‘ऐतिहासिक समझौता बहुत जल्द..’, इंडिया-US ट्रेड डील पर रुबियो के बाद ट्रंप ने भी दे दिया बड़ा अपडेट

India US Trade Deal: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि एक साल से भी अधिक समय तक चली वार्ता के बाद भारत और अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। वहीं, भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि दोनों देश अब तकनीकी विवरणों को सुलझाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और अगले कुछ हफ्तों के भीतर इस समझौते पर सहमति बन सकती है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप से भारत-अमेरिका ट्रेड डील की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘वे डील करना चाहते हैं। हम भी डील करने जा रहे हैं। हां, हम इसके बेहद करीब हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता ‘काफी अलग तरह का सौदा हो सकता है’, हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी।

मार्को रुबियो बोले: ‘महीनों नहीं, हफ्तों में हो सकती है डील’

भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ‘नेटवर्क18’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है।

रुबियो ने कहा, ‘हम बेहद करीब हैं। मुझे लगता है कि हम अब उन तकनीकी विवरणों पर आ गए हैं जिन्हें सुलझाया जाना बाकी है। तकनीकी बारीकियां इसलिए मायने रखती हैं क्योंकि दोनों पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि समझौते की भाषा और प्रावधानों का अर्थ दोनों देशों के लिए एक समान हो।’

रुबियो ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे सीधे तौर पर बातचीत की मेज पर नहीं हैं और यह प्रक्रिया अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा संभाली जा रही है, लेकिन वे इसकी प्रगति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘वाशिंगटन को उम्मीद है कि यह समझौता महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों के भीतर पूरा हो जाएगा।’

क्या भारत को मिलेंगे बेहतर टैरिफ रेट्स?

जब रुबियो से पूछा गया कि क्या भारत अन्य देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ दरों की उम्मीद कर सकता है, तो उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते का मुख्य उद्देश्य मौजूदा दरों की तुलना में बेहतर शर्तें हासिल करना होता है।

उन्होंने कहा, ‘जाहिर है कि डील करने का मकसद यही होता है कि अभी जो दरें हैं, उनसे बेहतर दरें मिलें।’ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह समझौता लंबे समय तक टिकाऊ तभी रहेगा जब यह दोनों देशों के आर्थिक हितों को पूरा करेगा।

रुबियो ने स्वीकार किया कि भारत भी अन्य देशों की तरह बातचीत के दौरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा, लेकिन दोनों देशों के मजबूत रिश्ते मतभेदों को दूर करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा, ‘जब आप दोस्त और सहयोगी होते हैं, तो यही बात आपको मतभेदों को मिटाने और एक ऐसे समझौते पर पहुंचने में मदद करती है जो दोनों के लिए फायदेमंद हो।’

रणनीतिक स्तर पर बढ़ी उम्मीदें

दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों से लंबे समय से रुके इस व्यापार समझौते को लेकर उत्साह बढ़ा है। हाल ही में नई दिल्ली में ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे ने कहा था कि ‘मुख्य मुद्दों का समाधान हो गया है’ और दोनों देश समझौते के बहुत करीब हैं।

दूसरी ओर, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बातचीत की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि दोनों पक्ष एक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं।

कुल मिलाकर ट्रंप और रुबियो ने संकेत दिए हैं कि भारत और अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील के बेहद करीब हैं। रुबियो के अनुसार, वार्ता अब अंतिम चरण में है और केवल तकनीकी बारीकियों को सुलझाया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ हफ्तों में दोनों देश पारस्परिक रूप से फायदेमंद और बेहतर टैरिफ दरों वाले व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

ईरान बोला-एक ग्राम एनरिच्ड-यूरेनियम भी देश से बाहर नहीं जाएगा:जब तक अमेरिका भरोसा पैदा नहीं करता, कोई बातचीत नहीं होगी

ईरान ने मंगलवार को कहा कि वह अपना एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम किसी दूसरे देश नहीं भेजेगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सेक्रेटरी मोहसिन रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और ईरान की सभी शर्तें नहीं मानता, तब तक बातचीत नहीं होगी। ईरान ने अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका तब तक ईरान का भरोसा नहीं जीत सकता, जब तक वह उसकी सात शर्तें पूरी नहीं करता। ये शर्तें पिछले महीने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए रखी गई थीं। ईरान की प्रमुख मांगों में उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करना, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना शामिल है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी कह चुके हैं कि हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के करीब पहुंच चुके एनरिच्ड यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए। परमाणु कार्यक्रम पर दोनों देशों में विवाद ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के साथ समझौते की राह में बड़ी रुकावट बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता में ठोस कमी करनी होगी। उनके मुताबिक, ऐसा करना अमेरिकी मांगें मानने और दोनों देशों के बीच आठ महीने से चल रही जंग खत्म करने के लिए जरूरी है। एनरिच्ड यूरेनियम वह यूरेनियम होता है, जिसमें एक खास तरह के परमाणु की मात्रा बढ़ाई जाती है। इसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा बनाने के साथ परमाणु हथियारों में भी हो सकता है। ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप अमेरिका, इजराइल और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं। इन देशों की चिंता की एक बड़ी वजह ईरान का यूरेनियम को 60% तक संवर्धित करना है। आम तौर पर नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए इतने ऊंचे स्तर की जरूरत नहीं होती, जबकि परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम का संवर्धन स्तर करीब 90% होता है। हालांकि, ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है। ट्रम्प बोले- ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 अक्टूबर को न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में दोबारा कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। रॉयटर्स मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न हों, क्योंकि अगर उसके पास ऐसे हथियार हुए तो वह उनका इस्तेमाल करेगा। ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पहाड़ के नीचे बने ठिकाने को निशाना बनाने की संभावना भी जताई। उन्होंने कहा कि इस ठिकाने पर हमला करना पड़ सकता है। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं करेगा। पाकिस्तान बातचीत की कोशिश करा रहा पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के लिए ईरान के दौरे पर हैं। उन्होंने मुनीर के साथ मुलाकात में भी ईरान का यही रुख दोहराया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, मंगलवार को राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने तेहरान में मुनीर से मुलाकात की। समाचार एजेंसी नूर न्यूज के अनुसार, इस दौरान क्षेत्र के हालात और बातचीत कराने की कोशिशों पर चर्चा हुई। मुनीर ने ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ से भी मुलाकात की। पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले पाकिस्तान की कोशिशों से जून में दोनों देशों के बीच अंतरिम शांति समझौता हुआ था।लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर लड़ाई शुरू हो गई और समझौता टूट गया। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं:10 में से 9 सर्वे में पीछे, महंगाई-ईरान जंग से लोकप्रियता घटी, अपने ही उम्मीदवार दूरी बना रहे अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका बोला- पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, उससे बातचीत जरूरी:रुबियो बोले- विदेश नीति के लिए ये जरूरी, भारत भी ईरान से दोस्ती रखता है

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं। रुबियो ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ संबंध रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। उनके मुताबिक, विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन ऐसा करना जरूरी है। रुबियो बोले- अमेरिका आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता होती है। रुबियो ने कहा, ये मुश्किल फैसले हैं, लेकिन विदेश नीति के तहत हमें ऐसा करना पड़ता है। मुझे लगता है कि यह सकारात्मक भी हो सकता है। अगर हमारे पाकिस्तान के साथ संबंध हैं और हम उससे बात कर सकते हैं, तो इससे हमें उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत चिंतित है। रुबियो बोले- ईरान पर कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का कंट्रोल रुबियो ने ईरान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की सरकार के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, वे समझौता करना नहीं जानते। वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का नियंत्रण है। मैं सभी शिया धर्मगुरुओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि उन कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की बात कर रहा हूं, जो धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं। ऐसे लोगों के साथ समझौता करना बहुत मुश्किल है। होर्मुज में तेल की आवाजाही 80 से 100% हुई रुबियो ने कहा कि होर्मुज से तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई जारी है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की 80 से 100% तक बनी हुई है। रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह उन व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर सवार नाविकों की जान भी खतरे में पड़ रही है। रुबियो ने दुनिया के देशों से ऐसे हमलों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने ईरान के इन हमलों की तुलना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों से की। रुबियो के मुताबिक, उस दौर में भी पनडुब्बियों से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। फैक्ट चेक: स्ट्रैटेजिक एनर्जी मैप वेबसाइट के मुताबिक 20 अक्टूबर को होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 99% घट गई थी। यानी, अगर युद्ध से पहले एक दिन में 100 टैंकर गुजरते थे, तो इस आंकड़े के मुताबिक अब केवल 1 टैंकर गुजर रहा था। भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा कर रहा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। इसकी एक वजह यह भी है कि समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। नोट- पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अब तक 11 भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं 2 भारतीय नाविक लापता बताए गए हैं। ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता रहेगा अमेरिका रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल-ड्रोन बनाने में करता है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान को मिलने वाले पैसे और संसाधनों का इस्तेमाल देश के विकास के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाले हथियार तैयार करने में किया जाता है। रुबियो के बयान के तीन बड़े संकेत

अमेरिका बोला- पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार, उससे बातचीत जरूरी:रुबियो बोले- विदेश नीति के लिए ये जरूरी, भारत भी ईरान से दोस्ती रखता है

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। नेटवर्क18 को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे उसके मतभेद हैं। रुबियो ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत भी ईरान के साथ संबंध रखता है और वहां के नेताओं से मुलाकात करता है। उनके मुताबिक, विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन ऐसा करना जरूरी है। रुबियो बोले- अमेरिका आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत जारी रहने से अमेरिका को उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता होती है। रुबियो ने कहा, ये मुश्किल फैसले हैं, लेकिन विदेश नीति के तहत हमें ऐसा करना पड़ता है। मुझे लगता है कि यह सकारात्मक भी हो सकता है। अगर हमारे पाकिस्तान के साथ संबंध हैं और हम उससे बात कर सकते हैं, तो इससे हमें उन गतिविधियों को हतोत्साहित करने में मदद मिल सकती है, जिनसे भारत चिंतित है। रुबियो बोले- ईरान पर कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का कंट्रोल रुबियो ने ईरान के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि वहां की सरकार के साथ किसी समझौते पर पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने कहा, दुर्भाग्य से, वे समझौता करना नहीं जानते। वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का नियंत्रण है। मैं सभी शिया धर्मगुरुओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि उन कट्टरपंथी धर्मगुरुओं की बात कर रहा हूं, जो धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हैं। ऐसे लोगों के साथ समझौता करना बहुत मुश्किल है। होर्मुज में तेल की आवाजाही 80 से 100% हुई रुबियो ने कहा कि होर्मुज से तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई जारी है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की 80 से 100% तक बनी हुई है। रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह उन व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इन जहाजों पर सवार नाविकों की जान भी खतरे में पड़ रही है। रुबियो ने दुनिया के देशों से ऐसे हमलों की निंदा करने की अपील की। उन्होंने ईरान के इन हमलों की तुलना दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों से की। रुबियो के मुताबिक, उस दौर में भी पनडुब्बियों से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे हमलों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। फैक्ट चेक: स्ट्रैटेजिक एनर्जी मैप वेबसाइट के मुताबिक 20 अक्टूबर को होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 99% घट गई थी। यानी, अगर युद्ध से पहले एक दिन में 100 टैंकर गुजरते थे, तो इस आंकड़े के मुताबिक अब केवल 1 टैंकर गुजर रहा था। भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा कर रहा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों की जान गई है। इसकी एक वजह यह भी है कि समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। नोट- पश्चिम एशिया में युद्ध के दौरान अब तक 11 भारतीय नाविकों की मौत की खबर सामने आई है। वहीं 2 भारतीय नाविक लापता बताए गए हैं। ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाता रहेगा अमेरिका रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का इस्तेमाल आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और मिसाइल-ड्रोन बनाने में करता है। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान को मिलने वाले पैसे और संसाधनों का इस्तेमाल देश के विकास के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने वाले हथियार तैयार करने में किया जाता है। रुबियो के बयान के तीन बड़े संकेत

रिलायंस के पास रिफाइनिंग की असाधारण क्षमता! जामनगर दौरे से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान

Marco Rubio Jamnagar Refinery: गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के दौरे से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कंपनी की रिफाइनिंग क्षमताओं की जमकर तारीफ की है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि रिलायंस ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में एक बेहद महत्वपूर्ण प्लेयर है और उनका दौरा वेनेजुएला तथा पश्चिमी गोलार्ध से कच्चे तेल के आयात और प्रसंस्करण को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।

‘रिलायंस के पास रिफाइनिंग की असाधारण क्षमता’

बुधवार को जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी का दौरा करने जा रहे अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ‘रिलायंस एक बेहद महत्वपूर्ण कंपनी है। उसके पास कच्चे तेल को रिफाइन करने की असाधारण क्षमता है।’ रुबियो ने ये भी कहा कि रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमताएं भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने में बड़ी मदद कर सकती हैं।

वेनेजुएला के कच्चे तेल पर रिलायंस के साथ सहयोग का बड़ा प्लान

रुबियो ने कहा कि वेनेजुएला में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ रहा है और भारत का इतिहास रहा है कि वह वेनेजुएला के भारी और उच्च-सल्फर तेल को आसानी से रिफाइन कर लेता है।

उन्होंने स्पष्ट किया, ‘पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले तेल को जब भारत में रिफाइन किया जाता है, तो यह भारत के लिए भी फायदेमंद है और हमारे लिए भी।’ अमेरिकी विदेश मंत्री ने अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र में रिलायंस के मौजूदा निवेश और रिफाइनिंग क्षमताओं की भी सराहना की।

जामनगर में है दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स

रिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है, जिसकी कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रति दिन है।

इस कॉम्प्लेक्स में दो बड़ी रिफाइनरी शामिल हैं, जो वेनेजुएला द्वारा उत्पादित भारी और उच्च-सल्फर ग्रेड जैसे जटिल कच्चे तेल को भी आसानी से प्रोसेस करने में सक्षम हैं।

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

Disclaimer: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Marco Rubio Interview: ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द’, जानिए ईरान युद्ध, आतंकवाद से लेकर रूसी तेल की खरीद पर क्या बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio Interview: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ ट्रेड डील, रूस से तेल खरीदने, पाकिस्तान, ईरान और क्वाड जैसे अहम मुद्दों पर बात की। नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग तैयार है। इसे पूरा होने में महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लगने की उम्मीद है।

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास आपसी संबंध मजबूत करने के असाधारण अवसर हैं। रुबियो ने रूस से तेल खरीद, पाकिस्तान में आतंकवाद और ईरान युद्ध के बारे में भी बात की।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील

रुबियो ने कहा कि ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है। कुछ तकनीकी मुद्दों को सुलझाना और समझौते की भाषा को अंतिम रूप देना बाकी है। उनके मुताबिक, घोषणा से पहले जरूरी है कि दोनों देश हर शर्त पर सहमत हों। उन्हें उम्मीद है कि डील कुछ हफ्तों में पूरी हो जाएगी।

भारत को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ मिलने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि किसी भी ट्रेड डील का मकसद मौजूदा स्थिति से बेहतर शर्तें हासिल करना होता है। लेकिन इससे भी जरूरी है कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते लंबे समय तक टिकाऊ रहें।

उन्होंने कहा कि हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं। भारत अपने हितों की रक्षा करेगा और अमेरिका भी ऐसा ही करेगा। लेकिन दोस्ती और सहयोग की वजह से दोनों देश मतभेदों को सुलझा सकते हैं। रुबियो के मुताबिक, समझौता ऐसा होना चाहिए, जो कुल मिलाकर दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।

रूस से तेल खरीदने पर भारत की स्थिति समझते हैं रुबियो

अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की बात करता है, जबकि खुद भी रूस से डीजल खरीद रहा है। इस सवाल पर रुबियो ने कहा कि यूक्रेन युद्ध पांचवें साल में पहुंच चुका है और इसे खत्म करना जरूरी है। लेकिन रूस पर प्रतिबंधों का असर सिर्फ उसी देश पर नहीं पड़ता। रूस के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने दो चुनौतियां हैं। पहली, रूस पर दबाव बनाना, ताकि वह युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर आए। दूसरी, यह देखना कि इस दबाव का असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ रहा है।

रुबियो के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका के हितों के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को भी देखना जरूरी है। उन्होंने माना कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच तनाव है। उम्मीद जताई कि ट्रेड डील और बातचीत से मतभेद कम हो सकते हैं।

अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत

अमेरिका के इलिनॉय स्टेट में एक हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश और भारतीयों के खिलाफ नफरत के सवाल पर रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी घटनाओं से पूरी तरह अछूता नहीं है। हर समाज में कुछ लोग अज्ञानता और नफरत के कारण गलत काम करते हैं।

हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत व्यापक स्तर पर फैली हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ आसपास के लोग भी पीड़ितों के समर्थन में खड़े होते हैं।

रुबियो ने विस्कॉन्सिन में सिख समुदाय के साथ हुई एक भयावह घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका में यहूदी विरोधी घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनके मुताबिक, नेताओं को ऐसी नफरत को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, न ही उसका बचाव करना चाहिए या उसे नजरअंदाज करना चाहिए।

पाकिस्तान पर अमेरिकी नीति

पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी नीति पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ है। हालांकि, विदेश मंत्री के तौर पर उन्हें उन देशों के साथ भी संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।

राहुल जोशी ने उन्हें याद दिलाया कि 2025 में अमेरिकी सीनेटर रहते हुए रुबियो ने पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता रोकने से जुड़ा विधेयक लाने की बात कही थी, अगर वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देता है। उनसे पूछा गया कि क्या अब उनकी नीति बदल गई है।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से भी अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से की। उनके मुताबिक, भारत को भी ईरान के नेताओं से बातचीत करनी पड़ती है, भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने से अमेरिका को उन मुद्दों पर बातचीत करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता है। इससे आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद भी की जा सकती है।

ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव

ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों को लेकर रुबियो ने कहा कि ईरान की सरकार के साथ समझौता करना मुश्किल है। उन्होंने ईरान की तुलना नाजी जर्मनी से की और आरोप लगाया कि ईरान व्यावसायिक जहाजों को निशाना बना रहा है। और ऐसे नाविकों की जान खतरे में डाल रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है।

रुबियो ने कहा कि अमेरिका हर रात समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। उनके मुताबिक, ईरान की ओर से दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं। इससे जहाजों को नुकसान होता है और लोगों की जान भी जाती है।

उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि समुद्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। इसी वजह से इन हमलों में कई भारतीयों की भी जान गई है। उन्होंने ईरान से ऐसे हमले रोकने की अपील की।

क्वाड की बैठक साल के अंत से पहले

रुबियो ने उम्मीद जताई कि क्वाड देशों के नेताओं की बैठक इस साल के अंत से पहले होगी। उन्होंने बताया कि बैठक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान आयोजित करने पर सहमति बनी है। हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है।

क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। रुबियो ने बताया कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक क्वाड से जुड़ी थी, जिसमें जयशंकर भी शामिल थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सात या आठ बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने अटलांटा में G20 के दौरान एक और बैठक होने की जानकारी भी दी।

रुबियो के मुताबिक, क्वाड अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है। इसके तहत ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगली शिखर बैठक में भी ऐसे फैसलों और उनके नतीजों की घोषणा होनी चाहिए, जिनका वास्तविक असर दिखाई दे।

जयशंकर के साथ रिश्तों की तारीफ

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक में जयशंकर शामिल थे। इसके बाद दोनों कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। जयशंकर चार बार अमेरिका भी गए हैं। दोनों की मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय बैठकों और सम्मेलनों में भी हुई हैं।

रुबियो ने कहा कि जब भी दोनों किसी बैठक या कार्यक्रम के लिए एक ही शहर में होते हैं, तो मिलने का समय जरूर निकालते हैं। उनके मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में दोनों के बीच मजबूत कामकाजी रिश्ता बना है। इससे कई संवेदनशील और मुश्किल मुद्दों को संभालने में मदद मिली है।

जामनगर में रिलायंस से मुलाकात क्यों?

रुबियो ने अपनी जामनगर यात्रा को रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा सहयोग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि रिलायंस के पास कच्चे तेल को उपयोगी उत्पादों में बदलने की असाधारण क्षमता है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम बताया।

रुबियो के मुताबिक, रिलायंस भारत को ऊर्जा आपूर्ति के अलग-अलग स्रोतों से जोड़ने में मदद कर सकती है। उन्होंने वेनेजुएला के तेल का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, वेनेजुएला अपना तेल उत्पादन बढ़ा रहा है और भारत लंबे समय से इस तरह के कच्चे तेल को रिफाइन करने में सक्षम रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि रिलायंस ने अमेरिका में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश किया है। रुबियो ने कहा कि जामनगर में कंपनी के कामकाज को देखने और उसके अधिकारियों से बातचीत करने का मकसद ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।

उन्होंने कहा कि खास तौर पर पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिलेंगे और अमेरिका को भी लाभ होगा।

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‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय!’ एस जयशंकर संग अपनी केमिस्ट्री और Quad पर बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio S Jaishankar Relation: भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक स्पेशल इंटरव्यू में रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने गहरे और मजबूत कामकाजी रिश्तों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देश QUAD के जरिए अपने रणनीतिक सहयोग को एक नए मुकाम पर ले जा रहे हैं।

‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय’: जयशंकर संग मजबूत केमिस्ट्री

मार्को रुबियो ने खुलासा किया कि पिछले डेढ़ साल के दौरान वे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। रुबियो के अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली मुलाकात भी जयशंकर के साथ ही हुई थी।

रुबियो ने कहा, ‘जब भी हम किसी वैश्विक सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय बैठक या एक ही शहर में होते हैं, तो हम एक-दूसरे से मिलना कभी नहीं भूलते। हमने एक बेहद सकारात्मक और मजबूत वर्किंग रिलेशनशिप बनाई है।’

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी मजबूत बॉन्डिंग की बदौलत दोनों देश पिछले डेढ़ साल में कई नाजुक और संवेदनशील मुद्दों को बहुत आसानी से सुलझाने में सफल रहे हैं।

Quad सम्मेलन में होंगे ऐतिहासिक फैसले

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता वाले ग्रुप Quad के भविष्य पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि यह संगठन अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी क्वाड लीडर्स समिट केवल एक ‘गेट-टुगेदर’ नहीं होगी। इस शिखर सम्मेलन में चारों देश ठोस और बड़े फैसलों का ऐलान करेंगे।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-US के रिश्ते बेहद अहम

मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वैश्विक मामलों को लेकर एक जैसी सोच है। दोनों देशों के पास रक्षा, सुरक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में अपने संबंधों को और गहराई तक ले जाने के ‘असाधारण अवसर’ मौजूद हैं।

‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

Marco Rubio On Iran: भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान और उसकी शीर्ष नेतृत्व प्रणाली पर जमकर निशाना साधा है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर पहुंचना बेहद मुश्किल है, क्योंकि देश की कमान थियोलॉजी यानी धार्मिक नीतियों से संचालित होने वाले ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ के हाथों में है।

नाजी U-Boat रणनीति से की तुलना, भारतीय नाविकों की मौतों पर जताई चिंता

मार्को रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ईरान की इन हरकतों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी की सबमरीन रणनीतियों से की।

रुबियो ने कहा, ‘ईरान खुलेआम कह रहा है कि वे निर्दोष नाविकों को मारने और कमर्शियल जहाजों को डुबोने की कोशिश कर रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा कभी नहीं देखा गया। पूरी दुनिया को एक साथ आकर इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए।’

उन्होंने बताया कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों ने भी अपनी जान गंवाई है, क्योंकि वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या है। वैसे अमेरिकी नौसेना अधिकांश ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर रही है।

‘कट्टरपंथी मौलवियों के हाथ में कमान’, कूटनीति पर संकट

तेहरान के साथ राजनयिक समझौते और भविष्य में सैन्य तनाव की संभावना पर रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरानी नेतृत्व की कट्टरपंथी सोच के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उन्होंने कहा, ‘ईरानी शासन के साथ डील करना बहुत कठिन है। दुर्भाग्य से वे समझौता करना नहीं जानते और वे कट्टरपंथी शिया मौलवियों द्वारा नियंत्रित हैं।’ रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनका हमला सामान्य शिया समुदाय पर नहीं, बल्कि शासन चला रहे कट्टरपंथियों पर है।

अमेरिका की ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ नीति जारी रहेगी

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वाशिंगटन तेहरान पर असाधारण आर्थिक दबाव बनाना जारी रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने नागरिकों की भलाई के बजाय मिलने वाले हर डॉलर का उपयोग आतंकवाद को स्पॉन्सर करने, मिसाइलें और ड्रोन बनाने में करता है।

इससे पहले अगस्त में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ यानी आर्थिक तौर पर पंगु बनाने की रणनीति का ऐलान किया था, जिसके तहत डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, गोल्ड, एविएशन और शिपिंग सेक्टर्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

Marco Rubio On Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर एक बेहद सकारात्मक और बड़ी खबर आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अब अपने अंतिम चरण में है और कुछ ही हफ्तों के भीतर इस पर औपचारिक मुहर लग सकती है। आपको बता दें कि मार्को रुबियो भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए हुए हैं।

‘महीनों नहीं, हफ्तों की बात’

नेटवर्क18 ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में मार्को रुबियो ने बताया कि दोनों देश समझौते के बेहद करीब हैं और अब केवल तकनीकी और कानूनी बारीकियों को सुलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘तकनीकी विवरण बहुत मायने रखते हैं क्योंकि भाषा का अर्थ दोनों पक्षों के लिए एक जैसा होना चाहिए। इसलिए अब बातचीत इसी स्तर पर टिकी है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन को उम्मीद है कि यह समझौता महीनों नहीं, बल्कि ‘कुछ हफ्तों के भीतर’ सामने आ जाएगा’।

क्या भारत को मिलेंगे बेहतर टैरिफ रेट्स?

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को अन्य देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ दरें मिलेंगी, तो रुबियो ने कहा कि किसी भी व्यापारिक सौदे का मुख्य उद्देश्य ही वर्तमान दरों में सुधार करना होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता ऐसा होना चाहिए जो दीर्घकालिक रूप से दोनों देशों के आर्थिक हितों को पूरा करे।

रुबियो ने स्वीकार किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा, ‘जब आप मित्र और सहयोगी होते हैं, तो यही बात आपको मतभेदों को मिटाने और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता करने की अनुमति देती है।’

केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयान से भी मिले थे संकेत

मार्को रुबियो की यह टिप्पणी भारतीय अधिकारियों के बयानों के बिल्कुल अनुकूल है। हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किश्त को अंतिम रूप दे दिया गया है और यह कानूनी मसौदे के चरण में है। भारत समकक्ष अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में प्रतिस्पर्धी लाभ हासिल करते ही इस सौदे को लागू करेगा।

नीदरलैंड के पहले गे PM जल्द पिता बनेंगे:सोशल मीडिया पर लिखा- 2027 में आएगा नया मेहमान; दो महिला दोस्तों ने की मदद

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन 2027 में पिता बनेंगे। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की। जेटेन के पार्टनर निकोलस कीनन अर्जेंटीना के हॉकी खिलाड़ी हैं। जेटेन और उनके पार्टनर कीनन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, हमारी जिंदगी में एक बहुत खास मेहमान आने वाला है। नन्हे बच्चे, 2027 में तुमसे मुलाकात होगी। डच मीडिया के मुताबिक बच्चे के जन्म के लिए सरोगेसी की मदद ली गई है। उनकी दो महिला दोस्तों ने इस प्रक्रिया में मदद की। एक ने अंडाणु दान किया, जबकि दूसरी बच्चे को जन्म देंगी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जेटेन ऐसे पहले डच प्रधानमंत्री होंगे, जिनके कार्यकाल में उनके बच्चे का जन्म होगा। टिकटॉक वीडियो से शुरू हुई कहानी, सुपरमार्केट में मिले साल 2021 में, जेटन और उनके एक साथी डच नेता के बीच का एक ब्रोमांस वाला ट्रेडिंग वीडियो टिकटॉक पर बहुत वायरल हुआ था। इसमें दोनों नेता एक दूसरे के साथ मस्ती करते, हंसते और डांस करते दिखे थे। वीडियो वायरल होने के बाद रॉब जेटन युवाओं के बीच मशहूर हो गए। साल 2022 में कीनन ने एक सुपरमार्केट में जेटेन को देखा और उन्हें वायरल वीडियो की वजह से पहचान गए। इस दौरान दोनों की बातचीत शुरू हुई। कीनन ने बाद में एक इंटरव्यू में बताया था कि जेटेन ने उन्हें इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजकर बातचीत शुरू की थी। शुरुआत में दोनों का रिश्ता निजी रहा लेकिन अगस्त 2023 में दोनों ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक कर दिया। नवंबर 2024 में दोनों ने सगाई की घोषणा की। दोनों की शादी जून 2026 में होनी थी, लेकिन जेटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इसे कुछ समय के लिए टाल दिया है। नीदरलैंड समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला पहला देश नीदरलैंड दुनिया का पहला देश था, जिसने 2001 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दी। जेटेन देश के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री हैं। हालांकि, वे दुनिया के पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री नहीं हैं। उनसे पहले भी दूसरे देशों में खुले तौर पर समलैंगिक नेता सरकार के प्रमुख रह चुके हैं। सिर्फ 39 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने जेटेन दुनिया के 8 समलैंगिक प्रधानमंत्री 1. योहाना सिगुर्दार्दोतिर – आइसलैंड (2009–2013): वे दुनिया की पहली खुले तौर पर समलैंगिक सरकार प्रमुख बनीं। वे लेस्बियन थीं। उनकी 1970 में शादी हुई थी। उनके 2 बच्चे भी हुए। 1985 में वह एक महिला पत्रकार के करीब आईं। इसके 2 साल बाद उन्होंने तलाक ले लिया। जून 2010 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने पर दोनों ने शादी कर ली। 2. एलियो दी रूपो – बेल्जियम (2011–2014): वे बेल्जियम ही नहीं दुनिया के पहले खुले तौर पर गे प्रधानमंत्री बने। 1996 में उप-प्रधानमंत्री रहने के दौरान उन पर 16 साल के बच्चे के साथ संबंध बनाने का आरोप लगा था। तब पहली बार उनकी पहचान उजागर हुई थी। 3. जेवियर बेटेल – लक्जमबर्ग (2013–2023): बेटेल ने 2008 में पहली बार बताया था कि वे समलैंगिक हैं। PM बनने के डेढ़ साल बाद 2015 में उन्होंने अपने पुरुष पार्टनर गौथियर डेस्टने से शादी की। वे पहले ऐसे गे प्रधानमंत्री बने जिन्होंने पद पर रहते हुए शादी की। 4. लियो वराडकर – आयरलैंड (2017–2024): आयरलैंड में मई 2015 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के लिए जनमत संग्रह होना था। भारतीय मूल के लियो वराडकर तब स्वास्थ्य मंत्री थे। उन्होंने इस जनमत संग्रह को समर्थन देने के लिए पहली बार अपनी समलैंगिक पहचान सार्वजनिक की। 5. एना ब्रनाबिच – सर्बिया (2017–2024): वे सर्बिया की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। वे लेस्बियन हैं। फरवरी 2019 में उनकी पार्टनर ने एक बेटे को जन्म दिया। ऐसे में वे पहली समलैंगिक प्रधानमंत्री बनीं, जिनकी महिला पार्टनर ने उनके कार्यकाल के दौरान बच्चे को जन्म दिया। 6. जेवियर एस्पोट – अंडोरा (2019 से): वे अंडोरा के प्रधानमंत्री हैं और खुले तौर पर समलैंगिक हैं। प्रधानमंत्री बनने के 4 साल बाद 2023 में उन्होंने अपनी समलैंगिक पहचान सार्वजनिक की। 7. गैब्रियल अत्ताल – फ्रांस (2024): वे फ्रांस के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री बने। 2018 में जब वे मैक्रों की पार्टी के सांसद थे तब पहली बार उनके एक बचपन के दोस्त ने खुलासा किया था कि उनका संबंध एक नेता स्तेफान सेजुर्ने से है। दोस्त ने आरोप लगाया कि सेजुर्ने की वजह से अत्ताल का राजनीतिक करियर आगे बढ़ा। 8. रॉब जेटेन- नीदरलैंड (2026 से): वे नीदरलैंड के पहले खुले तौर पर समलैंगिक प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने फरवरी 2026 में पद संभाला। 17 साल की उम्र में पहली बार एक लड़के से प्यार होने के बाद उन्होंने अपने परिवार और दोस्तों के सामने अपनी पहचान का खुलासा किया था।