सेना के मेजर की पत्नी पर जासूसी का शक! स्विटजरलैंड स्टडी ट्रिप में विदेशी एजेंट्स के संपर्क में आई, कौन है ये, क्या-क्या लीक किया?

Spy News: जम्मू में एक भारतीय सेना के अधिकारी की पत्नी के खिलाफ कथित जासूसी से जुड़ी गतिविधियों के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने चीनी खुफिया एजेंट के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विश्लेषणात्मक दस्तावेज तैयार करने के लिए ‘चैटजीपीटी’ और ‘क्लाउड’ जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया। मेजर की पत्नी पर विदेशी खुफिया एजेंटों के संपर्क में आने और संवेदनशील सैन्य जानकारी शेयर करने के आरोपों की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, महिला के पति की तैनाती पठानकोट में 9 कोर की इंटेलिजेंस यूनिट के साथ है। मामले में सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी शेयर की गई और इसका सोर्स क्या था।

अधिकारियों के अनुसार, तेलंगाना की रहने वाली आरोपी महिला हाइली क्वालिफाइड है। उसने 2023 में संयुक्त राष्ट्र (UN) में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में इंटर्नशिप की थी। फिलहाल वह स्वतंत्र शोधकर्ता के रूप में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उसे गिरफ्तार तो नहीं किया गया है। लेकिन FIR दर्ज होने के बाद उससे पूछताछ की गई है। वह जांच एजेंसियों का सहयोग कर रही है।

महिला के खिलाफ केस दर्ज, जांच शुरू

अधिकारियों ने बताया कि महिला को संवेदनशील सुरक्षा, रक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेख तैयार करने का काम सौंपे जाने का आरोप है। इन विषयों में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) से जुड़ी गतिविधियां, अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ड्रोन की तैनाती शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार को जम्मू के गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।

महिला पर जासूसी करने और गोपनीय सरकारी जानकारी को बिना अनुमति इस्तेमाल करने से जुड़े शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, आपराधिक साजिश रचने और देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराधों से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं भी लगाई गई हैं।

कैसे हुआ शक?

मामले की जांच का जिम्मेदारी एक पुलिस उपाधीक्षक (SP) को सौंपी गई है। अधिकारियों ने बताया कि खुफिया सूचना मिलने के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी और पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर महिला को उस समय रोका, जब वह कथित तौर पर पठानकोट जाने वाली ट्रेन में सवार होने की तैयारी कर रही थी। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए पास के एक सैन्य स्टेशन ले जाया गया। महिला का मोबाइल फोन जब्त कर विस्तृत फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षा कर्मियों ने रोका

सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद महिला को उसके परिवार के साथ यात्रा करते समय 9 कोर के क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों ने रोका था। इसके बाद खुफिया अधिकारियों और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के कर्मियों की एक टीम ने उससे पूछताछ की। जांच एजेंसियां कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क से उसके संपर्कों और सैन्य सूचनाओं के संभावित आदान-प्रदान की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

विदेश में पढ़ाई के दौरान संपर्क में आने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह आशंका जताई गई है कि महिला पश्चिमी देशों की यात्रा के दौरान एक विदेशी खुफिया एजेंट के संपर्क में आई थी। बताया जा रहा है कि स्विट्जरलैंड समेत कुछ देशों की यात्रा के दौरान उसे लेख लिखने के काम के बहाने संपर्क किया गया। आरोप है कि शुरुआत में उसे प्रत्येक लेख के लिए 200 से 300 डॉलर देने की पेशकश की गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि शुरुआत में लेख लिखने के नाम पर शुरू हुआ यह संपर्क बाद में कथित तौर पर संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा करने तक पहुंच गया। हालांकि, विदेशी एजेंट से संपर्क और जानकारी साझा करने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सेना की तैनाती और प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी लीक करने का आरोप

जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी में सेना की कोर, सैन्य संरचनाओं, जवानों की तैनाती और प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं। अब जांच का अहम पहलू यह है कि महिला को ये जानकारियां कहां से मिलीं। एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या उसे अपने पति की आधिकारिक तैनाती से जुड़ी किसी जानकारी तक पहुंच थी या उसने किसी अन्य माध्यम से संवेदनशील डिटेल्स हासिल किए थे।

भुगतान और वित्तीय लेन-देन की जांच

सूत्रों के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर लेख लिखने के बदले नियमित भुगतान मिलने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब उसके वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भुगतान किसने किया, रकम कहां से आई और क्या किसी लेन-देन का संबंध कथित खुफिया गतिविधियों से है। हालांकि, भुगतान मिलने की बात अपने आप में जासूसी के आरोप को साबित नहीं करती। जांच एजेंसियों को कथित सैन्य जानकारी साझा किए जाने और विदेशी संपर्कों के बीच संबंध स्थापित करना होगा।

दो महीने की बच्ची होने की भी चर्चा

सूत्रों से मिली जानकारी में दावा किया गया है कि महिला को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और इसके पीछे उसकी दो महीने की बच्ची होने की बात बताई जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी नहीं होने के इस कथित कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। महिला पर लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के कथित लीक में उसकी क्या भूमिका थी और क्या इस मामले के तार किसी विदेशी खुफिया नेटवर्क से जुड़े हैं।

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नोएडा में एक भी सेक्टर 100% अतिक्रमण मुक्त नहीं! गांवों में बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं होने से खड़े हो रहे कई मंजिला घर, अधिकारी छुप्पी साधे

Noida Encroachment News: नोएडा में अतिक्रमण को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के प्रमुख शहर में नंबरिंग के हिसाब से कुल 168 सेक्टर हैं।  लेकिन इनमें कुछ सेक्टर मास्टर प्लान में शामिल नहीं हैं। वहीं धरातल पर नोएडा के भूभाग में मौजूद करीब 163 सेक्टरों में एक भी ऐसा सेक्टर नहीं है जिसे 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त कहा जा सके. यहां तक कि सेक्टर-15ए, 14ए, 105 और 108 जैसे प्रमुख सेक्टर भी अतिक्रमण से पूरी तरह अछूते नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शहर के प्रमुख और विकसित सेक्टर भी पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त नहीं हैं, तो नोएडा में अतिक्रमण पर नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

किरायेदारों की जान जोखिम में

वहीं, दूसरी बड़ी तस्वीर नोएडा से सटे गांवों की है। नोएडा के गांवों में प्राधिकरण की नक्शा नीति लागू नहीं होती और बिल्डिंग बायलॉज भी लागू नहीं होने की बात सामने आती है। हालांकि गांवों में सड़क, पानी और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर शहर से सटे कई गांवों में कई-कई मंजिला इमारतें खड़ी कर ली जाती हैं।

इन बिल्डिंग में बड़ी संख्या में किरायेदारों के रहते हैं। इससे सुरक्षा और हादसों को लेकर सवाल खड़े होते हैं। खासकर लाल डोरा वाली जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहते हैं। वहीं कुछ जगहों पर भूमाफिया, स्थानीय लोगों और संबंधित व्यवस्था की मिलीभगत से निर्माण गतिविधियां चलती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बिना स्वीकृत नक्शे और निर्धारित बिल्डिंग नियमों के कई मंजिला इमारतें आखिर कैसे खड़ी हो रही हैं।

अधिकारियों का जवाब पढ़िये

इसी मुद्दे पर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से सवाल किया गया कि नोएडा में ऐसा कौन सा सेक्टर है जो 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त है। साथ ही यह भी पूछा गया कि जब गांवों में प्राधिकरण की नक्शा नीति और बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं हैं, तो वहां कई मंजिला इमारतों के निर्माण और उनमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा की निगरानी कैसे होती है।

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इस मामले में प्राधिकरण की AECO वंदना त्रिपाठी से बात की गई। उन्होंने कहा कि इस विषय पर बेहतर जवाब OSD क्रांति शेखर सिंह दे पाएंगे। OSD क्रांति शेखर सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में आता है। लेकिन इस बारे में उनसे अधिक बेहतर जवाब GM ए.के. अरोड़ा और GM एस.पी. सिंह दे सकते हैं।

अवैध निर्माण लगातार जारी

अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए GM ए.के. अरोड़ा और GM एस.पी. सिंह से लगातार दो दिन तक फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई। दोनों अधिकारियों की ओर से कॉल का जवाब नहीं मिला। एस.पी. सिंह के PA ने फोन उठाकर बताया कि साहब मीटिंग में हैं। मीटिंग से आते ही वापस कॉल करेंगे। इसके बाद भी कोई जवाब नहीं आया। अधिकारियों को संदेश भेजकर भी सवालों का जवाब मांगा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला।

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इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नोएडा के किसी भी सेक्टर को 100 प्रतिशत अतिक्रमण मुक्त नहीं है, तो अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है? वहीं गांवों में बिल्डिंग बायलॉज लागू नहीं होने की स्थिति में कई मंजिला निर्माण, किरायेदारी और लोगों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी किसकी है। इन सवालों के जवाब प्राधिकरण के आलाधिकारी नहीं दे पाए।

(नोएडा से सुमित राजपूत की रिपोर्ट)