पश्चिम बंगाल में अब अंडों को लेकर बवाल, मिड डे मील से इसके हटने की सुगबुगाहट और इस्कॉन से जोड़ा जा रहा पूरा विवाद क्या है? समझिए

पश्चिम बंगाल मिड-डे मील विवाद (West Bengal Mid-Day Meal Controversy): पश्चिम बंगाल में स्कूलों के मिड-डे मील (स्कूली भोजन) के मेनू से अंडों को हटाए जाने की सुगबुगाहट को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले को धार्मिक संस्था इस्कॉन (ISKCON) और राज्य की नई भाजपा सरकार से जोड़कर देखा जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में शाकाहार थोपने की कोशिश की जा रही है और इससे बच्चों के पोषण पर असर पड़ेगा। आइए समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है और इस पर अलग-अलग पक्षों का क्या कहना है।

विवाद की शुरुआत: बजट में इस्कॉन को शामिल करने का प्रस्ताव

इस पूरे विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल सरकार के नए बजट से जुड़ी है। सोमवार को राज्य का पहला बजट पेश करते हुए पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने घोषणा की थी कि मिड-डे मील योजना के तहत भोजन तैयार करने और उसके वितरण में इस्कॉन की सहायता लेने की उम्मीद है। इसके बाद ऐसी खबरें और सोशल मीडिया पर दावे सामने आने लगे कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाले स्कूलों में जहां राज्य सरकार पके हुए भोजन की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने पर विचार कर रही है, वहां के मेनू से अंडों को पूरी तरह हटा दिया जाएगा। चर्चा यह भी चली कि इस्कॉन के नए मेनू में अंडों की जगह पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसे कि पनीर और सोयाबीन को शामिल किया जा सकता है।

टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने जताई चिंता, सरकार से पुनर्विचार की मांग की

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने सरकार के इन संकेतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि वर्तमान में अंडे मिड-डे मील योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और बच्चों के पोषण में इनका बड़ा योगदान है। उन्होंने राज्य सरकार से ऐसे किसी भी कदम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है जिससे अंडे मेनू से बाहर हो जाएं।

कुणाल घोष ने कहा कि, ‘इस्कॉन एक बेहद सम्मानित धार्मिक संस्था है, लेकिन समस्या यह है कि बच्चों को खाना खिलाना एक बड़ी चुनौती है। अंडा एक ऐसी चीज है जिसे बच्चे बहुत पसंद करते हैं। यह न केवल उनके पोषण और स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि बच्चों को काफी आकर्षित भी करता है। चूंकि इस्कॉन एक धार्मिक संगठन है, इसलिए यदि वे मिड-डे मील तैयार करेंगे तो उन्हें भोजन को पूरी तरह से शाकाहारी रखना होगा। ऐसे में बच्चों का मेनू नॉन-वेजिटेरियन से वेजिटेरियन हो जाएगा और अंडे पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। इसलिए हम सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं।’

डेरेक ओ’ब्रायन का भाजपा सरकार पर तीखा हमला, ‘बंगाल में शाकाहार थोपने की कोशिश’

तृणमूल कांग्रेस के संयुक्त सचिव और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की नई भाजपा सरकार बच्चों को पोषण से वंचित कर रही है और राज्य में जबरन शाकाहार थोपने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में ओ’ब्रायन ने इस विवाद को चुनाव प्रचार के दौरान खान-पान की आदतों पर हुई राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए लिखा कि चुनाव अभियान के दौरान ‘मछली खाने’ के तमाशे के बाद, आखिरकार गुजरात जिमखाना का असली रूप सामने आ गया है। बंगाल में नई भाजपा सरकार काम पर लग गई है। विरोधियों पर अंडे फेंको, लेकिन मिड-डे मील से अंडे हटाकर बच्चों को पोषण से वंचित कर दो। शाकाहार थोपा जा रहा है। बंगाल इसे खारिज करता है।’

अफवाहों पर इस्कॉन का स्पष्टीकरण- अभी कोई मेनू फाइनल नहीं हुआ

विवाद और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के बीच इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने वायरल हो रहे कथित मेनू को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अभी भोजन सूची को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। राधारमण दास ने X पर पोस्ट में कहा कि, ‘मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ लोग कोलकाता में मिड-डे मील के लिए एक प्रस्तावित मेनू साझा कर रहे हैं। हालांकि, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ऐसा कोई भी मेनू अभी फाइनल नहीं किया गया है और न ही यह सूची हमारी ओर से जारी की गई है। एक बार मेनू फाइनल हो जाने के बाद, हम इसकी आधिकारिक घोषणा करेंगे। कृपया इस तरह की गलत जानकारी साझा करने से बचें।’

क्या हैं मिड-डे मील (PM POSHAN) के नियम?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘पीएम पोषण’ (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण) योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बालवाटिका और कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। इस योजना के नियम कुछ इस तरह हैं-

स्थानीय मेनू की छूट: केंद्र सरकार के नियमों के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह छूट दी गई है कि वे निर्धारित पोषण मानकों का पालन करते हुए स्थानीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं के अनुरूप अपना मेनू खुद तय कर सकते हैं।

गुणवत्ता और स्वच्छता गाइडलाइंस: केंद्र सरकार ने भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें प्रमाणित सामग्री का उपयोग, रसोइयों का प्रशिक्षण और बच्चों को परोसे जाने से पहले स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों व शिक्षकों द्वारा भोजन को अनिवार्य रूप से चखना शामिल है।

मुख्य जिम्मेदारी: इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की होती है।

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Asian Market Today: एशियाई बाजारों में बढ़त, माइक्रोन की मजबूत कमाई के बाद कोस्पी 5% उछला, निक्केई 1% ऊपर

Asian Market Today: US चिपमेकर माइक्रोन की अच्छी कमाई के बाद गुरुवार को एशियाई स्टॉक मार्केट में मोटे तौर पर बढ़त देखी गई। जापान का निक्केई 225 1.28% बढ़ा, जबकि टॉपिक्स 0.76% बढ़ा। साउथ कोरिया का कोस्पी 5% से ज़्यादा उछला, जबकि कोस्डैक 1.32% चढ़ा। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स ने कम ओपनिंग का संकेत दिया।

गिफ्ट निफ्टी 24,114 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 62 पॉइंट्स का प्रीमियम था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए पॉजिटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट बुधवार को मिला-जुला रहा, जिसमें नैस्डैक और S&P 500 मेगाकैप टेक स्टॉक्स में बिकवाली के कारण नीचे बंद हुए।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 182.06 पॉइंट्स या 0.35% बढ़कर 51,848.90 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 7.24 पॉइंट्स या 0.10% गिरकर 7,358.22 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 110.40 पॉइंट्स या 0.43% गिरकर 25,476.64 पर बंद हुआ।

एनवीडिया का स्टॉक प्राइस 0.54% गिरा, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 2.27% गिरे, माइक्रोन टेक्नोलॉजी का शेयर 0.37% गिरा, एप्पल का स्टॉक 0.38% गिरा, टेस्ला का स्टॉक 1.61% गिरा, और स्पेसएक्स का शेयर 1.13% गिरा।

US-ईरान शांति वार्ता

जबकि होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक नॉर्मल होने की ओर बढ़ रहा है, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने बंद कमरे में हुई मीटिंग में रिपब्लिकन कांग्रेसियों को उनके ईरान युद्ध को रोकने के लिए वोट की इजाज़त देने के लिए फटकार लगाई है। US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो का कहना है कि अगले हफ़्ते स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ बातचीत तय है।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई

माइक्रोन टेक्नोलॉजी Q3 की कमाई और Q4 के अनुमान ने वॉल स्ट्रीट के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया, जिससे इसके शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में 15% बढ़ गए। माइक्रोन ने Q3 में $41.46 बिलियन का रेवेन्यू बताया, जो $35.85 बिलियन के अनुमान से ज़्यादा है। कंपनी ने $25.11 प्रति शेयर का एडजस्टेड प्रॉफ़िट बताया, जबकि अनुमान $20.78 प्रति शेयर था।

इसे Q4 में प्रति शेयर $31 की एडजस्टेड कमाई की उम्मीद है, जो $1 ज़्यादा या कम हो सकती है, जबकि अनुमान $25.84 प्रति शेयर था। कंपनी को चौथी तिमाही में लगभग $10 बिलियन के कैपिटल खर्च की उम्मीद है, जबकि एनालिस्ट्स को $8.89 बिलियन की उम्मीद थी।

बिटकॉइन की कीमतें

बिटकॉइन की कीमतें वापस $60,000 से नीचे आ गईं। टोकन 5.4% तक गिरकर $59,023 पर आ गया, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे कम है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, CoinGlass के इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में क्रिप्टो लॉन्ग पोजीशन में लगभग $800 मिलियन लिक्विडेट किए गए हैं। डेरिबिट के डेटा से पता चलता है कि यह गिरावट शुक्रवार को बिटकॉइन ऑप्शंस में लगभग $10 बिलियन की तिमाही एक्सपायरी से पहले हुई है।

आज सोने का रेट

US डॉलर में तेज़ी और US फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की संभावना के बीच, सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही, जो एक दिन पहले सात महीने से ज़्यादा के निचले स्तर के पास रही। स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.4% गिरकर $3,985.89 प्रति औंस हो गई, जबकि अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर $4,001.60 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर की कीमतें 0.2% गिरकर $57.33 प्रति औंस हो गईं।

US ट्रेजरी यील्ड

तेल की कीमतें चार महीने के सबसे निचले स्तर पर आने से US ट्रेजरी यील्ड गिर गई। 2-साल के नोट की यील्ड 4.137% पर आ गई, जो 17 जून के बाद सबसे कम है। बेंचमार्क US 10-साल के नोट पर यील्ड 4.398% पर पहुंच गई, जो 11 मई के बाद सबसे कम है। तीस-साल के ट्रेजरी यील्ड 4.849% पर आ गए, जो 8 अप्रैल के बाद सबसे कम है।

कच्चे तेल की कीमतें

US-ईरान के बीच शुरुआती शांति समझौते के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से फंसे हुए टैंकरों के निकलने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, जिससे सप्लाई की चिंता कम हुई। अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.54% गिरकर $73.34 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.38% गिरकर $70.07 प्रति बैरल पर आ गया।

डॉलर

US डॉलर मजबूत हुआ है और लगभग एक साल में अपनी सबसे तेज मासिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले करेंसी को मापता है, रातों-रात 101.8 के 13 महीने के पीक पर पहुंचने के बाद 101.6 के आसपास स्थिर है। यूरो लगभग $1.1353 था, और स्टर्लिंग सात महीने के सबसे निचले स्तर $1.314 पर था। 161.73 येन पर, डॉलर चार दशकों से कुछ ज़्यादा समय में अपने सबसे ऊंचे स्तर से बस थोड़ा ही दूर था।

 

बागी गुट ने TMC चेयरपर्सन पद से हटाया पर उससे पहले ही ममता बनर्जी चल चुकी थीं अपनी चाल! इनसाइड स्टोरी अब सामने आई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद अब ममता बनर्जी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को गंवाने के खतरे से जूझ रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी फाउंडर ममता बनर्जी के लिए स्थितियां और विकट तब हो गईं जब पार्टी के बागी खेमे ने उन्हें चेयरपर्सन के पद से ही हटा दिया। एक बारगी ऐसा लगा कि क्या अब टीएमसी ममता बनर्जी के हाथों से पूरी तरह फिसल गई। पर अब एक नई जानकारी सामने आ रही है।

ममता बनर्जी के खेमे ने एक बड़ा खुलासा किया है। कोलकाता में बागी गुट द्वारा एक बैठक में पार्टी संस्थापक और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटाए जाने के ठीक एक दिन बाद ममता बनर्जी की ओर से एक बड़ा जवाबी दांव चला गया है।

सामने आई इनसाइड स्टोरी के मुताबिक बागी गुट द्वारा उन्हें पद से हटाए जाने से पहले ही ममता बनर्जी अपनी चाल चल चुकी थीं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की एक नई पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति की सूची तैयार कर भारतीय चुनाव आयोग को सौंप दी थी। इसमें खुद ममता बनर्जी को ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का चेयरपर्सन बताया गया है।

बागी गुट के कदम से पहले ही ममता ने सुरक्षित किया दावा

न्यूज एजेंसी पीटीआई और दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक जब बागी नेता पार्टी के भीतर संगठनात्मक तख्तापलट की तैयारी कर रहे थे ठीक उसी समय ममता बनर्जी ने 1998 में अपने द्वारा स्थापित की गई पार्टी के तंत्र पर अपना नियंत्रण सुरक्षित करने के लिए कदम उठा दिया था। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने बताया कि शनिवार को ही पार्टी के नए नेतृत्व ढांचे और 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति को अंतिम रूप दे दिया गया था।

सोमवार दोपहर को ही इस सूची को चुनाव आयोग के पास जमा कर दिया गया था। यह सब तब हुआ जब कोलकाता में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट खेमे ने अपना विशेष सत्र भी आयोजित नहीं किया था।

ममता खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई को बताया कि जब बागी खेमा अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने की तैयारियां कर रहा था, तब ममता बनर्जी ने पहले ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दे दिया था और टीएमसी की चेयरपर्सन के रूप में यह सूची चुनाव आयोग को भेज दी थी।

ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग भेजी गई लिस्ट में कौन-कौन?

चुनाव आयोग को सौंपे गए आधिकारिक दस्तावेज पर खुद ममता बनर्जी के हस्ताक्षर हैं। इस नई सूची में निम्नलिखित नेताओं को प्रमुख पदाधिकारी बनाया गया है-

चेयरपर्सन: ममता बनर्जी

उपाध्यक्ष: सुब्रत बख्शी

राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा नेता: अभिषेक बनर्जी

संयुक्त सचिव और राज्यसभा नेता: डेरेक ओ’ब्रायन

संयुक्त सचिव: डोला सेन

कोषाध्यक्ष: सुभाशीष चक्रवर्ती

ममता के करीबी नेताओं ने बताया कि चुनाव आयोग को भेजी गई इस नई कमेटी का ढांचा पुराने संगठनात्मक प्रबंधों से बिल्कुल अलग है। इस लिस्ट से असंतुष्ट और बागी खेमे से जुड़े कई नेताओं की छुट्टी कर दी गई है। यहां तक कि इस महीने की शुरुआत में गठित राष्ट्रीय कार्यसमिति का हिस्सा रहे अरूप बिस्वास को भी इस संशोधित सूची से बाहर कर दिया गया है।

दूसरी तरफ बागी गुट ने अरूप रॉय को चुना नया चेयरपर्सन

दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को कोलकाता में हुए विशेष सत्र के बाद पार्टी में संगठनात्मक विभाजन को और गहरा कर दिया। बागी खेमे ने घोषणा की कि उन्होंने ममता बनर्जी को चेयरपर्सन पद से हटा दिया है और उनकी जगह वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन चुना है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की। बागी खेमे का दावा है कि यह विशेष सत्र तृणमूल कांग्रेस के संविधान के अनुसार ही बुलाया गया था और इस सत्र में लिए गए सभी फैसलों की जानकारी औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को दी जाएगी।

ममता खेमे का पलटवार- यह सिर्फ एक कॉमेडी शो और सर्कस है

ममता बनर्जी खेमे ने बागियों के इस पूरे सत्र और अभ्यास को पूरी तरह से अमान्य और खारिज कर दिया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि असंतुष्ट नेताओं के पास न तो ऐसा सत्र बुलाने का कोई अधिकार था और न ही पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बदलने का कोई जनादेश था।

कुणाल घोष ने स्पष्ट रूप से कहा कि, ‘यह एक कॉमेडी शो है। एक व्यक्ति जिसे टीएमसी से निष्कासित किया जा चुका है, वह विशेष सत्र आयोजित कर रहा है। यह मामला कोर्ट में है और हमें विश्वास है कि न्याय होगा। हम इस तरह के हास्यास्पद व्यवहार को कोई महत्व नहीं देते हैं। टीएमसी का मतलब ही ममता बनर्जी है, बाकी सब एक सर्कस है।’

कई बड़े नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी

पार्टी के भीतर बगावत पर कड़ा रुख अपनाते हुए ममता बनर्जी खेमे की अनुशासन समिति ने कई वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, अरूप रॉय, जावेद खान, रथिन घोष, बिप्लव मित्रा, स्नेहाशीष चक्रवर्ती और सबीना यास्मिन के नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

ममता बनर्जी के लिए आगे क्या? लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के आसार

कोलकाता के एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग किस संगठनात्मक ढांचे को वैध और असली टीएमसी के रूप में मान्यता देगा। दोनों गुटों द्वारा किए जा रहे परस्पर विरोधी दावों ने टीएमसी के भीतर संकट को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां दोनों धड़े अब पार्टी की विधायी और संगठनात्मक दोनों शाखाओं पर अपना दावा ठोक रहे हैं।

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ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि यह विवाद चुनाव आयोग के सामने लड़ा जाएगा और अंततः अदालतों तक भी पहुंच सकता है। इससे एक बात तो साफ है कि ममता बनर्जी द्वारा 1998 में स्थापित की गई इस पार्टी पर नियंत्रण के लिए एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का मंच तैयार हो गया है।

Sanjay Gandhi: पुण्यतिथि विशेष: संजय गांधी कौन थे, जानें राजनीति में उनका योगदान

A photograph of Sanjay Gandhi, who carved a distinct identity in Indian politics

Sanjay Gandhi remembrance day: संजय गांधी भारतीय राजनीति के एक प्रभावशाली और विवादास्पद व्यक्तित्व थे, जिनका नाम देश के आधुनिक राजनीतिक इतिहास में विशेष रूप से दर्ज है। वे भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के छोटे पुत्र थे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े हुए एक प्रमुख नेता के रूप में जाने जाते हैं। संजय गांधी का राजनीतिक जीवन अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन उनके निर्णयों और नीतियों का प्रभाव भारतीय राजनीति पर गहराई से पड़ा। उनका निधन 23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में हुआ था, जिसके बाद उनकी पुण्यतिथि हर वर्ष उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मनाई जाती है। 

आइए आज 23 जून को उनकी पुण्यतिथि के मौके पर जानते हैं कि वे कौन थे और भारतीय राजनीति में उनका क्या योगदान और प्रभाव रहा…

 

संजय गांधी कौन थे?

संजय गांधी का जन्म 14 दिसंबर 1946 को हुआ था। वे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाती/ नवासे और इंदिरा गांधी व फिरोज गांधी के छोटे पुत्र थे। उनके बड़े भाई राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने।

 

संजय गांधी की रुचि शुरुआत से ही राजनीति के बजाय गाड़ियों और विमानों में थी। उन्होंने इंग्लैंड के रोल्स-रॉयस (Rolls-Royce) कारखाने में अप्रेंटिसशिप भी की थी। बाद में भारत लौटकर उन्होंने 'मारुति लिमिटेड' कंपनी की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भारतीयों के लिए एक सस्ती और स्वदेशी 'जनता कार' बनाना था। हालांकि, बाद में वे अपनी मां इंदिरा गांधी के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सलाहकार बनकर उभरे।

 

राजनीति में उनका योगदान और प्रभाव

संजय गांधी ने कभी सरकार में कोई आधिकारिक मंत्री पद नहीं संभाला, वे सिर्फ यूथ कांग्रेस के नेता और बाद में सांसद रहे, लेकिन 1975 से 1980 के बीच कांग्रेस पार्टी और सरकार पर उनका प्रभाव अभूतपूर्व था।

 

1. युवा कांग्रेस का कायाकल्प

संजय गांधी को मुख्य रूप से यूथ कांग्रेस को एक आक्रामक और ताकतवर संगठन बनाने का श्रेय जाता है। उन्होंने देश भर के युवाओं को राजनीति से जोड़ा। उनके नेतृत्व में यूथ कांग्रेस मुख्य कांग्रेस पार्टी से भी ज्यादा सक्रिय और प्रभावशाली हो गई थी। कमलनाथ, जगदीश टाइटलर और गुलाम नबी आजाद जैसे नेता उन्हीं के दौर में आगे बढ़े।

 

2. 5-सूत्रीय कार्यक्रम

संजय गांधी ने देश के विकास और सामाजिक सुधार के लिए एक '5-सूत्रीय कार्यक्रम' शुरू किया था, जिसने जमीनी स्तर पर काफी बदलाव किए:

 

परिवार नियोजन: देश की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए जागरूकता अभियान।

 

वृक्षारोपण: पर्यावरण को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना।

 

दहेज प्रथा का विरोध: सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान।

 

वयस्क शिक्षा: अनपढ़ वयस्कों को साक्षर बनाना।

 

जातिवाद का खात्मा: समाज में समानता लाना।

 

3. 'मारुति' के जरिए ऑटोमोबाइल क्रांति की नींव

भले ही संजय गांधी के जीवनकाल में मारुति कार सड़क पर नहीं आ सकी, लेकिन भारत में मिडिल क्लास के लिए एक किफायती कार का जो सपना उन्होंने देखा था, वही आगे चलकर 'मारुति सुजुकी' के रूप में साकार हुआ। इसने भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की पूरी तस्वीर बदल दी।

 

आपातकाल और विवाद

संजय गांधी का राजनीतिक सफर जितने अच्छे कामों के लिए जाना जाता है, उतने ही बड़े विवादों से भी घिरा रहा। 1975 में जब देश में आपातकाल (Emergency) लागू हुआ, तब संजय गांधी सत्ता के केंद्र बिंदु बन गए।

 

जबरन नसबंदी: आबादी नियंत्रण के उनके एजेंडे को अधिकारियों ने बेहद आक्रामक तरीके से लागू किया, जिससे देश भर में खासकर ग्रामीण इलाकों में 'जबरन नसबंदी' के मामले सामने आए। इस वजह से जनता में उनके खिलाफ काफी नाराजगी पैदा हुई।

 

तुर्कमान गेट और सुंदरीकरण: दिल्ली के सुंदरीकरण अभियान के तहत झुग्गी-झोपड़ियों को हटाया गया, जिसके कारण तुर्कमान गेट इलाके में भारी विरोध और पुलिस कार्रवाई हुई थी।

 

इन विवादों के बावजूद, जब 1977 की करारी हार के बाद 1980 में कांग्रेस ने दोबारा सत्ता में वापसी की, तो उसमें संजय गांधी की रणनीति और यूथ कांग्रेस की मेहनत की बड़ी भूमिका थी। 1980 के चुनाव में वे खुद उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से जीतकर पहली बार लोकसभा सांसद बने थे।

 

विमान दुर्घटना में निधन: 

23 जून 1980 को नई दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास एक बेहद दुखद हादसा हुआ। संजय गांधी एक नए विमान Pitts S-2A में हवाई करतब (aerobatics) दिखा रहे थे, तभी नियंत्रण खोने की वजह से उनका विमान क्रैश हो गया। महज 33 वर्ष की उम्र में इस विमान दुर्घटना में उनका असामयिक निधन हो गया। इसतरह अचानक उनके जीवन के सफर का अंत हो गया।

 

संजय गांधी की मृत्यु ने भारतीय राजनीति की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। उनके जाने के बाद ही उनके बड़े भाई राजीव गांधी ने अनिच्छा के बावजूद राजनीति में प्रवेश किया और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने। संजय गांधी, शॉर्ट टर्म में भारतीय राजनीति पर इतना गहरा और अमित प्रभाव छोड़ने वाले नेता है, जो इतिहास में बहुत कम हुए हैं।

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ममता बनर्जी के हाथों से फिसली TMC की कमान, तृणमूल के बागी 58 विधायकों ने अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना

TMC Crisis Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी सबसे बड़े संकट से जूझ रही हैं। ममता बनर्जी का अब पार्टी पर कंट्रोल भी खत्म हो गया है। तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में विपक्ष के नेता रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुन लिया है। यह पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब TMC के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है।

बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। जबकि रीताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। इस नए ढांचे के जरिए बागी गुट ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद से प्रभावी रूप से हटा दिया है।

रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बैठक के बाद रीताब्रता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “तृणमूल कांग्रेस नेताओं और सदस्यों के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया।” बागी गुट के नेता ने इस प्रक्रिया को वैध ठहराने की कोशिश करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है।

विशेष सत्र का डिटेल्स निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। बागी गुट के सूत्रों के अनुसार, रीताब्रता बनर्जी ने न्यू टाउन के एक होटल में बैठक की, जिसमें कोलकाता नगर निगम के लगभग 60 विधायक और 70 पार्षद मौजूद थे। उन्होंने इन फैसलों का समर्थन किया।

संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू

उन्होंने कहा, “यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे।” बनर्जी ने कहा, “हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा।” उन्होंने बताया कि नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा। बनर्जी ने कहा, “हम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के एक पैनल का गठन करेंगे।”

440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर भी रोक

इस बीच, पुलिस ने बागी विधायकों की शिकायत पर पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर भी रोक लगा दी है। ये शिकायतें वित्तपोषण के स्रोत को लेकर की गई थीं। हालांकि, बनर्जी ने ममता के प्रति नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो बागी गुट की मुख्य सलाहकार बन सकती हैं। उन्होंने कहा, “यदि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहें, तो उनका स्वागत है।”

ममता गुट का बयान

ममता बनर्जी के खेमे ने हालांकि इस पूरी कवायद को सिरे से खारिज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि बागियों को पार्टी संविधान के तहत ऐसा कोई सत्र बुलाने या संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “तृणमूल और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पूरक हैं। बागियों के पास ऐसा करने की कोई शक्ति नहीं है।”

ममता के वफादार नेताओं ने संकेत दिया है कि यह मामला अब पार्टी की वैधता को लेकर कानूनी लड़ाई में बदल सकता है। एक वफादार नेता ने बताया कि पार्टी की अनुशासन समिति जल्द ही बागी गतिविधियों में शामिल होने के लिए अरूप रॉय, फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास सहित अन्य नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी।

यह विशेष सत्र पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में उत्पन्न अभूतपूर्व संकट के बीच आयोजित किया गया। कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने विपक्ष के नेता पद के लिए रीताब्रता बनर्जी के दावे का समर्थन किया था। साथ ही पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। बागी गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और बढ़ गई है।

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हाल में पार्टी को संसद में एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया। साथ ही BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने की घोषणा की है।

कांग्रेस ने चिंटू चौकसे को इंदौर नगर निगम नेता प्रतिपक्ष पद हटाया, सोनिला मिमरोट को मिली जिम्मेदारी

इंदौर नगर निगम चुनाव में एक वर्ष से कुछ ज्यादा वक्त ही बचा है। उससे पूर्व कांग्रेस बड़ा बदलाव किया है। नेता प्रतिपक्ष रहे चिंटू चौकसे को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटा दिया गया है। वार्ड 45 की पार्षद सोनिला मिमरोट को नगर निगम इंदौर में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहली बार पार्षद बनी मिमरोट को नगर निगम इंदौर में कांग्रेस पार्षद दल का नेता नियुक्त किया गया है। इस बदलाव के पीछे एक व्यक्ति एक पद के नियम को बदलाव का आधार बताया जा रहा है।

चिंटू चौकसे अब तक नेता प्रतिपक्ष के साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर भी थे। अब वे शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहेंगे। 2022 में नगर निगम के चुनाव के बाद चिंटू चौकसे को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया था। 10 महीने पूर्व चौकसे को प्रदेश कांग्रेस ने शहर कांग्रेस की जिम्मेदारी भी दे दी। इसके बाद कांग्रेस में यह कहा जाने लगा था कि एक ही व्यक्ति को तमाम पद दिए जा रहे हैं। Edited by : Sudhir Sharma

 

 

Mallikarjun Kharge: “चुप रहो, बैठ जाओ!” कांग्रेस कार्यक्रम में ‘डीके-डीके’ नारे लगाने पर भड़के खड़गे, कार्यकर्ताओं को लगाई फटकार

Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हंगामा करने वाले कार्यकर्ताओं को जमकर फटकार लगाई। दरअसल, कार्यक्रम के बीच कुछ कार्यकर्ता कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में “डीके-डीके” के नारे लगाने लगे, जिससे खड़गे नाराज हो गए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को डांटते हुए कहा कि यह कांग्रेस का कार्यक्रम है, किसी एक नेता का नहीं। उन्होंने गुस्से में कहा, “चुप रहो! बैठ जाओ। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा देश तुम्हारे हाथ में आ गया हो। बेकार लोग!”

खड़गे ने चिल्लाते हुए कहा, “यह कांग्रेस पार्टी की बैठक है। यह किसी एक व्यक्ति के लिए आयोजित कार्यक्रम नहीं है। हम सभी लोग यहां पार्टी को मजबूत और एकजुट करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। अगर एक व्यक्ति एक नाम का नारा लगाता है और दूसरा किसी और नाम का, तो क्या बाकी लोग यहां सिर्फ कचरा साफ करने आए हैं?”

खड़गे ने कार्यकर्ताओं को दी चेतावनी

राजनीति में अपने 58 साल के लंबे करियर का जिक्र करते हुए, उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी ही उनकी पहचान का आधार है और उन्हें चेतावनी दी कि उनके अनुशासनहीन व्यवहार पर कार्रवाई जरूर होगी। उन्होंने कहा, “याद रखिए… पार्टी के लिए अनुशासन हमेशा जरूरी है। जो भी यहां शोर मचा रहा है, उसका फुटेज होगा। फुटेज देखने के बाद मैं अनुशासनात्मक कार्रवाई करूंगा।”

वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा कार्यकर्ताओं को फटकार लगाने पर बीजेपी नेता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इस घटना से कांग्रेस के भीतर सत्ता के लिए चल रही खींचतान उजागर हो गई है। वल्लभ ने आरोप लगाया कि खड़गे खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे।

इसके अलावा, बीजेपी नेता ने कांग्रेस के नेतृत्व पर भी तंज कसते हुए कहा कि पार्टी तीन “होल्डिंग कंपनियों” द्वारा नियंत्रित है – सोनिया गांधी के लिए “कांग्रेस M”, प्रियंका गांधी के लिए “कांग्रेस P” और राहुल गांधी के लिए “कांग्रेस R”, जबकि खड़गे वाली “कांग्रेस K” केवल उनकी सहायक कंपनी के रूप में काम करती है।

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अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटाया:चीन के खिलाफ भारत को अहमियत देने के लिए ट्रम्प ने ही नाम बदला था

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि US इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से US पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया गया है। अब इस कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटा दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने 2018 में कमांड के नाम में बदलाव किया था। उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंद महासागर (इंडियन ओशियन) क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है और यह क्षेत्र प्रशांत महासागर (पैसिफिक ओशियन) की सुरक्षा व्यवस्था से पहले की तुलना में ज्यादा जुड़ गया है। इसलिए कमांड के नाम में इंडो (हिंद महासागर) को भी शामिल किया गया था। यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है? अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।
अब नाम बदलने पर चर्चा क्यों है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता। अपने पहले कार्यकाल में ट्रम्प चीन को सबसे बड़ा खतरा मानते थे। तब वे दिखाना चाहते थे कि भारत उसकी एशिया रणनीति का अहम हिस्सा है और चीन को काउंटर करने में भारत की अहम भूमिका है। उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की थी कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक ही रणनीतिक क्षेत्र हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब शायद ट्रम्प की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। थरूर ने क्वाड के भविष्य पर जताई चिंता कमांड का नाम फिर से बदले जाने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी आदेश की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील है? ————————- ये खबर भी पढ़ें… दुनिया के 16 नेताओं से छोटे हैं ट्रम्प:91% नेताओं से ज्यादा उम्रदराज, उनसे 10 साल ज्यादा सऊदी किंग की उम्र डोनाल्ड ट्रम्प इस हफ्ते 14 जून को 80 साल के हो गए। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 साल की उम्र देखने वाले वे अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नवंबर 2022 में अपना 80वां जन्मदिन मनाया था। ट्रम्प दुनिया के सबसे उम्रदराज नेताओं में जरूर शामिल हो गए हैं, लेकिन वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शासक नहीं हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के नेताओं में 16 नेता ऐसे हैं जो ट्रम्प से भी ज्यादा उम्र के हैं। पूरी खबर पढ़ें