्विटी फंड्स, डेट फंड्स, हाइब्रिड फंड्स, ईटीएफ और PMS (पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज) जैसे निवेश प्रोडक्ट्स ऑफर करती है। 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह र्16.32 लाख करोड़ के एसेट्स मैनेज कर रही है जोकि म्यूचुअल फंड्स को कुल एयूएम का करीब 15.5% है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से इंडिविजुअल और इंस्टीट्यूशनल मिलाकर इसके 1.60 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। इसके पोर्टफोलियो में 126 म्यूचुअल फंड स्कीम्स हैं।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 21% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹3,067.38 करोड़ और टोटल इनकम भी इस दौरान 20% के सीएजीआर से उछलकर ₹4,976.11 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में ₹326.73 करोड़ पड़े थे।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sonam Wangchuk: 23 दिन से भूख हड़ताल…कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? सफदरजंग अस्पताल ने दिया हेल्थ अपडेट

राजधानी दिल्ली में सोमवार 20 जुलाई को खूब गहमा-गहमी दिखी। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ अभियान में काफी कुछ देखने को मिला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। वहीं दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अब अस्पताल में भर्ती हैं। उनके हेल्थ को लेकर अस्पताल से बड़ी जानकारी दी है।

बता दें कि, सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा है कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक युवा प्रतिनिधियों को सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिल जाती या उन्हें खुद अस्पताल से जाकर मुलाकात करने की इजाजत नहीं दी जाती। फिलहाल सोनम वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके ब्लड शुगर स्तर को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अस्पताल की ओर से बताया गया है कि उन्हें शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिया जा रहा है।

डॉक्टरों की टीम लगातार कर रही निगरानी

सोमवार को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक का इलाज वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के अनुसार, उनकी जरूरी स्वास्थ्य जांच के सभी प्रमुख संकेत फिलहाल स्थिर हैं। अस्पताल ने कहा कि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। हालांकि, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और पोटैशियम सिरप दिए जाने के बाद खून से जुड़े दूसरे जांच परिणामों में सुधार देखा गया है।

बुलेटिन के मुताबिक, वीएमएमसी, सफदरजंग अस्पताल और एम्स, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) से पूरी तरह उबरने और किसी भी संभावित परेशानी का समय रहते पता लगाने के लिए लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है। अस्पताल ने यह भी बताया कि आगे का इलाज उनकी सेहत में होने वाले सुधार और लैब जांच की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।

Viral Post: ‘न घर, न कार, न बड़ा बैंक बैलेंस’ 35 साल के इस शख्स ने बताई अपनी सबसे बड़ी दौलत

सोशल मीडिया पर इस समय एक शख्स की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में व्यक्ति ने लोगों से संपत्ति जोड़ने की बजाय अपनी सेहत को प्राथमिकता देने की बात कही है। शख्स के मुताबिक लाइफ में सबसे बड़ा निवेश अच्छी सेहत है, इसलिए घर और गाड़ी जैसी पारंपरिक उपलब्धियों से पहले स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। व्यक्ति का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं लोगों ने इस पर कई कमेंट किए हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आशीष जैन ने ये पोस्ट किया है। इस पोस्ट में आशीष जैन ने कहा कि उन्होंने भविष्य की जरूरत से ज्यादा चिंता करना छोड़ दिया और अपनी सेहत को सबसे ऊपर रखना शुरू किया। इसी सोच के साथ उन्होंने करीब एक साल पहले धूम्रपान छोड़ दिया और जंक फूड का सेवन भी काफी कम कर दिया।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

आशीष जैन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं 35 साल का हूं। मेरे पास न अपना घर है, न कार, न बड़ा बैंक बैलेंस, न स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड्स का बड़ा पोर्टफोलियो और न ही कोई शानदार नौकरी। लेकिन मैं एक अच्छे किराए के घर में रहता हूं, जरूरत पड़ने पर Uber से सफर कर लेता हूं और मुझ पर कोई कर्ज नहीं है। पिछले साल के मुकाबले मेरी सेहत बेहतर हुई है, मानसिक रूप से भी मैं पहले से ज्यादा मजबूत महसूस करता हूं।” आशीष जैन ने अपनी पोस्ट में बताया कि पिछले एक साल के दौरान उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पहले से काफी बेहतर हुई है।

 

तनाव लेना कम कर दिया

उनका कहना है कि उन्होंने उन छोटी-छोटी बातों की चिंता करना छोड़ दिया है, जिनका भविष्य में कोई खास महत्व नहीं रहेगा। पोस्ट में आशीष ने आगे लिखा, “मैंने उन छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेना छोड़ दिया, जिनका एक साल बाद कोई मतलब नहीं रहेगा। मैंने खुद पर घर या कार खरीदने का दबाव डालना बंद कर दिया और भविष्य की जरूरत से ज्यादा चिंता भी छोड़ दी है। अब मेरा पूरा ध्यान अपने शरीर और दिमाग को बेहतर बनाने पर है। एक साल से ज्यादा समय हो गया है, मैंने स्मोकिंग छोड़ दी है और जंक फूड भी काफी कम कर दिया है। हर चीज जानना या हर लक्ष्य हासिल करना जरूरी नहीं है। जिंदगी जैसे चल रही है, उसे स्वीकार करें और सबसे पहले खुद पर ध्यान दें।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

लोगों ने किया कमेंट

पोस्ट पर कई यूजर्स ने आशीष जैन की सोच का समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा, “जीरो कर्ज, भविष्य की जीरो टेंशन, स्मोकिंग छोड़ना और दूसरों से तुलना न करना… यह उन कई 35 साल के लोगों से कहीं बेहतर बैलेंस शीट है जिन्हें मैं जानता हूं।” एक अन्य यूजर ने कहा, “मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं। यही जिंदगी जीने का सबसे व्यावहारिक तरीका है। हमेशा आभार के साथ जिएं और यह समझें कि असली मुकाबला खुद से होता है, किसी और की इंस्टाग्राम लाइफस्टाइल से नहीं।” वहीं, एक तीसरे यूजर ने लिखा, “दूसरों से तुलना करने पर मंजिल हमेशा दूर होती जाती है, लेकिन मन की शांति नहीं मिलती। पहले अंदर से मजबूत बनिए, उसके बाद बाकी चीजें हासिल करना आसान हो जाएगा।”