‘मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 4.7 करोड़ चुराए हैं’, टेक कर्मचारी ने 2 साल तक कुछ काम न करने पर कही बड़ी बात

एक टेक कर्मचारी ने यह दावा करके इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया है कि उसने लगभग दो साल तक काम पर लगभग कुछ भी न करते हुए 275,000 डॉलर (करीब 2.6 करोड़ रुपये) की सालाना सैलरी कमाई। कर्मचारी का अनुमान है कि इस दौरान उसे 500,000 डॉलर (लगभग 4.7 करोड़ रुपये) से ज्यादा का भुगतान किया गया, जबकि उसके पास लगभग कोई जिम्मेदारी नहीं थी।

रेडिट पोस्ट वायरल

रेडिट (Reddit) पर एक पोस्ट में उसने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक में एक बड़ा प्रमोशन कैसे एक अप्रत्याशित मोड़ पर आ गया। कंपनी में अचानक हुए पुनर्गठन (restructuring) के कारण उसके पास न तो कोई सार्थक काम बचा और न ही उसे मैनेजमेंट से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले।

रेडिट के ‘r/corporate’ सबरेडिट पर अपना अनुभव साझा करते हुए कर्मचारी ने कहा- “मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 500,000 डॉलर से ज्यादा चुरा लिए हैं।” उसने बताया कि उसने कंपनी में लगभग एक दशक बिताया और इस दौरान पांच अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। हालांकि 2025 की शुरुआत में जो उसके करियर का एक अहम पड़ाव होना चाहिए था, वह अनिश्चितता के एक लंबे दौर में बदल गया।

रेडिट यूजर के अनुसार- उसे एक नई टीम में शामिल होने का ऑफर मिला, जो उसके करियर में एक बड़ा कदम था। लेकिन जिस दिन उसने नई टीम जॉइन की उसी दिन कंपनी में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन हुआ, जिसके चलते वे मैनेजर और डायरेक्टर दोनों ही कंपनी छोड़कर चले गए, जिन्होंने उसे काम पर रखा था।

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इस मौके के लिए अपने परिवार को वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क शहर ले जाने के बाद उन्होंने एक-दो सप्ताह इंतजार करने का फैसला किया कि नई लीडरशिप के तहत टीम कैसे काम करेगी। हालांकि हालात वैसे नहीं सुधरे जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने लिखा- “तो वहां मैं था। साल के लगभग 275,000 डॉलर कमा रहा था एक ऐसी टीम में जहां कोई जिम्मेदारी या मैनेजमेंट का कोई दिशा-निर्देश नहीं था। बस कुछ नहीं कर रहा था।”

ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे

कर्मचारी ने बताया कि उनका अनुभव सिर्फ कम काम या कभी-कभार होने वाली मीटिंग्स से कहीं बढ़कर था। उन्होंने बताया कि वे अपने काम के घंटों में ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे। न्यूयॉर्क शहर के मशहूर रेस्तरां ढूंढ़ते थे और मैनहट्टन में घूमते-फिरते थे। भले ही यह सुनने में एक बहुत ही शानदार स्थिति लगे, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी उद्देश्य का न होना धीरे-धीरे उनके लिए निराशा का कारण बन गया।

रेडिट यूजर ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने सार्थक काम पाने और बिजनेस को बेहतर ढंग से समझने के लिए कई कोशिशें कीं। हालांकि उनका कहना है कि नए मैनेजर की तरफ से कोई खास दिशा-निर्देश नहीं मिले, जिसकी वजह से वे अपने काम से पूरी तरह अलग-थलग महसूस करने लगे।

आखिरकार उसने काम खोजने की नियमित कोशिशें बंद कर दीं और ज्यादातर दिन घर पर ही रहने लगा। उसने बताया कि वह अपने अपार्टमेंट के जिम में समय बिताता था, तरह-तरह के नाश्ते तैयार करता था, बालकनी में बैठकर शहर के नजारे देखते हुए कॉफी पीता था और कॉर्पोरेट जीवन की बेतुकी बातों के बारे में सोचता रहता था।

इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के प्रति उसके नजरिए को भी बदल दिया। उसने कहा कि उसे इस बात से काफी हैरानी हुई कि कोई कर्मचारी इतने लंबे समय तक बिना किसी काम (बिना किसी असाइनमेंट) के रह सकता है और फिर भी उसे अच्छी-खासी सैलरी मिलती रहती है।

टेक कर्मचारी का कहना है कि आखिरकार उसे एक बेहतर रोल मिल गया

इन अजीब हालात के बावजूद कर्मचारी ने तय किया कि वह इस अनचाहे ब्रेक का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगा। कई महीनों तक इंटरव्यू देने के बाद उसे हाल ही में उसी कंपनी में एक और पद मिल गया, जिसे उसने अपने करियर में एक बड़ी तरक्की बताया। हालांकि वह इस नए मौके को लेकर उत्साहित था, लेकिन लगभग दो साल तक बिना किसी काम के रहने के बाद फिर से एक चुनौतीपूर्ण रोल में लौटना काफी मुश्किल साबित हुआ।

उन्होंने लिखा, “मुझे यहां आए अभी सिर्फ डेढ़ हफ्ता ही हुआ है और मुझे लगभग 2 साल तक कोई काम न करने का असर अभी से महसूस होने लगा है। मुझे लग रहा है कि मैं काफी पीछे छूट गया हूं और मेरी कार्यक्षमता भी काफी कम हो गई है।” फिर भी उन्होंने कहा कि वे खुश हैं कि उन्हें एक ऐसी भूमिका मिल गई है, जहां वे सार्थक योगदान दे सकते हैं और फिर से कुछ नया सीख सकते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बिना ज्यादा काम किए सैलरी लेने पर कोई गिल्ट महसूस हुआ तो उन्होंने माना कि शुरुआत में उन्हें लगा जैसे वे कंपनी पर एक ‘बेवजह का खर्च’ बन गए हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि इससे पहले एक सेल्सपर्सन के तौर पर वे कंपनी के लिए काफी रेवेन्यू (कमाई) लाते थे।

हालांकि समय के साथ उनका यह अपराधबोध गुस्से में बदल गया और फिर उन्होंने स्थिति को स्वीकार कर लिया। आखिरकार उन्होंने इस समय का भरपूर फायदा उठाने का फैसला किया—अपनी पत्नी के साथ अच्छा समय बिताया, न्यूयॉर्क के अलग-अलग रेस्तरां में खाना चखा और खुद को एक बहुत जरूरी मानसिक ब्रेक दिया।

उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी नौकरियों के बारे में एक अलग नजरिया दिया है। यहां कर्मचारी कभी-कभी कंपनी की व्यवस्था की कमियों के बीच ऐसे छिप सकते हैं कि किसी को पता ही नहीं चलता कि उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं।

पोस्ट के अंत में उन्होंने पाठकों को अपने सवाल पूछने के लिए इनवाइट किया। बाद में एक एडिट में उन्होंने अपने जैसे अनुभव साझा करने वाले लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी कहानियां सुनकर उन्हें अपनी स्थिति के बारे में बेहतर महसूस हुआ।

रेडिट यूजर्स ने अपने मिलते-जुलते अनुभव साझा किए

इस कर्मचारी की कहानी पढ़ने के बाद कई रेडिट यूजर्स ने अपने विचार साझा किए। कुछ लोगों को इस स्थिति से जलन हुई तो कुछ ने इस बात पर चिंता जताई कि कोई सार्थक काम न होने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक यूजर ने कहा, “न्यूयॉर्क में इधर-उधर घूमना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन अगर मेरे हफ्ते में 2 दिन से ज्यादा समय खाली निकल जाए तो मैं पागल होने लगता हूं।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “मैं खुद टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं और पूरे दिन व्यस्त रहता हूं, इसलिए आप मेरी ‘ड्रीम जॉब’ जी रहे हैं! बस फर्क इतना है कि अगर मैं आपकी जगह होता तो उस खाली समय का इस्तेमाल अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने और नए सर्टिफिकेशन लेने में करता।”

एक तीसरे यूजर ने कहा, “मैं यहां कुछ पूछने नहीं आया हूं, बस इतना कहना चाहता हूं कि ‘मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है!’ कुछ समय तक तो मजा आता है, लेकिन फिर यह निराशाजनक लगने लगता है। मुझे अभी एक प्रमोशन मिला है और मैं थोड़ा घबराया हुआ हूं क्योंकि अब मुझे सच में काम करना पड़ेगा, लेकिन साथ ही मुझे कुछ नया सीखने और असली काम करने का मौका भी मिलेगा! और हां, अब यह पूरी तरह से रिमोट (घर से काम) नहीं है, बल्कि हाइब्रिड है, जिसे लेकर मैं काफी उत्साहित हूं! और सबसे अच्छी बात यह है कि मैं यूरोप जा रहा हूं।”

Subhash Ghai: आज के समय में एक्टर्स आर्ट से ज्यादा पैसों को अहमियत देते हैं, सुभाष घई ने पुराने दिनों में स्टार्स की फीस को लेकर की बात

Subhash Ghai: सुभाष घई ने 1980 और 90 के दशक में ‘खलनायक’, ‘हीरो’, ‘परदेस’ और ‘ताल’ जैसी कई बेहद सफल फिल्मों का निर्देशन किया है। अब उन्होंने इस बात पर अपनी प्रतिक्रिया दी है कि आज के कलाकार अपने काम से ज्यादा पैसे को अहमियत देते हैं। ‘स्क्रीन’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आए इस बदलाव के बारे में बात की।

सुभाष घई ने क्या कहा

निर्देशक ने कहा- “आज के दौर में कमर्शियल पहलू (पैसा कमाने की होड़) हावी हो गया है। आज के कलाकार ज्यादा पैसा कमाना चाहते हैं, जबकि कला पर उनका ध्यान कम है। हमारे समय में कलाकार असल में ‘कलाकार’ बनना चाहते थे और उनका मानना ​​था कि पैसा तो अपने आप आ ही जाएगा। अभिनेता ने फिल्म बनाते समय एक स्पष्ट रचनात्मक दृष्टिकोण होने के महत्व के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “हम जो फिल्में बनाते हैं, उन्हें हर हिंदुस्तानी अपने पूरे परिवार के साथ आराम से देख सकता है।”

फिल्ममेकर ने कहा कि पहले कोई भी सिर्फ पैसे के लिए काम नहीं करता था। वे किसी फिल्म को उसके निर्देशक, कहानी और अपने किरदार को देखकर साइन करते थे। मेरी फिल्मों में काम करने वाले ज्यादातर सितारों ने अपनी फीस का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा ही लिया, क्योंकि उन्हें अपने किरदार और कहानी में दिलचस्पी थी।”

उन्होंने आगे कहा- “आज अगर आप किसी कलाकार से कहें कि वह अपनी फीस का सिर्फ 40 प्रतिशत हिस्सा ले तो उसके चार मैनेजर बीच में आ जाएंगे और 3 पीआर (PR) वाले आकर उसे एक बड़ा सेलिब्रिटी बताकर बचाव करने लगेंगे। आज कलाकारों के पास फिल्मों के अलावा पैसे कमाने के कई और जरिया भी हैं। लेकिन ये सब कुछ समय के लिए ही होते हैं। 3-4 साल बाद इनका क्रेज खत्म हो जाता है। फिर वे इंडस्ट्री से बाहर हो जाते हैं और उनकी जगह कोई और ले लेता है।”

सलमान खान का कमेंट

‘कॉफी विद करण’ सीजन 9 में सलमान खान ने भी फिल्म इंडस्ट्री के इस मुद्दे पर बात की थी। करण जौहर ने बॉलीवुड के पुराने सितारों की लगातार बनी हुई लोकप्रियता का जिक्र करते हुए बताया कि 2026 में अक्षय कुमार, अजय देवगन, शाहरुख खान और सलमान खान जैसे बड़े नामों वाली फिल्में सफल रहीं। उन्होंने कहा कि दर्शकों को अपनी ओर खींचने की उनकी क्षमता यह दिखाती है कि उनकी पीढ़ी आज भी प्रासंगिक (relevant) है। करण की बात का जवाब देते हुए सलमान ने कहा, “हम अपने काम में दिलचस्पी रखते हैं। हम घर से बाहर निकलकर अच्छा काम करना चाहते हैं। कभी-कभी यह सही हो जाता है तो कभी-कभी नहीं।”

अभिनेता ने फिल्म बनाते समय एक स्पष्ट क्रिएटिव नजरिए होने के महत्व के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा- “हम जो फिल्में बनाते हैं, उन्हें हर हिंदुस्तानी अपने पूरे परिवार के साथ आराम से देख सकता है।”

UPSC CRT 2026: एनसीटी के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पद के लिए यूपीएससी सीआरटी पोस्टपोन, 828 पदों के लिए 9 जनवरी को होगी परीक्षा

UPSC CRT 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल के पदों के लिए कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट (CRT) को पोस्टपोन कर दिया है। यह परीक्षा पहले 1 नवंबर, 2026 को आयोजित की जानी थी। लेकिन 16 अक्टूबर, 2026 के एक करिजेंडम नोटिस के अनुसार, अब इस परीक्षा का आयोजन 9 जनवरी, 2027 को होगा।

यूपीएससी सीआरटी 2026 सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक सुबह के सत्र में होगी। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 828 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। बदला हुआ शेड्यूल प्रिंसिपल के 124 पदों और वाइस-प्रिंसिपल के 704 पदों पर भर्ती के लिए लागू होगा। के लिए के लिए भर्ती पर लागू होता है।

UPSC CRT 2026: पदों का विवरण

भर्ती प्रक्रिया में ये पद शामिल हैं :

प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 124 पद।

वाइस-प्रिंसिपल : एनसीटी दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में 704 पद। इन पदों को विज्ञापन संख्या 51/2026 के तहत नोटिफाई किया गया था।

UPSC CRT 2026: संशोधित परीक्षा तारीख

इवेंट डिटेल्स

नियुक्ति करने वाली संस्था : यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन

परीक्षा : कंबाइंड रिक्रूटमेंट टेस्ट

पहले की परीक्षा तारीख : 1 नवंबर, 2026

संशोधित परीक्षा तारीख : 9 जनवरी, 2027

परीक्षा का समय : सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक

कुल पद 828

परीक्षार्थियों को आगे क्या करना चाहिए?

कैंडिडेट को संशोधित तारीख पर ध्यान देना चाहिए और नए कार्यक्रम के हिसाब से तैयारी करनी चाहिए। उन्हें भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आगे के नोटिस और अपडेट के लिए संघ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट, upsc.gov.in भी चेक करनी चाहिए। करिजेंडम के अनुसार परीक्षा की तारीख 1 नवंबर, 2026 से बदलकर 9 जनवरी, 2027 कर दी गई है। नोटिस में भर्ती विवरण में किसी और बदलाव का जिक्र नहीं है।

प्रिंसिपल के पदों का वर्गों में बंटवारा

दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग में प्रिंसिपल के कुल 124 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग के लिए 69 पद निर्धारित किए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 11 पद हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए 18 रिक्तियां हैं। अनुसूचित जाति (SC) के लिए 16 पद और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 10 पद निर्धारित हैं। इस तरह सभी श्रेणियों को मिलाकर प्रिंसिपल के कुल 124 पद हैं।

वाइस प्रिंसिपल के 704 पद 

यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती में सबसे ज्यादा रिक्तियां वाइस प्रिंसिपल के पदों पर हैं। वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों में से सामान्य वर्ग के लिए 287 पद निर्धारित किए गए हैं। EWS वर्ग के लिए 71 रिक्तियां हैं। ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 189 पद रखे गए हैं। वहीं एससी वर्ग के लिए 103 और एसटी वर्ग के लिए 54 पद निर्धारित किए गए हैं। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर वाइस प्रिंसिपल के कुल 704 पदों पर भर्ती की जाएगी।

कैसे होगा चयन?

इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। यूपीएससी सीआरटी 2026 भर्ती परीक्षा के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन भी किया जाएगा। इस दौरान उम्मीदवारों के सभी जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। सभी निर्धारित चरण पूरे होने के बाद अंतिम चयन किया जाएगा।

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कौन हैं केटी जकारिया, जिन्हें ट्रंप ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाया?

Katie Zacharia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया का कार्यकाल कुछ ही दिनों में खत्म हो गया। ट्रंप ने हाल ही में अचानक उनकी नियुक्ति का ऐलान किया था, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने ट्रंप के पहले कार्यकाल की यादें ताजा कर दी हैं, जब व्हाइट हाउस में अधिकारियों को बार-बार बदला जाता था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों ने जकारिया के पद छोड़ने की पुष्टि की। इनमें से एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पद से हटा दिया गया है, जबकि दूसरे ने बताया कि वह अब इस जिम्मेदारी से अलग हो रही हैं।

केटी जकारिया को पद से हटाने से पहले के पांच दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान उन्हें कई असहज सवालों का सामना करना पड़ा। सवाल पूछने वालों में डोनाल्ड ट्रंप के कुछ प्रमुख मीडिया समर्थक भी शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि जकारिया को पद से हटाए जाने की पुष्टि होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें इस नौकरी पर दोबारा विचार करने की सलाह दी थी।

व्हाइट हाउस में केटी जकारिया का कार्यकाल कैसे लड़खड़ा गया

ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को जकारिया की नियुक्ति की घोषणा की थी। उन्हें कैरोलीन लेविट की जगह नियुक्त किया गया था, जो अब तक की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव थीं और कई सालों से ट्रम्प के करीबी लोगों में शामिल रही थीं।

केटी जकारिया रूढ़िवादी विचारों वाली राजनीतिक टिप्पणीकार हैं। ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) की मूल कंपनी ‘ट्रम्प मीडिया’ के संचार विभाग में काम कर चुकी थीं। इसके अलावा, ट्रम्प के दूसरे प्रशासन के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ में भी काम किया था।

हालांकि, मंगलवार को जब वह पहली बार व्हाइट हाउस प्रेस कोर के सामने आईं, तो तुरंत ही उन पर सवाल उठने लगे।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ब्रीफिंग के दौरान जकारिया असहज दिखीं। वे रुक-रुक कर बोल रही थीं और ट्रम्प की उपलब्धियों का जिक्र कर रही थीं। उन्होंने केवल तीन पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए-ये सभी पत्रकार ऐसे मीडिया संस्थानों से थे जिनका झुकाव रूढ़िवादी विचारधारा की ओर था या जो ट्रम्प के समर्थक थे। लगभग 14 मिनट बाद उन्होंने बातचीत खत्म कर दी।

बाद में जकारिया ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर इस सेशन को छोटा रखा था, क्योंकि उसी दिन सुबह ट्रम्प को पत्रकारों के सवालों के जवाब देने थे। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाइट हाउस के कर्मचारियों ने उन्हें पहले से पूरी जानकारी (ब्रीफिंग) नहीं दी थी।

इसके बाद, बुधवार और गुरुवार को वे अलास्का, एरिजोना और मोंटाना में ट्रम्प की रैलियों में उनके साथ गईं, लेकिन उन्होंने कोई और प्रेस ब्रीफिंग नहीं की।

हालांकि, पत्रकारों के सामने उनका यह प्रदर्शन उन कई मुद्दों में से सिर्फ एक था, जो उनके छोटे कार्यकाल के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बने रहे।

केटी जकारिया की कानूनी योग्यताओं को लेकर विवाद

जकारिया की प्रोफेशनल बैकग्राउंड पर भी सवाल उठे, खासकर तब जब उन्होंने कुछ रूढ़िवादी टीवी नेटवर्कों पर खुद को वकील बताया।

जकारिया ने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल से पढ़ाई की है, लेकिन वह कैलिफोर्निया की बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। इसके अलावा, उनके पास अमेरिका में वकालत करने के लिए जरूरी कोई अन्य योग्यता भी नहीं थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे पता चले कि वह अमेरिका के किसी भी राज्य या डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में वकील के तौर पर पंजीकृत थीं या उन्हें बार में शामिल किया गया था।

हालांकि, जकारिया ने खुद को ‘वकील’ कहने का बचाव करते हुए कहा कि जब वह कानूनी विश्लेषण देती थीं, तो यह शब्द इस्तेमाल करना सही था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने चीन में वकील के तौर पर काम किया था।

रॉयटर्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “मैंने सभी जरूरी योग्यताओं के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन लॉ (अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कानून) की प्रैक्टिस की है।”

इस विवाद ने उन रूढ़िवादी मीडिया हस्तियों का भी ध्यान खींचा, जो आमतौर पर ट्रम्प प्रशासन का समर्थन करते हैं।

वहीं, फॉक्स न्यूज के होस्ट शॉन हैनिटी, जो लंबे समय से ट्रम्प के सहयोगी रहे हैं, ने सवाल उठाया कि जकारिया ने अपनी योग्यताओं के बारे में खुलकर बात क्यों नहीं की। जब उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वह कैलिफोर्निया बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं, तो हैनिटी ने पूछा, “सीधे यह क्यों नहीं कह दिया कि ‘मैंने पेपरडाइन लॉ स्कूल से पढ़ाई की, फिर करियर का एक अलग रास्ता चुन लिया, और मैंने एक बार बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो पाई’?”

उन्होंने ‘लॉयर’ (वकील) और ‘अटॉर्नी’ (कानूनी प्रतिनिधि) शब्दों के बीच उनके द्वारा किए गए अंतर को भी चुनौती दी और सवाल किया कि उन्होंने सीधे तौर पर यह क्यों नहीं कहा कि उन्होंने कभी वकालत नहीं की है।

जकारिया ने फिर दोहराया कि वह वकील के तौर पर काम नहीं कर रही थीं और न ही कोई कानूनी सलाह दे रही थीं। शुक्रवार को फॉक्स न्यूज के एक अलग इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि उनसे यह कभी नहीं पूछा गया था कि प्रेस सेक्रेटरी बनने से पहले उन्होंने बार परीक्षा पास की है या नहीं।

जकारिया और ट्रम्प, दोनों का यही कहना था कि उन्हें प्रशासन में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि कम्युनिकेशंस (संचार) विभाग में काम करने के लिए रखा गया था।

‘मैं फिर से विचार करने को कहूंगा’: ट्रम्प ने उनके भविष्य पर सवाल उठाए

शुक्रवार तक, जकारिया के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया था। उसी दिन फॉक्स न्यूज चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान, उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति का उन पर अभी भी भरोसा है।

उन्होंने जवाब दिया, “मुझे उम्मीद है कि मैं अपने आस-पास के सभी लोगों का भरोसा और विश्वास जीत सकूंगी।” उन्होंने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि वह व्हाइट हाउस में अपनी अगली प्रेस ब्रीफिंग कब करेंगी।

कुछ घंटों बाद, ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने उन्हें अपने पद पर फिर से विचार करने की सलाह दी थी। जॉर्जिया में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना ​​है कि मीडिया ने जकारिया के साथ अनुचित व्यवहार किया है।

ट्रंप ने कहा, “मैंने उससे कहा, ‘मुझे लगता है कि खुश रहना तुम्हारे लिए बेहतर होगा।'”

“मैंने कहा, ‘सच कहूं तो, अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो मैं फिर से सोचता।’ मैंने कहा, ‘तुम इस बारे में सोच लो, लेकिन मैं तो फिर से विचार करता।'”

ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने उससे पूछा था, “‘केटी, क्या तुम्हें इसकी जरूरत है? मुझे नहीं लगता कि तुम्हें इसकी जरूरत है।'” उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि “उसका जीवन अच्छा रहे,” न कि वह “मीडिया के हाथों बुरी तरह परेशान” हो।

उस समय, राष्ट्रपति ने उन्हें पद से हटाने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि अपनी यात्राओं से लौटने के बाद वे उनके भविष्य पर चर्चा करेंगे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “जब मैं वापस आऊंगा, तो हम बात करेंगे।”

जब उनसे किसी संभावित विकल्प (रिप्लेसमेंट) के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि इस पद के लिए कई लोग इच्छुक हैं।

व्हाइट हाउस में एक जाना-पहचाना फेरबदल, लेकिन जकारिया के लिए आगे क्या?

जकारिया को हटाना उसी तरह के अचानक किए गए बदलावों की वापसी है, जो अक्सर ट्रम्प के पहले कार्यकाल में देखने को मिलते थे, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में ऐसे बदलाव कम ही हुए थे।

उनका कार्यकाल एंथनी स्कारामुची से भी छोटा रहा, जो 2017 में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर के तौर पर सिर्फ 10 दिन तक इस पद पर रहे थे।

उनके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कारामुची ने ‘X’ पर लिखा, “रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मुझे दूसरों के दुख में कोई खुशी नहीं मिलती।”

प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाए जाने के बावजूद, हो सकता है कि जकारिया ट्रम्प प्रशासन को पूरी तरह से न छोड़ें। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें प्रशासन में कोई दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

ABC न्यूज ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि केटी जकारिया को ट्रंप प्रशासन में ही किसी दूसरी जिम्मेदारी में भेजे जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में जल्द ही आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि प्रेस सेक्रेटरी के पद पर जकारिया की जगह कौन लेगा।

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ट्रम्प ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी को हटाया:वकील होने के दावे पर सवाल उठे, पहली ब्रीफिंग में जुबान लड़खड़ाईं थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया को पद से हटा दिया है। जकारिया ने सोमवार को काम शुरू किया था और सिर्फ 5 दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने पद छोड़ दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि जकारिया पद से हट रही हैं। ट्रम्प ने उनसे नौकरी पर दोबारा विचार करने को कहा था। जकारिया के वकील होने की योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा वे अपनी पहली प्रेस ब्रीफिंग सही से नहीं दे पाईं थीं। एक सवाल पर अपने पति को उन्होंने गलती से माय प्रेसिडेंट कह दिया था। जकारिया के पास वकालत का लाइसेंस नहीं मिला ट्रम्प ने जकारिया को प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि उन्होंने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लेकिन उनके पास अमेरिका में वकालत का लाइसेंस होने का सबूत नहीं मिला। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जकारिया ने कहा कि उन्होंने वकालत की परीक्षा पास नहीं की है। अमेरिका में वकील बनने के लिए आमतौर पर परीक्षा पास कर लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जकारिया ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कानून के क्षेत्र में काम करने की बात कही थी, लेकिन कानून की पढ़ाई करना और वकालत का लाइसेंस होना अलग-अलग बातें हैं। जकारिया इससे पहले ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में कम्युनिकेशन सलाहकार थीं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने जून 2026 में यह काम शुरू किया था। इससे पहले वह कुछ समय अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में जनसंपर्क से जुड़ा काम भी कर चुकी थीं। ट्रम्प बोले- मीडिया उन्हें परेशान कर रहा शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जकारिया से पद पर बने रहने के फैसले पर दोबारा सोचने को कहा था। ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने जकारिया से कहा कि उन्हें मीडिया के दबाव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो नौकरी छोड़ सकती हैं। ट्रम्प ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मीडिया के केटी को परेशान करने की वजह से उन्हें इतना कष्ट उठाना चाहिए। शायद यह नौकरी जकारिया के लिए सही नहीं है। पहली ब्रीफिंग के बाद भी हुई आलोचना जकारिया ने 13 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पहली बार प्रेस ब्रीफिंग की थी। जो 14 मिनट चली। उनके जवाबों की बहुत आलोचना हुई थी। करोलिन लेविट की जगह मिली थी जिम्मेदारी जकारिया को करोलिन लेविट की जगह व्हाइट हाउस का प्रेस सेक्रेटरी बनाया गया था। ट्रम्प ने उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए उनकी तारीफ की थी। इससे पहले ट्रम्प के पहले कार्यकाल में एंथनी स्कारामुची ने व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में 10 दिन काम किया था। इस तरह जकारिया का कार्यकाल उनसे भी छोटा रहा। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में इन महिलाओं की भी कुर्सी गई क्रिस्टी नोएम – गृह सुरक्षा मंत्री: मार्च 2026 में ट्रम्प ने उन्हें पद से हटाया। विभाग के कामकाज को लेकर आलोचना हुई थी। पैम बॉन्डी – अटॉर्नी जनरल: अप्रैल 2026 में हटाई गईं। एपस्टीन फाइलों और कामकाज को लेकर सवाल उठे थे। लॉरी चावेज-डीरिमर – श्रम मंत्री: अप्रैल 2026 में निजी क्षेत्र में जाने के लिए पद छोड़ा। तुलसी गबार्ड – राष्ट्रीय खुफिया निदेशक: जून 2026 में इस्तीफा दिया। उन्होंने पति की बीमारी को कारण बताया। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी को हटाया:वकील होने के दावे पर सवाल उठे, पहली ब्रीफिंग में जुबान लड़खड़ाईं थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी नई प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया को पद से हटा दिया है। जकारिया ने सोमवार को काम शुरू किया था और सिर्फ 5 दिन बाद, 16 अक्टूबर को उन्होंने पद छोड़ दिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि जकारिया पद से हट रही हैं। ट्रम्प ने उनसे नौकरी पर दोबारा विचार करने को कहा था। जकारिया के वकील होने की योग्यता पर सवाल उठे थे। इसके अलावा वे अपनी पहली प्रेस ब्रीफिंग सही से नहीं दे पाईं थीं। एक सवाल पर अपने पति को उन्होंने गलती से माय प्रेसिडेंट कह दिया था। जकारिया के पास वकालत का लाइसेंस नहीं मिला ट्रम्प ने जकारिया को प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान करते हुए कहा था कि उन्होंने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। लेकिन उनके पास अमेरिका में वकालत का लाइसेंस होने का सबूत नहीं मिला। गुरुवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जकारिया ने कहा कि उन्होंने वकालत की परीक्षा पास नहीं की है। अमेरिका में वकील बनने के लिए आमतौर पर परीक्षा पास कर लाइसेंस लेना जरूरी होता है। जकारिया ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी कानून के क्षेत्र में काम करने की बात कही थी, लेकिन कानून की पढ़ाई करना और वकालत का लाइसेंस होना अलग-अलग बातें हैं। जकारिया इससे पहले ट्रम्प की सोशल मीडिया कंपनी ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में कम्युनिकेशन सलाहकार थीं। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने जून 2026 में यह काम शुरू किया था। इससे पहले वह कुछ समय अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में जनसंपर्क से जुड़ा काम भी कर चुकी थीं। ट्रम्प बोले- मीडिया उन्हें परेशान कर रहा शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जकारिया से पद पर बने रहने के फैसले पर दोबारा सोचने को कहा था। ट्रम्प के मुताबिक, उन्होंने जकारिया से कहा कि उन्हें मीडिया के दबाव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो नौकरी छोड़ सकती हैं। ट्रम्प ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मीडिया के केटी को परेशान करने की वजह से उन्हें इतना कष्ट उठाना चाहिए। शायद यह नौकरी जकारिया के लिए सही नहीं है। पहली ब्रीफिंग के बाद भी हुई आलोचना जकारिया ने 13 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पहली बार प्रेस ब्रीफिंग की थी। जो 14 मिनट चली। उनके जवाबों की बहुत आलोचना हुई थी। करोलिन लेविट की जगह मिली थी जिम्मेदारी जकारिया को करोलिन लेविट की जगह व्हाइट हाउस का प्रेस सेक्रेटरी बनाया गया था। ट्रम्प ने उनकी नियुक्ति का ऐलान करते हुए उनकी तारीफ की थी। इससे पहले ट्रम्प के पहले कार्यकाल में एंथनी स्कारामुची ने व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर के रूप में 10 दिन काम किया था। इस तरह जकारिया का कार्यकाल उनसे भी छोटा रहा। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में इन महिलाओं की भी कुर्सी गई क्रिस्टी नोएम – गृह सुरक्षा मंत्री: मार्च 2026 में ट्रम्प ने उन्हें पद से हटाया। विभाग के कामकाज को लेकर आलोचना हुई थी। पैम बॉन्डी – अटॉर्नी जनरल: अप्रैल 2026 में हटाई गईं। एपस्टीन फाइलों और कामकाज को लेकर सवाल उठे थे। लॉरी चावेज-डीरिमर – श्रम मंत्री: अप्रैल 2026 में निजी क्षेत्र में जाने के लिए पद छोड़ा। तुलसी गबार्ड – राष्ट्रीय खुफिया निदेशक: जून 2026 में इस्तीफा दिया। उन्होंने पति की बीमारी को कारण बताया। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…

Saif Ali Khan: पिता से मजाक करना इब्राहिम को पड़ा भारी, सैफ अली खान बेटे को किया ऐसा रोस्ट फैंस की छूटी हंसी

Saif Ali Khan: सैफ अली खान आखिरकार इंस्टाग्राम पर डेब्यू कर चुके हैं। उनकी पहली पोस्ट ने ही फैंस के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। बीते दिनों उन्होंने पटौदी लाइब्रेरी के पास निकलवाईं तस्वीरें शेयर करके इंस्टाग्राम पर कदम रखा। इन तस्वीरों ने काफी चर्चा बटोरी। यूजर्स की तरह उनके बेटे और एक्टर इब्राहिम अली खान को भी यकीन नहीं हुआ कि उनके पिता इंस्टाग्राम पर आ गए हैं। दोनों के बीच की इस मजेदार नोकझोंक ने सबका ध्यान खींच लिया है।

इब्राहिम अपने पिता को इस प्लेटफॉर्म पर देखकर हैरान रह गए और पूछा, “क्या ये आप हैं, अब्बा? नहीं ना?” जवाब में सैफ ने इब्राहिम की बचपन की एक पुरानी फोटो शेयर की और पूछा कि क्या इसमें दिख रहा छोटा बच्चा मई 2008 में पैदा हुआ इब्राहिम है। इब्राहिम ने भी इस मजाक में साथ देते हुए कहा, “शायद हां।”

उनकी यह मजेदार बातचीत देखकर कई लोग हंस पड़े। पिता-बेटे की इस जोड़ी को ऑनलाइन एक-दूसरे के साथ मजाक करते देखना लोगों को बहुत अच्छा लगा। ‘एले’ (Elle) के साथ एक पुराने इंटरव्यू में इब्राहिम ने बताया था कि वह अपने माता-पिता सैफ अली खान और अमृता सिंह से क्या सीखना या अपनाना चाहते हैं।

इब्राहिम ने कहा, “सच कहूं तो, मुझे उनके शानदार करियर से कुछ भी नहीं चाहिए। मैं एक एक्टर के तौर पर अपना रास्ता खुद बनाना चाहता हूं। शायद मेरे पिता का नेशनल अवार्ड और मेरी मां का डेब्यू – बस इतना ही।”

इब्राहिम अली खान ने अपनी फैशन पसंद के बारे में भी बात की और बताया कि कैसे उनके पिता, सैफ अली खान, उनके स्टाइल को प्रभावित करते हैं। उनका मानना ​​है कि उनके पिता के कपड़े पहनने का अंदाज एकदम अलग है। इसलिए उनकी नकल करने का कोई मतलब नहीं बनता। हालांकि सैफ की कुछ फैशन पसंदों का इब्राहिम पर असर पड़ा है, जैसे कि जींस, बंदाना, कुर्ते और जैकेट।

साथ ही इब्राहिम ने यह भी कहा कि उन्हें थोड़े मॉडर्न कपड़े पहनना ज्यादा पसंद है। उन्होंने यह भी बताया कि कभी-कभी वह सैफ की टी-शर्ट और बंदाना उधार ले लेते हैं।

जेलेंस्की बोले- रूस की तेल रिफाइनरियों पर फिर हमले करेंगे:ट्रम्प की बात नहीं मानेंगे, अमेरिका का पुतिन से डीजल खरीदने का फैसला गलत

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर फिर हमले करने का ऐलान किया है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हमले रोकने की अपील मानने से इनकार कर दिया। जेलेंस्की ने अमेरिका के रूस से डीजल खरीदने के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि इससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए पैसा मिलेगा। उन्होंने ने गुरुवार को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा, “अब बहुत हो चुका।” उन्होंने यह नहीं बताया कि रूसी रिफाइनरियों पर हमले कब शुरू होंगे। ट्रम्प की अपील पर यूक्रेन ने रोके थे हमले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 11 अक्टूबर को रूस और यूक्रेन के बीच एनर्जी सीजफायर का ऐलान किया था। उन्होंने दोनों देशों से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की अपील की थी। यूक्रेन ने इस अपील के बाद रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोक दिए थे। हालांकि, यूक्रेन का आरोप है कि रूस ने उसके बिजलीघरों और बिजली सप्लाई करने वाले दूसरे ठिकानों पर हमले जारी रखे। वहीं रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दावा किया था कि यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों पर हमले कभी बंद ही नहीं किए थे। यूक्रेन का कहना है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति की अपील का पालन किया। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तेल ठिकानों पर यूक्रेन के हमलों को ट्रम्प के लिए सीधी चुनौती बताया था। अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने का समझौता किया ट्रम्प ने पिछले हफ्ते रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ आने वाले महीनों में लाखों टन डीजल खरीदने का समझौता करने का ऐलान किया था। इसके बाद अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूस से डीजल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटा दीं। ये प्रतिबंध 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद लगाए गए थे, ताकि पुतिन को युद्ध के लिए मिलने वाला पैसा कम किया जा सके। जेलेंस्की ने इस समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि एक तरफ यूक्रेन के लोग युद्ध में जान गंवा रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिका रूस के साथ ऊर्जा कारोबार कर रहा है। उन्होंने कहा कि रूस को तेल और डीजल बेचकर मिलने वाला पैसा युद्ध जारी रखने में मदद करेगा। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और रूस के बीच ऊर्जा कारोबार बढ़ रहा है, जबकि यूक्रेन के लोग लड़ रहे हैं, जान गंवा रहे हैं और अपने देश को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। रूस के मिसाइल हमलों की जानकारी नहीं मिलने का आरोप जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को हाल के दिनों में रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बारे में पहले जैसी खुफिया जानकारी नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया था। यूक्रेन की राजधानी कीव में रूसी हमलों के बाद करीब 6 लाख लोग बिजली से वंचित हो गए थे। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस ने दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिन्होंने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचाया। अमेरिका के स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम के सैन्य इस्तेमाल पर पाबंदियां लगाए जाने की खबरें भी सामने आईं। स्टारलिंक की मदद से यूक्रेनी सेना युद्ध के मैदान में कम्युनिकेशन बनाए रखती है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि वे जांच कर रहे हैं कि चलते हुए उपकरणों के लिए स्टारशील्ड की कनेक्टिविटी बहाल हुई है या नहीं। स्टारशील्ड, स्टारलिंक का सैन्य इस्तेमाल वाला सिस्टम है, जिसका खर्च अमेरिकी रक्षा मंत्रालय उठाता है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना कम नहीं किया गया है। उन्होंने ऐसी मदद रोकने की धमकी देने से भी इनकार किया। जेलेंस्की बोले- अमेरिका जैसा मजबूत साथी खो रहे जेलेंस्की ने ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मॉर्गन को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें ट्रम्प के फैसलों से धोखा महसूस हुआ है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को अपने देश को बचाने के लिए अमेरिका और ट्रम्प पर भरोसा है, लेकिन हाल के फैसले दोनों देशों के बीच साझेदारी के अनुरूप नहीं हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अमेरिका जैसे मजबूत साझेदार को खो रहा है। उन्होंने ट्रम्प के पुतिन के साथ समझौते करने और तानाशाहों की तारीफ करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पुतिन को “असली बुराई” बताते हुए कहा, “ट्रम्प उनसे दोस्ती कैसे कर सकते हैं? मुझे लगता है कि यह एक गलती है।” यूरोपीय नेताओं ने रूस की रिफाइनरियों पर हमले का समर्थन किया ब्रसेल्स में यूरोपीय नेताओं ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले फिर शुरू करने के जेलेंस्की के फैसले का ज्यादातर समर्थन किया। एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिहाल ने कहा कि रूस की रिफाइनरियों और उसकी ऊर्जा बेचने की क्षमता को जितना जल्दी नुकसान पहुंचे, उतना बेहतर है, क्योंकि रूस तेल बेचकर युद्ध के लिए पैसा जुटाता है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने अमेरिका-रूस डीजल समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि इससे दुनिया के बाजार में कीमतें कम होने की संभावना नहीं है, लेकिन पुतिन को युद्ध के लिए पैसा जरूर मिलेगा। उन्होंने इसे ट्रम्प का गलत फैसला बताया। हालांकि, बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव ने कहा कि वह किसी भी तेल रिफाइनरी पर हमले का समर्थन नहीं करते। रूस की रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद आग लगी गुरुवार तड़के यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के रियाजान इलाके में एक तेल रिफाइनरी पर हमला किया। इसके बाद वहां आग लग गई। यह इलाका मॉस्को से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में है। रियाजान के गवर्नर पावेल माल्कोव और रूस के रक्षा मंत्रालय ने हमले के बाद आग लगने की जानकारी दी। एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि यूक्रेन ने रिफाइनरी को निशाना बनाया था। हालांकि, आग से हुए नुकसान की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। यह हमला जेलेंस्की के उस बयान के कुछ घंटे बाद हुआ, जिसमें उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले फिर शुरू करने की बात कही थी। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई:रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर; यही सर्विस भारत में शुरू करना चाहते हैं मस्क अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Reliance Jio Origin Story: ईशा अंबानी ने सुनाया जियो की शुरुआत का दिलचस्प किस्सा, वो घटना जिसने भारत में ला दी डिजिटल क्रांति

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साल भर में 92 लाख का टैक्स दिया, अब 90 लाख की नौकरी भी नहीं मिल रही – Uber इंजीनियर के पोस्ट ने मचाया बवाल

नई दिल्ली। अच्छी सैलरी वाली नौकरी और लाखों रुपये का इनकम टैक्स देने के बाद भी नौकरी जाने का डर खत्म नहीं होता। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। Uber में सीनियर इंजीनियर होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 92 लाख रुपये इनकम टैक्स दिया था। लेकिन अब पैटरनिटी लीव के दौरान नौकरी जाने के बाद वे नई नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने रेडिट (Reddit) पर 7 अक्टूबर 2026 को शेयर की गई उनकी पोस्ट के मुताबिक, घर में नवजात बच्चा है और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं होता है।

नौकरी छूटने का कारण रहा पैटरनिटी लीव

इंजीनियर का कहना है कि वे चार महीने की पैटरनिटी लीव (Paternity leave) पर थे, तभी उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। घर में नवजात बच्चा है और परिवार की मदद के लिए भी कोई खास सहारा नहीं है। ऐसे में बच्चे की देखभाल के साथ नई नौकरी ढूंढना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे नौकरी खोजने और इंटरव्यू की तैयारी पर पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। नौकरी जाने के बाद घर के खर्च और बच्चे की देखभाल की चिंता भी बढ़ गई है। वह कहते है कि नौकरी जाने के बाद उन्हें ऐसी नई नौकरी नहीं मिल पा रही है, जिसमें सालाना कम से कम 90 लाख रुपये मिलें।

सेवरेंस पे पर टैक्स से नाराज, भारत छोड़ने की कही बात

नौकरी जाने के बाद मिलने वाले पैसे यानी सेवरेंस पे (Severance pay) पर टैक्स लगने से भी इंजीनियर नाराज हैं। उनका कहना है कि नई नौकरी मिलने तक परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें इस पैसे की जरूरत है। ऐसे में टैक्स कटने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इंजीनियर ने कहा कि वे जल्द ही भारत छोड़ देंगे और वापस नहीं आना चाहते।

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी की सुरक्षा, टैक्स और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी है।