ऑफिस में 12 घंटे काम करने के बाद भी नहीं मिलेगी तरक्की? एक्सपर्ट ने बताया प्रमोशन का असली फॉर्मूला

ऑफिस में देर तक बैठना और लगातार व्यस्त नजर आना अक्सर मेहनती कर्मचारी की पहचान माना जाता है। लेकिन क्या रोजाना ज्यादा घंटे काम करने से ही करियर में तरक्की मिलती है? फ्रेयाज श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर शेयर किए एक वीडियो में इस सोच पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि ऑफिस में सिर्फ मेहनत करते दिखना काफी नहीं है, बल्कि यह मायने रखता है कि आपके काम से कितना फायदा हो रहा है और लोग आप पर कितना भरोसा करते हैं। उनके मुताबिक, कोई कर्मचारी 10-12 घंटे काम करने के बावजूद अगर समय पर सही नतीजा नहीं दे पाता, तो उसकी मेहनत ज्यादा मायने नहीं रखती।

इसके उलट, जो व्यक्ति तय समय पर काम पूरा करता है, बदलाव की स्थिति में साफ तरीके से बात करता है और बिना हर कदम पर मदद मांगे समस्याओं का हल निकालता है, उसे ज्यादा जिम्मेदारी मिलने की संभावना रहती है। यही भरोसा धीरे-धीरे करियर की ग्रोथ का रास्ता खोलता है।

12 घंटे काम के बाद भी क्यों नहीं मिलती पहचान?

इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में श्रॉफ ने कहा कि ऑफिस में मेहनत और काम की असली वैल्यू हमेशा एक जैसी नहीं होती। कोई कर्मचारी किसी काम में 12 घंटे लगा सकता है, लेकिन अगर नतीजा सही नहीं आया तो सिर्फ ज्यादा समय देने का कोई फायदा नहीं। उनके मुताबिक, कर्मचारी कितना थका हुआ है, इससे ज्यादा मायने यह रखता है कि वह काम को सही तरीके से पूरा कर पा रहा है या नहीं।

बॉस को चाहिए ऐसा कर्मचारी जिस पर कर सकें भरोसा

श्रॉफ के मुताबिक, करियर में आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है विश्वसनीय होना। मैनेजर ऐसे लोगों को ज्यादा जिम्मेदारी देना पसंद करते हैं, जिनके बारे में उन्हें भरोसा हो कि वे मुश्किल स्थिति में भी काम संभाल सकते हैं। समय पर काम पूरा करना, बदलाव होने पर साफ तरीके से बात करना और बिना हर कदम पर किसी की मदद लिए समस्या का समाधान निकालना किसी कर्मचारी की असली ताकत बन सकता है।

सिर्फ व्यस्त नहीं, काम के लिए जरूरी बनिए

कई बार कर्मचारी यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि वे पूरे दिन बेहद व्यस्त हैं। लेकिन श्रॉफ का कहना है कि व्यस्त नजर आना और कंपनी के लिए वैल्यू पैदा करना दो अलग चीजें हैं। अगर कोई कर्मचारी लगातार सही फैसले लेता है, समस्याओं को समझकर उनका हल निकालता है और फीडबैक को खुले मन से स्वीकार करता है, तो उसकी पहचान सिर्फ ‘मेहनती कर्मचारी’ तक सीमित नहीं रहती।

प्रमोशन थकान देखकर नहीं, भरोसे से मिलता है

वीडियो में श्रॉफ ने करियर के शुरुआती दौर में एक मुश्किल लेकिन जरूरी सबक बताया। उनके अनुसार, कर्मचारी को हर वक्त यह साबित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए कि वह कितनी मेहनत कर रहा है। इसके बजाय उसे ऐसा व्यक्ति बनने पर ध्यान देना चाहिए, जिसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सके। यानी प्रमोशन इस वजह से नहीं मिलता कि आप काम करते-करते थक गए हैं। असली सवाल यह है कि क्या आपका बॉस आपको किसी बड़े काम की जिम्मेदारी देने के लिए तैयार है?

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सोशल मीडिया पर लोगों ने भी रखी अपनी बात

श्रॉफ की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने माना कि ऑफिस में नतीजे और भरोसा मेहनत के घंटों से ज्यादा मायने रखते हैं। हालांकि, कुछ यूजर्स ने एक अलग समस्या भी बताई। एक व्यक्ति ने कहा कि अगर मैनेजर किसी कर्मचारी को खुद फैसले लेने या काम करने की आजादी ही न दे, तो उससे भरोसेमंद बनने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। एक अन्य यूजर ने चिंता जताई कि भरोसा बढ़ने के साथ कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा काम भी डाला जा सकता है।

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फ्लाइट टिकट बुक करते वक्त सीट चुनने में न करें जल्दबाजी, ये टिप्स आएंगी काम!

फ्लाइट में सीट चुनना छोटी बात लग सकती है, लेकिन सही सीट सफर को काफी आरामदायक बना सकती है। कुछ पैसेंजर को खिड़की के पास बैठकर बाहर का नजारा देखना और सोना पसंद होता है, तो कुछ लोग ऐसी सीट चाहते हैं जहां से आसानी से उठकर वॉशरूम जा सकें। इसलिए सीट का चुनाव आपकी जरूरत और सफर के तरीके के हिसाब से करना बेहतर रहता है।

आप भी फ्लाइट टिकट बुक करते समय विंडो, आइल और मिडिल सीट को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं, तो इनके फायदे और नुकसान जान लेना चाहिए। इससे छोटी हो या लंबी फ्लाइट, आप अपनी सुविधा के हिसाब से सही सीट चुन पाएंगे।

1. आइल सीट

आइल यानी गलियारे वाली सीट उन लोगों के लिए अच्छी रहती है जिन्हें सफर के दौरान बार-बार उठना पड़ता है। यहां से वॉशरूम जाने, पैर फैलाने या ऊपर रखे सामान तक पहुंचने में आसानी रहती है। फ्लाइट लैंड होने के बाद बाहर निकलना भी थोड़ा आसान हो सकता है। लेकिन इस सीट से गुजरने वाले पैसेंजर और सर्विस ट्रॉली आपको परेशान कर सकते हैं।2. मिडिल सीट

मिडिल सीट आमतौर पर पैसेंजर की पहली पसंद नहीं होती, लेकिन इसके भी कुछ फायदे हैं। यदि आप किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के साथ सफर कर रहे हैं, तो साथ बैठने के लिए यह सीट काम आ सकती है। इसके अलावा, आम तौर पर मिडिल सीट पर बैठे पैसेंजर को दोनों आर्मरेस्ट इस्तेमाल करने की फैसिलिटी देने की बात कही जाती है। लेकिन दो पैसेंजर के बीच बैठने से जगह थोड़ी कम महसूस हो सकती है।3. विंडो सीट

विंडो से फ्लाइट के बाहर का सीन देखना है तो विंडो सीट आपके लिए परफेक्ट हो सकती है। इसमें आप खिड़की से सिर टिकाकर आराम कर सकते हैं और आसपास के पैसेंजर की आवाजाही भी कम परेशान करती है। लेकिन वॉशरूम जाने के लिए आपको साथ बैठे पैसेंजर से बाहर निकलने के लिए कहना पड़ सकता है।4. लंबी फ्लाइट के लिए ऐसे चुनें सीट

लंबी फ्लाइट में सीट चुनना और भी जरूरी हो जाता है। आपका ज्यादातर समय सोने में गुजरने वाला है, तो विंडो सीट कम्फर्टेबल रह सकती है। वहीं, बार-बार वॉशरूम जाने या बीच-बीच में चलने की जरूरत हो तो आइल सीट ज्यादा सुविधाजनक होगी। इसलिए लॉन्ग जर्नी में अपनी जरूरत के हिसाब से सीट चुनें।सीट बुक करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

सीट चुनते समय सिर्फ विंडो या आइल ही न देखें, बल्कि फ्लाइट का रूट, सफर की अवधि और एयरक्राफ्ट का सीट मैप भी देख लें। आपको शांति चाहिए तो वॉशरूम या गैली के बिल्कुल पास वाली सीट से बचना बेहतर हो सकता है। सीट पहले से बुक करने पर पसंद की जगह मिलने की संभावना भी ज्यादा रहती है।

यदि आपका बजट थोड़ा ज्यादा है, तो आप लॉन्ग लेग स्पेस वाली सीट भी ले सकते हैं। इसमें पैरों को फैलाने के लिए ज्यादा जगह मिलती है, जिससे खासकर लंबी फ्लाइट में बैठना ज्यादा कम्फर्टेबल हो सकता है।सही सीट आपकी पूरी फ्लाइट को ज्यादा आरामदायक बना सकती है। इसलिए टिकट बुक करते समय सिर्फ खिड़की का नजारा या सीट की कीमत न देखें, बल्कि यह भी सोचें कि सफर के दौरान आपको कितनी बार उठना पड़ेगा, आराम करना है या सोना है और आपके साथ कौन ट्रैवल कर रहा है। थोड़ी सी समझदारी से चुनी गई सीट लॉन्ग जर्नी की थकान को कम कर सकती है और सफर को ज्यादा सुकूनभरा बना सकती है।

बच्चे की जिद को डील करने के पेरेंटिंग टिप्स, पहले वजह समझें, फिर बदलें व्यवहार!

बच्चों का हर बात पर तुरंत जवाब न देना या माता-पिता की बात को अनसुना करना अक्सर चिंता की वजह बन जाता है। ऐसे समय में कई पैरेंट्स बार-बार समझाने, डांटने या आवाज ऊंची करने लगते हैं। लेकिन हर बार बच्चे का बात न मानना जानबूझकर किया गया व्यवहार नहीं होता।

कई बार बच्चा खेल में इतना व्यस्त होता है कि उसे आसपास की बात सुनाई ही नहीं देती, तो कभी थकान, तनाव या भावनाओं की वजह से वह ठीक से प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। इसलिए बच्चे को डांटने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह आपकी बात क्यों नहीं सुन रहा।

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1. बच्चे का ध्यान अपनी ओर करें

कोई बात कहने से पहले बच्चे के पास जाएं, उसका नाम लें और उसकी तरफ देखकर बात करें। दूर से बार-बार आवाज लगाने के बजाय उसके पास जाकर बोलें, ताकि वह आपकी बात अच्छे से सुन सके। बात करते समय टीवी, मोबाइल या दूसरे शोर को कम रखें। इससे बच्चे का ध्यान आपकी बात पर रहेगा और वह धीरे-धीरे ध्यान से सुनना भी सीखेगा।

 

2. बात छोटी और आसान रखें

एक साथ बहुत सारी बातें कहने के बजाय बच्चे को एक-एक काम बताएं। जैसे पहले खिलौने रखने को कहें और उसके बाद दांत साफ करने के लिए बोलें। इससे बच्चे को आपकी बात समझने में आसानी होगी बच्चे की उम्र के हिसाब से आसान शब्दों में बात करें। जरूरत हो तो उससे पूछें कि उसने क्या समझा, ताकि वह काम सही तरीके से कर सके।

 

3. बच्चे के इमोशन समझें

कई बार बच्चा गुस्से, थकान या किसी परेशानी के कारण आपकी बात नहीं सुन पाता। ऐसे समय में तुरंत डांटने के बजाय उसे थोड़ा शांत होने का समय दें। उससे प्यार से पूछें कि वह परेशान क्यों है या उसे किस बात पर गुस्सा आ रहा है। उसकी बात सुनने से बच्चा अपनी फीलिंग बताना सीखता है।

 

4. रोज का रूटीन बनाएं

बच्चों के लिए रोज का एक तय रूटीन बनाना अच्छा रहता है। जैसे रात में खिलौने रखना, नहाना, दांत साफ करना और फिर सोने जाना। इससे बच्चे को पहले से पता रहता है कि उसे क्या करना है। रूटीन बच्चे की उम्र के हिसाब से रखें और जब वह कोई काम सही समय पर करे, तो उसकी तारीफ करें। इससे वह अच्छी आदतें अपनाने के लिए तैयार होगा।

 

5. खुद भी शांत रहें

बच्चे माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए बच्चे के बात न मानने पर चिल्लाने या गुस्सा करने के बजाय शांत रहने की कोशिश करें। अगर बच्चा तुरंत बात नहीं मानता, तो उसे थोड़ा समय दें और जरूरत हो तो प्यार से दोबारा समझाएं। इससे बच्चा धीरे-धीरे आपकी बात सुनना और सहयोग करना सीखेगा।

 

बच्चों का हर बात पर जवाब न देना या माता-पिता की बात न सुनना हमेशा उनकी जिद नहीं होती। कई बार बच्चा खेल में व्यस्त, थका हुआ या किसी बात से परेशान हो सकता है। माता-पिता का धैर्य और अच्छा व्यवहार बच्चे को धीरे-धीरे अपनी बात सुनने, समझने और सही तरीके से अपनी भावनाएं बताने में मदद कर सकता है।

इशान किशन ने शानदार 251 रन बनाकर ईस्ट जोन को पहुंचाया 700 पार (Video)

इशान किशन ने उमस भरे मौसम में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 270 रन की पारी खेली जिससे पूर्व क्षेत्र ने सोमवार को दलीप ट्रॉफी फाइनल के दूसरे दिन दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।किशन ने इस पारी से भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने का दावा भी पेश किया।

कुमार कुशाग्र ने भी 132 गेंद में 101 रन बनाकर अपना छठा प्रथम श्रेणी शतक जड़ा और किशन की करीब दो दिन तक चली 522 मिनट और 334 गेंद की मैराथन पारी में शानदार सहयोग दिया।    दिन का खेल खत्म होने से कुछ मिनट पहले दक्षिण क्षेत्र ने पूर्व क्षेत्र का आखिरी विकेट हासिल किया।

दिन का आकर्षण किशन की पारी रही जिसे तीन राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की मौजूदगी में खेला गया।किशन दलीप ट्रॉफी में तिहरा शतक लगाने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों के क्लब में शामिल होने से चूक गए। रमन लांबा ने 1987 और गगन खोडा ने 2001 में यह उपलब्धि हासिल की थी।

किशन ने पहले दिन 122 गेंद में शतक पूरा किया जबकि दूसरे शतक के लिए उन्होंने 148 गेंद खेलीं।यह धीमापन किसी बेहतरीन गेंदबाजी या मुश्किल पिच की वजह से नहीं था, बल्कि गेंदबाजों को थकाने और अपनी टीम के स्कोर को विपक्षी टीम की पहुंच से काफी दूर तक ले जाने की सोची-समझी रणनीति थी।

किशन ने अपने करियर का दूसरा प्रथम श्रेणी दोहरा शतक 270 गेंद में पूरा किया जब उन्होंने कामचलाऊ स्पिनर देवदत्त पडिक्कल की गेंद को कवर के रास्ते सीमा रेखा के पार पहुंचाया।उन्हें केवल एक बार असहजता महसूस हुई जब बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सीवी मिलिंद की गेंद उनके पेट पर लगी और उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी पड़ी।

हालांकि दोहरा शतक पूरा करने के बाद किशन ने आक्रामक रुख दिखाया। उन्होंने 200 से 250 रन तक पहुंचने के लिए सिर्फ 31 गेंद खेलीं।किशन ने स्पिनर श्रेयस गोपाल और त्रिपुराना विजय के खिलाफ दो-दो छक्के लगाए।

किशन ने श्रेयस की 100 गेंदों पर 94 रन और विजय की 88 गेंदों पर 70 रन बटोरे जिससे स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बाएं हाथ के इस बल्लेबाज के दबदबे का अंदाजा लगाया जा सकता है।पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी पुल और ड्राइव उनके रन बनाने वाले मुख्य शॉट रहे और इन शॉट से उन्होंने 22 चौके लगाए।

लगातार दूसरे दिन दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाज, विशेषकर मुख्य तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। सपाट पिच और उच्च स्तर की बल्लेबाजी के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर नजर आई।आखिरकार थकान ने किशन के शरीर को जकड़ लिया और उन्हें 301 गेंद में 250 रन बनाकर मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी पारी में 27 चौके और सात छक्के शामिल रहे।

किशन की शानदार पारी की बदौलत पूर्व क्षेत्र ने पहले सत्र में 106 और लंच के बाद के सत्र में 135 रन जोड़े।इस दौरान किशन ने पांचवें विकेट के लिए कुशाग्र के साथ केवल 290 गेंद में 230 रन और छठे विकेट के लिए अनुकूल रॉय (40 रन, 86 गेंद) के साथ 140 रन की साझेदारी कर पूर्व क्षेत्र की स्थिति और मजबूत की।

कुशाग्र ने भी अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया और विकेट के दोनों ओर शानदार शॉट लगाकर गेंदबाजों की धुनाई की।

इक्कीस वर्षीय कुशाग्र ने 128 गेंद में आठ चौकों और पांच छक्कों की मदद से अपना शतक पूरा किया लेकिन वह अपनी पारी को और अधिक लंबा नहीं बढ़ा सके। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने विजय की खराब शॉर्ट गेंद पर लापरवाही से पुल शॉट खेला और स्क्वायर लेग के पीछे खड़े मिलिंद को कैच दे बैठे।

अंतिम सत्र के शुरुआती मिनटों में मोहम्मद शमी के आउट होने के तुरंत बाद किशन ने फिर दक्षिण क्षेत्र को परेशानी में डाल दिया और अपने पहले तिहरे शतक के करीब पहुंच गए।हालांकि वह बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर सके। किशन ने विजय (180 रन पर चार विकेट) की गेंद पर जोरदार शॉट खेला लेकिन गेंद सीधे साइट स्क्रीन के पास खड़े रविचंद्रन स्मरण के हाथों में चली गई।हालांकि तब तक किशन अपना काम कर चुके थे।

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health tips

भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी में खुद को सेहतमंद और ऊर्जावान बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। हम अक्सर अपनी व्यस्त दिनचर्या में छोटी-छोटी मगर बेहद महत्वपूर्ण आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे शरीर में थकान, मानसिक तनाव और बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। 

 

अगर आप भी अपनी लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव लाए बिना, केवल कुछ आसान आदतों को सुधारकर एक खुशहाल और रोगमुक्त जीवन जीना चाहते हैं, तो ये 10 सुनहरे नियम आपकी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकते हैं। आइए जानते हैं कि रोजमर्रा के जीवन में कौन-से बदलाव आपको लंबे समय तक फिट रख सकते हैं:

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1. थाली को बनाएं रंग-बिरंगा (संतुलित और पोषण युक्त आहार)

अपनी दैनिक खुराक में प्र प्रचुर मात्रा में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। जितना हो सके प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) भोजन और जंक फूड से दूरी बनाएं, क्योंकि आपकी सेहत का सीधा रास्ता आपकी थाली से होकर गुजरता है।

 

2. 30 मिनट का वर्कआउट रूल (नियमित शारीरिक गतिविधि)

दिनभर में कम से कम आधा घंटा अपने शरीर को सक्रिय रखने के लिए जरूर निकालें। इसके लिए आपको रोज जिम जाने की ही जरूरत नहीं है; आप तेज चाल में टहलना (ब्रिस्क वॉक), एरोबिक्स या कोई पसंदीदा खेल खेलकर भी शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बना सकते हैं।

 

3. 7 से 8 घंटे की गहरी नींद (शरीर का नेचुरल रिपेयर मोड)

जिस तरह मोबाइल को चार्जिंग की जरूरत होती है, उसी तरह हमारे मस्तिष्क और अंगों को री-सेट होने के लिए गुणवत्तापूर्ण नींद की आवश्यकता होती है। रोजाना 7-8 घंटे की निर्बाध नींद लेने से मानसिक थकान दूर होती है और इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है।

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4. बॉडी को रखें फुल्ली हाइड्रेटेड (भरपूर पानी का सेवन)

पानी हमारे शरीर के विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने का सबसे बेहतरीन जरिया है। दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीने से न सिर्फ पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है, बल्कि त्वचा पर प्राकृतिक निखार भी बना रहता है।

 

5. मेंटल वेलनेस पर दें ध्यान (ध्यान और प्राणायाम)

शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक शांति भी बेहद जरूरी है। दिन की शुरुआत में केवल 10-15 मिनट का ध्यान (मेडीटेशन) और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम करने से तनाव का स्तर तेजी से कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

 

6. बुरी लत को कहें बाय-बाय (नशे से पूरी दूरी)

तंबाकू, धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से दूरी बनाए रखें। ये आदतें न केवल आपके फेफड़ों और लिवर को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि असमय बुढ़ापे और कई गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण भी बनती हैं।

 

7. फिटनेस में लाएं वेरायटी (वर्कआउट रूटीन बदलें)

एक ही तरह की कसरत से शरीर और मन दोनों ऊब जाते हैं। अपने रूटीन को मजेदार बनाने के लिए इसमें योग, स्विमिंग, साइक्लिंग या डांस को बारी-बारी से शामिल करें। इससे शरीर के सभी हिस्सों का सही व्यायाम होता है।

 

8. पॉजिटिव और हेल्दी सोशल सर्कल (सकारात्मक लोगों का साथ)

आप जिन लोगों के साथ समय बिताते हैं, उनकी ऊर्जा का आपकी मानसिकता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे दोस्तों और सहकर्मियों के साथ रहें जो आपको फिटनेस के प्रति प्रोत्साहित करें और जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।

 

9. अपनी सोच को बनाएं सकारात्मक (पॉजिटिव एटीट्यूड)

हर परिस्थिति में सकारात्मक नजरिया बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। आभार व्यक्त करने की आदत डालें (ग्रैटिट्यूड) और नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी न होने दें।

 

10. प्रकृति और आयुर्वेद का लें सहारा (नेचुरल हीलिंग)

अपनी दिनचर्या में ग्रीन टी, हर्बल काढ़ा, तुलसी, आंवला और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक व आयुर्वेदिक उपायों को शामिल करें। ये घरेलू नुस्खे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को कुदरती रूप से मजबूत बनाते हैं।

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों ‘मन अनहद नाद’ और ‘अनकहे से संवाद’ का भव्य विमोचन

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन

Dr. Anjana Chakrapani Mishra

प्रतिष्ठित संस्था वामा साहित्य मंच ('शब्द शक्ति की संवाहक') के तत्वावधान में एक गरिमामयी साहित्यिक समारोह का आयोजन संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ० अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों— काव्य संग्रह 'मन अनहद नाद' और आलेख संग्रह 'अनकहे से संवाद' का भव्य एवं शुचित विमोचन किया गया।

 

सांस्कृतिक एवं औपचारिक शुभारंभ

मंगलाचरण: कार्यक्रम का शुभारंभ लेखिका की नातिन अलाइना द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना तथा लब्धप्रतिष्ठ गायिका आकांक्षा जाचक शेट्टी द्वारा अपनी मधुर स्वर-लहरी में गाई गई सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

 

स्वागत वक्तव्य: वामा साहित्य मंच की अध्यक्षा ज्योति जैन ने शब्द-पुष्पों से अतिथियों, साहित्यकारों एवं सुधी पाठकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लेखिका तत्सम प्रधान भाषा का सहज प्रयोग करते हुए समाज की विसंगतियों को प्रखरता से उजागर करती हैं। समाज में बिखरे शब्दों को एक माला में पिरोने का यह प्रयास सराहनीय है और दोनों ही पुस्तकें अत्यंत उत्कृष्ट हैं।

 

पारिवारिक अनुभूतियां (पारिवारिक पाती)

कनिष्क मिश्र: उन्होंने कहा कि मां भले ही अत्यंत संस्कृतनिष्ठ शब्दों का चयन करती हैं, किंतु उनका सुनना और समझना अत्यंत सहज एवं सुंदर है; वही उनके मन का वास्तविक अनहद नाद है।

निष्ठा मिश्र: इस दिन को विशेष बताते हुए उन्होंने कहा कि मां की रचनाएं भले ही पठन में गंभीर एवं कठिन लगें, परंतु वे उनके निरंतर प्रयास, जूनून, अनुभव और प्रेरणा का उत्सव हैं। यह उपलब्धि उनकी लेखनी की सुखद शुरुआत मात्र है।

 

लेखिका का वक्तव्य एवं काव्य प्रस्तुति

मंचासीन अतिथियों एवं उपस्थित प्रबुद्धजनों का अभिवादन करते हुए लेखिका डॉ० अंजना चक्रपाणि मिश्र ने कहा:

“मेरी पुस्तकें मेरा दर्पण हैं, जो आपको मुझसे आत्मीय रूप से रूबरू कराएंगी। मैं दूसरों के सुख-दुख को स्वयं में महसूस करके लिखती हूं। मेरे पिता जी आयुर्वेदाचार्य थे और उनकी प्रेरणा व साधारण परिवेश में पली मेरी मां प्रसूति रोग विशेषज्ञ बनीं, जिनसे मुझे सदैव संबल मिला। इस पूरी यात्रा में मेरे पति, पुत्र और पुत्री हमेशा मेरे सहयोगी रहे हैं।”

इसके उपरांत उन्होंने अपने गीत “रजत राग— चंदनियां गुनगुना रही है…” की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर संपूर्ण सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

कृतियों पर सारगर्भित एवं गहन समीक्षा

डॉ० गरिमा संजय दुबे (प्रोफेसर एवं वरिष्ठ साहित्यकार):

लेखन की शैली: पद्य और गद्य— दोनों ही विधाओं पर समान अधिकार के साथ न्याय करना अत्यंत कठिन कार्य है। ये पुस्तकें एक-दूसरे की पूरक और संवादों का जीवंत प्रतिबिंब हैं।

'मन अनहद नाद' (काव्य संग्रह): इसकी कविताएं स्वयं के मन की तलाश करते हुए पाठक को दूसरों के मन की यात्रा कराती हैं। इसमें स्त्रीभाव, राधा-कृष्ण का प्रेम और आध्यात्मिक दर्शन का अद्भुत समावेश है। इसमें रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) जैसे उपेक्षित विषय पर भी संवेदनशीलता से लिखा गया है कि यह थकान का नहीं, बल्कि मुक्ति का समय है।

'अनकहे से संवाद' (आलेख संग्रह): यह लालित्यपूर्ण शैली में लिखे आलेखों का सुंदर संकलन है। इसमें संस्कृत भाषा, लोक परंपरा, बनारस की आध्यात्मिकता और आधुनिकता का सुंदर समन्वय है। 'नीला लिफाफा', कबीर चौरा और मणिकर्णिका घाट पर लिखे गए आलेख अत्यंत प्रभावकारी बन पड़े हैं।

श्रीमती शैलबाला मार्टिन पाठक (पूर्व आईएएस एवं पूर्व सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग – विशिष्ट अतिथि):

उन्होंने लेखिका को प्रेम, वात्सल्य और परंपरा व आधुनिकता का सुंदर संगम बताया। उन्होंने कहा कि लेखिका की कविताएं अंतर्मन की सहज अभिव्यक्ति हैं, जो पाठक को गहराई से सोचने पर मजबूर करती हैं। इसके बाद उन्होंने 'संवेदना' और 'बनारस की गलियां' कविताओं का वाचन भी किया।

आकांक्षा जाचक शेट्टी: उन्होंने लेखिका को विलक्षण प्रतिभा का धनी बताते हुए डॉ० अंजना चक्रपाणि द्वारा रचित 'चेती गीत' की सुमधुर प्रस्तुति दी।

 

मुख्य अतिथि का संबोधन एवं परामर्श

श्री पंकज सुबीर (प्रख्यात साहित्यकार एवं सारथी, शिवना प्रकाशन):

सराहना: उन्होंने दोनों कृतियों की तुलना बेटियों से की और कहा कि गद्य व पद्य का यह संकलन चौंकाता है। 'रजोनिवृत्ति' और 'स्त्री बोलने पर' जैसे अनछुए विषयों पर लिखना एक साहसिक और आवश्यक कदम है। उन्होंने 'ईश्वर जैसा' तथा 'पिता' कविताओं का मंच से वाचन करते हुए कहा कि “स्त्री का लिखना हमारे समय की वास्तविक उपलब्धि है।”

 

सुझाव: उन्होंने भाषा के संदर्भ में कबीर का उदाहरण देते हुए कहा कि “भाषा बहता नीर होनी चाहिए।” आगे के युवा पाठकों से जुड़ने के लिए भाषा को और अधिक सरल बनाया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने पुस्तक के शीर्षक चयन में सावधानी रखने तथा भावी कविता संग्रहों को अलग-अलग खंडों में विभाजित करने का व्यावहारिक परामर्श दिया।

 

अन्य गणमान्य जनों के उद्गार एवं संचालन

पद्मा राजेंद्र (संस्थापक अध्यक्ष, वामा साहित्य मंच): उन्होंने इस आयोजन को अत्यंत गर्व और प्रसन्नता का क्षण बताया तथा लेखिका को एक संवेदनशील, कोमल हृदया और आत्मीय सखी के रूप में रेखांकित किया।

मंच संचालन: सम्पूर्ण कार्यक्रम का गरिमापूर्ण एवं कुशल संचालन वरिष्ठ कवयित्री प्रीति दुबे द्वारा किया गया।

अतिथि स्वागत व आभार: कार्यक्रम के दौरान चक्रपाणि दत्त मिश्र, राकेश पाठक, कनिष्क मिश्र, अमर कौर चड्ढा, निष्ठा मिश्र एवं इंदू मिश्र का भावभीना स्वागत किया गया। अंत में चक्रपाणि दत्त मिश्र ने उपस्थित सभी साहित्य-अनुरागियों, प्रबुद्धजनों एवं अतिथियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

अमेरिकी सैनिकों को पटाया की इस ‘बदनाम स्ट्रीट’ में एंट्री पर बैन! जानिए थाइलैंड में आखिर क्या कर रहे हैं जवान?

US Navy Sailors in Pattaya: समुद्र के बीच लगातार 286 दिनों की थका देने वाली तैनाती, जंग के तनाव वाले हालात और फिर अचानक थाइलैंड का सबसे मशहूर पार्टी डेस्टिनेशन ‘पटाया’। अमरीकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के हजारों जवानों के लिए यह सफर किसी सपने जैसा साबित हो रहा है।

लगातार महीनों तक समुद्र में रहने और ईरान युद्ध से जुड़े ऑपरेशन्स के बाद जब अमेरिकी सैनिक सूखी जमीन पर उतरे, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आइए जानते हैं कि पटाया के रंगीन माहौल में ये अमेरिकी जवान आखिर क्या-क्या कर रहे हैं।

286 दिनों बाद जमीन पर पेडीक्योर और रिलैक्सेशन

थकाऊ तैनाती का असर मिटाने के लिए अमेरिकी नौसेना के पुरुष और महिला सैनिक सबसे पहले पटाया के सैलून में नजर आए। ‘कलर नेल सैलून’ में नौसेना के जवान अपनी थकान दूर करने के लिए पेडीक्योर करवाते दिखे। गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, सैलून वर्कर अरिसा सुएक्कान्या ने बताया कि अमेरिकी सेना द्वारा इतने लंबे समय बाद थाइलैंड को पहली पोर्ट-ऑफ-कॉल चुनना उनके लिए बेहद उत्साहजनक है।

नौसैनिकों ने माना कि जहाज पर कच्चा खाना खाने और कठिन हालातों में रहने के बाद जमीन पर पैर रखते ही कंधे से भारी बोझ उतर गया।

खाने पर टूटे जवान: ‘थाई फूड और बर्गर से दोस्ती’

जहाज पर मिलने वाली अधपकी बीफ और कच्चे आलू की शिकायतों के बाद, थाइलैंड पहुंचते ही जवानों ने सबसे पहले भरपेट खाना खाया। एक सैनिक ने बर्गर किंग में दो बड़े बर्गर ऑर्डर किए, जबकि दूसरे जवान ने मुस्कुराते हुए कहा कि ‘अब से मेरी और थाई फूड की पक्की दोस्ती हो चुकी है’। जवान न सिर्फ लोकल फूड एन्जॉय कर रहे हैं, बल्कि दर्जी की दुकानों पर कस्टम-मेड सूट सिलवाने के ऑर्डर दे रहे हैं।

रेड लाइट एरिया और ‘वॉक-इन स्ट्रीट’ का जलवा

पटाया अपनी नाइटलाइफ और रेड लाइट एरिया के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन अमेरिकी कमांडरों ने जवानों के लिए कुछ सख्त नियम भी तय किए हैं।नौसैनिकों को पटाया की बदनाम बीयर बार वाली सड़क ‘सोई 6’ पर रात ढलने के बाद जाने से मना किया गया है।

हालांकि, मशहूर ‘वॉकिंग स्ट्रीट’ जवानों के लिए खुली है। वहां के पब और बार्स ने अमेरिका का स्वागत करते हुए विशाल नियॉन बोर्ड लगाए हैं और ‘सैनिक आईडी कार्ड’ दिखाने पर 10% तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है।

मोजे, खिलौने और ब्रांडेड कपड़े खरीद रहे जवान

हजारों डॉलर जेब में होने के बावजूद कई जवान बहुत ही साधारण चीजें खरीदते दिखे। एक सैनिक मॉल में नाइकी और Vans के स्टोर से नए मोजे खरीद रहा था, तो दूसरा अपनी पत्नी के लिए H&M से ‘हैलो किटी’ का सॉफ्ट टॉय खरीदता नजर आया।

पटाया के मेयर पोरमेट नगाम्पिचेट के अनुसार, अगर 5,000 अमेरिकी सैनिक रोजाना 100 से 150 डॉलर खर्च करते हैं, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को करीब 10 करोड़ थाई बात (लगभग 3 मिलियन डॉलर) का फायदा होगा।

क्या होती है टेस्टोस्टेरोन जांच? अमेरिका में सैनिकों के लिए इसे क्यों किया गया अनिवार्य

क्या होती है टेस्टोस्टेरोन जांच? अमेरिका में सैनिकों के लिए इसे क्यों किया गया अनिवार्य

US Army Testosterone Test

Testosterone screening in US: अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी सक्रिय और रिजर्व सैन्य कर्मियों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच से संबंधित नए और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की घोषणा के बाद तत्काल प्रभाव से लागू किए गए इस नियम का उद्देश्य सैनिकों की शारीरिक क्षमता, ऊर्जा और सैन्य तैयारी को बेहतर बनाना है।

 

पेंटागन के अनुसार, इन नए मानकों का मुख्य उद्देश्य पुरुषों और महिलाओं दोनों में हार्मोनल असंतुलन और ऊर्जा की कमी से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर उनका समय पर उपचार करना है, जिससे अमेरिकी सेना की समग्र युद्ध तत्परता को मजबूती मिल सके। ALSO READ: होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल? ट्रंप के दावे से मचा हड़कंप ; तेल के दाम चढ़े

पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग नियम

पेंटागन के दिशा-निर्देशों के अनुसार 30 वर्ष या उससे अधिक के पुरुषों के लिए रक्त में टेस्टोस्टेरोन स्तर की नियमित और अनिवार्य जांच की जाएगी। रायटर की रिपोर्ट के अनुसार, 30 वर्ष से कम आयु के पुरुष युवा सैनिकों की जांच केवल उनकी व्यक्तिगत मांग पर या डॉक्टर द्वारा किसी चेतावनी संकेत की पहचान करने पर ही होगी। ALSO READ: अमेरिका के हाथ लगा दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार! ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ किया ऐतिहासिक समझौता

 

वहीं महिला सैनिकों के लिए नियमित ब्लड टेस्ट अनिवार्य नहीं किया गया है। हालांकि, उनमें अत्यधिक थकान और अनियमित मासिक धर्म चक्र की जांच की जाएगी। यह लक्षण हार्मोनल गड़बड़ी और 'रिलेटिव एनर्जी डेफिशिएंसी इन स्पोर्ट्स' (RED-S) से जुड़े हो सकते हैं।

 

इसके अलावा, दस्तावेज़ में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद की उन महिला सैनिकों के लिए भी ऑफ-लेबल टेस्टोस्टेरोन देने के स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं, जो कामेच्छा में अत्यधिक कमी का सामना कर रही हैं।

विशेषज्ञों की चिंता और एफडीए की बैठक

रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ लंबे समय से टेस्टोस्टेरोन के उपयोग का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस व्यापक जांच नीति के वैज्ञानिक आधार पर सवाल उठाए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बड़े पैमाने पर होने वाली अनिवार्य जांच से अनावश्यक या संभावित रूप से हानिकारक उपचार की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि सभी सैन्य कर्मियों की टेस्टोस्टेरोन जांच करने से देश की युद्ध क्षमता में कोई बड़ा सुधार होगा।

 

इस विषय पर बढ़ती चर्चाओं के बीच, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) ने सितंबर के मध्य में विशेषज्ञों की एक बैठक बुलाई है, जिसमें टेस्टोस्टेरोन के चिकित्सा उपयोग और इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

क्या होती है टेस्टोस्टेरोन जांच?  

टेस्टोस्टेरोन जांच (Testosterone Test) एक सामान्य ब्लड टेस्ट है, जिससे आपके खून में मौजूद टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की मात्रा का पता लगाया जाता है। टेस्टोस्टेरोन को मुख्य रूप से पुरुष सेक्स हार्मोन कहा जाता है, जो पुरुषों के अंडकोष में बनता है, लेकिन यह महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) और दोनों के एड्रिनल ग्लैंड में भी कम मात्रा में बनता है। यह हार्मोन मांसपेशियों की ताकत, हड्डियों का घनत्व, दाढ़ी-मूंछ के बाल, शुक्राणु के निर्माण और सेक्स ड्राइव को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। यह रक्त में मौजूद सभी प्रकार के टेस्टोस्टेरोन (प्रोटीन से बंधे और फ्री दोनों) की कुल मात्रा को मापता है।

एक ट्रेन, कई खूबसूरत मंजिलें! वंदे भारत से बनाएं परफेक्ट वीकेंड प्लान

वीकेंड पर आप दिल्ली की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर करके कम समय में एक अच्छी छोटी ट्रिप का मजा लिया जा सकता है। ट्रेन का आरामदायक सफर आपका समय भी बचाता है और सफर की थकान भी कम करता है।

कम दिनों की छुट्टी में ऐसी जगह चुनना सही रहता है, जहां घूमने के लिए ज्यादा समय मिले और सफर में पूरा दिन न निकल जाए। वीकेंड ट्रिप के लिए ट्रेन से ट्रिप करना इसलिए भी अच्छा ऑप्शन है, क्योंकि आप आराम से सफर करते हुए अपने परिवार या दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं।

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1. चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा

वीकेंड में कम समय में घूमने के लिए चंडीगढ़ एक अच्छा ऑप्शन है। दिल्ली से चंडीगढ़ की वीकेंड ट्रिप के लिए 22447 वंदे भारत एक्सप्रेस सुविधाजनक ऑप्शन है। ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 5:50 बजे चलकर करीब 2 घंटे 48 मिनट में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन (CDG) सुबह 8:38 बजे पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹855 और Executive Chair Car का करीब ₹1,585 है। एक दिन की ट्रिप में सुबह रॉक गार्डन और रोज गार्डन घूमने के बाद सुखना झील घूम सकते हैं। शाम को झील के आसपास समय बिताने के बाद सेक्टर-17 मार्केट में शॉपिंग और लोकल फूड का आनंद लिया जा सकता है। अगर 2 दिन का समय है, तो दूसरे दिन कैपिटल कॉम्प्लेक्स और शहर के आसपास की जगहें देख सकते हैं।

 

2. देहरादून, उत्तराखंड

पहाड़ों और हरियाली के बीच छोटा-सा ब्रेक लेना चाहते हैं तो देहरादून का प्लान बनाया जा सकता है। देहरादून जाने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस 22457 दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल (ANVT) से शाम 5:50 बजे चलती है और करीब 4 घंटे 45 मिनट में रात 10:35 बजे देहरादून (DDN) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,075 और Executive Chair Car का करीब ₹1,900 है। शहर में एक दिन हो तो रॉबर्स केव, सहस्त्रधारा और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आसानी से घूमे जा सकते हैं। शाम को किसी लोकल कैफे में बैठकर देहरादून का माहौल एंजॉय करें। दो दिन मिल रहे हों तो अगले दिन मसूरी की ओर निकलना बेहतर रहेगा।

 

3. अजमेर, राजस्थान

अगर वीकेंड पर धार्मिक स्थलों के साथ राजस्थान की संस्कृति देखना चाहते हैं, तो अजमेर को चुन सकते हैं। दिल्ली से अजमेर जाने के लिए वंदे भारत का रूट जयपुर होते हुए अजमेर तक जाता है। इस यात्रा में करीब 5 घंटे 15 मिनट लगते हैं और AC Chair Car का किराया लगभग ₹1,150 से शुरू होने की जानकारी अवेलेबल है। स्टेशन पहुंचने के बाद अजमेर शरीफ दरगाह से घूमने की शुरुआत करें और फिर अढ़ाई दिन का झोपड़ा देखा जा सकता है। दिन के दूसरे हिस्से में आना सागर झील के आसपास वक्त बिताएं और शाम को स्थानीय बाजार में राजस्थानी मिठाइयों और खाने का स्वाद लें। दो दिन का प्लान है तो अगले दिन अजमेर से पुष्कर जाकर पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर घूम सकते हैं।

 

4. वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी की यात्रा बाकी जगहों से थोड़ी लंबी है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के लिए यह खास डेस्टिनेशन है। वाराणसी के लिए 22436 वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 6:00 बजे चलती है और करीब 8 घंटे में दोपहर 2:00 बजे वाराणसी जंक्शन (BSB) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,835 और Executive Chair Car का करीब ₹3,385 है। यहां एक दिन का समय हो तो काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाट को प्राथमिकता दें। शाम होते ही दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती देखना न भूलें। पुरानी गलियों में घूमकर बनारसी खान-पान का स्वाद भी लिया जा सकता है।

 

5. जयपुर, राजस्थान

शाही महलों, किलों और बाजारों से भरी जयपुर की यात्रा दिल्ली से वीकेंड पर आसानी से की जा सकती है। जयपुर के लिए दिल्ली से वंदे भारत की ट्रिप करीब 3 घंटे 37 मिनट से 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकती है। मौजूदा शेड्यूल में एक वंदे भारत दिल्ली कैंट (DEC) से दोपहर 3:10 बजे चलकर शाम 7:00 बजे जयपुर जंक्शन (JP) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹835 और Executive Chair Car का करीब ₹1,610 है। दूसरी वंदे भारत दिल्ली कैंट से शाम 6:28 बजे चलकर रात 10:05 बजे जयपुर पहुंचती है। एक दिन में आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर को कवर किया जा सकता है। घूमने के बाद शाम का समय जौहरी बाजार या बापू बाजार में शॉपिंग के लिए रखें और दाल बाटी चूरमा, प्याज कचौरी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लें।

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिष्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा
ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी
काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी
सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी
सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।