पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को आज ही अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। उनकी सेहत की जांच और इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड भी बनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन से इमरान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट मांगी। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि कोर्ट के सामने पूरी रिपोर्ट के बजाय सिर्फ उसकी समरी पेश की गई है। तीन जजों की बेंच इमरान के इलाज और परिवार से मुलाकात से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की। इसमें जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल थे। रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत पर चिंता जताई जेल प्रशासन की रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में एंजियोग्राफी कराने की सलाह का जिक्र था। इस पर इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल ने बताया कि यह जांच जेल के बाहर अस्पताल में कराई जा सकती है। PTI के वकील ने इमरान के शरीर में ब्लड क्लॉट बनने की वजह पता लगाने और उनके निजी डॉक्टरों से जांच कराने की मांग भी की। कोर्ट बोला- इमरान की सेहत पर राजनीति न करें सुप्रीम कोर्ट ने PTI से इमरान की मेडिकल स्थिति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने को कहा। कोर्ट ने मुलाकात के बाद PTI नेताओं और परिवार की ओर से मीडिया में दिए जाने वाले बयानों पर भी सवाल उठाए। जस्टिस अफगान ने कहा कि पार्टी को यह तय करना चाहिए कि इमरान की सेहत को लेकर राजनीति न हो। कोर्ट ने इमरान की बहनों से मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाया। जस्टिस वहीद ने कहा कि बहनों से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले तीन साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों की जानकारी मांगी। इमरान के बेटों से उनकी बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जानकारी भी देने को कहा गया है। जेल रिपोर्ट में आंखों की बीमारी का जिक्र अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इमरान की दो पेज की मेडिकल रिपोर्ट जमा की थी। इसमें उनकी आंख की बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (CRVO) का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान का इस बीमारी का इलाज चल रहा है और उनकी प्रभावित आंख की नजर लगभग सामान्य हो गई है। रिपोर्ट में 4 नवंबर 2023 से 10 अगस्त 2026 के बीच 39 मेडिकल जांचों का भी जिक्र किया गया है। 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उन पर कई मामले दर्ज हुए। इनमें सरकारी तोहफों और गैरकानूनी शादी से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इमरान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं।
Sham Foam IPO Listing: घरेलू इस्तेमाल से लेकर जरूरत के मुताबिक इंडस्ट्रीज के लिए गद्दे बनाने वाली शैम फोम के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर भारी डिस्काउंट के साथ एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 2 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹130 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹104.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला बल्कि लिस्टिंग पर 20% पूंजी ही घट गई। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹101.55 (Sham Foam Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 21.88% घाटे में हैं।
Sham Foam IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
शैम फोम का ₹40 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 11-13 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 2.40 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 2.17 गुना और खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित आधा हिस्सा 2.62 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 31.14 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹14.72 करोड़ मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में मशीनरी और इक्विपमेंट्स की खरीदारी और सिविल कंस्ट्रक्शन, ₹14.25 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
Sham Foam के बारे में
शैम फोम पीयू (फॉलीयूरेथेन) फोम, गद्दे और आराम देने वाले दूसरे घरेलू प्रोडक्ट्स बनाती है। इसके अलावा यह इंडस्ट्रियल ग्रेड के भी पीयू फोम बनाती है, जिनका इस्तेमाल फर्नीचर, कपड़े, स्पोर्ट्स गुड्स और ऑटोमोटिव समेत कई इंडस्ट्रीज में होता है। इसके गद्दे फेदरफ्रेश और रेस्टिविया ब्रांड के तहत बिकते हैं। एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड कंपनी होने के नाते यह पूरी वैल्यू चेन को मैनेज करती है, प्रोडक्ट डिजाइन और इंजीनियरिंग से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और कस्टमर एंगेजमेंट तक। यह बिहार, चंडीगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई शहरों में अपने प्रोडक्ट्स की सप्लाई करती है।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 71% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹8.65 करोड़ और टोटल इनकम करीब 12% के सीएजीआर से ₹92.39 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹3.99 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹12.74 करोड़ पड़े थे।
Milky Mist IPO Listing: मिल्की मिस्ट की क्रीम एंट्री, ₹165 पर लिस्ट ₹140 का शेयर
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Rhea Chakraborty: एक्टर रिया चक्रवर्ती की जिंदगी 2020 में उनके एक्स-बॉयफ्रेंड सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पूरी तरह बदल गई थी। कुछ महीने पहले, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सुशांत की मौत के मामले में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की और रिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया। सुशांत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती, दोनों को गिरफ्तार किया था।
रिया ने क्या कहा?
रिया अभी ‘द ट्रेटर्स’ के सीज़न 2 में नजर आ रही हैं। वह फराह खान के यूट्यूब व्लॉग में शामिल होने वाली लेटेस्ट सेलिब्रिटी थीं, जहां दोनों ने एक्टर के ‘चैप्टर 2’ के बारे में बात की। रिया ने बताया कि सुशांत की मौत और उसके बाद अपनी गिरफ्तारी के दौरान जब उन पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा था, तो उनके परिवार को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, जो एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर और पूर्व मेडिकल कॉर्प्स एडमिनिस्ट्रेटर/डॉक्टर हैं, उन्हें भी एक झटका लगा क्योंकि उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था।
उन्होंने बताया, “पापा को शहर के एक बहुत बड़े अस्पताल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट की बहुत अच्छी नौकरी मिली थी… और फिर उन्हें उनका सरनेम पता चला और उन्होंने कहा, ‘सॉरी, आप रिया चक्रवर्ती के पिता हैं, इसलिए आप यहां काम नहीं कर सकते’।” व्लॉग में रिया के पिता फराह से भी मिले और कहा कि वह उस अच्छे खाने का इंतजार कर रहे हैं, जो वे अपनी नई किचन में बनाएंगी। फराह ने जवाब दिया कि वह उनके लिए रोस्ट चिकन लाई हैं।
2020 में अपने एक्स-बॉयफ्रेंड, एक्टर सुशांत की मौत के बाद रिया को जेल की सजा और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा था। पिछले साल, इस मामले में CBI की क्लोज़र रिपोर्ट से उन्हें राहत मिली, क्योंकि उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। अपने पिछले इंटरव्यू में उन्होंने माना था कि इस पूरे घटनाक्रम का उनकी मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ा और उन्हें PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) का सामना करना पड़ा।
‘द ट्रेटर्स 2’ में रिया के बारे में और जानकारी
शो में, कंटेस्टेंट मल्लिका शेरावत की एक तंज भरी टिप्पणी के बाद रिया को जेल में बिताए अपने समय की याद आ गई। यह तब शुरू हुआ जब मुनव्वर फारुकी ने मल्लिका की “वापसी” (कमबैक) के बारे में कुछ कहा और रिया ने उनका बचाव किया। रिया कहती हैं, “मुझे नहीं लगता कि वह कोई बहुत बुरी बात थी।” मल्लिका जवाब देती हैं, “ओह, तो यह तुम्हारा कमबैक है? रिया, वह इस पर कमेंट करने वाले कौन होते हैं? क्या यह गेम कमबैक के बारे में है? मैं भी कह सकती हूं, ‘ओह रिया, तुम जेल में थीं। क्या यह तुम्हारे लिए बड़ा कमबैक है?'” रिया ने कहा कि मल्लिका का कमेंट, मुनव्वर की गई टिप्पणी की तुलना में कहीं ज़्यादा निजी थी।
इस सीज़न की सेलिब्रिटी लाइन-अप में आदित्य कुलश्रेष्ठ (कुल्लू), अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान), अंश चोपड़ा, दलीप ताहिल, हरमन सिंघा, इक्का सिंह, करण सिंह मैजिक, क्रिस्टल डिसूज़ा, मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारुकी, पारुल गुलाटी, प्रिश और रणवीर बराड़ शामिल हैं। रिया चक्रवर्ती, रिदा थराना, साहिल सलाथिया, शाहनील गिल, शालिनी पासी, श्वेता तिवारी, सौंदस मौफकिर और तान्या पुरी भी नए सीज़न का हिस्सा हैं।
जब लोग ‘कार्डियो’ शब्द सुनते हैं, तो अक्सर सबसे पहले दौड़ने (रनिंग) का ख्याल आता है। लेकिन कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस बेहतर करने के लिए आपको दौड़ने की ज़रूरत नहीं है। पैदल चलना, तैराकी और हाई-इंटेन्सिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) – ये सभी असरदार कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट हो सकते हैं और हर एक के अपने अलग-अलग फ़ायदे हैं।
बेंगलुरु के महादेवपुरा स्थित KIMS हॉस्पिटल्स में कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर और लीड कंसल्टेंट डॉ. दीपक कृष्णमूर्ति के अनुसार, कार्डियो का सबसे अच्छा तरीका जरूरी नहीं कि सबसे जयादा जोरदार वाला ही हो। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “सबसे असरदार कार्डियो एक्सरसाइज़ वह है जिसे आप सुरक्षित रूप से, लगातार और मजे के साथ कर सकें। दौड़ना एक बेहतरीन कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज है, लेकिन यह निश्चित रूप से एकमात्र विकल्प नहीं है। अगर पैदल चलना, तैराकी और HIIT को नियमित एक्सरसाइज़ रूटीन में सही ढंग से शामिल किया जाए, तो ये सभी कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस को बेहतर बना सकते हैं।”
पैदल चलना- आसान, असरदार और जोड़ों के लिए सुरक्षित
जो लोग लंबे समय से कोई शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे हैं, उनके लिए रोजाना की दिनचर्या में कार्डियो एक्सरसाइज़ शामिल करने का सबसे आसान तरीका तेज चलना (ब्रिस्क वॉकिंग) हो सकता है। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “पैदल चलने को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि यह बहुत आसान है, लेकिन नियमित रूप से तेज चलने से कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस में काफ़ी सुधार हो सकता है। यह खास तौर पर बुज़ुर्गों, शुरुआत करने वालों और लंबे ब्रेक के बाद दोबारा एक्सरसाइज़ शुरू करने वाले लोगों के लिए फ़ायदेमंद है।”
पैदल चलना एक कम-ज़ोर वाली (लो-इम्पैक्ट) गतिविधि भी है, जिसमें दौड़ने की तुलना में जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है। इसकी तीव्रता को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है – जैसे कि चाल तेज़ करके, चढ़ाई पर चलकर या चलने का समय बढ़ाकर।
तेज चलने के फ़ायदे
रोज़ाना तेज़ चलने से कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस बेहतर हो सकती है, कैलोरी बर्न करने और वज़न कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में सुधार हो सकता है, पैरों की मांसपेशियाँ मज़बूत हो सकती हैं, स्टैमिना बढ़ सकता है और एक्टिव रहने का एक ऐसा तरीका मिल सकता है जो जोड़ों के लिए भी सुरक्षित हो।
डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “पहले ही दिन से बहुत तेज़ी से चलने की कोशिश करने के बजाय, ऐसी अवधि से शुरुआत करना ज़्यादा ज़रूरी है जिसे आप आसानी से कर सकें और फिर धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार और दूरी बढ़ाएँ।”
तैराकी- पूरे शरीर का कार्डियो वर्कआउट
तैराकी एक अलग तरह की कार्डियोवैस्कुलर चुनौती देती है क्योंकि शरीर को पानी के दबाव (रेज़िस्टेंस) के ख़िलाफ़ हिलना-डुलना पड़ता है। साथ ही, पानी की उछाल (buoyancy) जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करती है।
डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “जो लोग कम-ज़ोर वाले कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट की तलाश में हैं, उनके लिए तैराकी एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें शरीर के कई बड़े मसल्स का इस्तेमाल होता है, जबकि पानी का रेजिस्टेंस शरीर को लगातार काम करने पर मजबूर करता है।”
इस वजह से तैराकी उन लोगों के लिए खास तौर पर आकर्षक हो सकती है जिन्हें ज़्यादा ज़ोर-शोर वाली गतिविधियां (हाई-इम्पैक्ट एक्टिविटीज़) आरामदायक नहीं लगतीं या जो अपनी एक्सरसाइज़ रूटीन में कुछ नयापन लाना चाहते हैं। हालांकि, पूल तक पहुंच और तैरने की बुनियादी जानकारी होना ज़रूरी है। जो लोग शुरुआत कर रहे हैं और पानी में सहज महसूस नहीं करते, उन्हें सीधे ज़ोरदार कसरत के तौर पर तैराकी शुरू करने के बजाय, पहले तैराकी की सही तकनीक सीखनी चाहिए।
तैराकी के फ़ायदे
तैराकी से कार्डियोवैस्कुलर क्षमता बेहतर हो सकती है, शरीर की कई मांसपेशियों पर एक साथ काम होता है, मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ती है, कैलोरी बर्न होती है, कुल मिलाकर स्टैमिना बेहतर होता है, कम दबाव वाला वर्कआउट मिलता है और वज़न उठाने वाले जोड़ों पर तनाव कम होता है।
डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “क्योंकि तैराकी में कार्डियोवैस्कुलर गतिविधि और मांसपेशियों का इस्तेमाल दोनों शामिल होते हैं, इसलिए यह एक बहुत असरदार वर्कआउट हो सकता है।” “हालांकि, इसकी तीव्रता व्यक्ति के फ़िटनेस लेवल के हिसाब से होनी चाहिए।”
HIIT- छोटा लेकिन ज़ोरदार
जिन लोगों के पास समय कम है, उनके लिए HIIT (हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग) कार्डियो का एक अच्छा और समय बचाने वाला तरीका हो सकता है। HIIT में ज़ोरदार एक्सरसाइज़ और आराम या कम-तीव्रता वाली गतिविधि के बीच बारी-बारी से बदलाव किया जाता है। व्यक्ति के फ़िटनेस लेवल के आधार पर, एक सेशन में तेज़ साइकलिंग, दौड़ना, बॉडीवेट एक्सरसाइज़ या दूसरी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।
डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “HIIT कम समय में कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को मजबूत स्टिमुलस दे सकता है। लेकिन क्योंकि इसकी तीव्रता ज़्यादा होती है, इसलिए यह हर किसी के लिए सही नहीं होता है।” शुरुआत करने वालों को सीधे बहुत मुश्किल HIIT सेशन नहीं करने चाहिए। जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें भी ज़ोरदार ट्रेनिंग शुरू करने से पहले सही मेडिकल और एक्सरसाइज़ से जुड़ी सलाह लेनी चाहिए।
HIIT के फ़ायदे
सही तरीके से करने पर, HIIT कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस को बेहतर बना सकता है, कम समय के वर्कआउट में एक्सरसाइज़ की तीव्रता बढ़ा सकता है, सहनशक्ति (एंड्योरेंस) बढ़ा सकता है, कैलोरी बर्न करने में मदद कर सकता है, एक्सरसाइज़ रूटीन में विविधता ला सकता है, कार्डियोवैस्कुलर और मस्कुलर सिस्टम दोनों को चुनौती दे सकता है, और उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें लंबे वर्कआउट के लिए समय नहीं मिल पाता है।
डॉ. कृष्णमूर्ति बताते हैं, “HIIT का मतलब सिर्फ़ जितनी हो सके उतनी ज़ोरदार एक्सरसाइज़ करना नहीं है। इंटरवल, रिकवरी पीरियड और एक्सरसाइज़ की तीव्रता को व्यक्ति की फ़िटनेस और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार एडजस्ट किया जाना चाहिए।”
तो कौन सी कार्डियो एक्सरसाइज़ सबसे अच्छी है?
कार्डियो के मामले में कोई एक चीज़ सबसे अच्छी नहीं होती। वॉकिंग, स्विमिंग और HIIT अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा करते हैं, और सही चुनाव व्यक्ति के फ़िटनेस लेवल, सेहत, पसंद, उपलब्ध समय और सुरक्षित रूप से एक्सरसाइज़ करने की क्षमता पर निर्भर करता है।
डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “जो लोग रोज़ाना आसान कार्डियो करना चाहते हैं, उन्हें तेज़ी से चलने (ब्रिस्क वॉकिंग) से बहुत फ़ायदा हो सकता है। जो लोग कम-इम्पैक्ट वाला, पूरे शरीर का वर्कआउट चाहते हैं, उनके लिए स्विमिंग बेहतर हो सकती है, जबकि HIIT उन लोगों के लिए सही हो सकता है जो पहले से ही फ़िट हैं और ज़्यादा ज़ोरदार, कम समय में होने वाला सेशन चाहते हैं।”
परफ़ेक्ट वर्कआउट चुनने से ज़्यादा ज़रूरी है उसे लगातार करना
लोग सबसे बड़ी गलतियों में से एक यह करते हैं कि वे सिर्फ़ “सबसे अच्छी” एक्सरसाइज़ खोजने पर बहुत ज़्यादा ध्यान देते हैं और उसे नियमित रूप से करने पर बहुत कम। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “कार्डियो के फ़ायदे लगातार करने से मिलते हैं। अगर आप बहुत मुश्किल वर्कआउट को कभी-कभार करते हैं और उसे जारी नहीं रख पाते, तो उसका कोई खास फ़ायदा नहीं होता।”
अलग-अलग तरह के कार्डियो को मिलाने से एक्सरसाइज़ ज़्यादा मज़ेदार भी हो सकती है। कोई व्यक्ति अपनी फ़िटनेस और मेडिकल स्थिति के आधार पर ज़्यादातर दिन टहल सकता है, हफ़्ते में एक या दो बार तैर सकता है और कभी-कभी ज़्यादा ज़ोरदार सेशन भी कर सकता है।
ऐसा कार्डियो चुनें जिसे आप लंबे समय तक कर सकें
दौड़ना (रनिंग) एक बेहतरीन कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज़ है, लेकिन यह एकमात्र विकल्प नहीं है। तेज़ी से चलना (ब्रिस्क वॉकिंग) शुरुआत करने का एक आसान तरीका हो सकता है, स्विमिंग से पूरे शरीर का कम-इम्पैक्ट वाला वर्कआउट मिल सकता है, और समय कम होने पर HIIT एक ज़ोरदार सेशन दे सकता है।
आखिरकार, सबसे अच्छी कार्डियो एक्सरसाइज़ वही है जो आपकी क्षमताओं के अनुकूल हो और जिसे आप सुरक्षित रूप से और लगातार कर सकें। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “यह पूछने के बजाय कि वॉकिंग, स्विमिंग या HIIT में से कौन सा सबसे अच्छा है, यह पूछें कि आप कौन सी गतिविधि नियमित रूप से और सुरक्षित रूप से कर सकते हैं। यही बात एक्सरसाइज़ रूटीन को लंबे समय तक जारी रखने लायक और आखिरकार दिल की सेहत के लिए फ़ायदेमंद बनाती है।”
ब्रिटेन में रह रही भारतीय महिला अनुष्का व्यास का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने UK और भारत की 9-5 नौकरी के बाद की जिंदगी का अंतर दिखाने की कोशिश की है। अनुष्का ने गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का वीडियो शेयर किया, जहां लोग काम खत्म करने के बाद परिवार के साथ समय बिताते, घूमते और फिटनेस पर ध्यान देते नजर आए। उनका कहना है कि UK में नौकरी के बाद भी लोगों के पास अपनी जिंदगी के लिए वक्त बचता है।
वहीं, भारत में ऑफिस खत्म होने के बाद लंबा सफर, ट्रैफिक और कई बार अतिरिक्त काम दिन का बाकी समय भी ले लेते हैं। अनुष्का के मुताबिक, इसी वजह से कई लोगों की पूरी उम्मीद वीकेंड पर टिक जाती है। उनके वीडियो ने सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
गुरुवार शाम 5:30 बजे पार्क का दिखाया नजारा
अनुष्का ने इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का नजारा दिखाया। उन्होंने बताया कि यह न तो वीकेंड था और न ही कोई छुट्टी का दिन। इसके बावजूद पार्क में लोग परिवार के साथ समय बिता रहे थे, पिकनिक कर रहे थे और फिटनेस पर ध्यान दे रहे थे।
‘यहां काम के बाद भी जिंदगी बचती है’
अनुष्का के मुताबिक, UK में लोग अपना काम खत्म करने के बाद परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकाल पाते हैं। उनके अनुसार, शाम का समय सिर्फ घर पहुंचने और आराम करने में ही नहीं निकलता, बल्कि लोग घूमने, एक्सरसाइज करने और अपनों के साथ वक्त बिताने का मौका भी पाते हैं।
भारत में 9-5 के बाद शुरू होती है दूसरी जद्दोजहद?
अनुष्का ने भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों के लिए ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी दिन खत्म नहीं होता। ऑफिस से निकलने के बाद ट्रैफिक और लंबा सफर समय ले लेता है। कई बार बॉस की तरफ से अतिरिक्त काम भी मिल जाता है। ऐसे में घर पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो जाती है।
वीकेंड का भी नहीं मिल पाता पूरा आराम
उन्होंने कहा कि लगातार थकान के कारण कई लोग वीकेंड का इस्तेमाल भी सिर्फ आराम करने में कर देते हैं। ऐसे में परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताना या अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।
‘सिर्फ पैसा नहीं, क्वालिटी ऑफ लाइफ भी जरूरी’
अनुष्का का कहना है कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस भी उन वजहों में शामिल है, जिनके कारण कुछ भारतीय विदेश में बसना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, अच्छी नौकरी और कमाई के साथ सुकून, परिवार के लिए समय और अपनी जिंदगी जीने की आजादी भी जरूरी है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने UK के वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बताया, तो कुछ ने भारतीय वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत पर बात की। एक यूजर ने इसे “अनरियल वर्क-लाइफ बैलेंस” बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि काम के बाद मिलने वाला सुकून भी बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।
Molbio IPO Listing: टेमासेक (Temasek) और मोतीलाल ओसवाल ग्रुप (Motilal Oswal Group) के निवेश वाली मोल्बियो डाइग्नॉस्टिक के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 70 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹807 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹980.00 और NSE पर भी ₹980.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 21% से अधिक लिस्टिंग गेन (Molbio Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर BSE पर यह ₹946.80 (Molbio Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 946.80% मुनाफे में हैं।
Molbio Diagnostics IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
मोब्लियो डाइग्नॉस्टिक्स न का ₹940 करोड़ का आईपीओ 10-12 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 70.27 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 186.39 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 49.80 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.97 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 13.28 गुना भरा था।
इस आईपीओ के तहत ₹200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹1 की फेस वैल्यू वाले 91.66 लाख शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹105.54 करोड़ आरएंडडी फैसिलिटी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कनेक्टेड ऑफिस स्पेस बनाने, ₹72.28 करोड़ गोवा यूनिट 1, गोवा यूनिट 2 और विशाखापत्तनम यूनिट के लिए प्लांट, मशीनरी और अन्य इक्विपमेंट की खरीदारी, ₹59.54 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹9.47 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
Molbio Diagnostics के बारे में
मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स एक पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स कंपनी है। इसने ‘Truenat’ नाम से पीसीआर (PCR) प्लेटफॉर्म डेवलप किया है, जो 100 से अधिक देशों में पेटेंटेड है। यह तकनीक टीबी (TB), कोविड-19, हेपेटाइटिस B & C, एचआईवी (HIV) और एचपीवी (HPV) जैसी बीमारियों की जांच 1 घंटे के भीतर कर सकती है। प्रोग्नोसिस और ऑप्ट्रास्कैन जैसी सहायक कंपनियों के जरिए यह डिजिटल पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग डिवाइस भी मुहैया कराती है। देश भर में इसके 6 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं और इसके ग्राहक 90 से अधिक देशों में हैं।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 40% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹164.14 करोड़ और टोटल इनकम करीब 32% के सीएजीआर से ₹1,455.17 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹412.64 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,148.84 करोड़ पड़े थे।
Dhoot Transmission की धांसू एंट्री, IPO को 75 गुना बोली, फिर 37% प्रीमियम पर ₹871 का शेयर लिस्ट
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Dhoot Transmission IPO Listing: आईपीओ को 75 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब धूत ट्रांसमिशन के शेयरों की आज घरेलू स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री हुई है। इसके आईपीओ के तहत ₹871 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹1193.80 और NSE पर ₹1,200.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 37% से अधिक लिस्टिंग गेन (Dhoot Transmission Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में हल्की फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर BSE पर यह ₹1174.50 (Dhoot Transmission Share Price) पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 34.85% मुनाफे में हैं।
Dhoot Transmission IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च
धूत ट्रांसमिशन का ₹3,067 करोड़ का आईपीओ 10-12 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 75.06 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 209.02 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 53.13 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.32 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 8.60 गुना भरा था।
इस आईपीओ के तहत ₹1,400 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले 1,91,37,602 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹464.80 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹301.77 करोड़ सब्सिडरीज का कर्ज हल्का करने के लिए उनमें निवेश, ₹150.00 करोड़ नई वायरिंग हार्नेस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स लगाने, ₹159.96 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹410.41 करोड़ अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
Dhoot Transmission के बारे में
धूत ट्रांसमिशन देश की बड़ी E&E (इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स) कंपनियों में शुमार है। यह ऑटोमोटिव और नॉन-ऑटोमोटिव एप्लीकेशंस के लिए वायरिंग हार्नेसेज और इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में वायरिंग हार्नेसेज, बैट्री पैक्स, सेंसेक्स और इलेक्ट्रिक कंट्रोलर्स, ऑटोमोटिव स्विचेज, टर्मिनल्स, कनेक्टर्स, और पावर सप्लाई कॉर्ड्स हैं। इनका इस्तेमाल तेल से चलने वाली और इलेक्ट्रिक, दोनों प्रकार की गाड़ियों में होता है।
यह दोपहिया और तिपहिया वायरिंग हार्नेस मार्केट में देश की दो सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है जिसका 41% मार्केट पर कब्जा है तो वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक करीब 71% मार्केट शेयर के साथ दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक सेगमेंट में यह लीडर है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कमर्शियल वेईकल्स, ऑफ-हाईवे वेईकल्स, फार्मिंग इक्विपमेंट और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस में भी होता है।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 15% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹396.84 करोड़ और टोटल इनकम करीब 28% के सीएजीआर से ₹4,563.70 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹841.39 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,360.40 करोड़ पड़े थे।
Molbio IPO Listing: गोवा की पहली यूनिकॉर्न, ₹980 पर लिस्ट ₹807 का शेयर, 70 गुना भरा था आईपीओ
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Molbio Diagnostics Listing: टेमासेक (Temasek) और मोतीलाल ओसवाल ग्रुप (Motilal Oswal Group) के निवेश वाली मोल्बियो डाइग्नॉस्टिक के आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला। अब कल 17 अगस्त को इसके शेयर लिस्ट होने वाले हैं। ग्रे मार्केट से 15.49% के लिस्टिंग गेन के संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹125 यानी 15.49% प्रीमियम पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹807 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं। शेयर मिले या नहीं, इसका चेक करने का स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।
BSE की साइट पर ऐसे करें चेक
https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।
इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Molbio Diagnostics चुनें।
एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।
फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।
सर्च पर क्लिक करें।
शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।
रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे चेक करें स्टेटस
https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।
सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Molbio Diagnostics चुनें।
एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।
सबमिट करें।
शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।
Molbio Diagnostics IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस
मोब्लियो डाइग्नॉस्टिक्स न का ₹940 करोड़ का आईपीओ 10-12 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 70.27 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 186.39 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 49.80 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.97 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 13.28 गुना भरा था।
इस आईपीओ के तहत ₹200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹1 की फेस वैल्यू वाले 91.66 लाख शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹105.54 करोड़ आरएंडडी फैसिलिटी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कनेक्टेड ऑफिस स्पेस बनाने, ₹72.28 करोड़ गोवा यूनिट 1, गोवा यूनिट 2 और विशाखापत्तनम यूनिट के लिए प्लांट, मशीनरी और अन्य इक्विपमेंट की खरीदारी, ₹59.54 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹9.47 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
Molbio Diagnostics के बारे में
मोल्बियो डायग्नोस्टिक्स एक पॉइंट-ऑफ-केयर (POC) डायग्नोस्टिक्स कंपनी है। इसने ‘Truenat’ नाम से पीसीआर (PCR) प्लेटफॉर्म डेवलप किया है, जो 100 से अधिक देशों में पेटेंटेड है। यह तकनीक टीबी (TB), कोविड-19, हेपेटाइटिस B & C, एचआईवी (HIV) और एचपीवी (HPV) जैसी बीमारियों की जांच 1 घंटे के भीतर कर सकती है। प्रोग्नोसिस और ऑप्ट्रास्कैन जैसी सहायक कंपनियों के जरिए यह डिजिटल पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग डिवाइस भी मुहैया कराती है। देश भर में इसके 6 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं और इसके ग्राहक 90 से अधिक देशों में हैं।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 40% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹164.14 करोड़ और टोटल इनकम करीब 32% के सीएजीआर से ₹1,455.17 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹412.64 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,148.84 करोड़ पड़े थे।
IPOs This Week: 17 अगस्त से शुरू हफ्ते में खुलेंगे 8 नए इश्यू, 12 कंपनियां होंगी लिस्ट
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
हिंदू परंपरा में नाग पंचमी का खास महत्व है। इस दिन भक्त नाग देवता की पूजा करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद मांगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो राहु और केतु के बुरे प्रभावों को कम करना चाहते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्म कुंडली में राहु या केतु की खराब स्थिति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उलझन, अचानक आने वाली रुकावटों, अस्थिरता और परेशानियों का कारण बन सकती है। वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु का संबंध ‘काल सर्प दोष’ से भी माना जाता है।
17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु अपनी राशि के अनुसार कुछ खास पूजा-पाठ और उपाय कर सकते हैं। यहां बताया गया है कि पारंपरिक रूप से हर राशि के लोगों को क्या करना चाहिए।
मेष– मेष राशि के लोग पानी में लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इस उपाय से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और राहु-केतु के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
वृषभ– वृषभ राशि के लोग भगवान शिव को सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। वे पानी में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर उससे शिवलिंग का जलाभिषेक भी कर सकते हैं।
मिथुन– मिथुन राशि के लोग भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और फिर भगवान गणेश को दूर्वा घास चढ़ा सकते हैं। परंपरा के अनुसार हरे कपड़े, हरे फल या मूंग की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है। भक्त “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
कर्क– कर्क राशि के लोग नाग पंचमी पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं या करवा सकते हैं। परंपरा के अनुसार, वे पूजा के हिस्से के तौर पर चांदी के सांपों के प्रतीकात्मक जोड़े की पूजा भी कर सकते हैं। बाद में विसर्जन या निपटान के लिए, प्राकृतिक जल स्रोतों में धातु की चीजें डालने के बजाय स्थानीय मंदिर के निर्देशों और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का पालन करना बेहतर है।
सिंह– सिंह राशि के लोग भगवान शिव की पूजा करने से पहले सूर्य देव को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। एक और पारंपरिक उपाय है तांबे के बर्तन में गेहूं भरकर किसी जरूरतमंद को दान करना।
कन्या– कन्या राशि वालों को सलाह दी जाती है कि वे जलाभिषेक करें और जानवरों व पक्षियों की देखभाल करें या उन्हें खाना खिलाएं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में कच्चा कोयला विसर्जित करने की भी सलाह दी जाती है; हालाँकि, नदियों में सामग्री डालने के बजाय, भक्त पर्यावरण के लिए सुरक्षित कोई प्रतीकात्मक विकल्प चुन सकते हैं या किसी स्थानीय पुजारी से सलाह ले सकते हैं।
तुला– तुला राशि वाले नाग पंचमी पर शिव मंदिर जा सकते हैं और महादेव की पूजा कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार ज़रूरतमंदों को अनाज दान करना या भोजन कराना भी इस दिन से जुड़ा एक उपाय है।
वृश्चिक– वृश्चिक राशि वाले भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं। पारंपरिक ज्योतिष में माना जाता है कि पूजा और पाठ का यह मेल राहु और केतु से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद करता है।
धनु– धनु राशि वाले भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा कर सकते हैं और इस मौके पर पीले कपड़े पहन सकते हैं। पारंपरिक रूप से विष्णु मंदिर में हल्दी और चने की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है।
मकर– मकर राशि वाले नाग पंचमी पर कुत्ते को रोटी और गुड़ खिला सकते हैं। शाम को, वे पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं, बशर्ते ऐसा करना सुरक्षित और अनुमत हो।
कुंभ– कुंभ राशि के लोग ज़रूरतमंदों को कंबल या स्टील के बर्तन जैसी उपयोगी चीज़ें दान कर सकते हैं। भगवान शिव के सामने बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी इस राशि से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय है।
मीन– मीन राशि के लोग पानी में थोड़ी सी केसर मिलाकर उससे भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में नारियल प्रवाहित करने की भी बात कही गई है, लेकिन प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल चीज़ें चढ़ाना या मंदिर द्वारा स्वीकृत विकल्प चुनना बेहतर है।
उपाय
राशि के अनुसार किए जाने वाले उपायों के अलावा, जो लोग राहु और केतु के बुरे असर का अनुभव कर रहे हैं, वे नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और उन पर जल चढ़ा सकते हैं (जलाभिषेक कर सकते हैं)। कुछ ज्योतिष परंपराओं में राहु काल के दौरान शिव की पूजा करने की खास सलाह दी जाती है।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये उपाय वैज्ञानिक रूप से साबित तरीकों के बजाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें सेहत, पैसे, रिश्तों या ज़िंदगी की दूसरी समस्याओं के पक्के समाधान के तौर पर नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक अभ्यास के तौर पर देखा जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दूध और दूध से बने सामान में मिलावट करने वाली डेयरी यूनिट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि दूध, पनीर, घी और खोया जैसी चीजों में हानिकारक केमिकल या प्रतिबंधित चीजें मिलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच के दौरान अगर किसी डेयरी यूनिट के दूध या दूसरे डेयरी उत्पादों में हानिकारक केमिकल, रिफाइंड तेल, गलत तरह की चर्बी या कोई अन्य प्रतिबंधित चीज मिलती है, तो उन उत्पादों की बिक्री तुरंत रोक दी जाए।
यह फैसला राज्य के कई जिलों में हुई खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान दूध के नमूनों में मिलावट पाए जाने की खबरों के बाद लिया गया है। सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को इन निर्देशों को सख्ती से लागू करने और मिलावट करने वाली डेयरी यूनिट्स पर जरूरी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
इस आदेश के तहत अधिकारियों को डेयरी यूनिट्स की जांच के दौरान गड़बड़ी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
- अगर किसी डेयरी यूनिट में हानिकारक केमिकल या वनस्पति तेल/फैट पाया जाता है, तो वहां बने सभी दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री तुरंत रोक दी जाएगी।
- ऐसी यूनिट में उत्पादन का काम भी बंद कराया जाएगा।
- अगर लोगों की सेहत के लिए खतरनाक केमिकल के जानबूझकर और बड़े स्तर पर इस्तेमाल के सबूत मिलते हैं, तो यूनिट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन साबित होने पर संबंधित डेयरी यूनिट का खाद्य कारोबार लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा।
- गंभीर मामलों में संबंधित ब्रांड के दूध और डेयरी उत्पादों की पूरे उत्तर प्रदेश में बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है।
- अगर उत्तर प्रदेश के बाहर बने किसी दूध या डेयरी उत्पाद में भी हानिकारक केमिकल या प्रतिबंधित चीजें पाई जाती हैं, तो सरकार राज्य में उनकी बिक्री पर भी रोक लगा सकती है।
- सरकारी आदेश में दूध में मिलावट के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजों का खास तौर पर जिक्र किया गया है। इनमें डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज और हाइड्रोजन पेरोक्साइड शामिल हैं
- सरकार ने अधिकारियों को ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने और लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाली मिलावट पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
- सरकार ने अधिकारियों को यह कार्रवाई बिना देरी के करने और खाद्य सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

