इजरायल में काकेशियन माफिया को सिर में सटाकर मार दी गोली, कौन था लक्जरी कारों का ये शौकीन क्राइम बॉस यानीस युशवाएव?

Caucasus Jewish Mafia: इजरायल के कैसरिया जंक्शन पर सोमवार को दिनदहाड़े एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। इजरायल में काकेशियन यहूदी माफिया का कथित सरगना 40 वर्षीय यानीस युशवाएव मारा गया। हमलावर ने बहुत पास से यानीस के सिर में पिस्टल सटाकर गोली मार दी।

माफिया वर्ल्ड से लेकर लग्जरी कारों के शौक तक, आइए जानते हैं कि इजरायल की पुलिस की नाक में दम करने वाला यह अंडरवर्ल्ड डॉन यानीस युशवाएव कौन था।

दिनदहाड़े पेट्रो स्टेशन पर प्वाइंट-ब्लैंक रेंज पर मारी गोली

सीसीटीवी फुटेज में कैद इस हत्याकांड की वारदात बेहद खौफनाक है। यानीस अपने दो साथियों के साथ कैसरिया जंक्शन स्थित एक पेट्रोल स्टेशन के बिजनेस आउटलेट से बाहर निकल रहा था। हुडी और कैप पहने एक नकाबपोश हमलावर पास आया और सीधे प्वाइंट-ब्लैंक रेंज से यानीस के सिर में गोली मार दी। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, हमलावर ने पुलिस से बचने के लिए चेहरे पर एक बेहद रियलिस्टिक सिलिकॉन ह्यूमन मास्क पहन रखा था।

कौन था यानीस युशवाएव?

ऑर अकीवा का रहने वाला 40 वर्षीय यानीस युशवाएव इजरायल के शरोन क्षेत्र में एक खौफनाक नाम बन चुका था। इजरायली मीडिया और पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह काकेशियन यहूदी संगठित अपराध गिरोह का कथित चीफ था। यानीस कई बड़े रेस्टोरेंट का मालिक था और बेंटले जैसी लग्जरी गाड़ियों में चलता था।

अक्टूबर में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उसने माफिया होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, ‘मैं एक लीगल बिजनेसमैन हूं, बेहद स्थापित हूं और बेंटले चलाता हूं। पुलिस को इसी बात से परेशानी होती है।’

गैंगवार, बम धमाके और दर्जनों गाड़ियों में आगजनी का आरोप

इजरायली पुलिस कई सालों से यानीस के पीछे पड़ी थी, लेकिन वह हर बार कानून के शिकंजे से बच निकलता था। नवंबर 2025 में कोर्ट की सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उसे खूनी दुश्मनी में शामिल क्राइम गैंग का मुखिया बताया था।

साल 2023 में ऑर अकीवा और हाडेरा में एक ही महीने के भीतर दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिसमें यानीस मुख्य संदिग्ध था। उस पर हडेरा के बड़े व्यापारियों के घरों और गाड़ियों पर गोलियां बरसाने, हैंड ग्रेनेड फेंकने और हत्या के प्रयास के दर्जनों केस दर्ज थे।

इसी साल फरवरी में जब वह मॉस्को से लौट रहा था, तब बेन गुरियन एयरपोर्ट से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, पर सबूतों के अभाव में कुछ ही दिनों में रिहा कर दिया गया।

पुलिस की जासूसी से भी हमेशा रहता था आगे

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यानीस को सजा दिलाना सबसे मुश्किल काम था। वह जानता था कि उसके फोन टैप किए जा रहे हैं, इसलिए वह कभी फोन पर संवेदनशील बात नहीं करता था। उसके गैंग के साथी पुलिस पूछताछ के दौरान कभी मुंह नहीं खोलते थे। करीब 10 साल पहले हाडेरा में एक शोक सभा के दौरान भी उस पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वह गोली लगने से घायल हुआ था, लेकिन बच निकला।

सबूतों की कमी के चलते अदालत से बार-बार बरी होने वाले इस ‘काकेशियन क्राइम बॉस’ का अंत अदालत के बजाय गैंगवार की रंजिश में हुआ। यानीस युशवाएव की इस सनसनीखेज हत्या के साथ ही इजरायल के शरोन रीजन में जारी लंबे अंडरवर्ल्ड संघर्ष में एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है।

‘ईरान ने मेरे बेटे की हत्या की कोशिश की…’; नेतन्याहू का सनसनीखेज दावा, बोले- सुरक्षा हटती तो हमलावर सफल हो जाते

Benjamin Netanyahu: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को लेकर एक बेहद ही सनसनीखेज दावा किया है। नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि उसे निशाना बनाकर हत्या की कोशिश की गई। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद इजरायल की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नेतन्याहू ने सोमवार (24 अगस्त) को एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे परिवार को निशाना बनाया।” उन्होंने यह बात इजरायली चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही।

इजरायली टेलीविजन चैनल चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे को निशाना बनाया था। उन्होंने दावा किया कि यह केवल धमकी नहीं थी। बल्कि उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की गई थी। नेतन्याहू ने इंटरव्यू में कहा, “ईरान ने मेरे एक बेटे को निशाना बनाया। ईरान ने मेरे एक बेटे की हत्या करने की कोशिश की। उसने उसकी हत्या की साजिश रची और उसे मारने की कोशिश की।”

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी किया बड़ा दावा

नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या उनके बेटे को निशाना बनाने की जानकारी किसी खुफिया सूचना के लीक होने के कारण सामने आई थी। इसके जवाब में उन्होंने दोबारा स्पष्ट तौर पर कहा कि ईरान ने उनके एक बेटे की हत्या की कोशिश की थी। इसके बाद नेतन्याहू ने अपने परिवार को दी जा रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का बचाव किया।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार की सुरक्षा किसी दिखावे या विशेष सुविधा के लिए नहीं है, बल्कि वास्तविक खतरे को देखते हुए जरूरी है। नेतन्याहू ने कहा कि अगर यह सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती, तो उनके बेटे को निशाना बनाने वाले लोग अपने मकसद में सफल हो सकते थे। उनके मुताबिक, परिवार के सदस्यों को सुरक्षा देना मौजूदा परिस्थितियों में एक आवश्यक कदम है।

किस बेटे को बनाया गया निशाना?

नेतन्याहू ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित हत्या की कोशिश में उनके किस बेटे को निशाना बनाया गया था। उनके दो बेटे याइर नेतन्याहू और अवनेर नेतन्याहू हैं। इसलिए यह अभी स्पष्ट नहीं है कि कथित ईरानी साजिश का निशाना याइर थे या अवनेर। नेतन्याहू ने इंटरव्यू के दौरान इस बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी शेयर नहीं की।

परिवार की सुरक्षा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है

नेतन्याहू का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर पहले ही अतिरिक्त कदम उठाए जा चुके हैं। जुलाई में शिन बेट मामलों से संबंधित मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू की पत्नी सारा नेतन्याहू और उनके दोनों बेटों याइर तथा अवनेर के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी थी। यह फैसला प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच लिया गया था। हालांकि, उस समय सुरक्षा बढ़ाने के पीछे कथित तौर पर किस विशेष खतरे का आकलन किया गया था, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।

लंबे समय से सुरक्षा मामलों पर गोपनीयता

नेतन्याहू का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब सुरक्षा से जुड़े कई मामलों को लेकर लंबे समय से सख्त गोपनीयता और प्रतिबंध लागू रहे हैं। इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा से संबंधित खुफिया जानकारी को आम तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता। ऐसे में नेतन्याहू द्वारा खुद अपने एक बेटे को ईरान की कथित हत्या की कोशिश का निशाना बताए जाने को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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हालांकि, उनके बयान में कथित हमले की तारीख, स्थान, हमले के तरीके या उसे विफल करने वाली सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बारे में कोई डिटेल्स जानकारी नहीं दी गई। नेतन्याहू के इस दावे से एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि इजरायल और ईरान के बीच जारी गंभीर तनाव अब प्रधानमंत्री के परिवार तक कितनी दूर पहुंच चुका है। हालांकि, कथित हत्या की कोशिश से जुड़े विस्तृत तथ्य और खुफिया जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी एशोआराम के लिए नहीं, विपक्ष ने सवाल उठाए थे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अनवर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू बोले- सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अवनेर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। खबर लगातार अपडेट की जा रही है।

नेतन्याहू बोले- ईरान ने बेटे की हत्या की कोशिश की:हमें मिली सिक्योरिटी एशोआराम के लिए नहीं, विपक्ष ने सवाल उठाए थे

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उनके परिवार को निशाना बनाया और उनके दो बेटों में से एक की हत्या की कोशिश की। उन्होंने यह बात सरकार समर्थक चैनल 14 को फोन पर दिए इंटरव्यू में कही। नेतन्याहू चुनाव से पहले अपने परिवार और दूसरे राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बात कर रहे थे। नेतन्याहू ने कहा, उन्हें दी जा रही सुरक्षा कोई ऐशोआराम नहीं है। नेतन्याहू के दो बेटे याइर और अवनर हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके दोनों बेटों में से किसे निशाना बनाया गया था। हत्या की कोशिश कब और कैसे की गई। नेतन्याहू अगला चुनाव हारे, तब भी मिलेगी सुरक्षा दरअसल इजराइल में कई महीनों से नेतन्याहू के परिवार के सदस्यों और राजनीतिक नेताओं को दी जा रही सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट ने नेतन्याहू की पत्नी सारा और उनके दोनों बेटों के लिए सुरक्षा बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह सुरक्षा उन्हें नेतन्याहू के आगामी चुनाव हारने की स्थिति में भी मिलेगी। अगला चुनाव दो महीने में है। अवनर इजराइल में रहते हैं, जबकि याइर पिछले कुछ सालों से ज्यादातर मियामी में रह रहे हैं। याइर दक्षिणपंथी विचारों वाली अपनी टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कथित हत्या की साजिश की जानकारी इजराइल के सुरक्षा अधिकारियों को कई महीनों से थी। हालांकि, सैन्य सेंसर ने इसके प्रकाशन पर रोक लगा दी थी। नेतन्याहू परिवार की सुरक्षा पर विवाद क्या है इजरायल में प्रधानमंत्री और उनके परिवार को सुरक्षा मिलती है। विवाद तब बढ़ा, जब सारा नेतन्याहू और उनके दोनों वयस्क बेटों याएर व अवनर की सुरक्षा लंबे समय तक जारी रखने का फैसला हुआ। जुलाई 2026 में एक मंत्रीस्तरीय समिति ने नेतन्याहू और सारा को जीवनभर, जबकि दोनों बेटों को कम से कम 5 साल सुरक्षा देने का फैसला किया। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा की अवधि पहले से तय करने के बजाय वास्तविक खतरे के आधार पर समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। बड़ा विवाद याइर नेतन्याहू की विदेश में सुरक्षा को लेकर है। वह अमेरिका के मियामी में रहते हैं, फिर भी उन्हें शिन बेट के सुरक्षाकर्मी मिलते हैं। 2018-2023 के बीच याएर, अवनर और सारा की सुरक्षा पर करीब 32 मिलियन शेकेल खर्च होने की जानकारी सामने आई थी। याइर को विदेश में निजी छुट्टियों के दौरान भी सुरक्षा मिलने पर सवाल उठे। आलोचकों का कहना है कि दोनों बेटे वयस्क हैं और विदेश में रहने वाले बेटे की महंगी सुरक्षा का खर्च इजरायली करदाताओं पर पड़ रहा है। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन: कहा- जो देश बिजनेस करेंगे, उन पर भी कार्रवाई अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग के क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें…

Tukaram Mundhe: मुंबई में ‘एक रेड रोज’ से बदल रहे हैं खाने के नियम! महाराष्ट्र के FDA चीफ तुकाराम मुंढे का एक्शन वायरल

Tukaram Mundhe News मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच एक नाम चर्चा में है तुकाराम मुंढे…। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर के तौर पर 51 वर्षीय मुंढे ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसकी तस्वीरें और कार्रवाई सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

कमिश्नर का पद संभालने के बाद से FDA खाद्य सुरक्षा और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले कई चर्चित प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चला रहा है। हाल ही में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत FDA ने राज्य भर में सैकड़ों होटलों, रेस्तरां और ढाबों एक्शन लिया था।

मुंढे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले कुछ हफ्तों में Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के फूड परमिट निलंबित किए हैं। मई में महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा प्रमुख का पद संभालने के बाद से उनकी टीम 3,000 से ज्यादा छापे और निरीक्षण कर चुकी है।

इन कार्रवाइयों में बड़े ब्रांडों के साथ-साथ क्रिकेट क्लब, होटल, मशहूर रेस्टोरेंट, छोटे ढाबों और सड़क किनारे खाने की दुकानों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। मुंढे का साफ संदेश है कि जो भी खाद्य कारोबारी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।

जज ने पूछा- कोर्ट की कैंटीन की जांच हुई?

मुंढे की कार्रवाई तब और चर्चा में आ गई जब मुंबई की एक अदालत के जज ने सवाल उठाया कि क्या खाद्य विभाग निजी दुकानों के खिलाफ ही सख्ती कर रहा है। क्या अदालत की कैंटीनों की भी जांच की गई है? मुंढे की टीम ने इस सवाल का जवाब घंटों के भीतर कार्रवाई से दिया।

अधिकारियों ने अदालत परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ ऐसी कैंटीनों को बंद कराया जो कथित तौर पर बिना लाइसेंस चल रही थीं। इस घटना ने यह संदेश दिया कि विभाग बड़े ब्रांड और छोटे कारोबारियों के साथ-साथ सरकारी या संस्थागत परिसरों में चलने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में रख रहा है।

हर दिन वायरल हो रही छापेमारी की तस्वीरें

मुंढे की कार्रवाई की सबसे खास बात उसका सार्वजनिक असर है। छापों के बाद खाद्य विभाग की ओर से जारी तस्वीरों में कई जगहों पर गंदी दीवारें, कॉकरोच, चूहे और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री दिखाई दी। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया। कई लोगों का कहना है कि वर्षों से खराब साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता को यह कहकर सामान्य मान लिया गया था कि भारत में ऐसा होता है।

अब मुंढे की कार्रवाई से लोगों को उम्मीद दिखाई दे रही है कि खाद्य सुरक्षा के नियम वास्तव में लागू किए जा सकते हैं। कंज्यूमर कंसल्टिंग फर्म ‘The Knowledge Company’ के पार्टनर अंकुर बिसेन के मुताबिक, लोगों में लंबे समय से दबा हुआ गुस्सा है। ऐसे में मुंढे की कार्रवाई ने उसे आवाज दी है।

खाने में रंग से लेकर तेल बदलने तक, दुकानदारों में डर

मुंबई में न्यूज एजेंसी Reuters ने 25 स्ट्रीट वेंडर्स और रेस्टोरेंट का दौरा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंढे की कार्रवाई का असर छोटे कारोबारियों के काम करने के तरीके पर भी दिखाई दे रहा है। एक दुकानदार ने चीनी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक लाल रंग की जगह प्राकृतिक लाल मिर्च का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। एक अन्य दुकानदार ने अपना तलने वाला तेल दिन में तीन बार बदलना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के लिए दस्ताने और सिर ढकने वाली कैप पहनना भी अनिवार्य किया गया है।

मुंबई के फेमस वड़ा पाव पर भी कार्रवाई

मुंबई का मशहूर वड़ा पाव भी मुंढे की खाद्य सुरक्षा मुहिम से बच नहीं पाया है। जून में खाद्य विभाग ने वड़ा पाव समेत खाने की चीजों को पैक करने के लिए अखबार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। मुंबई में लंबे समय से सड़क किनारे खाने की चीजों को अखबार में लपेटकर देने का चलन रहा है। अब कई जगहों पर साफ बटर पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। 14 वर्षीय सुप्रिया वागले को अपने पसंदीदा वड़ा पाव की साफ बटर पेपर में पैकिंग पसंद आई। उसका कहना है कि इससे उसे राहत महसूस होती है और वह स्ट्रीट फूड को लेकर ज्यादा भरोसा कर पा रही है।

Domino’s और Pizza Hut के बाद McDonald’s पर भी एक्शन

मुंढे की टीम ने कई बड़े ब्रांडों के आउटलेट पर भी कार्रवाई की है। Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के परमिट निलंबित किए गए हैं। इसके बाद एक McDonald’s आउटलेट पर भी कार्रवाई हुई। विभाग के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान वहां जिंदा कीट यानी कॉकरोच और सड़ा हुआ खाना मिला।

हालांकि, Reuters के सवालों पर संबंधित तीनों कंपनियों की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई। मुंढे की कार्रवाई केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों तक सीमित नहीं रही। विभाग ने मुंबई के एक ब्रिटिश दौर के क्रिकेट क्लब, करीब 70 साल पुराने आइसक्रीम पार्लर और 110 साल पुराने पारसी डेयरी के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

कारोबारी बोले- सुधार का समय तो दिया जाए

मुंढे की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ कारोबारियों का कहना है कि उन्हें नियमों का पालन करने और कमियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कुछ प्रतिष्ठानों ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए खाद्य विभाग पर कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करने का आरोप लगाया है।

एक मामले में अदालत ने विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत के अनुसार, संबंधित खाने के प्रतिष्ठान ने अपनी कमियों में सुधार कर लिया था, इसके बावजूद उसका परमिट निलंबित रखा गया था। मुंढे ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता है। जहां सुधार की गुंजाइश होती है, वहां विभाग सुधार करता है।

हर साल एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से हर साल भारत में खाद्य निरीक्षकों ने एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच की है। इनमें करीब 20 प्रतिशत नमूने असुरक्षित, घटिया या सही लेबलिंग के बिना पाए गए। पिछले तीन वर्षों में करीब 8,000 खाद्य कारोबार लाइसेंस रद्द किए गए हैं। ऐसे आंकड़ों के बीच मुंबई में मुंढे की कार्रवाई को लोग सिर्फ एक अधिकारी की सख्ती के रूप में नहीं। बल्कि खाद्य सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या पर बड़े अभियान के रूप में देख रहे हैं।

21 साल की नौकरी में कई बार हुआ तबादला

तुकाराम मुंढे का सख्त प्रशासनिक रवैया नया नहीं है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी के तौर पर करीब 21 साल के करियर में उनका कई बार तबादला हो चुका है। 2018 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनका लगभग हर साल तबादला हो जाता है।

उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार करने और प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं डरने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग में उनकी शैली एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर वायरल होती छापेमारी की तस्वीरों के कारण।

सेलिब्रिटी जैसी लोकप्रियता, लेकिन मुंढे बोले- मैं सेलिब्रिटी नहीं

मुंढे की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंच गए। लोग उनसे हाथ मिलाने की कोशिश करते नजर आए। एक फैंस ने तो यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुंढे को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देनी चाहिए। हालांकि, मुंढे खुद इस लोकप्रियता को सेलिब्रिटी का दर्जा देने से इनकार करते हैं।

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उन्होंने Reuters से बातचीत में कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं कोई सेलिब्रिटी हूं। मैं सिर्फ फूड सेफ्टी कमिश्नर हूं।” मुंढे का अभियान अब मुंबई से आगे भी चर्चा का विषय बन चुका है। उनके सामने चुनौती सिर्फ छापे मारना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में साफ-सफाई और सुरक्षा के नियमों का पालन लंबे समय तक बना रहे।

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

UK Israel relations

UK Israel relations: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने, एक इंटरव्यू में कुछ दिन पूर्व ब्रिटेन का मज़ाक उड़ते हुए उसे “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहा। कहने की आवश्यकता नहीं कि ब्रिटिश सरकार ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूर्णतः अस्वीकार्य” बताया है।

 

इसराइली प्रधानमंत्री इस इंटरव्यू में अपने देश के प्रति ब्रिटेन के रुख की आलोचना कर रहे थे। एक मिलिट्री रेडियो पॉडकास्ट के दौरान दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्हो़ंने कहा, “किसी ने एक बार कहा था कि परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन होगा।…हम इसराइली यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान ऐसा दूसरा देश न बन पाए।” ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने नेतन्याहू की इन टिप्पणियों को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया।

ब्रिटेन में इस्लाम की बढ़ती धाक

नेतन्याहू ने ऐसा करके, अपने आप को पश्चिमी देशों के उन दक्षिणपंथी राजनेताओं और टिप्पणीकारों की पांत से जोड़ लिया है, जिन्होंने आगाह किया था कि बड़े पैमाने पर आप्रवासन (इमिग्रेशन) के कारण ब्रिटेन के कुछ हिस्से इस्लामी कानूनों के दायरे में आ गए हैं। बाद में इन नेताओं और टिप्पणीकारों पर “इस्लामोफोबिया” (इस्लाम-विरोधी होने) के आरोप भी लगे थे। ब्रिटेन उन यूरोपीय देशों में से एक है, जिन्होंने पिछले साल फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता भी दी थी; इस कदम से स्वाभाविक है कि इसराइल इन देशों से प्रसन्न नहीं है। ALSO READ: स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

 

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में अपने पूर्ववर्ती कीर स्टारमर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टारमर, गाज़ा पट्टी में अपना हमला रोकने के लिए इसराइल पर पर्याप्त दबाव बनाने में नाकाम रहे। अपना पद संभालने से कुछ समय पहले, “द गार्डियन” को दिए एक इंटरव्यू में बर्नहम ने कहा कि ग्रेट ब्रिटेन, “वेस्ट बैंक” में स्थित इसराइली बस्तियों से आने वाले सामानों के व्यापार पर रोक लगाने के बारे में गंभीरता से विचार करेगा। “वेस्ट बैंक” जॉर्डन नदी के पश्चिम में स्थित फ़िलिस्तीन का एक क्षेत्र है और 1967 से इसराइली क़ब्ज़े में है, जिसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार अवैध माना जात है।

ख़राब होते रिश्ते

ब्रिटेन पारंपरिक रूप से अमेरिका का हमेशा क़रीबी सहयोगी रहा है; इसराइल के साथ उसके रिश्ते तब से ख़राब हुए हैं जब इस साल अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया— इसी के साथ मध्यपूर्व में युद्ध भी छिड़ गया। ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका परमाणु शक्तियां हैं और यह बात भी जग-जाहिर है कि इसराइल के पास भी परमाणु हथियार हैं; हालांकि उसने सार्वजनिक रूप से इसे कभी स्वीकार नहीं किया है। 1998 में पाकिस्तान परमाणु शक्ति वाला पहला इस्लामी देश बना था।  ALSO READ: महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

 

इसराइल उस समय भारत के सहयोग से पाकिस्तानी बम बनने को रोकना चाहता था, पर इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं थीं। अत: नेतन्याहू का इसराइल, अब हर हाल में ईरान को “दूसरी इस्लामी परमाणु शक्ति” बनाने से रोकने के लिए पूर्णत: कटिबद्ध है।

 

नेतन्याहू द्वारा ब्रिटेन को एक “इस्लामिक रिपब्लिक” कहने के पीछे एक दूसर प्रमुख कारण संभवत: यह भी है कि ब्रिटेन में मुस्लिम जनसंख्या न केवल तेज़ी से बढ़ी है और अब भी बढ़ रही है, वहां की सरकारें इसे रोकने के बदले दुम दबाकर “मुस्लिम तुष्टीकरण” नीति की कायल बन गई हैं। ब्रिटेन की सरकारें मुस्लिम प्रवासियों द्वारा वहां की रहन-सहन के नियमों को ठुकराने की ही नहीं, उनका वोट पाने के लिए उनके द्वारा देश के क़ानूनों की अवहेलना के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने से बिदकती हैं। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह

ताज़े अनुमानों के अनुसार, ब्रिटेन की मुस्लिम जनसंख्या लगभग 41 लाख है, जो वहां की कुल जनसंख्या के 6.5 प्रतिशत के बराबर है। पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह हैं। अप्रैल 2026 के एक मत सर्वेक्षण के अनुसार, 25 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम इसराइल विरोधी हमास के प्रबल समर्थक हैं। 45 प्रतिशत का मानना है कि ब्रिटेन के समाचार मीडिया में यहूदियों की धाक चलती है। 16 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम सीरिया में यज़ीदियों का नरसंहार करने वाले अल बगदादी के “इस्लामी राज्य” के प्रशंसक हैं और 15 प्रतिशत ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा की यादें अब भी संजोए हुए हैं। ईरान में हर तरह के जन—असंतोष को निर्ममता से कुचलने वाले वहां के तथाकथित “पसदारान” (रिवल्यूशनरी गार्ड) के समर्थकों की संख्या भी कुछ कम नहीं है।

रोज़मर्रा की अविश्वसनीय वास्तविकता

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पॉडकास्ट वाले वक्तव्य से कुछ ही दिन पहले, ब्रिटेन के एक सांसद रूपर्ट लो ने वहां की संसद में एक ऐसा वक्तव्य पढ़ कर सुनाया, जो ब्रिटेन में रोज़मर्रा की एक अविश्सनवीय वास्तविकता है। ब्रिटेन में रहने वाले मुख्यतः पाकिस्तानियों द्वारा, वहां की मूल ईसाई लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ और बलात्कार के लिए कुख्यात, तथाकथित “ग्रूमिंग गैंग्स” के काले कारनामों का वर्णन करते हुए रूपर्ट लो ने कहा कि उनका वक्तव्य, उनकी खुद की जांच-परख पर आधारित है।

 

उदाहरण के तौर पर, बलात्कार पीड़ित एक लड़की की आपबीती को रूपर्ट लो ने उसी के शब्दों में संसद में सुनाया: “उसने (बलात्कारी ने) जैक डेनियल्स (शराब) की बोतल उठाई, जो अब खाली हो चुकी थी, और उसे ज़बरदस्ती मेरे (गुप्तांग के) अंदर घुसेड़ दिया। बोतल वहीं तोड़ दी। उस समय मैं लगभग 12 साल की थी। लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं कि गोरी लड़कियों—- यानी ईसाई लड़कियों में— नैतिकता की या अच्छे मूल्यों की कमी होती है, जबकि मुस्लिम लड़कियों को गरिमापू्र्ण और उच्च नैतिक स्तर वाला बताया जाता है।”

 

“इस पूरे यौन शोषण के दौरान, देश के अलग अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा बलात्कार किया। ईद और छुट्टियों के दौरान पार्टियां और भी बड़ी हो जाती थीं—हालात और भी बदतर हो जाते थे। पार्टियों में और अधिक हिंसक लोग शामिल हो जाते थे— और अधिक लोग हुए, तो उनकी हवश के लिए और अधिक लड़कियां भी होनी चाहिए! मुझे याद है, एक आदमी ने एक वैन का पिछला दरवाज़ा खोला और मैने देखा कि उसमें 15 से 20 लड़कियां कुत्तों के पिंजरों में बंद थीं।” यह मात्र एक उदाहरण है। ऐसे अनगिनत मामले हैं।

कु्ख्यात “ग्रूमिंग गैंग”

“ग्रूमिंग गैंग” ऐसे लोगों के एक संगठित नेटवर्क को कहते हैं, जो सुनियोजित तरीके से कमज़ोरों-पीड़ितों को—आमतौर पर बच्चों और किशोरवय लड़के-लड़कियों—को बहला-फुसलाकर उनका शोषण करते हैं। उन्हें गंभीर दुर्व्यवहार का शिकार बनाते हैं; इसमें बच्चों का यौन शोषण और मानव तस्करी भी शामिल है। अपने शिकारों को उपहारों, मादक द्रव्यों, शराब आदि के द्वारा ललचाया और पटाया जाता है। घर-परिवार से दूर रखकर, गैंग पर निर्भर बनाकर यौन शोषण सहित उनका हर तरह से दुरुपयोग किया जाता है।

 

ब्रिटिश पुलिस भी मुस्तैदी से काम नहीं करती। 2021 में, ब्रिटिश अख़बार “टाइम्स” की एक जांच से पता चला कि साउथ यॉर्कशायर पुलिस, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े संदिग्धों के मामले में नियमित रूप से यह दर्ज नहीं कर रही थी कि शोषण करने वाले किस जाति, धर्म, देश या समुदाय के लोग थे। रॉदरहैम में, पुलिस ने 67 प्रतिशत मामलों में ऐसे विवरण लिखना ज़रूरी ही नहीं समझा। ग्रेटर मैनचेस्टर इलाके में तीन साल की अवधि में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों के 52 प्रतिशत अपराधी “एशियाई” मूल के दर्ज किए गए, जिनमें सबसे बड़ा समूह पाकिस्तानियों का था, जबकि 38 प्रतिशत “श्वेत” (White) यानी गोरे दर्ज किए गए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, मैनचेस्टर की स्थानीय आबादी में 21 प्रतिशत लोग एशियाई मूल के हैं।

पाकिस्तानी लड़कियां भी सुरक्षित नहीं

पाकिस्तानी महिलाओं के एक स्थानीय समूह का कहना था कि पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर और मकान-मालिक पाकिस्तानी लड़कियों को अपनी हवश का निशाना बनाते हैं। लेकिन, इसकी शिकायत करने पर अपनी शादी की संभावनाओं पर असर पड़ने के डर से लड़कियां पुलिस के पास जा कर कोई रिपोर्ट दर्ज करने से कतराती रही हैं।

 

इन सब तथ्यों के प्रकाश में, इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का—भले मज़ाक के ही तौर पर— ब्रिटेन को “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहना क्या सही नहीं है?

Islamic NATO: भारत के खिलाफ बांग्लादेश की साजिश? सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किये के ‘इस्लामिक NATO’ में होगा शामिल

Islamic NATO: बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने कहा है कि उनका देश हाल में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने रक्षा गठबंधन में शामिल होने के लिए तैयार है। हालांकि, भारत के पड़ोसी देश ने कहा है कि इस संबंध में कोई भी फैसला राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। 7 अगस्त को मक्का में हुए इस समझौते के तहत सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध का एक ढांचा तैयार किया गया है। ‘इस्लामिक NATO’ कहे जाने वाले इस ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ में प्रावधान है कि इसमें से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

इस बीच खबर है कि फरवरी से ही अमेरिका का मुकाबला कर रहे ईरान को भी सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए इस एग्रीमेंट में शामिल होने का न्योता दिया गया है। पाकिस्तान के SAMAA TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘खानेह मिल्लत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी ने लेबनान के ‘अल मयादीन’ को बताया कि तेहरान को न्योता मिला है। इसके बाद इस मामले पर विचार किया जा रहा है।

बांग्लादेश ने क्या कहा?

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नवनियुक्त विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा, “बांग्लादेश अपने हितों और वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं व्यापार में बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना के प्रति सकारात्मक रुख रखता है।” कबीर ने शुक्रवार को सरकारी न्यूज एजेंसी ‘बीएसएस’ की बांग्ला सेवा को दिए इंटरव्यू में कहा कि सरकार बांग्लादेश फर्स्ट पॉलिसी और संतुलित विदेश नीति पर आगे बढ़ रही है, जिसमें राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

पाकिस्तान के करीब जा रहा ढाका!

कबीर ने कहा कि इसी नीति के तहत ढाका रक्षा समझौते में शामिल होने का फैसला कर सकता है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सामान्य राजनयिक संबंधों के माध्यम से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूत करेगा जिसे व्यापार और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शुक्रवार को विदेश मामलों के दूसरे राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने रियाद आने का निमंत्रण दिया है।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा की तारीख गर्मियां खत्म होने के बाद निर्धारित की जा सकती है। विदेश मामलों की एक अन्य राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कबीर की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रक्षा समझौते में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख उसके राष्ट्रीय हित और वहां के लोगों के हितों से तय होगा।

बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं?

जब उनसे पूछा गया कि क्या बांग्लादेश इस त्रिपक्षीय ढांचे का हिस्सा बनेगा तो उन्होंने कहा, “हम किसी भी समझौते या बहुपक्षीय संगठन में शामिल होंगे या नहीं, इसका फैसला मुख्य रूप से इस आधार पर होगा कि बांग्लादेश और बांग्लादेशी लोगों के हित सुरक्षित हैं या नहीं।”

दोनों मंत्रियों की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के वित्त एवं योजना सलाहकार प्रोफेसर राशेद अल महमूद तितुमीर के उस बयान के दो दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति को देश की विदेश नीति में ‘बुनियादी बदलाव’ बताया था।

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उन्होंने कहा था कि इस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बांग्लादेश के संबंधों में राष्ट्रीय हित, संप्रभुता, आपसी सम्मान और क्षेत्रीय सौहार्द को केंद्र में रखा गया है। इसके तहत सभी देशों के साथ रचनात्मक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।

अक्षय खन्ना शादी और बच्चों को ‘लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव’ मानते हैं, बोले- ‘मैं अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं’

मशहूर स्टार अक्षय खन्ना ने खुलकर बताया है कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की। उनका कहना है कि बात कमिटमेंट की नहीं, बल्कि शादी के बाद जैसी ज़िंदगी जीनी पड़ती है, उसकी है। 2019 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में एक्टर ने कहा था कि उन्हें अपनी पर्सनल ज़िंदगी पर अपना कंट्रोल बनाए रखना पसंद है और वे इसे छोड़ना नहीं चाहते।

अक्षय खन्ना ने बताया कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की

जब अक्षय से पूछा गया कि क्या वे भविष्य में शादी करने के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वे उस तरह की जिंदगी के लिए सही हैं। उन्होंने कहा कि शादी का मतलब होगा अपनी मौजूदा जीवनशैली में बड़े बदलाव करना और अपनी जिंदगी का कंट्रोल किसी और के साथ शेयर करना।

“मैं खुद को शादी करते हुए नहीं देखता, मैं शादी के लिए सही इंसान नहीं हूं। मैं उस तरह की ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। यह एक कमिटमेंट है, लेकिन जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव भी है। शादी सब कुछ बदल देती है। मैं अपनी ज़िंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं। जब आप किसी और के साथ अपनी ज़िंदगी शेयर करते हैं, तो आपका पूरा कंट्रोल नहीं रहता। आपको बहुत सारा कंट्रोल छोड़ना पड़ता है। आप एक-दूसरे की ज़िंदगी शेयर करते हैं।”

एक्टर से यह भी पूछा गया कि क्या शादी का फैसला उनके निजी स्वभाव की वजह से लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके इस फैसले के पीछे कोई खास घटना या वजह नहीं थी और वे हमेशा से ऐसे ही रहे हैं, बचपन से ही।

उन्होंने बच्चे गोद लेने की बात भी खारिज कर दी

अक्षय से पूछा गया कि अगर वे शादी नहीं करते हैं तो क्या वे बच्चे गोद लेने के बारे में सोचेंगे। उन्होंने वैसा ही जवाब दिया, यह कहते हुए कि वे बच्चों की परवरिश के साथ आने वाली जीवनशैली में बदलाव भी नहीं चाहते। “मैं उस ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। अपनी ज़िंदगी शेयर करने के लिए। चाहे शादी हो या बच्चे। वह भी आपकी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल देता है।

आपके लिए जो चीजें ज़रूरी होती हैं, वे कम जरूरी हो जाती हैं, क्योंकि बच्चा सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। उस तरह के बदलाव ज़िंदगी में आते हैं… और अपनी ज़िंदगी में उस तरह के बदलाव करना मैं नहीं चाहता। मैं समझौता करने को तैयार नहीं हूं। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी मैं ऐसा करने को तैयार होऊंगा।”

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ के बाद, अक्षय खन्ना ‘इक्का’ में नज़र आए। उनका अगला प्रोजेक्ट ‘महाकाली’ है, जो प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स का हिस्सा है। अक्षय इसमें शुक्राचार्य का किरदार निभा रहे हैं और इसकी पहली झलक 24 अगस्त, 2026 को दिखाई जाएगी।

1.6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ देखकर आप भी होंगे हैरान, लेकिन 25 साल के इस युवा की असली टेंशन कुछ और है

25 साल की उम्र में जहां ज्यादातर युवा करियर की शुरुआत और कमाई बढ़ाने की कोशिश में जुटे होते हैं, वहीं एक टियर-2 शहर के युवा उद्यमी ने करीब ₹1.6 करोड़ की नेटवर्थ बना ली है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतनी संपत्ति बनाने के बाद भी उसकी चिंता खत्म नहीं हुई। अब उसका सवाल है- पैसा कमाने के बाद उसे सही जगह कैसे लगाया जाए और अगला लक्ष्य क्या हो?

18 की उम्र में शुरू हुई कमाई की कहानी

इस युवा की आर्थिक यात्रा 18 साल की उम्र में freelancing से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे उसने Instagram पर theme pages बनाए और इन्हीं पेजों को आगे चलकर अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस में बदल दिया। आज उसकी कमाई का मुख्य जरिया यही बिजनेस है। हालांकि, बिजनेस से होने वाली आय तय नहीं रहती और समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।

करोड़ों की संपत्ति, कई जगह फैला निवेश

Reddit के r/personalfinanceindia पर अपनी कहानी शेयर करते हुए 25 वर्षीय उद्यमी ने अपने निवेश का पूरा ब्योरा बताया। उसके पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय शेयरों का है। उसके मुताबिक, करीब ₹85 लाख भारतीय इक्विटी, ₹7.5 लाख अमेरिकी शेयरों और ₹5 लाख म्यूचुअल फंड्स में लगे हैं। इसके अलावा ₹5 लाख Sovereign Gold Bonds और ₹2 लाख Gold ETFs में निवेश किए गए हैं। रियल एस्टेट में करीब ₹15 लाख और क्रिप्टोकरेंसी में ₹3 लाख लगाए गए हैं।

₹40-45 लाख कैश में, लेकिन निवेश को लेकर उलझन

सबसे दिलचस्प हिस्सा उसके पास मौजूद नकदी है। करीब ₹40-45 लाख लंबे समय से बैंक अकाउंट में पड़े हैं। वह खुद भी मानता है कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ सेविंग अकाउंट में रखना शायद पैसे का सबसे बेहतर इस्तेमाल नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि वह सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करना चाहता कि पैसा कहीं लगा हुआ दिखे। वह ऐसी जगह तलाश रहा है, जहां जोखिम और संभावित रिटर्न उसके हिसाब से संतुलित हों।

अब लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं

युवा उद्यमी के मुताबिक, उसका अगला लक्ष्य बिजनेस को आगे बढ़ाने के साथ अपनी संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर फैलाना है। वह किसी एक बिजनेस या एसेट पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता। आखिरकार उसकी नजर FIRE यानी Financial Independence, Retire Early पर है। यानी वह ऐसी आर्थिक स्थिति बनाना चाहता है, जहां भविष्य में रोजी-रोटी के लिए काम करना मजबूरी न रहे।

₹1.6 करोड़ के बाद भी Reddit पर मांगी सलाह

अपनी स्थिति बताते हुए उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि अगर कोई 25 साल की उम्र में करीब ₹1.5-2 करोड़ की नेटवर्थ और ₹40-45 लाख कैश के साथ हो, तो उसे आगे किस दिशा में ध्यान देना चाहिए। पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प रहीं। कई यूजर्स ने उसकी उपलब्धि की तारीफ की और कहा कि वह अपनी उम्र के ज्यादातर लोगों से काफी आगे है। एक यूजर ने उसके काम के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह Instagram पर कई theme pages का मालिक है, जिनमें meme pages भी शामिल हैं।

लोगों ने दी निवेश से ज्यादा सुरक्षा की सलाह

कुछ Reddit यूजर्स का ध्यान उसके निवेश से ज्यादा insurance पर गया। एक यूजर ने term insurance बढ़ाने और पर्याप्त health insurance लेने की सलाह दी। साथ ही emergency fund तैयार रखने की बात भी कही गई। एक अन्य यूजर ने real estate में धीरे-धीरे कदम रखने और rental income बनाने का सुझाव दिया।

असली कहानी ₹1.6 करोड़ की नहीं, अगले फैसले की है

इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू सिर्फ यह नहीं है कि 25 साल की उम्र में किसी ने कितनी संपत्ति बना ली। असली सवाल यह है कि जब कमाई एक मुकाम तक पहुंच जाए, तो उसके बाद सही फैसले कैसे लिए जाएं?

8 इंटरव्यू में रिजेक्शन के बाद टेक प्रोफेशनल ने अपनाई ‘चीट शीट’ वाली तरकीब, फिर मिले 2 जॉब ऑफर

Bobby Deol: ‘मैं इससे बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रहा हूं’, ‘एनिमल’ और ‘आश्रम’ की सक्सेस के बाद विलेन रोल मिलने पर बोले बॉबी देओल

Bobby Deol: एक्टर बॉबी देओल अपने करियर की दूसरी पारी में हैं। 90 और 2000 के दशक में इस बॉलीवुड स्टार ने रोमांटिक हीरो समेत कई लीड रोल निभाए और खूब सफलता पाई। लेकिन पिछले दशक में उनकी वापसी के बाद से उन्हें ज्यादातर दमदार विलेन के रोल में देखा गया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में बॉबी ने माना कि उन्हें एक ही तरह के रोल में बांध दिया गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे इस छवि को तोड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

बॉबी देओल ने विलेन के तौर पर अपनी छवि में बंधे रहने पर बात की

शनिवार को दिल्ली में जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान बॉबी ने कहा कि उन्हें विलेन वाले रोल बहुत मिल रहे हैं, लेकिन वह इस छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। एक्टर ने कहा, “अगर कोई एक्टर किसी खास तरह के रोल में सफल हो जाता है, तो उसे वैसे ही रोल मिलते रहते हैं। इंडस्ट्री में ऐसा ही होता है।”

बॉबी ने प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ से वापसी की, जिसमें उन्होंने एक ठग और अपराधी का रोल निभाया, जो खुद को भगवान का दूत बताने वाला बाबा बनकर लोगों को धोखा देता था। इसके बाद उन्हें 2023 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘एनिमल’ में विलेन का रोल मिला। तब से, बॉबी ‘हरि हर वीरा मल्लू’, ‘कंगुवा’, ‘डाकू महाराज’, ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ जैसी फिल्मों में विलेन का रोल निभा चुके हैं।

‘मैं इसे तोड़ने की पूरी कोशिश करता हूं’

बॉबी ने कहा कि यह बहुत स्वाभाविक है कि जब कोई एक्टर किसी खास रोल में सफल हो जाता है, तो बाद में उसे उसी तरह के रोल मिलने लगते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि अब वह अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स करने की कोशिश कर रहे हैं। 57 साल के एक्टर ने PTI को बताया, “मैं उस छवि से बाहर निकलने की पूरी कोशिश करता हूं। मैंने हाल ही में ‘बंदर’ नाम की एक फिल्म की है, जो बहुत अलग थी। विलेन के रोल में भी अलग-अलग तरह के विलेन होते हैं, जिनके अलग-अलग शेड्स होते हैं। इसलिए मुझे ऐसे रोल निभाने में मज़ा आता है। मैं कुछ वेब सीरीज़ भी करने वाला हूँ जो अलग होंगी।”

अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ में उन्होंने एक उम्रदराज़ स्टार का रोल निभाया, जिस पर उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड ने रेप का आरोप लगाया था। यह फिल्म जून में सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और क्रिटिक्स ने इसकी तारीफ़ की थी। इस साल बॉबी के दो और प्रोजेक्ट्स – ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ – में भी उन्होंने विलेन का रोल निभाया।

बॉबी देओल की आने वाली फिल्में

बॉबी जल्द ही प्राइम वीडियो की सीरीज़ ‘तीन कौवे’ में नज़र आएंगे। इस स्पाई ड्रामा की शूटिंग अभी चल रही है और इसमें सिद्धांत गुप्ता, फातिमा सना शेख और पावेल गुलाटी भी अहम भूमिकाओं में होंगे।