Lakshveer offline AI storytelling device: छोटे से लक्षवीर का बड़ा कमाल, 8 साल की उम्र में ऐसी टेक्नोलॉजी बना दी जो बना सकती है ओरिजनल कहानियां

Lakshveer offline AI storytelling device: अगर आप मानते हैं कि बड़ी सोच छोटी उम्र में नहीं आ सकती, तो एक बार फिर सोच लीजिए। 8 की उम्र ऐसा ही पड़ाव है, जिसमें बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, रंग-बिरंगी और बड़ी-बड़ी तस्वीरों वाली किताबों में दिल लगा रहे होते हैं। अगर इस मासूम उम्र में कोई बच्चा कहानियों में जीने और रोज नई कहानी सुनने के लिए एक मुकम्मल तकनीक खड़ी कर दे, तो उसे आप क्या कहेंगे? टेक्नोलॉजी जीनियस! अगर हां, तो ये नाम 8 साल के लक्ष्य पर पूरी तरह से सूट करता है।

आठ साल के लक्षवीर ऐसी टेक्नोलॉजी बना रहे हैं उनके लिए कहानी की किताबें बना सकती है। लगभग ₹760 के कम कीमत वाले ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर का इस्तेमाल करके, इस नन्हे इनोवेटर ने एक ऑफलाइन, आवाज से नियंत्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहानी सुनाने वाला उपकरण बनाया है। यह ओरिजिनल कहानियां बना सकता है, उन्हें जोर से पढ़ सकता है और बोले गए कमांड का जवाब दे सकता है। वो भी बिना इंटरनेट से कनेक्ट हुए।

लक्ष्यवीर के इस प्रोजेक्ट ने टेक्नोलॉजी के शौकीनों का ध्यान खींचा है क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे कॉम्पैक्ट, ओपन-सोर्स AI मॉडल बेहद सस्ते हार्डवेयर पर भी बखूबी चल सकते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग, वाई-फाई या पेड एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) पर निर्भर रहने के बजाय, यह डिवाइस हर काम बहुत छोटे स्तर पर करता है, जिससे यह उन जगहों के लिए सही है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कम है या उपलब्ध नहीं है।

कैसे काम करता है ऑफलाइन AI स्टोरीटेलिंग डिवाइस

प्रोजेक्ट्स बाय लक्ष के को-फाउंडर, लक्ष्यवीर ने इस डिवाइस को एक ESP32-S3 माइक्रोकंट्रोलर के आस-पास बनाया और इसे एक INMP441 माइक्रोफोन, एक I2S स्पीकर और एक MAX98357A एम्प्लीफायर के साथ जोड़ा। ये कम्पोनेंट यूजर्स को वॉइस कमांड के जरिए एआई से इंटरैक्ट करने का मौका देते हैं। स्टोरीटेलिंग असिस्टेंट जरूरत के हिसाब से छोटी कहानियां बना सकता है, उन्हें टेक्स्ट-टू-स्पीच टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सुना सकता है, आसान एनिमेशन दिखा सकता है और “प्ले”, “पॉज”, “रिज्यूम” और “अगली कहानी” जैसे बोले गए निर्देशों का जवाब दे सकता है। अधिकांश एआई असिस्टेंट के उलट, लक्ष्य के प्रोजेक्ट में प्रोसेस का हर चरण डिवाइस पर ही होता है। कोई भी डेटा बाहरी सर्वर पर नहीं भेजा जाता है, और सिस्टम बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करता रहता है।

ओपन-सोर्स AI प्रोजेक्ट को देता है पावर

शुरू से एक लैंग्वेज मॉडल बनाने के बजाय, लक्ष्य ने ESP32 के लिए TinyStories LLM नाम के एक मौजूदा ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट को मॉडिफाई किया, जिसे मूल रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपर slvDev ने तैयार किया था। मूल मॉडल को क्लाउड सपोर्ट के बिना सीधे ESP32 हार्डवेयर पर स्टोरीज बनाने के लिए डिजाइन किया गया था।

अभिजीत दीपके का कंगना पर तीखा तंज, उन्हें गंभीरता से लेता ही कौन है?

kangana ranaut gutter generation controversy

kangana ranaut gutter generation controversy: युवाओं और Gen-Z पीढ़ी को 'गटर जनरेशन' बताने और प्रदर्शनकारी लड़कियों पर अश्लीलता का आरोप लगाकर घिरीं बीजेपी सांसद व अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अपने बयान पर मचे बवाल के बीच कंगना ने एक नया सेल्फी वीडियो जारी कर अपने बयानों को सही ठहराने की कोशिश की, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कंगना रनौत की दलीलों और टिप्पणियों को पूरी तरह बेतुका करार देते हुए उन पर करारा तंज कसा है।

उन्हें गंभीरता से कौन लेता है?

कंगना रनौत के नए वीडियो और सफाई के बाद CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके ने चुटकी लेते हुए कंगना के वजूद पर ही सवाल उठा दिया। दीपके ने बेहद बेबाक अंदाज में कहा कि अरे, उन्हें (कंगना रनौत को) गंभीरता से लेता ही कौन है? दीपके के इस तंज ने कंगना के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हुए यह संदेश दिया कि सांसद के रूप में उनके ऐसे विवादित और गैर-जिम्मेदाराना बयानों की राजनीति में कोई गंभीरता नहीं रह गई है। ALSO READ: कंगना रनौत का गटर ज्ञान, Gen Z को 'गटर जनरेशन' कहकर काटा बवाल, कांग्रेस और सोशल मीडिया ने लिया आड़े हाथ

कंगना रनौत ने वीडियो जारी कर दी सफाई

इससे पहले, अपने विवादित बयानों से घिरीं कंगना रनौत ने एक सेल्फी वीडियो जारी कर अपने रुख को जायज ठहराने की कोशिश की। मीडिया और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कंगना ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील आचरण और अभद्र भाषा को किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

 

कंगना ने वीडियो में कहा कि हम अपने समाज में इस तरह के बर्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते। हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे यह सब देखें या बुजुर्गों के सामने शर्मिंदा होना पड़े। उन्होंने कहा कि संविधान और सीमाओं का पालन करना होगा। तथाकथित 'फेमिनाजी' युवाओं को जानवरों जैसा बर्ताव करना सिखा रही हैं। इनके बहकावे में आकर जिंदगी बर्बाद न करें, वरना अंत में जेल जाना पड़ेगा। ALSO READ: 'राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों को PM आवास क्यों ले जा रहे थे?' CJP प्रदर्शन के बीच कंगना रनौत का बड़ा हमला

कैसे शुरू हुआ था 'जनरेशन गटर' विवाद?

यह पूरा विवाद तब भड़का था जब कंगना रनौत ने बिना मेहनत किए 'इन्डिपेन्डेन्ट वुमन' बनने की नकल करने वाली महिलाओं पर तंज कसा था। उन्होंने ऐसी महिलाओं को 'भ्रष्ट', 'नशे में धुत' और 'मल्टीपल बॉडी काउंट रखने वाली' बताते हुए पूरी जनरेशन को 'गटर जनरेशन' कह दिया था। इस बयान के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास और कई छात्र संगठनों ने कंगना के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

Infosys Share Price: तीन दिन में 11% उछला इंफोसिस, शेयर खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

इंफोसिस के शेयरों में 29 जुलाई को लगातार तीसरे दिन जबर्दस्त तेजी रही। शेयर 4.32 फीसदी चढ़कर 1,153.50 रुपये पर बंद हुआ। सिर्फ तीन दिन में यह शेयर करीब 11 फीसदी चढ़ा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि आईटी शेयरों को लेकर सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। सवाल है कि इंफोसिस के शेयरों को खरीदना चाहिए, बेचना चाहिए या होल्ड करना चाहिए?

एआई स्टॉक्स में घटी ग्लोबल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी

ग्लोबल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी एआई स्टॉक्स में घटी है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार के क्रैश में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट का बड़ा हाथ है। अमेरिकी चिप कंपनियों में भी कमजोरी दिखी है। इधर, सस्ते वैल्यूएशन पर आईटी शेयरों में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। 29 जुलाई को भारतीय शेयर बाजारों में सबसे ज्यादा उछाल आईटी इंडेक्स में देखने को मिला।

एआई के इस्तेमाल से आईटी कंपनियों को होगा फायदा

Enrich Money के फाउंडर और सीईओ पोनमुदी आर ने कहा, “इनवेस्टर्स ज्यादा वैल्यूएशन वाली एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसे निकाल आईटी स्टॉक्स में लगा रहे हैं। आईटी कंपनियों को बगैर बड़े निवेश के एआई से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। भारतीय आईटी कंपनियों को एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डर की जगह एआई इंप्लीमेंटेशन पार्टनर्स के रूप में देखा जा रहा है।”

35-40 फीसदी गिरावट के बाद आईटी स्टॉक्स बना चुके हैं बॉटम

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि आईटी स्टॉक्स ने 35-40 फीसदी करेक्शन के बाद मीडियम टर्म बॉटम बना चुके हैं। मौजूदा तेजी की वजह सस्ती कीमतों पर खरीदारी, इंस्टीट्यूनल इनवेस्टमेंट और शॉर्ट कवरिंग है। व्यापक ट्रेंड पॉजिटिलव दिखता है। लेकिन, अगले चरण की तेजी से पहले कंसॉलिडेशन फेज अच्छा और जरूरी है। “

आईटी स्टॉक्स के लिए हाई वैल्यूएशन का रिस्क नहीं के बराबर 

Share.Market by PhonePe में मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों में प्योर-प्ले एआई मॉडल का अभाव रहा है। इससे ये कंपनियां हाई वैल्यूएएशन रिस्क से बची रही हैं। साथ ही शॉर्ट टर्म में कैपिटल राइट-डाउन का रिस्क भी कम रहा है। उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में आईटी स्टॉक्स की चाल पश्चिम खासकर अमेरिका में मैक्रोइकोनॉमिक स्थितियों में बेहतरी पर निर्भर करेगा।

इस साल 29 फीसदी फिसला है निफ्टी का स्टॉक

इंफोसिस देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। पहले नंबर पर टाटा समूह की टीसीएस है। इस साल इंफोसिस का शेयर 29 फीसदी से ज्यादा गिरा है। बीते एक साल में यह करीब 24 फीसदी टूटा है। लेकिन, बीते एक महीने में आईटी शेयरों में अच्छी रिकवरी दिखी है। निफ्टी आईटी इंडेक्स इस दौरान 14.29 फीसदी चढ़ा है।

Swiggy ने नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ नियुक्त किया, शेयर बने रॉकेट

स्विगी ने नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ नियुक्त किया है। वह अमितेश झा की जगह लेंगी। वह 3 अगस्त को नई जिम्मेदारी संभालेंगी। सिन्हा मिंत्रा की सीईओ रह चुकी हैं। 29 जुलाई को स्विगी के शेयरों में जबर्दस्त उछाल दिखा। 13:10 बजे शेयर 7.40 फीसदी उछाल के साथ 288.40 रुपये पर चल रहा था।

क्विक कॉमर्स बिजनेस में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

Swiggy ने सोच-समझकर नंदिता सिन्हा को इंस्टामार्ट का सीईओ बनाया है। देश में क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में प्रतियोगिता तेजी से बढ़ रही है। इस फील्ड में पहले से Blinkit, Zepto, Flipkart और Amazon जैसी कंपनियां मौजूद हैं। मनीकंट्रोल ने मार्च में खबर दी थी कि सिन्हा मिंत्रा के सीईओ पद को छोड़ रही हैं। इसके कुछ दिन पहले फ्लिपकार्ट ग्रुप के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने उन्हें वॉलमार्ट की कंपनी में बनाए रखने की संभावनाओं पर विचार किया था।

सिन्हा के नेतृत्व में मिंत्रा घाटे से फायदे में आई

सिन्हा फ्लिपकार्ट में 12 साल रहीं। इसमें से 4 साल से ज्यादा समय उन्होंने Myntra का नेतृत्व किया। उन्हें मिंत्रा के फैशन बिजनेस को चार चांद लगाने का श्रेय जाता है। उनके नेतृत्व में मिंत्रा चार साल तक लॉस उठाने के बाद फायदे में आ गई। FY24 में कंपनी ने 31 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया। एक साल पहले कंपनी ने 782 करोड़ रुपये का लॉस उठाया था।

स्विगी के कई एंप्लॉयीज फ्लिपकार्ट में रह चुके हैं

FY25 में कंपनी का प्रॉफिट बढ़कर 18 गुना यानी 548 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान ऑपरेटिंग रेवेन्यू 35 फीसदी बढ़ा। अब स्विगी सिन्हा से इंस्टामार्ट में इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। मनीकंट्रोल की लिंक्डइन की एनालिसिस के मुताबिक, स्विगी के 7,500 एंप्लॉयीज हैं। इनमें से अभी 350 से ज्यादा ऐसे एंप्लॉयीज हैं, जो अपने करियर में किसी समय फ्लिपकार्ट में काम कर चुके हैं।

सबसे पहले इंस्टामार्ट की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ानी होगी

सिन्हा पर सबसे पहले इंस्टामार्ट की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी है। नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) के लिहाज से Instamart दूसरे नंबर पर रही है। कभी यह तो कभी जेप्टो दूसरे नंबर पर रही हैं। ऑर्डर वॉल्यूम के लिहाज से इस्टामार्ट ब्लिंकिट और जेप्टो से काफी पिछड़ चुकी है। ब्लिंकिट, बिगबास्केट, फ्लिपकार्ट मिनट्स, एमेजॉन नाउ और फर्स्टक्लब ने प्रतियोगिता बढ़ने की वजह से प्रॉफिट टारगेट को पीछे कर दिया है।

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स्विगी का इंस्टामार्ट के लिए लंबी अवधि का विजन

नूडल्स ब्रांड नेचुरली योर्स के फाउंडर विनोद चेनधिल ने सिन्हा की नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे उम्मीद है कि नई टीम प्रीमियम ऑफरिंग्स को लाएगी, जिसके लिए वह जानी जाती है।” स्विगी पहले कह चुकी है कि कीमतों को लेकर प्रतिस्पर्धा सिर्फ समस्या का समाधान नहीं है। उसने कहा है कि समाधान ऐसा बिजनेस बनाने में है, जो सिर्फ कीमतों के लिहाज से आगे न हो। क्विक बिजनेस की उपयोगिता बढ़ रही है।

टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव पर आतंकवाद फैलाने का आरोप:रूस ने एफआईआर दर्ज की, इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाला; बैन हो सकता है एप

रूस की मुख्य सुरक्षा एजेंसी ‘फेडरल सिक्योरिटी सर्विस’ (FSS) ने मैसेजिंग एप टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव के खिलाफ ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’ के आरोप तय किए हैं। इसके साथ ही रूस ने उन्हें इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में भी डाल दिया है। FSS ने आरोप लगाया है कि टेलीग्राम का एडमिनिस्ट्रेशन उन चैनल्स, चैट्स और बोट्स को हटाने में नाकाम रहा है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी इंटेलिजेंस एजेंसियां और चरमपंथी संगठन रूस में तोड़फोड़, साइबर फ्रॉड और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद टेलीग्राम प्रशासन ने इन्हें हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पावेल दुरोव पर नया केस दर्ज होने के बाद अब रूस में टेलीग्राम के भविष्य और इसकी सेवाओं पर पूरी तरह बैन लगने की आशंका बढ़ गई है। इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में नाम शामिल FSS ने कानूनी कार्रवाई करते हुए पावेल दुरोव को अंतरराष्ट्रीय भगोड़ा घोषित किया है। उनका नाम इंटरनेशनल वॉन्टेड लिस्ट में डाल दिया गया है। पावेल दुरोव का जन्म रूस में ही हुआ था, लेकिन वे लंबे समय से देश से बाहर रह रहे हैं। उन्होंने 2021 में फ्रांस की नागरिकता हासिल की थी और इस समय वे दुबई से अपनी कंपनी और एप का संचालन कर रहे हैं। टेलीग्राम पर पहले से पाबंदियां, फिर भी लोकप्रिय रूस में टेलीग्राम सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप्स में से एक है। रूसी सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए एप पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके बावजूद आम लोगों से लेकर सरकारी और मिलिट्री से जुड़े लोग भी इस एप का उपयोग करते हैं। नॉलेज बॉक्स क्या है फेडरल सिक्योरिटी सर्विस? FSS रूस की मुख्य आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसी है। यह पूर्ववर्ती सोवियत संघ की एजेंसी KGB की उत्तराधिकारी मानी जाती है। इसका मुख्य काम देश के भीतर आतंकवाद रोकना, सीमाओं की सुरक्षा करना और साइबर सुरक्षा की निगरानी करना है। कौन हैं पावेल दुरोव? 1984 में रूस में जन्मे दुरोव को ‘रूस का मार्क जुकरबर्ग’ कहा जाता है। उन्होंने टेलीग्राम से पहले रूस का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म VK बनाया था। डेटा प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर रूसी सरकार से हुए विवाद के बाद उन्होंने 2014 में रूस छोड़ दिया था।

Sell-off in chip stocks : चिप शेयरों में उधार लेकर की गई खरीदारी दक्षिण कोरिया पर पड़ रही भारी, जानिए भारत के लिए है कितना बड़ा खतरा

Sell-off in chip stocks : अमेरिका में चिप शेयरों में बिकवाली दक्षिण कोरिया पर भारी पड़ रही है। कॉस्पी में आज करीब 11% की भारी गिरावट दिख रही है। इस बिकवाली का एक बड़ा कारण कोस्पी में बढ़ती मार्जिन पोजिशन भी है। जब बाजार में बिकवाली बढ़ती है तो मार्जिन ट्रिगर होते हैं और ब्रोकर्स सौदे काट देते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग की समस्या सिर्फ कोस्पी की नहीं,पूरी दुनिया में है। अमेरिका,चीन के साथ साथ भारत में भी मार्जिन पोजिशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ये भारत और दुनिया भर के बाजारों के लिए कितनी बड़ी चुनौती है,इस पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज। लेकिन इसके पहले जान लेते हैं कि दुनिया के बड़े बाजारों में क्या है मार्जिन पोजिशन (लेवरेज पोजिशन) की स्थिति।

रिकॉर्ड स्तर पर लेवरेज पोजिशन

अमेरिका में लेवरेज पोजिशन 1.53 लाख करोड़ डॉलर पर है। वहीं, चीन में यह 3 लाख करोड़ यूआन, दक्षिण कोरिया में 39 अरब डॉलर और भारत में 1.38 लाख करोड़ रुपए पर है। भारत में MTF पोजिशन की बात करें तो यह FY23 में 0.25 लाख करोड़ रुपए,FY24 में 0.47 लाख करोड़ रुपए, FY 25 में 0.72 लाख करोड़ रुपए। सितंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपए, दिसंबर 2025 में 1.16 लाख करोड़ रुपए और जुलाई 2026 में 1.38 लाख करोड़ रुपए थी।

मार्केट कैप में MTF पोजिशन का हिस्सा

मार्केट कैप में MTF पोजिशन के हिस्से की बात करें तो चीन में यह कुल मार्केट कैप का 2.4%, अमेरिका में कुल मार्केट कैप का 2%, दक्षिण कोरिया में कुल मार्केट कैप का 0.8% और भारत में कुल मार्केट कैप का 0.34% है।

कोस्पी की गिरावट का लेवरेज कनेक्शन

27 मई को कोरिया में सिंगल स्टॉक लेवरेज ETF लॉन्च किया गया। इस ETF में सिर्फ सैमसंग और SK Hynix शामिल हैं। AI चिप रैली में रिटेल ने अंधाधुंध पैसा लगाया। इसमें कुछ ही हफ्तों में 9.48 अरब डॉलर की खरीदारी हुई। इस ETF के 92 फीसदी होल्डर रिटेल निवेशक हैं। मई के अंत तक रिटेल मार्जिन लोन 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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कोस्पी: मार्जिन कॉल और फोर्स सेलिंग

कोस्पी में सैमसंग और SK Hynix की हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है। सैमसंग और SK Hynix में सबसे ज्यादा लेवरेज पोजिशन है। चिप शेयरों में बिकवाली से सैमसंग और SK Hynix में तेज बिकवाली आई। एक महीने में सैमसंग 38% और SK Hynix 42% टूट गया। तेज बिकवाली से ब्रोकर्स ने मार्जिन पोजिशन काटी।

मार्जिन ट्रेडिंग भारत के लिए चुनौती?

भारत में भी मार्जिन ट्रेडिंग या MTF तेजी से बढ़ रही है। 27 जुलाई को MTF 1.38 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कुल मार्केट कैप में MTF का हिस्सा 0.34% ही है।

एक्सपर्ट की राय

स्टॉकएज (Stockedge) के को-फाउंडर विवेक बजाज ने कहा कि सालों से मार्जिन ट्रेडिंग चलती आ रही है। यह अमेरिका की उपज है। अमेरिकी लीवरेज पसंद करते है। वे हर तरह के इंस्ट्रूमेंट में लीवरेज क्रिएट करते हैं। वहां पर भी यह काफी बड़ा होता जा रहा है। टिपिकली जब भी किसी एसेट में बबल बनता है तो वह पूरे बाजार में बबल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए जैसे 2008 में रियल एस्टेट बबल बना उसमें रियल एस्टेट लीवरेज बाजार में बबल बनने का कारण बना। जब बबल फटता है तो जहां भी लीवरेज होता है वहां असर पड़ता है।

हम सभी जानते हैं कि इस समय दुनिया में एआई ड्रिवेन बबल बन चुका है। लेकिन ये कब फटेगा हमें नहीं पता है। इस नजरिए से कोस्पी इस समय बहुत बड़ा केस स्टडी बन गया है। कोरियन मार्केट अपने हाई से 33 फीसदी टूट चुका है। लेकिन लीवरेज बबल फटने पर इसमें और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

विवेक बजाज ने आगे कहा कि भारत में मार्जिन ट्रेडिंग या MTF 2000 शेयरों में हैं। वहीं, कोरिया में सिर्फ 20 शेयरों में भारत से कई गुना बड़ा लीवरेज्ड पोजीशन है। भारत में फ्री फ्लोट बेसिस पर MTF पोजीशन मार्केट कैप का 0.74 फीसदी है। ऐसे में भारत में मार्जिन ट्रेंडिंग का बड़ा रिस्क नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि कोरिया का बाजार एक ट्रिगर का काम करेगा। अगर वहां,लीवरेज्ड शेयरों में गिरावट आती है तो इसका असर भारत सहित पूरे ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिलेगा। ऐसे में जहां भी लीवरेज ज्यादा होगा वहां दबाव दिखेगा।

MTF क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी ‘आज खरीदें,बाद में भुगतान करें’के मॉडल की तरह काम करता है। इसमें निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए जरूरी पैसों का कुछ हिस्सा ही चुकाना पड़ता है और बाकी पैसा ब्रोकर लोन की तरह देता है। जैसे कि मान लें कि 100 रुपये के भाव वाले 1 हजार शेयरों की ट्रेडिंग करनी है तो 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। अब या तो आप पूरे एक लाख रुपये अपने पास से लगाएं या 30 फीसदी यानी 30 हजार रुपये खुद का लगाएं और बाकी 70 फीसदी यानी 70 हजार रुपये ब्रोकर से लोन के रूप में मिल जाएगा।

मार्जिन ट्रेडिंग का फायदा ट्रेडर्स और ब्रोकर्स दोनों को मिलता है। ट्रेडर्स ज्यादा पैसा लगाने के लिए लोन ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमाने की कोशिश कर सकते हैं, वहीं ब्रोकर्स दिए गए लोन पर ब्याज कमाते हैं।

 

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5 AM क्लब Vs Night Owl: IITian फाउंडर इशान 11:30 पर जगते हैं और रात 9 के बाद चलता है असल दिमाग! ये है क्रिएटिविटी का सीक्रेट

हालांकि कई स्टार्टअप फाउंडर सुबह 5 बजे अलार्म लगाने और सुबह के बिज़ी रूटीन को बहुत ज़रूरी मानते हैं, लेकिन IIT दिल्ली के पूर्व छात्र ईशान जिंदल को ऐसा शेड्यूल पसंद है जो देर से शुरू होता है और देर रात तक चलता है। 30 साल के इस एंटरप्रेन्योर का कहना है कि उनके काम के सबसे प्रोडक्टिव घंटे रात 9 बजे के बाद शुरू होते हैं, जब ज़्यादातर कर्मचारी जा चुके होते हैं और ऑफिस में काफी शांति हो जाती है।

जिंदल ने मनीकंट्रोल को बताया, “तभी मैं सबसे ज़्यादा क्रिएटिव होता हूँ।” उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह जल्दी उठने के बजाय देर तक काम करना क्यों पसंद है। इस साल की शुरुआत में ‘शार्क टैंक इंडिया’ में आने और Shaadi.com के फाउंडर अनुपम मित्तल से 50 लाख रुपये की डील हासिल करने के बाद चर्चा में आए इस फाउंडर ने बताया कि वे आम तौर पर सुबह 11:30 बजे के आसपास उठते हैं। कई फाउंडर जो सूरज उगने के साथ अपना दिन शुरू करते हैं, उनसे अलग जिंदल ने कहा कि उनका ऑफिस रूटीन आम तौर पर दोपहर 12:30 या 1 बजे के आसपास शुरू होता है। फिर भी, ऑफिस पहुंचने से पहले ही कॉल और दूसरे कामों के ज़रिए काम अक्सर शुरू हो जाता है।

उन्होंने कहा, “मेरा शेड्यूल थोड़ा अलग है। मैं असल में अपना काम दोपहर 12:30 या 1 बजे के आसपास शुरू करता हूं।”IIT दिल्ली के ग्रेजुएट ने कहा कि उनके ऑफिस का समय आम तौर पर रात 9 बजे, 10 बजे या 10:30 बजे तक चलता है, जो काम के बोझ पर निर्भर करता है। लेकिन काम का दिन शायद ही कभी वहीं खत्म होता है।

IIT दिल्ली में बनी आदत

जिंदल अपनी देर रात तक जागने की आदत को IIT दिल्ली में अपने स्टूडेंट दिनों से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने मनीकंट्रोल को बताया, “मेरे पहले साल में, इंटरनेट रात 1 बजे बंद हो जाता था।” तब भी, इंटरनेट बंद होने से पहले छात्र अक्सर देर रात तक काम करते थे।

जब बाद में ये पाबंदियां हटा दी गईं, तो देर रात तक काम करने का समय और बढ़ गया। समय के साथ, जिंदल ने पाया कि आधी रात के बाद के शांत समय में कुछ ऐसा मिलता था जो दिन के समय नहीं मिल पाता था: बिना किसी रुकावट के पूरा ध्यान लगाकर काम करना।

उन्होंने कहा, “अगर हमें रात में दो-तीन घंटे का वह शानदार समय मिल जाए, तो हम बहुत सारे दूसरे काम भी कर सकते हैं जिन पर हम काम कर रहे हैं।” जिंदल के लिए, सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि ध्यान भटकाने वाली चीज़ें नहीं होतीं।

उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा समय है जब आप बस अपने काम पर ध्यान दे सकते हैं क्योंकि आस-पास कम लोग होते हैं।” “इसका मतलब है कि यह पूरी तरह से आपका अपना समय होता है और आप जिस चीज़ पर चाहें, उस पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।”

नींद सबसे ज़रूरी है

अक्सर देर रात तक काम करने के बावजूद, जिंदल का कहना है कि वे नींद से समझौता करने में यकीन नहीं रखते। उन्होंने कहा, “मैं अपनी नींद से कोई समझौता नहीं करता।” हर दिन एक तय समय पर जागने के लिए खुद पर ज़बरदस्ती करने के बजाय, वे अपनी सुबह की शुरुआत इस आधार पर करते हैं कि वे पिछली रात कितने बजे सोए थे। ज़्यादातर रातें वे सुबह 2 बजे से 4 बजे के बीच सोते हैं, हालांकि कभी-कभी काम की वजह से उन्हें और भी देर हो जाती है।

घड़ी देखने के बजाय परफॉर्मेंस पर ध्यान

कंपनी के फाउंडर अपनी कंपनी में भी यही सोच अपनाते हैं। कर्मचारियों के आने या जाने के समय से उन्हें आंकने के बजाय, जिंदल नतीजों पर ध्यान देना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, “हमारी कंपनी में हर टीम मेंबर के साथ, हम यह कोशिश करते हैं कि काम किसी खास व्यक्ति की मौजूदगी पर निर्भर न हो।” उन्होंने आगे कहा कि उनका मकसद ऐसे सिस्टम बनाना है जहाँ लोगों का मूल्यांकन उनके काम के नतीजों और लक्ष्यों के आधार पर हो, न कि इस आधार पर कि वे डेस्क पर कितने घंटे बिताते हैं।

जब मन कहे कुछ गलत है तो रुककर जरूर सोचिए… Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने बताया सफलता का ये मंत्र

दीपिंदर गोयल ज़ोमैटो के फाउंडर हैं। वे रिस्क लेने की क्षमता, एंटरप्रेन्योर वाली सोच और अपनी महत्वाकांक्षा के लिए जाने जाते हैं। उनकी सफलता का सफ़र बहुत दिलचस्प है। गोयल का जन्म पंजाब में हुआ था। मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम करने से पहले उन्होंने IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। वे अपनी कॉर्पोरेट नौकरी कर रहे थे, तभी उन्हें ज़ोमैटो बनाने का आइडिया आया। आखिरकार, ज़ोमैटो बनाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उनकी लीडरशिप क्वालिटी और ‘फ़र्स्ट मूवर एडवांटेज’ (सबसे पहले शुरुआत करने का फ़ायदा) का सही इस्तेमाल करने की क्षमता ने ही उन्हें आज एक ऐसा एंटरप्रेन्योर बनाया है जिसे हम आदर्श मानते हैं।

गोयल ने अक्सर लीडरशिप, फैसला लेने और इंस्टिंक्ट (अंतर्ज्ञान) के बारे में प्रैक्टिकल बातें शेयर की हैं। एक बार उन्होंने कहा था, “अपने इंस्टिंक्ट (अंदर की आवाज़) की अहमियत समझें—जब आपको लगे कि कुछ गड़बड़ है, तो उस पर गहराई से सोचें और फ़ैसला लेने में सिर्फ़ डेटा को ही हावी न होने दें।” यह वाकई एक दमदार बात है, आइए समझते हैं कि इसका असल मतलब क्या है।

इस कोट का क्या मतलब है?

आज की कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल दुनिया में, हमें सिर्फ़ नंबर, चार्ट और ठोस सबूतों पर भरोसा करना सिखाया जाता है। हम यह भूल जाते हैं कि इंट्यूशन—यानी ‘गट फ़ीलिंग’ (अंदर की आवाज़)—असल में बरसों के सबकॉन्शियस ऑब्ज़र्वेशन (अवचेतन रूप से देखी-परखी बातें), पैटर्न पहचानने और असल ज़िंदगी के अनुभवों का नतीजा होती है। यह कोट हमें याद दिलाता है कि डेटा भले ही काम का हो, लेकिन उसे आपकी अंदर की आवाज़ को पूरी तरह दबाने नहीं देना चाहिए।

इसलिए, अगली बार जब आपको करियर के किसी फ़ैसले, बिज़नेस पार्टनरशिप या ज़िंदगी के किसी बड़े फ़ैसले को लेकर ज़बरदस्त हिचकिचाहट महसूस हो, तो उसे सिर्फ़ इसलिए नज़रअंदाज़ न करें क्योंकि वह कागज़ पर अच्छा लग रहा है। रुकें और सोचें कि आपका इंस्टिंक्ट क्यों चेतावनी दे रहा है। ठोस तथ्यों और इंट्यूशन के बीच तालमेल बिठाने से आप ज़्यादा समझदारी भरे और सही फ़ैसले ले पाते हैं।

आज के समय में यह कितना प्रासंगिक है?

हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जो मेट्रिक्स और एनालिटिक्स से चलती है, जहां लोग अक्सर इंसानी समझ और असल ज़िंदगी की बारीकियों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

प्रोफ़ेशनल्स अक्सर “एनालिसिस पैरालिसिस” (बहुत ज़्यादा विश्लेषण के कारण काम न कर पाना) का सामना करते हैं और ज़रूरी फ़ैसले लेने में देरी करते हैं क्योंकि वे और डेटा का इंतज़ार कर रहे होते हैं।

एल्गोरिदम और नंबर इंसानी व्यवहार, टीम कल्चर या अंदरूनी भरोसे को नहीं समझ पाते।

तेज़ी से बदलते करियर और बिज़नेस में, 100% डेटा की पक्की जानकारी का इंतज़ार करने का मतलब हो सकता है कि आप ज़रूरी मौके गँवा दें या छिपे हुए जोखिमों को नज़रअंदाज़ कर दें।

लोग अक्सर खराब नौकरियों, बुरे रिश्तों या नाकाम हो रहे प्रोजेक्ट्स में बने रहते हैं क्योंकि स्प्रेडशीट कहती है कि सब ठीक है, जबकि उनका मन कुछ और ही कहता है।

इस कोट (कथन) से मिलने वाली सीख

अंतर्ज्ञान कोई जादू नहीं है। यह आपके अवचेतन मन द्वारा पुराने अनुभवों को असल समय में प्रोसेस करने की प्रक्रिया है।

डेटा आपको तथ्य देता है, लेकिन अंतर्ज्ञान आपको संदर्भ और भविष्य की समझ देता है।

मेट्रिक्स पर बहुत ज़्यादा निर्भरता आपको उन बारीक जोखिमों के प्रति अंधा बना सकती है जिन्हें आंकड़े नहीं पकड़ पाते।

महान नेता अनिश्चित या अनजान स्थितियों का सामना करते समय अपनी सहज समझ (instincts) पर भरोसा करते हैं।

अपनी मज़बूत अंदरूनी भावना (gut feeling) के खिलाफ़ लिया गया फ़ैसला अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनता है।

इस बात को मानने के लिए कुछ टिप्स

जब कोई बड़ा फ़ैसला लेना हो, तो डेटा क्या कहता है उसे लिखें, और फिर आपका मन (अंतर्मन) क्या कह रहा है, उसे भी लिखें।

अगर किसी प्रोजेक्ट या डील के आंकड़े अच्छे होने के बावजूद आपको कुछ गड़बड़ लगे, तो कोई भी पक्का फ़ैसला लेने से पहले रुकें और गहराई से जाँच-पड़ताल करें।

खुद पर भरोसा बढ़ाने के लिए रोज़मर्रा के छोटे-मोटे फ़ैसलों में भी अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने की आदत डालें।

सोचने के लिए कुछ शांत पल निकालकर घबराहट या डर को अपनी असली अंतर्दृष्टि (intuition) से अलग करें।

साफ़ चेतावनी के संकेतों या नैतिक शंकाओं को नज़रअंदाज़ करने के लिए डेटा का बहाना न बनाएँ।

औपचारिक रिपोर्ट और मेट्रिक्स के साथ-साथ अपने निजी अनुभव और व्यावहारिक समझ (street smarts) को भी महत्व दें।

Dharmendra Pradhan Resigns: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर रणवीर शौरी ने उठाए सवाल, बोले- सपोटर्स की न सुनके सड़क पर मौजूद कॉकरोच…

Dharmendra Pradhan Resigns: NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ़्तों तक चले छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद, जहाँ बॉलीवुड के ज़्यादातर लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया, वहीं अभिनेता रणवीर शौरी की राय कुछ अलग थी। जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं और दिल्ली के जंतर-मंतर पर जश्न मनाया जाने लगा, तो शौरी ने इस फ़ैसले के समय पर सवाल उठाए और इसे ‘जनता के दबाव में कामकाज’ बताते हुए इसकी आलोचना की।

अभिजीत दिपके और सौरव दास की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया। इस आंदोलन में छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे थे। CJP नेताओं के साथ बातचीत के बाद, केंद्र सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज FIR वापस लेने और NEET विवाद से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी सहमत हो गई। मांगें माने जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर चल रहा धरना-प्रदर्शन ख़त्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े की ख़बर सामने आते ही, रणवीर शौरी ने X (पहले ट्विटर) पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए एक GIF के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “और एक ही झटके में मोदी सरकार अपने किसी भी दुश्मन को तो नहीं जीत पाई, लेकिन अपने कई समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया। #masterstroke,” और साथ में ताली बजाने वाले इमोजी भी लगाए।

जब एक सोशल मीडिया यूज़र ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि प्रधान को NEET पेपर लीक विवाद पर इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए था, तो शोरी ने अपनी बात विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा, “हां, लेकिन उन्हें यह तब करना चाहिए था जब सड़कों पर हालात इतने खराब नहीं हुए थे। अब ऐसा लगता है कि समर्थकों की बात नहीं सुनी जाएगी, बल्कि सड़कों पर मौजूद ‘कॉकरोच’ की बात सुनी जाएगी!”

हाल के हफ़्तों में कई एक्टर्स और म्यूज़िशियन्स ने ऑनलाइन और प्रदर्शनों में शामिल होकर स्टूडेंट मूवमेंट का खुलकर समर्थन किया है। प्रकाश राज, शबाना आज़मी और रैपर हनुमankind ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर अपना समर्थन जताया, जबकि गुरफतेह पीरजादा, प्रतिभा रांटा, शालिनी पांडे और कई अन्य लोगों ने मुंबई में हुए प्रदर्शनों में भाग लिया।

फाउंडर अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन NEET पेपर लीक को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग करने वाले एक बड़े युवा आंदोलन में बदल गए। सोनम वांगचुक ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया और भूख हड़ताल की थी, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के साथ बातचीत के अंतिम दौर से पहले खत्म कर दिया।

प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर जश्न मनाया गया। छात्रों ने नारे लगाए और इस घटनाक्रम को आंदोलन की जीत बताया। CJP ने इस्तीफ़े को एक अहम पड़ाव बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बड़े सुधारों के लिए उनका अभियान मंत्री के हटने के बाद भी जारी रहेगा।