अक्षय खन्ना शादी और बच्चों को ‘लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव’ मानते हैं, बोले- ‘मैं अपनी जिंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं’

मशहूर स्टार अक्षय खन्ना ने खुलकर बताया है कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की। उनका कहना है कि बात कमिटमेंट की नहीं, बल्कि शादी के बाद जैसी ज़िंदगी जीनी पड़ती है, उसकी है। 2019 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में एक्टर ने कहा था कि उन्हें अपनी पर्सनल ज़िंदगी पर अपना कंट्रोल बनाए रखना पसंद है और वे इसे छोड़ना नहीं चाहते।

अक्षय खन्ना ने बताया कि उन्होंने कभी शादी क्यों नहीं की

जब अक्षय से पूछा गया कि क्या वे भविष्य में शादी करने के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वे उस तरह की जिंदगी के लिए सही हैं। उन्होंने कहा कि शादी का मतलब होगा अपनी मौजूदा जीवनशैली में बड़े बदलाव करना और अपनी जिंदगी का कंट्रोल किसी और के साथ शेयर करना।

“मैं खुद को शादी करते हुए नहीं देखता, मैं शादी के लिए सही इंसान नहीं हूं। मैं उस तरह की ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। यह एक कमिटमेंट है, लेकिन जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव भी है। शादी सब कुछ बदल देती है। मैं अपनी ज़िंदगी पर पूरा कंट्रोल चाहता हूं। जब आप किसी और के साथ अपनी ज़िंदगी शेयर करते हैं, तो आपका पूरा कंट्रोल नहीं रहता। आपको बहुत सारा कंट्रोल छोड़ना पड़ता है। आप एक-दूसरे की ज़िंदगी शेयर करते हैं।”

एक्टर से यह भी पूछा गया कि क्या शादी का फैसला उनके निजी स्वभाव की वजह से लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके इस फैसले के पीछे कोई खास घटना या वजह नहीं थी और वे हमेशा से ऐसे ही रहे हैं, बचपन से ही।

उन्होंने बच्चे गोद लेने की बात भी खारिज कर दी

अक्षय से पूछा गया कि अगर वे शादी नहीं करते हैं तो क्या वे बच्चे गोद लेने के बारे में सोचेंगे। उन्होंने वैसा ही जवाब दिया, यह कहते हुए कि वे बच्चों की परवरिश के साथ आने वाली जीवनशैली में बदलाव भी नहीं चाहते। “मैं उस ज़िंदगी के लिए नहीं बना हूं। अपनी ज़िंदगी शेयर करने के लिए। चाहे शादी हो या बच्चे। वह भी आपकी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल देता है।

आपके लिए जो चीजें ज़रूरी होती हैं, वे कम जरूरी हो जाती हैं, क्योंकि बच्चा सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। उस तरह के बदलाव ज़िंदगी में आते हैं… और अपनी ज़िंदगी में उस तरह के बदलाव करना मैं नहीं चाहता। मैं समझौता करने को तैयार नहीं हूं। मुझे नहीं लगता कि भविष्य में भी मैं ऐसा करने को तैयार होऊंगा।”

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ के बाद, अक्षय खन्ना ‘इक्का’ में नज़र आए। उनका अगला प्रोजेक्ट ‘महाकाली’ है, जो प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स का हिस्सा है। अक्षय इसमें शुक्राचार्य का किरदार निभा रहे हैं और इसकी पहली झलक 24 अगस्त, 2026 को दिखाई जाएगी।

1.6 करोड़ रुपये की नेटवर्थ देखकर आप भी होंगे हैरान, लेकिन 25 साल के इस युवा की असली टेंशन कुछ और है

25 साल की उम्र में जहां ज्यादातर युवा करियर की शुरुआत और कमाई बढ़ाने की कोशिश में जुटे होते हैं, वहीं एक टियर-2 शहर के युवा उद्यमी ने करीब ₹1.6 करोड़ की नेटवर्थ बना ली है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतनी संपत्ति बनाने के बाद भी उसकी चिंता खत्म नहीं हुई। अब उसका सवाल है- पैसा कमाने के बाद उसे सही जगह कैसे लगाया जाए और अगला लक्ष्य क्या हो?

18 की उम्र में शुरू हुई कमाई की कहानी

इस युवा की आर्थिक यात्रा 18 साल की उम्र में freelancing से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे उसने Instagram पर theme pages बनाए और इन्हीं पेजों को आगे चलकर अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस में बदल दिया। आज उसकी कमाई का मुख्य जरिया यही बिजनेस है। हालांकि, बिजनेस से होने वाली आय तय नहीं रहती और समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।

करोड़ों की संपत्ति, कई जगह फैला निवेश

Reddit के r/personalfinanceindia पर अपनी कहानी शेयर करते हुए 25 वर्षीय उद्यमी ने अपने निवेश का पूरा ब्योरा बताया। उसके पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय शेयरों का है। उसके मुताबिक, करीब ₹85 लाख भारतीय इक्विटी, ₹7.5 लाख अमेरिकी शेयरों और ₹5 लाख म्यूचुअल फंड्स में लगे हैं। इसके अलावा ₹5 लाख Sovereign Gold Bonds और ₹2 लाख Gold ETFs में निवेश किए गए हैं। रियल एस्टेट में करीब ₹15 लाख और क्रिप्टोकरेंसी में ₹3 लाख लगाए गए हैं।

₹40-45 लाख कैश में, लेकिन निवेश को लेकर उलझन

सबसे दिलचस्प हिस्सा उसके पास मौजूद नकदी है। करीब ₹40-45 लाख लंबे समय से बैंक अकाउंट में पड़े हैं। वह खुद भी मानता है कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ सेविंग अकाउंट में रखना शायद पैसे का सबसे बेहतर इस्तेमाल नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि वह सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करना चाहता कि पैसा कहीं लगा हुआ दिखे। वह ऐसी जगह तलाश रहा है, जहां जोखिम और संभावित रिटर्न उसके हिसाब से संतुलित हों।

अब लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं

युवा उद्यमी के मुताबिक, उसका अगला लक्ष्य बिजनेस को आगे बढ़ाने के साथ अपनी संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर फैलाना है। वह किसी एक बिजनेस या एसेट पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता। आखिरकार उसकी नजर FIRE यानी Financial Independence, Retire Early पर है। यानी वह ऐसी आर्थिक स्थिति बनाना चाहता है, जहां भविष्य में रोजी-रोटी के लिए काम करना मजबूरी न रहे।

₹1.6 करोड़ के बाद भी Reddit पर मांगी सलाह

अपनी स्थिति बताते हुए उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि अगर कोई 25 साल की उम्र में करीब ₹1.5-2 करोड़ की नेटवर्थ और ₹40-45 लाख कैश के साथ हो, तो उसे आगे किस दिशा में ध्यान देना चाहिए। पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प रहीं। कई यूजर्स ने उसकी उपलब्धि की तारीफ की और कहा कि वह अपनी उम्र के ज्यादातर लोगों से काफी आगे है। एक यूजर ने उसके काम के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह Instagram पर कई theme pages का मालिक है, जिनमें meme pages भी शामिल हैं।

लोगों ने दी निवेश से ज्यादा सुरक्षा की सलाह

कुछ Reddit यूजर्स का ध्यान उसके निवेश से ज्यादा insurance पर गया। एक यूजर ने term insurance बढ़ाने और पर्याप्त health insurance लेने की सलाह दी। साथ ही emergency fund तैयार रखने की बात भी कही गई। एक अन्य यूजर ने real estate में धीरे-धीरे कदम रखने और rental income बनाने का सुझाव दिया।

असली कहानी ₹1.6 करोड़ की नहीं, अगले फैसले की है

इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू सिर्फ यह नहीं है कि 25 साल की उम्र में किसी ने कितनी संपत्ति बना ली। असली सवाल यह है कि जब कमाई एक मुकाम तक पहुंच जाए, तो उसके बाद सही फैसले कैसे लिए जाएं?

8 इंटरव्यू में रिजेक्शन के बाद टेक प्रोफेशनल ने अपनाई ‘चीट शीट’ वाली तरकीब, फिर मिले 2 जॉब ऑफर

Bobby Deol: ‘मैं इससे बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रहा हूं’, ‘एनिमल’ और ‘आश्रम’ की सक्सेस के बाद विलेन रोल मिलने पर बोले बॉबी देओल

Bobby Deol: एक्टर बॉबी देओल अपने करियर की दूसरी पारी में हैं। 90 और 2000 के दशक में इस बॉलीवुड स्टार ने रोमांटिक हीरो समेत कई लीड रोल निभाए और खूब सफलता पाई। लेकिन पिछले दशक में उनकी वापसी के बाद से उन्हें ज्यादातर दमदार विलेन के रोल में देखा गया है। हाल ही में एक इंटरव्यू में बॉबी ने माना कि उन्हें एक ही तरह के रोल में बांध दिया गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे इस छवि को तोड़ने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

बॉबी देओल ने विलेन के तौर पर अपनी छवि में बंधे रहने पर बात की

शनिवार को दिल्ली में जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान बॉबी ने कहा कि उन्हें विलेन वाले रोल बहुत मिल रहे हैं, लेकिन वह इस छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। एक्टर ने कहा, “अगर कोई एक्टर किसी खास तरह के रोल में सफल हो जाता है, तो उसे वैसे ही रोल मिलते रहते हैं। इंडस्ट्री में ऐसा ही होता है।”

बॉबी ने प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ से वापसी की, जिसमें उन्होंने एक ठग और अपराधी का रोल निभाया, जो खुद को भगवान का दूत बताने वाला बाबा बनकर लोगों को धोखा देता था। इसके बाद उन्हें 2023 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘एनिमल’ में विलेन का रोल मिला। तब से, बॉबी ‘हरि हर वीरा मल्लू’, ‘कंगुवा’, ‘डाकू महाराज’, ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ जैसी फिल्मों में विलेन का रोल निभा चुके हैं।

‘मैं इसे तोड़ने की पूरी कोशिश करता हूं’

बॉबी ने कहा कि यह बहुत स्वाभाविक है कि जब कोई एक्टर किसी खास रोल में सफल हो जाता है, तो बाद में उसे उसी तरह के रोल मिलने लगते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि अब वह अलग-अलग तरह के प्रोजेक्ट्स करने की कोशिश कर रहे हैं। 57 साल के एक्टर ने PTI को बताया, “मैं उस छवि से बाहर निकलने की पूरी कोशिश करता हूं। मैंने हाल ही में ‘बंदर’ नाम की एक फिल्म की है, जो बहुत अलग थी। विलेन के रोल में भी अलग-अलग तरह के विलेन होते हैं, जिनके अलग-अलग शेड्स होते हैं। इसलिए मुझे ऐसे रोल निभाने में मज़ा आता है। मैं कुछ वेब सीरीज़ भी करने वाला हूँ जो अलग होंगी।”

अनुराग कश्यप की फिल्म ‘बंदर’ में उन्होंने एक उम्रदराज़ स्टार का रोल निभाया, जिस पर उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड ने रेप का आरोप लगाया था। यह फिल्म जून में सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और क्रिटिक्स ने इसकी तारीफ़ की थी। इस साल बॉबी के दो और प्रोजेक्ट्स – ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ – में भी उन्होंने विलेन का रोल निभाया।

बॉबी देओल की आने वाली फिल्में

बॉबी जल्द ही प्राइम वीडियो की सीरीज़ ‘तीन कौवे’ में नज़र आएंगे। इस स्पाई ड्रामा की शूटिंग अभी चल रही है और इसमें सिद्धांत गुप्ता, फातिमा सना शेख और पावेल गुलाटी भी अहम भूमिकाओं में होंगे।

पेंटागन में किचन कैबिनेट:अमेरिकी रक्षा मंत्री की पत्नी अटैक प्लान के लिए सीक्रेट मीटिंग में बैठीं, स्टाफ भी चुन रहीं

दुनिया का सबसे ताकतवर रक्षा मंत्रालय अमेरिकी पेंटगन किचन कैबिनेट (ताकतवर नेता के परिवार जन) में तब्दील हो गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की पत्नी जेनिफर हेगसेथ इन दिनों पेंटागन में सबसे प्रभावशाली सलाहकार की भूमिका निभा रही हैं। पत्रकार रहीं जेनिफर पति के इंटरव्यू की तैयारी, स्टाफ चुनने व रणनीति बनाने में मौजूद रहती हैं। उनकी भूमिका तब विवादों में आई, जब वे उस सिग्नल चैट मीटिंग में शामिल थीं, जिसमें यमन में अमेरिकी हमले की योजना साझा की गई थी। हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें सैन्य परिवारों से जुड़े मिलिट्री स्पाउस कमीशन का अध्यक्ष बनाया है। न्यूज चैनल में हेगसेथ के शो की प्रोड्यूसर थीं जेनिफर, यहीं हुई दोस्ती पीट-जेनिफर की दोस्ती 2014 में टीवी चैनल में हुई। तब पीट बतौर एंकर शो होस्ट करते और जेनिफर उनकी शो प्रोड्यूसर हुआ करती थीं। साथ काम करते-करते दोनों करीब आए और 2019 में शादी के बंधन में बंध गए। दोनों की ये दूसरी शादी है। पीट अक्सर कहते हैं कि ‘जीसस’ (ईश्वर) और ‘जेनिफर’ ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है। ऐसे बढ़ा जेनिफर का प्रभाव… जेनिफर का दबदबा तब और बढ़ा, जब वह मार्च 2025 में ब्रिटिश वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ एक बेहद गोपनीय बैठक में मौजूद थीं। उस वक्त अमेरिका ने यूक्रेन के साथ सैन्य खुफिया जानकारी साझा करना रोक दिया था। जेनिफर की मौजूदगी से असहज ब्रिटिश अधिकारियों ने संवेदनशील बातें रोक दीं। इसके बाद अलग से जेनिफर की गैरमौजूदगी में बैठक करनी पड़ी। पाबंदियां लगाईं जेनिफर ने मीडिया के प्रति कड़ा रुख अपनाया। फरवरी 2025 में पेंटागन ने ‘मीडिया रोटेशन प्रोग्राम’ लागू किया, जिसके तहत कई संस्थानों को पेंटागन के वर्कस्पेस से बाहर कर दिया। साथ ही, वे रक्षा विभाग के वीडियो-रील्स के जरिए सैन्य गतिविधियों को युवा, जेन-जी तक पहुंचाने की रणनीति में भी भूमिका निभा रही हैं। सैन्य अफसरों का भी इंटरव्यू ले चुकीं ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद जेनिफर ने रक्षा विभाग से जुड़े सैन्य अफसरों के 40-40 मिनट के लंबे इंटरव्यू लिए और मीडिया से निपटने की क्षमता पर तीखे सवाल पूछे। भूमिका पर सैन्य अफसरों ने उठाए सवाल हेगसेथ के साथ काम कर चुके पूर्व मुख्य प्रवक्ता जॉन उलीओट ने कहा, ‘किसी रक्षा मंत्री का अपनी पत्नी को गोपनीय सैन्य कर्तव्यों में शामिल करना और उस पर कोई कार्रवाई न होना हैरान करने वाला है।’ वहीं सीनेटर क्रिस कून्स ने कहा कि रक्षा मंत्री को मिली उच्च-स्तरीय सुरक्षा मंजूरी कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे वे अपनी पत्नी को सौंप दें।

ट्रम्प ने होर्मुज को फिर अमेरिकी इलाका बताया:ईरान बोला- दावा हकीकत से दूर, रेजाई ने अमेरिका पर बातचीत और वादे तोड़ने का आरोप लगाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘अमेरिकी इलाका’ बताया गया है। ईरान ने इस दावे को हकीकत से दूर बताया है। ट्रम्प ने पहली बार यही तस्वीर 18 अगस्त को शेयर की थी। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड की पुलिस अकादमी में उन्होंने कहा था, “बहुत जल्द मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का इलाका घोषित करूंगा।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब संघर्ष छह महीने पूरे होने के करीब है। ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ “अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव” का नया अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। अमेरिका ने आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई इस अभियान को “इकोनॉमिक डी-डे” नाम दिया गया है। इसका मकसद ईरान के बचे हुए आर्थिक सहारे पूरी तरह खत्म करना है। अमेरिका ने अपनी रणनीति सीधे सैन्य संघर्ष से हटाकर ईरान पर आर्थिक दबाव और उसे अलग-थलग करने की ओर कर दी है। ईरान के सुरक्षा अधिकारी बोले- कूटनीतिक तरीके में बदलाव जरूरी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा कि अमेरिका के वादों से पीछे हटने के बाद ईरान के कूटनीतिक व्यवहार में सुधार जरूरी है। ईरान के राष्ट्रीय टीवी पर प्रसारित इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका के साथ ईरान के कूटनीतिक व्यवहार में बदलाव की जरूरत बताई। रेजाई ने कहा, “पूरी दुनिया ईरान को एक नए नजरिए से देख रही है।” उन्होंने कहा, “कई बातचीत और अमेरिका की ओर से वादा तोड़े जाने के बाद, दुनिया के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के कूटनीतिक व्यवहार में सुधार होना चाहिए।” रेजाई ने आगे कहा, “युद्ध के तरीके में निश्चित रूप से बदलाव आएगा। अमेरिकियों ने बातचीत, कूटनीति और अपने हस्ताक्षर के साथ विश्वासघात किया है।” पेजेश्कियन बोले- मजबूत स्थिति में युद्ध खत्म करना सही इस्लामिक एसोसिएशन ऑफ ईरानियन मेडिकल कम्युनिटी की 31वीं आम सभा में पेजेश्कियन ने समझौता ज्ञापन (MoU) को “सम्मानजनक और मूल्यवान” बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में एकता के जरिए हुआ था। इसमें शामिल सभी लोगों ने मजबूती से इसका समर्थन किया था। पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान के मजबूत और ताकतवर रहते हुए युद्ध खत्म करना सही रास्ता था। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया ने ईरान की जीत को पहचाना है। उनके मुताबिक, नियमों का उल्लंघन कर स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे पर हमला करने के कारण दुनिया अमेरिका को “नफरत के लायक” मानती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान कभी आक्रामकता के सामने झुकेगा। पेजेश्कियन ने कहा, “हम कभी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हम अपनी आखिरी सांस तक खड़े रहेंगे और करारा जवाब देंगे।”

Shashi Tharoor: ‘जाति-वर्ग से ऊपर उठे कांग्रेस’, शशि थरूर ने CJP के आंदोलन से पार्टी को सीख लेने को कहा

Shashi Tharoor: कांग्रेस लीडरशिप जब OBC तक पहुंचने और जाति-आधारित प्रतिनिधित्व पर अपना ध्यान बढ़ा रही है, तब तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि पार्टी को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से सीख लेनी चाहिए और जाति-वर्ग से ऊपर उठना चाहिए।

News 18 के साथ एक इंटरव्यू में थरूर ने कहा, “मैं कुछ समय से यह बात कह रहा हूं कि हमें जाति, धर्म, पंथ, आदिवासी या किसी खास ग्रुप जैसे सीमित हितों से ऊपर उठने की जरूरत है। और इसके साथ ही, हमें उस क्षेत्र पर भी बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है जिसे हम नजरअंदाज करते रहे हैं – यानी आम भारतीयों, मिडिल क्लास भारतीयों, शहरी भारतीयों और प्रोफेशनल्स से उन मुद्दों पर बात करना जो जाति और धर्म से परे सभी भारतीयों को प्रभावित करते हैं।”

उन्होंने कहा, “चाहे परीक्षाओं का मुद्दा हो, जो हर किसी को प्रभावित करता है, महंगाई और बढ़ती कीमतें हों या शहरों की खराब होती नागरिक सुविधाएं, इन समस्याओं का सामना हर कोई रोज करता है। राहुल गांधी ने सही कहा है कि मिडिल क्लास के लिए शिक्षा अब महंगी होती जा रही है। हमें ऐसे मुद्दों को भी उठाना होगा, जो हर व्यक्ति को प्रभावित करते हैं, चाहे उसका धर्म या जाति कुछ भी हो।”

CJP के विरोध प्रदर्शनों पर थरूर ने News 18 से कहा, “CJP ने जंतर-मंतर पर क्या किया? उन्होंने एक ऐसा मुद्दा उठाया जिसका जाति, धर्म, भाषा, राज्य या पंथ से कोई लेना-देना नहीं था। और यही वजह है कि उन्हें हर तरफ से समर्थन मिला। सभी राजनीतिक पार्टियों को यही सीखने की जरूरत है। मेरा मानना ​​है – और यह मेरी निजी राय है, मैं किसी पार्टी की तरफ से या किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बोल रहा – कि यह एक ऐसा सबक है जिसे हम सीख सकते हैं।”

CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद अभिजीत दिपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक व्यंग्यात्मक आंदोलन शुरू किया था। इस पार्टी ने NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की, जिससे देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए और आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

जब थरूर से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि कांग्रेस को आधिकारिक तौर पर CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए था, तो उन्होंने कहा, “मैंने वकालत की थी कि हमें इसमें शामिल होना चाहिए। CJP के विरोध प्रदर्शन और सोनम वांगचुक के अनशन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था।”

थरूर ने News18 से कहा, “मुझे बताया गया था कि कांग्रेस के इसमें शामिल नहीं होने की वजह एक बेहद आपत्तिजनक पत्र था, जिसे CJP के नेतृत्व ने कांग्रेस पार्टी को लिखा था। उस पत्र में कुछ ऐसी बातें कही गई थीं, जिन्हें कांग्रेस ने अपमानजनक माना। इसलिए पार्टी ने खुद को इस प्रदर्शन से अलग रखना बेहतर समझा।”

उन्होंने आगे कहा, “आप इसे समझ सकते हैं, क्योंकि हर संस्था अपने हितों को ध्यान में रखती है। अगर कांग्रेस को लगा कि CJP एक संस्था के तौर पर उसके खिलाफ है या उसके प्रति उसका रवैया विरोधी है, तो कांग्रेस अपना नाम उनके आंदोलन के साथ क्यों जोड़ेगी? शायद यही इसकी वजह थी।”

यह भी पढ़ें: यमुना इवेंट केस में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ को बड़ी राहत, SC ने NGT का फैसला पलटा; ₹5 करोड़ लौटाने का आदेश

Awarapan 2 Budget vs Collection: 45 करोड़ के बजट में बनी ‘आवारापन 2’, इमरान हाशमी की फिल्म ने 3 गुना कमाया मुनाफा

Awarapan 2 Budget vs Collection: ‘आवारापन 2’ ठीक वही कर रही है, जिसकी उम्मीद इसके मेकर्स ने की थी – यानी लोगों को सिनेमाघरों तक वापस लाना। जबकि आपको जानकर हैरानी होगी कि रिलीज से पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस फिल्म में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इमरान हाशमी के लीड रोल वाली इस सीक्वल फिल्म ने शुरुआती दो दिनों में ही 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था, जबकि प्रोड्यूसर विशेष भट्ट का कहना है कि टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

कितना है फिल्म का बजट

जानकारी के मुताबिक फिल्म का बजट 30 से 45 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। हालांकि ये आंकड़े ऑफिशियल नहीं हैं। फिल्म प्रोड्यूसर विशेष भट्ट ने बताया थी कि उनकी फिल्म पर कोई भरोसा नहीं कर रहा था। हर किसी को फिल्म के फ्लॉप हो जाने का डर सता रहा था। टीम को इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाना पड़ा था।

फिल्म ने कितनी कमाई की

2007 की फिल्म ‘आवारापन’ बेशक बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी, लेकिन इसका म्यूजिक और कहानी आज भी लोगों के जुबान पर चढ़े हैं। इसी का फायदा ‘आवारापन 2’ को पूरी तरह से मिला है। सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक ‘आवारापन 2’ ने 21.50 करोड़ के नेट कलेक्शन के साथ ओपनिंग की थी। भारत में ग्रॉस कलेक्शन 25.80 करोड़ रुपये रहा था। जबकि वर्ल्डवाइड इस फिल्म ने 27.80 करोड़ से ओपनिंग की थी।

वहीं 8वें दिन फिल्म ने भारत में आठवें दिन 5.50 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की। इसके साथ ही, फिल्म का घरेलू नेट कलेक्शन 119 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन अभी 141.87 करोड़ रुपये है। फ़िल्म विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। आठवें दिन, ‘आवारापन 2’ ने विदेशी बाजार में 1 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिससे इसका इंटरनेशनल कलेक्शन 27.30 करोड़ रुपये हो गया। फ़िल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 169.17 करोड़ रुपये है, जो इसे 170 करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब ले आया है।

पहले दिन का कलेक्शन-22 करोड़

दूसरे दिन का कलेक्शन-33.75 करोड़

तीसरे दिन का कलेक्शन-26 करोड़

चौथे दिन का कलेक्शन-9.25 करोड़

पांचवें दिन का कलेक्शन-9.75 करोड़

छठवें दिन का कलेक्शन-6.75 करोड़

सातवें दिन का कलेक्शन-6 करोड़

आठवें दिन का कलेक्शन-5.75 करोड़

India Net (Sacnilk): 119.00 crore

India Gross (Sacnilk): 142.21 cr

Worldwide Gross: 169.17 crore

कितना कमाया मुनाफा

‘आवारापन 2’ ने 45 करोड़ के बजट के मुकाबले 74 करोड़ से 78.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट (164% से 175% रिटर्न) कमाया है, जो अपने एक बड़ा आंकड़ा है। फिल्म साल की तीसरी बिग ओपनर बनकर उभरी है। इससे पहले यशराज की ‘सैयारा’ और ‘धुरंधर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर तूफान लाया था।

यह फ़िल्म 14 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ से टक्कर के बावजूद अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रही। लेकिन रिलीज़ से पहले कहानी कुछ और ही थी। ‘ज़ूम’ के साथ एक इंटरव्यू में, विशेष भट्ट – जिन्होंने बिलाल सिद्दीकी के साथ मिलकर इस फ़िल्म की कहानी भी लिखी है – ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटर इस फ़िल्म को खरीदने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। उनके मुताबिक, दिलचस्पी न दिखाने की वजह से ही उन्हें नहीं लगता कि ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ जल्दी पैसे कमाने के मकसद से बनाई गई फ़िल्म है।

उन्होंने कहा, “अगर आप ‘आवारापन’ जैसी फ़िल्में देखना चाहते हैं, तो आपको सिनेमाघरों में जाकर उन्हें सपोर्ट करना होगा। वरना मुझे कैसे पता चलेगा कि आपको इसमें दिलचस्पी है? अगर मुझे पता होगा, तो मैं भी अपनी मेहनत की कमाई लगाकर फ़िल्म बनाऊंगा ताकि पैसे कमा सकूं। मैं आपको बता दूं, ‘आवारापन 2’ सिर्फ़ पैसे कमाने के लिए बनाई गई फ़िल्म नहीं है।”

शेयर बाजार के आने वाले हैं अच्छे दिन, एक्सपर्ट ने बताई इसकी तीन बड़ी वजहें

शेयर बाजारों का बुरा दौर खत्म हो चुका है। अब बाजार के अच्छे दिन शुरू होने जा रहे है। अल्फएक्युरेट एडवाइजर्स राजेश कोठारी का ऐसा मानना है। उनका कहना है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर्स से अगले 6 से 12 महीनों में बाजार को बड़ा सपोर्ट मिलेगा।

बाजार में तेजी के लिए ये तीन चीजें जरूरी

कोठारी की इस उम्मीद की वजह यह है कि जब ये तीनों चीजें एक साथ होती हैं तो कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है। बीते एक-दो साल में शेयर बाजारों की कमजोरी में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ का बड़ा हाथ है। हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। जून तिमाही में अर्निंग्स ग्रोथ में काफी इम्प्रूवमेंट दिखा है।

बाजार में तेजी के लिए दूसरी स्थितियां भी अनुकूल 

सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा, “जब कभी क्रेडिट, कंजम्प्शन और कैपेक्स की ग्रोथ एक साथ दिखती है तो कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट आता है।” हालांकि, शेयर बाजार का प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उनकी उम्मीद के पीछे सिर्फ एक यही वजह नहीं है।

क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से बाजार को मिलेगा सपोर्ट 

उन्होंने कहा कि बीते एक साल में बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली स्थितियों में अब बदलाव आ रहा है। इधर, वैल्यूएशन सही लेवल पर दिख रहा है। क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल 9-10 फीसदी थी, जो अब करीब 18 फीसदी पर आ गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्रेडिट साइकिल रफ्तार पकड़ रही है।

कंजम्प्शन पर बीते 4 सालों से दबाव दिख रहा था

कोठारी ने कहा कि कोविड के बाद से कंजम्प्शन बीते करीब 4 साल से दबाव में रहा है। अब स्थिति बदल रही है। कई कंज्यूमर कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे काफी बेहतर रहे हैं। कंजम्प्शन बढ़ने का सीधा संबंध कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ से है। इससे कंपनियों का अर्निंग्स साइकिल को लेकर भरोसा बढ़ता है।

कई बिल्डिंग मैटेरियल्स की मांग स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। उनका संकेत खासकर बिल्डिंग मैटेरियल्स पर था। हालांकि, वह अभी भी रियल एस्टेट को लेकर सावधानी बरतने के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगले दो से तीन साल में टाइल्स, सैनटरीवेयर, वायर्स और केबल्स की डिमांड स्ट्रॉन्ग रह सकती है। पिछले कुछ सालों में शुरू हुए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अब पूरे होने के करीब हैं।

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव 

बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का रिटर्न निगेटिव रहा है। निफ्टी में इस दौरान 2.49 फीसदी की गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 4.63 फीसदी गिरा है। बाजार को इस दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ ने माहौल खराब किया। फिर, इस साल फरवरी के आखिर में अमरिका और ईरान में लड़ाई शुरू होने से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Govinda: जब गोविंदा ने शाहरुख खान से लेकर आमिर तक के स्टारडम पर किया था कमेंट, यूजर्स बोले- सब टिके रहे…वे ही खो गए

Govinda: 1990 के दशक के मशहूर स्टार गोविंदा, जिन्होंने कभी शाहरुख खान और आमिर खान के स्टारडम पर तंज कसा था, पिछले एक साल से अपनी पत्नी सुनीता आहूजा के साथ चल रहे सार्वजनिक झगड़े की वजह से सुर्खियों में हैं। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और लगातार ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले सुपरस्टार गोविंदा के बारे में अब उनकी फिल्मों से ज़्यादा उनकी उथल-पुथल भरी शादीशुदा जिंदगी की चर्चा हो रही है। उनकी आखिरी फिल्म ‘रंगीला राजा’ 2019 में रिलीज हुई थी।

19 अगस्त को मामला तब बदला जब 59 वर्षीय सुनीता आहूजा ने पिछले साल दायर किया गया तलाक का केस वापस ले लिया है। खबर है कि 61 वर्षीय गोविंदा एक नई फिल्म पर काम कर रहे हैं, जिसमें उनके साथ काफी कम उम्र की एक्ट्रेस कोमल रानी स्वर्णकार हैं। लेकिन फिल्म से ज्यादा गोविंदा और कोमल के कथित अफेयर ने लोगों का ध्यान खींचा।

एक X यूजर ने 1990 के दशक में अपने करियर के पीक पर दिए गए गोविंदा के एक मैगज़ीन इंटरव्यू के दौरान किए गए बड़े-बड़े दावों को शेयर किया। इसमें गोविंदा ने कहा, “देखते हैं आमिर, सलमान, शाहरुख और अजय कब तक टिक पाते हैं!” इंटरव्यू के दौरान एक्टर ने यह भी कहा, “हिट देने के लिए मुझे श्रीदेवी या माधुरी की जरूरत नहीं है।”

गोविंदा ने अमिताभ बच्चन को भी नहीं बख्शा, जिनके साथ उन्होंने 1998 में ‘बड़े मियां छोटे मियां’ में काम किया था। एक और तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “अमिताभ ने भी पिछले दस सालों में कहां कोई हिट दी है?” जैसे ही X पोस्ट शेयर हुई, उस पर ढेरों कमेंट आने लगे।

एक यूजर ने लिखा, “सब टिके रहे, बस वो नहीं।” दूसरे यूजर ने लिखा, “घमंड अंधा कर देता है।”एक और कमेंट में लिखा था, “अति आत्मविश्वास से कुछ हासिल नहीं होता, भाई। देखो, अगर वो सुनीता के प्रति वफादार होता, तो कर्म का फल मिल जाता। ये सारे चिंदी खान उसके चमचे बनकर खड़े होते – अफसोस, बहुत जल्दी जाना पड़ा।”

एक और कमेंट में लिखा था, “वो एक बेहतरीन ऑल-राउंड एंटरटेनर थे। लेकिन उनका अहंकार और घमंड ही उनके पतन का कारण बना। वरना, उनके साथ काम करने वाले सभी अभिनेता उनके सामने फीके लगते थे। साथ ही, जब भी मुझे अवतार फिल्म के बारे में उनकी कही बात याद आती है, तो लगता है कि वो मानसिक रूप से बीमार हैं।”

एक और कमेंट में लिखा था, “उनका घमंड ही उनके पतन का कारण बना।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “एसआरके के 10वें मैनेजर के पास गोविंदा से भी ज्यादा पैसा है। अंत में केवल बुद्धिमान और विनम्र ही टिक पाते हैं।”

सलमान खान और गोविंदा के बीच अनबन की अफवाहें

इस पोस्ट में गोविंदा ने सलमान खान पर तंज भी कसा है। अगर आप फिल्म प्रेमी हैं, तो आप जानते ही होंगे कि दोनों के बीच ‘पुराना इतिहास’ रहा है। गोविंदा ने एक बार 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जुड़वा’ की कास्टिंग को लेकर चल रही चर्चाओं को हवा दी थी। एक पुराने इंटरव्यू में गोविंदा ने बताया था कि फिल्म की शूटिंग शुरू होने के बाद भी सलमान खान ने उन्हें सीधे तौर पर प्रोजेक्ट छोड़ने के लिए कहा था।

2019 में बॉलीवुड हंगामा को दिए एक इंटरव्यू में गोविंदा ने कहा था, “उस समय मैं ‘जुड़वा’ कर रहा था और किसी दिन सलमान ने मुझे 2-3 बार फोन किया और कहा कि ‘छीची भैया, आप कितनी हिट दोगे यार?'” मैंने बोला, क्या हुआ? वो बोला, ‘वो जो पिक्चर आप कर रहे हो, जुड़वा, वो आप बंद कर दीजिए और वो मुझे दे दीजिए।’

उन्होंने आगे कहा, “सलमान ने कहा ‘निर्देशक डेविड धवन भी आपको मुझे देना पड़ेगा। निर्माता साजिद नाडियाडवाला भी मैंने आपके साथ काम किया।’ निर्देशक और निर्माता। इसलिए फिल्म, जो पहले से ही निर्माणाधीन थी, रोक दी गई, बंद कर दी गई और अंतत सलमान को सौंप दी गई।”

गोविंदा और सुनीता आहूजा का उतार-चढ़ाव भरा रिश्ता

पिछले साल से ही गोविंदा और सुनीता के तलाक की खबरें ऑनलाइन चल रही हैं। कुछ महीने पहले सुनीता आहूजा के कुछ इंटरव्यू में अपनी निजी बातें बताने के बाद, गोविंदा और सुनीता के रिश्ते में खटास की अटकलें और तेज़ हो गईं। इन अफ़वाहों के बीच, ETimes की एक रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “सुनीता ने कुछ महीने पहले अलग होने का नोटिस भेजा था, लेकिन तब से इस मामले में कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई है।”

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि पिछले साल दोनों के बीच सुलह हो गई थी। हाल ही में, जब गोविंदा को एयरपोर्ट पर कोमल रानी स्वर्णकार के साथ देखा गया, तो सुनीता आहूजा ने उन पर तंज कसते हुए उन्हें ‘शुगर डैडी’ कहा। गोविंदा ने एक वीडियो मैसेज में सबके सामने सुनीता की ‘अपमानजनक’ भाषा के इस्तेमाल का जवाब दिया। गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी मार्च 1987 में हुई थी। दोनों ने 1988 में अपनी बेटी टीना के जन्म के बाद तक अपनी शादी की बात छिपाकर रखी थी। कई साल बाद, 1997 में उनके बेटे यशवर्धन का जन्म हुआ।

Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: ‘वंदे मातरम’ पर शर्मिला टैगोर की बात सुन भड़की कंगना रनौत, बोलीं- आपको एक बार पढ़ना चाहिए

Sharmila Tagore-Kangana Ranaut: अभी ‘वंदे मातरम’ के दो पद गाने के मौजूदा चलन के बजाय इसके छह पद गाने को लेकर राजनीतिक हंगामा चल रहा है। इसी मुद्दे पर दो अभिनेत्रियों के बीच बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर—जिनका रिश्ता राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ लिखने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से है—ने सुझाव दिया कि ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएं, क्योंकि बाद के पदों में दुर्गा और काली जैसे हिंदू देवी-देवताओं का ज़िक्र है, जिन्हें एक ईश्वर को मानने वाले लोग शायद स्वीकार न कर पाएं।

कंगना रनौत ने इस विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया और उनसे “हिंदू-मुस्लिम सोच” से आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने समझाया कि देवी-देवताओं का जिक्र रचनात्मक रूपक (metaphors) के तौर पर किया गया है, जिसका मकसद राष्ट्रीय शक्ति को जगाना है, न कि ये कोई धार्मिक आदेश हैं।

छह पदों में क्या कहा गया है? विवाद क्या था?

IANS के साथ एक इंटरव्यू में, अनुभवी एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लिखी कविता के सिर्फ दो छंदों (stanzas) को गाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में कई धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं और उन्हें कई देवी-देवताओं का नाम लेने में असहजता महसूस हो सकती है। उन्होंने बताया कि जो लोग कड़ाई से एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर में विश्वास) को मानते हैं, उनके लिए “वंदे काली, वंदे दुर्गा” जैसे वाक्यांशों का उच्चारण करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के सभी धार्मिक समुदायों को एकजुट करने के लिए, कविता के शुरुआती दो छंदों तक ही सीमित रहना सबसे समावेशी तरीका है।

कंगना रनौत ने क्या कहा

एक्टर और BJP की लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर तीखी आलोचना की, साथ ही यह भी कहा कि वह अब भी उन दिग्गज स्टार को व्यक्तिगत रूप से पसंद करती हैं और उनका सम्मान करती हैं। उन्होंने हैरानी जताई कि कोई कलाकार कविता को इतने शाब्दिक अर्थ में कैसे ले सकता है।

उन्होंने कहा कि गानों में शब्दों, कल्पनाओं और उपमाओं का मकसद भावनात्मक असर पैदा करना होता है, न कि धार्मिक क्रियाओं को ठीक-ठीक परिभाषित करना। उन्होंने तर्क दिया कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान बंकिम चंद्र का दुर्गा या शक्ति का ज़िक्र करना नागरिकों के भीतर आंतरिक उग्रता और शक्ति को जगाने के लिए एक काव्यात्मक आह्वान था। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उदाहरण दिय, जिसमें उन्होंने ऐसे युवाओं की ज़रूरत बताई थी जिनकी “नसों में बिजली दौड़ती हो”; उन्होंने कहा कि विवेकानंद मौसम का पूर्वानुमान नहीं दे रहे थे, बल्कि शक्ति की मांग कर रहे थे।

उन्होंने लिखा, “कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आएं। भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ऊर्जा को ‘शक्ति’ कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपना समझकर अपनाएं।”