अभिजीत दीपके का कंगना पर तीखा तंज, उन्हें गंभीरता से लेता ही कौन है?

kangana ranaut gutter generation controversy

kangana ranaut gutter generation controversy: युवाओं और Gen-Z पीढ़ी को 'गटर जनरेशन' बताने और प्रदर्शनकारी लड़कियों पर अश्लीलता का आरोप लगाकर घिरीं बीजेपी सांसद व अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अपने बयान पर मचे बवाल के बीच कंगना ने एक नया सेल्फी वीडियो जारी कर अपने बयानों को सही ठहराने की कोशिश की, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कंगना रनौत की दलीलों और टिप्पणियों को पूरी तरह बेतुका करार देते हुए उन पर करारा तंज कसा है।

उन्हें गंभीरता से कौन लेता है?

कंगना रनौत के नए वीडियो और सफाई के बाद CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके ने चुटकी लेते हुए कंगना के वजूद पर ही सवाल उठा दिया। दीपके ने बेहद बेबाक अंदाज में कहा कि अरे, उन्हें (कंगना रनौत को) गंभीरता से लेता ही कौन है? दीपके के इस तंज ने कंगना के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए यह संदेश दिया कि सांसद के रूप में उनके ऐसे विवादित और गैर-जिम्मेदाराना बयानों की राजनीति में कोई गंभीरता नहीं रह गई है। ALSO READ: कंगना रनौत का गटर ज्ञान, Gen Z को 'गटर जनरेशन' कहकर काटा बवाल, कांग्रेस और सोशल मीडिया ने लिया आड़े हाथ

कंगना रनौत ने वीडियो जारी कर दी सफाई

इससे पहले, अपने विवादित बयानों से घिरीं कंगना रनौत ने एक सेल्फी वीडियो जारी कर अपने रुख को जायज ठहराने की कोशिश की। मीडिया और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कंगना ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील आचरण और अभद्र भाषा को किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

 

कंगना ने वीडियो में कहा कि हम अपने समाज में इस तरह के बर्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते। हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे यह सब देखें या बुजुर्गों के सामने शर्मिंदा होना पड़े। उन्होंने कहा कि संविधान और सीमाओं का पालन करना होगा। तथाकथित 'फेमिनाजी' युवाओं को जानवरों जैसा बर्ताव करना सिखा रही हैं। इनके बहकावे में आकर जिंदगी बर्बाद न करें, वरना अंत में जेल जाना पड़ेगा। ALSO READ: 'राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों को PM आवास क्यों ले जा रहे थे?' CJP प्रदर्शन के बीच कंगना रनौत का बड़ा हमला

कैसे शुरू हुआ था 'जनरेशन गटर' विवाद?

यह पूरा विवाद तब भड़का था जब कंगना रनौत ने बिना मेहनत किए 'इन्डिपेन्डेन्ट वुमन' बनने की नकल करने वाली महिलाओं पर तंज कसा था। उन्होंने ऐसी महिलाओं को 'भ्रष्ट', 'नशे में धुत' और 'मल्टीपल बॉडी काउंट रखने वाली' बताते हुए पूरी जनरेशन को 'गटर जनरेशन' कह दिया था। इस बयान के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास और कई छात्र संगठनों ने कंगना के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

Rahul Gandhi : राहुल गांधी के आरोपों से लोकसभा में हंगामा, अमित शाह पर छात्रों पर गोली चलवाने का आरोप, सरकार ने मांगा सबूत, पेपर लीक बिल पर तीखी बहस

rahul gandhi

लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने का आदेश गृह मंत्री ने दिया था।

आज शाम 6 राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि मुझे बीजेपी ने बोलने नहीं दिया। उनके इस बयान पर सदन में भारी हंगामा मच गया और भाजपा सांसदों ने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे। राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि गृह मंत्री ने हमारे छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया। उन्होंने छात्रों के शरीर में पैलेट पहुंचाए। छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश केवल गृह मंत्री या प्रधानमंत्री ही दे सकते हैं।” उन्होंने अमित शाह की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री सदन में आने का साहस नहीं दिखा रहे हैं और वे डरे हुए हैं।

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किरण रिजिजू ने पूछा- आरोप का आधार क्या है?

 

राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “आप इतने गंभीर आरोप किस आधार पर लगा रहे हैं? आपको यह जानकारी किसने दी? यह पूरी तरह गलत है। इस बयान को सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।” रिजिजू ने राहुल गांधी से माफी मांगने की भी मांग की और कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए इस तरह का निराधार आरोप लगाना संसदीय गरिमा के खिलाफ है।

 

RSS पर भी साधा निशाना

 

राहुल गांधी ने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय पर RSS का प्रभाव है और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान केवल एक प्रतीक थे। उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्रालय की आत्मा पर RSS का कब्जा है। मंत्रालय को वास्तव में RSS चला रहा है।”

 

राहुल गांधी ने हालिया छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि एक छात्र ने उन्हें समाज की तीन श्रेणियां बताईं—स्टूडेंट्स, इडियट्स और अंधभक्त। उन्होंने अंधभक्तों को लेकर की गई टिप्पणी भी दोहराई, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी की कई टिप्पणियों को असंसदीय बताते हुए कार्यवाही से हटाने (Expunge) का निर्देश दिया।

 

पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा से पारित

 

लोकसभा ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का दावा है कि यह कानून पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाएगा।

 

डिंपल यादव ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल

 

समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में भी इसी विषय पर कानून पारित किया गया था और उसमें 101 सिफारिशें शामिल थीं। इसके बावजूद देशभर में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं।

 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीयत और नीति दोनों स्पष्ट नहीं हैं और पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार से प्रभावित हो चुका है। उनके मुताबिक केवल संशोधन लाने से कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा और इसका नुकसान देश के युवाओं को उठाना पड़ रहा है।

 

अनुराग ठाकुर बोले- राहुल गांधी युवाओं से माफी मांगें

 

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों के लिए 'इडियट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिसके लिए उन्हें देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आंदोलन के दौरान कहीं भी गोली नहीं चली। राहुल गांधी ने गृह मंत्री पर झूठे आरोप लगाए हैं। उन्हें अमित शाह और देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।”

 

प्रियंका गांधी बोलीं- देश ने सब देखा

 

लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर के बाहर कहा, “पूरे देश ने देखा कि क्या हुआ। एक छात्र की आंख चली गई।”

 

जितेंद्र सिंह का राहुल गांधी पर तंज

 

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि 21 जुलाई को वह प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर बैठ गए थे क्योंकि उनकी इच्छा वहां रहने की थी। उन्होंने कहा कि जब उन्हें वहां से हटाने की विनम्र कोशिश की गई तो उन्होंने स्वयं कहा कि उन्हें वहां से हटाया जाए।

 

अखिलेश यादव ने गृह मंत्रालय को ठहराया जिम्मेदार

 

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रों को विपक्ष के पहुंचने से पहले ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उनके मुताबिक दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं, इसलिए इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।

 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पेपर लीक, छात्र आंदोलन और सरकार की कार्रवाई को लेकर संसद में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। विपक्ष सरकार पर युवाओं के साथ अन्याय का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार विपक्ष पर भ्रामक और निराधार आरोप लगाने का आरोप लगा रही है।

एक्टिविज्म करना है तो सजा के लिए तैयार रहें, नड्डा का खरगे पर पलटवार

JP Nadda statement Rajya Sabha: संसद के मॉनसून सत्र में नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर बुधवार को राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पुलिस कार्रवाई और माकपा कार्यालय में पुलिस के प्रवेश को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस पर पलटवार करते हुए राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया और स्पष्ट कहा कि अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है, तो उसे इस तरह की कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाकर जोरदार हंगामा किया। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने माकपा कार्यालय में दिल्ली पुलिस के दाखिल होने और जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के प्रयास का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि 2021 के एक मामले में सादे कपड़ों में आई पुलिस टीम ने केवल इसलिए यह कार्रवाई की क्योंकि आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में भाग लिया था। ALSO READ: संसद में आर-पार, सपा सांसदों का दानपेटी प्रदर्शन, प्रियंका बोलीं मैंने कुछ गलत नहीं कहा

खरगे का सरकार पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में घुसकर किसी को गिरफ्तार करने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक है। क्या इससे लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ता? खरगे ने पुलिस टीम पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे कदम देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर आघात हैं।

केन्द्रीय मंत्री नड्डा का पलटवार

खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का मजबूती से समर्थन किया। अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए नड्डा ने कहा कि ये बहुत ही सामान्य स्थिति है। मैं खुद स्टूडेंट एक्टिविस्ट रहा हूं। इमरजेंसी के दौरान मुझे कई बार क्लासरूम से उठाकर ले जाया गया, तब देश में कांग्रेस की सरकार थी। अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है तो उसे ये सब झेलना ही पड़ेगा। ALSO READ: Priyanka Gandhi : प्रियंका गांधी के बयान पर संसद में बवाल, प्रह्लाद जोशी पर टिप्पणी से मचा हंगामा, माफी की उठी मांग

 

नड्डा ने आगे कहा कि जब कोई कानून हाथ में लेता है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभानी ही पड़ती है। इसे गैर-जरूरी तरीके से सनसनीखेज बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने खुद दो बार गिरफ्तारी झेली है, इसलिए छात्र राजनीति में ऐसी सजाओं के लिए तैयार रहना पड़ता है।

संसद में आर-पार, सपा सांसदों का दानपेटी प्रदर्शन, प्रियंका बोलीं मैंने कुछ गलत नहीं कहा

Parliament

लोकसभा में बुधवार सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की, जिसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। राज्यसभा में 20 मिनट कार्यवाही चली। 12 बजे से सदन दोबारा शुरू होगा। संसद के बाहर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने दानपेटी लेकर प्रदर्शन किया और राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर भाजपा पर हमला बोला।

प्रदर्शन में शामिल सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा- जो सरकार दानपेटी की रक्षा नहीं कर सकी, वह युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित नहीं रख सकती। वहीं संसद परिसर में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी पर दिए अपने बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा- मैंने सिर्फ सच कहा है और अगर सच बोलने की सजा मिलेगी तो सच बोलूंगी। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- राहुल गांधी सदन में अपमानजनक और गाली-गलौज वाली भाषा इस्तेमाल करते हैं। यह लोकतंत्र और देश, दोनों के लिए ठीक नहीं है।


राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस बीच एनएसए अजीत डोभाल संसद भवन पहुंचे हैं

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, 'परीक्षा पर चर्चा हो रही है और प्रधानमंत्री या गृह मंत्री सदन में नहीं हैं। ये किस प्रकार की चर्चा है जिसमें प्रधानमंत्री गायब हैं और गृह मंत्री अनुपस्थित हैं? इसलिए विरोधी दलों ने प्रश्नकाल में ये मांग उठाई। केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री शिक्षा को लेकर जवाब नहीं देना चाहते, जो अन्याय हुआ, उसके खिलाफ आज विरोध दलों ने प्रश्नकाल में आवाज उठाई'

कांग्रेस बोली, ये कैसी चर्चा है : कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “परीक्षा पर चर्चा हो रही है और प्रधानमंत्री या गृह मंत्री सदन में नहीं हैं। ये किस प्रकार की चर्चा है, जिसमें प्रधानमंत्री गायब हैं और गृह मंत्री अनुपस्थित हैं? इसलिए विरोधी दलों ने प्रश्नकाल में ये मांग उठाई। हमारी मूल मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री जवाब दें, लेकिन वे तो उपस्थित ही नहीं हैं तो जवाब कहां से देंगे? मुझे लगता है कि केंद्रीय गृह मंत्री और प्रधानमंत्री शिक्षा को लेकर जवाब नहीं देना चाहते। जो अन्याय हुआ, उसके खिलाफ आज विरोध दलों ने प्रश्नकाल में आवाज उठाई।

राज्यसभा 12 बजे तक के लिए स्थगित : राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस बीच एनएसए अजीत डोभाल संसद भवन पहुंचे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य सभा में आइशी घोष की गिरफ्तारी के मामले पर कहा कि शर्मनाक है। जो लोग गए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

कौन हैं जंतर-मंतर के वायरल हो रहे मोहम्मद इरफान? क्यों राहुल गांधी पहुंचे उनके घर?

Mohammad Irfan

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में नीट पेपर लीक और शिक्षा सुधारों को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान एक चेहरा रातों-रात पूरे देश में छा गया—मोहम्मद इरफान। बिना किसी बड़े राजनीतिक दल या छात्र संगठन के बैनर तले आए इरफान ने अपने बेबाक बयानों, संविधान की समझ और जमीनी अनुभवों से सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया।

उनकी वायरल लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद दिल्ली की एक पुनर्वास बस्ती में स्थित उनके घर पहुंचे और उनसे मुलाकात की।

कौन हैं मोहम्मद इरफान?
दिल्ली की सावदा जेजे कॉलोनी में रहने वाले 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान एक आम दिहाड़ी मजदूर और फेरीवाले हैं। इरफान कभी स्कूल नहीं गए और मोबाइल पर टाइप करना भी नहीं जानते। वे रोज बर्फ बेचकर और मजदूरी करके लगभग 500 रुपये कमाते हैं।

तकनीक से लिया नॉलेज: भले ही उनके पास कोई औपचारिक डिग्री न हो, लेकिन उन्होंने गूगल के वॉयस सर्च, यूट्यूब और इंटरनेट के जरिए लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और मजदूरों के अधिकारों की गहरी समझ हासिल की है।

सामाजिक आंदोलनों से जुड़ाव: इरफान पहले भी कई जन-आंदोलनों में शामिल रहे हैं और 2024 की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान दिल्ली से कश्मीर तक की पदयात्रा में भी सहभागी बने थे।

जंतर-मंतर पर ऐसा क्या हुआ कि रातों-रात हो गए वायरल?
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान जब एक मीडिया चैनल ('द लल्लनटॉप') ने इरफान से बातचीत की, तो उन्होंने जो कहा उसने हर किसी को चौंका दिया:

संविधान की प्रस्तावना और समझ: बिना किसी कागज़ के उन्होंने संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का मर्म समझाया और कहा कि संविधान हर नागरिक की गरिमा की रक्षा करता है।

मजदूरों की बेआवाज़ आवाज़: उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों मजदूर सड़कों पर इसलिए नहीं उतर पाते क्योंकि एक दिन काम न करने का मतलब है घर में चूल्हा न जलना।

लोकतांत्रिक संवाद पर जोर: उन्होंने सरकार और जनता के बीच अहंकार छोड़कर बातचीत के रास्ते खुले रखने की वकालत की। उनका सादा पहनावा, निडर लहजा और ज्ञान देखकर उनका इंटरव्यू सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड करने लगा।

राहुल गांधी की मुलाकात: “इरफान जैसे युवा ही भारत की असली उम्मीद”
27 जुलाई को राहुल गांधी खुद सुरक्षा तामझाम के बीच सावदा जेजे कॉलोनी में इरफान के कच्चे/अधूरे मकान में उनसे मिलने पहुंचे। राहुल गांधी ने इरफान के परिवार से हाल-चाल पूछा, चाय पी और फोन पर अपनी बहन व कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी से भी इरफान की बात कराई। इसके साथ ही उन्होंने इरफान के पूरे परिवार को संसद आने का न्योता दिया।

राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम और 'X' पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा: “संविधान की उसकी समझ, देश को देखने का उसका नजरिया और सीखने की उसकी ललक बताती है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं। इरफान जैसे जिज्ञासु, संवेदनशील और अपने अधिकारों-कर्तव्यों के प्रति जागरूक युवा ही देश की असली उम्मीद हैं।”

मोहम्मद इरफान की कहानी यह साबित करती है कि लोकतंत्र की ताकत बड़ी-बड़ी डिग्रियों या अमीर घरानों में नहीं, बल्कि देश के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े आम नागरिक की चेतना में बसती है। एक दिहाड़ी मजदूर का बिना स्कूल गए संविधान की आवाज बनना इस दौर की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है।

बयानों की आग में झुलसता भारत: क्या शब्दों से बढ़ रही है देश की मुश्किलें?

controversial statement

भारत-जहां बुद्ध की शांति, महावीर की अहिंसा, कबीर का भ्रातृभाव और गांधी का सत्याग्रह पला-बढ़ा, आज वही देश कड़वे, विवादास्पद और घृणास्पद बयानों के तीर से बार-बार छलनी हो रहा है। हाल के समय में, चाहे वह राजनीति का गलियारा हो, धार्मिक मंच हों, या सोशल मीडिया के ट्रेंड्स- ऐसे बयानों की एक बाढ़ सी आ गई है जो देश के सामाजिक ताने-बाने को लगातार नुकसान पहुँचा भारत को अराजक रास्ते पर ले जा रही है। इस बाढ़ में सभी बह रहे हैं।

 

“शब्द यदि विचारपूर्वक न बोले जाएं, तो वे बाण से भी अधिक घातक सिद्ध होते हैं। बाण शरीर को बेधता है, किंतु अनुचित शब्द देश और समाज की आत्मा को घायल कर देते हैं।”

 

1. भाषा का गिरता स्तर और राजनीतिक मर्यादाएं

हाल के दौर में हमने देखा है कि सार्वजनिक संवाद में गरिमा की जगह तीखे व्यक्तिगत हमलों और भड़काऊ बयानबाजी ने ले ली है।

ध्रुवीकरण की राजनीति: चुनावी रैलियों और जनसभाओं के दौरान अक्सर ऐसे बयान देखने को मिलते हैं जहाँ विरोधी दल के नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल होता है।

पहचान पर प्रहार: हालिया बहसों और भाषणों में अक्सर किसी वर्ग, क्षेत्र या धर्म विशेष के लोगों को 'फर्जी', 'घुसपैठिया' या 'अराष्ट्रीय' करार देने की होड़ दिखाई देती है। राजनीतिक लाभ के लिए की जाने वाली यह बयानबाजी समाज में स्थायी दरार पैदा करती है।

 

2. नफ़रत भरे बयान (Hate Speech) और सामाजिक दरार

विभिन्न रिसर्च और रिपोर्टों (जैसे इंडिया हेट लैब और मानवाधिकार अध्ययन) के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में घृणास्पद भाषणों (Hate Speech) की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है।

आस्था बनाम उकसावा: धार्मिक आयोजनों और रैलियों के मंचों से कभी-कभी ऐसे बयान सामने आते हैं, जहाँ एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काया जाता है या उनके बहिष्कार की बात की जाती है।

सहिष्णुता का ह्रास: जब ऐसे बयान सामने आते हैं, तो यह सदियों पुरानी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' और आपसी भाईचारे की भावना को गहराई से चोट पहुँचाते हैं।

 

3. सोशल मीडिया: आग में घी का काम

आज के डिजिटल युग में एक भड़काऊ बयान केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहता जहाँ वह बोला गया।

टीआरपी और एल्गोरिदम का खेल: सोशल मीडिया के एल्गोरिदम (Algorithms) विवादित बयानों को मिनटों में वायरल कर देते हैं।

अधूरी जानकारी और नफ़रत का प्रसार: भ्रामक संदर्भों और विवादित वीडियो क्लिप्स का इस्तेमाल युवाओं के मन में आक्रोश और ज़हर घोलने के लिए किया जा रहा है।

 

4. बयानों से भारत को होने वाले नुकसान

सामाजिक समरसता: समाज में अविश्वास और भय का माहौल बनता है, जिससे आपसी सौहार्द नष्ट होता है।

वैश्विक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की एक लोकतांत्रिक और सहिष्णु राष्ट्र की छवि को आघात पहुँचता है।

आर्थिक प्रगति: जिस देश या राज्य में सामाजिक अस्थिरता होती है, वहाँ निवेशक और उद्योग आने से हिचकिचाते हैं।

युवाओं पर प्रभाव: संवाद की आक्रामकता देखकर भावी पीढ़ी तर्क और विचारशीलता के स्थान पर नफ़रत को सामान्य मानने लगती है।

 

5. समाधान का मार्ग: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम ज़िम्मेदारी

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिक को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) इसके साथ युक्तियुक्त निर्बंधन (Reasonable Restrictions) भी जोड़ता है- अर्थात् यह स्वतंत्रता किसी को नफ़रत फैलाने या लोक व्यवस्था (Public Order) को बिगाड़ने का अधिकार नहीं देती।

कानूनी सख्त कार्रवाई: हेट स्पीच पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव से परे हटकर निष्पक्ष और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेताओं और जिम्मेदार पदों का आत्म-नियमन: सार्वजनिक जीवन में मौजूद लोगों को समझना होगा कि उनके हर एक शब्द का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

डिजिटल साक्षरता और संयम: आम जनता को भी सोशल मीडिया पर किसी भड़काऊ बयान को बढ़ावा देने या शेयर करने से बचना चाहिए।

 

शब्द ही जोड़ते हैं और शब्द ही तोड़ते हैं। भारत अगर विभिन्नताओं में एकता की विशाल मिसाल है, तो इस मिसाल को बनाए रखने का दायित्व हम सभी का है। जब तक सार्वजनिक जीवन में भाषण की गरिमा, मर्यादा और सत्य निष्ठा वापस नहीं लौटती, तब तक देश की आत्मा बयानों के इस ज़हर से घायल होती रहेगी। अब समय आ गया है कि हम “बोलो, पर जोड़ने के लिए; तोड़ो, पर केवल नफ़रत के बंधनों को” का विचार अपनाएं। चलिए अब जान लेते हैं 10 विवादित बयान।

 

10 विवादित बयान: 

राज बब्बर, रशीद मसूद, मायावती, अखिलेश यादव, फारूख अब्दुल्ला, मोहम्मद हामिद अंसारी, नसीरुद्दीन शाह, चंदन मित्रा, अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा, बाबा रामदेव, अरविन्द केजरीवाल, नरेंद्र मोदी, बाल ठाकरे, संजय राउत, नितिन गडकरी, सलमान खुर्शीद, लालू यादव, गिरिराज सिंह, डेरेक ओ ब्रायन, ममता बनर्जी, सायली घोष आदि कई लोग हैं जो समय समय पर बयानवीर का खिताब लेते रहे हैं। देश की हर पार्टी में एक से बढ़कर एक बयानवीर भरेपड़े हैं।

 

1. “अनुपवेशकों और अधिक बच्चों वालों को धन बांटने” पर पीएम मोदी का बयान (2024)

बयान: लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राजस्थान की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के घोषणापत्र पर निशाना साधते हुए कहा था कि संपत्ति का सर्वे कराकर उसे “अनुप्रवेशकर्ताओं” (Infiltrators) और “जिनके ज्यादा बच्चे हैं” को बांट दिया जाएगा।

विवाद: विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने वाला और धुव्रीकरण पैदा करने वाला बयान बताया, जिसकी काफी आलोचना हुई।

 

2. “सनातन धर्म डेंगू-मलेरिया की तरह है”– उदयनिधि स्टालिन (2023)

बयान: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में कहा कि “सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि डेंगू और मलेरिया की तरह इसे समाप्त कर देना चाहिए।” उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान का समर्थन करते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि “कोई भी ऐसा धर्म जो समानता को बढ़ावा नहीं देता, जो इंसानों में भेदभाव करता है और सम्मान नहीं देता, वह बीमारी के समान है।”

विवाद: इस बयान पर देश भर में भारी आक्रोश फैला। भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने इसे बहुसंख्यक आबादी की आस्था का अपमान बताते हुए अदालतों में याचिकाएं दायर कीं। बीजेपी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस बयान को सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं पर सीधा प्रहार बताया। इसके बाद प्रियांक खरगे और उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

 

3. “मोदी सरनेम” टिप्पणी– राहुल गांधी (2019/कानूनी कार्रवाई 2023)

बयान: चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, “सब चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है?”

विवाद: इस बयान के खिलाफ गुजरात में मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ। मार्च 2023 में सूरत की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, जिसके चलते उनकी संसद सदस्यता रद्द (जो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बहाल) हो गई थी।

 

4. “शक्ति” से लड़ने संबंधी बयान– राहुल गांधी (2024)

बयान: भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर मुंबई में राहुल गांधी ने कहा, “हिंदू धर्म में एक शब्द है 'शक्ति'। हम एक शक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

विवाद: प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने इस बयान को हिंदू आस्था और नारियों की 'शक्ति' के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे चुनाव के दौरान भारी राजनीतिक घमासान मचा।

 

5. “देश के गद्दारों को, गोली मारो…” – अनुराग ठाकुर (2020)

बयान: दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक रैली में नारा लगवाया: “देश के गद्दारों को… गोली मारो सा… को।”

विवाद: इस बयान को चुनावी माहौल में नफरत और हिंसा भड़काने वाला माना गया। चुनाव आयोग ने उनके चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध भी लगाया था।

 

6. “अगर रोड खाली नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेंगे”– कपिल मिश्रा (2020)

बयान: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में कपिल मिश्रा ने कहा था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के जाने तक हम शांत हैं, लेकिन अगर रास्ते खाली नहीं कराए गए तो हम पुलिस की भी नहीं सुनेंगे।”

विवाद: इस बयान के तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिसके लिए कई रिपोर्टों में इस भाषण को जिम्मेदार माना गया।

 

7. रामचरितमानस और पांडुलिपियों पर विवादित टिप्पणी– स्वामी प्रसाद मौर्य (2023)

बयान: समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “इनमें दलितों, पिछड़ों और महिलाओं का अपमान किया गया है, इसलिए इस ग्रंथ या इसके विवादित अंशों पर बैन लगना चाहिए।”

विवाद: इस बयान से साधु-संतों और धार्मिक संगठनों में भारी रोष पैदा हुआ और देश भर में जगह-जगह मौर्य के पुतले फूंके गए थे।

 

8. किसान आंदोलन और “100-100 रुपये में आने वाली महिलाएं”- कंगना रनौत (2020)

बयान: कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के दौरान कंगना ने एक बुजुर्ग महिला (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि “ऐसी महिलाएं 100-100 रुपये लेकर धरने में बैठने आ जाती हैं।” उल्लेखनीय है कि हाल ही में कंगना ने 'जेन जी' (Gen Z) को गटर जनरेशन कहा है।

विवाद: इस बयान से किसान संगठन बेहद नाराज हुए। इसी बयान के गुस्से के कारण जून 2024 में चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सुरक्षाकर्मी महिला (CISF कांस्टेबल) ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था।

 

9. 'कॉकरोच' (Cockroach) शब्द वाली टिप्पणी और विवाद- CJI (2026) 

बयान: कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI) की टिप्पणी में कहा गया था कि “बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह सोशल मीडिया, पत्रकारिता और RTI कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं”। उन्होंने कहा था कि कई युवा नौकरी या वकालत के पेशे में जगह न मिलने पर सोशल मीडिया, आरटीआई (RTI) एक्टिविज़्म या अन्य माध्यमों से सिस्टम पर हमला करने का जरिया ढूंढ लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी यह टिप्पणी फर्जी और जाली डिग्रियों (Fake Degrees) के जरिए वकालत या अन्य पेशों में पिछले दरवाजे से घुसे लोगों और फर्जी पत्रकारों/एक्टिविस्टों के लिए थी, न कि देश के ईमानदार छात्रों और युवाओं के लिए। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है।

विवाद: जब इस बयान पर देशभर के युवाओं में भारी विरोध और बहस छिड़ी, तो CJI ने स्पष्टीकरण जारी किया कि उनकी इस टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया था, लेकिन इस एक बयान ने CJP पार्टी को जन्म देकर देश में एक बहुत बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा कर दिया और फिर जो हुआ उसे सभी ने देखा है।

 

10. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे का विवादित बयान: 

बयान: अप्रैल 2023 में कर्नाटक के कलबुर्गी (गुलबर्गा) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने सीधे हिंदू धर्म पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा पर निशाना साधते हुए 'सांप' का उदाहरण दिया था। बीजेपी/आरएसएस की विचारधारा एक जहरीले सांप की तरह है। अगर आप सोचेंगे कि यह जहरीला है या नहीं, और इसे चाटकर (जांचकर) देखेंगे, तो आप मारे जाएंगे। इसलिए पहले इस सांप को मारना जरूरी है।'

विवाद: भाजपा ने इस बयान को मुद्दा बनाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता बहुसंख्यक समुदाय की विचारधारा और पार्टी का अपमान करने के लिए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

दतिया उपचुनाव में वोटिंग से 24 घंटे पहले भी वोटर्स खमोश, कुशवाह और जाटव वोटर्स बनेगा गेमचेंजर!

mohan yadav in datia

दतिया विधानसभा उपचुनाव में आज शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा। वोटिंग के 48 घंटे से पहले विधानसभा का वोटर्स पूरी तरह खमोश है। विधानसभा के ग्रामीण और शहरी इलाकों का दौरा करने के बाद एक बात पूरी तरह साफ है कि चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों में साफ तौर पर भितरघात नजर आ रहा‌ है। ALSO READ: दतिया‌ उपचुनाव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशवाहा समाज को साधा, बोले भाजपा ने कुशवाह समाज को दिया सम्मान

 

वहीं उपचुनाव में जीत-हार का गणित अब जातीय समीकरणों पर आकर पूरी तरह टिक गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सबसे प्रभावशाली कुशवाहा और जाटव वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। दतिया विधानसभा में कुशवाहा समाज सबसे बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है  दतिया के ठंडी सड़क पर फल का ठेला लगाने वाले कुशवाहा समाज से आने वाले हरिराम कुशवाह साफ कहते है कि कुशवाह समाज का 60 फीसदी वोटर्स जिस तरफ जाएगा, वह पार्टी जीत हासिल करेगी। कुशवाह वोटर्स इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि विधानसभा क्षेत्र में लगभग 40 हजार कुशवाहा मतदाता चुनाव का रुख तय करने की स्थिति में हैं।

 

कुशवाहा वोटर्स को साधने के लिए सोमवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुशवाहा समाज के सामाजिक सम्मेलन में शामिल हुए। इस सम्मेलन की अहमियत इससे समझी जा सकती है कि उपचुनाव में पहली बार मुख्यमंत्री किसी समाज के समाजिक सम्मेलन को संबोधित किया और भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की। ALSO READ: दतिया उपचुनाव में जीतू पटवारी ने लगाया गले तो आशुतोष तिवारी ने मंच से ही मांग लिए बीजेपी के लिए वोट

 

दतिया उपचुनाव में वार्ड-1 के भाजपा पार्षद रहे कल्लू कुशवाह की हत्या भी बड़ा चुनावी मुद्दा बनी हुई है। 

वेबदुनिया से खास बातचीत में कल्लू कुशवाह के भाई शेरू कुशवाह ने भाजपा को अपना समर्थन देने का ऐलान किया। उनका कहना है कि वे अपने समाज से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील करेंगे। 

 

mohan yadav election campaign in datia

भाजपा की रणनीति छोटे-छोटे सामाजिक सम्मेलनों और समाजवार बैठकों पर केंद्रित है। पार्टी आखिरी दौर में जाटव, अहिरवार, कुशवाह, लोधी, पाल, बघेल, रावत, यादव और सेन समाज के बीच अलग-अलग स्तर पर संपर्क अभियान चला रही है।

 

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार जाटव और अहिरवार समाज के एक हिस्से का झुकाव अब भी कांग्रेस की ओर माना जा रहा है। वहीं कुशवाह, बघेल और यादव समाज के कुछ वर्गों में भी स्थानीय राजनीतिक कारणों से नाराजगी की चर्चा है। ऐसे में भाजपा इन वर्गों के प्रभावशाली नेताओं के माध्यम से संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

 

दतिया विधानसभा में सोमवार रात मुख्यमंत्री ‌डॉ मोहन यादव के रोड शो के दौरान वेबदुनिया ने शहर के लोगों से जब बात की तो नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के बाहरी होने का मुद्दा भी चुनाव में खासा दिखाई दिया।

LIVE: संसद में आज परीक्षा में सुधारों पर चर्चा, लोकसभा में 6 घंटे समय निर्धारित

paper leak amendment bill in parliament

Latest News Today Live Updates in Hindi : लोकसभा में आज परीक्षा में सुधारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा होगी। इसके लिए 6 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। पल पल की जानकारी…

संसद में गतिरोध समाप्त होने के बाद लोकसभा में आज परीक्षा में सुधारों से जुड़े विधेयक पर चर्चा होगी। चर्चा के लिए 6 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। स्पीकर ओम बिरला ने जरूरत पड़ने पर इससे अधिक समय देने की बात कही है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान बांसुरी स्वराज, सायोनी घोष जैसे युवा चेहरे सरकार की ओर से पक्ष रखेंगे। वहीं, विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सरकार पर हमले की जिम्मेदारी संभालेंगे। सपा की ओर से अखिलेश यादव, तृणमूल से महुआ मोइत्रा चर्चा में हिस्सा लेंगे। 

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। यह नोटिस 20 जुलाई, 2026 को संसद तक हुए मार्च के दौरान निहत्थे छात्र प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा के लिए दिया गया है, जिसमें 80 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे।

CJP प्रोटेस्ट: PM मोदी पर विवादित पोस्ट पर एक्शन? सोशल मीडिया से हटवा रही पुलिस

दिल्ली में जंतर-मंतर पर छात्रों और अलग-अलग कई संगठनों के पेपर लीक से जुड़े प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए थे। दिल्ली पुलिस उन सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। प्रदर्शन में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर भद्दी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने NEET-UG से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर निगरानी और कड़ी कर दी है।

दिल्ली पुलिस ले रही एक्शन 

पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक या आपत्तिजनक टिप्पणी वाले पोस्ट और वीडियो हटाए जाएं। यह कदम जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद उठाया गया है। इन घटनाओं के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय भी बन गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा वाले पोस्ट की संख्या बढ़ी है। साइबर निगरानी के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिल्ली पुलिस ने कई सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजे हैं। इनमें ऐसे पोस्ट और वीडियो हटाने को कहा गया है, जो कानून के नियमों का उल्लंघन करते हैं।

कई पोस्ट और वीडियो हटाए गए

अधिकारियों ने बताया कि नोटिस जारी होने के बाद कई आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिए गए हैं। हालांकि, पुलिस की निगरानी अभी भी लगातार जारी है। पुलिस के मुताबिक, साइबर और सोशल मीडिया की विशेष टीमें 24 घंटे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही हैं। उनका उद्देश्य ऐसे नए पोस्ट और वीडियो की पहचान करना है, जिन पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी उस समय और बढ़ा दी, जब 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी थी। उस दिन NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में हजारों छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प भी हुई थी।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को हुई झड़प में करीब 130 पुलिसकर्मी और 65 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने हिंसा से जुड़े 15 एफआईआर दर्ज किए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। विपक्ष लगातार संसद में इस मामले पर चर्चा की मांग कर रहा है।

सोमवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव और राज्यसभा में कामकाज रोककर चर्चा कराने का नोटिस दिया। उन्होंने इस पूरे मामले पर तुरंत बहस कराने और सरकार से जवाब देने की मांग की। इस बीच, जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, इलाके में करीब 3,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आंदोलन तेज होने के बाद से यहां हर दिन हजारों छात्र और उनके समर्थक जुट रहे हैं।

अगर गालियों से समाज का पतन होता है तो इसकी शुरुआत आपके बेडरूम से हो चुकी है

Gen-Z protest

गालियों से याद आया कि जब मध्‍यप्रदेश में मोहन यादव सीएम बने थे तो उनका एक वीडियो वायरल हुआ था— वीडियो में वे गालियां दे रहे हैं, जिसे फुरसत से देखा जाना चाहिए। इसके कुछ पहले जाएं तो मध्‍यप्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपने कार्यकर्ताओं को बहुत ही अपनत्‍व और प्‍यारे मालवी अंदाज में बुलाया था। राजनीति में गालियों की यह ‘अनफिल्‍टर्ड’ परंपरा हाल ही में बीजेपी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ‘घंटा’ तक पहुंची थी। अतीत में अखबार के पन्‍ने और न्‍यूज चैनल के दृश्‍य टटोलेंगे तो कई जगह बीप… बीप… सुनाई दे जाएंगी।

इससे ज्‍यादा ही मनोरंजित होना है और समाज के सामने अच्‍छा नागरिक भी बने रहना है तो अपने कमरे में चुपचाप हेडफोन लगाकर ओटीटी पर कोई भी वेब-सीरीज लगा लीजिए और बाहर दफ्तर, समाज में सभ्‍य बनकर अच्‍छा नागरिक बने रहिये।

इन सब के बीच सवाल यह है कि अगर गुस्‍से में गालियां न दी जाएं तो गालियों की जगह क्‍या दिया जाना चाहिए?

ओटीटी, स्‍टैंडअप्‍स और पॉडकास्‍ट में गालियों को 'कूल' और 'रॉ' बताकर जिस तरह से आप और हम कूल बनते हैं तो यह भी बता दें कि इस जनरेशन को अपनी गालियों के साथ कौनसे श्‍लोक और मंत्र शामिल करने चाहिए थे, जिससे ये गालियां इतनी अश्‍लील और भद्दी न हो?

बात यह है कि गालियों का संबंध किसी पार्टी, संगठन या उम- वर्ग आदि से नहीं होता है। जिस आदमी को गुस्‍सा आता है— आक्रोश होता है वो जब वो चरम पर पहुंचता है तो उस आदमी के खिलाफ गालियां दी जाती हैं, जिसने उसे इसके लिए मजबूर किया है। हां, कुछ हद तक हमारे संस्‍कार काम आते हैं, लेकिन यह भी सिचुएशनल काम करते हैं। हम कितने ही आध्‍यात्‍मिक बन जाएं, किसी के मरने पर रो ही देंगे— किसी के बिछडने पर दुख होता ही है। हां, यह सही कि नई जनरेशन आपसे ज्‍यादा मुखर है— उसके लिए बहुत सी बातें नॉर्मल है, उनके बीच लिंग-भेद कम होता जा रहा है।

अगर प्रोटेस्‍ट में आक्रोश में एक करप्‍ट सिस्‍टम के खिलाफ निकली गालियों से समाज का पतन होता है तो यह पतन आपके बेडरूम में पहले ही हो चुका है। उन ओटीटी, स्‍टैंडअप कॉमेडी और पॉडकास्‍ट में हो चुका है, जिसे आप बड़े चाव से अपने कमरे की लाइट्स बंद कर के देखते हैं।

गालियां Gen-Z की भाषा नहीं है— न ही ये गालियां उन्‍होंने ईजाद की है— ये गालियां आपने उन्‍हें विरासत में ट्रांसफर की हैं। फर्क इतना है कि आप में सिर्फ अपने बेडरूम और प्राइवेट पार्टी में गालियां देने का साहस है— जबकि वे कहीं भी अनफिल्‍टर्ड नहीं हैं।