FDA raid in Mumbai: तुकाराम मुंढे का मुंबई में बड़ा एक्शन! ISKCON के होटलों पर चला FDA का डंडा, IRCTC वेंडर का भी लाइसेंस सस्पेंड

FDA raid in Mumbai News: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन के कारण कुर्ला में स्थित IRCTC से जुड़े एक सप्लायर और जुहू में स्थित इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) के तीन फूड आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 2 सितंबर को हुई जांच के बाद FDA ने कुर्ला वेस्ट में स्थित R.K. एसोसिएट्स एंड होटलियर्स का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया।

बयान में कहा गया है कि जांच में कई कमियां पाई गई। इनमें स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग एरिया में कॉकरोच का होना, बिना ढका हुआ खाना, खुले कचरे के पास खाना बनाना, फर्श की टूटी टाइलें और दीवारों में दरारें शामिल हैं।

क्यों हुई कार्रवाई?

ISKCON के जिन तीन आउटलेट्स के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं इनमें ‘गोविंदाज रेस्टोरेंट’ भी शामिल है। FDA इंस्पेक्टरों को साफ-सफाई में गंभीर कमियां मिलीं। जैसे कि कीड़े-मकोड़ों का होना, किचन एरिया में कीड़ों की गंदगी, चोक हुई नालियां, नालियों में खाने का कचरा जमा होना, कोल्ड स्टोरेज रूम में पानी जमा होना और कच्चे एवं पके हुए खाने को अलग-अलग न रखना।

IRCTC वेंडर का लाइसेंस रद्द

इसके अलावा, रेलवे को खाना सप्लाई करने वाली IRCTC वेंडर का लाइसेंस भी इसलिए रद्द कर दिया गया, क्योंकि अधिकारियों को खाने के स्टोरेज और प्रोसेसिंग एरिया में कॉकरोच मिले। इसके अलावा खाना खुले कचरे के पास तैयार किया जा रहा था। जांच के दौरान किचन में टाइलें टूटी हुई थीं। यह कार्रवाई लगातार चल रही छापेमारी का हिस्सा है।

जांच के दौरान इंस्पेक्टरों को उन जगहों पर कॉकरोच मिले जहां खाना रखा और प्रोसेस किया जाता था। खाना खुले कचरे के पास भी रखा हुआ था। फर्श की 17 टाइलें टूटी हुई पाई गईं। इंस्पेक्शन के दौरान इस फ़ैसिलिटी को 114 में से 78 यानी 69% स्कोर मिला।

24 में से सिर्फ 21 के पास मिले सर्टिफिकेट

एक अधिकारी ने बताया, “LPG सिलेंडरों के पास खाना पकाया जा रहा था। जबकि बर्तन और खाने के संपर्क में आने वाले उपकरण गंदे और कुछ मामलों में जंग लगे हुए पाए गए।” FDA को कर्मचारियों के हेल्थ रिकॉर्ड में भी कमियां मिलीं। खाना बनाने और परोसने वाले 34 कर्मचारियों में से सिर्फ 21 के पास मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट थे। एक कर्मचारी उंगली में चोट होने के बावजूद खाना बनाते हुए पाया गया।

खाना लाने-ले जाने वाली गाड़ी भी गंदी और जंग लगी हुई पाई गई। पैकेजिंग, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, उपकरणों के रखरखाव, कैलिब्रेशन और खाना पकाने एवं ठंडा करने के तापमान से जुड़े रिकॉर्ड अधूरे थे या उपलब्ध नहीं थे। जांच के बाद, FDA ने किचन का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन के दौरान इसे खाना बनाने, सप्लाई करने या बेचने से रोक दिया गया है।

इस्कॉन जुहू में भी बड़ी कार्रवाई

कुर्ला में की गई यह जांच उन पांच बेस किचन और फूड प्लाजा की जांच का हिस्सा थी जो IRCTC के तहत रेल यात्रियों को खाना सप्लाई करते हैं। चार अन्य जगहों को सुधार या बदलाव के नोटिस जारी किए गए। IRCTC के अलावा FDA ने 3 सितंबर को इस्कॉन जुहू में भी जांच की, जिसके बाद खाने-पीने की तीन जगहों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की गई।

‘गोविंदास रेस्टोरेंट’ में जांच करने वालों को कॉकरोच, बंद नालियां और कोल्ड-स्टोरेज एरिया के अंदर जमा पानी मिला। कच्चा और पका हुआ खाना ठीक से अलग-अलग नहीं रखा गया था। इससे क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा पैदा हो गया।

तुकाराम मुंढे का दुकानकारों में खौफ

इस साल मई में IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे के कमिश्नर का पद संभालने के बाद से FDA ने साफ़-सफ़ाई और फ़ूड सेफ़्टी से जुड़े कानूनों और नियमों का उल्लंघन करने वाले फ़ूड एस्टेब्लिशमेंट के ख़िलाफ़ राज्यव्यापी कार्रवाई शुरू की है। FDA ने बताया कि जांच रिपोर्ट और तस्वीरों की समीक्षा के बाद 7 सितंबर को लाइसेंस सस्पेंड करने का आदेश जारी किया गया था।

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Cabinet Decision: भारतीय रेलवे के इन 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर्स को 4 लाइन बनाने की मंजूरी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया पूरा प्लान

Railway Network Projects Cabinet Decision: भारतीय रेलवे अपने सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर (High Density Corridors) की क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी में है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (9 सितंबर) को बताया कि इन प्रमुख रेल रूट्स को क्वाड्रुपल यानी चार पटरियों वाला बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करना, ट्रेनों की आवाजाही को सुचारु बनाना और भविष्य में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाना है।

रेल मंत्री के मुताबिक, रेलवे के इन हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर करीब 2,000 किलोमीटर की लाइन को पहले ही क्वाड्रुपल किया जा चुका है। इसके अलावा लगभग 5,000 किलोमीटर के हिस्से का काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है। जबकि करीब 4,000 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन को फाइनल मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है।

इन शहरों को होगा फायदा

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सात रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद ज्यादा ट्रैफिक वाले रेल कॉरिडोर को मजबूत करना है। मंजूर किए गए रूट में कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने मुंबई-हावड़ा हाई-डेंसिटी नेटवर्क पर खड़गपुर और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेलवे लाइन को भी मंजूरी दे दी है। 367 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर 6,528 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

करीब 11 हजार km रेल नेटवर्क पर बड़ा विस्तार

रेल मंत्री के बयान के मुताबिक, अलग-अलग चरणों को जोड़ें तो करीब 11,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर चार पटरियों की क्षमता विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और महानगरीय क्षेत्रों के बीच रेल कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के हाई डेंसिटी कॉरिडोर देश के सबसे अधिक व्यस्त रेल रूट्स में शामिल हैं। इन रूटों पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां चलती हैं। मौजूदा ट्रैक क्षमता पर दबाव के कारण कई बार ट्रेनों को प्राथमिकता देने, क्रॉसिंग और संचालन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं। चार पटरियां होने से एक ही दिशा में ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।

मालगाड़ियों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने पर भी जोर

रेलवे के लिए यह विस्तार केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं है। देश में माल ढुलाई को तेज और अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी अतिरिक्त रेल क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। ज्यादा ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के बीच कम रोकना पड़ेगा और माल परिवहन की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।

रेल मंत्री ने बताया कि इसका सीधा असर कोयला, स्टील, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। रेलवे के लिए माल ढुलाई से होने वाली आय भी महत्वपूर्ण है। इसलिए हाई डेंसिटी रूटों की क्षमता बढ़ाना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

ट्रेनों की आवाजाही होगी ज्यादा सुचारु

क्वाड्रुपलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक ही रेल कॉरिडोर पर अलग-अलग तरह की ट्रेनों को चलाने के लिए ज्यादा क्षमता मिलेगी। इससे व्यस्त रूट्स पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा। रेलवे का लक्ष्य भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए अभी से इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। करीब 2,000 किमी काम पूरा, 5,000 किमी पर काम या मंजूरी और 4,000 किमी अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में होना इस बड़े विस्तार की व्यापकता को दर्शाता है।

रेल नेटवर्क को भविष्य के लिए तैयार करने की कवायद

रेल मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क के आधुनिकीकरण, ट्रैक क्षमता बढ़ाने और तेज रेल परिवहन की दिशा में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। हाई डेंसिटी कॉरिडोर की क्वाड्रुपलिंग से रेलवे को न केवल मौजूदा ट्रैफिक संभालने में मदद मिलेगी। बल्कि आने वाले वर्षों में नई यात्री ट्रेनों और अधिक मालगाड़ियों को चलाने के लिए अतिरिक्त क्षमता भी मिल सकती है।

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देश में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलने वाले फ्री राशन का चावल बदल गया, इसे लेकर हो गया फाइनल फैसला

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत मुफ्त राशन पाने वाले देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने राशन में दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक बड़े सुधार को मंजूरी दे दी है। लगभग तीन दशकों में पहली बार सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल के क्वालिटी स्पेसिफिकेशन्स में संशोधन किया है। इस फैसले के बाद अब लाभार्थियों को उनके मौजूदा कोटे में बिना किसी कटौती के, बहुत कम टूटे हुए दानों वाला बेहतर और उच्च गुणवत्ता का चावल दिया जाएगा।

चावल के नियमों में क्या हुआ बदलाव?

मंजूर की गई नई नीति के तहत राशन के चावल में टूटे हुए दानों के प्रतिशत को भारी मात्रा में घटा दिया गया है। पीएमजीकेएवाई के तहत मिलने वाले कच्चे चावल में अब टूटे हुए दानों की मात्रा अधिकतम 10% तक ही हो सकेगी। अब तक इसके लिए अधिकतम 25% की सीमा तय थी। उबले हुए चावल में अब टूटे हुए दानों की मात्रा अधिकतम 5% तक ही होगी जबकि पहले इसकी मौजूदा सीमा 16% तक निर्धारित थी।

खरीफ सीजन 2027-28 तक चरणबद्ध तरीके से होगा लागू

बेहतर गुणवत्ता वाले इस चावल की खरीद तुरंत शुरू कर दी जाएगी। सभी धान खरीद वाले राज्यों में इसे खरीफ विपणन सीजन (KMS) 2027-28 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। इसी तरह लाभार्थियों के बीच इस सुधारे गए चावल का वितरण भी चरणबद्ध तरीके से होगा ताकि सभी राज्यों में यह बदलाव सुचारू रूप से लागू हो सके।

80 करोड़ लाभार्थियों को क्या होगा फायदा?

सरकार का दावा है कि इस फैसले से 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिलने वाले अनाज की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। लाभार्थियों को ऐसा चावल मिलेगा जिसके दाने साबुत और बेहतर होंगे, दिखने में अच्छे होंगे और जिन्हें उपभोक्ता आसानी से पसंद कर सकेंगे। मिलिंग के दौरान निकलने वाले टूटे हुए चावल को अलग कर दिया जाएगा और उसका इस्तेमाल दूसरे उत्पादक और औद्योगिक काम में किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सिर्फ बेस्ट कैटिगरी का खाने योग्य चावल ही गरीबों तक पहुंचे।

सरकार को सालाना 2161 करोड़ की होगी बचत

सरकार के दावे के मुताबिक इस नीतिगत सुधार से राशन प्रबंधन की परिचालन दक्षता बढ़ेगी और सरकार को भारी वित्तीय बचत होगी। टूटे हुए चावल की नीलामी सीधे मिलर्स के परिसरों से की जाएगी। इससे परिवहन, भंडारण, और हैंडलिंग की लागत कम होगी। टूटे चावल को एचडीपीई बैगों में स्टोर किया जाएगा, जिससे जूट के बोरों की आवश्यकता कम होगी। इन सब बदलावों से लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और पैकेजिंग की लागत घटने से सरकार को सालाना लगभग 2161 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व भी जेनरेट होगा। इससे खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट रहा सफल

कैबिनेट से मंजूरी मिलने से पहले इस योजना को देश के कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परख लिया गया है। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इसका सफल क्रियान्वयन किया गया। इससे साबित हुआ कि बड़े पैमाने पर इस बेहतर क्वालिटी के चावल का उत्पादन व्यावहारिक रूप से संभव है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए गए इस बेहतर चावल की आपूर्ति भी अब लाभार्थियों को की जाएगी।

राशन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा QR-Code

राशन वितरण प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लीकेज को रोकने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। चावल के बोरों पर क्यूआर-कोड टैगिंग की जाएगी। इस क्यूआर-कोड की मदद से पूरी सप्लाई चेन में चावल के मूवमेंट को शुरू से अंत तक ट्रैक किया जा सकेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को मजबूती मिलेगी। सरकार का कहना है कि उसने हर पात्र परिवार के लिए खाद्य सुरक्षा निश्चित करने के बाद अब गुणवत्ता के साथ खाद्य सुरक्षा हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दावा किया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक फैसले से गरीब परिवारों को सम्मान के साथ बेहतर गुणवत्ता का अनाज मिल सकेगा।

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