KPSC भर्ती घोटाले की अब SIT करेगी जांच, सीनियर IPS अधिकारी आलोक कुमार को मिली जिम्मेदारी

KPSC Recruitment Exam: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की सिंगल बेंच ने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। वहीं, कोर्ट ने इस जांच की जिम्मेदारी सिनियर IPS अधिकारी आलोक कुमार को सौंपी है।

CID और पुलिस से SIT को सौंपे जाएंगे साक्ष्य

SIT के गठन के बाद अब तक मामले की जांच कर रही CID और संबंधित पुलिस थानों से केस डायरी, दस्तावेज और अन्य अहम सबूत नई जांच टीम को सौंपे जाएंगे। कोर्ट के इस कड़े कदम से सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है।

विभागों और जांच एजेंसियों को सहयोग का निर्देश

हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों, जांच एजेंसियों और सार्वजनिक प्राधिकरणों को SIT के साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि सभी संबंधित संस्थाएं जांच में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं, ताकि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित हो सके।

100 दिनों में जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

कोर्ट ने सुनवाई करते हुए SIT को जांच शुरू होने के 100 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, SIT को हर 30 दिन में प्रगति रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष दाखिल करनी होगी।

रिपोर्ट के बाद सुनी जाएंगी आपराधिक याचिकाएं

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अपराधों को रद्द करने की मांग वाली सभी संबंधित आपराधिक याचिकाओं पर SIT की जांच रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद विचार किया जाएगा।

बता दें कि अदालत के इस आदेश के बाद KPSC भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच अब SIT की निगरानी में आगे बढ़ेगी।

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Ram Temple Donation Theft: चंपत राय के इस्तीफे के अलावा राम मंदिर डोनेशन चोरी केस में ट्रस्ट की पहली बैठक से निकलीं ये 5 बड़ी बातें

Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक सोमवार को हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने रखी गई। बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने माना कि इस मामले में ट्रस्ट के साथ विश्वासघात हुआ है और जिम्मेदार लोगों ने भरोसा तोड़ा है। बैठक में उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। ट्रस्ट ने साफ कहा कि उसे राज्य सरकार की SIT और उसकी जांच पर पूरा भरोसा है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा और व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

बैठक से निकलीं 5 बड़ी बातें

  • 1. SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने पेश की गई

बैठक में सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की SIT की जांच रिपोर्ट रखी गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की और जांच पर भरोसा जताया।

  • 2. ट्रस्ट ने माना कि भरोसा तोड़ा गया

बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने स्वीकार किया कि इस मामले में ट्रस्ट के विश्वास के साथ धोखा हुआ। आरोप है कि जिम्मेदार लोगों ने अधिकारियों को गुमराह किया और ट्रस्ट का भरोसा तोड़ा।

  • 3. दोबारा ऐसी घटना न हो, इसकी होगी समीक्षा

ट्रस्ट ने फैसला किया कि दान की राशि के संग्रह और निगरानी की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की दोबारा गुंजाइश न रहे।

  • 4. चंपत राय और अनिल मिश्रा से मांगा जाएगा पक्ष

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीटिंग का एजेंडा रखा। स्वामी गोविंद देव गिरी ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार का प्रस्ताव रखा। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को भी बुलाने का फैसला किया गया। दोनों इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखेंगे।

  • 5. CEO का पद बनाने का प्रस्ताव खारिज

सूत्रों के अनुसार, बैठक में ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का नया पद बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन ट्रस्ट ने इसे मंजूर नहीं किया।

फिलहाल ट्रस्ट की बैठक जारी है और आने वाले समय में इस मामले को लेकर कुछ और अहम फैसले सामने आ सकते हैं। वहीं, दान की कथित गड़बड़ी की जांच SIT लगातार कर रही है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।