Ayodhya Ram Temple: धार्मिक मामलों की देखरेख के लिए 9 सदस्यीय समिति गठित, प्रवक्ता की भी होगी नियुक्ति

Ayodhya Ram Temple: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के धार्मिक कामकाज की देखरेख के लिए संतों और ट्रस्ट के प्रतिनिधियों वाली नौ सदस्यों सदस्यीय समिति का गठन किया है। News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला बुधवार को ट्रस्ट की दो घंटे चली बैठक में लिया गया, जो मंदिर के धार्मिक और प्रशासनिक ढांचे को बड़े पैमाने पर फिर से व्यवस्थित करेंगे।

नई बनी कमेटी के प्रमुख ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि होंगे। इसके अलावा, इसमें अयोध्या के पांच प्रमुख संत शामिल हैं: मणिराम दास छावनी के महंत कमल नयन दास, राम कथा कुंज के स्वामी रामानंद दास, रामवल्लभ कुंज के स्वामी राजकुमार दास, हनुमत निवास मंदिर के स्वामी मिथिलेश नंदिनी शरण और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास। बाकी चार सदस्य ट्रस्ट से जुड़े प्रतिनिधि होंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यह 9 सदस्यीय समिति मंदिर में धार्मिक मामलों की देखरेख करेगी, जिसमें अनुष्ठान, त्योहार, पूजा व्यवस्था और अयोध्या के संतों के साथ समन्वय शामिल है।

बैठक में एक और अहम फैसला लेते हुए ट्रस्ट ने मीडिया और जनता के साथ औपचारिक संचार चैनल स्थापित करने के लिए एक आधिकारिक प्रवक्ता की नियुक्ति को मंजूरी दी है। बता दें कि यह कदम राम मंदिर प्रबंधन पर बढ़ते सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बीच उठाया गया है।

हालांकि, ट्रस्ट ने कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों को स्थगित कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन रिक्त न्यासी पदों को भरने पर सहमति नहीं बन पाई, जबकि स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति एक महीने के लिए टाल दी गई।

CEO पद के लिए मिले हजारों आवेदन

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट को CEO के पद के लिए हजारों आवेदन मिले हैं, जिनमें रिटायर्ड सरकारी अधिकारी और सीनियर प्रोफेशनल भी शामिल हैं। ऐसे में ट्रस्ट अंतिम फैसला लेने से पहले सिलेक्शन प्रोसेस जारी रहेगा।

फिलहाल, अंतरिम महासचिव (Interim General Secretary) के तौर पर काम कर रहे कृष्ण मोहन अपने पद पर बने रहेंगे।

यह बदलाव ऐसे समय में किया जा रहा है, जब राम मंदिर निर्माण के चरण से निकलकर पूरी तरह से संचालन (ऑपरेशन) के दौर में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट मंदिर में आने वाले बढ़ते श्रद्धालुओं और तेजी से बढ़ते मंदिर परिसर को बेहतर तरीके से संभालने के लिए अपनी धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

नई कमिटी से धार्मिक नेताओं की भूमिका होगी तय

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संतों की नई बनी कमिटी से मंदिर के कामकाज में अयोध्या के धार्मिक नेताओं की भूमिका तय होने की उम्मीद है, जबकि प्रस्तावित CEO से संस्थान के मैनेजमेंट में ज्यादा प्रोफेशनल देखरेख आने की उम्मीद है।

ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और फंड व रिकॉर्ड के प्रबंधन में ज्यादा पारदर्शिता की मांग उठ रही है।

बता दें कि ट्रस्ट की अगली बैठक 2 सितंबर को होनी है, जिसमें CEO और ट्रस्टी के तीन खाली पदों समेत रुकी हुई नियुक्तियों पर समीक्षा होने की उम्मीद है।

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AI के दौर में नौकरी गई तो क्या करें? 15 दिन में नई जॉब पाने वाले इंजीनियर ने बताए टिप्स

AI के बढ़ते प्रभाव और कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी ने नौकरीपेशा लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर टेक सेक्टर में बदलते हालात के बीच कर्मचारियों के लिए हर दिन नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में एक भारतीय टेक प्रोफेशनल की कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर खूब चर्चा बटोर रही है। नौकरी जाने के बाद जहां कई लोग लंबे समय तक नए अवसर की तलाश में संघर्ष करते हैं, वहीं इस शख्स ने मुश्किल वक्त में हार मानने के बजाय तेजी से कदम उठाए। उसने अपने अनुभव, नेटवर्क और लगातार कोशिशों के दम पर कुछ ही दिनों में नई नौकरी हासिल कर ली।

उसकी पोस्ट अब हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। कई यूजर्स इसे मौजूदा जॉब मार्केट की सच्चाई और सही रणनीति का उदाहरण बता रहे हैं। यह कहानी बताती है कि बदलते दौर में सिर्फ स्किल्स ही नहीं, बल्कि नेटवर्किंग, तैयारी और धैर्य भी सफलता की बड़ी कुंजी बन चुके हैं।

घबराने के बजाय अपनाई नई रणनीति

नौकरी जाने के बाद उसने समय बर्बाद नहीं किया और तुरंत नए अवसरों की तलाश शुरू कर दी। उसने LinkedIn पर रिक्रूटर्स से संपर्क किया, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा उसे अपने नेटवर्क और दोस्तों से मिला। उसने अपने परिचितों से अलग-अलग कंपनियों में रेफरल दिलाने के लिए मदद मांगी।

15 दिनों में बदली तस्वीर, मिले कई ऑफर

लगातार कोशिशों का नतीजा यह रहा कि उसे पांच कंपनियों में इंटरव्यू के मौके मिले। इनमें से दो कंपनियों ने मना कर दिया, लेकिन तीन कंपनियों ने उसे जॉब ऑफर दे दिए। आखिरकार उसने नोएडा की एक HCM डोमेन वाली प्रोडक्ट कंपनी का ऑफर स्वीकार किया और पुणे की दो स्टार्टअप कंपनियों के प्रस्ताव ठुकरा दिए।

लेऑफ के बावजूद नहीं मिला सेवरेंस

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि पुरानी कंपनी ने उसे 31 जुलाई तक पेरोल पर रखा था, लेकिन प्रोबेशन पीरियड में होने के कारण उसे सेवरेंस पैकेज नहीं मिला। इसके बावजूद उसने इस मुश्किल दौर को हार मानने की बजाय नई शुरुआत का मौका बनाया।

नौकरी मिल गई, लेकिन तैयारी नहीं रुकेगी

अपने अनुभव से सीख लेते हुए उसने अन्य प्रोफेशनल्स को सलाह दी कि नौकरी मिलने के बाद भी तैयारी बंद नहीं करनी चाहिए। उसका कहना है कि मौजूदा जॉब मार्केट काफी चुनौतीपूर्ण है और भविष्य में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। इसलिए वह नई नौकरी मिलने के बाद भी DSA और सिस्टम डिजाइन जैसी स्किल्स पर काम जारी रखेगा।

Reddit पर लोगों ने की हिम्मत की तारीफ

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी मेहनत और सही समय पर नेटवर्किंग करने की रणनीति की सराहना की। कुछ लोगों ने कहा कि लेऑफ के बाद जल्दी नौकरी मिलना आत्मविश्वास बढ़ाता है, वहीं कई यूजर्स ने इसे आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में तैयारी की जरूरत का उदाहरण बताया।

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Navi Mumbai रियल एस्टेट हॉटस्पॉट 2026: क्यों मुंबई को छोड़ नवी मुंबई में घर खरीद रहे हैं लोग? जानिए बड़े कारण

Navi Mumbai Real Estate Hotspot: मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी मुंबई के एक सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में प्लान की गई नवी मुंबई अब इससे कहीं आगे निकल चुकी है। नाइट फ्रैंक इंडिया की गुरुवार को जारी छमाही रियल एस्टेट रिपोर्ट के मुताबिक नवी मुंबई अब तेजी से मुंबई के तीसरे सबसे बड़े ग्रोथ कॉरिडोर के रूप में बदल रही है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी नाइट फ्रैंक इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक, नवी मुंबई में घरों की बढ़ती कीमतों और मांग ने ग्रेटर मुंबई को भी पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। सबसे खास बात यह है कि अब नवी मुंबई में यह बूम सिर्फ कम कीमतों की वजह से नहीं है। बल्कि इसके पीछे कई दूसरी बड़ी वजहें भी हैं। आइए जानते हैं कि क्यों घर खरीदार मुंबई को छोड़ नवी मुंबई का रुख कर रहे हैं। वहां के रियल एस्टेट मार्केट के लेटेस्ट आंकड़े क्या कहते हैं।

पनवेल और खारघर में सबसे तेज उछाल: क्या हैं प्रॉपर्टी रेट्स?

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में पूरे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में नवी मुंबई के पनवेल इलाके में घरों की कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक साल के दौरान नवी मुंबई में प्रॉपर्टी की औसत दरों में 9 प्रतिशत का उछाल आया है। पनवेल के साथ ही पड़ोसी इलाके खारघर में भी इसी टाइम पीरियड के दौरान कीमतें 6 फीसदी बढ़ी हैं।

क्यों बढ़ रहा है क्रेज? कनेक्टिविटी ने बदला गेम

नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि नवी मुंबई का विकास अब सिर्फ सस्ते घरों की वजह से नहीं हो रहा बल्कि बेहतर होती कनेक्टिविटी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसकी मुख्य वजहें हैं। इसके अलावा कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स हैं जो इस इलाके कीकनेक्टिविटी की तस्वीर बदल रहे हैं। इन्हें यहां नीचे देखा जा सकता है:-

मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (MTHL/अटल सेतु): इस लिंक ने दक्षिण मुंबई से नवी मुंबई की दूरी को काफी कम कर दिया है। इससे अब यहां की ड्राइव महज 30 मिनट की रह गई है।

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट: आने वाला इस नए एयरपोर्ट के चलते इस पूरे क्षेत्र की वैल्यू बढ़ गई है।

अपकमिंग मेट्रो कॉरिडोर: आगामी मेट्रो लाइन्स से इंटरनल और एक्सटर्नल कनेक्टिविटी काफी मजबूत हो रही है।

विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर और पनवेल-कर्जत रेलवे दोहरीकरण परियोजना ने भी इस पूरे क्षेत्र के प्रति घर खरीदारों और निवेशकों के आकर्षण को काफी बढ़ा दिया है।

नए लॉन्चेस में नंबर-1 बना नवी मुंबई, ग्रेटर मुंबई पिछड़ा

साल 2026 के पहले छह महीनों के आंकड़ों को देखें तो रियल एस्टेट मार्केट का केंद्र अब बदल चुका है। नए घरों को लॉन्च करने के मामले में नवी मुंबई सबसे आगे निकल गया है। नए लॉन्चेस में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत के साथ नवी मुंबई की रही। वसई और विरार जैसे बाहरी पश्चिमी उपनगर 19 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर रहे। कल्याण, डोंबिवली, भिवंडी और कर्जत जैसे बाहरी मध्य उपनगरों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत रही। ग्रेटर मुंबई के पश्चिमी उपनगर नए लॉन्चेस के मामले में पिछड़ गए और इनकी हिस्सेदारी सिर्फ 17 प्रतिशत रही।

मार्केट में बिक्री का पैटर्न भी इसी तरह का रहा। इसमें बाहरी मध्य उपनगरों ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी दर्ज की। यह दर्शाता है कि उन बाजारों में मांग लगातार बनी हुई है जहां आवास तुलनात्मक रूप से किफायती हैं।

पिछले 10 सालों में ऐसे बदला नवी मुंबई का दबदबा

पिछले एक दशक (2014 से 2026) के दौरान एमएमआर क्षेत्र के भीतर नवी मुंबई का महत्व लगातार बढ़ा है। साल 2014 में कुल आवासीय लॉन्चेस में नवी मुंबई की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत थी। ये 2026 की पहली छमाही में बढ़कर 21 प्रतिशत हो गई है। इसी पीरियड में नवी मुंबई की सेल्स हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

रिपोर्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि हाल के वर्षों में नवी मुंबई में आवासीय बिक्री की रफ्तार नए प्रोजेक्ट्स के लॉन्च होने की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। यह संकेत देता है कि बाजार में नई सप्लाई आने की तुलना में यहां घरों की मांग बहुत तेजी से मजबूत हो रही है।

ऑफिस लीजिंग में 33% का उछाल

आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद 2026 की पहली छमाही में रियल एस्टेट मार्केट स्थिर और मजबूत बना रहा है। डेवलपर्स ने साल के पहले छह महीनों में 49161 घर लॉन्च किए। ये पिछले साल की समान अवधि से 8 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में बिक्री मामूली रूप से 1 प्रतिशत बढ़कर 47355 यूनिट रही। मार्केट में अनसोल्ड इन्वेंट्री में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है और अब यह घटकर 1.57 लाख घरों पर आ गई है।

कमर्शियल प्रॉपर्टी सेगमेंट के लिए भी साल की शुरुआत बेहद शानदार रही है। 2026 की पहली छमाही में ऑफिस लीजिंग सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर 7.3 मिलियन स्क्वायर फीट पर पहुंच गई। इसमें सबसे बड़ा योगदान जेपी मॉर्गन का रहा। इसने पवई में 2.2 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है।

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नाइट फ्रैंक इंडिया को उम्मीद है कि एंड-यूजर डिमांड, यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नई सप्लाई की स्थिर पाइपलाइन के दम पर रेजिडेंशियल मार्केट आगे भी मजबूत बना रहेगा। आने वाले समय में पुराने और जर्जर घरों को रिन्यू करने और बाजार में फ्रेश इन्वेंट्री जोड़ने के लिए रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में बड़े डेवलपर्स की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।

दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का कहर! सड़कें बनीं नदियां, जलभराव और ट्रैफिक जाम से लोग बेहाल, देखें वीडियो

Delhi Rain: गुरुवार सुबह दिल्ली और पूरे एनसीआर में हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। तेज बारिश के कारण कई इलाकों की सड़कें डूब गईं, लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और रोजाना आने-जाने वालों की भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सामने आए एक वीडियो में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और बुलंदशहर की सड़कें पूरी तरह जलमग्न दिखाई दीं। पानी से लबालब सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए, जबकि लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हुई।

वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया है और चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय राजधानी में दिन के ज्यादातर समय में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 जुलाई तक काफी ज्यादा से लेकर व्यापक बारिश की संभावना है, जबकि अधिकारी बारिश से जुड़ी दिक्कतों से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।

दिल्ली-एनसीआर में जलभराव, कई जगहों से सामने आए वीडियो

रातभर हुई तेज बारिश के बाद दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों से जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में लगातार बारिश का असर साफ देखा जा सकता है।

दिल्ली के बुराड़ी, सदर बाजार, संगम विहार और मेहरौली-बदरपुर रोड समेत कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। कई घंटे तक हुई बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई।

पानी से भरी सड़कों पर गाड़ियाँ सावधानी से चलती दिखीं, जबकि कई इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार काफी धीमी हो गई।

एक वीडियो में अक्षरधाम मंदिर के पास NH-24 पर गाड़ियों की लंबी कतारें दिखीं, जहां सुबह के व्यस्त समय में भारी बारिश के कारण ट्रैफिक धीमा हो गया था।

पड़ोसी शहर नोएडा में भी भारी जलभराव देखा गया। सेक्टर-75 से सामने आए वीडियो में तेज बारिश के बाद सड़कें पानी में डूबी हुई दिखाई दीं।

गाजियाबाद में भी भारी बारिश का असर साफ देखने को मिला। इंदिरापुरम और अभय खंड इलाके से सामने आए वीडियो में रिहायशी सड़कों पर बारिश का पानी भर गया।

शास्त्रीनगर और कौशांबी से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आईं, जहां सड़कों पर पानी जमा होने के कारण आने-जाने वालों को देरी हुई और ट्रैफिक की रफ्तार धीमी रही।

बुलंदशहर में भी भारी बारिश का असर दिखा। सामने आए वीडियो में रात भर हुई बारिश के बाद सड़कों पर पानी जमा हुआ नजर आया।

दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर भी ट्रैफिक जाम की खबर मिली, जहां बारिश और जलभराव के कारण ऑफिस जाने के व्यस्त समय में गाड़ियों की आवाजाही धीमी हो गई।

उमस से राहत, लेकिन आने-जाने वालों को परेशानी

लगातार हो रही बारिश से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को कई दिनों से पड़ रही उमस और गर्मी से राहत जरूर मिली है। हालांकि, तेज बारिश ने आम जिंदगी पर भी असर डाला है। दिल्ली-NCR के कई निचले इलाकों में पानी भरने की खबर है। IMD ने बताया कि बारिश तेज होने से पहले, रात 2.30 बजे तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और हवाएं शांत थीं।

मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि दिल्ली के कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि कुछ जगहों पर हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

जलभराव से निपटने के लिए सभी सरकारी एजेंसियां अलर्ट पर

दिल्ली में लगातार हो रही बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हालात का जायजा लिया और सभी सरकारी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, “दिल्ली सरकार जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेशों के बाद सभी सरकारी एजेंसियां ​​हाई अलर्ट पर हैं।”

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आगे कहा गया कि जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने और राजधानी में ट्रैफिक की आवाजाही सुचारू बनाए रखने के लिए पीडब्ल्यूडी (PWD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और नगर निगम (MCD) की टीमों को तैनात किया गया है।

वहीं, मानसून से पहले नरेला और द्वारका समेत कई बड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों की समय रहते सफाई (डी-सिल्टिंग) किए जाने का भी फायदा देखने को मिला। इसकी वजह से कई प्रमुख स्थानों पर बड़े स्तर पर जलभराव नहीं हुआ और NHPC चौक जैसे अंडरपास भारी बारिश के बावजूद ज्यादातर समय चालू रहे।

रात भर हुई बारिश से उखड़े पेड़

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में राजा धीर सिंह मार्ग पर दो पेड़ उखड़ गए, जिससे कुछ समय के लिए ट्रैफिक बाधित हुआ।

दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के अनुसार, एक पेड़ इस्कॉन मंदिर के पास गिरा, जबकि दूसरा नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के बाहर गिरा। दोनों ही घटनाओं में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

इस बीच, IMD ने दिन भर और बारिश होने का अनुमान जताया है, इसलिए अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि दिल्ली और NCR के कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है।

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Agniveer Bharti 2026: अग्निवीरों को मिल सकती है बड़ी राहत! 25% नहीं, अब 50% से 75% तक को स्थायी नौकरी देने की तैयारी

Agniveer Bharti 2026: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि इस साल पूरी होने वाली है। इससे पहले भारतीय सशस्त्र बल अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की मौजूदा 25% सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नौसेना 75% तक और सेना तथा वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती हैं। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बड़ा बदलाव जल्द ही संभव है। मौजूदा नियमों के अनुसार, चार साल की सेवा पूरी करने के बाद प्रत्येक बैच के केवल 25% अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की जरूरत के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार अब तीनों सेनाएं इस सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। यह प्रस्ताव अभी रक्षा मामलों के विभाग (DMA) और तीनों सेनाओं के बीच चर्चा के चरण में है। सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

क्या हो सकता है नया प्रस्ताव?

  • भारतीय नौसेना लगभग 75% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव दे सकती है।
  • भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना करीब 50% अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने की सिफारिश कर सकती हैं।
  • चार वर्षों की सेवा के दौरान अग्निवीर आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और फील्ड ऑपरेशन का अनुभव हासिल करते हैं।
  • सैन्य योजनाकारों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जवानों को अधिक संख्या में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत हो सकती है।

स्पेशल यूनिटों में ज्यादा मौका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि कुल रिटेंशन सीमा नहीं भी बढ़ती है, तब भी कुछ विशेष सैन्य यूनिट्स जैसे सेना की नई भैरव बटालियन में अनुभवी अग्निवीरों की संख्या अधिक रखी जा सकती है,। जबकि अन्य यूनिटों में चार साल के कार्यकाल वाले अग्निवीरों की तैनाती जारी रहेगी। फिलहाल अग्निपथ योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक बैच के केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सैनिक, नाविक या एयरमैन के रूप में नियुक्त किया जाता है।

भर्ती भी बढ़ेगी

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले ट्रेनिंग के दौरान करीब 70,000 अग्निवीरों ने सेना में हिस्सा लिया। अगले भर्ती में लगभग 90,000 पदों पर भर्तियां निकाली जा सकती हैं। इसके अलावा सेना अगले दो वर्षों में करीब 1.8 लाख कर्मियों की कमी को भी अग्निवीर भर्ती के जरिए पूरा करने की योजना बना रही है। अग्निवीरों की स्थायी भर्ती बढ़ाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। यह फिलहाल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर विचाराधीन प्रस्ताव है।

सेवा निधि पैकेज क्या है और कितना मिलता है? (Seva Nidhi Package)

4 साल की सेवा पूरी होने के बाद, जो 75% अग्निवीर बाहर आएंगे (या जो परमानेंट भी होंगे), उन्हें एकमुश्त सेवा निधि पैकेज दिया जाता है। यह फंड इस तरह तैयार होता है:-

  • अग्निवीर का कुल 4 साल का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • सरकार का बराबर का योगदान: लगभग ₹5.02 लाख
  • कुल जमा राशि (ब्याज सहित): लगभग ₹11.71 लाख

सबसे बड़ा फायदा: यह ₹11.71 लाख का सेवा निधि पैकेज पूरी तरह से टैक्स-फ्री (Income Tax Free) होता है। इस पर कोई आयकर नहीं देना पड़ता।

अतिरिक्त भत्ते (Allowances): इस फिक्स सैलरी के अलावा अग्निवीरों को उनकी पोस्टिंग के हिसाब से रिस्क एंड हार्डशिप भत्ता (Risk & Hardship Allowance), राशन भत्ता, यूनिफॉर्म भत्ता और यात्रा भत्ता (Travel Allowance) भी मिलता है।

परमानेंट होने पर मिलने वाले फायदे (Permanent Salary & Benefits)

चार साल पूरे होने के बाद, बैच के 25% अग्निवीरों (जिसके बढ़ने की संभावना पर सेना विचार कर रही है) को भारतीय सेना के रेगुलर कैडर में शामिल किया जाएगा। परमानेंट होने के बाद उन्हें निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:-

नियमित सैलरी और रैंक: परमानेंट होते ही वे भारतीय सेना के फुल-टाइम सैनिक बन जाएंगे। उनका पे-स्केल (Pay Scale) रेगुलर सैनिकों जैसा हो जाएगा, जिसमें बेसिक पे, डीए (DA), एचआरए (HRA) और अन्य सभी मिलिट्री अलाउंस शामिल होंगे।

पेंशन का अधिकार (Pension Benefits): 4 साल की कॉन्ट्रैक्ट अवधि के दौरान पेंशन नहीं मिलती। लेकिन परमानेंट कैडर में चुने जाने के बाद, जब वे अपनी अगली 15 साल की न्यूनतम सेवा पूरी करके रिटायर होंगे, तो वे पूरी लाइफटाइम पेंशन और ग्रेच्युटी (Gratuity) के हकदार होंगे।

मेडिकल और कैंटीन की सुविधा: परमानेंट होने के बाद उन्हें और उनके परिवार को ECHS (भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) के तहत आजीवन मुफ्त इलाज और CSD कैंटीन की पूरी सुविधाएं मिलेंगी।

प्रमोशन और सर्विस: वे सेना में नियमित रूप से प्रमोशन (जैसे लांस नायक, नायक, हवलदार, जेसीओ) पा सकेंगे और उनके पास आगे अधिकारी (Officer) बनने के लिए विभागीय परीक्षाएं देने का मौका भी होगा।

अन्य लाभ (Other Security Benefits)

4 साल की सर्विस के दौरान सभी अग्निवीरों को ये सुरक्षा कवर भी दिए जाते हैं:-

लाइफ इंश्योरेंस: ₹48 लाख का गैर-अंशदायी (Non-contributory) जीवन बीमा कवर।

शहादत पर मुआवजा: ड्यूटी के दौरान शहीद होने पर परिवार को ₹44 लाख की अनुग्रह राशि (Ex-gratia), बचे हुए कार्यकाल की पूरी सैलरी और सेवा निधि पैकेज समेत कुल ₹1 करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद मिलती है।

दिव्यांगता मुआवजा (Disability): सेवा के दौरान चोट लगने या दिव्यांग होने पर ₹44 लाख (100% दिव्यांगता पर), ₹25 लाख (75% पर) और ₹15 लाख (50% दिव्यांगता पर) एकमुश्त दिए जाते हैं।

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जेवर एयरपोर्ट के लिए शुरू हुई धड़ाधड़ बसें! सुबह 6 बजे से ही पहली सर्विस, देखें 3 बड़े रूट-स्टॉपेज संग टाइमिंग और लास्ट डिपार्चर

Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) आने-जाने वाले यात्रियों को जल्द ही बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) एयरपोर्ट को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों से जोड़ने के लिए नियमित बस सेवा शुरू करने जा रहा है, जैसा कि News18 ने रिपोर्ट किया है।

इन नई सेवाओं का मकसद एयरपोर्ट तक पहुंच आसान बनाना है, जिसके तहत दिन भर तय समय पर बसें चलेंगी।

देखें टाइमिंग और रूट

UPSRTC के मुताबिक, बस सेवाएं सुबह 6 बजे शुरू होंगी, जबकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आखिरी बस रात 11:30 बजे रवाना होगी। रूट के आधार पर बसें हर 15 से 30 मिनट में चलेंगी। नोएडा से एयरपोर्ट के लिए आखिरी बस रात 8 बजे के लिए तय की गई है।

News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट प्लान में बदलाव के तहत UPSRTC ने परी चौक से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक चलने वाली दो मौजूदा डबल-डेकर बसों का रूट बढ़ा दिया है। इस बढ़े हुए नेटवर्क में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के इलाके भी शामिल होंगे, जैसे इकोटेक-16, गौर सिटी, ग्रेटर नोएडा यूनिवर्सिटी (GNU) और खैरपुर। इससे एयरपोर्ट आने-जाने वाले लोगों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

नई व्यवस्था के तहत, नोएडा से बसें सेक्टर 37 (बोटेनिकल गार्डन) से चलेंगी और परी चौक व यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए एयरपोर्ट तक जाएंगी। ग्रेटर नोएडा से चलने वाली बसें इकोटेक-16, गौर सिटी, चार मूर्ति, सूरजपुर और परी चौक से होते हुए एयरपोर्ट पहुंचेंगी।

मोहन नगर से यात्रा करने वाले यात्री लालकुआं, चार मूर्ति, सूरजपुर, परी चौक, दनकौर और रबूपुरा होते हुए एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) इलाके के मुख्य सेक्टरों और ग्रेटर नोएडा यूनिवर्सिटी से भी सीधी बस सुविधा मिलेगी।

अधिकारियों ने दी जानकारी

अधिकारियों ने बताया कि बस नेटवर्क का विस्तार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की बड़ी कोशिशों का हिस्सा है, क्योंकि यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। नई UPSRTC सेवाओं के अलावा, इस इलाके में पहले से ही 100 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने टर्मिनल तक हर 15 मिनट में चलने वाली एक खास शटल सर्विस भी शुरू की है।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने रूट और बस का समय देख लें ताकि यात्रा में कोई परेशानी न हो।

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