सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। इस समझौते को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। वह पिछले पांच साल से भी ज्यादा समय से यह समझौता चाह रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल समेत अमेरिका के कई अधिकारी और न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि यदि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की तकनीक मिल गई, तो भविष्य में वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में भी बढ़ सकता है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा पैदा हो सकता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले कई बार कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में कदम उठाएगा। यह समझौता विवादों में क्यों है? ट्रम्प ने समझौते से इजराइल को हटाया इस समझौते की शुरुआत जो बाइडेन के राष्ट्रपति रहते हुई थी। तब अमेरिका चाहता था कि परमाणु समझौते के बदले सऊदी अरब, इजराइल को औपचारिक मान्यता दे और दोनों देश राजनयिक संबंध स्थापित करें। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी, आधुनिक हथियार और असैन्य परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देने को तैयार था। बदले में सऊदी अरब से उम्मीद थी कि वह इजराइल के साथ दूतावास खोलेगा, राजदूत नियुक्त करेगा और आधिकारिक संबंध शुरू करेगा। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध की वजह से यह प्लान फेल हो गया। सऊदी कहने लगा कि जब तक एक अलग फिलिस्तीन राष्ट्र नहीं बन जाता तब तक वे इजराइल को मान्यता नहीं देंगे। बाद में ट्रम्प ने रणनीति बदली और इजराइल के साथ रिश्तों को इस समझौते से अलग कर दिया। मिडिल ईस्ट में सऊदी का प्रभाव बढ़ेगा परमाणु बिजलीघर (न्यूक्लियर रिएक्टर) बनने में 10 साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए इस समझौते के बाद सऊदी अरब लंबे समय तक अमेरिका की परमाणु तकनीक और मदद पर निर्भर रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा, कारोबार और आपसी रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी की एक्सपर्ट कैरेन यंग के मुताबिक, सऊदी अरब सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रहा है। उनका कहना है कि यह समझौता सिर्फ परमाणु बिजली बनाने तक सीमित नहीं है। इससे सऊदी अरब की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी और मिडिल ईस्ट में उसका प्रभाव भी पहले से ज्यादा मजबूत होगा। अमेरिका को क्या फायदा होगा? इस समझौते से अमेरिका को दो बड़े फायदे मिल सकते हैं। 1. अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब में परमाणु बिजली संयंत्र बनाने के अरबों डॉलर के ठेके मिल सकते हैं। 2. अमेरिका को सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम पर नजदीकी नजर रखने का मौका मिलेगा, जिससे उसे हथियारों के प्रसार को लेकर अपनी चिंताओं पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। रूस-चीन भी मदद को तैयार थे अगर अमेरिका के साथ यह समझौता किसी वजह से नहीं हो पाता, तो सऊदी अरब के पास दूसरे विकल्प भी हैं। दरअसल, सऊदी कई बार चेतावनी दे चुका था कि अगर उसे अमेरिका इसमें मदद नहीं करेगा तो वे चीन, रूस, फ्रांस या दक्षिण कोरिया जैसे दूसरे देशों से परमाणु तकनीक ले लेंगे। चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (CNNC) पहले ही न्यूक्लियर प्लांट बनाने में रुचि दिखा चुकी है। रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम भी सऊदी अरब के साथ शुरुआती समझौते कर चुकी है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया और फ्रांस भी संभावित साझेदार माने जा रहे हैं। ट्रम्प का फैसला बदलना संसद के लिए मुश्किल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है न सिर्फ इससे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की होड़ को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ईरान के लिए भी अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की संभावना कम कर देगा। हालांकि इन विरोधों के बावजूद संसद के लिए इस समझौते को रोकना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस समझौते को मंजूरी के लिए संसद में पेश किया जाएगा। लेकिन यदि संसद इसे रोकना चाहती है, तो उसे इस संबंध में संयुक्त प्रस्ताव (जॉइंट रिजोल्यूशन) पारित करना होगा। यदि राष्ट्रपति उस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो संसद को उस वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा। यही वजह है कि राजनीतिक विरोध के बावजूद इस समझौते के लागू होने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
असम से पिछले 10 वर्षों में कितने अवैध विदेशी नागरिकों को उनके देशों में वापस भेजा गया है, इसका आधिकारिक आंकड़ा अब सामने आ गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक असम विधानसभा में सरकार ने जानकारी दी है कि पिछले 10 सालों में राज्य से करीब 2100 अवैध विदेशी नागरिकों को निर्वासित, निष्कासित या वापस भेजा गया है। बाहर निकाले गए इन अवैध विदेशियों में सबसे बड़ी संख्या बांग्लादेशी नागरिकों की है। ये संख्या 2023 है।
असम समझौता क्रियान्वयन मंत्री अतुल बोरा ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी साझा की। कांग्रेस विधायक अब्दुल रहीम अहमद के प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि 2016 से लेकर 30 जून 2026 तक कुल 2089 अवैध विदेशी नागरिकों को राज्य से बाहर निकाला गया है। इनमें बांग्लादेश के 2023 नागरिकों के अलावा म्यांमार के 39 और नाइजीरिया के 18 नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा अफगानिस्तान, यूक्रेन और रूस से 2-2 नागरिकों को जबकि पाकिस्तान, केन्या और युगांडा से 1-1 नागरिक को उनके देश वापस भेजा गया है।
सबसे ज्यादा कार्रवाई साल 2025 में हुई
अगर साल-दर-साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस 10 साल के समय में सबसे ज्यादा कार्रवाई वर्ष 2025 में हुई। पिछले साल 1811 लोगों को वापस भेजा गया। इनमें नाइजीरिया के एक नागरिक को छोड़कर सभी अवैध विदेशी बांग्लादेश से थे। वहीं चालू वर्ष में 30 जून 2026 तक 263 घुसपैठियों को वापस भेजा जा चुका है। ये पिछले एक दशक में दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। इनमें से 261 बांग्लादेश के और 2 रूस के नागरिक हैं।
इसी दौरान राइजर दल के विधायक अखिल गोगोई के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने धार्मिक आंकड़ों का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 31 मई 2026 तक राज्य में कुल 172673 अवैध विदेशी चिह्नित किए गए हैं। इन चिह्नित विदेशियों में 111414 मुस्लिम, 61189 हिंदू और बाकी ईसाई या दूसरे धर्मों के अनुयायी शामिल हैं।
कार्रवाई के कानूनी आधार पर बात करते हुए अतुल बोरा ने स्पष्ट किया कि अवैध बांग्लादेशियों को वापस भेजने का काम गृह मंत्रालय के 2 मई 2025 के पत्र में तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। वहीं सीमावर्ती देश में घुसपैठियों का निष्कासन ‘इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ्रॉम असम) एक्ट, 1950’ के प्रावधानों के तहत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निष्कासन और वापस भेजने की यह पूरी प्रक्रिया देश के मौजूदा कानूनों के तहत ही पूरी की जा रही है।
असमिया व्यक्ति की परिभाषा क्या है?
इसके अलावा विधानसभा में जब मंत्री से यह पूछा गया कि असमिया व्यक्ति की परिभाषा क्या है, तो उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विभिन्न राष्ट्रवादी संगठनों और हितधारकों के साथ चर्चा जारी है। सरकार सभी वर्गों की राय, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिप्लब कुमार शर्मा समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सही समय पर निर्णय लेगी।
आपको बता दें कि यह समिति 1985 के असम समझौते की धारा 6 को लागू करने की सिफारिशों के लिए 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा गठित की गई थी। इसका उद्देश्य मूल असमिया आबादी की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान को सुरक्षा देना है। मंत्री ने बताया कि सेवानिवृत्त जज की इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार ने आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

Lokmanya Tilak Biography: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जब भी राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और जनजागरण की बात होती है, तो लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्हें आधुनिक भारत के सबसे प्रभावशाली राष्ट्रवादियों में गिना जाता है। हर वर्ष 23 जुलाई को लोकमान्य तिलक की जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में उनकी 170वीं जयंती मनाई जाएगी।
जब भारतीय जनमानस औपनिवेशिक दासता की गहरी नींद में सोया हुआ था, तब एक ऐसी आवाज़ गूंजी जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी- और वह थीं, 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।' यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत के पुनर्जागरण का शंखनाद था। यह दिन केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों, विचारों और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को समझने का भी अवसर है।
- जीवन परिचय: एक शिक्षक से राष्ट्रनायक तक का सफर
- इतिहास: गरम दल का नेतृत्व और होम रूल आंदोलन
- सामाजिक एकीकरण का अनूठा प्रयोग
- आज के संदर्भ में जयंती का महत्व
- लोकमान्य तिलक से जुड़े अनसुने तथ्य
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जयंती 2026 पर जानें उनका जीवन परिचय, इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, महत्व, प्रसिद्ध विचार और अनसुने तथ्य…
जीवन परिचय: एक शिक्षक से राष्ट्रनायक तक का सफर
जन्म: 23 जुलाई 1856 रत्नागिरी, महाराष्ट्र
मूल नाम: केशव गंगाधर तिलक (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
माता-पिता: पार्वतीबाई एवं गंगाधर रामचंद्र तिलक
योग्यता: गणित और संस्कृत के प्रकांड विद्वान, एलएलबी में स्नातक
उपाधि: 'लोकमान्य' जनता द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया नेता।
पेशा: शिक्षक, पत्रकार, समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी
निधन: 1 अगस्त 1920, मुंबई
तिलक जी का मानना था कि किसी भी देश की स्वतंत्रता की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था पर टिकी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक वकील के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में की। उन्होंने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए पुणे में 'न्यू इंग्लिश स्कूल' और 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी/ फर्गुसन कॉलेज' की स्थापना की।
इतिहास: गरम दल का नेतृत्व और होम रूल आंदोलन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती दौर में जब अंग्रेज सरकार के समक्ष केवल प्रार्थना-पत्र देने की नीति अपनाई जा रही थी, तब तिलक जी ने इसका मुखर विरोध किया। लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल यानी त्रिदेव (लाल-बाल-पाल) के साथ मिलकर उन्होंने कांग्रेस में 'राष्ट्रवादी/गरम दल' का गठन किया। उनका मानना था कि आजादी भीख में नहीं, बल्कि संघर्ष से मिलती है।
समाचार पत्रों का माध्यम: बाल गंगाधर तिलक ने ऐसे समय में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया, जब अंग्रेजी शासन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाना आसान नहीं था। उन्होंने शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक आंदोलनों को जनजागरण का माध्यम बनाया।
उन्होंने मराठी समाचार पत्र 'केसरी' और 'मराठा' अंग्रेजी समाचार पत्र के माध्यम से अंग्रेजों की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब किया। केसरी में लिखे उनके लेख ब्रिटिश सरकार के लिए किसी बम धमाके से कम नहीं होते थे। सन् 1916 में उन्होंने एनी बेसेंट के साथ मिलकर ऑल इंडिया होम रूल लीग यानी स्वशासन की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाया, जिसने भारत के कोने-कोने में राष्ट्रवाद की ज्वाला जला दी।
सामाजिक एकीकरण का अनूठा प्रयोग
लोकमान्य तिलक एक दूरदर्शी नेता थे। वे जानते थे कि जब तक भारत की विविधता को एक सूत्र में नहीं पिरोया जाएगा, तब तक अंग्रेजों से लड़ना असंभव है। इसके लिए उन्होंने धर्म और संस्कृति को जन-जागरण का माध्यम बनाया, जिसके तहत उन्होंने सन् 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव प्रारंभ किया, अर्थात् जो पूजा घरों की चारदीवारी तक सीमित थी, उसे उन्होंने एक सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया ताकि लोग जाति-पात से ऊपर उठकर एक जगह एकत्र हों और देश की स्थिति पर चर्चा कर सकें।
उन्होंने 1895 में शिवाजी महोत्सव के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य को याद दिलाकर भारत के युवाओं में स्वाभिमान और साहस का संचार किया।
आज के संदर्भ में जयंती का महत्व
आज 21वीं सदी के आत्मनिर्भर भारत में लोकमान्य तिलक के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनकी जयंती हमें सिखाती है कि स्वावलंबन ही वास्तविक स्वतंत्रता है। तिलक जी ने जो 'स्वदेशी' का पाठ 100 साल पहले पढ़ाया था, वही आज 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का आधार है। उनकी निर्भीकता और मौलिक सोच तथा अन्याय के सामने न झुकने का उनका जज्बा आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाशपुंज है।
लोकमान्य तिलक से जुड़े अनसुने तथ्य
1. 'लोकमान्य' की उपाधि जनता ने दी
उनके लोकप्रिय नेतृत्व और जनसमर्थन के कारण लोगों ने उन्हें 'लोकमान्य', अर्थात् 'जिसे जनता ने स्वीकार किया हो', की उपाधि दी।
2. पत्रकारिता को बनाया आंदोलन का हथियार
उन्होंने अपने समाचार पत्रों के माध्यम से ब्रिटिश शासन की नीतियों का निर्भीक विरोध किया।
3. गणेशोत्सव को बनाया सार्वजनिक उत्सव
तिलक ने घरेलू गणेश पूजा को सार्वजनिक आयोजन का रूप देकर लोगों को एकजुट किया और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया।
4. कई बार गए जेल
ब्रिटिश सरकार ने उनके राष्ट्रवादी लेखों और भाषणों के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया। उन्हें म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) के मांडले कारागार में भी कैद रखा गया।
5. जेल में लिखी प्रसिद्ध पुस्तक
मांडले जेल में रहते हुए उन्होंने 'गीता रहस्य' नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की, जिसमें उन्होंने कर्मयोग का महत्व बताया।
6. स्वदेशी आंदोलन के समर्थक
उन्होंने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का जोरदार समर्थन किया।
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CJP Protest in Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से बुधवार (22 जुलाई) को इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता वकील ने CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, “पुलिस की बर्बरता से जुड़े वीडियो भी मेरे पास हैं… यदि इस मामले को कल (गुरुवार 23 जुलाई) सूचीबद्ध किया जा सके…।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ पुलिस ने कथित तौर पर बर्बरता की और याचिका में तीन अनुरोध किए गए हैं। चीफ जस्टिस ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि पीठ इस स्तर पर वीडियो देखने की इच्छुक नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है… हम वीडियो नहीं देखना चाहते।” वकील के दोबारा छात्रों की पिटाई की बात कहने और वीडियो का हवाला देने पर CJP ने कहा, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।”
यह याचिका सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित है। उस दिन हजारों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए मध्य दिल्ली में एकत्र हुए थे।
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
सरकार नीट पर चर्चा के लिए तैयार
मानसून सत्र शुरू होने के बाद नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण संसद में गतिरोध जारी है। सरकार ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि वह नीट पेपर लीक मामले में सदन में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। लोकसभा की कार्यवाही सुबह स्थगित होने के बाद दोबारा 12 बजे शुरू हुई तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सरकार की ओर से बयान देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू का नाम पुकारा।
इसी बीच कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और इस मुद्दे पर विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग भी की। रीजीजू ने कहा, “सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमने पहले दिन से यह बात कही है। लेकिन चर्चा नियम के तहत होती है। चर्चा कब होनी है, कितनी लंबी होनी है और किस नियम के तहत होनी है, इसका निर्णय स्पीकर (बिरला) सभी दलों के नेताओं से बात कर लेंगे।”
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पथराव भी हुआ। दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन, बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस आंदोलन को प्रमुखता से कवर किया है। पढ़िए, भारत के इस युवा आंदोलन पर विदेशी मीडिया ने क्या लिखा… न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन वे अडिग अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों युवा पुलिस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटे। अखबार के मुताबिक, संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंच गए और सरकार से जवाबदेही की मांग पर डटे रहे। अखबार ने लिखा कि संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समूहों के अनुसार, सोमवार की झड़प में 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया। द गार्डियन: प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र आंदोलन जारी है। अखबार के मुताबिक, सोमवार को हुई झड़प के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर लौटे और आंदोलन जारी रखने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को 50 हजार से ज्यादा लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। अखबार ने लिखा कि बाद में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। द गार्डियन ने प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों को भी चोटें आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 60 लोग घायल हुए, जबकि एक प्रदर्शनकारी की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। अखबार ने लिखा कि आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा सुधार की मांग तक सीमित नहीं रहा। बड़ी संख्या में युवा सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए भी सड़कों पर उतर रहे हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि उसने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई की। अल जजीरा: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन छात्र फिर सड़कों पर अल जजीरा ने लिखा कि संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। रिपोर्ट में कहा गया कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। अल जजीरा ने घटनास्थल पर टूटे बैरिकेड, बिखरे सामान और संघर्ष के निशानों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर युवाओं में पिछले दो महीनों से नाराजगी है। अखबार ने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक आंदोलन पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई। विश्लेषकों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि इस आंदोलन ने सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। BBC: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस कार्रवाई के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे और आंदोलन जारी रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन पहले संसद मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था, जिसमें कम से कम 60 लोग घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने 118 जवानों के घायल होने और 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही। रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर बना मंच और अस्थायी टेंट भी हटा दिए। कई प्रदर्शनकारियों ने BBC को बताया कि पुलिस कार्रवाई में महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। हालांकि, पुलिस और केंद्र सरकार ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर कोई टिप्पणी नहीं की। BBC ने अपनी रिपोर्ट में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान का भी जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से जवाब मांगा और कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला।
मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हो रहे कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और विपक्ष के अन्य नेताओं को लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन स्थल से जबरदस्ती हटाने की भी कोशिश की। हटाए जाते समय राहुल गांधी ने कहा, “भारत में लोकतंत्र अभी चल रहा है।” IANS द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में उनकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दिया।
Delhi: Police detained Congress MP and LoP Rahul Gandhi, who was protesting with party MPs at Lok Kalyan Marg. pic.twitter.com/ZeelIVtsn9
— IANS (@ians_india) July 21, 2026
बता दें कि विपक्ष के नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने उनके साथ-साथ कई सांसदों, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया है। इनमें कन्हैया कुमार भी शामिल हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है।
हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ANI से कहा, “सब कुछ आपके सामने है। देखिए किस तरह हमारे नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, के साथ बदसलूकी की गई। क्या हम आज के देश में ऐसा माहौल चाहते हैं? क्या आपको देश में लोकतंत्र दिखाई दे रहा है? हम यहां फिर से विरोध प्रदर्शन करने आएंगे।”
Delhi: Pictures of Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, protesting with Opposition leaders and workers at Lok Kalyan Marg being detained by Delhi Police.
(ANI photos by Naveen Sharma) pic.twitter.com/Y9mSANwbdt
— ANI (@ANI) July 21, 2026
हिरासत में लिए जाने से पहले, राहुल गांधी ने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की और छात्रों के खिलाफ की गई कथित कार्रवाई को देश पर हमला बताया।
X पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।”
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा, “पीएम मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे। वे ऐसा नहीं कर सकते। इस बार तो बिल्कुल नहीं।”
#WATCH | Delhi: Visuals of Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, protesting with Opposition leaders and workers at Lok Kalyan Marg being detained by Delhi Police.
(Source: Congress) pic.twitter.com/j9cOkbJrwW
— ANI (@ANI) July 21, 2026
लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मैं हर उस देशभक्त भारतीय से कहता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए, वे सभी प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने में हमारे साथ शामिल हों। भारत के छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।”
VIDEO | Delhi: Visuals from inside the bus show Lok Sabha LoP Rahul Gandhi and other leaders after being taken away from the protest site at 7, LKM. pic.twitter.com/emxe9TrA4s
— Press Trust of India (@PTI_News) July 21, 2026
इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा और कांग्रेस के कई सांसद शामिल हुए। पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
यह प्रदर्शन संसद के दोनों सदनों में बार-बार हुए हंगामे के बाद हुआ, जहां विपक्षी दलों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों, जिसमें कथित NEET-UG पेपर लीक का मामला भी शामिल था, पर चर्चा की मांग की थी। वहीं, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद, कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए गए।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और राहुल गांधी से कुछ देर बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को धरना खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की।
X पर एक पोस्ट में, जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं से बात करने के लिए भेजा था। सिंह के अनुसार, राहुल गांधी ने शुरुआत में कहा था कि अगर केंद्र सरकार संसद में NEET और उससे जुड़े आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दे देती है, तो वे प्रदर्शन खत्म कर देंगे।
सिंह ने दावा किया कि सरकार ने वह मांग मान ली थी, लेकिन बाद में गांधी ने कहा, “अब मेरी दो मांगें हैं: संसद में चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा।”
इस घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि “राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता का अपनी बात से पीछे हटना… लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है,” साथ ही उन्होंने कहा कि “सरकार NEET और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार है।”
News18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गांधी रात तक विरोध स्थल पर ही रह सकते थे, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
इससे पहले दिन में, गांधी ने X पर पोस्ट किया, “कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम पीएम मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”
विपक्ष का पक्ष रखते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, “हमारी एक सीधी-सी मांग है। हमारे विपक्ष के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में यह मांग उठाई है। मांग यह है कि गृह मंत्री संसद में इस बारे में स्पष्टीकरण दें और सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि गृह मंत्री इस बात का जवाब दें कि “किस तरह लोकतंत्र और हमारे संविधान की हत्या की जा रही है और छात्रों पर जुल्म किए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी पिछले 45 दिनों से प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संसद में चर्चा की बार-बार की गई मांगों पर कोई जवाब न मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।
राजीव शुक्ला ने कहा, “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था। वे संसद में बहस नहीं करवा रहे हैं। तो हम और क्या कर सकते थे? हमें सड़कों पर उतरना ही पड़ा।”
सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और खड़गे को किसी भी सदन में बोलने नहीं दिया गया और कहा कि छात्रों को “लाठी-चार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस” का सामना करना पड़ा। उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री संसद भी नहीं आते हैं। इसीलिए विपक्ष के सभी सांसद उनके आवास पर आए हैं, ताकि हमारी आवाज सुनी जा सके।”
मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग करना चाहता था। उन्होंने कहा, “उन्हें शिक्षा मंत्री को हटा देना चाहिए। दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। पीएम मोदी इसके लिए जिम्मेदार हैं। हमें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया। इसलिए, वे यहां सभी सांसदों को हिरासत में ले रहे हैं।”
के. सुरेश ने आरोप लगाया, “वे हमें बेरहमी से हिरासत में ले रहे हैं। हम प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि कल दिल्ली पुलिस ने हमारे छात्रों पर बेरहमी से हमला किया था।”
लोगों को हिरासत में लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “यह बीजेपी का आतंकवाद है। वे छात्रों की बात नहीं सुनते।” सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “अगर सांसदों का यह हाल है, तो सोचिए छात्रों के साथ क्या हो रहा होगा,” वहीं इमरान मसूद ने आरोप लगाया, “वे हमारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। छात्रों की पिटाई की गई। हमें धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ रहा है। वे संसद में भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।”
इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान घायल हुए छात्रों से मुलाकात की। वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
सोमवार को नड्डा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की, जिसने प्रधान के इस्तीफे, NEET उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (जिनमें से “20 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है”) और एक अन्य मांग रखी। बैठक के बाद, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने X पर पोस्ट किया, “हमें अभी तक सरकार से कोई जवाब नहीं मिला है। हम अपने प्रदर्शनकारियों का ख्याल रख रहे हैं। सरकार को सिर्फ फोटो खिंचवाने के बजाय प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए!”

पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के कई नेता दिल्ली में पीएम आवास के पास दोपहर करीब साढ़े 3 बजे से धरने पर बैठे। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कांग्रेस नेता शामिल थे। कुछ घंटे बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव पीएम आवास पर पहुंचे। इन्हें दिल्ली पुलिस ने वहां से हटाया।
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प्रधानमंत्री कार्यालय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को दावा किया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को नीट के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए आश्वासन दिया गया, लेकिन फिर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी रख दी। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिक्ष का रवैया लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
मोदी की तानाशाही देखिए।
देश के नेता विपक्ष के साथ ऐसा सुलूक किया जा रहा है।
शर्मनाक! pic.twitter.com/mPvojsUnbA
— Congress (@INCIndia) July 21, 2026
धरनास्थल पर राहुल गांधी से मुलाकात के बाद सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और अन्य वरिष्ठ नेता अकबर रोड के समीप अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे थे, जिसके बाद सरकार ने उनसे बातचीत के लिए उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को मौके पर भेजा था।
नरेंद्र मोदी का डर देखिए
पुलिस नेता विपक्ष के साथ कैसा बर्बरतापूर्ण बर्ताव कर रही है।
मोदी सरकार चाहे कुछ भी कर ले, कितना भी जोर लगा ले- हम देश के करोड़ों छात्रों के लिए लड़ते रहेंगे। pic.twitter.com/2NcBfxGE4Q
— Congress (@INCIndia) July 21, 2026
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया गया क्योंकि वह स्थान प्रदर्शन के लिए निर्धारित नहीं था और वहां धरने के कारण आम लोगों को असुविधा हो रही थी। सिंह के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन के सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार हो जाती है तो वह धरना समाप्त कर देंगे।
उन्होंने दावा किया कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अनुमति लेने के बाद राहुल गांधी को यह आश्वासन दिया गया कि सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी रख दी और कहा कि अब उनकी दो मांगें हैं।
सिंह ने कहा कि जब राहुल गांधी को याद दिलाया गया कि उन्होंने पहले केवल संसद में चर्चा की मांग की थी, तो उन्होंने जवाब दिया कि अब उनकी मांगें बदल गई हैं। सिंह ने कहा कि राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का अपनी बात से पीछे हटना ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ है और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार नीट और उससे जुड़े आंदोलन के सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस ने अब तक इस गंभीर विषय पर नियमों के तहत औपचारिक चर्चा के लिए कोई नोटिस नहीं दिया है। सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का व्यवहार लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

CM Yogi Barabanki Speech: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बाराबंकी की धरा से प्रदेशवासियों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी विरासत, विकास, गांव-गरीब, किसानों, नौजवानों और महिलाओं की जन्मजात विरोधी हैं। इनसे सावधान और सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे अन्यथा जैसे ही इनसे सटेंगे तो खतरा बढ़ेगा। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव, सरकारी धन की डकैती व लूट के बारे में बताइए। मुख्यमंत्री ने लोधेश्वर महादेव के सामने से जाने वाली सड़क को टूलेन से फोरलेन बनाने और गेट को भव्य बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बाराबंकी में रामनगर व दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 542 करोड़ से अधिक की 82 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। सीएम ने साहित्यिक विभूतियों, खिलाड़ियों, किसानों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, सीमा की सुरक्षा करने वाले युवाओं आदि का नाम लेकर बाराबंकी को विरासत, आध्यात्मिकता, साहित्य, समर्पण, युवा शक्ति से ओतप्रोत, स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान वाली प्रतिभाशाली व समृद्ध धरा बताया।
कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो विकास की लौ पहुंची लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर पर ध्यान नहीं दिया गया
सीएम ने कहा कि बाराबंकी को लोधेश्वर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है। सोमवार को बाबा का दर्शन कर अंतःकरण से आनंद की अनुभूति हुई। यहां अगल-बगल के कई जनपदों से श्रद्धालु आते हैं, फिर भी मंदिर जीर्ण-शीर्ण ही रहा। आजादी के बाद भी आपके पैसे से विकास की लौ कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो पहुंची, लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर, केडी सिंह बाबू की हवेली, पारिजात के महाभारत कालीन वृक्ष के संरक्षण, महादेवा, अयोध्या, काशी विश्वनाथ, गोला गोकर्णनाथ, महापुरुषों, वीरांगनाओं आदि के नाम पर योजनाओं के लिए पैसा नहीं मिला।
हमारी सरकार भगवान लोधेश्वर महादेव का कॉरिडोर बना रही है, जिससे देश-प्रदेश के हर कोने से यहां आने वाला श्रद्धालु अभिभूत होगा और बाराबंकीवालों को आशीर्वाद व धन्यवाद देकर जाएगा। सरकार गोला गोकर्णनाथ में भी भव्य कॉरिडोर बना रही है। विंध्यवासिनी मंदिर का कॉरिडोर बन गया। पहले काशी में गंदगी थी और गलियां संकरी थीं लेकिन अब वह भी दिव्य-भव्य बन गई है। देश से जो भी काशी व अयोध्या आता है, हमें भी धन्यवाद देकर जाता है।
केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी में 36 वर्ष बाद भारतीय टीम ने ओलंपिक में पदक जीता लेकिन उससे पहले मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू के समय भारत ने लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीता था। जिस खिलाड़ी ने हॉकी को पूरा जीवन दिया, उन केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी। हमने तय किया कि वहां संग्रहालय का निर्माण होगा। सीएम ने अमेरिका के न्यू जर्सी में हुए फीफा विश्वकप का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्पेन व अर्जेंटीना के मैच को देखकर लोगों में गजब का उत्साह था। ऐसे ही जब हॉकी चलती है तो भारत की निगाहें उस पर रहती हैं। मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू ने इसे नई ऊंचाई दी थी।
सनातन सुरक्षित तो सब सुरक्षित
सीएम ने कहा कि विरासत के संरक्षण व सनातन मूल्यों के रक्षा के लिए महापुरुषों ने योगदान दिया। राजा बलभद्र सिंह, लाखन पासी, बिजली पासी, महाराज सुहेलदेव, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह ने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए योगदान दिया। सुहेलदेव ने जहां सालार मसूद को मारा था, हमारी सरकार ने बहराइच में वहीं उनका भव्य स्मारक बनाया है। लखनऊ में वीरांगना उदा देवी, गोरखपुर में झलकारी बाई, बदायूं में अवंती बाई के नाम पर पीएसी बटालियन, बांदा में महारानी दुर्गावती, औरैया में लोकमाता अहिल्याबाई मेडिकल कॉलेज, अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट, निषादराज नाम पर रैनबसेरा का निर्माण किया है। देश के लिए योगदान व सनातन के लिए समर्पण देने वाले महापुरुषों को सरकार ने सम्मान दिया है। सनातन की सुदृढ़ नींव पर ही हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। सनातन सुरक्षित है तो हम सभी सुरक्षित हैं। सनातन पर खतरा आया तो कोई बच नहीं पाएगा। लोगों को बांटने वाले इन सपाइयों व कांग्रेसियों के नमूनों के मुंह संकट के समय बंद हो जाते हैं।
कट्टा- बम बनवाने वाले कराते थे गुर्गों से वसूली
सीएम ने कहा कि कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बनाने और कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी, रामनवमी की शोभायात्रा, दुर्गापूजा के पंडाल पर प्रतिबंध लगाना सपा के लिए निरपेक्षता का मानक था। हमें ऐसे धर्मनिरपेक्षता को उखाड़ फेंककर सनातन की सुदृढ़ भूमि पर सुरक्षित भारत का निर्माण करना होगा। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सनातन को अपमानित करने वाले लोग त्योहारों के पहले उपद्रव और गुर्गों से वसूली कराते थे। इन लोगों ने गांवों- शहरों में कट्टा-बम बनवाना शुरू कर दिया, जिससे व्यापारी व बेटी की इज्जत से खिलवाड़ होता था। अब लखनऊ में बने ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान व उसके आका बाप-बाप कहकर चिल्लाते हैं। निवेश आने से अब यूपी में ही युवाओं को नौकरी मिल रही है।
बुजुर्गों से बोले- युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव व लूट के बारे में बताइए
सीएम ने कहा कि समाजवादी जाति से जाति को लड़ा रही है। एक समय कहावत थी कि देख सपाई, बिटिया घबराई। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को इनकी गुंडागर्दी, उपद्रव, डकैती, अराजकता, लूट के बारे में बताइए। उन्होंने कहा कि सैफई घराना ने आमजन के पैसे पर लूट मचाई थी। सपा जिस जेपीएनआईसी को बना रही थी, उसकी कीमत 200 करोड़ थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च होने के बावजूद भी बिल्डिंग अधूरी थी। हमारी सरकार से पहले सपा ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया। सीएम ने यहां भी उनके घोटाले को उजागर किया। कहाकि जिसके लिए वे 15,200 करोड़ का एस्टिमेट बनाए थे। दो वर्ष बाद जमीन आने पर हमने प्रधानमंत्री जी से इसका शिलान्यास कराया और 11,800 करोड़ रुपये में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बनाया। गोमती रिवर फ्रंट का कुल एस्टिमेट 167 करोड़ रुपये था, लेकिन 1700 करोड़ खर्च होने के बावजूद वह अधूरा ही रहा।

डबल इंजन सरकार ने रोकी सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट
सीएम ने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने तो कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर यहां तक कह दिया कि 100 में से 15 पैसे ही नीचे आम जनता तक जाता है। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट को रोका। इस पैसे से अब नौजवान को छात्रवृत्ति, बेटी की शादी, कन्या सुमंगला योजना का लाभ, टैबलेट, किसानों को सम्मान निधि, गरीबों को प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना, स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। जिस पैसे से यह कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बना रहे थे, उस पैसे का हमने मुंह घुमा दिया और अब इससे कॉरिडोर बन रहा है। सैफई सिडिंकेट का युवाओं की नौकरी पर कब्जा था। नौकरियों की नीलामी होती थी, लेकिन अब बाराबंकी के युवाओं को भी निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरी मिल रही है।
सनातन विरोधी है सपा-कांग्रेस का चरित्र
मुख्यमंत्री ने विपक्षियों (सपा-कांग्रेस) के वास्तविक चरित्र को सनातन विरोधी बताया, कहा कि य़ह जनता के हक, विकास की परियोजनाओं पर डकैती डालते थे। इनके कारनामों से यूपी के सामने पहचान का संकट था। देश में यूपी टॉप-3 इकॉनमी बन गया है। अब बाढ़ बचाव का स्थायी समाधान और गोमती नदी का सुंदरीकरण-पुनरुद्धार हो रहा है। लखनऊ व अयोध्या के बीच स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) में शामिल बाराबंकी का विकास कोई रोक नहीं सकता।
सपा चट कर जाती थी राशन
सीएम ने कहा कि हमने दरियाबाद के विधायक सतीश चंद्र शर्मा को खाद्य व रसद राज्यमंत्री बनाया तो वे यहां के साथ ही अन्य जनपदों का भी विकास कर रहे हैं। सपा गरीब का राशन चट कर जाती थी, लेकिन अब हर गरीब का राशन उसे ही मिलता है। धांधली करने वालों पर कार्रवाई होती है। सपा व कांग्रेस के समय गरीब को पेंशन, छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने से पहले घूस लिया जाता है। आज सीधे अकाउंट में पैसा जाता है, बीच में घूसखोरी नहीं चल सकती। रामनगर ने जिन्हें 2022 और बाराबंकी ने जिन्हें 2024 में चुना, उन्हें विकास की चर्चा करने की फुर्सत नहीं है। इन लोगों ने एक बार भी विकास के प्रस्ताव नहीं दिए। यदि रामनगर विधानसभा और बाराबंकी लोकसभा में कमल खिला होता तो यह क्षेत्र भी विकास की बुलंदियों को छू रहा होता।
इस अवसर पर कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही, खाद्य व रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा, दिनेश रावत, विधान परिषद सदस्य अंगद कुमार सिंह, इंजी. अवनीश कुमार सिंह, जिला पंचायत प्रशासक राजरानी रावत, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद प्रियंका रावत, क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष राम सिंह वर्मा आदि मौजूद रहे।

Latest News Today Live Updates in Hindi : संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी संसद मार्च पर अड़ी। दिल्ली में धारा 163 लागू। पल पल की जानकारी…
जम्मू-कश्मीर: कल रात से हो रही लगातार बारिश की वजह से रियासी ज़िले में चिनाब नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है और नदी का पानी कई निचले इलाकों में बहने लगा है।कांग्रेस के लोकसभा सांसद विपक्ष के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी लेने के लिए संसद में कांग्रेस संसदीय दल (CPP) के दफ्तर में सुबह 10.30 बजे मिलेंगे।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा, 'भारत के इतिहास का सबसे बड़ा मार्च होने जा रहा है। पिछले 10-12 सालों से इस देश में लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। जंतर-मंतर पर एक महीने तक बैठकर आप लोगों ने लोकतंत्र को फिर से ज़िंदा किया है। देश भर से लोग आ रहे हैं। जब मैं अमेरिका में था, तो लोग मुझसे कहते थे कि कोई भी सड़कों पर नहीं उतरेगा कि यह सिर्फ सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बनकर रह जाएगा। आज जंतर-मंतर की ओर जाने वाली चारों सड़कों को देखिए; वे पूरी तरह से भरी हुई हैं… संसद जाने से हमें कोई नहीं रोक सकता।'
-संसद के मानसून सत्र और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
-पुलिस हाई अलर्ट पर है। 5000 से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया है।
-संसद, इंडिया गेट और VVIP इलाकों के आस-पास के संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
-दिल्ली पुलिस ने इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्टा होने पर रोक।

– भाजपा ने हर वर्ग और हर समाज को कुछ न कुछ दिया, अब देने की बारी आपकी है
– भाजपा ने विकास के कार्यों में कभी कमी नहीं रखी और आगे भी यह विकास होते रहेंगे
– हमारा संकल्प है सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास, इसे पूरा करेंगे
Bharat Singh Kushwah : दतिया उपचुनाव के प्रभारी व ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह ने शनिवार को दतिया में कुशवाह समाज, पाल-बघेल समाज एवं लोधी समाज के वरिष्ठजनों, प्रबुद्धजनों एवं संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा ने हर वर्ग, हर समाज को कुछ न कुछ दिया है। अब सभी समाजों की बारी है कि वह भाजपा प्रत्याशी को अपना आशीर्वाद देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का हाथ मजबूत करें। भाजपा ने विकास के कार्यों में कभी कमी नहीं रखी, आगे भी विकास ही हमारा मुख्य लक्ष्य होगा। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास, इसे हर हाल में पूरा करेंगे।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थामा भाजपा का दामन
दतिया विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जनकल्याणकारी कार्यों और भारतीय जनता पार्टी की रीति-नीति से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर सभी ने उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को विजयी बनाने का संकल्प लिया।

भाजपा सरकार ने विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी
ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह ने कहा कि भाजपा सरकारों ने दतिया के विकास में काई कसर नहीं छोड़ी है। भाजपा ने सभी समाज वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किया है। सभी समाज के लोग भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को ऐतिहासिक मतों से विजयी बनाने के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
उन्होंने सामाजिक संगठनों के वरिष्ठजनों, पदाधिकारियों एवं समाजजनों से अपील की है कि वे भाजपा प्रत्याशी को विजयी बनाने में अपना सहयोग दें, ताकि भाजपा की डबल इंजन की सरकार में एक विकास का डिब्बा और जुड़ जाए। इस दौरान सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठजनों ने विश्वास दिलाया है कि वे भाजपा के विकास के साथ थे और आगे भी रहेंगे।
ये रहे उपस्थित
कुशवाह समाज की बैठक में दतिया जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह, पूर्व मंत्री राजकुमार कुशवाह, कालीचरण कुशवाह, जिला उपाध्यक्ष श्रीमती रानी कुशवाह, भगवान सिंह कुशवाह, राजाराम कुशवाह, घनश्याम बाबूजी, इमरत कुशवाह, मानसिंह कुशवाह सहित समाज के वरिष्ठगण एवं युवा साथी उपस्थित रहे।
पाल-बघेल समाज की बैठक में अखिल भारतीय पाल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्षशैतान सिंह पाल, कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, जिला अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग मोर्चा मनोहर फौजी, रामसिंह पाल, हरगोविंद बघेल, डॉ अरविंद पाल, घुमक्कड़ आयोग जिला अध्यक्ष जयराम पाल, कमलेश पाल, डॉ ब्रजेश पाल, हरगोविंद पाल, रामसेवक पाल, वेद पाल, पंजाब सिंह पाल सहित पाल बघेल समाज के वरिष्ठगण उपस्थित रहे। लोधी समाज की बैठक में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के साथ समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

