दतिया उपचुनाव में सीट बचाने में सफल रही कांग्रेस, भितरघात ने बीजेपी का हार की लिखी पटकथा

प्रतिष्ठा की लड़ाई वाले दतिया उपचुनाव में कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई है। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हरा दिया है। अगर 2023 के विधानसभा चुनाव की बात करें तब कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने बीजेपी उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से चुनाव हराया था। ऐसे में भाजपा ने पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया वहीं इस बार उपचुनाव में बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था लेकिन पार्टी को फिर भी हार का सामना करना पड़ा, हलांकि हार का अंतर जरूर कुछ कम हो गया और कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई।

दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से उनके समर्थकों ने बवाल काटा, उसने उपचुनाव में बीजेपी की हार की पटकथा लिखना शुरु कर दिया था। इसके बाद बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी  को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनाव परिणाम के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ के साथ दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।

चुनाव नतीजों के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कहा कि जो भितराघाती है और जो भाजपा को मां कहते है और फिर ऐसा मजाक करते है, उनको  सोचना  चाहिए। आशुतोष तिवारी ने हार की समीक्षा करने की बात कही।

दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया।  

दतिया में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ बीजेपी के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के विरोध में काम किया और अपने घर बैठ गए। दतिया बीजेपी जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी के साथ बीजेपी के पार्षद एक तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नदारद रहे। दतिया के शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार होती रही। जिसका असर मतदान पर भी पड़ा और 2023 के तुलना में करीब 9 फीसदी कम मतदान हुआ।

वहीं चुनावी नतीजों में जिस तरह बीजेपी को शहर की पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा इससे साफ है कि व्यापारियों  और शहर में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने आशुतोष तिवारी की जगह कांग्रेस के लिए मतदान किया और शहर में कांग्रेस प्रत्याशी धनश्याम सिंह को ऐसी लीड मिली जिसको अंत में बसई में अच्छा प्रदर्शन करके भी बीजेपी नहीं पाट पाई।

राजनीतिक विश्लेषक इस बात को साफ तौर पर मानते है कि दतिया विधानसभा चुनाव के परिणाम जिस तरह से आए वह पार्टी के लिए आत्मचिंतन का विषय है। अगर बीजेपी समय रहते भितरघात पर काबू कर लेती और तो नतीजे बीजेपी के पक्ष में बेहतर हो सकते थे। बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी जिस तरह से चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह का बूथ हार गए, उसके एक नहीं कई सियासी मायने है। दतिया में भाजपा की हार सिर्फ पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार नहीं बल्कि जिला भाजपा भाजपा संगठन के भितरघात का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है।

इसके साथ दतिया उपचुनाव के नतीजे यह भी बताते है कि बीजेपी को शहर में हार का सामना करना पड़ा, जबकि शहरी वोटर्स बीजेपी का कोर वोटर्स माना जाता है, ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है। जबकि ग्रामीण इलाकों में बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया और उन पोलिंग बूथ पर बीजपी को जीत हासिल हई जो वह लगातार हारती आ रही थी। इसके साथ ही बसई मंडल जहां पर भाजपा पिछला चुनाव हार गई थी वहां पर इस पर 3 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। गौरतलब है कि बसई में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा हुई थी और अब चुनाव नतीजे बताते है कि बसई ने भाजपा का साथ दिया। 

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार का ठीकरा किसके सिर फूटेगा?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की करारी हार का ठीकरा भाजपा में किसके सिर फूटेगा, यह सवाल अब सियासी गलियारों में पूछा जाने लगा है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात को साफ तौर पर मानते है कि दतिया विधानसभा चुनाव के परिणाम जिस तरह से आए वह पार्टी के लिए वकाई चिंता का विषय है। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी जिस तरह से चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह का बूथ हार गए, उसके एक नहीं कई सियासी मायने है।

दतिया में भाजपा की करारी हार ठीकरा पूरी तरह से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर फूटना तय है। चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी  को चुनाव में उठाना पड़ा। दतिया में भाजपा की हार सिर्फ पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार नहीं बल्कि भाजपा संगठन की हार है।

2023 में दतिया विधानसभा सीट हारने के बाद इस बार भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद जिस तरह से पहले नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने दतिया में बवाल काटा और फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर रोए, उससे उपचुनाव में उनकी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नरोत्तम मिश्रा पूरे उपचुनाव के दौरान दावा करते रहे है कि वह पूरी तरह पार्टी के साथ है लेकिन कई  अहम मौकों जैसे बसई में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बड़ौना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का सभा में उनका नहीं जाना, उनकी नाराजगी और भाजपा की गुटबाजी से जोड़कर देखा गया।

वहीं दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह जिसको नरोत्तम मिश्रा का समर्थक माना जाता है, उसके बूथ पर भी पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। उपचुनाव में भाजपा की हार नरोत्तम मिश्रा की सियासी करियर पर एक ग्रहण का काम करेगी और उनकी पार्टी में पूछ-पऱख कम होगी और उनके सियासी पुर्नवास की राह कठिन हो जाएगी। इस बात का अंदाजा शायक खुद नरोत्तम मिश्रा को भी है इसलिए वह पूरे चुनाव के दौरान कहते रहे है कि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया और अब पार्टी कितना देगी। वहीं नरोत्तम मिश्रा ने अब राजनीति में अपनी सक्रियता को लेकर भी इशारों ही इशारों में कई संदेश दिए है। दतिया से पार्टी की हार के साथ उन्होंने कहा कि मेरी राजनीति का पटाक्षेप हो गया है।

‘जॉब नहीं मिलेगा तो सिंहासन हिलेगा…’ 8 अगस्त के लिए राहुल गांधी ने किया बड़ा ऐलान, ये है पूरा प्लान

जंतर-मंतर में Gen Z के प्रदर्शन की ताकत देखने के बाद कांग्रेस अब इसे लेकर एक नई रणनीति पर चलती हुई दिख रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। राहुल गांधी एक बार फिर बेरोजगारी, पेपर लीक और रुकी हुई सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी करते दिख रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 8 अगस्त को प्रयागराज के केपी ग्राउंड में छात्र संवाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रयागराज के छात्रों के लिए एक पोस्ट शेयर किया है।

राहुल गांधी ने किया ये ऐलान

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा, “जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।” उन्होंने कहा कि कोटा और देहरादून के बाद अब “छात्रों की गूंज” प्रयागराज पहुंच रही है। अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का वर्तमान छीन लिया है, जबकि रुकी हुई भर्तियों ने उनके भविष्य को भी संकट में डाल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में दिल्ली में अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी युवाओं की आवाज लगातार उठाती रहेगी और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि अब बहानों का समय खत्म हो चुका है। अपने पोस्टच के अंत में राहुल गांधी ने युवाओं से 8 अगस्त को प्रयागराज में मिलने की अपील भी की।

कांग्रेस ने बदली रणनीति

बता दें कि, कांग्रेस ने 17 जून को कोटा से छात्रों की गूंज अभियान का पहले चरण की शुरुआत करने के बाद दूसरा चरण 17 जुलाई को देहरादून में हुआ था। इसके बाद तीसरा चरण प्रयागराज में 8 अगस्त को होना तय हो गया है। बता दें कि, इससे पहले राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों ने बड़ा प्रदर्शन किया था। 36 दिन तक चले प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंर्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।

इस प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अपनी रणनीति में बदलाव करती दिख रही है। पार्टी अब इसी असंतोष को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है। जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों के घटते अवसर जैसे विषयों पर पार्टी फोकस करती नजर आ रही है।

मांजलपुर उपचुनाव परिणाम : गढ़ बचाने में कामयाब रही भाजपा, वडोदरा की इस सीट पर सतीश पटेल की बंपर जीत

satish patel

Manjalpur Bypoll Election Result 2026 : वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी सतीश पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30,000 से ज्यादा वोटो से हराया। ALSO READ: बांकीपुर में प्रंशात किशोर ने कर दिया 'खेला', भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को झटका

 

20 दौर तक चली मतगणना सतीश पटेल को 55,481 वोट हासिल हुए जबकि कांग्रेस के भीखा भाई रबारी को मात्र 24,851 वोट ही हासिल हुए। इस तरह भाजपा ने यह चुनाव 30,630 वोटों से जीत लिया। इस चुनाव में 37.05 फीसदी जैसा कम मतदान दर्ज किया गया था। कम मतदान के चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आशान्वित थे। 

 

कौन हैं सतीश पटेल?

सतीश गोविंदभाई पटेल (सतेन्द्रभाई पटेल) वर्तमान में गुजरात के वडोदरा शहर की मांजलपुर विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। वे मुख्य रूप से कृषि और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े रहे हैं तथा वडोदरा नगर निगम में पार्षद के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

बांकीपुर जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर और दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह भाजपा उम्मीदवारों से काफी आगे चल रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि 3 राज्यों के 3 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में केवल मांजलपुर में ही भाजपा जीतती नजर आ रही है।

 

मांजलपुर में क्यों हुए उपचुनाव?

गौरतलब है कि वडोदरा की मांजलपुर सीट से लगातार आठ बार चुनाव जीतने वाले भाजपा के वरिष्ठ विधायक योगेश पटेल का जून में 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। साल 1990 से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक वे लगातार आठ बार अजेय रहे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार में राज्यमंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। 

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के पांच बड़े कारण, कांग्रेस के घनश्याम सिंह को निर्णायक बढ़त

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस अब प्रचंड जीत की ओर है। 11वें राउंड के बाद अब कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने अब निर्णायक बढ़त बना ली है। 15वें राउंड की मतगणना में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम ने तीसरे राउंड से जो बढ़त बनाई और वह आखिरी में एक बड़ी जीत में बदल गई है। मध्यप्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट माने जाने वाली दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के आखिरी क्या कराण थे इसको लेकर अब सियासी गलियारों में  चर्चा तेज हो गई है।

1-भाजपा की रणनीतिक चूक, नरोत्तम की जगह आशुतोष को टिकट देना-दतिया उपचुनाव में भाजपा ने जिस तरह से अपने कद्दवार नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट कर नए चेहरे आशुतोष तिवारी को टिकट दिया वह चुनाव में भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण साबित हुई। नरोत्तम मिश्रा जो 2008 में पहली बार दतिया विधानसभा सीट से चुनाव जीते और लगातार 15 साल तक दतिया से विधायक रहे वह उपचुनाव में भाजपा की तरह से टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन उपचुनाव की तारीखों के एलान के बाद भाजपा आलाकमान ने नरो्त्तम मिश्रा का टिकट काट कर सीधे नए चेहरे आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतार दिया।

नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद इसका रिएक्शन भी देखा गया और पार्टी के जिला अध्यक्ष सहित सभी स्थानीय पदाधिकारियों ने एक झटके में इस्तीफा दे दिया और नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने 48 घंटे तक दतिया में जमकर बवाल काटा। इसका चुनाव मे साइड इफेक्ट देखने को मिला और  पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा का कोर कार्यकर्ता घर बैठ गए और इसका नुकसान भाजपा को  चुनाव में उठाना पड़ा।  

2-उपचुनाव में भाजपा में भितरघात-दतिया विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ भाजपा के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के  विरोध में काम किया। “वेबदुनिया” ने जब दतिया विधानसभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्टिग की तो नाम न छापने की शर्त पर कई स्थानीय भाजपा नेताओं ने साफ कहा कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट गलत तरीके से टिकट काटा गया और इससे पार्टी का कोर कार्यकर्ता बिल्कुल खुश नहीं है।

दतिया के स्थानीय भाजपा नेता पूरे चुनाव प्रचार के दौरान एक दौरान खमोश रहे। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के भीतर पूरी तरह एकजुटता नहीं दिखी। कई क्षेत्रों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार होती रही, जिसका असर मतदान पर पड़ा। सोमवार को  जिस तरह से  चुनावी परिणाम आए है उसमें भाजपा को शहर के पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा इससे साफ है कि उपचुनाव में भाजपा को भितरघात का सामना करना पड़ा।

3-आशुतोष तिवारी दतिया में बाहरी चेहरा?-दतिया में भाजपा ने भांडेर से आने वाले आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाय था। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को दतिया का अपना स्थानीय चेहरा बनाकर चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन दतिया की जनता ने आशुतोष तिवारी को स्वीकार नहीं किया। “वेबदुनिया” ने जब दतिया के स्थानीय लोगों से बात की  थी तो लोगों ने साफ कहा था कि आशुतोष तिवारी को उन्होंने कभी नहीं देखा और वह अचानक से चुनाव लड़ने आ गए। दरअसल आशुतोष तिवारी संगठन में लबे समय से सक्रिय थे और वह पहली बार चुनावी मैदान में उतरे थे। ऐसे में वह दतिया की जनता से सीधा कनेक्ट नहीं कर पाए।

वहीं घनश्याम सिंह जो पहले भी दो बार दतिया से विधायक चुने जा चुके थे उनको स्थानीय चेहरा माना गया और स्थानीय और बाहरी के मुद्दे को लगातार चुनाव में उठाया। स्थानीय बनाम बाहरी की बहस चुनाव प्रचार के दौरान भी सुनाई देती रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने भी चुनाव में असर डाला और भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

4-कांग्रेस की बेहतर चुनावी रणनीति और मैनेजमेंट-दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह से एकजुटता का परिचय दिया और विधानसभा क्लस्टर में बांटकर जिस तरह से चुनाव लड़ा वह उसकी जीत का बड़ा कारण रहा। भाजपा की तुलना में कांग्रेस ने उचुनाव में बेहतर चुनावी प्रबंधन का प्रदर्शन किया। बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय और मतदाताओं तक लगातार पहुंच बनाने की रणनीति कांग्रेस के पक्ष में जाती दिखाई दी। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी जिस तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दतिया में डेरा डाले रख कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के साथ पोलिंग बूथ मैनेजमेंट किया वह कांग्रेस की प्रचंड जीत का बडा कारण साबित हुआ।

5-कांग्रेस की एकजुटता-दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने जिस तरह से एकजुटता का परिचय दिया वह उसकी जीत का बड़ा कराण साबित हुई। कांग्रेस ने चुनाव के अंतिम दौर तक जिस तरह से नाराज नेताओं अवधेश नायक और राजेंद्र भारती को साध कर रखा, वह जीत का एक बड़ा कारण साबित हुई। चुनाव के दौरान अधिकांश वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता एक मंच पर नजर आए और उम्मीदवार के समर्थन में एकजुट होकर प्रचार किया। इस एकजुटता का लाभ कांग्रेस को सीधा मिला।

‘राम मंदिर में चंदा चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं’; पप्पू यादव और राहुल गांधी से SP ने बनाई दूरी! राम गोपाल यादव भड़के

Pappu Yadav News: संसद परिसर में बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के भगवा कपड़े पहनकर राम मंदिर चंदा चोरी का नुक्कड़ नाटक करने पर समाजवादी पार्टी (SP) के सीनियर नेता राम गोपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस नाटक को गलत ठहराते हुए कहा कि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। सपा सांसद ने कहा कि पप्पू यादव ने गलत किया। उन्हें संसद परिसर में ऐसा नहीं करना चाहिए था। यादव ने कहा कि संतों का चंदा चोरी से कोई संबंध नहीं है। बता दें कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के कई सांसद भी पप्पू यादव के साथ नाटक कर रहे थे।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, संसद परिसर में पप्पू यादव द्वारा भगवा कपड़े पहनकर नुक्कड़ नाटक पर सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, “वो गलत था क्योंकि राम मंदिर में चोरी से संतों का कोई वास्ता नहीं है। वो गलत चीज थी, ऐसा नहीं होना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “हम राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सदन में उठाएंगे। ये गंभीर मामला है।”

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शुक्रवार को भगवा कपड़े पहनकर संसद परिसर में मकर द्वार के सामने अन्य विपक्षी सांसदों के साथ नाटक किया था। यह प्रदर्शन अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विरोध में किया गया था। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस और सपा के विभिन्न सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि यादव ने राम मंदिर में हुई चोरी को दिखाने के लिए कथित रूप से पैसे अपनी जेब में रख लिए।

BJP ने विपक्ष से की माफी की मांग

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संसद परिसर में नाटक करके हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई। भगवा पार्टी ने कहा कि उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। यादव ने हालांकि कहा कि वह सनातन की रक्षा के लिए विरोध कर रहे हैं। कितनी भी FIR दर्ज हो जाएं। लेकिन वह नहीं झुकेंगे।

BJP नेताओं ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की तरफ ध्यान खींचने के लिए संसद परिसर में नाटक करने को लेकर पप्पू यादव, राहुल गांधी और अयोध्या से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ शनिवार को वाराणसी में शिकायत दर्ज करवाई। जबकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस को तहरीर दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी गांधी और यादव पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के जरिए सनातन धर्म का अपमान किया।

आखिर क्या हुआ था जिस पर मचा है बवाल?

दरअसल, भगवा कपड़े पहने पप्पू यादव ने शुक्रवार को संसद परिसर में ‘मकर द्वार’ के सामने विपक्ष के दूसरे सांसदों के साथ यह राम मंदिर चढ़ावा चोरी का नाटक किया। इस दौरान राहुल गांधी समेत अन्य सांसदों ने दान पेटी में पैसे डाले। जबकि राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को दिखाने के लिए अपनी जेब में पैसे डाले। BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि इस तरह के विरोध से लाखों राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का काम नहीं था। बल्कि एक सोचा-समझा अपराध था।

चुघ ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “राहुल गांधी और इस काम में शामिल हर किसी को, चाहें वह समाजवादी पार्टी से हो या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी से, पूरे देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सबके सामने माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था। राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

VHP नेता सुरेंदर गुप्ता ने भी गांधी और यादव की आलोचना की। इस विरोध को अश्लील प्रदर्शन बताया, जो सनातन धर्म और संतों का अपमान करता है। गुप्ता ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की राजधानी में संसद के बाहर ऐसा अश्लील प्रदर्शन किया गया। जिस तरह से दो ‘पप्पुओं’ ने सनातन और संतों का अपमान किया। उससे संतों के साथ-साथ हिंदू समुदाय में भी बहुत गुस्सा है।”

पप्पू यादव की सफाई

इस बीच, पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने न तो किसी संत को गाली दी और न ही उनका अपमान किया। यादव ने पीटीआई से कहा, “मैंने किसी को गाली नहीं दी। मैंने किसी संत का नाम नहीं लिया और न ही उनका अपमान किया। सनातन और इस देश के सौ करोड़ लोगों की आस्था की रक्षा के लिए हम एक लाख बार कुर्बानी देने को तैयार हैं। आप हमारे खिलाफ जितने चाहें मुकदमे कर लें और जितना चाहें हमला कर लें।” यादव बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद हैं।

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E20 पेट्रोल पर नया विवाद, जयराम रमेश ने माइलेज और इंजन खराबी को लेकर सरकार से पूछे सवाल

jairam ramesh questions E-20 petrol

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने E20 पेट्रोल को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि E20 लागू होने के बाद माइलेज में कमी, इंजन की समस्या और पुराने वाहनों में खराबी की शिकायतें बढ़ी हैं। ALSO READ: बांकीपुर में प्रंशात किशोर ने कर दिया 'खेला', भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को झटका

जयराम रमेश ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि 29 जुलाई 2026 को संसद में E20 पेट्रोल के देशभर में रोलआउट पर नितिन गडकरी के जवाब ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने दावा किया कि E20 को वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है।

 

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि लेकिन पिछले कई महीनों से देशभर के उपभोक्ता और मैकेनिक लगातार निम्नलिखित समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं-

 

  • माइलेज में कमी
  • इंजन के प्रदर्शन में गिरावट
  • E20 ईंधन का वाहनों पर दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता
  • 2023 से पहले के वाहनों में इंजन की कम्पैटिबिलिटी, कोल्ड-स्टार्ट की समस्या और इंजन के तेजी से घिसने की शिकायतें
  • पुराने वाहनों में फ्यूल इंजेक्टर जाम होना, फ्यूल लाइन में जंग लगना और रबर के पुर्जों में दरारें आने की बढ़ती घटनाएं
  • आम उपभोक्ताओं के पास E20 पेट्रोल के अलावा व्यावहारिक रूप से कोई दूसरा विकल्प नहीं छोड़ा गया।

 

उन्होंने कहा कि जून 2026 में 2023 से पहले के पेट्रोल वाहनों के 44,000 से अधिक मालिकों पर किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में पाया गया कि E20 लागू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने वाहनों पर प्रतिकूल प्रभाव महसूस किया। ALSO READ: Lovlina Borgohain ने ग्लास्गो के रेस्टोरेंट में पकड़ी बड़ी गलती, भारत के नक्शे पर जताई आपत्ति

 

सितंबर 2025 में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बायोफ्यूल के कारण वाहन या इंजन को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायतों को “BS” (bullshit) करार दिया था। इसके बावजूद मोदी सरकार लगातार इन दावों को खारिज करती रही है, जबकि जुलाई 2026 की ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की रिपोर्ट और नीति आयोग के 2021 एथेनॉल पॉलिसी रोडमैप-जिसका संसद में स्वयं नितिन गडकरी ने हवाला दिया था-स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं कि-

 

  • E20, E10 ईंधन के लिए डिज़ाइन किए गए वाहनों में रबर के पुर्जों-जैसे होज़, सील, गैस्केट और O-rings-को अधिक तेजी से खराब करता है।
  • ड्यूरेबिलिटी परीक्षणों के दौरान यात्री वाहनों में इंजन की खराबी और फेलियर दर्ज किए गए।
  • E20 फ्यूल टैंक और अन्य आंतरिक धातु के पुर्जों में जंग लगने का जोखिम बढ़ाता है।
  • E20 के कारण पुराने चार पहिया वाहनों की फ्यूल एफिशिएंसी 6-7%, पुराने दो पहिया वाहनों की 3-4% और E20-अनुकूल चार पहिया वाहनों की भी 1-2% तक कम हो जाती है।

 

उन्होंने कहा कि लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। लोग जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, मोदी सरकार के मंत्री किसी को भी यह भरोसा दिलाने में नाकाम रहे हैं कि E20 से कोई नुकसान नहीं होता- क्योंकि इसके बारे में कोई ठोस डेटा या रिपोर्ट मौजूद नहीं है।

मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा आगे, सतीश पटेल ने बनाई बढ़त

satish patel

Manjalpur Bypoll Result: वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के बाद आज (3 अगस्त) सुबह से वोटों की गिनती शुरू हो गई। अब तक प्राप्त रुझानों में बीजेपी प्रत्याशी सतीश पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी पर बढ़त बना ली है।

 

इस चुनाव में 37.05 फीसदी जैसा कम मतदान दर्ज किया गया था। इसके चलते बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आशान्वित हैं। मतगणना की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और दोपहर तक हार-जीत की तस्वीर पूरी तरह साफ होने की संभावना है।

 

फर्स्ट राउंड के अंत में बीजेपी प्रत्याशी सतीश पटेल ने बढ़त बना ली है। वे कांग्रेस प्रत्याशी भीखाभाई रबारी से 1640 वोटों से आगे चल रहे थे। विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के दूसरे दौर में, बीजेपी उम्मीदवार सतीश पटेल को 3,109 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार भीखा रबारी को 1,230 वोट मिले।

 

इस सीट पर कुल 19 दौर राउंड में मतगणना पूरी की जाएगी। इसके लिए मतगणना केंद्र पर 14 ईवीएम मशीन टेबल और 1 पोस्टर बैलेट टेबल, यानी कुल 15 टेबल की विशेष व्यवस्था की गई है। सुबह 8 बजे सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू हुई, जिसके बाद 260 मतदान केंद्रों की ईवीएम के वोटों की गिनती चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है।

 

गणना कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए वडोदरा जिला निर्वाचन अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट डॉ. अनिल धामेलिया के मार्गदर्शन में विशाल स्टाफ तैनात किया गया है। इसमें 42 मतगणना कर्मी, प्रत्येक टेबल पर निगरानी के लिए 42 माइक्रो ऑब्जर्वर और चुनाव प्रबंधन से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 200 अन्य कर्मचारी लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

 

चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त जनरल ऑब्जर्वर, पुलिस ऑब्जर्वर और एक्सपेंडिचर ऑब्जर्वर की सीधी देखरेख में काम हो रहा है। कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए मतगणना केंद्र पर त्रिस्तरीय (3-Tier) सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जहां 200 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान तैनात हैं।

LIVE: दतिया, बांकीपुर और मांजलपुर उपचुनाव के लिए मतगणना

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Latest News Today Live Updates in Hindi : मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना कुछ ही देर में शुरू होगी। पल पल की जानकारी…

-मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होगी।

-दतिया उपचुनाव में नतीजों से पहले कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती सस्पेंड, भितरघात के आरोपों के बाद कार्रवाई।

सावन के पहले सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु। पूजा-अर्चना और अभिषेक का दौर जारी।

दतिया उपचुनाव में नतीजों से पहले कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती सस्पेंड, भितरघात के आरोपों के बाद कार्रवाई

Former Congress MLA Rajendra Bharti suspended ahead of Datia by-election results

दतिया उपचुनाव की मतगणना से ठीक पहले कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर कार्रवाई की है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से जारी पत्र में राजेंद्र भारती की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दी गई है। गौततलब है कि दतिया उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार रहे घनश्याम सिंह ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।उन्होंने राजेंद्र भारती को पार्टी से निष्कासित करने की मांग की थी।

 

कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह का आरोप है कि चुनाव के दौरान पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने भितरघात किया है। उन्होंने कहा कि राजेंद्र भारती ने भाजपा के साथ मिलकर उनको हराने का काम किया। मीडिया से बात करते हुए घनश्याम सिंह ने कहा कि चुनाव के दौरान उनके साथ भितरघात हुआ, जिससे कांग्रेस को सीधा नुकसान पहुंचा। उनका दावा है कि पार्टी के कुछ लोगों ने संगठन के हितों के खिलाफ काम किया।

Former Congress MLA Rajendra Bharti suspended ahead of Datia by-election results

कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि राजेंद्र भारती ने भाजपा नेताओं के साथ मिलकर उनके खिलाफ माहौल बनाया और चुनाव में उन्हें कमजोर करने के लिए पूरी ताकत लगाई। उनके मुताबिक, यह सब सुनियोजित रणनीति के तहत किया गया।

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कांग्रेस प्रत्याशी धनश्याम सिंह ने आऱोप लगाया कि राजेंद्र भारती ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव के दौरान पैसे बांटा और भाजपा प्रत्याशी का सहयोग किया। उनका दावा है कि राजेंद्र भारती को भाजपा की ओर से पैसा दिया गया और उनके समर्थकों तथा करीबी लोगों के माध्यम से चुनाव के दौरान पैसे बांटे गए। घनश्याम सिंह का कहना है कि इन गतिविधियों से कांग्रेस के चुनाव अभियान को नुकसान पहुंचा।