Sawan Putrada Ekadashi 2026: संतान प्राप्ति के लिए कब किया जाएगा पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें श्रीहरि के साथ शिव कृपा पाने की सही तारीख

Sawan Putrada Ekadashi 2026: सावन का पवित्रा महीना शुरू हो चुका है। इसके साथ ही चारों भोलेनाथ के भक्तों के जयकारे भी गूंजने लगे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। सावन में नि:संतान दंपतियों को उम्मीद देने वाला एक उपवास भी किया जाता है। इस व्रत का नाम है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत। यह व्रत संतान की इच्छा रखने वाले और संतान की शुभ की कामना करने वाली माताएं भी करती हैं। आइए जानें इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा और इसमें पूजा का मुहूर्त क्या होगा?

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 23 अगस्त को मध्यरात्रि 02:00 बजे सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही है। इस तिथि का समापन 24 अगस्त को प्रात: 04:18 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त दिन रविवार को रखा जाएगा, लेकिन 24 अगस्त को भी यह व्रत रहेगा। 23 अगस्त को गृहस्थ लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखेंगे, वहीं वैष्णव लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 अगस्त सोमवार को रखेंगे क्योंकि 23 अगस्त को हरि वासर का समापन सुबह 10:49 बजे होगा।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 मुहूर्त

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:26 बजे से लेकर प्रात: 05:10 बजे तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक है। जबकि 24 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:27 बजे से प्रात: 05:11 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक है। 23 अगस्त को सुबह 07:32 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे के बीच आप विष्णु पूजा कर सकते हैं, वहीं 24 अगस्त को विष्णु पूजा सुबह 05:55 बजे से 07:32 बजे और सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे के बीच कर सकते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 पारण समय

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालु 24 अगस्त को पारण दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 पारण के बीच कर सकते हैं। वहीं, 24 अगस्त को व्रत रखने वाले लोग पारण 25 अगस्त को सुबह 05:55 पारण से 06:20 पारण के बीच कर सकते हैं।

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Chaturmaas 2026 Upay: चतुर्मास में तुलसी के ये 5 उपाय बढ़ाएंगे जीवन में धन-धान्य, जानें कब और कैसे करें पूजा

Chaturmaas 2026 Upay: देवशयनी एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु चार माह के शयन के लिए पाताल लोक प्रस्थान करते हैं। इसलिए आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। ये चार माह जब भगवान विष्णु शयन करते हैं, उसे ही चतुर्मास कहते हैं। यह अवधि सावन, भादों, आश्विन और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक रहती है। इन चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। चतुर्मास के दौरान तुलसी के कुछ उपाय करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है और उन्हें विष्णुप्रिया कहा जाता है। इसलिए माना जाता है कि आज के दिन तुलसी के 5 उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा घर-परिवार पर बनी रहती है और सुख-समृद्धि आती है।

तुलसी नामाष्टक का पाठ करें : चतुर्मास में तुलसी के पौधे के सामने तुलसी नामाष्टक का 108 बार जाप करने से आर्थिक तंगी और कर्जों से मुक्ति मिलती है। तुलसी माता के 8 नाम वृंदा, वृंदानी, श्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, कृष्णजीवनी और तुलसी का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।

तुलसी माता का करें श्रृंगार : चतुर्मास के दौरान तुलसी माता को 16 श्रृंगार का सामान अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। तुलसी माता की कृपा से जीवन में आर्थिक संपन्नता आती है।

तुलसी पर जलाएं दीपक : तुलसी के पास दीपक जलाने से करियर और व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के साथ मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। मान्यता है कि इस दिन 11, 21 या 51 दीपक जलाने चाहिए। भक्ति भाव के साथ तुलसी चालीसा का पाठ करना चाहिए।

भगवान विष्णु को अर्पित करें तुलसी दल : भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु को भोग लगाते समय तुलसी दल जरूर शामिल करें। लेकिन एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए, पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले तोड़ लें।

तुलसी की करें परिक्रमा : तुलसी पूजन के बाद परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भाग्य का साथ मिलता है। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है।

Devshayani Ekadashi 2026: आज देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ जरूर करें तुलसी की पूजा, जानें विधि और महत्व

Devshayani Ekadashi 2026: आज योग निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, भद्रा से बचकर इस समय पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करें श्रीहरि की पूजा

Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के साथ भगवान विष्णु का शयन काल प्रारंभ होता है और चतुर्मास लग जाता है। चतुर्मास यानी सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के चार महीनों की अवधि। आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं।

इन चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। सृष्टि के संचालन का काम भगवान शिव संभालते हैं। इस साल देवशयनी एकादशी का व्रत आज, 25 जुलाई 2026 को किया जा रहा है। माना जाता है कि आज के दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा और उपवास करने से श्री हरि प्रसन्न होते हैं। आज देवशयनी एकादशी के दिन भद्रा लग रही है। इसलिए आइए जानें, आज पूजा के लिए भद्रा रहित मुहूर्त क्या होगा और अन्य शुभ मुहूर्त क्या हैं ?

देवशयनी एकादशी पर भद्रा

इस साल पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भद्रा सुबह 05:27 बजे से सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। ऐसे में देवशयनी एकादशी पर पृथ्वी पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा।

देवशयनी एकादशी कब से कब तक?

एकादशी तिथि प्रारम्भ – जुलाई 24, 2026 को सुबह 09:12 बजे

एकादशी तिथि समाप्त – जुलाई 25, 2026 को सुबह 11:34 बजे

देवशयनी एकादशी पर पूजा कब करना चाहिए?

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 04:03 बजे से 04:45 बजे तक

अभिजित मुहूर्त : सुबह में 11:46 बजे से दोपहर 12:40 बजे

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:28 बजे से दोपहर 03:22 बजे

गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:58 पी एम से शाम 07:19 बजे

अमृत काल : रात 09:41 बजे से रात 11:29 बजे

निशिता मुहूर्त : रात 11:52 बजे से रात 12:34 बजे, जुलाई 26

देवशयनी एकादशी व्रत का पारण कब होगा?

पारण समय : 26 जुलाई को सुबह 05:28 बजे से 08:10 बजे

देवशयनी एकादशी पर क्या करें?

  • इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।
  • पूजा में चंदन, पीले पुष्प, धूप, दीप और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि तुलसी के बिना श्रीहरि की पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • पूजा के दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • यथाशक्ति उपवास रखें और सात्विक विचारों का पालन करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल या दक्षिणा का दान करें।
  • शाम के समय भगवान विष्णु की आरती कर खीर, माखन-मिश्री, फल या अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
  • एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है।

देवशयनी एकादशी पर क्या ना करें?

  • देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • व्रत ना भी रखने वालों को इस दिन चावल का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्रोध, झूठ, कटु वचन, विवाद और किसी का अपमान करने से बचें।
  • पेड़-पौधों को अनावश्यक नुकसान न पहुंचाएं और किसी भी जीव को कष्ट ना दें।
  • एकादशी के दिन तुलसी को स्पर्श और उसके पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

Hariyali Teej 2026 Date: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Hariyali Teej 2026 Date: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Hariyali Teej 2026 Date: सावन का महीना हरियाली और भगवान शिव की आराधना के लिए जाना जाता है। लेकिन इस माह की एक विशेषता भी है। ये महीना माता पार्वती के तप, त्याग और समर्पण की याद दिलाता है, जब महिलाएं और अविवाहित कन्याएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य के लिए हरियाली तीज का पर्व मनाती हैं। हरियाली तीज का पूरे साल में आने वाले प्रमुख तीज पर्व में अहम स्थान है। यह व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। माना जाता है कि माता पार्वती के इस समर्पण और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में अपनाया था। यही कारण है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं माता गौरी की पूजा कर उनसे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए इस व्रत का पालन करती हैं।

हरियाली तीज 2026: सही तारीख

सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त को शाम 06:48 बजे से होकर 15 अगस्त को शाम 05:30 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 15 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

पूजा और व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य विशेष नियम

हरियाली तीज का व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी शादीशुदा जिंदगी और मनचाहा वर पाने के लिए रखा जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें :

हरा रंग और सोलह श्रृंगार : पूजा के समय हरे रंग के वस्त्र (जैसे साड़ी/सूट) पहनें, हाथों में हरी चूड़ियां पहनें और मेहंदी लगाएं। हरा रंग प्रकृति, सावन और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

सिंधारा की परंपरा : इस दिन मायके से आए सिंधारे का प्रयोग करें और सास या किसी वरिष्ठ महिला का आशीर्वाद लें। सिंधारे में वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, घेवर व मिठाइयां होती हैं।

व्रत संकल्प व व्रत कथा : सुबह स्नान के बाद सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें और शाम को भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करते समय हरियाली तीज की व्रत कथा अवश्य सुनें।

माता पार्वती को सुहाग सामग्री देना : पूजा के दौरान देवी पार्वती को लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां आदि) अर्पित करें।

हरियाली तीज में ये वर्जित है

  • पूजा या व्रत के दौरान काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, हरा या अन्य शुभ रंग पहनना उत्तम होता है।
  • इस दिन किसी से झगड़ा या कटु वचन न बोलें और मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार न लाएं।
  • घर में सात्विक माहौल रखें और लहसुन-प्याज या तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
  • परंपरा अनुसार यदि आपने निर्जला व्रत का संकल्प लिया है, तो पूजा और कथा पूर्ण होने से पहले व्रत न खोलें।

Devshayani Ekadashi 2026 Katha: कल किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, भगवान विष्णु की पूजा में जरूर सुनें मोक्ष प्रदान करने वाली ये कथा

Devshayani Ekadashi 2026 Katha: कल किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, भगवान विष्णु की पूजा में जरूर सुनें मोक्ष प्रदान करने वाली ये कथा

Devshayani Ekadashi 2026 Katha: हिंदू वर्ष में देवशयनी एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। हरिशयनी एकादशी हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु इस दिन से चार माह के पाताल लोक में विश्राम करने चले जाते हैं। इस दौरान वह योग निद्रा में रहते हैं और चतुर्मास शुरू होता है। चतुर्मास के दौरान, मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं और कथा सुनते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सतयुग की व्रत कथा सुनने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। यह व्रत ब्रह्म योग और ज्येष्ठा नक्षत्र में रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 26 जुलाई को सुबह 05:39 बजे से 08:22 बजे के बीच कभी भी कर सकते हैं।

देवशयनी एकादशी व्रत कथा

एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से निवेदन किया कि आप हमें आषाढ़ शुक्ल एकादशी व्रत की विधि और महिमा के बारे में बताएं। इसमें किस देवता की पूजा होती है? इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को इस व्रत की महिमा का बखान किया था, वही मैं तुमको बताता हूं।

सतयुग का समय था, उस समय चक्रवर्ती सम्राट मांधाता का शासन था। उनकी प्रजा सुखी और संपन्न थी। लेकिन एक बार ऐसा समय आया कि उनके राज्य में 3 साल तक अकाल पड़ गया। वर्षा न होने से चारों ओर हाहाकार मच गया। इसकी वजह से धार्मिक कार्य जैसे हवन, यज्ञ, कथा, व्रत, पूजा, पिंडदान आदि में कमी होने लगी। जनता ने सम्राट मांधाता को अपनी पीड़ा बयान की। उनकी बातें सुनकर वह भी दुखी हो गए।

वह राज्य में अकाल की स्थिति से पहले भी काफी दुखी थे। वे सोचने लगे कि उनको किस पाप की वजह से ऐसा दंड मिला है। इससे मुक्ति के लिए वे एक दिन सेना के साथ जंगल की ओर चले गए। वहां उनको अंगिरा ऋषि का आश्रम दिखाई दिया, तो वे अंदर गए और अंगिरा ऋषि को साष्टांग प्रणाम किया। ऋषि ने राजा से आगमन का कारण पूछा।

तब राजा ने कहा कि वे अपने धर्म का पालन करते हैं और प्रजा की सेवा में कोई कमी नहीं रखते, फिर भी ऐसा दिन देखना पड़ रहा है। आप मुझे इस स्थिति से बाहर निकलने का उपाय बताएं। इस पर अंगिरा ऋषि ने कहा कि सतयुग में छोटे भी पाप का बड़ा दंड भुगतना पड़ता है। इस भीषण अकाल से बचने का एक उपाय है। आप आषाढ़ शुक्ल एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करें। रात्रि में जागरण करके अगले दिन दान आदि के बाद पारण करें। श्रीहरि की कृपा से अकाल मिटेगा, बारिश होगी और फिर आपका राज्य उन्नति करेगा।

राजा मांधाता आश्रम से विदा लेकर अपने राजमहल लौट आए। आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन उन्होंने विधिपूर्वक व्रत रखकर पूजा की। अंगिरा ऋषि के सुझाव के अनुसार, उन्होंने दान और पारण किया। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उनके राज्य में बहुत अच्छी वर्षा हुई और अकाल खत्म हो गया। बारिश होने से उनके राज्य में फिर से सुख और समृद्धि आ गई। उनका राज्य धन और धान्य से भर गया।

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Devshayani ekadashi 2026: 25 जुलाई को किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन के लिए पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

Devshayani ekadashi 2026: हिंदू धर्म देवशयनी एकादशी का बहुत महत्व है। यह व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इसी दिन से भगवान श्री हरि विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है। इसके बाद से सभी मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से सृष्टि के पानलहार भगवान विष्णु की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

इस साल यह व्रत 25 जुलाई को किया जाएगा। बहुत से श्रद्धालु इस दिन पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत करते हैं। इस दिन की जाने वाली पूजा के लिए सभी जरूरी सामग्री की पूरी लिस्ट हम यहां आपके लिए उपलब्ध करा रहे हैं। व्रत से पहले आप लिस्ट की मदद से अपनी पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप दे सकते हैं। आइए जानें इस साल हरिशयनी एकादशी का व्रत की पूजा सामग्री क्या है और इस दिन पूजा विधि क्या है?

देवशयनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

देवशयनी एकादशी तिथि : 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे

ब्रह्म मुहूर्त (पूजा का श्रेष्ठ समय): सुबह 04:15 बजे से 04:58 बजे तक

व्रत पारण का समय, 26 जुलाई 2026: सुबह 05:39 बजे से 08:22 बजे के बीच

देवशयनी एकादशी 2026 पूजा सामग्री लिस्ट

  • भगवान विष्णु (श्री हरि) एवं माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र
  • पूजा की चौकी और उस पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा, साथ ही भगवान के लिए पीले वस्त्र
  • पीले गेंदे/कमल के फूल और माला
  • तुलसी दल, रोली, अक्षत, पीला चंदन, हल्दी और केसर, धूप, देसी घी का दीपक और बाती, गंगाजल, पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, इलायची, जल का कलश और आचमनी

भोग सामग्री

5 प्रकार के मौसमी फल, पीले मिष्ठान (जैसे बेसन के लड्डू या पेड़ा), और पंजीरी/पंचमेवा

पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान की सफाई करके चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु को पंचामृत व गंगाजल से स्नान/अभिषेक कराएं और पीले चंदन का तिलक लगाएं।
  • देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। पीले फूल, माला, और तुलसी पत्र अर्पित करें।
  • भगवान को पीले फल, मिठाई व पंचामृत का भोग लगाएं (ध्यान रखें कि भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल हो)।
  • मंत्र जाप : `”ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”` का 108 बार जाप करें।
  • देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • अंत में श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी जी की आरती करें। इसके बाद पूजा में हुई अनजाने की भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
  • चूंकि इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में जाते हैं, अतः पूजा के बाद उनके चित्र या छोटे विग्रह को प्रतीकात्मक रूप से विश्राम/शयन कराएं।

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Devshayani Ekadashi Vrat Ke Niyam: 25 जुलाई को योगनिद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु, जानें हरिशयनी व्रत के ये अहम नियम

Devshayani Ekadashi Vrat Ke Niyam: हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 25 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में निवास करते हैं और योगनिद्रा में चले जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से चतुर्मास लग जाते हैं और इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। शास्त्रों और पद्मपुराण के अनुसार, इस दिन व्रत में कुछ नियमों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए अन्यथा व्रत का फल अधूरा रह सकता है।

देवशयनी एकादशी व्रत के नियम

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या करना चाहिए?

  • देवशयनी एकादशी के दिन व्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। शास्त्रों में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का खास महत्व बताया गया है। इसके पश्चात मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को एकादशी के दिन पीले, पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत और नैवेद्य अवश्य अर्पित करना चाहिए। साथ ही, भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। ज्योतिष एक्सपर्ट पिनाकी मिश्रा बताते हैं कि तुलसी दल के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रती को श्रीहरि की पूजा के दौरान ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ द्वादशाक्षरी मंत्र का जप भी अवश्य करना चाहिए। वैष्णव परंपरा में इसे भगवान विष्णु के प्रमुख उपासना मंत्रों में से एक माना गया है।
  • ज्योतिष एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि निर्जला या निराहार व्रत करना संभव न हो, तो ऐसी स्थिति में क्षमता और स्वास्थ्य अनुसार फलाहार करना चाहिए। क्योंकि, व्रत का उद्देश्य केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों का संयम भी है।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता अनुसार अनुसार दान करें। साथ ही, इस व्रत में सेवा और दया का भी विशेष महत्व बताया गया है।

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

  • भूलकर भी देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से प्रतिकूल प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में एकादशी तिथि पर मांस, मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखें।
  • एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि को करने का विधान होता है। इस दिन नियमानुसार पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • एकादशी व्रत में चावल सहित धान्य का सेवन करना वर्जित माना गया है। इस नियम का परिवार के सदस्यों को भी ख्याल रखना चाहिए।
  • भूलकर भी किसी असहाय या अन्य व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। साथ ही, एकादशी के दिन अहिंसा जैसे कार्यों से भी बचना चाहिए।
  • कभी भी एकादशी के दिन कटु वचन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्रोध और असत्य से भी बचना चाहिए क्योंकि, यह व्रत केवल आहार का नहीं, बल्कि विचार और व्यवहार की शुद्धि का भी पर्व है।

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Guru Purnima 2026 Date: कब है गुरु पूर्णिमा? कुंडली से गुरु दोष दूर करने के लिए इस दिन कर सकते हैं 5 उपाय

Guru Purnima 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पूर्णिमा सभी पूर्णिमा में महत्वपूर्ण मानी गई है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर किए गए दान-पुण्य द्वारा व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आदर-सत्कार करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। गुरु पूर्णिमा यानि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इस वजह से इस दिन वेद व्यास जयंती मनाते हैं। यह दिन कुंडली के गुरु दोष को दूर करने का भी एक अच्छा अवसर है। इस साल आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे से शुरू होगी और यह 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक मान्य होगी। उदयातिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई बुधवार को मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा 2026 मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:17 बजे से लेकर प्रात: 04:59 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 05:41 बजे से सुबह 07:22 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम : मुहूर्त सुबह 07:22 बजे से सुबह 09:04 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक

चर-सामान्य मुहूर्त : दोपहर 03:51 बजे से शाम 05:32 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : शाम 05:32 बजे से शाम 07:14 बजे तक

प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में गुरु पूर्णिमा

इस साल की गुरु पूर्णिमा प्रीति योग और उत्तराषाढा नक्षत्र में है। प्रीति योग प्रात:काल से लेकर रात के 11 बजकर 58 मिनट तक है, उसके बाद से आयुष्मान योग बनेगा। प्रीति योग के स्वामी ग्रह बुध और देवता भगवान विष्णु हैं। यह योग नए रिश्तों की शुरुआत और विवादों के निपटारे के लिए उत्तम माना जाता है। इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र सुबह से लेकर दोपहर 03:37 पी एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र है।

कुंडली से गुरु दोष दूर करने के अचूक उपाय

कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित हो, तो व्यक्ति के विवाह, करियर, शिक्षा और मान-सम्मान में बाधाएं आने लगती हैं। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

  • गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की संयुक्त पूजा करें। पूजा में पीले फूल, पीले फल, चंदन, पंचामृत और बेसन के लड्डू अर्पित करें। इस दिन घर पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • पूजा के समय पीले हकीक या तुलसी की माला से `ॐ बृं बृहस्पतये नमः` और `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः` मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें।
  • गुरु पूर्णिमा पर किसी मंदिर या जरूरतमंद को पीले रंग की वस्तुएं दान करें। जैसे— चने की दाल, हल्दी, पीला अनाज, केसर, पीली मिठाइयां या पीले वस्त्र। इससे गुरु ग्रह मजबूत होते हैं।
  • यदि कुंडली में गुरु अत्यधिक कमजोर है, तो इस दिन (और उसके बाद हर गुरुवार को) नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करें। स्नान के पश्चात पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • गुरु पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर चने की दाल के 108 साबुत दाने “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए एक-एक करके अर्पित करें। इससे भगवान शिव के साथ-साथ विष्णु जी की भी असीम कृपा मिलती है।

Devshayani Ekadashi 2026: हरिशयनी एकादशी से चार माह के लिए लग जाएगी मांगलिक कार्यों पर रोक, इस विधि से कराएं भगवान विष्णु को शयन

Devshayani Ekadashi 2026: हरिशयनी एकादशी से चार माह के लिए लग जाएगी मांगलिक कार्यों पर रोक, इस विधि से कराएं भगवान विष्णु को शयन

Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म एकादशी तिथि को अत्यंत महत्वपर्णू माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि यह व्रत करने वाले भक्तों पर सदैव श्री हरि की कृपा बनी रहती है। हिंदी महीनों के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी के बाद अब शुक्ल पक्ष का देवशयनी या हरिशयनी एकादशी व्रत आने वाला है। इस तिथि को हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु इस दिन से चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद से चतुर्मास शुरू हो जाता है और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसे हम आषाढ़ी एकादशी, देवशयनी एकादशी, हरिशयनी या पद्मनाभा एकादशी के नाम से जानते हैं।

हरिशयनी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण का समय

एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से

एकादशी तिथि का समापन: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त (पूजा का श्रेष्ठ समय): दोपहर 12:19 बजे से दोपहर 01:11 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से शाम 07:39 बजे तक।

व्रत पारण का समय: 26 जुलाई 2026 को सुबह 06:13 बजे से सुबह 08:50 बजे के बीच।

देवशयनी एकादशी पर इस विधि से कराएं श्री हरि को शयन

चूंकि इस दिन के बाद भगवान चार महीनों के लिए विश्राम करने जाते हैं, इसलिए उनका शयन प्रारंभ होने से ठीक पहले पूरे विधि-विधान से विदाई-पूजन करने का बड़ा महत्व है।

  • देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • इसके बाद अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।
  • एक पवित्र चौकी पर भगवान विष्णु की सुंदर प्रतिमा या तस्वीर को आसन देकर विराजमान करें।
  • भगवान नारायण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
  • उन्हें पीला चंदन लगाएं, पीले फूल चढ़ाएं और तुलसी दल (जो एक दिन पहले तोड़ा गया हो) अर्पित करें।
  • भगवान के हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित करें।
  • इसके बाद प्रभु को पान और सुपारी भेंट करें।
  • धूप-दीप जलाकर श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आरती उतारें।
  • सामर्थ अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें।
  • इसके बाद ही स्वयं फलाहार या व्रत का सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • देवशयनी एकादशी की रात को भगवान के भजनों और स्तुति का कीर्तन करना चाहिए।
  • अंत में, स्वयं के सोने से पहले प्रभु को प्रतीकात्मक रूप से विश्राम (शयन) कराएं।

पूजा में करें इस मंत्र का जाप

पूजा में भगवान को शयन कराने के लिए इस विशेष मंत्र का जाप करें।

‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्।

विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।।’

मंत्र का अर्थ: हे संपूर्ण जगत के स्वामी! आपके सो जाने पर यह पूरा संसार सो जाता है और आपके जाग जाने पर ही यह संपूर्ण सृष्टि तथा समस्त चराचर जीव जाग उठते हैं।

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन में आएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी, संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा और जानें जरूरी नियम

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन में आएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी, संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा और जानें जरूरी नियम

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन का महीना शुरू होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। भगवान शिव के इस महीने में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत। यह व्रत हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त के दिन किया जाएगा। यह तिथि और यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और सभी परेशानियों व दोषों से मुक्ति मिलती है। जीवन में संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत विशेष अहमियत रखता है। कई विवाहित जोड़े सावन पुत्रदा एकादशी व्रत को बड़ी श्रद्धा और विध-विधान के साथ रखते हैं। वे भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी से संतान सुख के लिए आशीर्वाद, स्वास्थ्य और परिवार की खुशी की प्रार्थना करते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त और पारण का समय

एकादशी तिथि प्रारंभ : 23 अगस्त 2026 को दोपहर 03:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 24 अगस्त 2026 को शाम 05:48 बजे तक

व्रत पारण का समय (अगले दिन): 24 अगस्त के व्रत का पारण 25 अगस्त को किया जाएगा

संतान प्राप्ति के लिए पूजा विधि

  • सावन पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा स्थल पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति रखें।
  • तुलसी के पत्ते, फल, धूप, दीया और पानी चढ़ाएं।
  • पूजा में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करते रहें।
  • दंपत्ति इस मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं और सावन पुत्रदा एकादशी व्रत कथा भी सुन सकते हैं।
  • इस दिन चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन या शराब से पूरी तरह दूर रहें।

सावन पुत्रदा एकादशी के नियम

  • प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करें।
  • व्रत का संकल्प लेकर दिनभर सात्विकता और संयम का पालन करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और फल अर्पित करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या एकादशी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
  • दंपति एक साथ भगवान विष्णु से स्वस्थ, संस्कारी और सुखी संतान की कामना करें।

सावन पुत्रदा एकादशी पर क्या ना करें?

  • इस दिन तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन ना करें।
  • क्रोध, कटु वचन, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें।
  • व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों और विवाद से दूर रहें।
  • बिना कारण किसी जीव को कष्ट ना पहुंचाएं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए।

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