पीएम रात में नहीं सोते, अमित शाह संसद से भाग गए…राहुल गांधी ने दिखाए तेवर, कहा- हम इनको पागल कर देंगे!

पीएम रात में नहीं सोते, अमित शाह संसद से भाग गए...राहुल गांधी ने दिखाए तेवर, कहा- हम इनको पागल कर देंगे!

Rahul Gandhi vs PM Modi: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक कार्यक्रम में एकदम बेबाक और आक्रामक अंदाज में नजर आए। 'रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन' के मंच से उन्होंने न सिर्फ केंद्र सरकार की नीतियां पर सवाल खड़े किए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और संघ (RSS) पर भी ऐसा तंज कसा कि सियासी गलियारों में खलबली मच गई। अपनी चिर-परिचित बेबाकी में राहुल ने कहा कि सरकार किसी की सुनना नहीं चाहती, लेकिन हम इनको पागल कर देंगे।

पीएम को रात को नहीं सोते… 

राहुल गांधी ने पीएम मोदी की कार्यशैली पर सीधा कटाक्ष करते हुए कहा कि पीएम रात-रात भर नहीं सोते। इसके पीछे कई गहरे और छुपे हुए कारण हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लपेटे में लेते हुए कहा कि खुद को चाणक्य और सरदार पटेल बताने वाले अमित शाह संसद में घुस भी नहीं पाए और भाग निकले। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वे पहली बार देश की असली आवाज (एक्सप्रेशन) सुन रहे हैं।

राहुल ने लोगों से निडर होने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में कई लोग इन कायरों की फौज के सामने खुद भी कायरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। जब आपकी लड़ाई जोकरों के एक समूह से है, तो फिर किसी से डरने की क्या जरूरत? राहुल ने मंच से कार्यकर्ताओं को दिल खोलकर बोलने की आजादी का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि जो दिल में है, बेझिझक बोलिए। अगर हिंदू हैं तो शिव की बात कीजिए, मुस्लिम हैं तो अल्लाह की बात कीजिए। अगर कोई भटक जाएगा तो हम प्यार से सही राह दिखा देंगे।

सरकार की विदेश नीति पर सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ। ऐसे में अगर इंदिरा गांधी जैसा नेतृत्व होता, तो हमारे पास सबसे बड़ा अवसर होता। क्योंकि ईरान हमारा पुराना दोस्त है, अमेरिका और रूस भी हमारा दोस्त है तो हम इनकी आपस में दोस्ती करा सकते थे। लेकिन पाकिस्तान हमारी जगह उठाकर ले गया और नरेंद्र मोदी देखते रह गए।

आरएसएस को भारत की समझ ही नहीं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा कि संघ के लोगों को 3000 साल पुराने भारत का ताना-बाना नहीं, बल्कि आज के आधुनिक भारत को समझने की जरूरत है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में मंच से आरएसएस के स्टाइल में सैल्यूट करने की बात कही और जोड़ा कि आरएसएस का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन अगर कोई आरएसएस को अनुचित तरीके से दबाने की कोशिश करेगा, तो हम उसकी रक्षा के लिए भी खड़े होंगे।

पीएम पीसी क्यों नहीं करते?

मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने के मुद्दे पर राहुल ने अपनी एक पुरानी मुलाकात का दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि मैं पहले सोचता था कि पीएम मोदी का प्रेस कॉन्फ्रेंस न करना कोई 'मार्केटिंग स्ट्रेटजी' है। लेकिन जब मैं 5 मिनट उनके साथ एक कमरे में बैठा, तब मुझे समझ आ गया कि वे बहुत देर तक बिना लिखे-पढ़े बोल ही नहीं सकते।

बचपन का एक यादगार संस्मरण

जब मैं 12 साल का था, तब दादी (इंदिरा गांधी), मां, प्रियंका और मैं अमेरिका गए थे। आधिकारिक रात्रिभोज में दादी और मां गईं। लौटकर दादी ने मां से कहा— 'ये अमेरिकन हमें क्या समझते हैं? हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री केवल हाथ मिलाने या दोस्ती करने नहीं जाता, वह हमेशा अपने देश के स्वाभिमान और हित के लिए जाता है।

रिपोर्ट- अमेरिकी नौसैनिकों ने जहाज से कूदने की कोशिश की:मानसिक तनाव से जूझ रहे; USS अब्राहम लिंकन वॉरशिप ईरान जंग में 9 महीने से तैनात

अमेरिकी वॉरशिप USS अब्राहम लिंकन पर तैनात अमेरिकी नौसैनिक भारी मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं। नेवी टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज पर तैनात कई सदस्यों ने समुद्र में कूदने की कोशिश की है। USS अब्राहम लिंकन करीब 9 महीने से समुद्र में है। यह जहाज लगातार 250 से ज्यादा दिन तक बिना किसी पोर्ट पर रुके समूद्र में लगातार चल रहा है। इस पर करीब 5,000 अमेरिकी नौसैनिक और मरीन तैनात हैं। जहाज 21 नवंबर 2025 को सैन डिएगो से रवाना हुआ था। इसे पहले प्रशांत क्षेत्र में जाना था, लेकिन इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद इसे पश्चिम एशिया भेज दिया गया। मई में लौटना था, लेकिन मिशन बार-बार बढ़ा इस तैनाती को पहले मई में खत्म होना था। लेकिन इसे कई बार आगे बढ़ाया गया। अब जहाज ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में पांचवें महीने की लड़ाकू अभियान में है। लगातार बढ़ती तैनाती और लंबे समय तक समुद्र में रहने का असर जहाज पर तैनात लोगों की मानसिक और शारीरिक हालत पर पड़ रहा है। परिवारों ने नेवी नेतृत्व से मांगी मदद पिछले हफ्ते सैन डिएगो में करीब 200 परिवारों ने एक टाउन हॉल में कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ के सामने अपनी चिंताएं रखीं। रिपोर्ट के मुताबिक, परिवारों ने बताया कि लंबे मिशन का उनके रिश्तेदारों पर गंभीर असर पड़ रहा है। एक महिला ने हंग काओ को बताया कि उसके पति ने उसी दिन उसे मैसेज किया था कि वह उम्मीद करता है कि अगली सुबह उसकी आंख न खुले। एक अन्य परिवार के सदस्य ने नौसेना के नेतृत्व पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पहले परिवारों को नौसेना के नेतृत्व पर भरोसा था, लेकिन अब वह भरोसा खत्म हो गया है। कम से कम 6 नौसैनिकों ने समुद्र में कूदने की कोशिश की रिपोर्ट के मुताबिक, USS अब्राहम लिंकन पर तैनात कम से कम 6 अमेरिकी सैन्यकर्मियों ने इस लंबे मिशन के दौरान जहाज से समुद्र में कूदने की कोशिश की। Military Times से एनाबेल लोमा ने बताया कि तैनाती एक बार फिर बढ़ाए जाने के बाद उनके पति ने भी जहाज से कूदने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि उनके पति डरे हुए हैं। उन्हें डर है कि उन्हें dishonourable discharge यानी खराब रिकॉर्ड के साथ सेना से निकाला जा सकता है। लोमा के मुताबिक, उनके पति करीब 13 साल से सेना में हैं और उन्हें डर है कि थकान और मानसिक दबाव के कारण उनका पूरा करियर बर्बाद हो जाएगा। एक दूसरे नौसैनिक की पत्नी ने भी बताया कि उसके पति को अपने एक साथी को जहाज के डेक पर वापस खींचना पड़ा। वह साथी समुद्र में कूदने की कोशिश कर रहा था। जहाज पर रहने की हालत को लेकर भी शिकायतें मानसिक तनाव के साथ-साथ जहाज पर रहने की खराब होती सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। कैलिफोर्निया के कांग्रेस सदस्य माइक लेविन ने X पर लिखा कि जहाज पर तैनात नौसैनिकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जहाज पर शॉवर में फफूंद लगी है, कई टॉयलेट खराब हैं और लॉन्ड्री की सुविधा कई हफ्तों तक बंद रही। लंबे समय तक गर्म पानी भी नहीं मिला। लेविन के मुताबिक, खाने की हालत भी खराब थी। एक समय खाने में सिर्फ आधा कप चावल और दो टॉर्टिला दिए गए। इसके अलावा साबुन, डियोडरेंट और टूथपेस्ट जैसी जरूरी चीजों की भी कमी रही। रक्षा मंत्री ने रिपोर्टों को बताया था फेक न्यूज इन खराब हालात से जुड़ी पहले की रिपोर्टों को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने खारिज करते हुए इन्हें “फेक न्यूज” बताया था। इसके जवाब में माइक लेविन ने रक्षा मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये पुरुष और महिलाएं अपने देश की सेवा करने के लिए सेना में शामिल हुए हैं। उनके मुताबिक, देश को कम से कम उन्हें गर्म पानी, काम करने वाला टॉयलेट और अच्छा खाना तो देना ही चाहिए। लेविन ने आरोप लगाया कि हेगसेथ ये बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दे पा रहे हैं और इसके बावजूद परिवारों के सामने खड़े होकर उन्हें झूठा कह रहे हैं। लंबी तैनाती, लगातार समुद्र में रहने, मिशन के बार-बार बढ़ने और जहाज पर सुविधाओं की कमी की शिकायतों के बीच USS अब्राहम लिंकन पर तैनात अमेरिकी नौसैनिकों की हालत को लेकर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।

हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर संसद में सियासी बवाल! खड़गे ने BJP पर लगाया ‘छुआछूत’ का आरोप, नड्डा ने किया पलटवार

Haldwani Shuddhikaran Row: हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर गुरुवार (13 अगस्त) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। गुरुवार को राज्यसभा में ‘शुद्धिकरण’ रस्म को लेकर राजनीतिक टकराव हुआ। खड़गे ने उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके दौरे के बाद उस जगह पर शुद्धिकरण की रस्म निभाई गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा काम लोकतंत्र के अनुकूल है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “…मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे। उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार से जुड़े मुद्दों को दोहराया। लेकिन मेरे भाषण के बाद, बीजेपी के लोगों ने उस मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए वहाँ हवन किया… क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं विपक्ष का नेता (LoP) हूं…।”

उन्होंने इस घटना को संविधान का अपमान करार देते हुए कहा कि वह इसे एक राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाना चाहते हैं। खड़गे ने कहा, “यह संविधान का अपमान है।” कांग्रेस प्रमुख ने यह भी कहा कि उन्होंने संसद में कई साल बिताए हैं। उन्होंने उस हरकत पर आपत्ति जताई जिसे उन्होंने अपने प्रति ‘छुआछूत’ का व्यवहार बताया।

उन्होंने आगे कहा, “मैं इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता। मैं बरसों से इस सदन का सदस्य रहा हूं। मैं अनुसूचित जाति से आता हूं और दलित हूं… मैंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि मेरी मदद करो या मेरी रक्षा करो। मुझमें लड़ने की ताकत है और मैं लड़ता भी हूं। लेकिन आप मेरे साथ छुआछूत जैसा व्यवहार करते हैं, ‘शुद्धिकरण’ करते हैं और मेरा अपमान करते हैं।”

नड्डा ने BJP का संबंध होने से इनकार किया

वहीं, खड़गे के आरोपों पर BJP के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। लेकिन खड़गे के इस दावे को खारिज कर दिया कि इसके पीछे BJP कार्यकर्ता थे। नड्डा ने कहा कि इसमें शामिल लोग BJP के सदस्य नहीं थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी ऐसे व्यवहार का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस मामले की जांच की जाएगी।

उन्होंने कहा, “खड़गे जी ने जो कहा वह वाकई दुखद है… न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए बल्कि हम सभी के लिए… बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। लेकिन हम इसकी जांच करेंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि वहां जो कुछ भी हुआ, उसकी निश्चित रूप से जांच की जाएगी। लेकिन मैं यह साफ करना चाहता हूं कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। मैं इसकी निंदा करता हूं। राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले को देखेंगे। यह हम सभी के लिए बहुत खेद की बात है कि आपकी भावनाएं आहत हुईं।”

नड्डा ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पार्टी के शामिल होने से इनकार करने और जांच का वादा करने के बाद भी खड़गे BJP को ही जिम्मेदार ठहराते रहे। नड्डा ने कहा, “मैंने पहले ही कहा है कि BJP ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। यह हम सबके लिए, पूरे देश के लिए अफसोस की बात है। हम इसकी जांच करेंगे। लेकिन अगर खड़गे साहब कहते हैं कि आप ऐसा करते हैं, तो यह सही नहीं है।”

राज्यसभा सभापति ने भी घटना की निंदा की

बहस के दौरान राज्यसभा सभापति ने दखल देते हुए कहा कि खड़गे का कथित अपमान सदन में मौजूद हर व्यक्ति का अपमान माना जाएगा। सभापति ने कहा, “अगर खड़गे जी का अपमान होता है, तो सबका अपमान होता है।” सभापति ने यह भी कहा कि राजनीतिक जुड़ाव से ऊपर उठकर इस घटना की निंदा की जानी चाहिए। साथ ही जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जानी चाहिए। सभापति ने आगे कहा कि इस हरकत के पीछे जो लोग हैं, उन्हें पकड़ा जाना चाहिए और सजा मिलनी चाहिए।

हल्द्वानी में क्या हुआ था?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया गया। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि जिस ‘श्री राम सेना’ संगठन ने यह ‘शुद्धिकरण’ किया। वह BJP से जुड़ा है। हालांकि, BJP ने इस आरोप का खंडन किया।

गोदियाल ने दावा किया कि यह अनुष्ठान इसलिए किया गया क्योंकि खरगे दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने BJP पर जाति के नाम पर समाज में बंटवारा करने का आरोप लगाया। इस अनुष्ठान को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए गोदियाल ने दावा किया कि इससे कांग्रेस और BJP की विचारधारा में बुनियादी अंतर स्पष्ट होता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दक्षिणपंथी संगठन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।

बीजेपी का ‘श्री राम सेना’ से किनारा

वहीं, BJP ने ‘श्री राम सेना’ से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया और कांग्रेस पर राजनीतिक फायदे के लिए पार्टी की छवि खराब करने का आरोप लगाया। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री खजान दास ने दावा किया कि रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के दौरान कुछ ऐसे नारे लगाए गए जिनसे सनातन समुदाय की भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक महत्व की जगह है। वहां किसी दूसरे धर्म से जुड़े नारे लगाने से लोग नाराज हुए।

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हिमाचल प्रदेश में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, कांग्रेस सरकार ने 60 पैसे प्रति लीटर अनाथ और विधवा सेस लगाया

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल आज से महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर ऑर्फन एंड विडो यानी अनाथ और विधवा सेस (Orphan and Widow Cess) लगाने की घोषणा की है। यह सेस 11 अगस्त, 2026 की आधी रात से लागू हो गया है। राज्य के टैक्स और आबकारी विभाग ने 11 अगस्त को जारी एक नोटिफिकेशन में कहा कि यह सेस पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल दोनों पर ₹0.60 (60 पैसे) प्रति लीटर की दर से लगाया जाएगा।

नोटिफिकेशन के अनुसार, अनाथ और विधवा सेस हिमाचल प्रदेश में पहली बार बिक्री के समय लगाया जाएगा। यह सेस ‘हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2005’ की धारा 6-A के तहत लागू किया गया है। इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली हुई है। यह सेस मार्च में राज्य विधानसभा द्वारा ‘हिमाचल प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स (संशोधन) बिल, 2026’ पास किए जाने के बाद लगाया गया है।

अभी और महंगा होने की आशंका

इस संशोधन ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीज़ल पर ‘अनाथ और विधवा सेस’ लगाने के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया। हमारे सहयोगी cnbctv18.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक संशोधित कानून के तहत, सरकार ₹5 प्रति लीटर तक की दर से सेस लगा सकती है। अभी जो 60 पैसे का सेस लगाया गया है। वह कानून में तय अधिकतम सीमा से काफी कम है।

जब यह बिल पेश किया गया था, तो राज्य सरकार ने कहा था कि इस सेस का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की विधवाओं और अनाथों के कल्याणकारी कार्यों के लिए रेवेन्यू का एक खास और टिकाऊ जरिया बनाना है। राज्य सरकार ने पहले कहा था कि यह सेस हिमाचल प्रदेश के भीतर बिक्री के शुरुआती चरण पर वसूला जाएगा, न कि बिक्री के बाद के चरणों में। मार्च में बने कानून में मौजूदा VAT कानून के तहत पहले से लागू टैक्स के अलावा यह सेस लगाने का प्रावधान है।

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इस बीच, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के लिए कांग्रेस आलाकमान की अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। सुक्खू ने डिया से बातचीत के दौरान कहा कि कुल्लू से कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर जल्द होने वाली पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) की बैठक से पहले या बाद में शपथ ले सकते हैं।

Photo: एक फ्रेम में अमित शाह और राहुल गांधी, तस्वीर ने खींचा सोशल मीडिया का ध्यान! पहली बार दिखा दुर्लभ राजनीतिक नजारा

Supriya Sule Daughter Reception Photo: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (10 अगस्त) रात आयोजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले की हाई-प्रोफाइल वेडिंग रिसेप्शन पार्टी में देश की राजनीति का एक बेहद दुर्लभ नजारा देखने को मिला। संसद में राजनीतिक मुद्दों पर अक्सर एक-दूसरे पर हमला करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक ही फ्रेम में नजर आए।

दोनों नेताओं की तस्वीर सामने आते ही यह सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई। रिसेप्शन समारोह में अमित शाह और राहुल गांधी एक-दूसरे से कुछ ही दूरी पर खड़े दिखाई दिए। जैसे ही अमित शाह मंच की ओर बढ़े सुप्रिया सुले ने गृह मंत्री को आगे जाने का इशारा किया। हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए शाह का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है।

अमित शाह ने नवविवाहित कपल को दिया आशीर्वाद

समारोह के दौरान अमित शाह जब मंच की ओर बढ़े तो सुप्रिया सुले ने उन्हें आगे जाने का इशारा किया। फिर अमित शाह ने हाथ जोड़कर नमस्ते किया और नवविवाहित जोड़े के पास पहुंचे। रेवती सुले और उनके पति ने अमित शाह के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद गृह मंत्री ने नवविवाहित जोड़े को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया। इस पूरे पल को वहां मौजूद फोटोग्राफरों ने कैमरों में कैद कर लिया। इसी दौरान राहुल गांधी भी अपनी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ समारोह में पहुंचे। उनके साथ सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं।

राहुल गांधी भी पहुंचे मंच पर

रिसेप्शन में मेहमानों का अभिवादन करने के लिए सोनिया गांधी अपने पूरे परिवार के साथ मंच पर पहुंचीं। इसी दौरान वह मंच के एक छोर की ओर चली गईं। सुप्रिया सुले उन्हें वापस नवविवाहित जोड़े के पास लेकर आईं। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी को भी जोड़े के बगल में खड़ा किया।

इसके बाद सुप्रिया सुले खुद एक तरफ हट गईं। फिर वहां मौजूद फोटोग्राफरों को ऐतिहासिक तस्वीरें लेने का मौका मिला। इस तरह समारोह में अमित शाह और राहुल गांधी दोनों एक ही कार्यक्रम और एक ही मंच के आसपास नजर आए। इस समारोह में सपा मुखिया अखिलेश यादव भी आकर्षण के केंद्र रहे।

Sule’s Daughter’s Reception_

एक समारोह में अलग-अलग दलों के बड़े नेता

दिल्ली के 6 जनपथ में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल रिसेप्शन में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के कई बड़े नेता पहुंचे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और NCP नेता प्रफुल्ल पटेल समेत कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।

Sule’s Daughter’s Reception

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इतने बड़े नेताओं का एक ही निजी समारोह में एक साथ पहुंचना चर्चा का विषय रहा। सोशल मीडिया पर चर्चा के दौरान खासतौर पर अमित शाह और राहुल गांधी की एक फ्रेम में मौजूदगी को इस आयोजन का सबसे खास ऐतिहासिक राजनीतिक क्षण माना गया।

जून में हुई थी रेवती सुले की शादी

सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले ने जून में मुंबई में नागपुर के उद्योगपति सारंग लखानी के साथ शादी की थी। दिल्ली में आयोजित यह रिसेप्शन शादी के बाद आयोजित एक भव्य समारोह था। इस समारोह में राजनीति, उद्योग और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रही।

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कल का मौसम: 12 अगस्त को ओडिशा-बंगाल-महाराष्ट्र, राजस्थान संग इन 20 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट! यहां होगी मूसलाधार बरसात

IMD Alert: देशभर में बारिश ने इस वक्त प्रचंड रफ्तार पकड़ रखी है। इस बीत मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 अगस्त को भी कई राज्यों में बारिश का कड़ा मिजाज देखने को मिलेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी वेदर बुलेटिन के मुताबिक बुधवार को देश के करीब 20 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, मध्य महाराष्ट्र और पूर्वी राजस्थान में मूसलाधार बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया है। वहीं उत्तर भारत के पहाड़ी व मैदानी इलाकों से लेकर पूर्वोत्तर और तटीय राज्यों तक बादलों का जमकर बरसना तय माना जा रहा है।

ओडिशा, बंगाल, महाराष्ट्र और पूर्वी राजस्थान में मूसलाधार बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 अगस्त को चार प्रमुख राज्यों में मूसलाधार बारिश का बड़ा असर देखने को मिलेगा। ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, मध्य महाराष्ट्र और पूर्वी राजस्थान के अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी/घाटी वाले क्षेत्रों में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन ने इन इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

उत्तर भारत, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर समेत 20 राज्यों में भारी बारिश

मूसलाधार बारिश वाले राज्यों के अलावा देश के कई दूसरे हिस्सों में भी भारी बारिश देखने को मिलेगी। उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बालटिस्तान-मुज़फ्फराबाद और पश्चिमी राजस्थान में तेज बारिश होने का अनुमान है। इसी तरह पश्चिमी और मध्य भारत के पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात क्षेत्र और कोंकण व गोवा में भी मूसलाधार बारिश का जोर रहेगा।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में बारिश का दौर जारी रहेगा। इसके साथ ही अंडमान व निकोबार द्वीप समूह और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

तूफानी हवाएं, आंधी और आकाशीय बिजली का खतरा

12 अगस्त को बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने का गंभीर खतरा बना रहेगा। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग अलग जगहों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।

वहीं आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं और बिजली चमकने का अनुमान है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और बिजली कड़केगी। अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, छत्तीसगढ़, गुजरात राज्य, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा और उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में भी गरज-चमक और बिजली गिरने का अंदेशा जताया गया है।

तटीय क्षेत्रों में तेज सतही हवाएं और अरब सागर में अलर्ट

मैदानी और तटीय राज्यों में मौसमी हलचल बनी रहेगी। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के अलग-अलग इलाकों में दिन के समय तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। समुद्री सुरक्षा के लिहाज से मौसम विभाग ने अरब सागर के लिए भी चेतावनी जारी की है।

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अरब सागर में सोमालिया और ओमान तट के पास व उससे सटे क्षेत्र, पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश भागों, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और उत्तर-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के झोंके 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न जाने की हिदायत दी है।

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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस:हारे तो मनमानी पर रोक लगेगी, नवंबर में होनी है वोटिंग

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की आशंका 65% तक है। नवंबर में मिडटर्म के लिए वोटिंग होनी है। मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के चार साल के कार्यकाल के बीच होने वाला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के साथ राज्यों और स्थानीय सरकारों के कई अहम पदों के लिए वोटिंग होगी। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के करीब 80% उम्मीदवार पहले ही तय हो चुके हैं। मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रम्प राष्ट्रपति बने रहेंगे। लेकिन कांग्रेस में बहुमत खोने पर उनके फैसलों पर रोक-टोक बढ़ सकती है। टैरिफ, वीजा और दूसरे बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में ट्रम्प को डेमोक्रेट्स के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकाल के बाकी दो साल में उन्हें कांग्रेस के साथ ज्यादा तालमेल बनाकर चलना होगा। मिडटर्म में ट्रम्प की तीन सबसे बड़ी चुनौती… महंगाई, इमिग्रेशन और ईरान युद्ध 1. महंगाई: ट्रम्प की आर्थिक रेटिंग 32% पर​ फिसल गई अमेरिकी वोटरों की सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। इप्सोस सर्वे में 54% लोगों ने महंगाई और अर्थव्यवस्था को वोट का बड़ा मुद्दा बताया। वहीं, एपी-एनओआरसी सर्वे में सिर्फ 32% लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था अच्छी तरह संभाल रहे हैं। 69% अमेरिकियों को मौजूदा आर्थिक हालात खराब लगते हैं। इप्सोस सर्वे में 65% लोगों ने कहा कि रोजमर्रा का किराना महंगा पड़ रहा है, जबकि 48% को डर है कि अगले साल आर्थिक हालात और खराब हो सकते हैं। ईरान युद्ध: 20% वोटरों के लिए बड़ा मुद्दा ईरान युद्ध अब सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं है। इसका असर सीधे अमेरिकी लोगों की जेब पर पड़ रहा है। इप्सोस सर्वे में 20% वोटरों ने ईरान युद्ध को वोट का अहम मुद्दा बताया। अगर जंग लंबी खिंची और तेल महंगा हुआ तो पेट्रोल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं। यानी ट्रम्प के सामने चुनौती है ईरान पर सख्ती भी दिखानी है और अमेरिकी लोगों को महंगाई से राहत का भरोसा भी देना है। इमिग्रेशन: 61% अमेरिकी ट्रम्प की नीति से नाराज 2024 में इमिग्रेशन ट्रम्प की बड़ी ताकत था, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। हालिया सर्वे में 61% अमेरिकियों ने ट्रम्प की इमिग्रेशन नीति का विरोध किया, जबकि समर्थन सिर्फ 39% रहा। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रम्प की इस नीति को 49% लोगों का समर्थन था। रिपब्लिकन वोटरों में भी समर्थन घटकर 80% रह गया है। सख्त डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कार्रवाई के बीच बढ़ती नाराजगी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए बड़ा नुकसान बन सकती है। ट्रम्प पर महाभियोग का खतरा बढ़ेगा अगर रिपब्लिकन कांग्रेस में बहुमत खो देते हैं, तो ट्रम्प पर महाभियोग की कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में मजबूत होते हैं तो वे ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कांग्रेस के पास टैरिफ और इमिग्रेशन से जुड़े कानूनों पर बड़ा अधिकार है। वह ट्रम्प के फैसलों पर कानून बनाकर रोक लगा सकती है और वीजा नीति को भी चुनौती दे सकती है। ईरान युद्ध में भी कांग्रेस सैन्य कार्रवाई और युद्ध के लिए फंडिंग पर ट्रम्प पर दबाव बना सकती है। यानी कांग्रेस का बहुमत गया तो ट्रम्प की मनमानी पर लगाम लग सकती है।

ममता बनर्जी की कार पर पत्थरों-जूतों और कीचड़ से हमला, चोर-चोर के लगे नारे

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रविवार को उत्तर 24 परगना जिले में विरोध का सामना करना पड़ा। वह एक मृत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार को घेर लिया और ‘चोर’ के नारे लगाए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार पर कीचड़ भी फेंका। यह घटना बिजपुर में हुई। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों का एक समूह ममता बनर्जी की गाड़ी के आसपास जमा हो गया, जब वह मृत पार्टी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं।

ममता बनर्जी ने लगाया ये आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। उन्होंने कहा कि कार पर हमला इतना जोरदार था कि अगर उसकी खिड़कियां खुली होतीं तो उनके सिर में गंभीर चोट लग सकती थी। ममता बनर्जी ने कहा, “हम सब मारे जा सकते थे। यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने अपने जीवन में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। आखिर यह सब क्या हो रहा है?” उन्होंने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने कहा कि पुलिस बीजेपी को सुरक्षा दे रही है, जबकि उनकी कार पर हमला पुलिस के सामने ही हुआ।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस की मौजूदगी में उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। उन्होंने कहा कि हमला इतना जोरदार था कि अगर कार की खिड़कियां खुली होतीं तो उनके सिर में गंभीर चोट लग सकती थी। ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “हम सब मारे जा सकते थे। यह सब पुलिस के सामने हुआ। मैंने ऐसा कुछ कभी नहीं देखा। आखिर यह सब क्या हो रहा है? पुलिस बीजेपी को सुरक्षा दे रही है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उनकी कार पर पत्थर, जूते और कीचड़ फेंके गए। ममता बनर्जी ने इसे एक साजिश बताया। उन्होंने कहा, “मैंने पुलिस को पहले ही बताया था कि मैं यहां आ रही हूं। इसके बावजूद पुलिस ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए। पूरे पश्चिम बंगाल पर गुंडों का कब्जा है।” वहीं, प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ममता बनर्जी शांत इलाके में “अशांति फैलाने” आई थीं। प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ नारे भी लगाए गए। यह विरोध एक मृत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ता के घर जाने के दौरान हुआ। बताया गया है कि कार्यकर्ता की मौत हलीशहर पुलिस की हिरासत में तबीयत बिगड़ने के बाद हुई थी। हालांकि, इस मामले से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।

Jharkhand Students Protest: झारखंड में अनशन पर बैठे छात्र नेता की बिगड़ी तबीयत! कविता, कटाक्ष और पोस्टर बने हथियार, सरकार आज फिर करेगी बातचीत

Jharkhand Students Protest: झारखंड सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ 16वें दिन भी जारी छात्रों के आंदोलन के बीच रविवार (9 अगस्त) को प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के साथ फिर बातचीत करेगी। सरकार और छात्र संगठनों के बीच शुक्रवार रात और शनिवार को दिनभर हुई बैठकों के बावजूद गतिरोध दूर नहीं हो सका। इसके बाद रविवार को एक और दौर की बातचीत करने का फैसला लिया गया। इस बीच, रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में करीब एक सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की हालत शनिवार देर रात करीब तीन बजे अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसका ब्लड शुगर लेवल 53 दर्ज किया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के साथ शुक्रवार रात बातचीत की थी। इसके बाद शनिवार को सरकार ने विभिन्न छात्र संगठनों के साथ चार दौर की बातचीत की जिनमें कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ शामिल हैं। ये बैठकें बेनतीजा रहने के बाद सरकार ने रविवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र प्रतिनिधियों के साथ छठे दौर की बातचीत करने का फैसला किया।

राजनीतिक चालबाजी का आरोप

इस फैसले के तुरंत बाद जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सरकार पर राजनीतिक चालबाजी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच फूट डालना और उनकी मुख्य मांगों से लोगों का ध्यान भटकाना है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे संगठनों के साथ बातचीत कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिनकी मौजूदा आंदोलन में कोई भूमिका नहीं रही।

पासवान ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पत्रकारों से कहा, “यह सरकार की राजनीतिक चाल है। वह छात्रों में विभाजन पैदा करने और लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसे पता होना चाहिए कि सभी छात्र एकजुट हैं।” पासवान ने दावा किया कि जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने शुक्रवार रात पांच सदस्यीय सरकारी समिति के सामने अपनी सभी मांगें रख दी थीं।

हालांकि, शनिवार को मंत्रियों दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार, चामरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव वाली समिति ने एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ सहित विभिन्न छात्र संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरानलउनसे उनकी मांगों का डिटेल्स मांगा।

सरकार बातचीत जारी रखेगी

सरकार ने हालांकि कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई। वह प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की चिंताओं पर विचार कर रही है। रविवार को फिर बातचीत करने का फैसला शनिवार शाम सरकारी समिति और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच चार घंटे की बैठक के बाद लिया गया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि समिति ने मुख्यमंत्री को छात्र प्रतिनिधिमंडलों की ओर से उठाई गई मांगों और चिंताओं से अवगत कराया। मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में व्यापक सुधार की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार बातचीत जारी रखेगी।

छात्र मोर्चा ने रखी 5 मांगें

झारखंड छात्र मोर्चा ने पांच मांगें रखी हैं, जिनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द करना शामिल है। वहीं एनएसयूआई ने छह मांगें रखीं, जिनमें संदेह के घेरे में आने वाली सभी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की 90 दिनों के भीतर सीआईडी जांच और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की तर्ज पर झारखंड परीक्षा एजेंसी की स्थापना शामिल है। आदिवासी छात्र संघ के नेता कार्तिक उरांव ने भर्ती परीक्षाओं में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को अनिवार्य योग्यता वाले विषयों के रूप में शामिल करने तथा जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं पाई गई हैं, उन्हें रद्द करने की मांग की।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के संबंध में अभ्यर्थियों से सुझाव लेने के लिए सरकार ने एक ईमेल आईडी जारी की है। बातचीत जारी रहने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि सभी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार के रविवार तक मांगें पूरी नहीं करने पर 10 अगस्त को विधानसभा मार्च निकालने की भी घोषणा की है।

आइसा ने अलग मंच बनाया

इस बीच, अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) ने शनिवार को स्टेडियम में अपना अलग मंच बनाया। हालांकि, उसके नेताओं ने कहा कि इसे अलग आंदोलन नहीं माना जाना चाहिए। आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, जिन पर शुक्रवार को बिरसा चौक के पास विधानसभा मार्च के दौरान स्याही फेंकी गई थी। इसके बाद थोड़ी देर के लिए प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर नारे लगाए।

संगठन की रांची इकाई के प्रमुख विजय कुमार ने कहा कि उसके सदस्य 10 अगस्त के मार्च में शामिल होंगे। लेकिन अखिल भारतीय छात्र संघ के बैनर के बिना। आंदोलन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने भी प्रदर्शन किया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास के पास अवरोधक तोड़ने की कोशिश के दौरान उनकी पुलिस से झड़प हुई थी।

विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा

उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अजय आर्यन ने बताया कि मार्च के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब आठ से 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 11 अगस्त को अलग विधानसभा मार्च निकालने की घोषणा की है। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व परीक्षा पैनल अध्यक्ष एल. खियांग्ते से 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है।

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कविता, कटाक्ष और पोस्टर बने हथियार

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे झारखंड के छात्र अपने गुस्से को हिंसा या अपशब्दों के बजाय रचनात्मक अंदाज में आवाज दे रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर कहीं सरकारी नौकरियों का फर्जी ‘रेट कार्ड’ लगा है। कहीं व्यंग्यात्मक पोस्टर हैं तो कहीं ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियां गूंज रही हैं। रांची के बीचोंबीच स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 500 रुपये के नोट जैसी दिखने वाली गड्डियों से लदा एक तराजू सरकारी नौकरियों के नकली रेट कार्ड के पास रखा है। वहीं कुछ दूरी पर छात्र रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कृति रश्मिरथी की पंक्तियां सुनाते नजर आते हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच इस कविता का ‘कृष्ण की चेतावनी’ खंड सबसे अधिक लोकप्रिय है। इसके जरिए महाभारत के प्रसंग को मौजूदा भर्ती आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र खासकर ये पंक्तियां सुनाते नजर आते हैं, “वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी, पत्थर, पांडव आए कुछ और निखर।” छात्र इन पंक्तियों के जरिए पांडवों के वर्षों के संघर्ष की तुलना सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों को लेकर अनिश्चितता के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की अपनी तैयारी से कर रहे हैं।

‘नौकरी बिक्री केंद्र’

कुछ छात्रों ने व्यंग्यात्मक ‘नौकरी बिक्री केंद्र’ बनाया है, जिसमें सहायक शिक्षक के पद की कीमत 15 लाख रुपये, पुलिस उपाधीक्षक की 1.2 करोड़ रुपये, प्रखंड विकास अधिकारी की 90 लाख रुपये और अंचल अधिकारी की एक करोड़ रुपये बताई गई है। कुछ पोस्टर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ काल्पनिक ‘मुख्यमंत्री सीट बेचो योजना’ का जिक्र किया गया है। यहां व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा है, “पेमेंट करो आराम से, नौकरी पाओ सम्मान से।”

प्रदर्शनकारी छात्र विवेक ने सफेद टी-शर्ट पर स्याही से लिखा है, “व्यवस्था ने हमें निराश किया है।” एक अन्य स्थान पर एक छात्रा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के दिवंगत संस्थापक शिबू सोरेन के बड़े पोस्टर के सामने सिर झुकाकर उनके बेटे एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों के साथ ‘अन्याय करने वालों के खिलाफ कार्रवाई’ की अपील करती नजर आई।

महिला आरक्षण पर राहुल गांधी का रिजिजू को जवाब, बोले- 2023 का कानून बिना शर्त लागू करें

kiren rijiju and rahul gandhi on women reservation

राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साल बाद भी कानून लागू क्यों नहीं हुआ और इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। ALSO READ: IIT दिल्ली में PM मोदी का छात्रों को मंत्र, ‘जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस’, चुनौतियों से मत घबराना
 

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा – महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ। सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं? 2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के। ALSO READ: 'क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए?' राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर शशि थरूर का बड़ा बयान

 

राहुल के किस बयान ने रिजिजू को दी उम्मीद?

इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात किए जाने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा था कि देश की राजनीति का मकसद 'लोगों को यह समझाना होना चाहिए कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा हुआ है। रिजिजू ने राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताया।

 

राहुल गांधी के बयान पर रिजिजू ने क्या प्रतिक्रिया दी?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव साफ दिख रहा है। अब, मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।

 

गौरतलब है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं।