Koel Mallick Resign: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, अब TMC सांसद एवं बंगाली अभिनेत्री कोएल मलिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

Koel Mallick Resign: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजह को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कोएल मलिक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की संख्या घटकर 9 रह गई है। इससे पहले भी पार्टी के कुछ सांसद विभिन्न कारणों से सदन की सदस्यता छोड़ चुके हैं।

कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में उनके इस फैसले को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि पार्टी उनकी जगह किसे राज्यसभा भेजेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यसभा सचिवालय इस्तीफा स्वीकार करने के बाद आगे की प्रक्रिया कब पूरी करता है। कोएल मलिक का असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है। वह कई बंगाली फिल्मों में काम कर चुकी हैं। खास बात यह है कि वह इसी साल अप्रैल में सांसद बनी थीं।

मदन मित्रा ने भी छो़ड़ा साथ

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक मदन मित्रा बुधवार को नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए। विधायक ने दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बीते कुछ महीने से अभूतपूर्व बगावत का सामना कर रहा है। उन्होंने घोषणा की है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में अब कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। हालांकि, वह तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे। पिछले कुछ महीनों से ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व को लगातार चुनौती दी है।

मित्रा ने कहा कि गुट बदलने से पहले उन्होंने अपने फैसले के बारे में ममता बनर्जी को सूचित कर दिया था। मित्रा ने यह भी घोषणा की है कि वह 21 जुलाई को ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा आयोजित किए जा रहे शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। बागी नेताओं ने एक समानांतर संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की है। पार्टी मुख्यालय पर अपना नियंत्रण होने का दावा किया है। जबकि ममता बनर्जी गुट ने इन दावों को खारिज कर दिया है।

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मित्रा के इस कदम को लेकर अटकलें मंगलवार रात से ही तेज हो गई थीं, जब उन्होंने बागी विधायक संदीपन साहा के आवास का दौरा किया था। मित्रा ने इस बात को खारिज किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के कारण उन्होंने गुट बदला। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा और तृणमूल कांग्रेस के पतन के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में बनाई मजबूत पहचान : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that over past nine years Uttar Pradesh has established strong identity among country's leading economies

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का राज स्थापित होने से निवेश और विकास को मिली नई रफ्तार 

– सपा सरकार पर सीएम का तीखा हमला, बोले- सरकारी खजाने की हुई लूट और विकास रहा अधूरा

– यूपी में तीसरी बार बनेगी एनडीए की सरकार, भाजपा के नेतृत्व में लगेगी हैट्रिक

– उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई, सवा तीन करोड़ लोगों को मिला रोजगार

– नौ सालों में दंगा, कर्फ्यू और माफिया संस्कृति से मुक्त हुआ उत्तर प्रदेश

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नौ वर्षों के कार्यों, कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, कृषि, निवेश और बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाने में सफल रही है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश पहचान, सुरक्षा और विकास के संकट से जूझ रहा था, लेकिन पिछले नौ वर्षों में राज्य ने देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कहा कि यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट होगी। एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी। मुख्यमंत्री बुधवार को लखनऊ में 'आज तक' न्यूज चैनल के विशेष कॉन्क्लेव 'पंचायत आज तक उत्तर प्रदेश' को संबोधित कर रहे थे। 
 

सीएम ने कहा कि 9 वर्षों की कार्यपद्धति और रिपोर्ट कार्ड भी जनता के सामने है। जनता जनार्दन फैसला करने को तैयार है। 2003 से 2017 तक सपा और अन्य सरकारों की कार्यपद्धतियां भी सबके सामने है। हम लोगों ने पीएम मोदी जी के विजनरी नेतृत्व में विकसित भारत को आगे बढ़ाने का काम किया।

डबल इंजन सरकार का लाभ हमने लिया है। इसमें यूपी सफल हुआ है। विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को केवल डबल इंजन की भाजपा की सरकार ही पूरा कर सकती है। गत वर्ष एक रिकॉर्ड टूटा था, इस बार एक नया टूटने वाला है। यूपी में पहली बार कोई सरकार तीसरी बार लगातार रिपीट करेगी। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार इस बार यूपी में हैट्रिक लगाएगी, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

 

सपा सरकार में लूटा गया सरकारी खजाना

सीएम ने कहा कि सपा का विकास का मॉडल होता तो यूपी कबका डूब गया होता। सैफई खानदान यूपी को तबाह कर रहा था, उसका नमूना जेपीएनआईसी बिल्डिंग है। सपा ने जेपीएनआईसी को बनाने के लिए 200 करोड़ का डीपीआर बनाया था, लेकिन 800 करोड़ रुपए खर्च हो जाने के बाद भी अधूरा है। आदि गंगा की मान्यता वाली गोमती के रिवर फ्रंट के नाम पर 166 करोड़ रुपए का डीपीआर किया था लेकिन 1400 करोड़ रुपए खर्च हो गए। साथ ही कार्य भी अधूरा है। सपा सरकार में केवल सरकारी खजाना लूटा जा रहा था।

 

सीएम ने कहा कि 2016 दिसंबर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया। इसके बाद 15,200 करोड़ की लागत तय की गई। सरकार बदलने के बाद मई 2017 में उसकी समीक्षा की तो जमीन ही न होने का पता चला। इसमें बड़ी बेइमानी का पता चला तो टेंडर को रद्द किया गया। दो वर्ष जमीन खरीदने में लगे। 2018 में हमारे पास 90 प्रतिशत जमीन आ गई। इसके बाद 15,200 करोड़ का टेंडर मात्र 11,800 करोड़ रुपए का हो गया। इसी बजट में सपा सरकार से बेहतर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया गया। 

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सीएम ने कहा कि यूपी की एक्साइस पॉलिसी में भी डैकती डाली जाती थी। पहले मात्र 12 हजार करोड़ रुपए की एक्साइस ड्यूटी आती थी। हमारी सरकार के लिए कठिन था, लेकिन पॉलिसी की बदल दी। आज पांच गुना ज्यादा 63,000 करोड़ रुपए एक्साइस ड्यूटी के रूप में सरकार को मिल रहे हैं।

 

विपक्ष ने राम मंदिर के विरोध में अधिवक्ता खड़े किए

सीएम ने कहा कि 2017 से पहले जब यूपी में सुरक्षा नहीं थी तो त्योहार के पहले कर्फ्यू लग जाता था, उपद्रव शुरू हो जाता है। आज हर समुदाय का पर्व व त्योहार शांतिपूर्ण ढ़ंग से पूरा हो रहा है। जिन लोगों ने अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई, वह आस्था की बात कर रहे हैं। साथ ही पवित्र हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई। देश के उच्चतम न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर रहे थे कि भगवान श्रीराम व भगवान श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। राम मंदिर के विरोध में अपने अधिवक्ता खड़े किए। जिन लोगों ने देश के खजाने को लूटा और पहचान का संकट खड़ा किया, आज उनको अयोध्या की चोरी दिख रही है लेकिन अपनी डकैती नहीं दिखती। 

 

अयोध्या चढ़ावा मामले में की गई कार्रवाई, हिंदू आस्था पर प्रहार करना न्याय संगत नहीं

सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या की घटना निश्चित ही सभी रामभक्तों को आहत करती है। वह एक इंडिपेंडेंट ट्रस्ट है, जिसमें सरकार को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। एसआईटी की रिपोर्ट आते ही ट्रस्ट ने कार्रवाई शुरू की, जो लोग चोरी करते हुए पकड़े गए उनकी व सहयोगियों की गिरफ्तारी हुई। नैतिक आधार पर भी दो इस्तीफे हुए, लेकिन उसके नाम पर अयोध्या को, श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करना अथवा हिंदू आस्था पर प्रहार करना, ये न्याय संगत नहीं है।

यूपी में जब यह आस्था के केंद्र देश के लिए मॉडल बन रहे और यूपी पहचान में आगे बढ़ रहा हैं तो सपा को पीड़ा हो सकती है। आस्था के केंद्रों से अर्थव्यवस्था को गति मिली है। इससे फूल बेचने वाले, रिक्शा चलाने वाले, होटल व टैक्सी संचालकों की भी आर्थिक स्थिति सुधरी। प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान एक नाविक ने 30 करोड़ रुपए की कमाई की थी, लेकिन ये उनको अच्छा नहीं लगाता है।

 

दोनों युवराजों को चांदी के चम्मच से खाने की आदत

सीएम ने कहा कि समृद्धि केवल दो खानदानों ने अपने नाम पर पेटेंट करा लिया है। ये एक गरीब की पीड़ा को नहीं समझ सकते। दोनों राजकुमारों ने जहां जन्म लिया है, वहां चांदी के चम्मच से खाने की आदत रही है। देर से सोकर उठने की आदत रही है। गर्मी, बरसात की पीड़ा कैसी होती है, इन्हें नहीं पता है। दोनों फीफा कप का आनंद लेने ऑस्ट्रेलिया और टूरिस्ट वीजा पर यूएस की यात्रा पर गए हैं। ये किसके पैसे से विदेश की यात्रा कर रहे हैं। यहां समाज को बांटने का काम करते है, लेकिन जनता सारी करतूतों को जानती है।

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मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम नहीं आई

सीएम ने कहा कि मुझे एक लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने से पहले एक सांसद के रूप में उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्र से देश की संसद में प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ था। विभिन्न मुद्दों के लिए जूझता था और संसद में उठाने का प्रयास करता था। कभी-कभी निराशा भी होती थी। लगता था कि बीमारी व भूख से मरना, माफिया के सामने लोगों का नतमस्तक होना, बिजली व सामान्य जनसुविधाओं के लिए लोगों को तरसना, युवाओं के सामने पहचान का संकट, किसानों की आत्महत्या उत्तर प्रदेश की नियति बन गई है। पीड़ा के साथ लगता था कि क्या इन समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता है।

जब पार्टी ने मुझे शासन-सत्ता का संचालन करने का अवसर दिया और अब उसके सकारात्मक परिणाम को देखता हूं। ऐसा नहीं की मेरे साथ दिल्ली या गोरखपुर से कोई अलग से टीम आई हो। मेरे साथ कोई भी व्यक्ति नहीं आया। गोरखपुर से पांच बार से सांसद रहा, वहां से भी एक व्यक्ति नहीं आया। जो टीम लखनऊ में मुझे मिली, उन्हीं के साथ काम करने का प्रयास किया। उसके परिणाम सबके सामने है। 

 

सीएम ने कहा कि यूपी को इन 9 वर्षों में पहचान के संकट से उबारा है। यूपी की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। महिला कर्मचारियों की उपस्थिति तीन गुना बढ़ी है। बीमारू राज्य की श्रेणी में रहने वाला उत्तर प्रदेश 9 वर्षों में देश के टॉप तीन अर्थव्य़वस्था के रूप में स्थापित हुआ है। ऐसे कौन से कारण थे, जो यूपी में नहीं हो सकते थे।

 

2014 के पहले भी थी एक डबल इंजन सरकार 

सीएम ने कहा कि 2014 के पहले भी एक प्रकार की डबल इंजन की सरकार थी। केंद्र में कांग्रेस व यूपीए की सरकार थी और यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। दोनों मिलकर काम कर रहे थे लेकिन जनता में विश्वास नहीं था। इन दोनों की स्थिति एक तरफ कुआं और खाई जैसी थी। आज ये लोग जो उपदेश देते हैं, वह 2014 से पहले अंगीकार किया होता तो हाशिए पर नहीं गए होते।

 

यूपी का नौजवान अपनी पहचान छिपाता था, उसे नौकरी नहीं मिलती थी। उसने आवेदन किया तो योग्यता के बाद भी वो चयनित नहीं होता था। क्योंकि नौकरी पर कुछ चंद जनपदों और लोगों का कब्जा था। 2017 के पहले सुरक्षा की स्थिति बदलहाल थी, बेटी और व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। सत्ता के समानांतर माफियाओं की सरकारें चलती थीं। मीडिया, आम आदमी, व्यापारी, बेटी, उद्यमी कोई भी सुरक्षित नहीं था। व्यापारी और आम नागरिक भी घर से निकलता था तो ईश्वर से प्रार्थना करता था कि मुझे शाम को वापस परिवार का मुंह देखने का अवसर मिले।

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माफियाओं के साथ आज भी उन लोगों की सहानुभूति

सीएम ने कहा कि उद्यमी निवेश नहीं करना चाहता था। न सरकार की नीति थी और न नीयत थी। अराजकता चरम पर थी, माफिया के सामने सरकारें नाक रगड़ती हुई दिखाई देती थी। आज भी उनके भाषण सुनते होंगे, वे बोलते हैं कि सत्ता में आ गए तो जांच कराएंगे कि माफिया मारे क्यों जा रहे हैं। आज भी उन लोगों की सहानुभूति उन माफिया और उनके गुर्गों के प्रति है, जो जेल में है या जहन्नुम की यात्रा पर जा चुके हैं। उनकी सहानुभूति आज भी यूपी के नागरिकों के प्रति नहीं दिखती है।

 

23 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच ले जाएं

सीएम ने कहा कि 2003 से 2026 के 23 वर्षों के रिपोर्ट कार्ड को लेकर जनता के बीच लेकर जाइए। पहले पांच साल मुलायम सिंह के, अगले पांच साल मायावती के व अगले पांच वर्ष अखिलेश के और पिछले 9 वर्षों के हमारे कार्यकाल के, जनता से उनकी संतुष्टि के बारे में पूछिए। आपको स्वर्गीय राजीव गांधी का वह वाक्य याद आज जाएगा जिसमें निराश होकर कहा था कि हम 100 रुपए भेजते है, लेकिन नीचे 15 रुपए ही पहुंचता है। आखिर 85 रुपए कौन खा जा रहा था।

ये किसी छात्र-छात्रा की छात्रवृत्ति, युवा की नौकरी, बुर्जुग-निराश्रित महिला की पेंशन, गरीब का अनाज, बहन-बेटी के लिए बनने वाले शौचालय का पैसा था। जिस 85 प्रतिशत पैसे पर पिछली सरकारें डकैती डालने का काम करती थीं। आज डीबीटी के माध्यम से 100 रुपए दिल्ली या लखनऊ से भेजने पर सीधे लाभार्थी के खाते में जाता है। सभी तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंच रहा है। सीएम योगी ने कहा कि संकल्प और इच्छाशक्ति के दम पर देश की सबसे बड़ी आबादी का राज्य दंगा मुक्त, उपद्रव मुक्त, कर्फ्यू मुक्त और अपनी परांपरागत पहचान से युक्त हो सकता है, यह यूपी ने पिछले 9 वर्षों में करके दिखाया है।

 

अब इंसेफेलाइटिस से मौतें नहीं होतीं

सीएम ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर वर्ष इसी सीजन में इंसेफेलाइटिस से मौतें होती थीं। हर परिवार सशंकित रहता था कि पता नहीं कौन सा बच्चा इसकी चपेट में आ जाए। हर वर्ष 1200 से 1500 मौतें होती थीं। आज इंसेफेलाइटिस से होनी वाली मौतें शून्य पर पहुंच चुकी हैं। भूख से मौतें अलग से होते थीं, आज उन्हें 100 प्रतिशत सैचुरेट कर चुके हैं। उन्हें जमीन के पट्टे मिले, उनका आवास बना, आयुष्मान कार्ड, रसोई गैस के सिलेंडर और रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

 

परंपरागत उद्यम फिर जीवित हुए

सीएम ने कहा कि परंपरागत उद्यम फिर से जीवित हो चुके हैं, जिन्हों कभी यूपी को पहचान दिलाई थी। आजादी के तत्काल बाद 1950 में देश की अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 14 प्रतिशत था, जो 2017 से पहले घटकर मात्र 7 प्रतिशत के आस-पास रह गया था। यूपी अवनति की ओर था। तब अन्नदाता को पानी, बीज, बिजली नहीं मिलती थी। किसान खेत में जाने से डरता था। वहीं पैदावार फसल का दाम किसानों को नहीं मिलता था, क्योंकि इसका फायदा बिचौलिए उठाते थे। कृषि यूपी का आधार है लेकिन सरकार के स्तर पर कोई प्रोत्साहन नहीं था।

मैन्युफैक्चरिंग पावर जब परंपरागत उद्यम के साथ जुड़ती है, तब अर्थव्यवस्था को तेज करती है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए हमारे पास एमएसएमई का बेहतरीन नेटर्वक था लेकिन पिछली सरकारों के इंस्पेक्टर राज ने उसे तबाह कर दिया था। लोग विभागीय उत्पीड़न के शिकार होते थे। उस समय उद्यमी, कारीगर बन गया और किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया था। ऐसे में यूपी की अर्थव्यवस्था को डूबना ही था।

 

कृषि विकास दर को 18 प्रतिशत तक पहुंचाया

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। अमेरिका-ईरान व रूस-यूक्रेन का युद्ध चल रहा है, उर्वरक की कमी स्वाभाविक रूप से हो जानी चाहिए थी, लेकिन यूपी में किसान को फर्टिलाइजर, बीज, कीटनाशक समय पर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के अंदर 10 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने 24 लाख हेक्टेयर जमीन को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में अप्रूव हुई सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को यूपी में डबल इंजन की सरकार ने पूरा कराया। उन्होंने बुंदेलखंड की अर्जुन सहायक परियोजना का भी जिक्र किया। बताया कि पहले महोबा के किसानों को प्रति बीघा 5 हजार रुपए मिलता था, आज उन्हीं अन्नदाता किसानों को 50 हजार रुपए मिल रहा है। उन्होंने बाणसागर परियोजना की सफलता की भी चर्चा की।

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बिचौलियों को हटाकर किसानों को दिलाया फायदा

सीएम ने कहा कि यूपी के किसानों को 10 घंटे बिजली खेती के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही बिजली उनके लिए मुफ्त है। प्रदेश में 16 लाख प्राइवेट ट्यूबवेल हैं, सबकी बिजली मुफ्त कर दी गई है। 2017 में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य का भुगतान बाकी था। गन्ना किसानों को अब तक 3.23 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। 300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना का दाम किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएम ने कहा कि आज 122 चीनी मिलों का संचालन किया जा रहा है। 105 चीनी मिलें ऐसी हैं, जहां से 4 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को हो रहा है।

शेष में प्रयास किया जा रहा है कि वह 15 दिन में गन्ना मूल्य का भुगतान कर दें। आज किसान की किसी भी उपज को बिचौलियों की जगह उन्हीं से सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है। अगर बाजार में अच्छा दाम है तो किसान स्वतंत्र रूप से वहां बेच सकता है। अगर बाजार में उचित दाम नहीं मिल रहा है तो एमएसपी में लागत के डेढ़ गुना दाम पर सरकार किसान से खरीदेगी और फिर उसे अपने स्तर पर बाजार तक पहुंचाने का काम करेगी।

आज किसान के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना समेत हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। खेती में जो विकास दर बढ़ी है, उस विकास दर के पीछे डबल इंजन सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का परिणाम देखने को मिल रहा है।

 

सीएम ने कहा कि पहले एमएसएमई दम तोड़ चुका था, कारीगर पलायन कर चुके थे, अब वह फिर से प्रगति कर रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा 96 लाख एमएसएमई यूनिट यूपी संचालित कर रहा है। सरकार हर यूनिट को 5 लाख रुपए की सामाजिक बीमा का कवर भी उपलब्ध करा रही है। सवा तीन करोड़ रुपए इसके साथ रोजगार से जुड़ चुके हैं। 

 

सुशासन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए कानून का राज जरूरी

सीएम ने कहा कि यूपी जैसे राज्य में सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कानून का राज स्थापित कर दीजिए। सुरक्षा का बेहतरीन माहौल दे दीजिए। अपने आप सुशासन के लक्ष्य प्राप्त होते दिखाई देंगे। यूपी सरकार ने प्रभावी ढ़ग से इसे बढ़ाने का काम किया। आज यह सुनना अच्छा लगता है, जब कहा जाता है कि यूपी के मॉडल को सुरक्षा के मायने में अन्य राज्यों ने स्वीकार किया है। 

 

हर योजना में शीर्ष पर यूपी

सीएम ने कहा कि पहले दिल्ली में सरकारी योजनाओं को लागू करने में टॉप राज्यों की सूची देखता था। यूपी का कहीं पता नहीं होता था, वह बाटम 3 में दिखता था। तब सरकारों की मानसिकता भी ऐसी ही थी। पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी जी के नेतृत्व में 100 से ज्यादा जनकल्याण की स्कीमें निकली हैं। आज हर एक स्कीम में यूपी का नाम टॉप में आता है। यूपी में योजना की सफलता का मतलब है कि वह देश के अंदर सफल हो गई। साथ ही दुनिया के लिए मॉडल बन गई। सीएम ने कहा कि आज गरीब को मकान, शौचालय मिला है। हर गरीब को सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं, जिसके लिए दशकों से लालायित था। अब कोई शिकायत लेकर नहीं आता। 

 

ई-पॉस मशीन से आई पारदर्शिता

सीएम ने कहा कि पूर्वी जनपदों में 2017 से पहले भूख से मौत होती थी। इस सरकार ने ई-पॉश मशीनें लगाईं। आज के दिन 16 करोड़ लोगों को यूपी में मुफ्त राशन दिया जा रहा है। ई-पॉस मशीन से 80 हजार उचित मूल्य की दुकानों को जोड़ा गया है। किसी गांव में उचित मूल्य की दुकान में थोड़ी भी घटतौली होने पर अलर्ट आ जाता है, जिसके बाद टीम फौरन छापा मारकर कार्रवाई करती है।

 

यूपी में बिजली खपत 35 हजार मेगावाट तक पहुंची

सीएम ने कहा कि यूपी के सभी 75 जनपदों में सामान्य रूप से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। 2017 के पहले पीक आवर में कुल बिजली आपूर्ति 15-16 हजार मेगावाट ही होती थी, आज आपूर्ति 33 से 35 हजार मेगावाट हो रही है। ये यूपी की नई स्थिति है।

 

यूपी में 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव

सीएम ने कहा कि यूपी ने 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी बनाई गईं हैं, जिससे निवेश बढ़ा है। 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 15 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और 7.50 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग की तैयारी चल रही है। ये नया यूपी है, जिसके तहत 65 लाख युवाओं को नौकरी दी गई है।

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सीएम ने कहा कि देश के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अच्छी सड़कें यूपी में मिलेंगी। देश के एक्सप्रेसवे में 60 प्रतिशत यूपी का योगदान है। सबसे ज्यादा एयरपोर्ट यूपी में हैं। 2017 से पहले यूपी में केवल दो एयरपोर्ट संचालित थे, आज 17 हैं। इनमें पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। जिसमें पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम भी शामिल है। इसके पास 14 हजार एकड़ जमीन है, देश में किसी भी एयरपोर्ट के पास इतनी जमीन नहीं है। नए एयरक्राफ्ट आने पर सभी एयरपोर्ट से हवाई सुविधा और बढ़ेगी। प्रदेश सरकार पांच नए एयरपोर्ट पर भी काम कर रही है। 

 

सीएम योगी ने कहा कि पहले कोई सोचता भी नहीं था कि आजमगढ़ में एयरपोर्ट होगा, लेकिन यह भी संभव हुआ। श्रावस्ती, अलीगढ़, मुरादाबाद, सोनभद्र में कोई एयरपोर्ट की कल्पना नहीं करता था, लेकिन वहां भी सपना पूरा किया गया। दिल्ली से मेरठ के बीच 12 लेन का एक्सप्रेसवे भी बन चुका है और रैपिड रेल भी आ चुकी है। देश की पहली इनलैंड वाटरवे वाराणसी-हल्दिया के बीच संचालित हो रही है। साथ ही यूपी के अंदर सबसे ज्यादा सात सिटी में मेट्रो सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।

‘आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए’— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

shashi tharoor appeals to sonam wangchuk

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने 18 दिन से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्होंने देश की अंतरात्मा जगा दी। ALSO READ: सोनम वांगचुक के अनशन पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस; कल तक मांगा जवाब

थरूर ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के नाम एक खुला पत्र लिखते हुए कहा कि मैं आज आपको एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में संबोधित कर रहा हूं जो भारतीय युवाओं की वर्तमान पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद आहत है।

 

मैं आज आपको एक राजनेता या सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में संबोधित कर रहा हूं जो भारतीय युवाओं की वर्तमान पीढ़ी के साथ हो रहे अन्याय से बेहद आहत है।

 

उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए एक व्यक्तिगत मामला है। मेरा जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। मेरे पिता समाचार पत्र में एक वेतनभोगी कर्मचारी थे और मेरी मां एक गृहणी थीं, जिन्हें एक ही आय में तीन बच्चों को पढ़ाना-लिखाना था। हमारे जैसे परिवार के लिए, 'योग्यता' (मेरिट) कोई नारा नहीं थी। स्कॉलरशिप, निष्पक्ष परीक्षाएं, ईमानदारी से आने वाले परिणाम — यही एकमात्र जरिया थे जिससे एक वेतन पर तीन बच्चों के सपनों को पूरा किया जा सकता था।

थरूर ने कहा कि मैंने मुंबई और कोलकाता में स्कूल की पढ़ाई की, यहाँ दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई की, यूनिवर्सिटी टॉप की और आईआईएम (IIM) में दाखिला पाया — लेकिन इसके बजाय मैंने स्कॉलरशिप पर अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने का फैसला किया। मुझे कुछ भी विरासत में नहीं मिला था; सब कुछ कड़ी मेहनत और हां, परीक्षाओं के बल पर कमाया गया था। इसलिए मैं जानता हूं कि एक निष्पक्ष और योग्यता-आधारित व्यवस्था ही निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के युवाओं के लिए आगे बढ़ने की एकमात्र सीढ़ी है। ALSO READ: 18 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत गंभीर, 8.5 किलो वजन घटा; अनशन खत्म कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा मामला

 

पत्र में उन्होंने कहा कि जब वह सीढ़ी टूट जाती है (पेपर लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं, भरोसा टूटता है) तो अमीर और ताकतवर लोगों के बच्चों को नुकसान नहीं होता। उनके पास दूसरी सीढ़ियाँ होती हैं। धोखा आपके सपनों और आपके परिवारों के बलिदानों के साथ (और दुखद रूप से, कुछ घरों में युवाओं की कीमती जानों के साथ) होता है।

 

कांग्रेस सांसद ने कहा कि जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए युवाओं और पूरे भारत में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने वाले साथियों: यह देश आपकी आवाज सुन रहा है। आपका गुस्सा कोई अनुशासनहीनता नहीं है — यह उस पीढ़ी की पीड़ा है जिसने सब कुछ सही किया और फिर भी जिसे धोखा मिला। आप अकेले नहीं हैं।

 

और चुपचाप देख रहे करोड़ों युवा भारतीयों से मैं कहना चाहता हूं: आपकी पीढ़ी कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसे सिर्फ 'मैनेज' किया जाए। आप भारत के भविष्य का जवाब हैं। उम्मीद मत खोइए। यह सीढ़ी फिर से बनाई जाएगी — आपके द्वारा, और आपके साथ खड़े हर भारतीय द्वारा।

 

उन्होंने सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आपने देश की अंतरात्मा को जगा दिया है; अनशन का मकसद भी यही होता है। आने वाले लंबे रास्ते के लिए भारत को आपकी आवाज की जरूरत है।

 

कांग्रेस नेता ने कहा कि सोमवार से संसद का सत्र फिर से शुरू हो रहा है, ऐसे में हमारे पास हमारे लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर छात्रों के मुद्दों को उठाने का अवसर होगा। इस समस्या का समाधान वहीं होना चाहिए, न कि आमरण अनशन के जरिए। कृपया मेरी प्रार्थना स्वीकार करें।

 

थरूर ने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि आप आगे बढ़ें और उस संवाद की शुरुआत करें जो हमारा लोकतंत्र अपने युवा नागरिकों का कर्जदार है। यह कमजोरी नहीं है; यह एक कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता है।

भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी; संसद में बिल पेश, 5 देश निशाने पर

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में एक बिल पेश किया गया है, जिसमें भारत, चीन समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। इनके अलावा हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान शामिल हैं। बिल के मुताबिक, इन देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकेगा। साथ ही रूस की ऊर्जा, वित्तीय और रक्षा व्यवस्था पर भी नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। इससे पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी कमाई बढ़ा रहा है। इस कदम का मकसद रूस के तेल कारोबार पर आर्थिक दबाव बनाना और उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर करना है। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, ओलिगार्क्स, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। रूस पर सख्ती वाले बिल को दोनों दलों का समर्थन सीनेट में पेश रूस-विरोधी टैरिफ बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसे अमेरिकी राजनीति में ‘बाइपार्टिसन बिल’ कहा जाता है, यानी ऐसा प्रस्ताव जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हों। आमतौर पर अमेरिका में कई बड़े विधेयक राजनीतिक मतभेदों की वजह से अटक जाते हैं। लेकिन जब दोनों दल किसी बिल के साथ खड़े होते हैं, तो उसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, बिल को कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा। बिल को दिवंगत सांसद लिंडसे ग्राहम ने पेश किया था इस बिल को सबसे पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने अप्रैल 2025 में पेश किया था। अब तक 26 सीनेटर इस बिल को अपना समर्थन दे चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद है। 11 जुलाई को लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया था। निधन से एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेन दौरे के दौरान कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस बिल को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। ट्रम्प ने भी व्हाइट हाउस में कहा, “यह लिंडसे के सम्मान में है। यह उनका सबसे बड़ा मुद्दा था और इसके कानून बनने की अच्छी संभावना है।” कैपिटल हिल में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के सीनेटर एक साथ नजर आए। उन्होंने इस बिल को ग्राहम के लिए श्रद्धांजलि बताया।

UN सिक्योरिटी कॉउंसिल सीट के लिए भारत ने लॉन्च किया SHANTI कैंपेन, जानें क्या है विदेश मंत्री जयशंकर का सुपर प्लान

UNSC Seat: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हुए आधिकारिक तौर पर अपना अभियान शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का सुपर प्लान पेश किया। इसे SHANTI कैंपेन का नाम दिया गया है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के कई राजदूत, राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक इस आधिकारिक कैंपेन को लॉन्च करने के साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मुलाकात की और पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान सहित कई वैश्विक घटनाक्रमों पर विस्तृत चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से निकलते समय जब पीटीआई ने उनसे पूछा कि बैठक कैसी रही तो जयशंकर ने संक्षिप्त शब्दों में कहा कि हमेशा की तरह अच्छी।

क्या है भारत का SHANTI कैंपेन?

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के लिए देश की प्राथमिकताओं को स्पष्ट। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण ‘SHANTI’ यानी ‘Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity’ (नियमों, विश्वास और अखंडता के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना) पर आधारित है। जयशंकर ने भारत के इस सुपर प्लान के तहत सुरक्षा परिषद के लिए अपनी 6 मुख्य प्राथमिकताओं को सामने रखा है।

पहली ग्लोबल साउथ की आवाज बनना। यानी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मंच पर ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की चिंताओं और मुद्दों को मजबूती से उठाना। दूसरी सुधारित बहुपक्षवाद यानी वैश्विक शासन में सुधार को आगे बढ़ाना ताकि इसे अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाया जा सके। तीसरी भविष्य के लिए तैयार पीसकीपिंग, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन को आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाना। चौथी एआई (AI) के दुरुपयोग से निपटना, जिसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले खतरों को एड्रेस करना। पांचवीं समुद्री सुरक्षा जिसके तहत वैश्विक समुद्री मार्गों और सुरक्षा को मजबूत करना। छठी टेरर फाइनेंसिंग पर लगाम। इसके तहत आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद का कड़ा विरोध करना और इसे रोकना।

इस अभियान की शुरुआत के अवसर पर एक विशेष वीडियो भी दिखाया गया। इसमें वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका, उसके योगदान और यूएनएससी अभियान की प्राथमिकताओं को दिखाया गया। वीडियो में मिसाइल हमलों से तबाह होते शहरों और प्राकृतिक आपदाओं के फुटेज के बीच भारत द्वारा पहुंचाई गई मानवीय और राहत सहायता को दिखाया गया। वीडियो में कहा गया कि एक अव्यवस्थित दुनिया के लिए, एक सभ्यता ने हमेशा केवल एक ही शब्द में उत्तर दिया है – शांति (Shanti).

इस विशेष वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक आह्वान को भी शामिल किया गया, जो उन्होंने जून 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए किया था कि यह युद्ध का युग नहीं है बल्कि यह संवाद और कूटनीति का युग है। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शासन में बदलाव लाने के लिए सुधार आवश्यक हैं। बहुपक्षवाद को लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक और प्रभावी होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे देशों का मतभेदों को पाटने और आम सहमति बनाने का एक लंबा इतिहास रहा है। ऐसे देश निश्चित रूप से इस दिशा में अपना उचित योगदान दे सकते हैं।

अगले साल जून में होगा मुकाबला, 9वीं बार सीट की तैयारी

यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल यानी जून 2027 में आयोजित किए जाएंगे। इस चुनाव में एशिया-पैसिफिक ग्रुप श्रेणी की इकलौती सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले आठ बार संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली 15-सदस्यीय निकाय में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में बैठ चुका है। भारत का पिछला कार्यकाल 2021-22 में था। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में इस प्रतिष्ठित टेबल पर रह चुका है।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी उम्मीदवारी ऐसे समय में पेश कर रहा है जब दुनिया एक गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। एक तरफ दुनिया के पास मानव कल्याण को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने की अभूतपूर्व क्षमताएं हैं तो दूसरी तरफ हम संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता का ऐसा दौर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इस जटिलता से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को नेतृत्व करना होगा और सुरक्षा परिषद को रास्ता दिखाना होगा इसलिए इस सदस्यता के चुनाव का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात

सप्ताहांत में न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने इस कैंपेन लॉन्च के बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी और भारत के यूएन मिशन के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

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LIVE: उत्तर भारत में फिर कमजोर पड़ा दक्षिण-पश्चिम मानसून

monsoon

Latest News Today Live Updates in Hindi : उत्तर भारत में एक बार फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है। हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान दिखे। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां मूसलाधार बारिश हो रही है। पल पल की जानकारी…

वियतनाम में नाव पलटने से मारे गए आंध्र प्रदेश के तीन लोगों के पार्थिव शरीर RGI एयरपोर्ट पर पहुंचे और अधिकारियों ने उन्हें उनके परिवार वालों को सौंप दिया।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी इंदौर से भोपाल की जेन ज़ी साइक्लोथॉन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की गूंज की शुरूआत और संकल्प है। प्रदेश में 25 सालों से भाजपा की सरकार है। मध्य प्रदेश में पेपर माफिया और नौकरियों में धांधली चल रही है। यह चिंता का विषय है। यह राजनीतिक यात्रा नहीं बल्कि शिक्षा को बचाने की यात्रा है। जो अमीर है उसके पास शिक्षा है और गरीबों के पास केवल मजदूरी है। ऐसा 80 साल की आजादी के बाद है। मध्य प्रदेश में शिक्षा को लेकर अराजकता है।

-उत्तर भारत में एक बार फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ गया है।

-पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और वहां मूसलधार बारिश हो रही है। 

-राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई हिस्सों में मंगलवार सुबह बारिश हुई। 

Asian Market Today: एशिया बाजारों में गिरावट, नैस्डैक 1.55% फिसला, यूएस बॉन्ड यील्ड बढ़ी

Asian Market Today: US-ईरान युद्ध के बीच तेल की बढ़ती कीमतों से सेंटिमेंट पर असर पड़ने से मंगलवार को एशियाई बाज़ारों में गिरावट के साथ कारोबार हुआ। नैस्डैक 1.5 फीसदी से ज्यादा फिसला, डाओ और S&P में भी दबाव दिखा। जापान का निक्केई 225 0.58% गिरा, जबकि टॉपिक्स 0.30% बढ़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.46% और हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स 1.11 फीसदी की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया। ताइवान का बाजार 2.24 फीसदी  गिरकर 44,338.19 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जबकि  शंघाई कम्पोजिट 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ फ्लैट कामकाज कर रहा है।

गिफ्ट निफ्टी 24,050 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज से लगभग 168 पॉइंट्स का डिस्काउंट था, जो भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स के लिए नेगेटिव शुरुआत का संकेत देता है।

वॉल स्ट्रीट

US स्टॉक मार्केट सोमवार को नीचे बंद हुआ क्योंकि मिडिल ईस्ट युद्ध के हालिया बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ गईं और रिस्क लेने की क्षमता कम हो गई।

डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 138.31 पॉइंट्स या 0.26% गिरकर 52,498.70 पर आ गया, जबकि S&P 500 59.92 पॉइंट्स या 0.79% गिरकर 7,515.47 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 408.43 पॉइंट्स या 1.55% गिरकर 25,873.18 पर बंद हुआ।

एनवीडिया के शेयर की कीमत 3.52% गिरी, AMD के शेयर 4.21% गिरे, ब्रॉडकॉम के शेयर 3.98% गिरे, इंटेल के शेयर 6.12% फिसले, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के शेयर 4.32% गिरे, माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.53% बढ़े, मेटा के शेयर 1.86% गिरे, अल्फाबेट के शेयर 1.23% गिरे, टेस्ला के शेयर 3.19% टूटे, और स्पेसएक्स के शेयर 4.24% फिसले।

US-ईरान युद्ध

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ऑफिशियली सांसदों को बताया है कि देश एक बार फिर ईरान के साथ युद्ध में है, और अपने एडमिनिस्ट्रेशन को कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना इस इलाके में मिलिट्री इस्तेमाल करने के लिए 60 दिन का समय दिया है। इस बीच, यमन में ईरान सपोर्टेड हूथियों ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के आभा एयरपोर्ट को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

बॉन्ड यील्ड

US ट्रेजरी यील्ड रातों-रात तेज़ी से बढ़ी क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों ने US-ईरान के बीच नए तनाव के बाद इन्फ्लेशन की आशंका बढ़ा दी। बेंचमार्क US 10-साल के ट्रेजरी नोट पर यील्ड 4.9 bps बढ़कर 4.618% हो गई, जबकि 30-साल के बॉन्ड पर यील्ड 3.3 bps बढ़कर 5.104% हो गई। दो-साल के US ट्रेजरी यील्ड 6.5 bps बढ़कर 4.273% हो गई।

बेंचमार्क जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड दूसरे दिन भी बढ़ी। 10-साल के JGB की यील्ड 1 bp बढ़कर 2.795% हो गई। दो-साल की यील्ड और पांच-साल की यील्ड दोनों स्थिर रहीं।

कच्चे तेल की कीमतें

US-ईरान युद्ध में नए सिरे से बढ़ोतरी के बाद होर्मुज स्ट्रेट से एनर्जी फ्लो को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतें 2% बढ़कर चार हफ्तों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2% बढ़कर $84.98 प्रति बैरल हो गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 2.1% बढ़कर $79.79 प्रति बैरल हो गया। पिछले सेशन में ब्रेंट क्रूड 9.6% बढ़ा, जो मई 2020 के बाद से इसकी सबसे बड़ी डेली बढ़त है।

आज सोने का रेट

महंगाई को कंट्रोल करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ने की बढ़ती संभावना के कारण सोने की कीमतों में गिरावट जारी रही। स्पॉट गोल्ड की कीमतें 0.1% गिरकर $3,996.63 प्रति औंस हो गईं, जबकि चांदी की कीमत 0.3% गिरकर $57.50 प्रति औंस हो गई।

डॉलर

US महंगाई के डेटा से पहले डॉलर स्थिर हुआ। डॉलर इंडेक्स, जो येन और यूरो सहित कई करेंसी के मुकाबले डॉलर को मापता है, 101.27 पर फ्लैट था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूरो डॉलर के मुकाबले $1.1383 पर और स्टर्लिंग $1.3347 पर ट्रेड कर रहा था। जापानी येन डॉलर के मुकाबले लगभग फ्लैट 162.40 प्रति डॉलर पर था।

Crude Oil Price Surge: ट्रंप के बयान ने फिर लगाई क्रूड में आग, कल के निचले स्तर से 10% उछला भाव, $85 के करीब पहुंचा

Global Market Today: वेस्ट एशिया तनाव से बिगड़ा ग्लोबल बाजार का मूड़, एशिया में दबाव, कोस्पी 5% से ज्यादा टूटा, निक्केई भी 2% नीचे

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

तमिलनाडु में गो-हत्या पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हाई कोर्ट के पूर्ण प्रतिबंध वाले आदेश पर लगाई रोक

Supreme Court on cow slaughter

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य में गो-हत्या रोकने के लिए मद्रास हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश पर रोक लगा दी है। राज्य में अब गो-हत्या पर हाई कोर्ट के आदेश की वजह से बकरीद के समय लगा प्रतिबंध हट गया है। ALSO READ: अब इस तरह होगी अयोध्या राम मंदिर में CEO की नियुक्ति, कौन कर सकता है इस पद के लिए आवेदन

 

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के फैसले के प्रभाव पर रोक लगाने का आदेश दिया।

 

विजय सरकार ने दी थी हाईकोर्ट के फैसले को  चुनौती

तमिलनाडु की सी जोसेफ विजय सरकार ने प्रदेश में गाय और बछड़े की हत्या पर पूरी तरह से बैन लगाने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस केस में तमिलनाडु सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की थी। ALSO READ: भारत में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले: कुमार सानू के बेटे जान अस्पताल में भर्ती

 

क्या थी सिंंघवी की दलील?

सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट,1958 का विरोधाभासी है। इसके तहत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट के आधार पर 10 साल से ज्यादा उम्र की वह गाय, जो कि काम में इस्तेमाल या बच्चा देने लायक नहीं हैं, उनकी हत्या की अनुमति है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा कानून पशुओं के वध को नियंत्रित करते हैं, लेकिन वे इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान नहीं करते।

 

गौरतलब है कि मद्रास हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद 27 मई, 2027 को तमिलनाडु में गो-हत्या पर पूर्ण पाबंदी वाला आदेश जारी किया था। अपने आदेश में मद्रास हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों को भी शामिल किया था, जिसमें कहा गया था कि बकरीद के लिए गाय की कुर्बानी आवश्यक नहीं है।

पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

– मुख्यमंत्री ने गोरखपुर से किया 1 दिन में 35 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य वाले पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ

– 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत सीएम ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर रोपे पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे

– मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की रफ्तार के साथ वनाच्छादन का विस्तार, सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है एक पेड़

– आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण, लगाया मौलश्री का पौधा

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार सुबह गोरखपुर से एक दिन में 35 करोड़ रिकॉर्ड पौधारोपण के लक्ष्य वाले प्रदेशव्यापी पौधारोपण महायज्ञ 2026 का शुभारंभ किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत उन्होंने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर भगवानपुर टोल प्लाजा के समीप पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल, बरगद) के पौधे लगाए और सेल्फी भी ली। इसके बाद गीडा सेक्टर-28 में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पौधारोपण महाभियान धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ है। विगत नौ वर्षों में प्रदेश में भौतिक विकास की रफ्तार तेज होने के साथ ही वनाच्छादन का भी विस्तार हुआ है। गोरखनाथ मंदिर लौटते समय सीएम ने आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड के किनारे भी मौलश्री का पौधा रोपित किया।

 

जनसभा में सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का वृहद विस्तार हुआ है। एक्सप्रेसवे, हाईवे के साथ बड़े पैमाने पर सड़कों का जाल बिछा है। नए-नए उद्योग लगे हैं। शहरीकरण का दायरा बढ़ा है और नई-नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। भौतिक विकास में तेज योगदान देने वाले इस राज्य ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्पित प्रयासों से वनाच्छादन के विस्तार में भी सफलता प्राप्त की है।

एक पेड़ सैकड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है। 9 वर्षों में यूपी का वनाच्छादन बढ़ने से 6 करोड़ 37 लाख 74 हजार 130 टन कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण तथा 4 करोड़ 63 लाख 90 हजार 130 टन ऑक्सीजन का उत्सर्जन हुआ।

 

'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:'

मुख्यमंत्री ने पौधारोपण महाभियान को धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ बताया और इसमें हर व्यक्ति की तरफ से योगदान दिए जाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि धरती माता हम सबको अच्छा वातावरण देती हैं। आगे बढ़ने का अवसर, पेट भरने को अन्न, अच्छे-अच्छे फल, पीने के लिए जल देने के साथ घर की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।

धरती माता के बारे में हमारे ऋषियों ने संकल्प भाव से कहा है- 'माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्या:', अर्थात यह धरती हमारी माता हैं और हम सब इसके पुत्र हैं। एक पुत्र के रूप में धरती माता के प्रति उत्तरदायित्व का निर्वहन करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ का आह्वान किया है।  यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुंदर बनाने का राष्ट्रीय कर्तव्य है। 

 

धरती माता की आरोग्यता का भी रखें ध्यान

सीएम योगी ने पौधारोपण की थीम ‘एक पेड़ मां के नाम’ को बहुत सुंदर बताते हुए कहा कि मां हर व्यक्ति, हर जीव के लिए दुनिया का सबसे सुंदर उपहार है। हम खुद के स्वास्थ्य की चिंता करते हैं, लेकिन सबकुछ देने वाली धरती माता के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। खुद की आरोग्यता के लिए हम सभी को धरती माता की आरोग्यता का भी ध्यान रखना होगा।

अनंतकाल तक जीवसृष्टि बनी रहे, इसके लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर इस वर्ष 5 करोड़ पौधे लगाए गए। गत वर्ष 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। 9 वर्ष में अब तक प्रदेश में 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।

Chief Minister Yogi stated that mega plantation drive is grand undertaking to express gratitude towards Mother Earth

मौसम चक्र में परिवर्तन से कृषि उत्पादन पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर मंडरा रहे संकट का प्रभाव मौसम चक्र पर भी पड़ा है। बारिश करीब एक महीना विलंब से शुरू हुई है। जो बीज 15 जून तक लग जाना चाहिए था, उसे 15 जुलाई को लगाएंगे तो उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक अंतर पड़ेगा।

पर्यावरण असंतुलन से कभी प्रचंड गर्मी पड़ रही है तो कभी सर्दी। लगातार ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी दी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में समुद्र के किनारे बहुत सारे शहर डूबने की स्थिति में होंगे तो कहीं भीषण जल संकट होगा।

 

मानवता को चुकानी पड़ रही प्रकृति से खिलवाड़ की कीमत

मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम में बहुत सारे शहर ऐसे हैं, जहां गैस चैंबर जैसी स्थिति बन जाती है। वहां अलर्ट जारी करना पड़ता है कि बुजुर्ग, बीमार और बच्चे घर से बाहर न निकलें, जरूरी हो तो मास्क लगाकर निकलें। आखिर यह स्थिति पैदा ही क्यों हुई? क्योंकि प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया। अंधाधुंध पेड़ काटे गए, जल दोहन किया गया लेकिन जल संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं हुआ। तालाबों पर अवैध कब्जे हो गए। अपने स्वार्थ के लिए लोगों ने प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ किया है, आज उसकी कीमत विश्व मानवता को चुकानी पड़ रही है। 

 

पर्यावरण अनुकूल एलईडी लाइट से बचे 100 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब डबल इंजन की भाजपा सरकार बनी तब हैलोजन लाइटों को हटाकर उसकी जगह पर्यावरण अनुकूल एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में 16 लाख एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई गईं, इससे प्रदेश सरकार को 100 करोड रुपए की बचत हुई।

साथ ही हैलोजन में जलकर मरने वाले कीड़े-मकोड़ों की भयंकर बदबू से भी मुक्ति मिली। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। पीएम सूर्य घर बिजली योजना से लोगों के बिजली बिल आधे हो रहे हैं। ग्रीन एनर्जी का नया स्रोत लोगों को उपलब्ध कराया गया है।

 

उज्जवला योजना ने दी धुएं से मुक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के विजन से उज्जवला योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को निशुल्क एलपीजी कनेक्शन बांटे गए, जो कांग्रेस सरकार में ब्लैक में मिलते थे। 10 करोड़ परिवारों में माताओं-बहनों को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली। अकेले उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ परिवारों को यह लाभ मिला है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दुनिया से इसके बारे में आह्वान किया है। अयोध्या प्रदेश की पहली सोलर सिटी बनी है। वहां समस्त स्ट्रीट लाइट में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाता है।

 

पौधा लगाकर देखभाल भी करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें न सिर्फ पौधे लगाने हैं, बल्कि उनकी उचित देखभाल भी करनी है। जिन किसानों ने अपने खेत में पेड़ लगाए हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट फाइनेंस स्कीम के अंतर्गत पैसा भी प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा कि अपने पूर्वजों व परिजनों की स्मृति में और परिवार के सदस्यों के नाम से एक पौधा अवश्य लगाएं।

 

’हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन

पौधारोपण महायज्ञ 2026 के अवसर पर आयोजित जनसभा के मंच से मुख्यमंत्री ने ‘उत्तर प्रदेश के नौ वर्ष की हरित गाथा’ लघु फिल्म और ‘वानिकी कैलेंडर’ का विमोचन किया। लघु फिल्म में यूपी में पिछले नौ सालों में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों और हासिल उपलब्धियों को दर्शाया गया है, जबकि वानिकी कैलेंडर में वर्ष 2026-27 के लिए वन विभाग की कार्ययोजना का उल्लेख है। 

 

सीएम ने किया पौध वितरण, किसानों को सौंपे प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना की लाभार्थी गीता देवी, मधुरा, इशरावती, शीला, कालिंदी को घर के सामने रोपने के लिए सहजन के पौधे भेंट किए। उन्होंने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना के अंतर्गत 700 से अधिक पौधारोपण करने वाले नरपति (कैम्पियरगंज गोरखपुर), 650 से अधिक पौधारोपण करने वाले अशफाक खान (देसही देवरिया),  800 पौधारोपण करने वाली रंजना देवी (हाटा कुशीनगर) और 850 पौधे लगाने के लिए अरविंद कुमार (पडरौना कुशीनगर) को कार्बन क्रेडिट के लिए मिलने वाली राशि का प्रमाण-पत्र सौंपा। 

 

सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में बढ़ी हरियाली : वनमंत्री

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हरियाली बढ़ी है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रीनरी वृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश प्रगति करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

आज का पौधारोपण पूर्ण होते ही यूपी में पिछले 10 सालों में पौधारोपण की कुल संख्या 275 करोड़ हो जाएगी। इस बार के पौधारोपण महाभियान में 30 प्रतिशत फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। गोरखपुर में मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वानिकी विश्वविद्यालय के निर्माण की शुरुआत जल्द ही की जाएगी।

 

पीएम मोदी-सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद संवेदनशील : रविकिशन

इस मौके पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वे सदैव लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इसी विजन के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री ने एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी का इतना विराट विकास हुआ है, जितना कोई सोच भी नहीं सकता।

 

नौ वर्ष में हुआ सौ वर्ष से अधिक का विकास : प्रदीप शुक्ल

सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सहजनवा विधानसभा का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने नौ वर्षों में जितना विकास किया, वह सौ वर्षों में भी नहीं हो पाता। प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार चौधरी ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, राज्यसभा सदस्य संगीता यादव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, महेंद्रपाल सिंह, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पौधारोपण महायज्ञ के लिए गोरखपुर के नोडल अधिकारी सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, ब्लॉक प्रमुख दिलीप यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

नेपाल में फिर जेन-जी प्रदर्शन; 3 दिन में 3 आत्मदाह:बेरोजगारी के खिलाफ गुस्सा; पीएम बालेन शाह का इस्तीफा मांगा

नेपाल में युवाओं की बढ़ती नाराजगी फिर से सड़कों पर दिखाई देने लगी है। पिछले तीन दिनों में तीन युवाओं ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। इनमें से दो की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से झुलसा हुआ अस्पताल में भर्ती है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ‘बालेन’ के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। राजधानी काठमांडू में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने सरकार पर युवाओं में उम्मीद और भरोसा जगाने में विफल रहने का आरोप लगाया है। जेन-जी नेपाल संगठन ने प्रधानमंत्री बालेन शाह पर जनविरोधी और निरंकुश तरीके से शासन चलाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि बजट व नीतियों में युवाओं के रोजगार और आय बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। 2023 में बालेन शाह ने आत्मदाह को सरकार की विफलता कहा था 2023 की वह घटना भी चर्चा में है, जब प्रेम आचार्य ने आत्मदाह किया था। उस समय काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह ने इसे राज्य की चरम विफलता बताया था। अब मौजूदा घटनाओं पर उनकी चुप्पी विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के निशाने पर है। नेपाल में लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने युवाओं की मानसिक स्थिति, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए तो विरोध और तेज हो सकता है। GenZ प्रोटेस्ट में विरोध का चेहरा बने बालेन 2022 में मेयर बनने के बाद बालेन ने शहर की सफाई, विरासत संरक्षण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के कदम उठाए। अवैध निर्माण पर कार्रवाई से ट्रैफिक सुधरा, हालांकि इसका विरोध भी हुआ, खासकर सड़क किनारे दुकानदारों और झुग्गी बस्तियों के लोगों से। बालेन शाह का प्रभाव केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रहा। पिछले साल सितंबर में हुए प्रदर्शनों के दौरान उनके गाने युवाओं के बीच गूंजते रहे। इन प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई थी और इसके पीछे सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और धीमी अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का गुस्सा था। प्रदर्शनकारियों ने उनके गाने ‘नेपाल हंसेको’ को एक तरह का प्रतीक बना लिया। 5 मार्च को हुए आम चुनाव में उनकी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की, जिससे नेपाल की पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका लगा। बालेन शाह ने झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। 35 साल की उम्र में प्रधानमंत्री पद संभालते ही वह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं।