Devshayani Ekadashi Vrat Ke Niyam: 25 जुलाई को योगनिद्रा में चले जाएंगे भगवान विष्णु, जानें हरिशयनी व्रत के ये अहम नियम

Devshayani Ekadashi Vrat Ke Niyam: हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 25 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में निवास करते हैं और योगनिद्रा में चले जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से चतुर्मास लग जाते हैं और इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। शास्त्रों और पद्मपुराण के अनुसार, इस दिन व्रत में कुछ नियमों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए अन्यथा व्रत का फल अधूरा रह सकता है।

देवशयनी एकादशी व्रत के नियम

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या करना चाहिए?

  • देवशयनी एकादशी के दिन व्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। शास्त्रों में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का खास महत्व बताया गया है। इसके पश्चात मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को एकादशी के दिन पीले, पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत और नैवेद्य अवश्य अर्पित करना चाहिए। साथ ही, भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। ज्योतिष एक्सपर्ट पिनाकी मिश्रा बताते हैं कि तुलसी दल के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • व्रती को श्रीहरि की पूजा के दौरान ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ द्वादशाक्षरी मंत्र का जप भी अवश्य करना चाहिए। वैष्णव परंपरा में इसे भगवान विष्णु के प्रमुख उपासना मंत्रों में से एक माना गया है।
  • ज्योतिष एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि निर्जला या निराहार व्रत करना संभव न हो, तो ऐसी स्थिति में क्षमता और स्वास्थ्य अनुसार फलाहार करना चाहिए। क्योंकि, व्रत का उद्देश्य केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों का संयम भी है।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता अनुसार अनुसार दान करें। साथ ही, इस व्रत में सेवा और दया का भी विशेष महत्व बताया गया है।

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

  • भूलकर भी देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से प्रतिकूल प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में एकादशी तिथि पर मांस, मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से दूरी बनाए रखें।
  • एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि को करने का विधान होता है। इस दिन नियमानुसार पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • एकादशी व्रत में चावल सहित धान्य का सेवन करना वर्जित माना गया है। इस नियम का परिवार के सदस्यों को भी ख्याल रखना चाहिए।
  • भूलकर भी किसी असहाय या अन्य व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। साथ ही, एकादशी के दिन अहिंसा जैसे कार्यों से भी बचना चाहिए।
  • कभी भी एकादशी के दिन कटु वचन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्रोध और असत्य से भी बचना चाहिए क्योंकि, यह व्रत केवल आहार का नहीं, बल्कि विचार और व्यवहार की शुद्धि का भी पर्व है।

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