Bhadrapad Bhauma Pradosh Vrat: भाद्रपद में बना भौम प्रदोष व्रत का संयोग, जानें सही तारीख और इस व्रत के लाभ

Bhadrapad Bhauma Pradosh Vrat: हिंदू धर्म का कैलेंडर चंद्रमाह पर आधारित होता है और यह अंग्रेजी कैलेंडर से अलग होता है। इस समय हिंदू कैलेंडर का छठा माह भाद्रपद चल रहा है। प्रत्येक हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह तिथि जब मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। “भौम” मंगल देव का ही एक नाम है, और यह व्रत भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस बार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर, 2026, मंगलवार के दिन पड़ रही है। इसलिए भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस व्रत में सूर्योदय के बाद प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा रहते हैं।

कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत

वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 3 बजे होगा। ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 8 सितंबर, दिन मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल पूजा का शुभ समय शाम 06:35 बजे से रात 08:52 बजे तक रहेगा।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

कर्ज से मुक्ति : इसे ‘ऋण मोचन प्रदोष’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पुराने कर्ज और आर्थिक समस्याओं से जल्द राहत मिलती है।

भूमि और संपत्ति का लाभ: ज्योतिष में मंगल देव को भूमि का कारक माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत करने से नया घर खरीदने, जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद सुलझाने और अचल संपत्ति के लाभ का योग बनता है।

मंगल दोष का निवारण : जिनकी कुंडली में मंगल दोष या मंगल से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत लाभदायक माना जाता है।

शिव और हनुमान जी की कृपा : मंगलवार होने के कारण भगवान शिव के साथ-साथ भगवान हनुमान जी की भी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

शत्रु और भय से रक्षा : भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मन से अज्ञात भय, चिंता या मानसिक तनाव समाप्त होता है।

पूजा विधि

  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान शिव व हनुमान जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • दिन में फलाहार लें और सात्विक रहें।
  • सूर्यास्त से ठीक पहले और बाद का समय (प्रदोष काल) शिव पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • शाम को स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • पूजा के अंत में आरती करें और अपनी क्षमता अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन या दान दें।

Janmashtami 2026 Tulsi Upay: आज कान्हा के जन्मोत्सव पर तुलसी के कुछ उपाय चमका सकते हैं आपकी किस्मत, मां लक्ष्मी होगी कृपा

Bhadrapad Bhauma Pradosh Vrat: भाद्रपद में बना भौम प्रदोष व्रत का संयोग, जानें सही तारीख और इस व्रत के लाभ

Bhadrapad Bhauma Pradosh Vrat: हिंदू धर्म का कैलेंडर चंद्रमाह पर आधारित होता है और यह अंग्रेजी कैलेंडर से अलग होता है। इस समय हिंदू कैलेंडर का छठा माह भाद्रपद चल रहा है। प्रत्येक हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह तिथि जब मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। “भौम” मंगल देव का ही एक नाम है, और यह व्रत भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस बार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर, 2026, मंगलवार के दिन पड़ रही है। इसलिए भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस व्रत में सूर्योदय के बाद प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा रहते हैं।

कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत

वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 3 बजे होगा। ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 8 सितंबर, दिन मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल पूजा का शुभ समय शाम 06:35 बजे से रात 08:52 बजे तक रहेगा।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

कर्ज से मुक्ति : इसे ‘ऋण मोचन प्रदोष’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पुराने कर्ज और आर्थिक समस्याओं से जल्द राहत मिलती है।

भूमि और संपत्ति का लाभ: ज्योतिष में मंगल देव को भूमि का कारक माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत करने से नया घर खरीदने, जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद सुलझाने और अचल संपत्ति के लाभ का योग बनता है।

मंगल दोष का निवारण : जिनकी कुंडली में मंगल दोष या मंगल से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत लाभदायक माना जाता है।

शिव और हनुमान जी की कृपा : मंगलवार होने के कारण भगवान शिव के साथ-साथ भगवान हनुमान जी की भी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

शत्रु और भय से रक्षा : भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मन से अज्ञात भय, चिंता या मानसिक तनाव समाप्त होता है।

पूजा विधि

  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान शिव व हनुमान जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • दिन में फलाहार लें और सात्विक रहें।
  • सूर्यास्त से ठीक पहले और बाद का समय (प्रदोष काल) शिव पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • शाम को स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • पूजा के अंत में आरती करें और अपनी क्षमता अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन या दान दें।

Janmashtami 2026 Tulsi Upay: आज कान्हा के जन्मोत्सव पर तुलसी के कुछ उपाय चमका सकते हैं आपकी किस्मत, मां लक्ष्मी होगी कृपा

Janmashtami 2026 Tulsi Upay: आज कान्हा के जन्मोत्सव पर तुलसी के कुछ उपाय चमका सकते हैं आपकी किस्मत, मां लक्ष्मी होगी कृपा

Janmashtami 2026 Tulsi Upay: हमारे देश में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से जितना महत्वूर्ण है उतना ही ज्योतिषीय दृष्टि से भी अहम है। माना जाता है इस दिन तुलसी से जुड़े कुछ उपाय करने से किस्मत के दरवाजे खुल सकते हैं और मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन से कंगाली दूर हो सकती है।

कान्हा को तुलसीदल अत्यंत प्रिय है और उनके बिना लड्डू गोपाल का कोई भी भोग अधूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के बिना कान्हा की पूजा अधूरी मानी जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन तुलसी से जुड़े कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख, समृद्धि और मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु का आशीर्वाद बना रहता है। वहीं, इस दिन तुलसी से जुड़ी कुछ भूल करने से बचना भी आवश्यक है।

जन्माष्टमी पर तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाएं : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन तुलसी जी को नई लाल चुनरी ओढ़ाने और उनके तने में कलावा बांधने से मनोकामना पूरी होती है और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

श्रीकृष्ण के भोग में तुलसी अर्पित करें : जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण को पंजीरी, माखन-मिश्री या पंचामृत का भोग लगाते समय उसमें तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। मान्यता है कि तुलसी के बिना श्रीकृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते।

तुलसी की मंजरी का उपाय : यदि तुलसी के पौधे पर मंजरी आई हुई है, तो जन्माष्टमी के दिन थोड़ी सी मंजरी तोड़कर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित करें। ऐसा करने से धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए : यदि पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है, तो जन्माष्टमी के दिन तुलसी के पौधे के पास बैठकर राधा-कृष्ण का ध्यान करें और तुलसी जी को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।

तुलसी की परिक्रमा और दीपक : जन्माष्टमी की शाम को तुलसी के पौधे के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए तुलसी जी की 11 या 21 बार परिक्रमा करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति आती है।

इन गलतियों से बचना भी है जरूरी

  • जन्माष्टमी या किसी भी बड़े पर्व/रविवार/एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना गया है। पूजा या भोग के लिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें या स्वयं गिरे हुए पत्तों का उपयोग करें।
  • बिना स्नान किए या अशुद्ध वस्त्र पहनकर तुलसी के पौधे को स्पर्श न करें।
  • तुलसी के पत्ते कभी बासी नहीं माने जाते, फिर भी ध्यान रखें कि पत्ता खंडित न हो।
  • जहां तुलसी का पौधा लगा हो, वहां जूते-चप्पल, झाड़ू या कूड़ा न रखें। जन्माष्टमी के दिन तुलसी के आसपास की जगह को अच्छी तरह साफ रखें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Krishna Janmotsav 2026: आज आधी रात में पधारेंगे मुरलीधर श्याम, जानें आज निशिता काल पूजा विधि, महत्व और पारण का सही समय

Chaturmaas 2026 Upay: चतुर्मास में तुलसी के ये 5 उपाय बढ़ाएंगे जीवन में धन-धान्य, जानें कब और कैसे करें पूजा

Chaturmaas 2026 Upay: देवशयनी एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु चार माह के शयन के लिए पाताल लोक प्रस्थान करते हैं। इसलिए आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। ये चार माह जब भगवान विष्णु शयन करते हैं, उसे ही चतुर्मास कहते हैं। यह अवधि सावन, भादों, आश्विन और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक रहती है। इन चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। चतुर्मास के दौरान तुलसी के कुछ उपाय करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है और उन्हें विष्णुप्रिया कहा जाता है। इसलिए माना जाता है कि आज के दिन तुलसी के 5 उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा घर-परिवार पर बनी रहती है और सुख-समृद्धि आती है।

तुलसी नामाष्टक का पाठ करें : चतुर्मास में तुलसी के पौधे के सामने तुलसी नामाष्टक का 108 बार जाप करने से आर्थिक तंगी और कर्जों से मुक्ति मिलती है। तुलसी माता के 8 नाम वृंदा, वृंदानी, श्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, कृष्णजीवनी और तुलसी का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।

तुलसी माता का करें श्रृंगार : चतुर्मास के दौरान तुलसी माता को 16 श्रृंगार का सामान अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। तुलसी माता की कृपा से जीवन में आर्थिक संपन्नता आती है।

तुलसी पर जलाएं दीपक : तुलसी के पास दीपक जलाने से करियर और व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के साथ मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। मान्यता है कि इस दिन 11, 21 या 51 दीपक जलाने चाहिए। भक्ति भाव के साथ तुलसी चालीसा का पाठ करना चाहिए।

भगवान विष्णु को अर्पित करें तुलसी दल : भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु को भोग लगाते समय तुलसी दल जरूर शामिल करें। लेकिन एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए, पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले तोड़ लें।

तुलसी की करें परिक्रमा : तुलसी पूजन के बाद परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भाग्य का साथ मिलता है। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है।

Devshayani Ekadashi 2026: आज देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ जरूर करें तुलसी की पूजा, जानें विधि और महत्व