23 साल के BBA ग्रेजुएट ने नौकरी छोड़ चुना स्टार्टअप का रास्ता, डेढ़ साल में खड़ी कर दी 20 करोड़ की कंपनी

सफलता हासिल करने के लिए हमेशा लंबा अनुभव जरूरी नहीं होता, कई बार एक मजबूत सोच और सही दिशा भी कम उम्र में बड़ी उपलब्धि दिला सकती है। तेलंगाना के युवा साईतेजा गोपिशेट्टी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। BBA की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरी के रास्ते के बजाय अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। कृषि क्षेत्र में संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने Luminara Legacy नाम से स्टार्टअप शुरू किया, जो किसानों को बेहतर बीज, कृषि उत्पाद और खेती से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर काम करता है।

खास बात यह है कि शुरुआत के महज डेढ़ साल में ही उनकी कंपनी ने करोड़ों रुपये की वैल्यूएशन हासिल कर ली। साईतेजा की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो नए आइडिया के साथ अपना रास्ता खुद बनाना चाहते हैं।

कृषि क्षेत्र में उतरे साईतेजा, शुरू किया Luminara Legacy

साईतेजा गोपिशेट्टी Saiteja Gopishetty ने Luminara Legacy Pvt. Ltd. की शुरुआत की। यह एग्रीकल्चर स्टार्टअप किसानों को बेहतर बीज, कीटनाशक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और खेती से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर काम करता है। उनका लक्ष्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर उत्पादों के जरिए ज्यादा उत्पादन हासिल करने में मदद करना है।

23 की उम्र में ₹20 करोड़ का सफर

सोशल मीडिया पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, साईतेजा ने ग्रेजुएशन के करीब डेढ़ साल बाद अपनी कंपनी को ₹20 करोड़ के स्तर तक पहुंचा दिया। उनकी कंपनी अब 2028 तक ₹100 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

छोटी उम्र, बड़ा विजन

साईतेजा की कहानी यह दिखाती है कि सफलता सिर्फ उम्र या अनुभव पर निर्भर नहीं करती। सही सोच, मेहनत और किसी समस्या का समाधान देने वाला आइडिया किसी भी युवा को आगे बढ़ा सकता है। कृषि जैसे क्षेत्र में उतरकर उन्होंने यह साबित किया कि नए विचारों और तकनीक के जरिए पारंपरिक सेक्टर में भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ

साईतेजा की उपलब्धि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। कई यूजर्स ने उनकी मेहनत और बिजनेस सोच की तारीफ की। लोगों का कहना है कि कम उम्र में इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालना और किसानों से जुड़े क्षेत्र में काम करना प्रेरणादायक है।

एक यूजर ने लिखा कि 23 साल की उम्र में ₹20 करोड़ की कंपनी बनाना दिखाता है कि जब विजन और मेहनत साथ आते हैं तो बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। वहीं अन्य यूजर्स ने उनके भविष्य के लक्ष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

किसानों की समस्या को बनाया बिजनेस का आधार

साईतेजा की सफलता का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने सिर्फ कंपनी बनाने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खेती से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान देने की कोशिश की। यही सोच उनके स्टार्टअप को अलग पहचान दिला रही है।

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‘हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये…’, मरीज ने शेयर किया मुंबई के अस्पताल का बिल, लोगों के उड़े होश

अस्पताल में चार दिन रहना…, एक आम सर्जरी… और 11 लाख रुपये से ज्यादा का बिल। मुंबई के एक अस्पताल में हर्निया की सर्जरी के लिए एक मरीज द्वारा 11.04 लाख रुपये चुकाने का दावा करने वाली एक वायरल पोस्ट ने बहस छेड़ दी है। इस दावे ने भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर की बढ़ती लागत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह चर्चा तब शुरू हुई जब X यूजर निखिल झा ने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि उनके एक फॉलोअर की मुंबई के एक नामी अस्पताल में इंग्वाइनल हर्निया की सर्जरी हुई थी। पोस्ट के अनुसार, मरीज से इलाज के लिए 11.04 लाख रुपये लिए गए।

जानकारी शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा था, “कल एक फॉलोअर ने हमें मुंबई के एक बड़े अस्पताल में अपनी हर्निया सर्जरी के बारे में मैसेज किया। कुल खर्च 11.04 लाख रुपये था। हां, हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये।” आगे अपनी बात रखते हुए झा ने लिखा, “हम इतनी बड़ी रकम देखकर हैरान और स्तब्ध रह गए। अगर छोटी सी हर्निया सर्जरी का खर्च इतना है, तो बड़ी सर्जरी का खर्च क्या होगा? तो क्या मुंबई में अस्पताल में भर्ती होना कोई अपराध बनता जा रहा है? क्या शहर में अच्छी हेल्थकेयर ऐसी लग्जरी बन गई है, जिसे सिर्फ बहुत अमीर लोग ही उठा सकते हैं?”

पोस्ट में एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जो इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट का मैसेज लग रहा था। इमेज के अनुसार, कुल मेडिकल खर्च 11,04,100 रुपये था, जबकि सेटल किया गया इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट 4,64,000 रुपये था। डॉक्यूमेंट से पता चला कि मरीज को इंग्वाइनल हर्निया से जुड़े इलाज के लिए 6 जुलाई से 10 जुलाई, 2026 तक अस्पताल में भर्ती किया गया था।

हालांकि, पोस्ट में इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, जैसे कि कौन सी सर्जरी हुई, कमरे की कैटेगरी, डॉक्टर की फीस, अतिरिक्त प्रक्रियाएं या क्या मरीज़ को अतिरिक्त मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। इसके बावजूद, पोस्ट ने तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने प्राइवेट अस्पतालों के खर्च और मेडिकल इलाज के खर्च को उठाने की क्षमता पर अपनी राय दी। जहां कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि हर्निया की सर्जरी का बिल इतना ज्यादा कैसे हो सकता है, वहीं दूसरों ने कहा कि मामले को ठीक से समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है।

एक डॉक्टर ने पोस्ट पर कमेंट किया, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11 लाख रुपये बहुत ज़्यादा हैं। क्या इसमें हेलीकॉप्टर से पिक-अप और ड्रॉप भी शामिल था?” एक यूजर ने हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता के बारे में चिंता जताई और लिखा, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये? यह भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 11 लाख रुपये से ज़्यादा की आम हर्निया सर्जरी कई मध्यम-वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है। इंश्योरेंस होने पर भी, अगर क्लेम सीमित हैं या रिजेक्ट हो जाते हैं, तो ऐसे खर्च आर्थिक तनाव पैदा कर सकते हैं। अस्पताल की कीमतों, इंश्योरेंस सेटलमेंट और मेडिकल बिलिंग में ज़्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए। अच्छी क्वालिटी की हेल्थकेयर सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं होनी चाहिए।”

एक और यूजर ने शहरों के बीच इलाज के खर्च की तुलना की और लिखा, “सूरत में हर्निया की सर्जरी का खर्च 1.5 लाख रुपये है, जबकि मुंबई के एक बड़े अस्पताल में उसी प्रक्रिया का खर्च 11.04 लाख रुपये है। कीमत में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद, पॉलिसीहोल्डर एक जैसा प्रीमियम देते हैं। यह दिखाता है कि कैसे बड़े मेट्रो अस्पतालों में इलाज का बढ़ता खर्च सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।”

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ अस्पताल का बिल पूरी मेडिकल स्थिति को नहीं समझा सकता। यूजर ने लिखा, “यह मैसेज यह नहीं बताता कि कौन सी प्रक्रिया की गई थी। यह समझने के लिए कि क्या मरीज को कोई कॉम्प्लिकेशन हुआ था और क्या उसे ICU में रहना पड़ा था, हमें ऑपरेशन नोट्स और डिस्चार्ज समरी देखने की जरूरत है।”

न म्यूचुअल फंड, न शेयर… 50 लाख कमाने वाला प्रोफेशनल आखिर कहां लगा रहा पैसा

आज के दौर में अच्छी सैलरी मिलने पर ज्यादातर लोग अपनी बचत को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या SIP के जरिए बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसे लंबे समय में संपत्ति बनाने का सबसे लोकप्रिय तरीका माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आई एक कहानी ने इस सोच को नई बहस में बदल दिया है। 50 लाख रुपये सालाना कमाने वाले एक प्रोफेशनल ने पारंपरिक निवेश के बजाय अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खुद का कारोबार खड़ा करने में लगाने का फैसला किया। उसकी यह रणनीति अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है।

कुछ लोग इसे भविष्य के लिए साहसिक और समझदारी भरा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि शेयर बाजार की कंपाउंडिंग ताकत को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

आधी सैलरी, आधे कंपनी के शेयर

X पर राम नाम के एक यूजर ने अपने दोस्त की फाइनेंशियल प्लानिंग शेयर की। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त का सालाना CTC 50 लाख रुपये है। इसमें 25 लाख रुपये सैलरी के रूप में मिलते हैं, जबकि बाकी 25 लाख रुपये कंपनी के शेयर हैं, जो चार साल में धीरे-धीरे मिलते हैं।

SIP छोड़ बिजनेस पर लगाया दांव

राम के मुताबिक, उनके दोस्त ने अतिरिक्त पैसे को म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में लगाने के बजाय अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। पिछले साल उसने बैग्स का कारोबार शुरू किया और इस साल पुरुषों के कपड़ों का बिजनेस भी लॉन्च कर दिया।

हालांकि, वह पूरी तरह पारंपरिक निवेश से दूर नहीं है। वह PPF में निवेश करता है और हर साल करीब 1.2 लाख रुपये का LIC प्रीमियम भी भरता है। लेकिन उसका सबसे बड़ा फोकस अपने कारोबार को आगे बढ़ाने पर है।

SIP या अपना बिजनेस?

राम ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या उनका दोस्त शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में मिलने वाले लंबे समय के कंपाउंडिंग रिटर्न से चूक रहा है? या फिर अपना सफल बिजनेस खड़ा करना भविष्य में इससे भी बड़ा फायदा दे सकता है?

यही सवाल सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया।

लोगों ने क्या दी राय?

कई यूजर्स का मानना था कि निवेश और बिजनेस, दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलना सबसे अच्छा तरीका है। उनका कहना था कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहता है, जबकि अपने बिजनेस में फैसलों पर खुद का नियंत्रण होता है।

वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर किसी को अपने बिजनेस और उसकी संभावनाओं पर भरोसा है, तो अपने काम में निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। उनका मानना है कि जब व्यक्ति खुद अपने कारोबार को संभालता है, तो उसके पास बेहतर फैसले लेने और मुनाफा बढ़ाने का मौका होता है।

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₹15 लाख की नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस, अब महीने की कमाई सिर्फ ₹12000, इस शख्स ने बताया अपना दर्द

अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने को अक्सर आर्थिक आजादी की दिशा में एक साहसी कदम माना जाता है। हालांकि, पहली बार बिजनेस शुरू करने वाले कई लोगों के लिए, असलियत सोशल मीडिया पर दिखने वाली सफलता की कहानियों से कहीं ज्यादा मुश्किल होती है।

X पर हाल ही में एक पोस्ट ने चर्चा छेड़ दी है, जिसमें एक एंटरप्रेन्योर ने सालाना 15 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने के बाद बिजनेस खड़ा करने में आने वाली आर्थिक मुश्किलों के बारे में बताया। इस पोस्ट ने कई यूजर्स का ध्यान खींचा, जिन्होंने एक पक्की सैलरी की सुरक्षा के बजाय एंटरप्रेन्योरशिप चुनने से जुड़े जोखिमों, ज़िम्मेदारियों और त्याग पर अपनी राय रखी।

यह पोस्ट X यूजर किरणजीत दास ने शेयर किया था, जिन्होंने बिजनेस जमाने की कोशिश के दौरान बहुत कम कमाई होने की मुश्किलों के बारे में खुलकर बात की। कैप्शन में लिखा था, “सालाना 15 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने के बाद बिज़नेस से महीने में ₹12,000 कमाना शायद आपको व्यक्तिगत रूप से परेशान न करे। चुनौतियां तब बढ़ती हैं जब आपके पास परिवार की देखभाल, फीस भरना, दवाइयां खरीदना और कई अन्य ज़िम्मेदारियां हों। ‘एम्प्लॉई नहीं, एंटरप्रेन्योर बनो’ कहना आसान है। इसे करना नहीं।”

एक और व्यक्ति ने लिखा, “जो लोग पहले से ही किसी कंपनी/ऑर्गनाइज़ेशन में बहुत अच्छी सैलरी पर काम कर रहे हैं, उन्हें सिर्फ डे ट्रेडिंग के लिए अपनी नौकरी कभी नहीं छोड़नी चाहिए। नौकरी के साथ-साथ, कोई भी छोटे स्तर पर पोजीशनल ट्रेडिंग, इन्वेस्टिंग और म्यूचुअल फंड में शामिल हो सकता है।

मुझे याद है कि 2017 और 2020 के बीच, 2 या 3 ‘तथाकथित’ मशहूर ट्रेडर्स-कम-यूट्यूबर्स से प्रेरित होकर, कई लोगों ने फुल-टाइम ट्रेडिंग को अपना पेशा बनाने के लिए अपनी पक्की नौकरियां छोड़ दी थीं।”एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “पूरी तरह सहमत हूं, लेकिन किसी को अपने परिवार की आर्थिक तंगी को बदलने के लिए जोखिम उठाना चाहिए, जिसका सामना वे पुश्तैनी तौर पर कर रहे हैं।”

ओवरटाइम से दूरी, HR तक सीधी शिकायत… Gen Z की नई वर्किंग स्टाइल पर इंटरनेट पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर entrepreneur और content creator Sheetal Rijhwani की एक पोस्ट ने अचानक ऑनलाइन बड़ी चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने पोस्ट में Gen Z कर्मचारियों के काम करने के तरीके को लेकर कुछ ऐसे दावे किए, जिन्होंने इंटरनेट पर नई बहस को जन्म दे दिया है। इस पोस्ट के सामने आते ही लोग दो अलग-अलग खेमों में बंट गए हैं  एक तरफ वो लोग हैं जो मानते हैं कि Gen Z वाकई में पुराने टॉक्सिक वर्क कल्चर को बदल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया मामला मान रहे हैं।

इस चर्चा ने काम के घंटों, ऑफिस अनुशासन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। खास बात यह है कि यह बहस सिर्फ एक पोस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों के नजरिए को भी सामने लेकर आई है।

Gen Z का नया स्टाइल?

पोस्ट के अनुसार, कुछ Gen Z कर्मचारी ऑफिस में एक अलग ग्रुप बनाकर काम करते हैं। ये लोग तय समय पर ऑफिस छोड़ देते हैं, बिना जरूरत देर तक रुककर मैनेजर को खुश करने की कोशिश नहीं करते और वीकेंड पर वर्क कॉल्स भी अवॉइड करते हैं।

ऑफिस की गलत चीजों पर सीधा सवाल

दावा यह भी है कि अगर कोई मैनेजर गलत व्यवहार करता है, तो ये कर्मचारी सीधे HR तक शिकायत पहुंचाते हैं। बताया गया कि HR भी कई मामलों में कर्मचारियों का साथ देता है और मुद्दों को गंभीरता से लेता है।

AC बंद हुआ तो लिया बड़ा फैसला

पोस्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह था, जिसमें कहा गया कि ऑफिस की AC खराब होने पर Gen Z ग्रुप ने काम रोक दिया और पास के कैफे से काम करने का फैसला किया, जब तक समस्या ठीक नहीं हुई।

मिलेनियल्स झेल लेते हैं, हम नहीं

एक मजेदार मोड़ तब आया जब कहा गया कि मिलेनियल्स अक्सर ऐसी परिस्थितियों को सह लेते हैं, जबकि Gen Z इसे चैलेंज करते हैं। इसी बात पर पोस्ट में “Emotional damage” जैसा कैजुअल कमेंट भी किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों ने अपनी राय दी। कुछ ने कहा कि Gen Z सच में टॉक्सिक वर्क कल्चर को तोड़ रहा है, जबकि कुछ ने इसे जरूरत से ज्यादा सख्त रिएक्शन बताया।

नई और पुरानी सोच की टक्कर

कमेंट सेक्शन में Gen X और अन्य यूजर्स ने बताया कि नौकरी का माहौल समय के साथ बदलता रहा है जहां पहले लोग लंबे समय तक नौकरी में टिके रहते थे, वहीं अब कॉन्ट्रैक्ट और फ्लेक्सिबल वर्क कल्चर बढ़ रहा है। कई लोगों ने माना कि अब “ओवरवर्क = डेडिकेशन” वाली सोच पर सवाल उठना जरूरी है।

Viral Post: ‘भैया, कल से नहीं आऊंगी…’ बोनस और छुट्टियां भी कुक नहीं रोक पाई, वायरल हुई ये कहानी

Viral Post: सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति की कुक को लेकर पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में व्यक्ति ने बताया कि उसके घर में 4 साल से काम कर रही कुक ने अचानक नौकरी छोड़ दी। व्यक्ति ने बताया कि इस दौरान उसने हमेशा समय पर वेतन दिया, बोनस दिया, छुट्टियां दीं और हर साल सैलरी में बढ़ोतरी भी की।। इसके बावजूद कुक ने ज्यादा कमाई के लिए दूसरी जगह काम करने का फैसला किया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर रिश्तों, उम्मीदों और नौकरी बदलने को लेकर काफी चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल हुआ पोस्ट

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पोस्ट में उस व्यक्ति ने लिखा, “आज हमारी कुक आंटी घर आईं और बोलीं, ‘भैया, कल से नहीं आऊंगी।’ उन्होंने हमारे साथ 4 साल तक काम किया है। हर साल मैंने उनकी सैलरी में 15% की बढ़ोतरी की। फिलहाल उनकी तनख्वाह ₹15,500 प्रति माह है।” उन्होंने आगे कहा, “होली, दिवाली, रक्षाबंधन और नवरात्रि जैसे त्योहारों पर उन्हें गिफ्ट, साड़ी, मिठाई, बोनस और नकद राशि भी दी जाती थी। यहां तक कि जब वह 10-15 दिनों के लिए बाहर रहती थीं, तब भी मैंने कभी उनकी सैलरी नहीं काटी।”

कुक ने छोड़ी सैलरी

उस व्यक्ति को भरोसा था कि कई वर्षों से बने अच्छे संबंध, सम्मान और भरोसे की वजह से उनके बीच मजबूत जुड़ाव बन गया है। ऐसे में जब हाउस हेल्प ने अचानक काम छोड़ने का फैसला सुना तो वह काफी हैरान रह गया। उन्होंने लिखा, “मुझे लगता था कि सालों से बने रिश्तों की भी कुछ अहमियत होती है। मैंने उनसे पूछा, ‘क्या कोई परेशानी है?’ इस पर उन्होंने कहा, ‘मुझे दूसरी जगह ज्यादा सैलरी मिल रही है।’ मैंने जवाब दिया, ‘मैं उतनी सैलरी देने के लिए तैयार हूं।’ लेकिन वह मुस्कुराईं और बोलीं, ‘नहीं भैया, मैंने वहां पहले ही एडवांस ले लिया है। आप किसी नए कुक को ढूंढ़ लीजिए।’ और इस तरह 4 साल का साथ सिर्फ 2 मिनट की बातचीत में खत्म हो गया।”

 

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट

पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “सच्चाई ये है कि लोग हमेशा इसलिए साथ नहीं छोड़ते क्योंकि उनके साथ बुरा व्यवहार हुआ हो। कई बार वे इसलिए आगे बढ़ जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कहीं और उनके लिए बेहतर अवसर मौजूद हैं।” उस व्यक्ति ने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज मुझे एक बात समझ आई कि किसी रिश्ते को लेकर हमारी सोच और उसकी अहमियत, दूसरे व्यक्ति की सोच से अलग हो सकती है।” उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

यूजर्स ने किया कमेंट

कुछ यूजर्स ने उनकी भावनाओं को समझते हुए सहानुभूति जताई, जबकि कई लोगों ने इस पूरे मामले की तुलना कॉर्पोरेट दुनिया से की। एक यूजर ने लिखा, “लोग वही फैसला लेते हैं जो उन्हें अपने लिए बेहतर लगता है। इसमें कुछ भी व्यक्तिगत नहीं होता।” दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, “अगर यही कहानी किसी कॉर्पोरेट कर्मचारी के नौकरी बदलने की होती, तो ज्यादातर लोग उसे पुराने ऑफिस में वापस न जाने की सलाह देते।” वहीं, एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा, “भाई, एक कुक को ₹15,500 महीना? पता भेजो, मैं ही काम करने आ जाता हूं।”