सिर्फ 10 रुपये में भरपेट खाना…, सिक्योरिटी गार्ड ने कंपनी की ओर से मिलने वाला सस्ता लंच दिखाया, इंटरनेट पर लोगों ने दिए ऐसे रिएक्शन

आजकल पेट भर खाना खाने का खर्च कितना होता है? कई लोगों के लिए तो बाहर साधारण खाना भी 100 रुपये या उससे अधिक का हो जाता है। ऐसे में जब एक सुरक्षा गार्ड ने बताया कि उसे कंपनी का पूरा लंच सिर्फ 10 रुपये में मिलता है। इंटरनेट पर वीडियो चर्चा का विषय बन गया है।

यह वीडियो अब वायरल हो रहा है और इसे इंस्टाग्राम यूजर आनंद कुमार ने शेयर किया है, जो नियमित रूप से अपने ऑफिस में परोसे जाने वाले लंच और डिनर के वीडियो पोस्ट करते हैं। पोस्ट का कैप्शन था, “कंपनी का लंच सिर्फ 10 रुपये में।”

वीडियो में कुमार दर्शकों को दिखाते हैं कि उस दिन लंच में क्या परोसा गया था। वह कहते हैं, “तो दोस्तों, कंपनी का खाना आ गया। हमारी कंपनी सिर्फ 10 रुपये लेती है। लंच का समय हो रहा है। चलिए देखते हैं कि कंपनी ने आज क्या भेजा है।” फिर वह पैकेट खोलता है और एक-एक करके हर चीज दिखाता है। खाने में कुरकुरा पापड़, करेला भुजिया (भुना हुआ करेला), सोयाबीन की सब्जी, भरपूर चावल, दाल और प्याज का एक टुकड़ा शामिल है।

खाना देखने में तो सादा और पेट भरने वाला लग रहा था, लेकिन सबसे ज़्यादा हैरानी कीमत देखकर हुई। कुमार का कहना है कि पूरे खाने का बिल सिर्फ 10 रुपये आया। अपनी कंपनी को धन्यवाद देते हुए वह कहता है, “बाहर यही खाना 50 से 100 रुपये का मिलता है। यहां सिर्फ 10 रुपये का।

वीडियो को देखते ही देखते हज़ारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इतनी कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए कंपनी की सराहना की। कई लोगों ने बताया कि इसी तरह का लंच किसी रेस्टोरेंट या यहां तक ​​कि सड़क किनारे के ढाबे पर भी आसानी से कई गुना अधिक महंगा पड़ेगा।

साथ ही, कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि इसे प्लास्टिक बैग में क्यों पैक किया गया था। उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनी को दोबारा इस्तेमाल होने वाले लंच बॉक्स या फ़ूड-ग्रेड कंटेनर का इस्तेमाल करना चाहिए। एक यूज़र ने कमेंट किया, “कंपनी से कहें कि वे प्लास्टिक कंटेनर में खाना न परोसें। इससे सेहत से जुड़ी समस्याएं होती हैं।” एक और व्यक्ति ने कहा, “कृपया प्लास्टिक बैग की जगह लंच बॉक्स का इस्तेमाल करें।”

एक व्यक्ति ने यह भी लिखा, “कंपनी को पैकेजिंग में कुछ बदलाव करने चाहिए।” ऐसे ही एक कमेंट का जवाब देते हुए कुमार ने कहा कि वह कंपनी को इस सुझाव के बारे में बताएंगे और इस समस्या को हल करने की कोशिश करेंगे। पैकेजिंग को लेकर चिंता के बावजूद, कई लोगों को लगा कि इतनी सस्ती कीमत पर खाना उपलब्ध कराने के लिए कंपनी तारीफ़ की हकदार है।

एक यूजर ने लिखा, “जो भी कंपनी है, उसे सलाम। सिर्फ 10 रुपये में किसी को खाना खिलाना। मेरा बहुत सम्मान है। यहां लोग पैकेजिंग को लेकर शिकायत कर रहे हैं! आइए हर छोटी बात पर इतना नकारात्मक न हों। आइए तारीफ करना सीखें।” इस पोस्ट पर यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कई प्रतिक्रियाएं दीं। उन्होंने कहा कि वे भी उसी कंपनी में काम करना चाहते हैं।

एक यूजर ने लिखा, “कौन सी कंपनी? क्या वे CSE ग्रेजुएट को नौकरी पर रखेंगे?” एक और यूजर ने कमेंट किया, “भाई, प्लीज मुझे भी उसी कंपनी में नौकरी दिला दो।” कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में 10 रुपये में पूरा खाना मिलना लगभग नामुमकिन है।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा से पहले सख्ती, DJ, हथियार और नॉन-वेज पर रोक, जानें नए नियम और ट्रैफिक एडवाइजरी

Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के बॉर्डर वाले जिलों की पुलिस ने तीर्थ मार्गों पर बहुत बड़े DJ सेटअप, हथियारों और मांसाहारी दुकानों पर रोक लगा दी है। इसी बीच, मेरठ के NH-58 पर नए डायवर्जन के कारण संकरे हस्तिनापुर-चांदपुर मार्ग पर घंटों लंबे जाम की स्थिति बन गई है।

बता दें कि यह धार्मिक यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि तक चलती है। इसमें लाखों कांवड़िये पैदल या गाड़ियों से हरिद्वार और गंगोत्री जैसी जगहों पर गंगाजल लेने जाते हैं और फिर वापस आकर उसे स्थानीय शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं।

वहीं, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़, बागपत, आगरा और दिल्ली से सटे जिलों की पुलिस ने कई इंतजाम किए हैं। इनमें रूट डायवर्जन, अलग पार्किंग जोन और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक शामिल है। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा मार्गों पर मौजूद खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट्स में खाद्य सुरक्षा जांच भी की जा रही है।

इस साल क्या करें और क्या न करें?

क्या करें (Do’s)क्या न करें (Don’ts)
यात्रा के दौरान हमेशा अपना पहचान पत्र (ID Proof) साथ रखें।हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडा, तलवार या किसी भी तरह का हथियार साथ न रखें।
केवल प्रशासन द्वारा तय कांवड़ मार्ग का ही इस्तेमाल करें।दोपहिया वाहन पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल न करें।
बागपत: कांवड़/DJ की ऊंचाई 10 फीट, चौड़ाई 12 फीट से कम रखें और आवाज 75 डेसिबल से ज्यादा न हो।कांवड़ मार्ग के भोजनालयों में नॉन-वेज, प्याज और लहसुन का सेवन या परोसना प्रतिबंधित है।
आगरा: कांवड़ की ऊंचाई 12 फीट से कम रखें और DJ तय मानकों के अनुसार ही बजाएं।कांवड़ मार्ग और मंदिरों के आसपास मांस की दुकानें बंद रहेंगी।
शिविर (कैंप) आयोजक CCTV, अग्नि सुरक्षा उपकरण और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें।ढाबों और होटल में खाना या पानी खरीदने से पहले रेट लिस्ट जरूर देखें, तय कीमत से ज्यादा भुगतान न करें।

अलग-अलग शहरों में DJ और कांवड़ की ऊंचाई को लेकर क्या नियम हैं?

बागपत पुलिस ने कांवड़ और DJ सेटअप की ऊंचाई 10 फीट और चौड़ाई 12 फीट तक सीमित कर दी है, साथ ही DJ और दूसरे सिस्टम के लिए आवाज का लेवल 75 डेसिबल तक ही रखने का नियम बनाया है। हथियार – जैसे हॉकी स्टिक, बेसबॉल बैट, डंडे या तलवार लेकर कांवड़ ले जाने की इजाजत नहीं होगी, और दो-पहिया वाहनों पर मॉडिफाइड साइलेंसर या प्रेशर हॉर्न लगाने पर भी रोक लगा दी गई है।

आगरा में, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई एक अलग कोऑर्डिनेशन मीटिंग में कांवड़ की ऊंचाई की सीमा 12 फीट तय की गई और DJ की आवाज तय नियमों के दायरे में रखने का निर्देश दिया गया। बैठक में कांवड़ रूट और मंदिरों के आस-पास मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा, खाद्य विभाग की टीमें ढाबों और होटलों की जांच करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वहां रेट लिस्ट लगी हो।

कहां लग रहा है सबसे ज्यादा जाम?

फिलहाल, सबसे ज्यादा बुरा हाल मेरठ के पास हस्तिनापुर-चांदपुर रास्ते का है। 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच NH-58 पर भारी गाड़ियों के चलने पर रोक होने के कारण, ट्रकों को हस्तिनापुर के खादर (नदी के किनारे वाले इलाके) से होकर इस संकरी सड़क पर भेजा जा रहा है। इससे गाड़ियों की लंबी लाइनें लग रही हैं और दिन भर लगभग लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता पहले से ही खराब हालत में था। अब कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़े ट्रैफिक ने परेशानी और बढ़ा दी है।

लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात करने की मांग की है, क्योंकि स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान और व्यापारी घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं।

किन शहरों में लागू किए गए हैं रूट डायवर्जन?

शहर/मार्गक्या बदलाव किए गए हैं?
मेरठ (NH-58)28 जुलाई से 10 अगस्त तक भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी। ट्रकों को हस्तिनापुर खादर-चांदपुर मार्ग से भेजा जाएगा, जिससे इस रूट पर जाम की स्थिति बन सकती है।
मुजफ्फरनगर (NH-58)29 जुलाई की मध्यरात्रि से 12 अगस्त तक भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। 4 अगस्त तक हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि उसके बाद दोनों लेन कांवड़ियों के लिए सुरक्षित रहेंगी।
हरिद्वारसहारनपुर, दिल्ली, मेरठ और यमुनानगर से आने वाले वाहनों को मंडावर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम चौक होते हुए बैरागी कैंप पार्किंग की ओर डायवर्ट किया जाएगा।
देहरादून-ऋषिकेश मार्गवाहनों को नेपाली तिराहा और दूधाधारी फ्लाईओवर के रास्ते चमगादड़ टापू और लालजीवाला पार्किंग भेजा जाएगा। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
दिल्ली से सटे जिलेमेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर पुलिस के साथ संयुक्त समन्वय किया गया है। रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इमरजेंसी पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है।

रास्ते में खाने-पीने की जगहों के लिए क्या नियम हैं?

अधिकारियों के मुताबिक, फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने यात्रा के रास्तों पर पड़ने वाले होटलों और ढाबों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, अकेले हापुड़ में ही ऐसे लगभग 130 होटल और ढाबे हैं।

मुजफ्फरनगर में, असिस्टेंट कमिश्नर (फूड) अर्चना धीरन ने PTI को बताया कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों में नॉन-वेज खाना, प्याज और लहसुन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने कहा कि यह नियम हर साल लागू किया जाता है और छह टीमें बासी खाने की जांच करती हैं।

इसके अलावा, यात्रियों से अधिक कीमत न वसूला जाए इसके लिए 21 जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम भी तय कर दिए हैं। साथ ही, खाने-पीने की जगहों पर मालिक की जानकारी, लाइसेंस और फूड-सेफ्टी QR कोड दिखाना जरूरी होगा। वहीं, खाना बनाने वाले कर्मचारियों के लिए दस्ताने (ग्लव्स) पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

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Devshayani Ekadashi 2026: आज योग निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु, भद्रा से बचकर इस समय पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करें श्रीहरि की पूजा

Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। यह व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के साथ भगवान विष्णु का शयन काल प्रारंभ होता है और चतुर्मास लग जाता है। चतुर्मास यानी सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के चार महीनों की अवधि। आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु पाताल लोक में योग निद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं।

इन चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। सृष्टि के संचालन का काम भगवान शिव संभालते हैं। इस साल देवशयनी एकादशी का व्रत आज, 25 जुलाई 2026 को किया जा रहा है। माना जाता है कि आज के दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा और उपवास करने से श्री हरि प्रसन्न होते हैं। आज देवशयनी एकादशी के दिन भद्रा लग रही है। इसलिए आइए जानें, आज पूजा के लिए भद्रा रहित मुहूर्त क्या होगा और अन्य शुभ मुहूर्त क्या हैं ?

देवशयनी एकादशी पर भद्रा

इस साल पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी पर भद्रा सुबह 05:27 बजे से सुबह 11:34 बजे तक रहेगी। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। ऐसे में देवशयनी एकादशी पर पृथ्वी पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा।

देवशयनी एकादशी कब से कब तक?

एकादशी तिथि प्रारम्भ – जुलाई 24, 2026 को सुबह 09:12 बजे

एकादशी तिथि समाप्त – जुलाई 25, 2026 को सुबह 11:34 बजे

देवशयनी एकादशी पर पूजा कब करना चाहिए?

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 04:03 बजे से 04:45 बजे तक

अभिजित मुहूर्त : सुबह में 11:46 बजे से दोपहर 12:40 बजे

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:28 बजे से दोपहर 03:22 बजे

गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:58 पी एम से शाम 07:19 बजे

अमृत काल : रात 09:41 बजे से रात 11:29 बजे

निशिता मुहूर्त : रात 11:52 बजे से रात 12:34 बजे, जुलाई 26

देवशयनी एकादशी व्रत का पारण कब होगा?

पारण समय : 26 जुलाई को सुबह 05:28 बजे से 08:10 बजे

देवशयनी एकादशी पर क्या करें?

  • इस दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।
  • पूजा में चंदन, पीले पुष्प, धूप, दीप और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि तुलसी के बिना श्रीहरि की पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • पूजा के दौरान ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • यथाशक्ति उपवास रखें और सात्विक विचारों का पालन करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल या दक्षिणा का दान करें।
  • शाम के समय भगवान विष्णु की आरती कर खीर, माखन-मिश्री, फल या अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाएं।
  • एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है।

देवशयनी एकादशी पर क्या ना करें?

  • देवशयनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन, मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • व्रत ना भी रखने वालों को इस दिन चावल का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्रोध, झूठ, कटु वचन, विवाद और किसी का अपमान करने से बचें।
  • पेड़-पौधों को अनावश्यक नुकसान न पहुंचाएं और किसी भी जीव को कष्ट ना दें।
  • एकादशी के दिन तुलसी को स्पर्श और उसके पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

Hariyali Teej 2026 Date: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Hariyali Teej 2026 Date: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज? जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Hariyali Teej 2026 Date: सावन का महीना हरियाली और भगवान शिव की आराधना के लिए जाना जाता है। लेकिन इस माह की एक विशेषता भी है। ये महीना माता पार्वती के तप, त्याग और समर्पण की याद दिलाता है, जब महिलाएं और अविवाहित कन्याएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य के लिए हरियाली तीज का पर्व मनाती हैं। हरियाली तीज का पूरे साल में आने वाले प्रमुख तीज पर्व में अहम स्थान है। यह व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती ने वर्षों की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। माना जाता है कि माता पार्वती के इस समर्पण और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में अपनाया था। यही कारण है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं माता गौरी की पूजा कर उनसे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए इस व्रत का पालन करती हैं।

हरियाली तीज 2026: सही तारीख

सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 14 अगस्त को शाम 06:48 बजे से होकर 15 अगस्त को शाम 05:30 बजे तक रहेगा। उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 15 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

पूजा और व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य विशेष नियम

हरियाली तीज का व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी शादीशुदा जिंदगी और मनचाहा वर पाने के लिए रखा जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें :

हरा रंग और सोलह श्रृंगार : पूजा के समय हरे रंग के वस्त्र (जैसे साड़ी/सूट) पहनें, हाथों में हरी चूड़ियां पहनें और मेहंदी लगाएं। हरा रंग प्रकृति, सावन और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

सिंधारा की परंपरा : इस दिन मायके से आए सिंधारे का प्रयोग करें और सास या किसी वरिष्ठ महिला का आशीर्वाद लें। सिंधारे में वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, घेवर व मिठाइयां होती हैं।

व्रत संकल्प व व्रत कथा : सुबह स्नान के बाद सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें और शाम को भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करते समय हरियाली तीज की व्रत कथा अवश्य सुनें।

माता पार्वती को सुहाग सामग्री देना : पूजा के दौरान देवी पार्वती को लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां आदि) अर्पित करें।

हरियाली तीज में ये वर्जित है

  • पूजा या व्रत के दौरान काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, हरा या अन्य शुभ रंग पहनना उत्तम होता है।
  • इस दिन किसी से झगड़ा या कटु वचन न बोलें और मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार न लाएं।
  • घर में सात्विक माहौल रखें और लहसुन-प्याज या तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल न करें।
  • परंपरा अनुसार यदि आपने निर्जला व्रत का संकल्प लिया है, तो पूजा और कथा पूर्ण होने से पहले व्रत न खोलें।

Devshayani Ekadashi 2026 Katha: कल किया जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, भगवान विष्णु की पूजा में जरूर सुनें मोक्ष प्रदान करने वाली ये कथा

क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से लगी आग, आपकी जेब पर भी पड़ेगा महंगे क्रूड का असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में 22 जुलाई को बड़ी तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 2.76 फीसदी चढ़कर 93.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2.83 फीसदी की तेजी के साथ 86.74 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार और भारत की करेंसी रुपये पर भी पड़ा। निफ्टी में 0.76 फीसदी यानी 186 अंक की गिरावट दिखी, जबकि सेंसेक्स करीब 700 अंक क्रैश कर गया।

क्रूड में उछाल का असर रुपये पर भी पड़ा। डॉलर के मुकाबले यह 11 पैसे गिरकर 96.36 के लेवल पर आ गया। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल की वजह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती लड़ाई है। अमेरिकी ने लगातार 11वें दिन ईरान पर हमला जारी रखा। ईरान भी जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशान बना रहा है। टेंशन बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऑयल टैंकर्स की आवाजाही बाधित है। इससे क्रूड की कीमतें चढ़ रही हैं।

इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू हुई थी। उसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेट क्रूड का प्राइस 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के ऐलान से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, मध्यपूर्व में टेंशन फिर बढ़ने से क्रूड की कीमतें चढ़ने लगी हैं। क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है।

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक, क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से जून तिमाही में भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा रहा। भारत अपनी जरूरत के 88 फीसदी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। इस वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है।

पहले ही क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इससे दिल्ली में पेट्रोल का प्राइस प्रति लीटर 102.12 रुपये और मुंबई में 111.21 रुपये पहुंच गया है। दिल्ली में डीजल की कीमतें भी 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। अगर क्रूड में तेजी जारी रहती है तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर से पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो सकती है। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

महंगे पेट्रोल और डीजल से महंगाई बढ़ने का डर है। मई और जून में रिटेल इनफ्लेशन बढ़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईंधन खासकर डीजल महंगा होने से कई चीजों की कीमतें बढ़ती हैं। इसकी वजह यह है कि डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन के लिए होता है। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से फल-सब्जी सहित रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती है। पहले से ही प्याज सहित कई चीजों की कीमतों में उछाल दिख रहा है। इससे परिवारों के बजट पर बोझ बढ़ गया है।

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

The image caption features a message about monsoon special snack recipes, accompanied by a photo of plates arranged with Palak Patta Chaat, Dal Vada, Samosas, and Potato Tacos

Rainy Day Snacks: रिमझिम फुहारें और ठंडी हवाएं… मानसून का मौसम आते ही दिल कुछ गरमा-गरम और चटपटा खाने के लिए मचलने लगता है। इस मौसम में बालकनी में बैठकर बारिश को निहारते हुए अगर हाथ में स्नैक्स की प्लेट हो, तो मजा दोगुना हो जाता है। अगर आप भी इस बार पारंपरिक पकौड़ों से हटकर कुछ नया और बेहद लाजवाब ट्राई करना चाहते हैं, तो यहाँ 5 मानसून स्पेशल स्नैक्स रेसिपीज दी गई हैं:ALSO READ: बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

 

1. चटपटा 'पालक पत्ता चाट' 

बारिश में चाट खाने का अपना ही मजा है। यह स्नैक दिखने में जितना फैंसी है, बनाने में उतना ही आसान।

 

कैसे बनाएं: पालक के बड़े और साफ पत्तों को बेसन, अजवाइन और नमक के गाढ़े घोल में डुबोकर एकदम क्रिस्पी होने तक तल लें। अब इन कुरकुरे पत्तों को एक प्लेट में सजाएं। ऊपर से फेंटा हुआ मीठा दही, हरी चटनी, इमली की खट्टी-मीठी चटनी, चाट मसाला और नायलॉन सेव डालकर तुरंत सर्व करें।

 

2. गरमा-गरम 'दाल वड़ा' 

दक्षिण भारत का यह मशहूर स्नैक मानसून में कमाल का लगता है। यह ऊपर से बेहद कुरकुरा और अंदर से सॉफ्ट होता है।

 

कैसे तैयार करें: चना दाल को 3-4 घंटे भिगोकर बिना पानी के दरदरा पीस लें। अब इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, ढेर सारा कढ़ी पत्ता, अदरक और हींग मिलाएं। इस मिश्रण की छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर गरम तेल में सुनहरा होने तक डीप फ्राई करें। इसे नारियल की चटनी के साथ परोसें। चाय के साथ गरमा-गरम 'दाल वड़ा' का आनंद लें।

 

3. अचारी पनीर टिक्का समोसा

आलू समोसा तो हमेशा खाते हैं, इस बार बारिश में कुछ रॉयल ट्राई करें। समोसे के अंदर पनीर टिक्का की स्टफिंग हर बाइट में मजा ला देगी।

 

कैसे तैयार करें: पनीर के छोटे टुकड़ों को दही, तंदूरी मसाला, कसूरी मेथी और थोड़े से अचार के मसाले के साथ मैरीनेट करें और तवे पर हल्का सा टॉस कर लें। अब समोसे की पट्टी (शीट्स) में इस अचारी पनीर को भरकर समोसे का आकार दें और फ्राई करें। पुदीने की तीखी चटनी के साथ यह लाजवाब लगता है।

 

4. क्रिस्पी पोटैटो टाकोस

अगर बच्चों और बड़ों दोनों को खुश करना है, तो यह इंडो-मैक्सिकन फ्यूजन स्नैक बेस्ट है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए आलुओं में चाट मसाला, चिली फ्लेक्स, प्याज और हरा धनिया मिलाकर एक स्टफिंग तैयार करें। अब बची हुई रोटियों या मैदा की शीट पर इस स्टफिंग को फैलाएं, ऊपर से ढेर सारा चीज डालें और इसे आधे चांद के आकार में मोड़ लें। तवे पर मक्खन या तेल लगाकर इसे दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी होने तक सेकें।

 

5. मॉनसून स्पेशल 'चीज़ कॉर्न बॉल्स' 

बारिश और भुट्टे का रिश्ता बहुत पुराना है। इस बार भुट्टे को एक चीजी और क्रिस्पी ट्विस्ट दें।

 

कैसे तैयार करें: उबले हुए कॉर्न को थोड़ा दरदरा क्रश कर लें। इसमें उबला आलू, कद्दूकस किया हुआ मोजेरेला चीज, काली मिर्च और नमक मिलाएं। इसके छोटे-छोटे बॉल्स बनाएं, उन्हें कॉर्नफ्लोर के घोल में डुबोएं और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में लपेटकर कुरकुरा होने तक तल लें।

 

स्मार्ट कुकिंग टिप: बारिश के मौसम में स्नैक्स को और भी क्रिस्पी बनाने के लिए बेसन या मैदे के घोल में 1 से 2 चम्मच चावल का आटा या गरम तेल जरूर मिलाएं। इससे स्नैक्स लंबे समय तक कुरकुरे रहते हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन में आएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी, संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा और जानें जरूरी नियम

Sawan Putrada Ekadashi Vrat 2026: सावन का महीना शुरू होने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। भगवान शिव के इस महीने में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत। यह व्रत हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त के दिन किया जाएगा। यह तिथि और यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है।

पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और सभी परेशानियों व दोषों से मुक्ति मिलती है। जीवन में संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत विशेष अहमियत रखता है। कई विवाहित जोड़े सावन पुत्रदा एकादशी व्रत को बड़ी श्रद्धा और विध-विधान के साथ रखते हैं। वे भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी से संतान सुख के लिए आशीर्वाद, स्वास्थ्य और परिवार की खुशी की प्रार्थना करते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त और पारण का समय

एकादशी तिथि प्रारंभ : 23 अगस्त 2026 को दोपहर 03:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 24 अगस्त 2026 को शाम 05:48 बजे तक

व्रत पारण का समय (अगले दिन): 24 अगस्त के व्रत का पारण 25 अगस्त को किया जाएगा

संतान प्राप्ति के लिए पूजा विधि

  • सावन पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा स्थल पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति रखें।
  • तुलसी के पत्ते, फल, धूप, दीया और पानी चढ़ाएं।
  • पूजा में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करते रहें।
  • दंपत्ति इस मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं और सावन पुत्रदा एकादशी व्रत कथा भी सुन सकते हैं।
  • इस दिन चावल, अनाज, दाल, प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन या शराब से पूरी तरह दूर रहें।

सावन पुत्रदा एकादशी के नियम

  • प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करें।
  • व्रत का संकल्प लेकर दिनभर सात्विकता और संयम का पालन करें।
  • भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत और फल अर्पित करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता या एकादशी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
  • दंपति एक साथ भगवान विष्णु से स्वस्थ, संस्कारी और सुखी संतान की कामना करें।

सावन पुत्रदा एकादशी पर क्या ना करें?

  • इस दिन तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन ना करें।
  • क्रोध, कटु वचन, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें।
  • व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों और विवाद से दूर रहें।
  • बिना कारण किसी जीव को कष्ट ना पहुंचाएं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए।

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किसान बनने का सपना हुआ पूरा, 61 वर्षीय पूर्व फौजी ड्रैगन फ्रूट की खेती से कमा रहे 4 लाख रुपये

रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग सुकून भरी जिंदगी की तलाश करते हैं, लेकिन ओडिशा के प्रताप चंद्र राउल ने अपनी दूसरी पारी को एक नई पहचान देने का फैसला किया। दशकों तक देश की सेवा करने के बाद उन्होंने खेती को अपना नया लक्ष्य बनाया और कुछ अलग करने की ठानी। बालासोर के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका यह सफर आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

सीमित जमीन, नई सोच और सीखने की इच्छा के दम पर प्रताप ने ऐसी फसल चुनी, जो उनके इलाके में अभी ज्यादा प्रचलित नहीं थी। उनकी मेहनत ने न सिर्फ एक छोटे खेत को कमाई का जरिया बनाया, बल्कि यह भी दिखाया कि सही योजना और लगन से खेती में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

हाथों में थामी खेती की कमान

प्रताप ने 1984 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय सेना जॉइन की थी। करीब 26 साल सेवा देने के बाद सितंबर 2010 में वह रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने ओडिशा पुलिस में हवलदार के रूप में एक दशक तक काम किया। साल 2020 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर गांव लौटने का फैसला किया। लेकिन उनका उद्देश्य सिर्फ आराम करना नहीं था। वह कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे कम जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सके। प्रताप ने कहा, “मैं ऐसा किसान बनना चाहता था जो अपने इलाके में कुछ नया करे। मेरा लक्ष्य था साबित करना कि छोटी जमीन भी सही योजना के साथ बड़ा फायदा दे सकती है।”

खेती का अनुभव नहीं था, फिर भी सीखने से नहीं पीछे हटे

प्रताप के परिवार का खेती से कोई पुराना संबंध नहीं था। शुरुआत में उनके लिए खेती पूरी तरह नया क्षेत्र था। उन्होंने कई महीनों तक अलग-अलग फसलों के बारे में जानकारी जुटाई। उन्होंने इंटरनेट, यूट्यूब वीडियो, सोशल मीडिया समूहों और अनुभवी किसानों से बातचीत के जरिए खेती की बारीकियां सीखीं। कई विकल्पों पर विचार करने के बाद उन्हें ड्रैगन फ्रूट सबसे बेहतर विकल्प लगा।

इस फल ने उन्हें इसलिए आकर्षित किया क्योंकि:

  • इसमें पानी की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है
  • गर्म मौसम में इसकी पैदावार अच्छी होती है
  • एक बार पौधा लगाने के बाद करीब 25 साल तक उत्पादन मिल सकता है

गुजरात से लाए खास किस्म के पौधे, शुरू किया नया प्रयोग

मार्च 2022 में प्रताप ने करीब 1.3 लाख रुपये लगाकर अपना ड्रैगन फ्रूट फार्म तैयार किया। उन्होंने 1,000 पौधे, 70 कंक्रीट पोल, 900 फीट जीआई पाइप और अन्य जरूरी सामान खरीदा। उन्होंने गुजरात से ड्रैगन फ्रूट की सात बेहतरीन किस्में मंगाईं, जिनमें शामिल थीं:

  • वियतनाम रेड
  • थाई जंबो
  • मोरक्कन रेड
  • हाइब्रिड जायंट रेड
  • इजरायली येलो
  • ताइवान पिंक
  • व्हाइट ड्रैगन फ्रूट

कम जमीन में ज्यादा उत्पादन के लिए उन्होंने पारंपरिक पोल सिस्टम की जगह हाई-डेंसिटी रैलिंग सिस्टम अपनाया। इससे एक ही क्षेत्र में ज्यादा पौधे लगाए जा सके और बेलें तेजी से बढ़ने लगीं।

पहली फसल ने दिया झटका

किसी भी नए किसान की तरह प्रताप को शुरुआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मार्च 2023 में पहली बार फसल तैयार हुई, लेकिन उत्पादन केवल करीब 50 किलो रहा। फल भी उम्मीद से छोटे निकले। वह इतने निराश हुए कि उन्होंने उन्हें बाजार तक नहीं पहुंचाया। लेकिन प्रताप ने इस असफलता को हार नहीं माना। उन्होंने अपनी गलतियों को समझा और खेती के तरीके में बदलाव शुरू किया।

रसायनों को छोड़ा

प्रताप ने रासायनिक उर्वरकों की जगह पूरी तरह जैविक खेती अपनाने का फैसला किया। उन्होंने गाय के गोबर, गोमूत्र, फल-सब्जियों के कचरे, प्याज के अवशेष, मिट्टी और केंचुओं से प्राकृतिक खाद तैयार करनी शुरू की। इस बदलाव का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। पौधों की सेहत सुधरी, फलों का आकार बढ़ा और उत्पादन हर साल बेहतर होता गया।

छोटी जमीन से बढ़ी कमाई

साल 2024 में उनके खेत से करीब 200 किलो ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हुआ। जैविक फल होने के कारण ग्राहकों ने इसे अच्छी कीमत पर खरीदा और उन्हें लगभग 50 हजार रुपये की कमाई हुई। इसके बाद 2025 में उत्पादन तेजी से बढ़ा। अप्रैल से नवंबर के बीच करीब 900 किलो फल तैयार हुए।

उन्होंने लगभग:

  • 650 किलो फल सीधे ग्राहकों को करीब 220 रुपये प्रति किलो बेचे
  • बाकी फल थोक विक्रेताओं को करीब 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचे

सिर्फ फलों की बिक्री से उनकी आमदनी करीब 1.4 लाख रुपये तक पहुंच गई।

फल के साथ पौधों से भी कमाई का नया रास्ता

प्रताप ने कमाई का दायरा सिर्फ फलों तक सीमित नहीं रखा। वह हर साल करीब 2,000 ड्रैगन फ्रूट पौधों की नर्सरी तैयार करते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 हजार रुपये अतिरिक्त मिलते हैं। उन्होंने अपनी छत पर भी 22 पौधे लगाए हैं, जिनसे हर साल करीब 20 किलो फल मिलते हैं। ऑफ-सीजन में वह पौधों की कटाई-छंटाई और अगले उत्पादन की तैयारी में जुट जाते हैं।

अब स्ट्रॉबेरी से बढ़ाएंगे कमाई के मौके

ड्रैगन फ्रूट में सफलता हासिल करने के बाद प्रताप अब नई फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने एक छोटे क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती का प्रयोग किया, जो सफल रहा। अब उनका लक्ष्य है कि ड्रैगन फ्रूट के ऑफ-सीजन में दूसरी फसलों के जरिए अतिरिक्त आमदनी बनाई जाए।

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Chaturmas Fasting Rules: चातुर्मास में क्या खाएं और क्या नहीं, अपना लिए ये नियम तो होंगे 5 फायदे

An image providing information regarding the rules of Chaturmas 2026, as well as what to eat and what to avoid

Chaturmas Food Guide: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। चातुर्मास यानी देवशयनी एकादशी/ आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर देवप्रबोधनी एकादशी/ कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलने वाले 4 महीने का आध्यात्मिक समय। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी/ देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी/ देवउठनी एकादशी तक के चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और भक्त पूजा, जप, तप, दान तथा सात्विक जीवन अपनाकर पुण्य अर्जित करते हैं।ALSO READ: Chaturmas 2026: वर्ष 2026 में चातुर्मास कब से कब तक रहेगा?

 

चातुर्मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए इस समय सात्विक और हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है। चूंकि इन 4 महीनों में वर्षा ऋतु/मानसून अपने चरम पर होती है, जिससे हमारा पाचन तंत्र यानी डाइजेशन सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है। इसीलिए सनातन धर्म में इस दौरान खान-पान के कुछ कड़े और वैज्ञानिक नियम बनाए गए हैं।

 

यहां जानें महीने के अनुसार नियम, जो आपको जानकारी देंगे कि चातुर्मास में क्या खाएं, क्या न खाएं?

 

चातुर्मास में हर महीने के हिसाब से कुछ विशेष चीजों को छोड़ने का नियम है, क्योंकि उस मौसम में उन चीजों में बैक्टीरिया या कीड़े लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है:

 

1. क्या बिल्कुल न खाएं?

पहला महीना श्रावण मास: हरी पत्तेदार सब्जियां, साग, पालक, आदि खाना पूरी तरह वर्जित है। बारिश के कारण इनमें कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया पनपने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

 

दूसरा महीना भाद्रपद मास: दही और मट्ठा/ छाछ का सेवन बंद कर देना चाहिए। इस मौसम में पेट में इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

 

तीसरा महीना आश्विन मास: दूध का सेवन नहीं करना चाहिए या इसे बहुत कम कर देना चाहिए।

 

चौथा महीना कार्तिक मास: द्विदलन यानी दालें- जैसे चना, उड़द, मसूर, अरहर और बैंगन, मूली आदि खाने की मनाही होती है।

 

चारों महीने सामान्य परहेज: प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और बासी भोजन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए।ALSO READ: चातुर्मास 2026: सिद्धि की कामना है तो इन 4 कार्यों को न भूलें

 

2. क्या खाना सेहत के लिए अच्छा है?

हल्का और सुपाच्य भोजन: खिचड़ी, दलिया, मूंग की छिलके वाली दाल, लौकी, तोरई, कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां अच्छी तरह धोकर और पकाकर खाई जा सकती हैं।

 

गुनगुना पानी: इस मौसम में उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है।

 

सेंधा नमक: साधारण नमक की जगह भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करना अधिक फायदेमंद होता है।

 

चातुर्मास के नियम अपनाने के 5 बड़े फायदे

यदि आप इन 4 महीनों में अपनी जीभ पर नियंत्रण रखकर सात्विक भोजन अपनाते हैं, तो आपको ये 5 बड़े लाभ मिलते हैं:

 

1. मजबूत पाचन तंत्र

बारिश के मौसम में हमारी जठराग्नि यानी पाचन की शक्ति मंद हो जाती है। जब आप गरिष्ठ/ भारी, मांसाहारी या पत्तेदार भोजन नहीं खाते हैं, तो आपके पेट को आराम मिलता है। इससे गैस, अपच, और एसिडिटी जैसी समस्याएं कोसों दूर रहती हैं।

 

2. इंफेक्शन और बीमारियों से बचाव

मानसून में हवा और पानी के जरिए बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों और डेयरी प्रोडक्ट्स को सही समय पर डाइट से हटाने से आप फूड पॉइजनिंग, डायरिया, टायफायड और पेट के कीड़ों से सुरक्षित रहते हैं।

 

3. बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन

चातुर्मास में केवल एक समय भोजन करने या सात्विक डाइट लेने से शरीर की सफाई होती है, यह भोजन शरीर के टॉक्सिंस अर्थात् विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह आपकी त्वचा पर चमक लाता है और वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

 

4. मानसिक शांति और एकाग्रता 

आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी- 'जैसा अन्न, वैसा मन'। यानी तामसिक भोजन, जैसे- लहसुन, प्याज, मांस के छोड़ने से आपके शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन सुधरता है। इससे आलस्य दूर होता है, गुस्सा कम आता है और मन शांत तथा केंद्रित रहता है।

 

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता

चातुर्मास के समय में लिया गया हल्का भोजन और गुनगुना पानी आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। इससे मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी-खांसी, जुकाम और मौसमी बुखार से लड़ने की आपकी शारीरिक क्षमता मजबूत होती है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Chaturmas 2026: चातुर्मास में क्या करना चाहिए? जानें पुण्य कमाने के तरीके

LPG Price Today: घरेलू गैस सिलेंडर और कमर्शियल एलपीजी ग्राहकों को बड़ी राहत, जानिए देश के प्रमुख शहरों में नई कीमतें

LPG Price Today: देशभर में घरेलू और कमर्शियल रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) ने जुलाई 2026 के लिए 14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के दामों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की है। जून में हुई ₹29 प्रति सिलेंडर की वृद्धि के बाद कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। तेल कंपनियों ने जुलाई महीने में घरेलू 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया है।

हालांकि, इस महीने की शुरुआत में कमर्शियल 19 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कटौती की गई थी, जिससे होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। कमर्शियल सिलेंडर की इन कीमतों में 1 जुलाई को ₹183.50 की कटौती शामिल है। वहीं, जून के महीने में तेल कंपनियों द्वारा की गई ₹29 की बढ़ोतरी के बाद घरेलू गैस के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं।

उपभोक्ताओं को राहत

फिलहाल घरेलू और कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है क्योंकि सिलेंडर की कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं हुई है। कमर्शियल LPG सस्ता होने से होटल, ढाबों और रेस्तरां कारोबार को लाभ मिलेगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिति आने वाले महीनों में LPG कीमतों की दिशा तय कर सकती है।

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर

ताजा दरों के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। जून में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद से कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिरता राहत लेकर आई है।

प्रमुख महानगरों में घरेलू LPG के दाम

शहर                                                                                          14.2 किग्रा घरेलू LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                          942

मुंबई                                                                                            941.50

कोलकाता                                                                                     लगभग 939

चेन्नई                                                                                            लगभग 928.50

(ये दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हैं और इनमें आज तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।)

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता

तेल कंपनियों ने हाल ही में 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 183.50 रुपये की कटौती की थी। नई दरों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 2,930 रुपये में उपलब्ध है। यह कटौती वर्ष 2026 की पहली बड़ी कमी मानी जा रही है।

प्रमुख शहरों में 19 किग्रा कमर्शियल LPG की कीमत

शहर                                                                                          कमर्शियल LPG (रुपये)

दिल्ली                                                                                         2,930

मुंबई                                                                                           2,885.50

कोलकाता                                                                                    3,072

चेन्नई                                                                                             3,100

पश्चिम एशिया संकट पर नजर

घरेलू LPG की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ऊर्जा बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। भारत अपनी LPG आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका सहित वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

थाली पर भी पड़ा असर

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार टमाटर, प्याज और LPG की बढ़ी हुई लागत के कारण जून में घरेलू थाली की लागत में 5 से 6 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इससे साफ है कि रसोई गैस की कीमतों का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है।

क्यों स्थिर हैं घरेलू दाम?

तेल कंपनियों ने जून में अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण घरेलू सिलेंडर महंगा किया था। फिलहाल सरकार और कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला किया है। इसलिए जुलाई संशोधन में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की गई।

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