VIDEO Nepal Flood: नेपाल में तबाही के बीच बचावकर्मियों ने बचाई मासूम की जान, डेढ़ महीने के बच्चे का रेस्क्यू, वीडियो वायरल

VIDEO Nepa Flood: नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले से रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। बचावकर्मियों ने महज डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसे रसुवा के धांगे कैंप पहुंचाया। भयंकर बाढ़ और मलबे के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई बस्तियां तबाह कर दी हैं, जिसके बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।

डेढ़ महीने के इस मासूम का सुरक्षित रेस्क्यू ऐसे मुश्किल हालात में उम्मीद और राहत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार (1 सितंबर) को 987 हो गई। सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA ने बताया कि अचानक आयी बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में कुल 279 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 168 लोगों को इलाज के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

शव ले जाने के लिए प्रक्रिया जारी

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की शिनाख्त करने और उन्हें स्वदेश भेजने के लिए मंगलवार को विस्तृत प्रक्रिया जारी की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। हजारों लोग लापता हो गए। मकानों, सड़कों, पुलों तथा हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।

दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए नौ चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। इसमें जरूरी दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और डिटेल्स दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मृत्यु के कारण की पुष्टि और औपचारिक शिनाख्त शामिल हैं।

बयान के अनुसार, प्रक्रिया में उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक सैंपल लेना, मृतक के पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन, दूतावास या वाणिज्य दूतावास के स्तर पर समन्वय तथा शव सौंपने संबंधी ज्ञापन और रसीद जारी करना भी शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस प्रक्रिया के पहले चार चरण नेपाल के अधिकारियों द्वारा पूरे किए जाएंगे।

यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और डिटेल्स के आधार पर शव की शिनाख्त कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास उसे सौंपने और स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में मदद करेगा।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाके से डेढ़ महीने के बच्चे को बचाकर रसुवा धांगे कैंप लाया गया

दूतावास ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की शिनाख्त के लिए सबसे नजदीकी परिजन से डीएनए का मिलान करना होगा।

सबसे नजदीकी परिजन से आशय ऐसे पारिवारिक सदस्य से है जो वंशावली में एक पीढ़ी के अंतर पर हो। इसमें माता-पिता, सगे भाई-बहन और संतान शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती या अवशेषों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

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टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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Nepal Flood: कैलाश मानसरोवर गए 21 भारतीयों की जान एक साड़ी ने बचाई! नेपाल में जल प्रलय के बीच इस कपल ने किया गजब का रेस्क्यू

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के तेज बहाव में कई घर, सड़कें और पुल बह गए। वहीं बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई और कई लोग लापता हैं। नेपाल में आए इस विनाशकारी बाढ़ में तमिलनाडु से गए 21 तीर्थयात्रियों भी फंसे हुए थे। वहीं इस मुसीबत के समय में एक कपल की समझदारी ने कई लोगों को जान बचाई। नेपाल में अचानक आई बाढ़ में तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री तिमुरे इलाके के पास फंस गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी दौरान एक कपल ने सूझबूझ दिखाते हुए साड़ी की मदद से महिलाओं को सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। महिलाओं को कीचड़ भरी और खड़ी ढलान से ऊपर खींचने के लिए साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया गया। इस मुश्किल वक्त में कपड़े के एक साधारण टुकड़े ने लोगों को सुरक्षित निकलने में बड़ी मदद की।

कैसे बची जान

26 अगस्त को माउंट कैलाश की यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री नेपाल के तिमुरे इलाके के पास फंस गए। इस दौरान भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड की स्थिति बन गई। उनकी गाड़ी एक सुरक्षित जगह पर रुक गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आसपास पानी और मलबा तेजी से बह रहा था, जिसके बाद सभी यात्री गाड़ी से बाहर निकलकर सुरक्षित ऊंचाई पर जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन कीचड़ और फिसलन की वजह से पहाड़ी पर चढ़ना उनके लिए काफी मुश्किल हो रहा था।

साड़ी से कैसे की मदद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझाली किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गए, लेकिन उन्होंने नीचे फंसी दूसरी महिलाओं को मुश्किल में देखा तो उनकी मदद करने का फैसला किया। पूंगुझाली ने अपना स्वेटर पहना, साड़ी उतारी और उसे नीचे की ओर पहुंचाया। महिलाओं ने साड़ी और वहां मौजूद लोहे की केबल का सहारा लिया, जबकि ऊपर मौजूद लोगों ने उन्हें धीरे-धीरे खींचकर सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। इस तरह साड़ी ने मुश्किल हालात में फंसे तीर्थयात्रियों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

दो दिनों तक रहा काफी मुश्किल

बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड के बाद तीर्थयात्रियों को करीब दो दिनों तक काफी मुश्किल हालात में रहना पड़ा। इस दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें थोड़ा-बहुत राशन और पीने का पानी उपलब्ध कराया, जिससे उन्होंने किसी तरह समय बिताया। वहीं, अधिकारी लगातार उनके संपर्क में रहे। बाद में भारतीय दूतावास, नेपाल आर्मी और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और फंसे हुए लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाने की व्यवस्था की।

अब तक 42 हजार से ज्यादा लोग लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। सोमवार तक इस आपदा में 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार अलग-अलग इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट और गोरखा समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान अभी भी जारी है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है।

नेपाल बाढ़: त्रासदी से पहले टीचर ने बजाई ‘खतरे की घंटी’! तुरंत खाली कराई स्कूल, बसें रुकवाईं और बचा ली 1,643 बच्चों की जान

Nepal Floods: पड़ोसी देश नेपाल में ग्लेशियर से अचानक आई भयंकर बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में तबाही मचाकर रख दी। पानी, बर्फ, चट्टानों और कीचड़ की करीब 9 मीटर ऊंची लहर ने उत्तर-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह स्थिति के बीच एक टीचर और प्रिंसिपल की सूझबूझ ने 1,643 बच्चों की जान बचा ली। 47 वर्षीय अंग्रेजी टीचर एवं प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बिना किसी आधिकारिक आदेश का इंतजार किए ऐसे फैसले लिए, जिनसे स्कूल में एक बड़ी त्रासदी टल गई।

न्यूज 18 के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9:20 बजे त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में करीब 900 बच्चे मौजूद थे। वहीं, करीब 700 अन्य बच्चे पैदल या बसों से स्कूल पहुंचने के रास्ते में थे। इसी दौरान राजेंद्र दवाड़ी को ऊपर की तरफ करीब पांच मील दूर बेत्रावती में रहने वाले अपने एक दोस्त का फोन आया। दोस्त ने घबराई हुई आवाज में बताया कि नदी ने उनके गांव को तबाह कर दिया है। पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ रहा है।

उसने दवाड़ी से तुरंत भागने को कहा। शुरुआत में दवाड़ी को लगा कि स्कूल की तीन मंजिला कंक्रीट की इमारत सुरक्षित है। स्कूल नदी के तल से करीब 60 मीटर ऊंचाई पर था। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद एक घबराया हुआ अभिभावक स्कूल पहुंचा और बताया कि पानी असामान्य गति से बढ़ रहा है। फिर दवाड़ी ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।

तुरंत बजाई स्कूल की घंटी

उन्होंने किसी सरकारी आदेश का इंतजार नहीं किया। तुरंत स्कूल की घंटी बजाई और सभी को क्लासेस खाली कराने का निर्देश दे दिया। टीचर्स बच्चों को तेजी से सुरक्षित स्थान की ओर निकालने लगे। इसी दौरान दवाड़ी ने स्कूल की ओर आ रही बसों को फोन करना शुरू किया। इन बसों में करीब 80-80 बच्चे सवार थे। दवाड़ी ने लगभग सभी बस चालकों से संपर्क कर लिया और उन्हें तत्काल वापस लौटने का निर्देश दिया। लेकिन एक बस ऐसी थी, जिसके ड्राइवर से संपर्क नहीं हो सका। तभी दवाड़ी की नजर उस बस पर पड़ी।

बस लोहे के पुल से होकर स्कूल की तरफ आ रही थी। उधर स्कूल परिसर में पानी तेजी से घुस रहा था। दवाड़ी ने बस चालक को दूर से ही चिल्लाकर और हाथों से इशारा करके वापस लौटने को कहा। ड्राइवर ने तुरंत बस को पीछे करना शुरू किया। बस किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गई। इसके कुछ ही पल बाद वह पुल तेज बहाव के कारण नदी में ढह गया। अगर बस कुछ सेकंड और आगे बढ़ जाती, तो उसमें सवार करीब 80 बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी।

घबराई बच्ची को बाइक से पहुंचाया सुरक्षित स्थान

बाढ़ का पानी बढ़ता देख बच्चे पैदल ही ऊंचाई वाले स्थानों की ओर भागने लगे। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। इसी दौरान एक छोटी बच्ची को तेज घबराहट का दौरा पड़ा और वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसकी मदद की और उसे मोटरसाइकिल के पीछे बैठाकर ढलान की ओर सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचाया।

राजेंद्र दवाड़ी की तेजी से लिए गए फैसलो जैसे स्कूल खाली कराने, बसों को वापस बुलाने और आखिरी बस को पुल पार करने से रोकने वाले एक्शन ने उस दिन एक बेहद बड़ी त्रासदी को टाल दिया। एक टीचर की समय पर दिखाई गई समझदारी और साहस ने 1,643 बच्चों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।

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नेपाल बाढ़! मलबे के नीचे 2 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ती रही 5 साल की बच्ची! रेस्क्यू टीम ने बिल्ली समझकर सुनी आवाज और फिर मिला ‘चमत्कार’

Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। इस बीच राहत और बचाव अभियान के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। 5 साल की बच्ची मनीषा को शुक्रवार को दो दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद मलबे और मिट्टी के नीचे से जिंदा बाहर निकाला गया। बच्ची करीब दो दिनों तक मलबे के नीचे फंसी रही। लेकिन उसने जिंदगी की जंग नहीं हारी।

मनीषा को नेपाल के रासुवा जिले के स्याब्रुबेसी के पास से रेस्क्यू किया गया। बाहर निकाले जाने के बाद उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया। वहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। बाद में उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। भीषण फ्लैश फ्लड की भारी तबाही के बीच मनीषा का जिंदा मिलना बचाव अभियान के सबसे उम्मीद भरे पलों में से एक माना जा रहा है।

बिल्ली समझकर मलबे में शुरू हुई तलाश 

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम स्याब्रुबेसी के पास मलबे में बचे लोगों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान टीम को मलबे के अंदर से कुछ आवाज सुनाई दी। बचावकर्मियों को पहले लगा कि शायद कोई बिल्ली मलबे में फंसी हुई है। फिर टीम ने आवाज की दिशा में तलाश शुरू की। धीरे-धीरे मिट्टी और मलबा हटाना शुरू किया। कुछ देर बाद जो सामने आया, उसे देखकर बचावकर्मी भी हैरान रह गए। मलबे के नीचे 5 साल की मनीषा दो दिन से जिंदा फंसी हुई थी। बच्ची को मलबे से बाहर निकालने में करीब दो घंटे का समय लगा।

रेस्क्यू के दौरान बनाए गए वीडियो में वह पल भी दिखाई देता है, जब बचावकर्मी बच्ची को मलबे के भीतर से जिंदा बाहर निकालते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जब मनीषा को बाहर निकाला गया तो वह जिंदा थी। लेकिन वह बेहोशी जैसी हालत में थी। वह बहुत कम प्रतिक्रिया दे रही थी। दो दिनों तक मिट्टी और मलबे के नीचे फंसे रहने के कारण उसकी हालत काफी कमजोर हो गई थी। रेस्क्यू टीम ने तुरंत बच्ची को संभाला और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश शुरू की।

हेलीकॉप्टर से काठमांडू पहुंची मनीषा

शनिवार दोपहर मनीषा को हेलीकॉप्टर से काठमांडू के टीचिंग हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक इमरजेंसी विभाग में पहुंचाया गया। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि बच्ची की हालत स्थिर है। रविवार को अस्पताल की ओर से जारी अपडेट में भी कहा गया कि मनीषा की हालत में सुधार हो रहा है। वह तेजी से रिकवर कर रही है।

मृतक संख्या 781 हुई, 2,500 लोग अब भी लापता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या रविवार को बढ़कर 781 हो गई। जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। आपदा के पांचवें दिन भी बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में लगे हैं। मलबे में फंसे हुए लोगों को निकालने का अभियान भी जारी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने के बाद 26 अगस्त को हिमस्खलन (पहाड़ से बर्फ खिसकना) जैसी घटना से पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। इसने मध्य नेपाल में कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया।

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नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार बताया कि इस त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 781 हो गई है। NDRRMA के अनुसार, अबतक चितवन जिले से 272 शव, नवलपरासी पूर्व से 199, नवलपरासी पश्चिम से 100 और गोरखा जिले से 58 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, नुवाकोट से 52, धादिंग से 50, तनहू से 37 और रसुवा से 13 शव मिले हैं। एनडीआरआरएमए ने बताया कि इस आपदा के बाद अब भी 2,502 लोग लापता हैं। जबकि 9435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

A young girl was buried under debris during the Nepal floods but was miraculously rescued alive. https://t.co/HdA8MurHEz

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।

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दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

 

अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।

 

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव

 

नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।

 

दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।

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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

 

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

 

अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर

 

गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

 

734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता

 

नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

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इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में करीब 24 गुजराती पर्यटकों के लापता होने की खबर है। इस आपदा का शिकार हुए लोगों की पहचान करने के लिए गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) से 10 सदस्यों की एक विशेष टीम नेपाल के लिए रवाना हो गई है। डॉ. भार्गव पटेल के नेतृत्व में यह टीम नेपाल पहुंचकर पीड़ितों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करेगी। गौरतलब है कि NFSU के इन विशेषज्ञों को अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) के साथ भी फॉरेंसिक मामलों में काम करने का अनुभव है।

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बाढ़ के कारण 24 गुजराती संपर्क से बाहर, अमरेली के पर्यटक से हुआ संपर्क 

 

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति में कई गुजराती फंस गए हैं, जिनमें से 24 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और उनके परिजनों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन द्वारा उनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस बीच अमरेली के एक पर्यटक से संपर्क हो पाया है। स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी गई है कि अमरेली के पर्यटक सुरक्षित हैं और उनकी अपने परिवार से बातचीत हो चुकी है।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आनंद का दंपत्ति लापता 

 

नेपाल में आए इस प्रलय में गुजरात के आनंद जिले के विमल पटेल और उनकी पत्नी जैमीना पटेल भी लापता हो गए हैं। यह दंपत्ति बीते 16 अगस्त को 'नमस्ते नेपाल टूर एंड ट्रेवल्स' के माध्यम से नेपाल घूमने गया था। इसके बाद वे नेपाल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे और चीन का वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे। परिजनों के साथ उनका आखिरी बार टेलीफोन पर संपर्क पिछले रविवार को हुआ था, लेकिन उसके बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो सका है।

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खोज और राहत कार्य के प्रयास तेज 

 

लापता सभी गुजराती पर्यटकों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहकर राहत कार्य कर रहे हैं। गांधीनगर से गई विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों और उनके परिजनों की मदद के लिए कार्य शुरू करेगी। सभी लापता लोगों से सुरक्षित संपर्क हो सके, इसके लिए उनके परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं।

Gurpreet Singh Shot Dead: कौन थे गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी? अपनी ही सरकार में AAP नेता की सरेआम हत्या

Gurpreet Singh Shot Dead: पंजाब के फिरोजपुर में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक सीनियर नेता गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने रविवार (30 अगस्त) को बताया कि हमलावरों ने उनके बाइक का काफी देर तक पीछा किया और फिर उनपर तोबड़तोड़ फायरिंग की। यह हत्याकांड रविवार (29 अगस्त) शाम पंजाब के सीमावर्ती जिले फिरोजपुर के ममदोट शहर में हुई। गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी की सरेआम कई राउंड गोली मारकर हत्या कर दी गई।

हथियारबंद हमलावरों ने कथित तौर पर उस मोटरसाइकिल का पीछा किया जिस पर वह सवार थे। फिर उन पर गोलियां चला दीं। यह घटना शाम करीब 7:45 बजे हुई। पुलिस के मुताबिक, गोपी और एक अन्य व्यक्ति मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, तभी कार में सवार हमलावरों ने उनका पीछा किया और फायरिंग कर दी।

गोलीबारी में गोपी को गंभीर चोटें आईं। फिर उन्हें इलाज के लिए फिरोजपुर के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई। गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद, फिरोजपुर ग्रामीण के डीएसपी करण कुमार शर्मा भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। घटनाक्रम का पता लगाने तथा हमलावरों की पहचान करने के लिए इलाके में और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। इस हत्याकांड से पंजाब में तनाव का माहौल है। इस हत्याकांड पर इसलिए अधिक सवार उठ रहे हैं क्योंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी की ही सरकार है।

दोस्त के कार पर भी गोलीबारी

SSP ने बताया कि इस हमले के पीछे एक पुराना विवाद था। जांच में चुनाव से जुड़ा विवाद एक अहम पहलू के तौर पर सामने आया है। सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस भूपिंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि गोपी और उनके दोस्त हरप्रीत मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। जबकि उनके कुछ दोस्त एक अलग कार में उनके पीछे आ रहे थे। पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने उस कार पर भी गोलीबारी की।

‘आरोपी का आपराधिक बैकग्राउंड है’

जांच करने वाले अधिकारी गाड़ी पर हुई फायरिंग से जुड़े हालात की जांच कर रहे हैं। घटनाक्रम का पूरा ब्योरा पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। एसएसपी भूपिंदर सिंह सिद्धू ने कहा, “दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद था। हमलावरों की पहचान कर ली गई है। हमारी टीमें बना दी गई हैं। हम जल्द से जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि मुख्य आरोपी का आपराधिक बैकग्राउंड है। वह गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है।

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उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जांच जारी रहने के साथ ही कई टीमें बनाई गई हैं। आरोपी की तलाश में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की जा रही है। दरअसल, इस घटना ने पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हमले के पीछे चुनाव से जुड़ा विवाद होने की बात से इस मामले के राजनीतिक चर्चा का विषय बनने की भी संभावना है।

Nepal Flood: ‘शायद इस बार फोन उठ जाए…’ नेपाल बाढ़ में लापता स्वाति के परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस तबाही में से अबतक कुल 691 लोगों को मौत हो चुकी है। वहीं 3000 हजार से ज्यादा लोग लापता है। इनके परिवार के लोगों इनकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी लापता हैं। स्वाति बागरेचा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गई थी। 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से उनका परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। मोबाइल फोन की घंटी बजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश के लिए भारतीय और कनाडाई दूतावास से मदद मांगी है।

फोन पर रिंग जा रहा है

PTI के मुताबिक, टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा के परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से स्वाति का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार उनके फोन की हर घंटी का इंतजार कर रहा है, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कोई खबर मिल जाए। लेकिन फोन का जवाब न मिलने से चिंता और बढ़ती जा रही है। PTI ने स्वाति के भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया, “उनका मोबाइल फोन अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं। हम उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।”

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं

दिल्ली की रहने वाली स्वाति 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 लोगों के एक समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। परिवार के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनसे आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसी दिन नेपाल में अचानक भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बन गई थी। इसके बाद से स्वाति से संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार के मुताबिक, स्वाति 26 अगस्त को इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंची थीं। इसके बाद उनसे परिवार की कोई बात नहीं हो सकी। वहीं, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का फिलहाल अपनी बड़ी बहन के साथ मुंबई में रह रही है।

परिवार ने मदद की अपील की

26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ आ गई। बाढ़ का पानी आगे चलकर त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र तक पहुंच गया और कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए। प्रशांत के मुताबिक, मोबाइल की लोकेशन से जानकारी मिली कि स्वाति का फोन चीन की सीमा के पास किसी इलाके में सक्रिय था। हालांकि, फोन को ट्रैक करने में परेशानी आ रही है क्योंकि उसका मोबाइल नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश में मदद के लिए नेपाल में भारतीय और कनाडाई दूतावास से संपर्क किया है। परिवार ने दोनों देशों के अधिकारियों से स्वाति को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें वापस लाने में मदद करने की अपील की है।

शिवराज सिंह चौहान ने परिवार से की बात

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के प्रयासों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्वाति के परिवार से बातचीत की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि स्वाति की तलाश के लिए जरूरी राजनयिक और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव कोशिश की जाएगी। साथ ही, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मदद पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।

Nepal Flood Update: नेपाल में फिर विनाशकारी त्रासदी का खतरा! भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव बढ़ा, रसुवा में हाई अलर्ट

Nepal-Tibet Flood Update: पड़ोसी देश नेपाल में हालिया भीषण बाढ़ की त्रासदी के बीच एक बार फिर भोटे कोशी नदी को लेकर चिंता बढ़ गई है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार (20 अगस्त) सुबह बताया कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में बाढ़ का बहाव फिर बढ़ गया है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। NDRRMA के अनुसार, रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय को सूचना मिली है कि भोटे कोशी नदी में बढ़े हुए बाढ़ प्रवाह की आवाज सुनाई दे रही है। इसके बाद नदी के आसपास के इलाकों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में हाई अलर्ट

NDRRMA ने खास तौर पर रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “रसुवा के जिला प्रशासन कार्यालय को जानकारी मिली है कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव तेज होने की आवाज सुनी गई है। इसलिए, हम रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग तक नदी के आस-पास के इलाकों में सावधानी बरतने का अनुरोध करते हैं। जैसे ही और जानकारी मिलेगी, हम आगे की अपडेट देंगे।”

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल में कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। फिलहाल, राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है। रविवार को बचाव अभियान का पांचवां दिन है। नेपाल-चीन सीमा के इलाकों में भयानक अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव से हुई तबाही के बाद टीमें बचे हुए लोगों और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।

आगे की जानकारी का इंतजार

NDRRMA ने कहा है कि जैसे-जैसे अतिरिक्त जानकारी प्राप्त होगी, लोगों को आगे अपडेट किया जाएगा। हालांकि, नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने बाद में कहा कि भोटे कोशी क्षेत्र में बड़े स्तर की बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन नदी के आसपास सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन की अपील है कि नदी किनारे रहने वाले लोग किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।

मरने वालों की संख्या 691 हुई

अधिकारियों से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत इलाके में मरने वालों की कुल संख्या 691 हो गई है। जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों ने 675 मौतों और 2,498 लोगों के लापता होने की सूचना दी है। जबकि चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 16 मौतों और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब तक नेपाल में 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। यह भयानक आपदा 26 अगस्त को आई थी। पहाड़ी सीमावर्ती इलाके में मलबे का भारी बहाव और अचानक आई बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य चीजों को नष्ट कर दिया था।

बचाव अभियान जारी

खराब मौसम के कारण कुछ समय के लिए रोके जाने के बाद नेपाली अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान फिर से शुरू किया। बचे हुए लोगों को निकालने और अलग-थलग पड़े समुदायों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। बचाव दल कई अहम जगहों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनमें रसुवा में अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना भी शामिल है, जहां अधिकारियों का मानना ​​है कि 100 से ज्यादा लोग कीचड़ से भरी सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं।

चीनी तरफ बुरी तरह क्षतिग्रस्त ग्यिरोंग सीमा क्रॉसिंग के आसपास भी खोज अभियान जारी है। इस बीच, भारत ने भोजन, दवाइयों और कंबल जैसी राहत सामग्री भेजी है। उन इलाकों में संपर्क बहाल करने में मदद के लिए तकनीकी टीमें और पहले से तैयार पुल (प्री-फैब्रिकेटेड ब्रिज) देने की भी पेशकश की है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर बह गया है।

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