देश की पहली बुलेट ट्रेन पर बड़ा अपडेट! 2027 में खुलेगा सूरत-वापी का 100 किमी का स्ट्रेच, स्क्वीज टेस्ट को लेकर आई ये जानकारी

भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर देशवासियों का इंतजार अब बहुत जल्द खत्म होने वाला है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की प्रगति पर एक बड़ा अपडेट साझा करते हुए बताया है कि देश की पहली बुलेट ट्रेन का औपचारिक उद्घाटन साल 2027 में तय किया गया है। इसके तहत सबसे पहले गुजरात के सूरत और वापी के बीच 100 किलोमीटर लंबे सेक्शन की शुरुआत की जाएगी। इस रूट पर निर्माण कार्य बहुत ही तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इस पूरे सेक्शन का काम इस साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

अगले साल मई-जून में पटरी पर उतरेगी ट्रेन, टेस्ट कोच बनकर तैयार

परियोजना के परीक्षण और सुरक्षा पहलुओं की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन का पहला टेस्ट कोच पिछले हफ्ते ही बनकर तैयार हो चुका है। योजना के मुताबिक अगले साल मई-जून तक ट्रेन को औपचारिक टेस्टिंग के लिए पटरी पर उतार दिया जाएगा। ट्रेन को ट्रैक पर उतारने से पहले इसके विभिन्न तकनीकी और यांत्रिक परीक्षण किए जा रहे हैं। ट्रायल और टेस्टिंग की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 2027 में इस बहुप्रतीक्षित ट्रेन सेवा का उद्घाटन कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

क्या होता है स्क्वीज टेस्ट और क्लाइमेट टेस्ट

ट्रेन कोच की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए इसे कई कड़े परीक्षणों से गुजारा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, कोच का सबसे पहला और महत्वपूर्ण परीक्षण स्क्वीज टेस्ट होता है। इस टेस्ट में कोच के ढांचे पर भारी दबाव (प्रेशर) डाला जाता है, जिससे उसकी मैकेनिकल स्ट्रेंथ यानी यांत्रिक मजबूती और संरचनात्मक सहनशक्ति के फीचर्स की बारीकी से जांच की जा सके। स्क्वीज टेस्ट में खरा उतरने के बाद कोच क ‘क्लाइमेट टेस्ट किया जाएगा। इस टेस्ट के दौरान कोच को पानी में रखने के साथ-साथ अत्यधिक उच्च और निम्न तापमान की विपरीत परिस्थितियों में रखकर परखा जाएगा। इन सभी कड़े टेस्ट में सफल होने के बाद ही कोच की इंटीरियर फर्निशिंग और बाकी के अन्य कोचों के निर्माण का काम पूरा किया जाएगा।

508 किलोमीटर लंबा है मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर

आपको बता दें कि भारत की यह पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच बन रहे इस पूरे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस पूरे रूट पर कुल 12 अत्याधुनिक स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। इन सभी स्टेशनों को संबंधित शहर की सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखकर खूबसूरत और आधुनिक रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जहां यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं और बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मिलेगी।

2017 में रखी गई थी इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की नींव

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी, जिसे भारत के ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक मील का पत्थर माना गया। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों यानी मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय को कई घंटे घटाना ही नहीं है बल्कि भारतीय रेल यात्रियों को विश्वस्तरीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के साथ हाई-स्पीड यात्रा का एक नया और शानदार अनुभव प्रदान करना भी है।

FDA raid in Mumbai: तुकाराम मुंढे का मुंबई में बड़ा एक्शन! ISKCON के होटलों पर चला FDA का डंडा, IRCTC वेंडर का भी लाइसेंस सस्पेंड

FDA raid in Mumbai News: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन के कारण कुर्ला में स्थित IRCTC से जुड़े एक सप्लायर और जुहू में स्थित इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) के तीन फूड आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 2 सितंबर को हुई जांच के बाद FDA ने कुर्ला वेस्ट में स्थित R.K. एसोसिएट्स एंड होटलियर्स का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

बयान में कहा गया है कि जांच में कई कमियां पाई गई। इनमें स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग एरिया में कॉकरोच का होना, बिना ढका हुआ खाना, खुले कचरे के पास खाना बनाना, फर्श की टूटी टाइलें और दीवारों में दरारें शामिल हैं।

क्यों हुई कार्रवाई?

ISKCON के जिन तीन आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं इनमें ‘गोविंदाज रेस्टोरेंट’ भी शामिल है। FDA इंस्पेक्टरों को साफ-सफाई में गंभीर कमियां मिलीं। जैसे कि कीड़े-मकोड़ों का होना, किचन एरिया में कीड़ों की गंदगी, चोक हुई नालियां, नालियों में खाने का कचरा जमा होना, कोल्ड स्टोरेज रूम में पानी जमा होना और कच्चे एवं पके हुए खाने को अलग-अलग न रखना।

IRCTC वेंडर का लाइसेंस रद्द

इसके अलावा, रेलवे को खाना सप्लाई करने वाली IRCTC वेंडर का लाइसेंस भी इसलिए रद्द कर दिया गया, क्योंकि अधिकारियों को खाने के स्टोरेज और प्रोसेसिंग एरिया में कॉकरोच मिले। इसके अलावा खाना खुले कचरे के पास तैयार किया जा रहा था। जांच के दौरान किचन में टाइलें टूटी हुई थीं। यह कार्रवाई लगातार चल रही छापेमारी का हिस्सा है।

जांच के दौरान इंस्पेक्टरों को उन जगहों पर कॉकरोच मिले जहां खाना रखा और प्रोसेस किया जाता था। खाना खुले कचरे के पास भी रखा हुआ था। फर्श की 17 टाइलें टूटी हुई पाई गईं। इंस्पेक्शन के दौरान इस फ़ैसिलिटी को 114 में से 78 यानी 69% स्कोर मिला।

24 में से सिर्फ 21 के पास मिले सर्टिफिकेट

एक अधिकारी ने बताया, “LPG सिलेंडरों के पास खाना पकाया जा रहा था। जबकि बर्तन और खाने के संपर्क में आने वाले उपकरण गंदे और कुछ मामलों में जंग लगे हुए पाए गए।” FDA को कर्मचारियों के हेल्थ रिकॉर्ड में भी कमियां मिलीं। खाना बनाने और परोसने वाले 34 कर्मचारियों में से सिर्फ 21 के पास मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट थे। एक कर्मचारी उंगली में चोट होने के बावजूद खाना बनाते हुए पाया गया।

खाना लाने-ले जाने वाली गाड़ी भी गंदी और जंग लगी हुई पाई गई। पैकेजिंग, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, उपकरणों के रखरखाव, कैलिब्रेशन और खाना पकाने एवं ठंडा करने के तापमान से जुड़े रिकॉर्ड अधूरे थे या उपलब्ध नहीं थे। जांच के बाद, FDA ने किचन का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन के दौरान इसे खाना बनाने, सप्लाई करने या बेचने से रोक दिया गया है।

इस्कॉन जुहू में भी बड़ी कार्रवाई

कुर्ला में की गई यह जांच उन पांच बेस किचन और फूड प्लाजा की जांच का हिस्सा थी जो IRCTC के तहत रेल यात्रियों को खाना सप्लाई करते हैं। चार अन्य जगहों को सुधार या बदलाव के नोटिस जारी किए गए। IRCTC के अलावा FDA ने 3 सितंबर को इस्कॉन जुहू में भी जांच की, जिसके बाद खाने-पीने की तीन जगहों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की गई।

‘गोविंदास रेस्टोरेंट’ में जांच करने वालों को कॉकरोच, बंद नालियां और कोल्ड-स्टोरेज एरिया के अंदर जमा पानी मिला। कच्चा और पका हुआ खाना ठीक से अलग-अलग नहीं रखा गया था। इससे क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा पैदा हो गया।

तुकाराम मुंढे का दुकानकारों में खौफ

इस साल मई में IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे के कमिश्नर का पद संभालने के बाद से FDA ने साफ़-सफ़ाई और फ़ूड सेफ़्टी से जुड़े कानूनों और नियमों का उल्लंघन करने वाले फ़ूड एस्टेब्लिशमेंट के ख़िलाफ़ राज्यव्यापी कार्रवाई शुरू की है। FDA ने बताया कि जांच रिपोर्ट और तस्वीरों की समीक्षा के बाद 7 सितंबर को लाइसेंस सस्पेंड करने का आदेश जारी किया गया था।

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रेल यात्रियों को क्या फायदा होगा, 7 हाई-डेंसिटी रेल नेटवर्क को फोर-लेन करने की मिली मंजूरी

रेल यात्रियों को क्या फायदा होगा, 7 हाई-डेंसिटी रेल नेटवर्क को फोर-लेन करने की मिली मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज रेलवे के सात हाई-डेंसिटी रेलवे नेटवर्क को फोर-लेन करने की मंजूरी दे दी। इनमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली जैसे देश के प्रमुख रेल मार्ग शामिल हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये सात कॉरिडोर रेलवे के कुल ट्रैफिक का करीब 40 प्रतिशत वहन करते हैं। इन मार्गों पर करीब 2,000 किलोमीटर की फोर-लेनिंग का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

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10,700 करोड़ रुपये से अधिक की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं भी मंजूर

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके अलावा 10,700 करोड़ रुपए से अधिक की कुल लागत वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है।

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इनमें शामिल हैं:

 

  • खड़गपुर-जुड़सुगुड़ा चौथी रेल लाइन
  • कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन
  • बिलासपुर-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन
  • रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, कम होगी ट्रैफिक की समस्या

सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने के साथ भारतीय रेलवे की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सर्विस रिलायबिलिटी में भी सुधार होगा।

 

मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से रेलवे परिचालन को व्यवस्थित करने और व्यस्त रेल मार्गों पर भीड़ एवं ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए रेल नेटवर्क की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रेलवे परियोजनाओं से पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

 

स्वीकृत क्षमता विस्तार परियोजनाओं से देश के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को और बेहतर किया जाएगा। इनमें तिरुपति, सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर (तिरुत्तनी), श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर (तिरुचानूर), कोटिलिंगेश्वर देवालय, श्री सीती बैरवेश्वर स्वामी मंदिर, बंगारू तिरुपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल जलप्रपात, होसुर किला, मेट्टूर बांध और कोडाइकनाल की पहाड़ियां शामिल हैं।

 

इसके अलावा सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल अंजनेयर मंदिर, नमक्कल किला, कल्याण पसुपतेश्वर मंदिर, यादाद्रिगुट्टा मंदिर, भोंगीर किला, सुरेंद्रपुरी और स्वर्णगिरि मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को भी इन परियोजनाओं से लाभ मिलेगा।

 

माल ढुलाई की क्षमता में भी होगा बड़ा इजाफा

 

ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिए बेहद अहम हैं। क्षमता विस्तार के बाद रेलवे के जरिए हर साल करीब 47 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई (47 MTPA) होने की उम्मीद है।

 

तेल आयात और कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी

रेलवे को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम माना जाता है। इन परियोजनाओं से देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को कम करने और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही करीब 8 करोड़ लीटर तेल की बचत और लगभग 42 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। सरकार के अनुसार, CO₂ उत्सर्जन में होने वाली यह कमी करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगी। 

Cabinet Decision: भारतीय रेलवे के इन 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर्स को 4 लाइन बनाने की मंजूरी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया पूरा प्लान

Railway Network Projects Cabinet Decision: भारतीय रेलवे अपने सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर (High Density Corridors) की क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी में है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (9 सितंबर) को बताया कि इन प्रमुख रेल रूट्स को क्वाड्रुपल यानी चार पटरियों वाला बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना, ट्रेनों की आवाजाही को सुचारु बनाना और भविष्य में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाना है।

रेल मंत्री के मुताबिक, रेलवे के इन हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर करीब 2,000 किलोमीटर की लाइन को पहले ही क्वाड्रुपल किया जा चुका है। इसके अलावा लगभग 5,000 किलोमीटर के हिस्से का काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है। जबकि करीब 4,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन को फाइनल मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है।

इन शहरों को होगा फायदा

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सात रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद ज्यादा ट्रैफिक वाले रेल कॉरिडोर को मजबूत करना है। मंजूर किए गए रूट में कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेलवे लाइन को भी मंजूरी दे दी है। 367 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 6,528 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

करीब 11 हजार km रेल नेटवर्क पर बड़ा विस्तार

रेल मंत्री के बयान के मुताबिक, अलग-अलग चरणों को जोड़ें तो करीब 11,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर चार पटरियों की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और महानगरीय क्षेत्रों के बीच रेल कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के हाई डेंसिटी कॉरिडोर देश के सबसे अधिक व्यस्त रेल रूट्स में शामिल हैं। इन रूटों पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां चलती हैं। मौजूदा ट्रैक क्षमता पर दबाव के कारण कई बार ट्रेनों को प्राथमिकता देने, क्रॉसिंग और संचालन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं। चार पटरियां होने से एक ही दिशा में ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।

मालगाड़ियों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने पर भी जोर

रेलवे के लिए यह विस्तार केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं है। देश में माल ढुलाई को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी अतिरिक्त रेल क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। ज्यादा ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के बीच कम रोकना पड़ेगा और माल परिवहन की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

रेल मंत्री ने बताया कि इसका सीधा असर कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। रेलवे के लिए माल ढुलाई से होने वाली आय भी महत्वपूर्ण है। इसलिए हाई डेंसिटी रूटों की क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

ट्रेनों की आवाजाही होगी ज्यादा सुचारु

क्वाड्रुपलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही रेल कॉरिडोर पर अलग-अलग तरह की ट्रेनों को चलाने के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा। रेलवे का लक्ष्य भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए अभी से इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। करीब 2,000 किमी काम पूरा, 5,000 किमी पर काम या मंजूरी और 4,000 किमी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में होना इस बड़े विस्तार की व्यापकता को दर्शाता है।

रेल नेटवर्क को भविष्य के लिए तैयार करने की कवायद

रेल मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क के आधुनिकीकरण, ट्रैक क्षमता बढ़ाने और तेज रेल परिवहन की दिशा में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। हाई डेंसिटी कॉरिडोर की क्वाड्रुपलिंग से रेलवे को न केवल मौजूदा ट्रैफिक संभालने में मदद मिलेगी। बल्कि आने वाले वर्षों में नई यात्री ट्रेनों और अधिक मालगाड़ियों को चलाने के लिए अतिरिक्त क्षमता भी मिल सकती है।

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3 दिन की बजाय 12 घंटे में पहुंचेगा सामान! जानिए वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर यूपी के दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक क्या-क्या बदलेगा

उत्तर प्रदेश के दादरी से नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट को जोड़ने वाला 1600 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अब पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वडोदरा दौरे के दौरान वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन प्रमुख हिस्सों का उद्घाटन कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने का औपचारिक ऐलान किया। इस बीच नवी मुंबई के उरण में पत्रकारों से बात करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह कॉरिडोर देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लाएगा। इससे भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटकर करीब 7 फीसदी रह जाएगी। इससे भारत चीन को सीधी टक्कर दे सकेगा और ग्लोबल सप्लाई चेन का ज्यादा मजबूत हिस्सा बन सकेगा।

लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, चीन से मुकाबला होगा आसान

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि पहले भारत की लॉजिस्टिक्स लागत करीब 14 प्रतिशत थी जबकि चीन में यह 7 प्रतिशत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 14 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत पर आई थी। अब इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने से यह लागत घटकर करीब 7 प्रतिशत रह जाएगी। इससे भारतीय उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और वैश्विक बाजार में चीन का मुकाबला आसानी से कर सकेंगे।

3 दिन का सफर अब महज 12 घंटे में होगा पूरा

फडणवीस ने दावा किया है कि इस फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने से माल ढुलाई के समय में भारी गिरावट आएगी। सड़क के रास्ते जिस सामान को दादरी से जेएनपीटी तक पहुंचाने में करीब तीन दिन का समय लगता था, वही सामान अब फ्रेट कॉरिडोर के जरिए सिर्फ 12 घंटे में अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा। इस कॉरिडोर पर डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनें (एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर रखकर) दौड़ेंगी। इस तरह की एक ट्रेन 250 ट्रकों के बराबर माल एक बार में ले जा पाएंगी। इस पूरे कॉरिडोर में इलेक्ट्रिक ट्रेनों चलेंगी। इससे पेट्रोल और डीजल की भारी बचत होगी। इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण में भी बड़ी गिरावट आएगी।

महाराष्ट्र और JNPT को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

कई राज्यों से होकर गुजरने वाले इस 1600 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का अंतिम स्टेशन नवी मुंबई का जेएनपीटी है। सीएम फडणवीस ने कहा कि इसका सबसे अधिक लाभ महाराष्ट्र को मिलेगा। जेएनपीटी अगले दो सालों के भीतर 1 मिलियन से अधिक TEUs (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) कंटेनर कार्गो को हैंडल करने वाला देश का पहला बंदरगाह बनने जा रहा है। इस परियोजना से आयात-निर्यात पर निर्भर उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस ऐतिहासिक परियोजना को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, भारत सरकार और फाइनेंशियल मदद देने वाली जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के साथ जापान सरकार का आभार भी जताया है।

अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान, कहा-भारत को उत्पादन का हब बना सकती हैं एपल और गूगल

सरकार को उम्मीद है कि एपल और गूगल जैसी दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियां भारत को अपना बड़ा प्रोडक्शन हब बना सकती हैं। एपल आईफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स भी भारत में बनाना शुरू कर सकती है। गूगल एक्सपोर्ट्स के लिए भारत में उन प्रोडक्ट्स का उत्पादन शुरू कर सकती है, जिनका भी वह चीन में उत्पादन कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने यह उम्मीद जताई है। 21 अगस्त को मनीकंट्रोल के एक सवाल के जवाब में उन्होंने ये बातें कहीं।

एपल भारत में आईफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स भी बनाएगी

गूगल के अपनी मैन्युफैक्चरिंग चीन से हटाने की खबरों पर वैष्णव ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि गूगल उन प्रोडक्ट्स के एक बड़े हिस्से का उत्पादन भारत में कर सकती है, जिनका वह एक्सपोर्ट करती है। उन्होंने कहा कि सरकार भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए एपल से भी बात कर रही है। उम्मीद है कि वह भारत में आईफोन के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स का भी उत्पादन करेगी।

गूगल ने भारत में पिक्सल स्मार्टफोन के उत्पादन के प्लान के बारे में बताया था

एपल और गूगल भारत में अपने हार्डवेयर के उत्पादन का विस्तार करना चाहती हैं। गूगल ने अक्तूबर 2023 में कहा था कि वह इंडिया में पिक्सल स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग करेगी। उसका प्लान पिक्सल 8 से इसकी शुरुआत करने का था। इसके लिए वह पार्टनरशिप के लिए भारतीय और विदेशी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से बातचीत कर रही थी।

डिक्सन टेक्नोलॉजीज गूगल पिक्सल की एसेंबलिंग करती है

Dixon Technologies उन कंपनियों में शामिल है, जो भारत में Google Pixel स्मार्टफोन की एसेंबलिंग करती हैं। गूगल ने 2025 में भारत में पिक्सल रेंज के स्मार्टफोन का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी थी। उसका प्लान एक्सपोर्ट्स के लिए इंडिया में अपने स्मार्टफोन का उत्पादन करने का था।

गूगल चीन की जगह भारत में बनाएगी फोन, वॉचेज और इयरबड्स

इस हफ्ते आईं खबरों में बताया गया कि गूगल 2027 से चीन में पिक्सल फोन, वॉचेज और वायरलेस इयरबड्स का उत्पादन बंद करना चाहती है। उसका प्लान चीन की जगह इंडिया और वियतनाम में इन उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग करने का है। गूगल ने सार्वजनिक रूप से इस रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है।

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एपल भारत में 2017 से ही आईफोन की एसेंबलिंग कर रही है

एपल पहले से इंडिया में काफी ज्यादा उत्पादन कर रही है। उसने 2017 में भारत में अपने आईफोन की एसेंबलिंग शुरू कर दी थी। तब से उन्हें Foxconn और टाटा ग्रुप सहित कई सप्लायर्स के जरिए इंडिया में अपना प्रोडक्शन बेस बढ़ाया है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, 2026 में एपल के आईफोन के कुल उत्पादन में इंडिया की हिस्सेदारी करीब 26 फीसदी रह सकती है। एपल ने अपने आईफोन के लिए इंडिया को एक एक्सपोर्ट बेस बनाया है।

Mobile Manufacturing Scheme 2.0 : सरकार ने लॉन्च की 62,500 करोड़ करोड़ रुपए की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, जानिए पूरी डिटेल

Mobile Manufacturing Scheme : आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। 62 हजार 500 करोड़ रुपए की इस स्कीम का लक्ष्य भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इसके तहत सरकार कंपनियों को उत्पादन के लिए 5% तक इंसेंटिव देगी। इस स्कीम के जरिए 40 लाख करोड़ के मोबाइल का उत्पादन हो सकेगा। ये स्कीम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी।

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 के तहत कंपनियों से आवेदन मांगने की शुरुआत कर दी गई है। 15 जुलाई को कैबिनेट ने स्कीम को मंजूरी दी थी। स्कीम का कुल बजट 62,500 करोड़ रुपए और अवधि 5 साल यानी वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2031 तक है। इसमें मोबाइल उत्पादन,घरेलू वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट सोर्सिंग को कवर किया गया है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगी स्कीम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि यह योजना मौजूदा फाइनेंशियल ईयर से यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और फाइनेंशियल ईयर 2031 तक चलेगी। इस स्कीम के तहत,भारत में बने मोबाइल फोन की बिक्री पर मैन्युफ़ैक्चरर्स को 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। कंपनियां खास कंपोनेंट्स और सब-असेंबली को घरेलू स्तर पर सोर्स करके 1.5% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी पा सकती हैं। कैबिनेट से मंज़ूर इस फ़्रेमवर्क में भारतीय ब्रांड बनाने के मकसद से प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दिया जाएगा।

बड़ी मात्रा में मिलेगा रोजगार

एस कृष्णन ने कहा कि भारतीय हैंडसेट ब्रांड पर 5 प्रतिशत के ज्यादा इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके जरिए सरकार उन घरेलू कंपनियों को सपोर्ट करना चाहती है जो विदेशी बाजारों में अपना विस्तार करना चाहती हैं। सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम के जरिए 5 साल में कुल लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन हो सकता है और करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां मिल सकती हैं।

PLI 1.0 ने प्रोडक्शन और इन्वेस्टमेंट के लक्ष्यों को भी किया पार

यह स्कीम इसके पहले आई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI-LSEM) के बाद आई है,जिसकी अवधि 31 मार्च, 2026 को खत्म हुई थी। पहले वाले प्रोग्राम का मुख्य मकसद बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग करना और मोबाइल फोन प्रोडक्शन को बढ़ाना था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक PLI 1.0 के तहत मोबाइल फोन का प्रोडक्शन 11.61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया,जबकि इसका लक्ष्य 8.12 लाख करोड़ रुपये था। PLI 1.0 का निवेश लक्ष्य 7,000 करोड़ रुपये था लेकिन इसके तहत हुआ निवेश 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

पहले की PLI स्कीम ने ग्लोबल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को आकर्षित किया,जिनमें सैमसंग और भारत में Apple डिवाइस बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं।

लोकलाइजेंशन पर फोकस

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम 2.0 में देश में बनने वाले कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। एस कृष्णन कृष्णन ने कहा कि मोबाइल फोन बनाने में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन लगभग 15 प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया है। MPMS के तहत अतिरिक्त सोर्सिंग इंसेंटिव का मकसद मैन्युफैक्चरर्स को अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

 

 

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यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

यूपी में निवेश की अपार संभावनाएं, भारत की आर्थिक विकास यात्रा के ये 4 स्तंभ बनेंगे आधार: अश्विनी वैष्णव

जापान और उत्तरप्रदेश के बीच निवेश एवं औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026' में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा और भविष्य की निवेश संभावनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध लंबे समय से विश्वास पर आधारित रहे हैं और उत्तर प्रदेश तथा जापान के बीच बढ़ती साझेदारी इस विश्वास को और मजबूत करेगी।

 

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जापान और उत्तर प्रदेश के बीच इस महत्वपूर्ण पहल के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने जापान के यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर तथा उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भी स्वागत किया और कहा कि जापान के उद्योग जगत के लिए उत्तर प्रदेश में तेजी से अवसर खुल रहे हैं।

 

भारत की आर्थिक सोच को चार स्तंभों में समझाया

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर समझा जा सकता है। इनमें सोशल, डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, समावेशी विकास, मैन्युफैक्चरिंग एवं इनोवेशन और कानूनों तथा नियमों का सरलीकरण प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों से लगभग 6 से 8 प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि के दौर में है। इसके साथ महंगाई को नियंत्रण में रखने और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने पर भी लगातार ध्यान दिया गया है। इससे भारत को आने वाले वर्षों में लंबे समय तक टिकाऊ विकास की मजबूत क्षमता मिली है।

 

जापान के निवेशकों को दिया उत्तर प्रदेश में निवेश का संदेश

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में आने वाले वर्षों में 6 से 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का लंबा दौर देखने को मिल सकता है। इस विकास यात्रा में रेलवे, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृषि समेत लगभग हर क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने जापान के उद्योग जगत से भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज तेजी से बदल रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए मजबूत आधार तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि जापान के निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है- भारत में निवेश करें, उत्तर प्रदेश में निवेश करें। सरकार निवेशकों की सहायता और सुविधा के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेशकों की सफलता ही भारत और उत्तर प्रदेश की सफलता है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान की मजबूत साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

वंदेभारत में अब आसानी से मिलेगी कन्फर्म सीट! रेलवे ने इस व्यस्त रूट पर 8 से बढ़ाकर कर दिए 16 डिब्बे

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को कहा कि एर्नाकुलम-KSR बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस अब आठ की जगह 16 कोच के साथ चलेगी, जिससे इसकी बैठने की क्षमता दोगुनी होकर 1,128 हो जाएगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री गोपी ने रेलवे अधिकारियों और अन्य जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एर्नाकुलम जंक्शन पर 16-कोच वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

गोपी ने कहा कि ओणम के यात्रा सीजन को देखते हुए रेलवे ने तुरंत ट्रेन की क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया है। उन्होंने इसके लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से एर्नाकुलम और बेंगलुरु के बीच इस व्यस्त रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जिस सर्विस में पहले 530 यात्रियों के बैठने की क्षमता थी, उसमें अब 1,128 सीटें होंगी।

गोपी ने आगे बताया कि क्षमता में यह बढ़ोतरी एक खास दिन पर हो रही है, क्योंकि यह मलयालम कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत का दिन है।

रेलवे मैनेजर ने दी जानकारी

तिरुवनंतपुरम डिविजनल रेलवे मैनेजर दिव्याकांत चंद्राकर ने कहा कि ओणम के मौसम में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेक (ट्रेन के डिब्बों) को बढ़ाकर 16 कोच करने का फैसला लिया गया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई वंदे भारत सेवा में लगभग 150% ऑक्यूपेंसी (सीटों का भरा होना) देखी जा रही है, जबकि केरल को मंगलुरु और कोझिकोड से जोड़ने वाली दो अन्य वंदे भारत सेवाओं में लगभग 170% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई है।

चंद्रकार ने आगे कहा कि 16-कोच वाली ट्रेन यात्रियों को ज्यादा सीटें, बेहतर सुविधाएं और बेहतर कनेक्टिविटी देगी। उन्होंने यह भी कहा कि एर्नाकुलम जंक्शन रेलवे स्टेशन के रीडेवलपमेंट का काम भी तेजी से चल रहा है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस कार्यक्रम में एर्नाकुलम के सांसद हिबी ईडन, सांसद हारिस बीरन, विधायक टीजे विनोद, वार्ड पार्षद, डिविजनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी और जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी के सदस्य, रेलवे अधिकारी, मीडिया कर्मी और यात्री भी मौजूद रहे।

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EMS Stocks: ECMS के पांचवें चरण को सरकार से मिली मंजूरी, सिर्मा SGS टेक्नोलॉजी और PCBL केमिकल में आई तेजी

EMS Stocks :  इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS)के 5वें चरण को सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस स्कीम के तहत 31 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इस खबर के चलते Syrma और PCBL जैसी कंपनियां फोकस में हैं। ECMS स्कीम के पांचवें चरण के तहत सरकार से 7,877 करोड़ रुपए के 31 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। Syrma SGS और PCBL समेत 31 कंपनियों को मंजूरी मिली है। इस स्कीम के तहत 82,243 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का उत्पादन होगा।

पहले 4 चरणों में अब तक 75 कंपनियों के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इसके तहत 23 उत्पादों के भारत में उत्पादन को मंजूरी मिली है। इसमें PCB,इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स,कैमरा मॉड्यूल और ट्रांजिस्टर शामिल हैं। इनके लिए 61,671 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। बता दें कि ECMS इन्वेस्टमेंट और प्रोडक्शन टारगेट पहले ही पार कर चुका है। ECMS ने इन्वेस्टमेंट में 59,350 करोड़ रुपए और प्रोडक्शन में 4.56 लाख करोड़ का टारगेट रखा गया है।

विप्रो ग्लोबल इंजीनियरिंग (Wipro Global Engineering) को 1,401 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। वहीं, माइक्रोमैक्स प्रिसिजन मोल्डिंग (Micromax Precision Molding) को 565 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। पीसीबीएल केमिकल (PCBL Chemical) को 329 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। वहीं, मिंडा इंस्ट्रूमेंट (Minda Instrument) को 270 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। जबकि, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स (Centum Electronics) को 106 करोड़ रुपए के 2 निवेश प्रस्तावों की मंजूरी मिली है। VVDN टेक्नोलॉजीज़ (VVDN Technologies) को 100 करोड़ रुपए के निवेश की मंज़ूरी मिली है। वहीं, मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक (Mitsubishi Electric) को 99 करोड़ रुपए के निवेश की मंज़ूरी मिली है।

कंपनियों को मंजूरी का प्रमाण पत्र देने के बाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना ने निजी निवेश को आकर्षित किया है,जो मूल रूप से निर्धारित लक्ष्यों से अधिक हो गया है।

यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करके,महत्वपूर्ण कलपुर्जों के आयात पर निर्भरता कम करने और एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता को तैयार करके इलेक्ट्रॉनिक्स में घरेलू वैल्यूएडिशन को मजबूत करना चाहता है।

EMS शेयरों में जोश

इस खबर के चलते सिर्मा SGS टेक्नोलॉजी (Syrma SGS Technology) के शेयर में अच्छी तेजी देखने को मिली है। फिलहाल यह शेयर 30.50 रुपए यानी 2.08 फीसदी की तेजी के साथ 1498 रुपए के आसपास दिख रहा है। आज का इसका दिन का हाई 1,521 रुपए और दिन का लो 1,488.90 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 1,543 रुपए है।

पीसीबीएल केमिकल (PCBL Chemical) में भी तेजी देखने को मिल रही है। फिलहाल यह शेयर 3.25 रुपए यानी 1.03 फीसदी की बढ़त के साथ 319 रुपए पर नजर आ रहा है। आज का इसका दिन का हाई 325.85 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 425.95 रुपए और 52 वीक लो 226.50 रुपए है।

 

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