VIDEO: प्रयागराज में मां गंगा ने कराया ‘लेटे हनुमान जी’ को महास्नान! गर्भगृह तक पहुंचा नदी का पानी; वीडियो वायरल

Prayagraj Floods: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा नदी के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। धर्मनगरी प्रयागराज में बीते कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते उत्तर प्रदेश और बिहार के कई गंगा किनारे बसे शहरों में नदी का पानी अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से बाहर फैलने लगा है। इसी बीच प्रयागराज में एक बेहद भावुक और आस्था से जुड़ा दृश्य सामने आया है, जहां मां गंगा का पानी प्रसिद्ध ‘लेटे हुए हनुमान’ यानी बड़े हनुमान जी मंदिर तक पहुंच गया।

संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर में मां गंगा का पानी गर्भगृह तक पहुंच गया। पानी मंदिर की सीढ़ियों से होते हुए अंदर तक पहुंचा और वहां विराजमान भगवान हनुमान की प्रतिमा को स्पर्श करने लगा। इस दौरान ऐसा दृश्य बना मानो मां गंगा स्वयं संगम तट पर विराजमान बड़े हनुमान जी का अभिषेक करने पहुंची हों। मंदिर में पानी सीढ़ियों से नीचे की ओर बहता दिखाई दिया। गर्भगृह में स्थापित लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा तक पहुंच गया, जिसे देखकर सबलोग भावुक हो गए।

पूजा-पाठ के बीच मंदिर में पहुंचा गंगा का पानी

गंगा का पानी मंदिर परिसर में एंट्री करने के बावजूद पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना जारी रखी। पुजारी ने धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास ‘बड़े हनुमान जी महाराज’ और ‘मां गंगा’ के जयकारे गूंजते रहे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ पूजा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में गंगा का पानी मंदिर की सीढ़ियों से बहता हुआ दिखाई देता है। जबकि आगे बढ़कर भगवान हनुमान की प्रतिमा तक पहुंचता नजर आता है।

मंदिर के सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर हुई तस्वीरें

इस घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो श्री बड़े हनुमान जी मंदिर (संगम प्रयाग), प्रयागराज के फेसबुक पेज पर भी शेयर किए गए हैं। पोस्ट में इस दिन को प्रयागराज और हनुमान भक्तों के लिए बेहद शुभ और सौभाग्यशाली बताया गया। पोस्ट में धार्मिक भावनाओं के अनुरूप कहा गया कि प्रयागराज के पवित्र संगम पर, जहां संगम तट पर श्री बड़े हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां ‘पतित पावनी मां गंगा’ ने स्वयं भगवान हनुमान का भव्य जलाभिषेक किया।

लगातार बढ़ रहा है गंगा का जलस्तर

दरअसल, नेपाल में बाढ़ की स्थिति और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी और प्रयागराज सहित गंगा किनारे के इलाकों में नदी का पानी फैलने लगा है। वहीं, बिहार के बक्सर, पटना और मुंगेर जैसे जिलों में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संगम क्षेत्र में स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में है। गंगा का पानी मंदिर तक पहुंचने और प्रतिमा को स्पर्श करने के इस दृश्य को श्रद्धालु आस्था और धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष क्षण मान रहे हैं।

हर साल दिख जाता है ये मनमोहक दृश्य

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों के बाद यह दृश्य तेजी से चर्चा में है। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने गंगा और बड़े हनुमान जी दोनों की श्रद्धा के साथ पूजा की और जयकारे लगाए। हिंदू धर्म में आस्था है कि जब हनुमान जी ने लंका दहन किया था तो उसके बाद उनका शरीर भी आग की चपेट में आकर जलनशील हो गया था। फिर बजरंगबली संगम के तट पर आकर लेट गए थे।

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बताया जाता है कि इस दौरान मां गंगा ने अपना रूप बढ़ाकर अपने जल से हनुमान जी को स्पर्श किया था। पुजारियों का कहना है कि आज भी प्रयागराज में वैसे ही मां गंगा हर साल ‘लेटे हुए हनुमान’ जी को प्रणाम करने जरूर आती है।

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।

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दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

 

अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।

 

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव

 

नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।

 

दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।

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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

 

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

 

अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर

 

गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

 

734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता

 

नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

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इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

Nepal Flood: ‘शायद इस बार फोन उठ जाए…’ नेपाल बाढ़ में लापता स्वाति के परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस तबाही में से अबतक कुल 691 लोगों को मौत हो चुकी है। वहीं 3000 हजार से ज्यादा लोग लापता है। इनके परिवार के लोगों इनकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी लापता हैं। स्वाति बागरेचा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गई थी। 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से उनका परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। मोबाइल फोन की घंटी बजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश के लिए भारतीय और कनाडाई दूतावास से मदद मांगी है।

फोन पर रिंग जा रहा है

PTI के मुताबिक, टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा के परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से स्वाति का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार उनके फोन की हर घंटी का इंतजार कर रहा है, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कोई खबर मिल जाए। लेकिन फोन का जवाब न मिलने से चिंता और बढ़ती जा रही है। PTI ने स्वाति के भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया, “उनका मोबाइल फोन अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं। हम उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।”

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं

दिल्ली की रहने वाली स्वाति 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 लोगों के एक समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। परिवार के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनसे आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसी दिन नेपाल में अचानक भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बन गई थी। इसके बाद से स्वाति से संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार के मुताबिक, स्वाति 26 अगस्त को इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंची थीं। इसके बाद उनसे परिवार की कोई बात नहीं हो सकी। वहीं, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का फिलहाल अपनी बड़ी बहन के साथ मुंबई में रह रही है।

परिवार ने मदद की अपील की

26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ आ गई। बाढ़ का पानी आगे चलकर त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र तक पहुंच गया और कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए। प्रशांत के मुताबिक, मोबाइल की लोकेशन से जानकारी मिली कि स्वाति का फोन चीन की सीमा के पास किसी इलाके में सक्रिय था। हालांकि, फोन को ट्रैक करने में परेशानी आ रही है क्योंकि उसका मोबाइल नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश में मदद के लिए नेपाल में भारतीय और कनाडाई दूतावास से संपर्क किया है। परिवार ने दोनों देशों के अधिकारियों से स्वाति को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें वापस लाने में मदद करने की अपील की है।

शिवराज सिंह चौहान ने परिवार से की बात

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के प्रयासों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्वाति के परिवार से बातचीत की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि स्वाति की तलाश के लिए जरूरी राजनयिक और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव कोशिश की जाएगी। साथ ही, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मदद पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।

‘बेहद उदार’: नेपाल के राष्ट्रपति पौडेल ने की PM मोदी की तारीफ, बाढ़ में मदद के लिए भारत का जताया आभार

Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।

पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया

X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।

उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””

नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।

पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”

नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।

नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।

इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।

बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़

यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।

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626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

Nepal Flood: नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 187 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है। इसके अलावा, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में आपातकालीन अभियान जारी हैं, और नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के लिए खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।

626 शव बरामद, 2,400 लापता

भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 626 शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, अब तक 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी, बचाव और इमरजेंसी मेडिकल ऑपरेशन जारी हैं। अधिकारी अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।

नेपाल ने खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है

नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के बीच खास अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

सुरंग से बचाव कार्यों के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन से भी सुरंग से बचाव के लिए एक और खास टीम के आने की उम्मीद है।

भारत ने नेपाल की मदद के लिए 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री भी भेजी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी सामान आ रहा है।

इस मदद से तुरंत बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी आपदा के बड़े पैमाने से निपट रहे हैं।

विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक खास इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम परिवारों के साथ तालमेल बिठाएगा, पहचान की प्रक्रियाओं में मदद करेगा और स्वदेश वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को संभालेगा।

बता दें कि बाढ़ से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बनाना राहत और बचाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया है।

नुकसान का आकलन जारी

नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। यह आकलन मुख्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं।

वहीं, बाढ़ से हुई भारी तबाही को देखते हुए, नेपाल को उम्मीद है कि लंबी अवधि में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय मदद भी अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए नेपाल सरकार न केवल तत्काल बचाव और राहत कार्यों के लिए, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी मदद मांग रही है।

नेपाल ने विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया

नेपाल सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने फिर से कहा है कि आपदा के बाद बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के कामों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की बहुत जरूरत है।

अधिकारियों ने आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि किए गए आंकड़ों को न तो छापें और न ही प्रसारित करें।

ध्यान दें कि राहत और पुनर्निर्माण के कामों में मदद के लिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में QR कोड या ऑनलाइन लिंक के जरिए योगदान दिया जा सकता है।

नेपाल पर्यटकों के लिए खुला है

बाढ़ से हुई तबाही के बीच, अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है और वहां कामकाज जारी है, खासकर उन इलाकों में जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं।

यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है जब भोटे कोशी नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं।

वहीं, अधिकारी लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे को हुए बड़े नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।

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नेपाल बाढ़ में बैंक का लॉकर बहा, ₹57 लाख लूटे:सेफ तोड़कर कैश निकालने के आरोप में 29 हिरासत में

नेपाल में भीषण बाढ़ के दौरान भोटेकोशी इलाके से एक बैंक का लॉकर बहकर कई किलोमीटर दूर पहुंच गया। बाद में धादिंग में मिले इस लॉकर को तोड़कर उसमें रखी नकदी निकालने के आरोप में पुलिस ने 29 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक लॉकर बाढ़ में बहने के बाद बेलखुखोला के पास मिला था। पुलिस को सूचना मिली थी कि स्थानीय लोगों ने लॉकर तोड़कर उसके अंदर रखा कैश निकाल लिया है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती तलाशी में पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों के पास से 92.68 लाख नेपाली रुपए यानी करीब 57 लाख रुपए बरामद किए। कैश निकालने के आरोपी 19 से 49 साल के बीच पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए ज्यादातर लोग गलछी-4 के मस्तार के रहने वाले हैं। कुछ गलछी-6 के आदमघाट और सिद्धलेक-7 के आदमतार के रहने वाले हैं। वहीं कुछ लोग मूल रूप से चितवन और परसा के हैं और फिलहाल धादिंग में रह रहे हैं। सभी की उम्र 19 से 49 साल के बीच है। पुलिस अब बरामद रकम के स्रोत की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मामले में और लोग शामिल हैं या नहीं। महिला के शव से बालियां चुराने वाले 2 गिरफ्तार इसी दौरान नेपाल में बाढ़ से जुड़ी एक और चोरी का मामला सामने आया। नारायणी नदी में बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए एक महिला के शव से सोने की बालियां निकालने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की। वीडियो में दो लोग बाढ़ में बहकर आए महिला के शव से कथित तौर पर सोने की बालियां निकालते दिखाई दे रहे हैं। नेपाल की बाढ़ में में 626 मौतें, 2426 लापता नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,426 लोग लापता हैं। शुक्रवार रात तक 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी थी। वहीं, 517 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान जारी है। ये खबर भी पढ़ें: नेपाल में तबाही लाने वाले ग्लेशियर टूटने का VIDEO:800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर गिरा था; अब तक 633 मौतें, 2500 लापता नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक बाढ़ आई थी। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Nepal Flood: तबाही के बाद नेपाल से बहकर भारत आ रहे शव, गंडक नदी में मिलीं 3 लाशें, सामान भी बहकर आया

नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। वहीं इस आपदा में कई देशों के लोगों समेत कुल 626 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 2500 से ज्यादा लोग अभी तक लापता है। वहीं नेपाल में आई भयानक बाढ़ का असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी से तीन शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, तेज बहाव की वजह से ये शव नेपाल से बहकर भारतीय क्षेत्र तक पहुंचे हैं। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने गंडक नदी और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। शनिवार को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी

शुक्रवार को खड्डा के मदनपुर-सुकरौली इलाके में बैराज के पियर नंबर 3 के पास नदी में तीन शव दिखाई दिए। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालकर उनकी पहचान की कोशिश शुरू की।

शव के साथ बाकी चीजें भी बह कर आई

खड्डा के SHO संदीप सिंह ने बताया कि, SDRF की निगरानी टीम ने सबसे पहले शवों को नदी में तैरते हुए देखा था। इसके बाद टीम ने शवों को नदी से बाहर निकाला। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ का असर गंडक नदी में भी दिखाई दे रहा है। नदी के पानी के साथ गाड़ियां, घर का सामान, गैस सिलेंडर, ड्रम, फर्नीचर, लकड़ियां और अन्य मलबा बहकर भारतीय इलाके तक पहुंच रहा है। इनमें से कई सामान नदी में तैरते हुए नजर आए, जबकि कुछ नदी के किनारे जमा हो गए हैं।

लोगों को सामान निकालने से किया गया मना

नदी के किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए सामान को देखने और बाहर निकालने के लिए पहुंच रहे हैं। लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने नदी में उतरकर कोई सामान निकालने से मना किया है। अधिकारियों ने लोगों से कहा कि अगर उन्हें नदी में कोई सामान तैरता हुआ दिखाई दे, तो खुद उसे निकालने की कोशिश न करें और इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। कुशीनगर से एक दिन पहले महाराजगंज में भी नदी से चार शव मिले थे। शवों की पहचान नहीं हो सकी है। अधिकारी नेपाल प्रशासन से संपर्क कर यह पता लगा रहे हैं कि कहीं ये शव बाढ़ और भूस्खलन में लापता लोगों के तो नहीं है।

प्रशासन पूरी तरह से सर्तक

नेपाल में 26 अगस्त को रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का पानी अचानक बढ़ने से बाढ़ आ गई थी। बाढ़ का पानी आगे त्रिशूली और गंडक नदी तक पहुंच गया, जिससे आसपास के निचले इलाकों में भी असर पड़ा। इसके बाद कुशीनगर प्रशासन ने गंडक नदी और आसपास के गांवों में निगरानी बढ़ा दी। SDRF, पुलिस और अन्य टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। नदी का पानी अब कम होने लगा है, जिससे बाढ़ का खतरा भी घट गया है। हालांकि, प्रशासन अभी भी सतर्क है और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। खरगे ने केंद्र सरकार से नेपाल को तत्काल मानवीय और आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की है। ALSO READ: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में बाढ़ से हुए बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।

 

नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर जताई चिंता

खरगे ने कहा कि बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग भी फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी अभियान तेज करने के निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जा सके।

 

खरगे ने विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से इन लोगों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास करने की अपील की। ALSO READ: नेपाल की त्रासदी में विदिशा की स्वाति बागरेचा लापता, 26 अगस्त से परिवार से संपर्क टूटा

 

नेपाल को तत्काल राहत सहायता देने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

 

अमित शाह को दिया सुझाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी तैनात की जाएं, ताकि बचाव, निकासी और राहत कार्यों में मदद मिल सके।

 

खरगे ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार नेपाल के इस मानवीय संकट को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।

नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

नेपाल आपदा: लापता गुजरातियों की संख्या बढ़कर 25 हुई, सरकार ने जारी की नई सूची और हेल्पलाइन नंबर

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नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बीच गुजरात के लापता लोगों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। राज्य सरकार ने नेपाल में लापता हुए नागरिकों की नई सूची जारी की है। इस सूची में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित राज्य के विभिन्न जिलों के लोग शामिल हैं। वहीं, 2 और एनआरआई (NRI) के भी संपर्क से बाहर होने की खबर है। ALSO READ: नेपाल बाढ़ हादसा : फंसे हुए गुजरातियों की मदद के लिए गुजरात सरकार सक्रिय, प्रवक्ता मंत्री जीतू वाघानी ने दी बड़ी जानकारी

 

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक गुजरात के कुल 25 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। इस स्थिति के कारण उनके परिजनों में भारी चिंता का माहौल है। रिश्तेदार लगातार राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय के प्रशासन से अपने स्वजनों की ताज़ा जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। 

 

विदेशी नागरिकता वाले गुजराती भी लापता

लापता लोगों में केवल स्थानीय गुजराती ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे एनआरआई (NRI) गुजराती भी शामिल हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, लापता 25 लोगों में से कुछ नागरिक न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से नेपाल की यात्रा पर आए थे और बाढ़ के बाद उनका संपर्क टूट गया है। 

 

राज्य सरकार और प्रशासन की लगातार निगरानी

राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है और विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटाकर सूची अपडेट कर रही है। मौजूदा 25 लोगों की सूची के बाद जैसे-जैसे संपर्क स्थापित होगा, इन आंकड़ों में बदलाव होने की संभावना है। लापता लोगों के संबंध में कोई भी नई जानकारी मिलते ही तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया जाएगा। 

 

हेल्पलाइन नंबर 

 079-23251900 

 9978405304 

 1070 

 

जिलेवार लापता गुजरातियों का विवरण

 

सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार, अहमदाबाद के 5, आनंद के 4, सूरत के 4, खेड़ा के 4, गांधीनगर के 4, अमरेली के 2, राजकोट के 1 और वलसाड के 1 नागरिक शामिल हैं। इनमें से कई लोगों के पास अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता भी है। 

 

नेपाल में बाढ़ का कहर और भारी तबाही

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण भारी तबाही हुई है। प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। रास्ते बंद होने के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। 

 

150 से अधिक गुजरातियों के प्रभावित होने की खबर

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने बताया कि वायरल हो रहे भयानक वीडियो में लोग, मकान और वाहन तिनके की तरह बहते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस आपदा में जान-माल के वास्तविक नुकसान का सही आंकड़ा सामने आने में अभी लंबा समय लग सकता है। नेपाल के रसुवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आई इस आपदा में अब तक 392 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 290 भारतीयों सहित 1,400 से अधिक लोग लापता हैं। देशभर से और विशेष रूप से गुजरात से बड़ी संख्या में पर्यटक वहां गए थे, जिनमें से प्राथमिक जानकारी के अनुसार 150 से अधिक गुजरातियों के भी इस हादसे में प्रभावित होने की रिपोर्ट मिल रही है। 

 

भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 315 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। भारत सरकार नेपाली प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और भारतीयों की तलाश तथा उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के काम में जुटी हुई है।

Nepal Flood: 600 से ज्यादा मौतें और हजारों लापता…तबाही के बीच नेपाल में अब भी मंडरा रहा सैलाब का खतरा

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। इस आपदा में अबतक मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 पहुंच गई है। वहीं 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।  इसमें 320 भारतीय भी शामिल है। हालात को देखते हुए बचाव और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कुछ जगहों पर बनी अस्थिर बैरियर झीलों की वजह से दुबारा बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्य में परेशानी हो रही है।

नेपाल में बाढ़ का खतरा

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भयानक आपदा की शुरुआत ग्लेशियर के अचानक टूटने और ढहने से हुई। इसके बाद हिमालय से निकलने वाली नदियों में बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और मलबा बहने लगा, जिसने निचले इलाकों में तबाही मचा दी। इस तेज बहाव ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया।

रोकना पड़ा बचाव काम

शुक्रवार को पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए राहत और बचाव का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया। मलबे से बनी एक झील का पानी लहेंडे खोला और त्रिशूली नदी की ओर बढ़ रहा था। वहीं, तिब्बत की तरफ बांध टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने बचाव दलों को तुरंत सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी। खतरा कम होने और हालात सुधरने के बाद नेपाल में बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया। चीन ने भी ग्यिरोंग इलाके में कुछ समय के लिए राहत कार्य रोका था। बाद में चीन के सरकारी चैनल CCTV ने हालात सामान्य होने की जानकारी दी, जिसके बाद बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया।

नेपाल में अभी भी बाढ़ का खतरा

नेपाल में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अधिकारियों की नजर पहाड़ी इलाके में बनी दो बैरियर झीलों पर बनी हुई है, क्योंकि इनमें जमा पानी किसी भी समय नीचे की ओर बह सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक झील का आकार लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है और पानी बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। इससे दबाव बढ़ने और दोबारा बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। वहीं, चीनी एक्सपर्ट ने भी आगाह किया है कि क्षेत्र में मौजूद 100 से अधिक ग्लेशियल झीलें आने वाले समय में खतरा पैदा कर सकती हैं।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जो भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा त्रिशूली-I हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारियों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, चीन की ओर से 149 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ करीब 400 चीनी नागरिक चीन में सुरक्षित जगहों पर हैं और उन्हें वहां से निकालने में भारतीय दूतावास मदद कर रहा है।

अब तक कितने भारतीय लापता

बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था खराब होने से करीब 320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, इस आपदा में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा कई ट्रेकर्स और तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने अपनी लापता लोगों की सूची में 933 हाइड्रोपावर कर्मचारियों को शामिल किया है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।