छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर मामले को लेकर संसद परिसर में विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर “बल प्रयोग” को लेकर बृहस्पतिवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया तथा सरकार एवं गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की।

सपा सांसदों ने संसद के मकर द्वार के निकट प्रतीकात्मक रूप से “दान पेटी” रखकर प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ नारेबाजी की।

कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्रों पर कथित बल प्रयोग के विषय का उल्लेख करते हुए एक बैनर भी ले रखा था जिस पर “ऑर्डर किसने दिया” लिखा हुआ था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, के सी वेणुगोपाल, सपा नेता धर्मेंद्र यादव और कई अन्य सांसद इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

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उल्लेखनीय है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों पर कथित बल प्रयोग को लेकर सदन में शाह पर गंभीर आरोप लगाये थे जिसके बाद सत्तापक्ष ने उनसे माफी की मांग की थी।

बाद में गांधी ने संवाददाता सम्मेलन में शाह को छात्रों के साथ कथित बर्बरता के लिए जिम्मेदार ठहराया था और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी। उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल सपा के सांसदों ने राम मंदिर मामले पर बुधवार को भी संसद परिसर में प्रदर्शन किया था।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी “आस्था के साथ विश्वासघात” के दोषी हैं। उन्होंने दावा किया कि दान-पात्र से चढ़ावे की कथित चोरी, गुप्त दान में अनियमितताएं, जमीन सौदों में कथित गड़बड़ियां, सबूत मिटाने और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं।

उनका कहना है कि यह “अक्षम्य महापाप” है और “लोकधन की लूट” का मुद्दा संसद में उठाना सभी का दायित्व है। यादव ने यह भी कहा कि मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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लोकसभा में विपक्ष का हंगामा, लगातार आठवें दिन नहीं चल सका प्रश्नकाल

लोकसभा में बृहस्पतिवार को विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण प्रश्नकाल लगातार आठवें दिन नहीं चल सका और कार्यवाही शुरू होने के कुछ मिनट के भीतर दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।

कांग्रेस सदस्यों को बुधवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान पैदा हुई गतिरोध की स्थिति का मुद्दा उठाते देखा गया। वह दिल्ली में पिछले सप्ताह प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग भी दोहराते सुने गए।

बैठक शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्हें बधाई दी। बिरला ने पैरा एथलीट दिलीप गावित के स्वर्ण पदक प्राप्त करने और मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनकाथ के रजत पदक जीतने का उल्लेख किया।

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उन्होंने रजत पदक विजेता मुरली श्रीशंकर का भी उल्लेख किया जो राष्ट्रमंडल खेलों में लंबी कूद स्पर्धा में रजत पदक के साथ लगातार दो पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके बाद अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू कराना चाहा, लेकिन विपक्षी सदस्य अपनी मांगें उठाने लगे।

वह बुधवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान पैदा हुई गतिरोध की स्थिति का मुद्दा उठा रहे थे और दिल्ली में पिछले सप्ताह प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग दोहरा रहे थे।

बिरला ने विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल बाधित नहीं करने का अपना आग्रह दोहराया। शोर-शराबा नहीं थमने पर उन्होंने कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी और तब से सदन में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे की स्थिति के कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका है।

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दतिया विधानसभा सीट पर क्या टूटेगा 2023 की वोटिंग का रिकार्ड, बंपर वोटिंग में कौन मारेगा बाजी?

मध्यप्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल विधानसभा सीट दतिया में आज मतदान हो रहा है। दोपहर 3 बजे तक 61 फीसदी से करीब मतदान हो चुका है। आज मतदान के दिन भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह दोनों ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है। वहीं दतिया उपचुनाव में सबसे अधिक चर्चा में रहने वाले पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी अपने मताधिकार का उपयोग किया। वोट डाले के बाद नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की जीत का दावा किया।  

 

वोटिंग ट्रैंड से भाजपा-कांग्रेस में कांटे के मुकाबले के संकेत-दतिया विधानसभा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी और कांग्रेस प्रत्याशी धनश्याम सिंह के बीच कांटे का मुकाबला देखा जा रहा है। दतिया के शहरों इलाकों के साथ ग्रामीण इलाकों में सभी 291 पोलिंग बूथों पर जिस तरह से मतदान का ट्रैंड देखने को मिल रहा है, उससे यह साफ है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर चल रही है, वहीं एसी वर्ग का एक बड़ा वोट बैंक दमोदर यादव के साथ भी जा सकता है। जैसे-जैसे वोटिंग का समय बीतता जा रहा है वैसे-वैसे ग्रामीण इलाकों में मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी-लंबी कतारें नजर आ रही है। 

दतिया विधानसभा सीट पर अब तक हुआ मतदान इस बात की ओर साफ इशारा है कि शाम 6 बजे तक मददान प्रतिशत 2023 के विधानसभा चुनाव की तरह 80 फीसदी के उपर जा सकता है। गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया विधानसभा सीट पर 80.20 फीसदी मतदान हुआ था और भाजपा प्रत्याशी नरोत्तम मिश्रा को करीब 8 हजार वोटों से कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था।   

 

दमोदर यादव साबित होंगे किंगमेकर?- दतिया विधानसभा में आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दमोदर यादव गेमचेंजर साबित हो सकते है। दतिया विधानसभा में एससी वोटर्स की संख्या 60 हजार के करीब है और दतिया के ग्रामीण इलाकों में एससी वोटर्स का झुकाव दामोदर यादव की ओर हो सकता है। इसके साथ ओबीसी समाज का एक वोट बैंक भी दमोदर यादव के साथ जा सकता है।  

 

सोशल मीडिया से वायरल कंटेट से किसका नफा-किसका नुकसान?-दतिया में पोलिंग के दिन सोशल मीडिया पर जिस तरह कंटेट वायरल हुए उसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। सुबह 7 बजे मतदान शुरु होते ही सोशल मीडिया पर भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह को उनके पद से निष्कासित करने का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का एक फर्जी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस फर्जी पत्र के लिए भाजपा ने किश रावत नाम के शख्स के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की है। चुनाव आयोग से शिकायत भाजपा ने आरोप लगाया है कि किश रावत ने फेसबुक पर भ्रामक और आपत्तिजनक पत्र अपलोड किया, जिसके कारण दतिया के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है और इसके कारण कानून और व्यवस्था की स्थिति उत्तपन्न हो सकती है। भाजपा ने किश रावत के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

दतिया विधानसभा सीट पर कुशवाह वोटर्स की संख्या 40 हजार से उपर है और चुनाव में कुशवाह वोटर्स निर्णायक भूमिका निभा सकते है, इसलिए पोलिंग के ठीक पहले बुधवार शाम वार्ड एक से पार्षद रहे कल्लू कुशवाह हत्याकांड मामले में उनकी पत्नी संतोष कुशवाह का भाजपा का विरोध करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में कल्लू कुशवाह की पत्नी ने अपने पति के हत्याकांड के आरोपी साहब सिंह यादव के भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के साथ चुनाव प्रचार करने का आरोप लगाया। इसके साथ उन्होंने कुशवाह समाज के वोटर्स से भाजपा को हराने की अपील की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर दतिया के भाजपा के कुशवाह समाज के नेताओं और पार्षदों के वीडियो आए जिसमें  कुशवाह समाज से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की गई।  

पेपर लीक कैसे रोकेंगे! मल्लिकार्जुन खरगे ने क्यों कहा अधूरा बिल लाई सरकार

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में 'परीक्षा संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। खरगे ने सरकार की नीयत और बिल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नया संशोधन विधेयक युवाओं की समस्या को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में उबल रहे छात्रों के गुस्से को ठंडा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने साफ लहजे में पूछा कि जब इस बिल में यही नहीं बताया गया है कि असल में 'पेपर लीक' कैसे रोका जाएगा, तो फिर इस अधूरे बिल का क्या मतलब?

युवाओं के संघर्ष के आगे झुकी सरकार

राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते एक महीने से देश के युवा सड़कों पर धरने पर बैठे थे और अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। यह युवाओं और छात्रों के अनवरत संघर्ष की ही ताकत है कि आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा। खरगे ने कहा कि सरकार ने खुद अपनी विफलता छिपाने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में पेश किया है। जो कदम सरकार आज उठा रही है, उसे 2024 की शुरुआत में ही क्यों नहीं उठाया गया? ALSO READ: सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

केवल आंकड़े बदले हैं, समस्या वहीं की वहीं

विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस नए संशोधन बिल से जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदलने वाला। इसमें कानून की धाराओं और आंकड़ों में भले ही हेरफेर कर दी गई हो, लेकिन मूलभूत समस्या के समाधान पर यह बिल पूरी तरह मौन है। खरगे ने सवाल उठाया कि बिल में सजा और जुर्माने की बातें तो कह दी गईं, लेकिन 'पेपर लीक' के उस नेक्सस (गिरोह) को कैसे खत्म किया जाएगा और भविष्य में लीक रोकेंगे कैसे, इसका कोई खाका या उल्लेख इस पूरे बिल में है ही नहीं। यह बिल आधा-अधूरा और सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ALSO READ: किसने दिया ऑर्डर?' पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

पीएम और गृहमंत्री की चुप्पी पर सवाल

सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि देश का भविष्य यानी युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा था, लेकिन न तो प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर कुछ बोले और न ही गृहमंत्री अमित शाह कहीं नजर आए। खरगे ने पूछा कि इतनी बड़ी-बड़ी धांधलियां और धांधलेबाजों के हौसले बुलंद होने के बावजूद गृहमंत्री आखिर क्यों चुप हैं? जब छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तो सरकार ने उन्हें 'अराजक' करार दे दिया। खरगे ने सवाल किया कि सरकार ने महीनों से प्रदर्शन कर रहे इन मासूम छात्रों से समय रहते बातचीत करने की जहमत तक क्यों नहीं उठाई? ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

'प्रधान' को हटाना पड़ा, पर व्यवस्था कब बदलेगी?

मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि बढ़ते जनाक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सरकार को प्रधान को हटाना ही पड़ा। लेकिन सिर्फ चेहरे बदलने से या दिखावे के लिए ऐसा बिल लाने से काम नहीं चलेगा। जब तक पेपर लीक के सिंडिकेट को खत्म करने का पुख्ता मैकेनिज्म नहीं बनता, तब तक लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

विपक्ष ने बुलंद की छात्रों की आवाज

खरगे ने राज्यसभा के पटल से देश के युवाओं को भरोसा दिलाया कि विपक्ष उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक छात्रों के हक की लड़ाई लड़ता रहेगा और सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देगा।

गृहमंत्री से इस्तीफा मांगा

सरकार पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि पेपर बाजार में बिकता रहा और पता नहीं चला। क्या सरकार सो रही थी? हमारी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब दें। यदि वे सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं तो इस्तीफा दे दें। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं पीएम मोदी को उन्हें हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2016, 21, 24 और अब 26 में पेपर लीक हो चुके हैं। कहां है कड़ी से कड़ी सजा? उन्होंने पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेन्द्र प्रधान के स्वागत को भी उन्होंने सरकार की नाकामी बताया। 

गृह मंत्री संसद में आने से क्यों डर रहे हैं, ‘अपराधबोध’ नजर आता है : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर बीते 20 जुलाई को बलप्रयोग किए जाने को लेकर बृहस्पतिवार को गृह मंत्री अमित शाह पर एक बार फिर निशाना साधा और सवाल किया कि वह संसद में आने से तथा इस मामले पर सफाई देने से क्यों डरे हुए हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने यह दावा भी किया कि गृह मंत्री के इस रुख से ‘‘अपराधबोध’’ दिखाई देता है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अमित शाह छात्रों के खिलाफ हुई बर्बर हिंसा पर संसद में आकर सफाई देने से इतना क्यों डर रहे हैं? इससे अपराधबोध की बू आती है।

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उन्होंने यह भी कहा कि छात्र न्याय के हकदार हैं और उनके साथ प्रदर्शन के दौरान हुई कथित बर्बरता की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का एक वीडियो साझा करते हुए कहा, ‘‘छात्र न्याय के हकदार हैं। हमारे छात्रों के साथ हुई बर्बरता की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने बुधवार को कहा था कि दिल्ली में विद्यार्थियों के साथ हुई ”बर्बरता” के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं और उन्हें पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह मांग भी की थी कि पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में उच्चाधिकार-प्राप्त समिति से जांच कराई जानी चाहिए।

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किसने दिया ऑर्डर?’ पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

opposition leaders protes in parliament

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर मचा बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कांग्रेस सांसदों ने इस मामले में संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। उनके हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था- 'किसने दिया ऑर्डर?' ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

 

प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ किया गया।

 

पार्टी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह जवाब दो- छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया?' आज विपक्ष के सांसदों ने छात्रों पर की गई बर्बरता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर, मोदी सरकार से जवाबदेही की मांग की। ALSO READ: दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, प्रदर्शनकारी को गोली लगने का दावा गलत, मेडिकल रिपोर्ट में नहीं मिले सबूत

संसद से क्यों भाग रहे हैं गृहमंत्री

कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि दिल्ली में पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया? दिल्ली में छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया? हमें भारत के गृह मंत्री से जवाब चाहिए। भारत के गृह मंत्री संसद से क्यों भाग रहे हैं? आप तो विपक्ष के नेता (LoP) को भी बोलने नहीं दे रहे हैं।

 

क्या गृह मंत्री ने कहा कि SDM ने गलत किया? 

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि ये बड़ी स्पष्ट बात है कि यदि कोई पैलेट गन चलाता है या ऐसी कार्रवाई करता है तो इसकी अनुमति तो कोई देता है। यदि कोई कह रहा है कि SDM ने अनुमति दी तो क्या हमारे गृह मंत्री ने ये कहा कि SDM ने गलत किया? हमारे गृह मंत्री चुप क्यों हैं? इससे साफ जाहिर है कि ये उनकी सहमति से ही हुआ है नहीं तो वे कहते कि SDM ने गलत काम किया है। एक तरफ भाजपा कह रही है कि पैलेट गन नहीं चली और जब साबित हो गया कि पैलेट गन चली तो उन्हें ये बात माननी पड़ी। फिर केंद्रीय गृह मंत्री चुप क्यों है?

मांझलपुर उपचुनाव में कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग जारी, भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर

voting in manjalpur gujarat

Manjalpur By Election 2026 : वडोदरा की 145-मांझलपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। मतदाता शाम 6:00 बजे तक अपने वोट डाल सकेंगे। 3 अगस्त 2026 को मतगणना होगी और मांझलपुर के नए विधायक के नाम का फैसला होगा। यहां भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर है।

 

मांझलपुर विधानसभा क्षेत्र के कुल 2,19,494 पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें, इसके लिए 260 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए इस बार पहली बार हर मतदान केंद्र पर 'मोबाइल डिपॉजिशन सेंटर' की विशेष व्यवस्था की गई है।

 

सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए 100% वेबकास्टिंग

मतदान प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता, सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से सभी 260 मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है। इसके लिए कुल 520 कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से मतदान की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर कलेक्ट्रेट में स्थित कंट्रोल रूम से सीधी नजर रखी जा रही है।

 

कानून-व्यवस्था के लिए 1,400 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात

पोलिंग स्टाफ को 28 रूटों के जरिए सुरक्षित मतदान केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इस पूरी चुनाव प्रक्रिया में 286 प्रिसाइडिंग ऑफिसर, 858 पोलिंग ऑफिसर, 286 चपरासी और 1,400 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां भी लगाई गई हैं, जबकि संवेदनशील मतदान केंद्रों पर माइक्रो ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति की गई है।

 

भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर

चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए पूरा जोर लगाया। सालों से भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर भाजपा अपना दबदबा बरकरार रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस बदलाव की उम्मीद के साथ मैदान में है। 

 

मांझलपुर सीट का चुनावी इतिहास

वडोदरा की मांझलपुर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और तब से यह भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। 2012 में भाजपा उम्मीदवार योगेश पटेल को 67.33% वोट मिले थे। 2017 के चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 1.83% घटकर 65.50% हुआ। 2022 के चुनाव में योगेश पटेल ने 75.85% वोट शेयर हासिल कर शानदार जीत की हैट्रिक लगाई।

 

योगेश पटेल के निधन के कारण हो रहा है उपचुनाव

मांझलपुर के तत्कालीन भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन के कारण यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते यह उपचुनाव कराया जा रहा है। इस चुनाव में भाजपा की ओर से सतीश पटेल और कांग्रेस की ओर से भीखाभाई रबारी मैदान में हैं। आज मतदान के बाद दोनों प्रमुख उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य EVM में कैद हो जाएगा, जिस पर पूरे वडोदरा शहर और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर टिकी हुई है।

कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला

पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला जारी है। अलग अलग कारणों से मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। कुछ और मंत्रियों का इस्तीफा होना है, जिसका इंतजार चल रहा है। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थोड़ी अलग परिस्थितियों में हुआ है। इसकी तुलना यूपीए दो की सरकार में खेल मंत्री रहे सुरेश कलमाड़ी के इस्तीफे से की जा रही है। यूपीए दो की सरकार में कलमाड़ी सबसे पहले मंत्री थे, जिनको भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफा देना प़ड़ा था। उनके ऊपर कॉमनवेल्थ खेलों में ग़ड़ब़ड़ी के आरोप लगे थे। उसके बाद तो सिलसिला ही शुरू हो गया था। मंत्रियों के इस्तीफे और सांसदों की गिरफ्तारी का सिलसिला ऐसा चला कि पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया और कांग्रेस 2014 का चुनाव बुरी तरह से हारी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भ्रष्टाचार के आरोपों में नहीं हुआ है। लेकिन उनके ऊपर जिम्मेदारी के निर्वहन में अक्षमता के आरोप लगे। उनके कार्यकाल में दो बार नीट यूजी का पेपर लीक हुआ। इस साल पेपर लीक के बाद 21 छात्रों की जान गई। तब भी छात्रों और युवाओं के भारी दबाव में उनका इस्तीफा हुआ।

बहरहाल, प्रधान के इस्तीफे से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा हुआ था। उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है। गौरतलब है कि वे 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से पाला बदल कर भाजपा में गए थे और लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद उनको मंत्री बनाया गया था। बाद में राजस्थान से राज्यसभा के उपचुनाव में जीत कर उच्च सदन के सदस्य बने थे। इस बार उनको राज्यसभा की टिकट नहीं मिली है। कहा जा रहा है कि वे पंजाब में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। उनसे पहले जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा नहीं दी गई थी और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वे केरल के रहने वाले हैं और उनको मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। केरल के चुनाव में भाजपा हार गई। फिर कुरियन को मध्य प्रदेश से राज्यसभा नहीं भेजा गया।

इनके अलावा दो और मंत्रियों के इस्तीफे का इंतजार हो रहा है। एक व्यक्ति, एक पद के हिसाब से इनका इस्तीफा होगा। केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली में संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। ये दोनों लोकसभा सांसद हैं और अभी दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बताया जा रहा है कि संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के साथ ही इनका इस्तीफा होगा। उसके बाद नरेंद्र मोदी की सरकार में फेरबदल होगी। 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के बाद किसी भी दिन सरकार में बड़ी फेरबदल होगी। 20 अगस्त की तारीख बताई जा रही है। गौरतलब है कि मोदी की तीसरी सरकार के दो साल पूरे हो गए हैं और अभी तक सरकार में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कम से कम पांच मंत्री पद खाली हो गए हैं या होने वाले हैं। इनके अलावा भी कई मंत्रियों को बदले जाने की चर्चा है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की वजह से ही पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम नहीं बन रही है। उनको अध्यक्ष बने छह महीने से ज्यादा हो गए। वे अब भी पुरानी टीम के साथ ही काम कर रहे हैं। उनको भी अगस्त में नई टीम मिलेगी। प्रधानमंत्री की टीम बिल्कुल नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाली होगी।

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच गए थे और यहां तक कहा था कि अपने हिसाब से सीटें देकर भी एमआईएम को गठबंधन में एडजस्ट किया जाए। ओवैसी ने यह दांव इसलिए चला था कि बिहार के मुस्लिम मतदाताओं को यह मसैज दिया जाए कि वे भाजपा को हराना चाहते हैं इसलिए विपक्षी गठबंधन में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि लालू प्रसाद और कांग्रेस दोनों ने उनके प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दिया। वे अकेले लड़े और उनके पांच विधायक जीत गए।

अब ओवैसी ने यही दांव उत्तर प्रदेश में चला है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के सामने तालमेल का प्रस्ताव रखा है। ओवैसी ने अखिलेश यादव से कहा है कि अभी समय है गठबंधन की बात कर ली जाए। साथ ही यह भी कहा है कि अभी गठबंधन करना है तो कर लें या कह दें कि चुनाव के बाद शिकायत नहीं करेंगे। असल में सपा, राजद या कांग्रेस आदि पार्टियां ओवैसी पर हमेशा आरोप लगाती रहती हैं कि वे भाजपा की बी टीम की तरह काम करते हैं। इस आरोप से छुटकारा पाने का तरीका भी यही है कि वे अपनी ओर से गठबंधन का प्रस्ताव रखें। उनको पता है कि कोई भी पार्टी उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी। इसलिए वे पूरे भरोसे से गेंद उन पार्टियों के पाले में डाल देते हैं। अब वे अकेले लड़ेंगे तो प्रचार में कहेंगे कि उन्होंने तो पहल की थी। उनके इस प्रचार का युवा मुस्लिम मतदाताओं पर असर होता है।

संसद से 500 मीटर दूर भारत के बच्चों को मारा, मैंने अमित शाह को फोन करते देखा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने लगाए आरोप

rahul gandhi

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीट पेपर लीग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शन की 5 तस्वीरें दिखाईं। 'संसद से 500 मीटर दूर भारत के बच्चों को मारा है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ बर्बरता की गई। मुद्दे उठाना मेरा अधिकार है। युवाओं पर पैलेट गन इस्तेमाल की गई है। मैंने अमित शाह को फोन करते हुए देखा है। मुझे लोकसभा में बोलने नहीं दिया। स्पीकर ने मुझे बोलने नहीं दिया। गृह मंत्री ने आदेश नहीं दिए तो किसने दिए। छात्रों को नुकीली लाठियां मारी गईं। 

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह गृह मंत्री हैं। पैलेट गन का इस्तेमाल गृह मंत्री की इजाजत के बिना नहीं किया जाता है। गृह मंत्री ने ऑर्डर किया था पैलेट गन चलाने का या फिर इन्हें पता ही नहीं था कि ऐसा दिल्ली में हो रहा था। कोई भी कारण हो लेकिन इन्हें हटाया जाना चाहिए। ये लोकसभा में नहीं आ पाए हैं। हिंसा किसने की थी? दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि आज मैंने देखा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने की इजाज़त नहीं दी गई। कई बार संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बोलने का मौका मिला लेकिन मुझे नहीं क्योंकि मैंने कहा था कि जो बर्बरता हुई, उसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ज़िम्मेदार थे। अगर मैं माफ़ी मांगता तो मुझे बोलने की इजाज़त मिल जाती। मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा। मेरे लिए सबसे अहम मुद्दा यह है कि दिल्ली की सड़कों पर हमारे छात्रों के साथ बर्बरता की गई। उन पर पैलेट गन से गोलियां चलाई गईं।

सवालों का जवाब नहीं मिला 

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 25 तारीख को मैंने गृह मंत्री को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें मैंने 2 सवाल पूछे थे। पहला सवाल था कि आपने पैलेट गन इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी हां या न। दूसरा सवाल था कि सादे कपड़ों में जो लोग बच्चों को लाठियों से मार रहे हैं ये लोग कौन है? ये पुलिसवाले हैं या फिर कोई और? सवालों का जवाब नहीं मिला है।