दतिया में हार के बाद भाजपा की जिला कार्यकारिणी भंग होना क्या नरोत्तम मिश्रा की दतिया राजनीति के अंत का संकेत?

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद अब एक्शन का दौर शुरु हो गया है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने दतिया की जिला कार्यकारिणी, मंडल और मोर्चा इकाइयों को भंग कर दिया। इसके साथ ही चुनावी हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया। नतीजों के बाद यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व ने चुनाव परिणाम को गंभीरता से लिया गया है और पूरे चुनाव के दौरान जिस भितरघात की चर्चा थी उस पर अब पार्टी एक्शन मोड में है।

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दतिया भाजपा जिला कार्यकारिणी पर एक तरह से नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का कब्जा था, इसका बडा कारण है कि नरोत्तम मिश्रा का लगातार 15 साल तक दतिया से विधायक रहना। इसके साथ नरोत्तम मिश्रा की गिनती मध्यप्रदेश भाजपा के उन दिग्गज नेताओं में होती थी  जिनका प्रभाव सरकार से लेकर संगठन तक में था। 
 

शहर में हार के बाद पार्षदों पर एक्शन की तैयारी-दतिया भाजपा जिला कार्यकारिणी के भंग किए जाने के बाद अब पार्टी उन पार्षदों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई कर सकती है, जिन्होंने चुनाव में पार्टी के विरोध में काम किया है। पार्टी सूत्र बताते है कि  ऐसे करीब एक दर्जन पार्षदों की पहचान की गई है जिनकी गतिविधियां चुनाव में पार्टी के विरोध में रही और उन्होंने वोटिंग के दिन खुलकर पार्टी का विरोध किया। इन पार्षदों को पार्टी नेतृत्व सीधे बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

बताया जा रहा है कि पार्टी के पार्षदों ने पार्टी के विरोध में काम किया, यहीं कारण रहा है कि दतिया शहर में भाजपा को अब तक की सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा। आंकड़े बताते है कि भाजपा दतिया मंडल में साढ़े पांच हजार वोटों से  पीछे रही, वहीं पूरे दतिया शह में भाजपा करीब 11 हजार वोटों से कांग्रेस से पीछे  रही गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव की वोटिंग के दिन पुलिस ने नरोत्तम मिश्रा समर्थक 4 पार्षदों को उनके घरों में  नजरबंद कर दिया था। 

 

क्या नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पार्टी कर पाएगी कार्रवाई?-दतिया उपचुनाव में हार की समीक्षा को लेकर मंगलवार को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर पार्टी की बड़ी बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजदूगी में हुई बैठक में हार के कारणों की विस्तार से समीक्षा की गई। बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल सरकार के मंत्री, जिन्होंने दतिया उपचुनाव में मंडल जिताने की जिम्मेदारी दी गई थी उन्होने खुलकर नरोत्तम मिश्रा पर पार्टी के विरोध में काम करने के आरोप लगाए। 
 

भाजपा से जुड़े सूत्र बताते है कि नरोत्तम मिश्रा की चुनाव में भूमिका को लेकर प्रदेश नेतृत्व एक रिपोर्ट तैयार करके पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भेज रहा है। सूत्र बताते  है कि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर कार्रवाई का फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। दरअसल दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को लगभग 6,016 मतों के अंतर से पराजित किया। अब इस हार का पूरा ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटता हुआ दिख रहा है। यहीं कारण है कि पहले उनके समर्थक दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया। 

 

दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण भितरघात को माना जा रहा है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शहर में हंगाम और प्रदर्शन किया,  उसने पार्टी को शहर में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। वहीं बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनावी नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।  दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया।

दतिया उपचुनाव में सीट बचाने में सफल रही कांग्रेस, भितरघात ने बीजेपी का हार की लिखी पटकथा

प्रतिष्ठा की लड़ाई वाले दतिया उपचुनाव में कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई है। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हरा दिया है। अगर 2023 के विधानसभा चुनाव की बात करें तब कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने बीजेपी उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से चुनाव हराया था। ऐसे में भाजपा ने पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया वहीं इस बार उपचुनाव में बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था लेकिन पार्टी को फिर भी हार का सामना करना पड़ा, हलांकि हार का अंतर जरूर कुछ कम हो गया और कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई।

दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से उनके समर्थकों ने बवाल काटा, उसने उपचुनाव में बीजेपी की हार की पटकथा लिखना शुरु कर दिया था। इसके बाद बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी  को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनाव परिणाम के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ के साथ दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।

चुनाव नतीजों के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कहा कि जो भितराघाती है और जो भाजपा को मां कहते है और फिर ऐसा मजाक करते है, उनको  सोचना  चाहिए। आशुतोष तिवारी ने हार की समीक्षा करने की बात कही।

दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया।  

दतिया में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ बीजेपी के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के विरोध में काम किया और अपने घर बैठ गए। दतिया बीजेपी जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी के साथ बीजेपी के पार्षद एक तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नदारद रहे। दतिया के शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार होती रही। जिसका असर मतदान पर भी पड़ा और 2023 के तुलना में करीब 9 फीसदी कम मतदान हुआ।

वहीं चुनावी नतीजों में जिस तरह बीजेपी को शहर की पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा इससे साफ है कि व्यापारियों  और शहर में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने आशुतोष तिवारी की जगह कांग्रेस के लिए मतदान किया और शहर में कांग्रेस प्रत्याशी धनश्याम सिंह को ऐसी लीड मिली जिसको अंत में बसई में अच्छा प्रदर्शन करके भी बीजेपी नहीं पाट पाई।

राजनीतिक विश्लेषक इस बात को साफ तौर पर मानते है कि दतिया विधानसभा चुनाव के परिणाम जिस तरह से आए वह पार्टी के लिए आत्मचिंतन का विषय है। अगर बीजेपी समय रहते भितरघात पर काबू कर लेती और तो नतीजे बीजेपी के पक्ष में बेहतर हो सकते थे। बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी जिस तरह से चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह का बूथ हार गए, उसके एक नहीं कई सियासी मायने है। दतिया में भाजपा की हार सिर्फ पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार नहीं बल्कि जिला भाजपा भाजपा संगठन के भितरघात का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है।

इसके साथ दतिया उपचुनाव के नतीजे यह भी बताते है कि बीजेपी को शहर में हार का सामना करना पड़ा, जबकि शहरी वोटर्स बीजेपी का कोर वोटर्स माना जाता है, ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है। जबकि ग्रामीण इलाकों में बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया और उन पोलिंग बूथ पर बीजपी को जीत हासिल हई जो वह लगातार हारती आ रही थी। इसके साथ ही बसई मंडल जहां पर भाजपा पिछला चुनाव हार गई थी वहां पर इस पर 3 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। गौरतलब है कि बसई में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा हुई थी और अब चुनाव नतीजे बताते है कि बसई ने भाजपा का साथ दिया। 

दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार का ठीकरा किसके सिर फूटेगा?

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की करारी हार का ठीकरा भाजपा में किसके सिर फूटेगा, यह सवाल अब सियासी गलियारों में पूछा जाने लगा है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात को साफ तौर पर मानते है कि दतिया विधानसभा चुनाव के परिणाम जिस तरह से आए वह पार्टी के लिए वकाई चिंता का विषय है। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी जिस तरह से चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह का बूथ हार गए, उसके एक नहीं कई सियासी मायने है।

दतिया में भाजपा की करारी हार ठीकरा पूरी तरह से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर फूटना तय है। चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी  को चुनाव में उठाना पड़ा। दतिया में भाजपा की हार सिर्फ पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार नहीं बल्कि भाजपा संगठन की हार है।

2023 में दतिया विधानसभा सीट हारने के बाद इस बार भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद जिस तरह से पहले नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने दतिया में बवाल काटा और फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर रोए, उससे उपचुनाव में उनकी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नरोत्तम मिश्रा पूरे उपचुनाव के दौरान दावा करते रहे है कि वह पूरी तरह पार्टी के साथ है लेकिन कई  अहम मौकों जैसे बसई में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बड़ौना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का सभा में उनका नहीं जाना, उनकी नाराजगी और भाजपा की गुटबाजी से जोड़कर देखा गया।

वहीं दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह जिसको नरोत्तम मिश्रा का समर्थक माना जाता है, उसके बूथ पर भी पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। उपचुनाव में भाजपा की हार नरोत्तम मिश्रा की सियासी करियर पर एक ग्रहण का काम करेगी और उनकी पार्टी में पूछ-पऱख कम होगी और उनके सियासी पुर्नवास की राह कठिन हो जाएगी। इस बात का अंदाजा शायक खुद नरोत्तम मिश्रा को भी है इसलिए वह पूरे चुनाव के दौरान कहते रहे है कि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया और अब पार्टी कितना देगी। वहीं नरोत्तम मिश्रा ने अब राजनीति में अपनी सक्रियता को लेकर भी इशारों ही इशारों में कई संदेश दिए है। दतिया से पार्टी की हार के साथ उन्होंने कहा कि मेरी राजनीति का पटाक्षेप हो गया है।

दतिया उपचुनाव के नतीजों से तय होगा नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक भविष्य?

दतिया विधानसभा उपचुनाव की वोटिंग के बाद सियासी गलियारों में नतीजों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। 2023 के मुकाबले 9 प्रतिशत कम मतदान के बाद चुनाव नतीजों को लेकर संशय और बढ़ गया है। अगर वोटिंग के परसेंट को देखे तो  पिछले 4 चुनाव में उपचुनाव में सबसे कम है, यानि नरोत्तम मिश्रा के 2008 में दतिया आने के बाद उपचुनाव में सबसे कम मतदान होने को लेकर भी अब भाजपा के अंदरखाने कई सवाल उठ रहे है। पूरे उपचुनाव के दौरान जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर पार्टी के लिए काम नहीं करने और वोटिंग के दिन जिस तरह से  नरोत्तम मिश्रा समर्थक नेताओं के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की, उससे एक बात पूरी तरह साफ है कि उपचुनाव के नतीजे  का असर पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से कही अधिक नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों पर पड़ेगा।  

 

दरअसल दतिया उपचुनाव के नतीजे सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं होंगे, बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। उपचुनाव के नतीजों से नरोत्तम  मिश्रा की  संगठनात्मक ताकत, जनाधार और पार्टी में उनकी भविष्य की भूमिका का भी फैसला करेंगे। 2023 में दतिया विधानसभा सीट हारने के बाद इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद जिस तरह से  पहले नरोत्तम  मिश्रा समर्थकों ने दतिया में  बवाल काटा और फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर रोए, उससे उपचुनाव में उनकी भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। नरोत्तम मिश्रा पूरे उपचुनाव के दौरान दावा करते रहे है कि वह पूरी तरह पार्टी के साथ है लेकिन कई  अहम मौकों जैसे बसई में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा से  उनका गैरहाजिर रहने के भी कई अलग मायने निकाले जारहे है। 

 

दतिया में भाजपा अगर जीतती है?- यदि भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी दतिया उपचुनाव जीतते हैं तो सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह जाएगा कि टिकट न मिलने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने संगठन को एकजुट रखा। टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों के विरोध और नाराजगी के बावजूद नरोत्तम  मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के साथ खड़े होकर प्रचार किया था। इससे नरोत्तम मिश्रा की भविष्य की राजनीति विशेषकर संगठन में नई भूमिका को लेकर सियासी दरवाजे खुल जाएंगे। भविष्य में उन्हें प्रदेश संगठन, चुनाव प्रबंधन या राष्ट्रीय स्तर पर अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके साथ ही 2028 के विधानसभा चुनाव या 2029 के लोकसभा चुनाव में उनको नई सीट से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। 

 

दतिया में अगर भाजपा हारती है?- यदि भाजपा यह उपचुनाव हार जाती है तो इसका पूरा ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटना पूरी तरह तय है। चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए वह भी उनके खिलाफ जा सकती है।  भाजपा की हार के बाद सवाल सिर्फ उम्मीदवार पर नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय नेतृत्व पर उठेंगे। भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह जिसको नरोत्तम मिश्रा का समर्थक माना जाता है, उस पर कार्रवाई पूरी तरह से तय है।  उपचुनाव में भाजपा की हार नरोत्तम मिश्रा की सियासी करियर पर एक ग्रहण का काम करेगी और उनकी पार्टी में पूछ-पऱख कम होगी और उनके सियासी पुर्नवास की राह कठिन हो जाएगी।दतिया उपचुनाव का परिणाम नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक करियर का अंतिम फैसला नहीं होगा, लेकिन यह उनके अगले चरण की दिशा जरूर तय कर सकता है।

 

दरअसल दतिया उपचुनाव भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक लिटमस टेस्ट है। यदि नया उम्मीदवार जीतता है तो पार्टी इसे संगठन की जीत बताएगी। वहीं यदि भाजपा हार होती है तो टिकट चयन और स्थानीय रणनीति पर सवाल उठने के साथ दतिया में नए सिरे पार्टी संगठन की जमावट देखने को मिलेगी।

 

 

Narottam Mishra Datia: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से दतिया में भारी बवाल, समर्थकों ने पुलिस पर किया पथराव, NH-44 को किया जाम

Narottam Mishra Datia: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शुक्रवार (10 जुलाई) को आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। तिवारी के नाम की घोषणा किए जाने के बाद वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मिश्रा को टिकट मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। ऐसे में BJP का यह फैसला उनके लिए झटका माना जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि दतिया जिले के सेवढ़ा कस्बे के निवासी तिवारी लंबे समय से प्रदेश BJP संगठन में सक्रिय हैं। उम्मीदवार घोषित होने के बाद तिवारी ने प्रदेश BJP कार्यालय के बाहर पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया है। हालांकि, दतिया में मिश्रा के समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस पर पथराव, हाईवे जाम

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शनिवार सुबह पुलिस पर पथराव किया। वे इस बात का विरोध कर रहे थे कि BJP ने उन्हें आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट नहीं दिया। इस घटना में लोगों के घायल होने की खबर है। शुक्रवार रात उनके हजारों समर्थकों ने NH-44 को जाम कर दिया। इससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफ़िक पूरी तरह ठप हो गया।

एक समर्थक बलराम ने पीटीआई से कहा कि कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप अपनी शर्ट उतारकर सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया। जबकि अन्य धरने पर बैठ गए। एक अन्य समर्थक ने कहा कि जब तक ‘नरोत्तम दादा’ को टिकट नहीं दिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे BJP छोड़ने का फैसला भी कर सकते हैं।

3000 उपद्रवियों का तांडव

दतिया के SP मयूर खंडेलवाल ने कहा, “कल दतिया शहर में 3000 से ज्यादा उपद्रवियों ने माहौल खराब करने की कोशिश की। उन्होंने बाजार बंद कराने की कोशिश की। वे कल शाम 6 बजे से ही ‘चक्का जाम’ के लिए यहां बैठे थे। कलेक्टर और मैंने उनसे कई बार यहां से हटने और ‘चक्का जाम’ खत्म करने के लिए बात की। इसकी वजह से लगभग 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया है। आस-पास के ज़िले भी प्रभावित हो रहे हैं। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने अचानक पुलिस पर पथराव किया।”

अधिकारी ने आगे कहा, “पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद पथराव और तेज़ हो गया। हमारे 6 से ज़्यादा जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वे सभी अस्पताल में भर्ती हैं। मुझे और एडिशनल SP को भी चोटें आईं। फिर हमने दोबारा आंसू गैस के गोले छोड़े और सख्ती दिखाते हुए उन्हें भागया। वे अब छिपे हुए हैं। उनसे कहा गया है कि या तो सरेंडर करें या शांति से चले जाएं। ‘चक्का जाम’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ट्रैफिक जाम को हटाया जा रहा है। पूरे जिले में पुलिस बल तैनात है।”

विधानसभा चुनाव में हुई थी हार

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक मतों से हराया था। हालांकि, दिल्ली की एक अदालत ने इसी वर्ष अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दतिया सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

भारत निर्वाचन आयोग ने हाल में अलग-अलग राज्यों की तीन विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की थी। इनमें मध्यप्रदेश की दतिया सीट भी शामिल है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, दतिया के अलावा बिहार और गुजरात की एक-एक विधानसभा सीट पर भी 30 जुलाई को मतदान होगा। जबकि मतगणना तीन अगस्त को की जाएगी।