अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। 60 दिनों के दौरान ट्रम्प ने कई बार कहा कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। माना जा रहा था कि डेडलाइन खत्म होते ही अमेरिका फिर बड़ा हमला कर सकता है। समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले ट्रम्प का रुख बदलता दिखा। एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “हम पहले के मुकाबले हल्का रुख अपना रहे हैं।” वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमेरिका, ईरान को तीन तरीके से घेर रहा है। 1. आर्थिक दबाव- ईरान की कमाई और अर्थव्यवस्था को कमजोर करना। 2. नौसैनिक नाकाबंदी- ईरान के लिए समुद्र के रास्ते व्यापार मुश्किल करना। 3. बातचीत- सीधे या दूसरे देशों के जरिए ईरान से समझौते की कोशिश करना। ट्रम्प के इस बयान का मतलब अभी अमेरिका सीधे बड़ा हमला करने की बजाय ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, समुद्र के रास्ते उसका व्यापार रोक रहा है और बातचीत से समझौते की कोशिश भी कर रहा है। ट्रम्प हमला रोककर क्या हासिल करना चाहते हैं? ट्रम्प की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका युद्ध को खत्म नहीं मान रहा है। ट्रम्प को लगता है कि फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना सैन्य हमले से ज्यादा असरदार हो सकता है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान युद्ध में नहीं उलझा रहेगा तो उसे अपनी असली आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जैसे कि बर्बाद बुनियादी ढांचा, कमजोर अर्थव्यवस्था, महंगाई और पैसों की कमी। यानी अमेरिका का दांव यह है कि युद्ध रोककर ईरान को कमजोर होने दिया जाए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा कि अमेरिका कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य तीनों तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि युद्ध जारी रहने पर ईरानी सरकार अपनी आर्थिक परेशानियों के लिए जंग को जिम्मेदार ठहरा सकती है। जब युद्ध नहीं होगा, तब जनता और सरकार को आर्थिक संकट का सामना सीधे करना पड़ेगा। ट्रम्प को ईरान के खिलाफ रणनीति क्यों बदलनी पड़ी? ट्रम्प ने फरवरी में इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, लेकिन यह कई महीनों तक खिंच गया। अब अमेरिका के सामने दो तरह का दबाव है। एक तरफ वह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्य हासिल करना चाहता है, दूसरी तरफ लंबे युद्ध की बढ़ती लागत भी उसके लिए चिंता बन रही है। ट्रम्प लगातार कहते रहे हैं कि ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका के सामने दो रास्ते हैं- या तो ईरान को आर्थिक रूप से टूटने दिया जाए या फिर उस पर बहुत बड़ा सैन्य हमला किया जाए। फिलहाल ट्रम्प पहला रास्ता आजमाते दिख रहे हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका ने टकराव खत्म कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प सरकार चीन की उन रिफाइनरियों पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है जो ईरानी तेल खरीदती हैं। इसके अलावा ईरान के साथ लेन-देन करने वाले चीनी बैंकों और उन संस्थाओं पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करने का आरोप है। यानी हमला भले ही रुका हुआ है, लेकिन दबाव कम नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा सौदेबाजी का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा दांव बन गया है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। 9 अगस्त को ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। लेकिन तेहरान ने यह भी साफ कर दिया कि ओमान के साथ समझौता होने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे, प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दे। यानी अमेरिका चाहता है कि समुद्री रास्ते और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो, जबकि ईरान इसे अमेरिकी रियायतों से जोड़कर देख रहा है। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं रह गया है। यह दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सौदेबाजी का हथियार बन चुका है। युद्ध की बड़ी कीमत चुका रहा अमेरिका सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ पांच महीने चले युद्ध में अमेरिका ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बड़ी संख्या में मिसाइलें इस्तेमाल की हैं। इनमें ATACMS और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल शामिल हैं। दो सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने इन हथियारों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई। अमेरिका युद्ध के दौरान कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवा चुका है। यह उसके कुल बेड़े का करीब 25% है। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके उपकरणों के आधार पर 3 से 5 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इन नुकसानों की कुल कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है। इन ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास निगरानी और हमलों के लिए किया गया था। कम ऊंचाई और धीमी गति के कारण ये ईरानी बलों और ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहे। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 185 रीपर ड्रोन थे। इनमें 165 वायुसेना और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे। मई में अमेरिकी वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने सीनेट को बताया था कि वायुसेना के पास करीब 135 रीपर ड्रोन बचे हैं। पेंटागन पहले से ही रीपर ड्रोन को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह कम कीमत वाले नए हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना पर काम कर रहा है। लंबी दूरी की मिसाइलों की कीमत भी 10 लाख डॉलर से ज्यादा होती है। इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी किया गया है। अगर अमेरिका के पास इन हथियारों का भंडार कम होता है तो भविष्य में ईरान पर बड़े हमले या रूस और चीन जैसे दूसरे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उसकी सैन्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में मौजूद अपने सैन्य भंडार से इन हथियारों की फिर से आपूर्ति कर सकता है। ईरान की मांगें क्या हैं? अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाकर ईरान को समझौते के लिए तैयार करना चाहता है। लेकिन ईरान भी अपने पास मौजूद विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज खोलने के लिए 6 मांगें रखी हैं। यानी अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग पर अपनी पकड़ को दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की गुंजाइश होते हुए भी समझौते की राह आसान नहीं है।
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Rhea Chakraborty: एक्टर रिया चक्रवर्ती की जिंदगी 2020 में उनके एक्स-बॉयफ्रेंड सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पूरी तरह बदल गई थी। कुछ महीने पहले, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सुशांत की मौत के मामले में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की और रिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया। सुशांत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती, दोनों को गिरफ्तार किया था।
रिया ने क्या कहा?
रिया अभी ‘द ट्रेटर्स’ के सीज़न 2 में नजर आ रही हैं। वह फराह खान के यूट्यूब व्लॉग में शामिल होने वाली लेटेस्ट सेलिब्रिटी थीं, जहां दोनों ने एक्टर के ‘चैप्टर 2’ के बारे में बात की। रिया ने बताया कि सुशांत की मौत और उसके बाद अपनी गिरफ्तारी के दौरान जब उन पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा था, तो उनके परिवार को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, जो एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर और पूर्व मेडिकल कॉर्प्स एडमिनिस्ट्रेटर/डॉक्टर हैं, उन्हें भी एक झटका लगा क्योंकि उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था।
उन्होंने बताया, “पापा को शहर के एक बहुत बड़े अस्पताल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट की बहुत अच्छी नौकरी मिली थी… और फिर उन्हें उनका सरनेम पता चला और उन्होंने कहा, ‘सॉरी, आप रिया चक्रवर्ती के पिता हैं, इसलिए आप यहां काम नहीं कर सकते’।” व्लॉग में रिया के पिता फराह से भी मिले और कहा कि वह उस अच्छे खाने का इंतजार कर रहे हैं, जो वे अपनी नई किचन में बनाएंगी। फराह ने जवाब दिया कि वह उनके लिए रोस्ट चिकन लाई हैं।
2020 में अपने एक्स-बॉयफ्रेंड, एक्टर सुशांत की मौत के बाद रिया को जेल की सजा और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा था। पिछले साल, इस मामले में CBI की क्लोज़र रिपोर्ट से उन्हें राहत मिली, क्योंकि उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। अपने पिछले इंटरव्यू में उन्होंने माना था कि इस पूरे घटनाक्रम का उनकी मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ा और उन्हें PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) का सामना करना पड़ा।
‘द ट्रेटर्स 2’ में रिया के बारे में और जानकारी
शो में, कंटेस्टेंट मल्लिका शेरावत की एक तंज भरी टिप्पणी के बाद रिया को जेल में बिताए अपने समय की याद आ गई। यह तब शुरू हुआ जब मुनव्वर फारुकी ने मल्लिका की “वापसी” (कमबैक) के बारे में कुछ कहा और रिया ने उनका बचाव किया। रिया कहती हैं, “मुझे नहीं लगता कि वह कोई बहुत बुरी बात थी।” मल्लिका जवाब देती हैं, “ओह, तो यह तुम्हारा कमबैक है? रिया, वह इस पर कमेंट करने वाले कौन होते हैं? क्या यह गेम कमबैक के बारे में है? मैं भी कह सकती हूं, ‘ओह रिया, तुम जेल में थीं। क्या यह तुम्हारे लिए बड़ा कमबैक है?'” रिया ने कहा कि मल्लिका का कमेंट, मुनव्वर की गई टिप्पणी की तुलना में कहीं ज़्यादा निजी थी।
इस सीज़न की सेलिब्रिटी लाइन-अप में आदित्य कुलश्रेष्ठ (कुल्लू), अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान), अंश चोपड़ा, दलीप ताहिल, हरमन सिंघा, इक्का सिंह, करण सिंह मैजिक, क्रिस्टल डिसूज़ा, मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारुकी, पारुल गुलाटी, प्रिश और रणवीर बराड़ शामिल हैं। रिया चक्रवर्ती, रिदा थराना, साहिल सलाथिया, शाहनील गिल, शालिनी पासी, श्वेता तिवारी, सौंदस मौफकिर और तान्या पुरी भी नए सीज़न का हिस्सा हैं।
Kumar Sanu: जाने-माने सिंगर कुमार सानू अश्लील गानों के खिलाफ हैं और उन्होंने यह बात साफ तौर पर कही है। एक नए इंटरव्यू में, उन्होंने उन गानों के बारे में बात की जो उन्होंने 1990 के दशक में अपने करियर के पीक पर गाए थे। उन्होंने कहा कि वे ऐसे गाने गाने से बचते थे जो अच्छे नहीं बल्कि अश्लील होते थे, हालांकि, कभी-कभी ‘मूवी माफिया’ के दबाव में उन्हें ऐसा करना पड़ता था।
ज़ूम के साथ एक इंटरव्यू में कुमार सानू ने कहा, “मेरा एक उसूल था कि मैं अपने गानों में अश्लीलता नहीं लाऊंगा। लेकिन एक-दो बार ऐसा हुआ जब मैं इस बात पर कायम नहीं रह पाया क्योंकि मुझ पर इतना दबाव था कि मुझे लगा कि मुझे वे गाने गाने ही होंगे, वरना काम नहीं चलेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि ‘फिल्म माफिया’ के दबाव के बावजूद, वह अपने सिद्धांतों पर अडिग हैं और बोले, “मेरे पास एक-दो ऐसे गाने हैं। मेरे एक-दो गाने, जैसे ‘राज गया तबला तबले में…’, इसी श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा, मैंने हमेशा से ही अश्लील गानों से परहेज किया है, और आज भी करता हूं। मैं आज तक इसी सिद्धांत पर कायम हूं। तो उसमें एक चीज होती है कि पता नहीं मेरा नुकसान तो बहुत हुआ लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
हाल ही में कुमार सानू ने पिछले साल पार्श्व गायक उदित नारायण से जुड़े विवाद पर तंज कसा था। द लल्लनटॉप के साथ हाल ही में हुई बातचीत में, सानू से 1990 के दशक में महिला प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता के बारे में पूछा गया, जिस पर उन्होंने प्रशंसकों को किस के बारे में एक तीखे कमेंट के साथ जवाब दिया।
‘आशिकी’ गायक ने कहा, “नहीं मुझे किसी ने किस नहीं। न मैंने किसी को किस किया। न तो मैंने किस दिया, न लिया। मैंने वो सब नहीं किया।”
यह टिप्पणी उदित नारायण के उस वायरल कॉन्सर्ट वीडियो के बाद आई है, जिसमें उन्हें महिला प्रशंसकों को चूमते हुए दिखाया गया था, जिसमें वे एक प्रशंसक को होंठों पर चूमते हुए भी दिखे थे। इस वीडियो को लेकर उन्हें व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा था।
कुमार सानू को हिंदी फिल्म संगीत में सबसे प्रसिद्ध आवाजों में से एक माना जाता है। उनकी 1990 के दशक की हिट फिल्मों में मेरा दिल भी कितना पागल है, एक लड़की को देखा, दो दिल मिल रहे हैं, तुम मिले दिल खिले, तुझे देखा तो ये जाना सनम, आंखों की गुस्ताखियां, चुरा के दिल मेरा, बाजीगर ओ बाजीगर, ये काली काली आंखें और धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना शामिल हैं।

