Stock Market Rally: फैब फ्राइडे, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा; निफ्टी 22500 के पार, निवेशकों की दौलत ₹3 लाख करोड़ बढ़ी

2 दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार, 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजारों में शानदार तेजी लौटी। सेंसेक्स 879.09 अंकों या 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। निफ्टी 288.65 अंकों या 1.3 प्रतिशत के उछाल के साथ 22,520.45 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। दिन में सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग से 1,075.96 अंक तक चढ़कर 72,669.20 के हाई तक गया। इसी तरह निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से 348.95 अंक तक चढ़कर 22,580.75 के हाई तक गया।

गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 462.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने के बाद यह 465.33 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। यानि कि 3 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। IT स्टॉक्स में तेजी, कच्चे तेल की कीमत में गिरावट, रुपये में बढ़त जैसे फैक्टर्स के चलते बाजार में तेजी आई।

निफ्टी पर ऑयल एंड गैस को छोड़कर दूसरे सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा 3 प्रतिशत की तेजी IT इंडेक्स में दिखी। निफ्टी पर अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, ITC, आयशर मोटर्स, TCS और HCL टेक्नोलॉजीस टॉप गेनर रहे। वहीं BSE, रिलायंस इंडस्ट्रीज, JSW स्टील और सिप्ला टॉप लूजर रहे।

एक दिन पहले क्या रहा था हाल

गुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।

कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी रही। यह अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 16 पैसे चढ़कर 96.72 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Gain: बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स 438 अंक तक उछला, निवेशकों की दौलत ₹66563 करोड़ बढ़ी

गुरुवार को भारी बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को तेजी ने फिर दस्तक दी। सेंसेक्स हरे निशान में खुला और चंद पलों में पिछली क्लोजिंग से 438.43 अंक तक चढ़कर 72,036.03 के हाई तक गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 66,563 करोड़ रुपये बढ़ गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 151.65 अंक तक चढ़कर 22,383.45 के हाई तक गया।

गुरुवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,62,33,248.126 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट खुलने के कुछ ही देर में यह 4,62,99,811.44 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 66,563.314 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

गुरुवार, 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही थी। यह काफी तगड़ी थी। सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत का गोता लगाकर ढाई साल से अधिक के निचले स्तर 71,593.24 पर बंद हुआ था। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21 महीने के निचले स्तर 22,231.80 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 423.15 अंक तक लुढ़का था।

कच्चे तेल के दाम में तेजी और घरेलू व वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति के और सख्त होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपये में तेजी है। यह शुरुआती कारोबार में 23 पैसे मजबूत होकर 96.65 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। एक दिन पहले रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट के साथ 96.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों समेत लगातार बने व्यापक आर्थिक दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI MPC Meet: फिर एक बार जस की तस छोड़ी जा सकती है रेपो रेट, 5 अगस्त को आएगा फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में भी प्रमुख नीतिगत दर रेपो को बिना किसी बदलाव के जस का तस छोड़ सकता है। देश के 10 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के एक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की मीटिंग 3-5 अगस्त को होने वाली है। इस साल जून की बैठक में रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर स्थिर छोड़ा गया था।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सर्वे में ज्यादातर उत्तरदाताओं का अनुमान रहा कि केंद्रीय बैंक आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी नीतिगत स्थिति को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखेगा। ऐसा भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और असमान मानसून से महंगाई के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए किया जा सकता है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ‘देखो और इंतजार करो’ मोड में रहेगा क्योंकि वह महंगाई की स्थिति का आकलन कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक, इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है, ‘‘फिलहाल, महंगाई नरम बनी हुई है और ऐसे में यथास्थिति ही सबसे अच्छा नीतिगत विकल्प है।” जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के ट्रेजरी प्रमुख गोपाल त्रिपाठी का मानना है कि केंद्रीय बैंक मानसून की स्थिति और एफसीएनआर (बी) योजना की सफलता का इंतजार करेगा।

पूरे FY27 में रेपो रेट में हो सकती है वृद्धि

सर्वे के अधिकांश उत्तरदाताओं का मानना है कि भले ही अगस्त में पॉलिसी रेट को स्थिर रखा जाए लेकिन पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। अगर महंगाई का दबाव बढ़ा तो चालू वित्त वर्ष के दौरान रेपो रेट में कम से कम 2 बार बढ़ोतरी हो सकती है।

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महंगाई और ग्रोथ के अनुमानों को लेकर क्या राय

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल के बावजूद, ज्यादातर लोगों को उम्मीद है कि RBI महंगाई के अनुमान में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना ​​है कि अगर भूराजनीतिक तनाव बना रहा है तो इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। धनलक्ष्मी बैंक के ट्रेजरी हेड बालासुब्रमण्यन आर का मानना है कि RBI वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर देगा।

ग्रोथ के अनुमानों को लेकर भी राय बंटी हुई है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि मजबूत घरेलू मांग के कारण वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ अनुमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं कुछ अन्य का मानना है कि कोई बदलाव नहीं होगा।