नेपाल के त्रिभुवन त्रिशूली स्कूल की इमारत तो बह गई पर प्रिंसिपल ने 1600 बच्चों को बचा लिया! अब भारत इस स्कूल को फिर बनवाएगा

Nepal Flood: नेपाल के नुवाकोट जिले में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी को हीरो माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने 26 अगस्त को त्रिशूली घाटी में आई भयानक बाढ़ के दौरान स्कूल के सभी 1,643 छात्रों की जान बचाने में मदद की थी। हालांकि, स्कूल की इमारत अब नष्ट हो चुकी है, इसलिए दवाड़ी ने भारत सरकार से अपील की है कि वे स्कूल को फिर से बनाने और बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने में मदद करें।

स्कूल से जल्दी निकलो

मीडिया से बात करते हुए दवाड़ी ने बताया कि कैसे स्कूल की एक आम सुबह समय के साथ एक मुश्किल दौड़ में बदल गई। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9:20 बजे, मुझे एक दोस्त का जरूरी फोन आया, जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई थी कि पास के एक गांव में नदी का पानी भर गया है। वहां, से जल्दी निकलो। इसके कुछ ही देर बाद, एक घबराए हुए पैरेंट स्कूल पहुंचे और बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

बिना देरी किए स्कूल की बेल बजाने का दिया आदेश

उस समय सैकड़ों छात्र स्कूल की तीन मंजिला इमारत के अंदर या आस-पास थे, जो नदी से लगभग 60 मीटर की ऊंचाई पर स्थित थी। हालात तेजी से बिगड़ते देख, दवाड़ी ने बिना देरी के स्कूल की घंटी बजाने का आदेश दिया और शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे क्लासरूम खाली कराएं और बच्चों को ऊंची जगह पर ले जाएं।

प्रींसिपल ने बस ड्राइवरों से भी किया संपर्क

उन्होंने स्कूल बस ड्राइवरों से भी संपर्क किया और उन्हें वापस लौटने को कहा। हालांकि, एक बस से संपर्क नहीं हो पा रहा था। राजेंद्र दावाड़ी ने बाहर आकर देखा तो वही बस लोहे के पुल को पार कर स्कूल की तरफ बढ़ रही थी और नीचे नदी का विकराल पानी स्कूल परिसर की तरफ तेजी से आ रहा था। प्रिंसिपल साहब ने पूरी ताकत से चिल्लाकर और हाथ हिलाकर ड्राइवर को इशारा किया। ड्राइवर ने पलक झपकते ही बस को रिवर्स किया और सुरक्षित दूरी पर ले गया। बस के हटते ही वो पुल ताश के पत्तों की तरह ढह गया और नदी में समा गया।

जान बचाकर पहाड़ी पर भागे बच्चे

जैसे-जैसे खतरा बढ़ा, छात्र पहाड़ी की ओर जाने लगे। खबर है कि एक लड़की को पैनिक अटैक आया और उसे मोटरसाइकिल से सुरक्षित जगह ले जाना पड़ा, जबकि बाकी बच्चे पैदल ही भाग निकले। जब छात्र नदी से दूर जा रहे थे, तो दवाड़ी उनके साथ ही रहे।

बाद में बाढ़ का पानी उस इलाके में फैल गया, जिससे स्कूल बर्बाद हो गया और नदी के किनारे बनी इमारतें बह गईं। जब पानी का तेज बहाव घाटी से गुजर रहा था, तब छात्रों ने एक बोधि वृक्ष के नीचे शरण ली।

प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को बचाया

हालांकि, इस आपदा से प्रिंसिपल दावाड़ी ने 1,643 मासूमों को तो सुरक्षित बचा लिया, लेकिन स्कूल ने अपने दो बहादुर साथियों को खो दिया। 32 साल के नए सोशल हिस्ट्री टीचर संतोष परियार क्लास लेने के बाद खाना पकाने अपने कमरे पर गए थे और बाढ़ में बह गए। वहीं, स्कूल के सफाईकर्मी सुल्तान लामा की भी मौत हो गई। बताया जाता है कि वे स्कूल को सुरक्षित करने के लिए वापस लौटे थे।

दुनियाभर की मीडिया में नेशनल हीरो के तौर पर सराहे जाने के बाद भी राजेंद्र दावाड़ी की आंखों में अपनों को खोने का गम है। मलबे के ढेर को देखते हुए वे बेहद विनम्रता से बस एक ही बात कहते हैं, “मैं करता भी तो क्या? उस वक्त मेरे बच्चों की जान से बढ़कर कुछ नहीं था।”

स्कूल बनाने के लिए भारत से मदद की मांग

दावाड़ी के लिए, रेस्क्यू ऑपरेशन एक और चुनौती की शुरुआत भर थी। स्कूल की इमारत के तबाह हो जाने के बाद, अब वे स्कूल को फिर से बनाने के लिए भारत से मदद मांग रहे हैं, ताकि सैकड़ों बच्चे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें।

भारत ने दी मदद की गारंटी

वहीं, नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने X पर एक पोस्ट में लिखा, मैंने नुवाकोट के बिदुर में स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी से मुलाकात की। रसुवा में अचानक आई बाढ़ (flash flood) में स्कूल के बह जाने से ठीक पहले, उनके समय पर लिए गए फैसले ने 1600 से ज्यादा स्कूली बच्चों की जान बचाई। यह स्कूल 1950 के दशक में बनाया गया था। इसका डिजाइन एक भारतीय इंजीनियर ने तैयार किया था, जो त्रिशूली हाइड्रोपावर प्लांट के निर्माण से जुड़े थे, और इसे भारत की मदद से बनाया गया था। इस स्कूल की नई इमारत भी 2022 में भारत की मदद से HICDP प्रोग्राम के तहत बनाई गई थी। श्रीवास्तव ने दवाड़ी को भरोसा दिलाया कि भविष्य में भारत, नेपाल में भारतीय दूतावास के माध्यम से स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद करेगा।

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कल का मौसम: 2 सितंबर को होगी मूसलाधार बारिश! IMD ने दिल्ली, यूपी, बिहार समेत 15 से ज्यादा राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

Weather update for September 2nd: देश के अलग अलग इलाकों में मानसून के एक्टिव होने की वजह से भारी बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 सितंबर के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी किया है। IMD ने देश के 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मध्यम से मूसलाधार बारिश का अलर्ट दिया है। कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी प्रणालियों के चलते देश के मैदानी, पहाड़ी और तटीय इलाकों में 2 सितंबर को बारिश, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली कड़कने का खतरा बना रहेगा।

उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 2 सितंबर को उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का प्रकोप सबसे अधिक रहेगा। IMD ने इन तीनों राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में बिजली कड़कने और गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दिल्ली, यूपी, बिहार और झारखंड समेत मैदानी राज्यों का हाल

दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी 2 सितंबर को बारिश की गतिविधियां तेजी पकड़ेंगी। मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इसके अलावा बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और पूर्वी राजस्थान में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की आशंका व्यक्त की गई है।

पहाड़ी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम

पहाड़ी क्षेत्रों की बात करें तो उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में भारी बारिश के साथ-साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। वहीं पूर्वोत्तर भारत में भी मानसूनी बारिश का तांडव जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक का दौर बना रहेगा।

तटीय क्षेत्रों में तूफानी हवाओं की चेतावनी और समुद्र का हाल

दक्षिण भारत और तटीय इलाकों में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा और रायलसीमा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और आकाशीय बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और मजबूत सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

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समुद्री गतिविधियों को लेकर IMD ने बताया है कि अरब सागर में सोमालिया व ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर व पूर्व-मध्य अरब सागर में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण श्रीलंका से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन तटीय और समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।

Nepal Floods: बाढ़ से भयानक तबाही के बाद भारत-अमेरिका-चीन से मुआवजा क्यों मांगने लगा नेपाल?

Nepal Floods: नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ के बाद अब इंटरनेशनल मदद की मांग का अपना रुख बदलते हुए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग उठाई है। नेपाल का कहना है कि जलवायु संकट पैदा करने में उसका योगदान बेहद कम है। लेकिन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा हिमालयी देश को भुगतना पड़ रहा है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के लिए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग करने का अपना कूटनीतिक रुख बदल लिया है।

नेपाल का तर्क है कि यह हिमालयी देश उस जलवायु संकट का खामियाजा भुगत रहा है, जिसे पैदा करने में उसकी भूमिका बहुत कम थी ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनका देश अब सहायता को महज मानवीय मदद के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि इसे जलवायु जिम्मेदारी और मुआवजे के मुद्दे से जोड़ रहा है। यह विनाशकारी बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन के कारण आई थी।

‘यह दान नहीं, न्याय और मुआवजे का मामला’

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान लगभग नगण्य है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमालयी आपदाओं का सामना नेपाल को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल अपनी कूटनीतिक रणनीति को ‘मदद’ से ‘न्याय और मुआवजे’ की ओर ले जा रहा है। उनके मुताबिक यह किसी देश की ओर से दी जाने वाली चैरिटी नहीं, बल्कि जलवायु संकट के लिए जिम्मेदारी और मुआवजे का सवाल है।

भारत, चीन और अमेरिका को बताया बड़ा प्रदूषक

नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के प्रमुख इंडस्ट्रियल एमिटर्स में शामिल बताते हुए कहा कि इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे जलवायु संवेदनशील देशों को मुआवजा दें। खनाल ने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एमिटर्स है, उसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान आता है। उन्होंने दावा किया कि नेपाल ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपेंसेशन क्लेम लेटर भी भेजा है।

‘यह बाढ़ नहीं, हिमालयी सुनामी थी’

विदेश मंत्री ने हालिया आपदा की भयावहता बताते हुए इसे सामान्य बाढ़ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पानी की लहरें 20 से 30 मीटर तक ऊंची थीं। उनकी रफ्तार करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। इसी वजह से उन्होंने इसे ‘हिमालयी सुनामी’ करार दिया। बाढ़ के पानी ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।

नेपाल ने UN से मांगी 5 अरब डॉलर की मदद

आपदा के बाद नेपाल ने पुनर्निर्माण और रिकवरी की लागत करीब 5 अरब डॉलर आंकी है। साथ ही, देश ने जलवायु आपदाओं से उबरने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े विशेष फंड से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। नेपाल के जलवायु अधिकारियों का कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन ने उन परिस्थितियों को और गंभीर बनाया, जिनके बीच यह भयावह आपदा सामने आई।

नेपाल का तर्क है कि जो देश जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, वे ही अक्सर इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि हिमालय के ग्लेशियर लगातार पिघलते रहे तो गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर दक्षिण एशिया के अरबों लोगों की जल सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1,000 के करीब

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 987 हो गई> सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं।इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMAए ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं।

नेपाल से बाढ़ में बहकर बिहार आईं रहस्यमयी मछलियां! प्रशासन ने इन्हें खाने से किया मना, जानिए इनसे क्या है खतरा

नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के कुछ राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। बिहार के बगहा में बाढ़ के बाद प्रशासन ने लोगों को अनजान मछलियों से दूर रहने की सलाह दी है। ये मछलियों नेपाल से बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई है। बाढ़ के पानी के साथ कुछ अनजान मछलियां स्थानीय तालाबों और दूसरे जलस्रोतों में पहुंच गई हैं। प्रशासन ने इन मछलियों को खाने से मना किया है। बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये सलाह जारी की है। ऐसी मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार होने की शिकायत सामने आई है।

नेपाल से आने वाली नदियों में पानी बढ़ने के कारण बगहा के कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और बाढ़ के पानी के साथ आई अनजान मछलियों को खाने से बचने की अपील की है।

SDM ने जारी की एडवाइजरी

बगहा की SDM चांदनी कुमारी ने ऐसी मछलियों को लेकर लोगों को सावधान किया है। यह चेतावनी उन खबरों के बाद जारी की गई, जिनमें इन मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई थी। प्रभात खबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक SDM ने कहा, बाढ़ के पानी के साथ कुछ ऐसी मछलियां भी स्थानीय तालाबों और जलस्रोतों में पहुंच गई हैं, जो वहां आमतौर पर नहीं मिलतीं। अधिकारियों के अनुसार, इन मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों की तबीयत खराब होने की शिकायत सामने आई है। इसके बाद प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और बिना पहचान वाली मछलियों का सेवन न करने की सलाह दी है।

क्यों नहीं खाना चाहिए

अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के तेज पानी में मछलियां तालाब, नदी और झील जैसे अपने सामान्य स्थानों से दूर चली जाती हैं। इस दौरान उनका संपर्क गंदे नालों, मरे हुए जानवरों और अन्य दूषित चीजों से हो सकता है, जिससे उनमें हानिकारक बैक्टीरिया और दूसरे संक्रमण फैलाने वाले जीव मौजूद हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन ने लोगों से बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को खाने मना किया है। विभाग के मुताबिक, जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता और इलाके के हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक ऐसी मछलियों से दूरी बनाना ही सुरक्षित है।

इन समस्याओं को नजरअंदाज ना करें

प्रशासन ने लोगों से अनजान मछलियां दिखने पर खुद कार्रवाई करने के बजाय इसकी सूचना मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है। साथ ही, अफवाहों से बचने और बाढ़ के पानी से मिली चीजें खाने में सावधानी बरतने को कहा है। प्रशासन ने लोगों से कहा कि अगर अनजान मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, चक्कर या सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायत हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घर पर ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह लें।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में तबाही के बीच बचावकर्मियों ने बचाई मासूम की जान, डेढ़ महीने के बच्चे का रेस्क्यू, वीडियो वायरल

VIDEO Nepa Flood: नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले से रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। बचावकर्मियों ने महज डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसे रसुवा के धांगे कैंप पहुंचाया। भयंकर बाढ़ और मलबे के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई बस्तियां तबाह कर दी हैं, जिसके बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।

डेढ़ महीने के इस मासूम का सुरक्षित रेस्क्यू ऐसे मुश्किल हालात में उम्मीद और राहत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार (1 सितंबर) को 987 हो गई। सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA ने बताया कि अचानक आयी बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में कुल 279 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 168 लोगों को इलाज के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

शव ले जाने के लिए प्रक्रिया जारी

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की शिनाख्त करने और उन्हें स्वदेश भेजने के लिए मंगलवार को विस्तृत प्रक्रिया जारी की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। हजारों लोग लापता हो गए। मकानों, सड़कों, पुलों तथा हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।

दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए नौ चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। इसमें जरूरी दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और डिटेल्स दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मृत्यु के कारण की पुष्टि और औपचारिक शिनाख्त शामिल हैं।

बयान के अनुसार, प्रक्रिया में उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक सैंपल लेना, मृतक के पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन, दूतावास या वाणिज्य दूतावास के स्तर पर समन्वय तथा शव सौंपने संबंधी ज्ञापन और रसीद जारी करना भी शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस प्रक्रिया के पहले चार चरण नेपाल के अधिकारियों द्वारा पूरे किए जाएंगे।

यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और डिटेल्स के आधार पर शव की शिनाख्त कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास उसे सौंपने और स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में मदद करेगा।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाके से डेढ़ महीने के बच्चे को बचाकर रसुवा धांगे कैंप लाया गया

दूतावास ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की शिनाख्त के लिए सबसे नजदीकी परिजन से डीएनए का मिलान करना होगा।

सबसे नजदीकी परिजन से आशय ऐसे पारिवारिक सदस्य से है जो वंशावली में एक पीढ़ी के अंतर पर हो। इसमें माता-पिता, सगे भाई-बहन और संतान शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती या अवशेषों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

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टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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Nepal Flood: कैलाश मानसरोवर गए 21 भारतीयों की जान एक साड़ी ने बचाई! नेपाल में जल प्रलय के बीच इस कपल ने किया गजब का रेस्क्यू

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के तेज बहाव में कई घर, सड़कें और पुल बह गए। वहीं बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई और कई लोग लापता हैं। नेपाल में आए इस विनाशकारी बाढ़ में तमिलनाडु से गए 21 तीर्थयात्रियों भी फंसे हुए थे। वहीं इस मुसीबत के समय में एक कपल की समझदारी ने कई लोगों को जान बचाई। नेपाल में अचानक आई बाढ़ में तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री तिमुरे इलाके के पास फंस गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी दौरान एक कपल ने सूझबूझ दिखाते हुए साड़ी की मदद से महिलाओं को सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। महिलाओं को कीचड़ भरी और खड़ी ढलान से ऊपर खींचने के लिए साड़ी को रस्सी की तरह इस्तेमाल किया गया। इस मुश्किल वक्त में कपड़े के एक साधारण टुकड़े ने लोगों को सुरक्षित निकलने में बड़ी मदद की।

कैसे बची जान

26 अगस्त को माउंट कैलाश की यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री नेपाल के तिमुरे इलाके के पास फंस गए। इस दौरान भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड की स्थिति बन गई। उनकी गाड़ी एक सुरक्षित जगह पर रुक गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया। आसपास पानी और मलबा तेजी से बह रहा था, जिसके बाद सभी यात्री गाड़ी से बाहर निकलकर सुरक्षित ऊंचाई पर जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन कीचड़ और फिसलन की वजह से पहाड़ी पर चढ़ना उनके लिए काफी मुश्किल हो रहा था।

साड़ी से कैसे की मदद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझाली किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गए, लेकिन उन्होंने नीचे फंसी दूसरी महिलाओं को मुश्किल में देखा तो उनकी मदद करने का फैसला किया। पूंगुझाली ने अपना स्वेटर पहना, साड़ी उतारी और उसे नीचे की ओर पहुंचाया। महिलाओं ने साड़ी और वहां मौजूद लोहे की केबल का सहारा लिया, जबकि ऊपर मौजूद लोगों ने उन्हें धीरे-धीरे खींचकर सुरक्षित जगह तक पहुंचाया। इस तरह साड़ी ने मुश्किल हालात में फंसे तीर्थयात्रियों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।

दो दिनों तक रहा काफी मुश्किल

बाढ़ और लैंडस्लाइ़ड के बाद तीर्थयात्रियों को करीब दो दिनों तक काफी मुश्किल हालात में रहना पड़ा। इस दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें थोड़ा-बहुत राशन और पीने का पानी उपलब्ध कराया, जिससे उन्होंने किसी तरह समय बिताया। वहीं, अधिकारी लगातार उनके संपर्क में रहे। बाद में भारतीय दूतावास, नेपाल आर्मी और तमिलनाडु सरकार के अधिकारियों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया और फंसे हुए लोगों को हेलिकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाने की व्यवस्था की।

अब तक 42 हजार से ज्यादा लोग लापता

नेपाल में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। सोमवार तक इस आपदा में 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार अलग-अलग इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट और गोरखा समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान अभी भी जारी है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है।

नेपाल बाढ़: त्रासदी से पहले टीचर ने बजाई ‘खतरे की घंटी’! तुरंत खाली कराई स्कूल, बसें रुकवाईं और बचा ली 1,643 बच्चों की जान

Nepal Floods: पड़ोसी देश नेपाल में ग्लेशियर से अचानक आई भयंकर बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में तबाही मचाकर रख दी। पानी, बर्फ, चट्टानों और कीचड़ की करीब 9 मीटर ऊंची लहर ने उत्तर-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह स्थिति के बीच एक टीचर और प्रिंसिपल की सूझबूझ ने 1,643 बच्चों की जान बचा ली। 47 वर्षीय अंग्रेजी टीचर एवं प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बिना किसी आधिकारिक आदेश का इंतजार किए ऐसे फैसले लिए, जिनसे स्कूल में एक बड़ी त्रासदी टल गई।

न्यूज 18 के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9:20 बजे त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में करीब 900 बच्चे मौजूद थे। वहीं, करीब 700 अन्य बच्चे पैदल या बसों से स्कूल पहुंचने के रास्ते में थे। इसी दौरान राजेंद्र दवाड़ी को ऊपर की तरफ करीब पांच मील दूर बेत्रावती में रहने वाले अपने एक दोस्त का फोन आया। दोस्त ने घबराई हुई आवाज में बताया कि नदी ने उनके गांव को तबाह कर दिया है। पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ रहा है।

उसने दवाड़ी से तुरंत भागने को कहा। शुरुआत में दवाड़ी को लगा कि स्कूल की तीन मंजिला कंक्रीट की इमारत सुरक्षित है। स्कूल नदी के तल से करीब 60 मीटर ऊंचाई पर था। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद एक घबराया हुआ अभिभावक स्कूल पहुंचा और बताया कि पानी असामान्य गति से बढ़ रहा है। फिर दवाड़ी ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।

तुरंत बजाई स्कूल की घंटी

उन्होंने किसी सरकारी आदेश का इंतजार नहीं किया। तुरंत स्कूल की घंटी बजाई और सभी को क्लासेस खाली कराने का निर्देश दे दिया। टीचर्स बच्चों को तेजी से सुरक्षित स्थान की ओर निकालने लगे। इसी दौरान दवाड़ी ने स्कूल की ओर आ रही बसों को फोन करना शुरू किया। इन बसों में करीब 80-80 बच्चे सवार थे। दवाड़ी ने लगभग सभी बस चालकों से संपर्क कर लिया और उन्हें तत्काल वापस लौटने का निर्देश दिया। लेकिन एक बस ऐसी थी, जिसके ड्राइवर से संपर्क नहीं हो सका। तभी दवाड़ी की नजर उस बस पर पड़ी।

बस लोहे के पुल से होकर स्कूल की तरफ आ रही थी। उधर स्कूल परिसर में पानी तेजी से घुस रहा था। दवाड़ी ने बस चालक को दूर से ही चिल्लाकर और हाथों से इशारा करके वापस लौटने को कहा। ड्राइवर ने तुरंत बस को पीछे करना शुरू किया। बस किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गई। इसके कुछ ही पल बाद वह पुल तेज बहाव के कारण नदी में ढह गया। अगर बस कुछ सेकंड और आगे बढ़ जाती, तो उसमें सवार करीब 80 बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी।

घबराई बच्ची को बाइक से पहुंचाया सुरक्षित स्थान

बाढ़ का पानी बढ़ता देख बच्चे पैदल ही ऊंचाई वाले स्थानों की ओर भागने लगे। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। इसी दौरान एक छोटी बच्ची को तेज घबराहट का दौरा पड़ा और वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसकी मदद की और उसे मोटरसाइकिल के पीछे बैठाकर ढलान की ओर सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचाया।

राजेंद्र दवाड़ी की तेजी से लिए गए फैसलो जैसे स्कूल खाली कराने, बसों को वापस बुलाने और आखिरी बस को पुल पार करने से रोकने वाले एक्शन ने उस दिन एक बेहद बड़ी त्रासदी को टाल दिया। एक टीचर की समय पर दिखाई गई समझदारी और साहस ने 1,643 बच्चों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।

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नेपाल बाढ़! मलबे के नीचे 2 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ती रही 5 साल की बच्ची! रेस्क्यू टीम ने बिल्ली समझकर सुनी आवाज और फिर मिला ‘चमत्कार’

Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। इस बीच राहत और बचाव अभियान के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। 5 साल की बच्ची मनीषा को शुक्रवार को दो दिन तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद मलबे और मिट्टी के नीचे से जिंदा बाहर निकाला गया। बच्ची करीब दो दिनों तक मलबे के नीचे फंसी रही। लेकिन उसने जिंदगी की जंग नहीं हारी।

मनीषा को नेपाल के रासुवा जिले के स्याब्रुबेसी के पास से रेस्क्यू किया गया। बाहर निकाले जाने के बाद उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया। वहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। बाद में उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। भीषण फ्लैश फ्लड की भारी तबाही के बीच मनीषा का जिंदा मिलना बचाव अभियान के सबसे उम्मीद भरे पलों में से एक माना जा रहा है।

बिल्ली समझकर मलबे में शुरू हुई तलाश 

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम स्याब्रुबेसी के पास मलबे में बचे लोगों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान टीम को मलबे के अंदर से कुछ आवाज सुनाई दी। बचावकर्मियों को पहले लगा कि शायद कोई बिल्ली मलबे में फंसी हुई है। फिर टीम ने आवाज की दिशा में तलाश शुरू की। धीरे-धीरे मिट्टी और मलबा हटाना शुरू किया। कुछ देर बाद जो सामने आया, उसे देखकर बचावकर्मी भी हैरान रह गए। मलबे के नीचे 5 साल की मनीषा दो दिन से जिंदा फंसी हुई थी। बच्ची को मलबे से बाहर निकालने में करीब दो घंटे का समय लगा।

रेस्क्यू के दौरान बनाए गए वीडियो में वह पल भी दिखाई देता है, जब बचावकर्मी बच्ची को मलबे के भीतर से जिंदा बाहर निकालते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जब मनीषा को बाहर निकाला गया तो वह जिंदा थी। लेकिन वह बेहोशी जैसी हालत में थी। वह बहुत कम प्रतिक्रिया दे रही थी। दो दिनों तक मिट्टी और मलबे के नीचे फंसे रहने के कारण उसकी हालत काफी कमजोर हो गई थी। रेस्क्यू टीम ने तुरंत बच्ची को संभाला और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश शुरू की।

हेलीकॉप्टर से काठमांडू पहुंची मनीषा

शनिवार दोपहर मनीषा को हेलीकॉप्टर से काठमांडू के टीचिंग हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक इमरजेंसी विभाग में पहुंचाया गया। अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि बच्ची की हालत स्थिर है। रविवार को अस्पताल की ओर से जारी अपडेट में भी कहा गया कि मनीषा की हालत में सुधार हो रहा है। वह तेजी से रिकवर कर रही है।

मृतक संख्या 781 हुई, 2,500 लोग अब भी लापता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या रविवार को बढ़कर 781 हो गई। जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। आपदा के पांचवें दिन भी बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश में लगे हैं। मलबे में फंसे हुए लोगों को निकालने का अभियान भी जारी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने के बाद 26 अगस्त को हिमस्खलन (पहाड़ से बर्फ खिसकना) जैसी घटना से पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया। इसने मध्य नेपाल में कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया।

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नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार बताया कि इस त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 781 हो गई है। NDRRMA के अनुसार, अबतक चितवन जिले से 272 शव, नवलपरासी पूर्व से 199, नवलपरासी पश्चिम से 100 और गोरखा जिले से 58 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, नुवाकोट से 52, धादिंग से 50, तनहू से 37 और रसुवा से 13 शव मिले हैं। एनडीआरआरएमए ने बताया कि इस आपदा के बाद अब भी 2,502 लोग लापता हैं। जबकि 9435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

A young girl was buried under debris during the Nepal floods but was miraculously rescued alive. https://t.co/HdA8MurHEz

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।

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दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

 

अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।

 

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव

 

नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।

 

दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।

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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

 

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

 

अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर

 

गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

 

734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता

 

नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

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इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।